मनुष्य परमेश्वर की उपस्थिति से भाग रहा है। (A Man Running From The Presence Of The Lord)

मनुष्य परमेश्वर की उपस्थिति से भाग रहा है। (A Man Running From The Presence Of The Lord)

मनुष्य परमेश्वर की उपस्थिति से भाग रहा है।

जैफरसनविले, इन्डियाना, यू. एस. ए.

65-0217

1आइये हम अपने सिरों को झुकाएं। प्रिय परमेश्वर, हम इस मध्यान्ह इस सुअवसर के लिए, आनन्दित हैं, कि हम अपने आप को एक बार फिर से आपस में जमा करने पाये हैं। और प्रभु, केवल आप ही जानते हैं, कि कैसे हमारे हृदयों में इस घड़ी के लिए प्रबल लालसा थी, कि जब हम आपके लोगों के सम्मुख एक बार फिर से यहाँ पर खड़े हो सकते हैं और इस सन्देश को लेकर आ सकते हैं, जिसके बारे में हम ऐसा बहुत ज्यादा अनुभव करते हैं, कि यह इस घड़ी के लिए नितान्त आवश्यक है। और प्रिय परमेश्वर, अब आप ही ने हमें ये कुछ दिन प्रदान किये हैं, और हम प्रार्थना करते हैं, कि हमारा मार्ग दर्शन व निर्देशन करने के लिए आपका अनुग्रह भरा हाथ हम पर होगा। और प्रभु, हमें वे वस्तुएं प्रदान कीजिए, जिनकी हमें आवश्यकता है, क्योंकि हमारे हृदयों में आपको और भी ज्यादा जानने की प्रबल इच्छा है।हम श्वेत पकी हुई फसल के एक बहुत बड़े खेत को देखते हैं, और हम जानते हैं, कि इस वक्त अनाज उस बड़ी कटनी के समय के लिए तैयार हो गया है। प्रिय परमेश्वर, हम प्रार्थना करते हैं, कि आप हमारे चारों ओर से छिल्लकें हटा देंगे, और होने पाये, कि हम इन अगले कुछ दिनों में पुत्र (S-O-N) की उपस्थिति में विद्यमान रहें, और परमेश्वर के राज्य के लिए पक जायें।2आप प्रत्येक उस गीत पर जो गाया जाता है, अपना आशीष प्रदान करें; प्रत्येक प्रार्थना को अपना आशीष प्रदान करें; और प्रभु, आप हर उस व्यक्ति को जो आप से प्रार्थना करता है, उसकी प्रार्थना का उत्तर दें। नाश हए सभी लोगों को बचायें। वे जो भटक कर दूर चले गये हैं, उन्हें जीवते परमेश्वर के भवन में वापस बुलाये, कि वे संगति करें।हे खुदा, हम प्रार्थना करते हैं, कि आप प्रत्येक उस बीमार व्यक्ति को जो हमारी छत के तले आता है, चंगा करें। प्रभु, आप यह प्रदान करें। होने पाये, कि इन सभाओं की समाप्ति तक हमारे मध्य में कोई बीमार या अपाहिज़ न रहें।और प्रिय परमेश्वर, हम जो इस घड़ी में खुद अपने लिए कलीसिया, बुलाये हुए लोग होने का दावा करते हैं, हम जो दावा करते हैं, कि हम वे लोग हैं। जो सारे संसार भर में से बाबुल में से बाहर निकल कर आये हैं, कि इस अंत के दिन में इस शानदार संगति के सहभागी हों, प्रार्थना करते हैं, कि परमेश्वर, आप हमारे ह्रदयों को इसी प्रकार से आशीष प्रदान करेंगे। प्रभु, हम सच में भूखे हैं, और हम ने खुद अपने को जगत की उन सारी बातों से जिन्हें हम जानते हैं, खाली किया हुआ है। प्रभु, हम ने हर एक उस बोझ को जो हमारे ऊपर सहजतापूर्वक रख दिया गया था एक ओर रख दिया है, और अब यह होने पाये, कि हम उस दौड़ को जो हमारे सम्मुख रखी गई है, धैर्यपूर्वक दौड़े। पिता, यह प्रदान कीजिए। और होने पाये, कि इस सभा के अंत पर हम उससे और ज्यादा बढ़े हुए, सशक्त और बेहतर मसीही हों, जब हम ने यहाँ अंदर प्रवेश किया था। होने पाये, कि सारी महिमा परमेश्वर को ही मिले, क्योंकि हम इसे यीशु के नाम में माँगते हैं। आमीन।3मैं सोचता हूँ, कि आज रात्रि यह वह महान सौभाग्य है, जिसकी मैंने कुछ समय से प्रतीक्षा की है। किसी दूसरे दिन मैं अपनी पत्नी को बता रहा था…मैंने उससे कहा था, “मैं इस टेबरनिकल में पहुँचने के इन्तज़ार में बहुत ज्यादा व्याकुल हो उठा हूँ।” मैं बस…वास्तव में संसार भर में मेरे और दूसरे मित्र भी हैं,

लेकिन जो यहाँ यह टेबरनिकल है, इसके विषय में तो कोई अलग ही बात है। जब परमेश्वर ने मुझे यहाँ पृथ्वी पर जीवन दिया, तो मुझे यहीं आसपास की ख़ाक में से बाहर निकाला गया; और मैं सोचता हूँ, कि अगर उसे आने में देरी हो जाती है, तो मुझे यहीं कहीं पर मिट्टी दे दी जायेगी, और जब वह आएगा, तो वह मुझे यहीं पर कहीं पायेगा।परन्तु देखिए, जब मैं जैफरसनविले के बारे में कुछ सोचने लगता हूँ, तो ऐसा लगता है, कि इसके विषय में कोई बात है। किसी दूसरे दिन मैं इतना अकेला सा पड़ गया था, कि मैंने अपनी पत्नी से कहा, “मुझे घर की याद आ रही है, और मैं नहीं जानता हूँ, कि क्यों मुझे घर की याद आ रही है, जब तक कि ये लोग न हों जो मेरे लिए प्रार्थना कर रहे हैं। मैंने कहा, ”अच्छा, मैं…तो केवल एक ही काम करना जानता हूँ, कि वापस जाऊँ, और कुछ दिन सभाएं करूं; और देखें, कि क्या हम परमेश्वर से कुछ पा सकते हैं, या नहीं; और हो सकता है, कि वह हम से यह चाहता हो, कि हम कुछ जाने ।“ और वह महान और अति आवश्यक विषय जो अब हमारे सामने है, वह ”विवाह और तलाक“ है। और अगर कोई प्रश्न है, तो उसका जवाब भी होना होता है। और जब तक उत्तर ही ना हो, प्रश्न हो ही नहीं सकता है। इससे कोई मतलब नहीं है, कि यह क्या है, उसका कोई उत्तर तो होता ही है। और यदि प्रभु की इच्छा हुई, तो मैं रविवार की सुबह उस पर बोलने की कोशिश करना चाहूँगा।4और इसके बाद मैं सोचता हूँ, कि कल रात्रि को हम यहाँ पर होंगे…वह स्कूल क्या कहलाता है? ( भाई नेविल कहते हैं, “पार्क व्यू ऑडिटोरियमसम्पा.) पार्क व्यू ऑडिटोरियम! श्रीमान वह क्या है? (भाई ब्रन्हम भाई नेविल से बातें करते हैं-सम्पा.) पार्क व्यू जूनियर हाई। कितने लोग जानते हैं, कि यह कहाँ पर है? खैर, मैं सोचता हूँ, कि वे लोग इसके लिए मार्ग निर्देशन-चिन्ह लगा देंगे; भाई, क्या वे ऐसा नहीं करेंगे? (”जी हाँ“) वह यहाँ से सिर्फ लगभग पौन मील दूरी पर ही है। और वहाँ पर एक मार्ग निर्देशन-चिन्ह लगा हुआ होगा। आप वहाँ से सड़क पर पीछे मुड़ना। यह बहुत ही शानदार और ऊँची इमारत है। इस में इतनी जगह है, कि आप अपनी बांहों को फैला सकते हैं, और आप जो लिखना चाहें, और आप उस पर लेख-टिप्पणियाँ और—और—बातें लिख सकते हैं। और मैं सुनिश्चित हूँ, कि आप उसका आनन्द इस स्थान से जहाँ आप इस टेबरनिकल में भिचे-भिचे से बैठे हैं, थोड़ा और ज्यादा ही लेंगे। वहाँ पर काफी ज्यादा जगह है, वहाँ पर मोटरगाड़ियों को खड़ा करने के लिए भी काफी जगह है।अब, मैं सोचता हूँ, कि उनका कोई एक छोटा सा कायदा-कानून है। जिसका पालन करने का हम ने वायदा किया है, और वह यह है, कि वहाँ पर मैदान में 6:30 से पहले नहीं जाया जाएगा। (भाई नेविल कहते हैं, “वहाँ पर 5:30 से पहले नहीं पहुँचा जायेगा”-सम्पा.)और किस समय?(छः तीस पर द्वार खुलेंगे) मैं सोचता हूँ, कि यह एक अच्छा विचार होगा, कि हम वहाँ पर 6:30 पर ही पहुँचें। अब देखिए, उनके पास यहीं इसी नगर में एक और सभागार है जिसमें बैठने की 6000 सीटें हैं। यदि हम इस बार वास्तव में भले बने रहते हैं, तो हो सकता है, कि वे हमें किसी समय एक बड़ी सभा के लिए उसे दे दें; हो सकता है, कि जब मैं विदेशी यात्राओं पर से लौटकर आऊँ, तो वे इन गर्मियों में उसे हमें दे दें।5और अतः मैं सोचता हूँ, कि हम वहाँ लोगों को बैठा सकते हैं….हम वहाँ पर कितने लोगों को बैठा सकते हैं? (भाई नेविल कहते हैं, कि हम चार हजार लोगों को बैठा सकते हैं-सम्पा.) चार हजार! अतः आप देखते हैं कि वहाँ पर हमारे पास लोगों को बैठाने के लिए काफी ज्यादा सीटे होंगी, और वहाँ पर कोई खचाखच भीड़-भाड़ नहीं होगी। और अतः आप वहाँ पर 6:30 पर पहुँचे। और तब हर कोई समय से अंदर आ सकता है, हर कोई एक साथ आ सकता है; और मैं सुनिश्चित हैं, कि आप के पास वहाँ पर बैठने का अच्छा खासा स्थान होगा। और उसका विकास इस प्रकार से ऊपर को किया गया है, कि वहाँ पर एक ऐसा स्थान है, जहाँ आप लिख सकते हैं, और लेख-टिप्पणियाँ तथा ऐसी ही और दूसरी बातें उतार सकते हैं। और अगर प्रभु की इच्छा हुई, तो वह शुरू होगी….अब, मैं सोचता हूँ, क्योंकि आज रात्रि बुद्धवार रात्रि है, इसलिए बुद्धवाररात्रि को प्रार्थना सभा होगी; हमारे पास है….यह स्थल तो लगभग भर चुका है, अतः मैं सोचता हूँ, कि हमारे लिए कल रात को ऐसा करना बेहतर हो। हमने उसे बस इस आशा में ही किराये पर लिया था, कि अगर यहाँ पर जरूरत से ज्यादा भीड़ हुई, तो हम वहाँ ऊपर जा सकते हैं। परन्तु मेरा यकीन है, कि यह ऐसा है.. को वहाँ पर जाना बहुत अच्छा रहेगा। भाई नेविल, क्या आप नहीं सोचते हैं, कि कल रात्रि को वहाँ ऊपर जाना बहुत अच्छा होगा? और कितने लोग सोचते हैं, कि यह एक बढ़िया बात होगी? और तब आप के पास काफी स्थान हो सकेगा। उसे पहले से ही किराये पर लिया जा चुका है; हमारी कलीसिया के कुछ भाइयों ने ही उसके किराये का भुगतान कर दिया है। हमारे लिए उसका किराया पचास डॉलर प्रति रात्रि है जो कि बहुत-बहुत….काश मेरे पास सभी जगह ऐसा स्थल होता, जहाँ हर एक रात्रि पचास डॉलर देकर इतने ज्यादा लोगों को बैठाया जा सकता; वह एकदम नई इमारत है; उस में एक शानदार मंच है, और….परन्तु हम….6मैं सोचता हूँ, कि हम सचमुच में दान लेंगे। और हम नहीं चाहते हैं, कि वे लोग खुद अकेले ही उस इमारत का किराया दें; हम इसके लिए उन्हें रूपया-पैसा वापस लौटा देंगे। परन्तु जब हम खर्चे की तथा ऐसी ही बातों की पूर्ति हो जाएगी; तो फिर ठीक है, कि हम वास्तव में हम चन्दा लेना बंद कर सकते हैं। हम नहीं…यदि हमारे साथ कोई अजनबी है, तो हम ने एक ऐसी योजना बनायी है, कि उन लोगों से कदापि कोई रूपया-पैसा न माँगा जाये; उन लोगों को रूपयापैसा देने के लिए कभी भी विवश न किया जाये। हम तो बस चन्दे की प्लेट घुमाते हैं, जो कि…है…यह तो बस एक धार्मिक कृत्य है। मैंने बहुत सी बार यह कोशिश की है, कि चन्दे की प्लेट को भी बिलकुल ना घुमाया जाये; परन्तु इससे काम नहीं चलता। समझे? क्योंकि दान देना तो हमारे धार्मिक-अनुष्ठान का ही भाग है। यह तो हमारे कर्तव्य का ही भाग है। इससे कोई मतलब नहीं है, चाहे यह दान दस कौड़ी या एक कौड़ी ही क्यों न हो….बस ऐसा किया जाए..अतः आप याद रखें, कि एक दिन यीशु ने गुजरते हुए उस विधवा को देखा, और उस धनी आदमी को देखा, जो अपने धन में से बहुत ज्यादा दान दे रहा था। और यह विधवा भी वहाँ से गुजरी, हो सकता है, कि उसके दो छोटे छोटे बच्चे भूखे ही उसके साथ साथ चल रहे हों, और उस विधवा ने अपने दान में अपना सब कुछ अर्थात् तीन कौड़ी डाल दिये। और यीशु ने कहा था, “किसने अधिक दान दिया?”7अब देखिए, अगर मैं वहाँ खड़ा हुआ होता, तो मैं कहता, “बहन, ऐसा न करो; हमारे पास…देखो, हमारे पास काफी ज्यादा रूपया-पैसा है।” लेकिन यीशु ने उसे कदापि नहीं रोका था। समझे? वह जानता था, कि उसके पास उस स्त्री के लिए आगे चलकर बहुत कुछ है। अतः देखिए, कुछ भी हो, उसके पास महिमा में एक घर था जहाँ वह जा रही थी। और यीशु ने उसे दान देने से कभी नहीं रोका था। यीशु ने तो उसे उसकी तीन कौड़ियाँ दान में डालने दी थीं, क्योंकि यही था वह जो वो करना चाहती थी। और यही था वह जो…एक विधवा ऐसा करना चाहती थी,

और वह एक ऐसी विधवा थी जिसके बच्चे थे, और उसके पास अपना जीवन निर्वाह करने के लिए के तीन कौड़ियाँ ही थीं। वह तो वैसा करना ही चाहती थी। अतः आप देखिए, कि जब लोग दान देना चाहते हैं, तो आपको उन्हें ऐसा करने के लिए मौका देना होता है।8परन्तु मैं उन लोगों बारे में सोचता हूँ, जो खड़े होकर यह कहते हैं, कौन है। वह जो पचास डॉलर देगा? कौन है वह जो बीस डॉलर देगा? मैं सोचता हूँ, कि ऐसे तो आपकी समझ पर वैसा करने के लिए जबरदस्ती एक फैसला थोप दिया जाता है। मैं..मैं सोचता हूँ, कि यदि लोग अनुभव करते हैं, कि किसी सभा को चलाने के लिए धन की आवश्यकता पड़ती है, और मैं उन्हें…उन प्रबंधकों को कदापि ऐसा नहीं करने दूंगा। मैंने कहा था, “जहाँ कहीं आपको ऐसा करना पड़ता है, तो फिर मेरे लिए यह समय होगा, कि मैं वापस टेबरनिकल लौट जाऊँ। अतः हम वैसा नहीं करेंगे।” परन्तु मैं..मैं..मैं सोचता हूँ, कि इसे पूरी तरह से धार्मिक सभा बनाने के लिए हमें दान पात्र घुमाना होता है।और अतः लोग शायद एक छोटी सी चन्दे की प्लेट हर रात को घुमायेंगे; और इसके लिए कुछ इस तरह से कहा जा सकता है, “ठीक है, अब हम चन्दा लेने जा रहे हैं।” और वे चन्दे की प्लेट घुमायेंगे, और उसके साथ ही सभा का भी समापन होगा।9और यदि प्रभु की इच्छा हुई, तो मैं हर रात को.. मैं सोचता हूँ, कि प्रभु ने मेरे हृदय में कलीसिया के लिए एक बहुत ही निश्चित सन्देश रखा है। मैं कई दिनों से प्रार्थना में रहा हूँ। अब मैं उस बात को बताने नहीं लगूंगा, क्योंकि उस दिन एक बड़ी ही जबरदस्त घटना घटी थी, सचमुच में वह एक बड़ी महान घटना थी। और मैं उसके बारे में आपको बताने के लिए बहुत ज्यादा उत्साहित हैं। और अब मैं सोचता हूँ, कि वहाँ सभा में “विवाह और तलाक” ही मुख्य विषय होगा— जिसके बारे में आप में से हर एक को सूचित कर दिया गया है; बिली ने लोगों को सूचित कर दिया है। यह एक बड़ा ही जबरदस्त विषय है। और मैं नहीं जानता था, कि इस विषय तक कैसे पहुँचू। और मैं इसके बारे में प्रार्थना करने के लिए ऊपर गया, और प्रभु ने मुझ से मुलाकात की। और मैं जानता हूँ, कि मैं…यह मेरा खुद का अपना नहीं है, मगर परमेश्वर ने ही इसे मुझे दिया है…लेकिन अब यह मेरे पास है। समझे? देखिए, परमेश्वर मुझे सही उत्तर दे चुका है। समझे? और मैं…मैं जानता हूँ, कि यह सच है।और अभी तक मैं बिलकुल ठीक ठीक नहीं जानता हूँ, कि मैं किस दिन इसका प्रचार करूंगा; हो सकता है, कि मैं अपनी बहनों से कहूँ, कि वे स्वयं को रविवार की सभा से अलग रखें। मगर मैं अभी नहीं जानता हूँ। यह इस पर निर्भर करता है, कि क्या शादी-शुदा स्त्रियाँ अपने अपने पति के साथ सभा में आना चाहती हैं। कुछ बहुत ही नितान्त आवश्यक बातें हैं जो उसके विषय में सत्य बतायी जानी हैं, और यह कैसे है, बताया जाना है…और अतः हम तो इसे पूरी तौर से “यहोवा यूँ फरमाता है, वाले वचन” के जैसे ही सामने रखना चाहते हैं; और फिर इसके बाद आप इसे समझ जाते हैं….तब फिर आप जान जाते हैं, कि सच्चाई क्या है। और ऐसा करने के लिए मैं खुदा पर ही भरोसा रख रहा हूँ।10और अब देखिए, किसी दिन मैं यहाँ ऊपर एक भोजनालय में भोजन करने के लिए बैठा हुआ था….और जैरी तथा वे सब लोग आपको देख रहे थे। उन्होंने कहा था, “अच्छा हम…”कुछ लड़के वहाँ ऊपर थे, और उन्होंने कहा था, इस वाले व्यक्ति ने कहा था, “मुझे इस सप्ताह यहाँ पर आकर बड़ा ही अच्छा लगेगा।” बोला, “उन के पास हैं…ये दो आगामी सप्ताह…”बोला, “उनकी यहाँ पर बास्केटबॉल के मैदान में या, कहीं और सभाएं होनी हैं। ब्रन्हम लोगों की वहाँ पर सभाएं होने जा रही हैं। और वह बोला, ”और मैं उन सब लोगों को भोजन कराऊँगा।“ ऐसा रेन्च हाऊस में हुआ था; यह वहाँ के उन स्थलों में से एक है; और वे लोग सचमुच में बहुत ही भले लोग रहे हैं।और मैं आप सब की सराहना करता हूँ, क्योंकि वे निश्चित रूप से आपके विषय में बड़ी बड़ी बातें करते हैं और आपके विषय में प्यारी प्यारी बातें करते हैं।वहाँ पर किसी दूसरी सुबह रेन्च हाऊस के प्रबंधक ने मुझ से मुलाकात की थी। और मैं एरिजोना से आकर उसके अंदर लगभग2:30 पर गया था; और उस ने कहा था, “अच्छा भाई ब्रन्हम, मैंने सुना है, कि आप एक और सभा करने जा रहे हैं।” बोला, “और मेरे पास आपके लिए कुछ अतिरिक्त सहायता है। और बोला, ”इसके बाद मैं एक बात कहना चाहता हूँ, कि वे लोग जो वहाँ नीचे से आपकी सभाओं में आते हैं, वे सचमुच में बहुत अच्छे लोग हैं।“ अब देखिए, आपके बारे में मुझे बड़ी ही अच्छी सी अनुभूति होती है, क्योंकि कुछ भी हो आप मेरे बच्चे (kids) हैं, बल्कि मेरे निज बच्चे (children) हैं। और ”बच्चा“ (Kid)शब्द तो बकरी के सन्दर्भ में प्रयुक्त होता है, परन्तु आप बकरी नहीं हैं। आप तो मेरी भेड़े हैं। ऐसा कैसे हैं? आप तो परमेश्वर की वे भेड़े हैं जिन्हें उस ने मुझे भोजन खिलाने के लिए दिया है। और मेरा भरोसा है, कि वही मुझे ऐसा करने देगा। और हम मार्ग पर आगे बढ़ते चले जा रहे है….11और “विवाह और तलाक” के बारे में यह बात है; कि मैं इस पर उन सात मोहरों के समय से ही बोलना चाहता था। आप जानते हैं, कि सारे भेदों का उन में खुलासा हो जाना चाहिए…बाइबिल के सारे भेदों का प्रकटीकरण उन सात मोहरों के खुलासे में प्रकट हो जाना चाहिए। और अब मैं सोच रहा हूँ….मैं एक प्रकार से बूढ़ा होता चला जा रहा हूँ; मैं सोचता हूँ…मैंने सोचा था, कि बेहतर यही होगा, कि मैं कम से कम इसे टेप कर दें ।अगर मुझे कुछ हो जाये, तो कलीसिया हैरत करेगी, “आश्चर्य होता है, कि उसके मस्तिष्क में क्या था, वह क्या कहता?” और ये सारे विषय कठिन प्रतीत होते हैं, लेकिन मैं सोचता हूँ, कि प्रभु की सहायता से मैं उन्हें आपको समझाने का यत्न करूंगा। और फिर अगर इसके बाद कुछ घटित हो जाता है, या यदि ऐसा होता है, कि उसके आने से पहले ही मैं चला जाता हूँ, तो यह आपके…आपके पास टेप पर तो होगा।12मैं सोचता हूँ, कि हमारे पास छपी हुई कुछ नई पुस्तकें हैं। मैं बहन वेयले को देखता हूँ। मैं नहीं जानता हूँ, कि डॉक्टर यहाँ पर हैं, या नहीं। बहन वेयेल, क्या वे यहाँ पर हैं? वे शायद सभा में हैं, परन्तु मैं उन्हें नहीं देखता हूँ, परन्तु…ओह, जी हाँ, वे वहाँ पीछे हैं। और भाई वेयले ने एक किताब लिखी है, और यह है…मैंने सोचा था…मेरा यकीन है, कि उन्होंने मुझे आज ही बताया था, कि उन्होंने दो पुस्तके लिखी हैं। भाई वेयले, क्या यह सही है; क्या अब आप के पास दो किताबें हैं? दो किताबे हैं। अब, मैं नहीं जानता हूँ मैं…जैसाकि मैं समझता हूँ, हर किसी को उस की एक कॉपी मिलती है। अतः मैं…यदि आप को…मैं इसके बारे में इसी तरह से समझता हूँ। हो सकता है, कि मेरा सोचना गलत हो।और इसके बाद यह है, कि “सात कलीसियायी कालों” की पुस्तक पर काम खत्म हो चुका है…क्या यह सही है, भाई वेयले? और अब उसकी छपाई हो रही है। और मैं जानता हूँ, कि आप उसे लेना चाहते हैं, क्योंकि वह उन बहुत से प्रश्नों कर उत्तर देती है जो आप के मनों में रहे हैं। और आप जानते हैं, उसके तत्पश्चात् हम सात मोहरों के प्रकटीकरण को पुस्तक के रूप में संकलित करने का यत्न करेंगे, ताकि आप में से हर कोई उसे पुस्तक के रूप में पढ़ सके-वे जो इसे पढ़ना और समझना चाहते हैं, इसे पुस्तक के रूप में पढ़ सकें।13मैं सोचता हूँ, कि जब यह लिख ली जाती है…सर्व प्रथम हम इसे टेप से वैसा ही उतारते हैं जैसा इसे लिखा या बोला गया है। और आप जानते हैं, कि आप एक उपदेश का प्रचार कर सकते हैं, यह एक बात होती है। और उसके बाद उसे पुस्तक के रूप में लिखना एक अलग बात होती है। देखिए, जिससे आप इस बात को समझ जायें, मैं आप से यह कहूँगा, कि जैसे मैं किसी एक विषय को लेता हूँ-मैं यूँ कहूँ, कि “अब, हम सर्पवंश पर बोलेंगे…”समझे? जो उस पुस्तक के पढ़ने वाले हैं, अगर वे उस में से सिर्फ उस सर्पवंश विषय को ही लें, तो वे आश्चर्य करेंगे, कि यह सर्पवंश क्या है? समझे? और वे इसे नहीं जानेंगे। यदि ऐसा होता है, कि वह ऐसे स्थान में जैसे प्रिन्सटोन या ऐसी ही किसी जगह जायें, तो लोग सोचेंगे, कि हम तो मूर्ख लोग हैं। इसी लिए मैं ने भाई वियले से इस पर एक प्रकार से सहायता ली, कि वे बोले गये विचार की ठीक वही लाइन रखकर उसे सही व्याकरण में सुव्यवस्थित करें। और मैं सुनिश्चित हूँ, कि मेरी व्याकरण उन लोगों के लिए पर्याप्त भेद ही होगी।

अतः भाई वियले उस पर सचमुच में बहुत अच्छे से काम कर रहे हैं; अतः वे एक ऐसे हैं, जो…14और फिर मैं उसके विषय में सोचता हूँ, कि हमारे अमूल्य भाई ने अवश्य ही कुछ भी हो अतिरिक्त प्रेरणा ली है; और उन्होंने कहा था, कि वे उन जैसी पुस्तकों में से ही अपनी कुछ पुस्तकें लिखने जा रहे हैं। और इस प्रकार उन्होंने एक पुस्तक लिखी; मेरा विश्वास है, वे उसे “बीसवीं शताब्दी का भविष्यद्वक्ता” कहते हैं; और मेरा विश्वास है, कि दूसरी पुस्तक का नाम “लौदीकियायी काल” या कुछ ऐसा सा ही नाम है।और मैं सोचता हूँ, कि बिली ने मुझे आज रात बताया था, कि उन में से कई हजारों प्रतियाँ आज ही पहुँची हैं; कोई उन्हें टेक्सस से लेकर आया है। और वे पुस्तकें यहाँ पर होंगी। और मैं सोचता हूँ, कि ये पुस्तक जो कुछ भी हैं, वे इनके बारे में उद्घोषणा कर देंगे। मैं सोचता हूँ, कि उन्होंने इन्हें प्रायोजित किया है, लेकिन मैं इस बात में सुनिश्वित नहीं हूँ। और अगर उन्होंने इन्हें प्रायोजित किया है, तो वे पुस्तकें आपको भी मुफ्त दे दी जायेंगी। और हमें आशा है, कि आप इन का आनन्द लें, और अगर आप इनका आनन्द लें, तो आप भाई वियले से हाथ मिलायें और उन्हें बतायें, कि आप इसकी कितनी सराहना करते हैं। मैंने स्वयं उसे कभी नहीं पढ़ा है। यदि मैंने उन्हें पढ़ा होता, तो मैंने उसके विषय में अपना विचार बदल लिया होता। अतः इस सप्ताह जबकि मुझे अवसर मिलता है, तो मैं उसे पहूँगा, यदि मैं पढ़ सकता हूँ।15अब, चूंकि कल रात्रि बुद्धवार रात्रि है, अतः कार्यकारणी तौर पर हमारी सभा कल रात्रि ही आरम्भ होगी। लेकिन मैं सोचता हूँ, चूँकि मैं यहाँ पर आपके मध्य में हैं, अतः मैं…मैं…मैं बस घर में ही नहीं रुका रह सकता था, जबकि मैं जानता हूँ, कि आप सब यहाँ पर हैं। मैं..आप जानते हैं, कि जैसे कि आपके कुटुम्बी आपके पास आते हैं, तो आप दूसरे छोर तक दौड़ कर उन से मिलने के लिए जाते हैं। और मैंने बस यह सोचा था, कि मैं दौड़ कर नीचे जाऊँगा, और….और आपका जैफरसनविले में स्वागत करूंगा। और अतः इस सप्ताह मैं….में था…लगभग..जी नहीं, मुझे क्षमा कीजिए, मैं लगभग तीन सप्ताह पहले घर लौटकर आया, मैं वापस आने का यत्न कर रहा था….मैं कुछ सभाओं के लिए ऐरिजोना गया हुआ था। और मैं विश्राम करने की चेष्टा करने के लिए वापस आया, और मैं शिकार के एक दौरे पर गया, और मुझे..मुझे ऐरिजोना प्रान्त का रिकॉर्ड सिंह मिला, मैंने उसे पाने के लिए उसे जंगल में बीस मील दौड़ाया।।16परन्तु हालांकि मैंने इसके बारे में कदापि नहीं सोचा था; जब मैं एक छोटा लड़का था; लेकिन तब ऐसा सोचना…मैं ये आपको यह दिखाने के लिए बतला रहा हूँ, कि कैसे ये बातें घटित हुईं। तब परमेश्वर ने हमें वहाँ ऊपर एक छोटी सी जगह दी थी, जहाँ हम कई महीनों के लिए बाहर थे, और स्कूल जाने के लिए हम बच्चे ही थे। मैं एक छोटा लड़का सा ही था..मैं सोचता हूँ, कि आज रात जिम पूल यहाँ पर हैं। हो सकता है, कि उसके पिता बिग जिम पूल यहाँ पर हैं। हम दोनों साथ साथ स्कूल जाया करते थे। और मैं बैठा हुआ याद कर रहा था, कि एक छोटा सा लड़का फटे पुराने कपड़े पहने हुए और जूते—टेनिस वाले जूते पहने हुए होता था; और उसके पंजे जूतों में से बाहर निकले हुआ करते थे; और वह किसी एक से पेन्सिल और किसी दूसरे से कागज माँगा करता था…मैं कविता लिखा करता था। आप जानते हैं, कि श्रीमती वुड़ ने मेरी वह कविता जो कि पुरानी फोड़ पर थी, यहाँ पर मध्यान्ह में सुनायी थी, जो कि टेप पर है…और यह एक सुन्दर कविता है। अब…उन्होंने कहा था, “ठीक है, हमें इसे श्रीमान फोर्ड के पास भेज देनी चाहिए।”मैंने कहा, मैं सोचता हूँ, कि इसमें बहुत ज्यादा सच्चाई है। जो झुनझुनाआगे को लगा हुआ था, और एक ग्राइड गेयर में था; और गेयर को हिलाने के लिए जो चाइनीज़ पहेली थी, उसके बारे में ही यह थी..परन्तु मैं…यह है..यह है एक…परन्तु मैंने हमेशा ही कहा था, कि केवल एक ही काम था जो मुझे करना होता था, कि मुझे गाड़ी के चारों पहिये गिनने होते थे और गाड़ी को चलाना शुरू करने के लिए उसे काफी झंझोड़ना पड़ता था, और उसके बाद मैं उस में घुस जाता था। मैंने कहा था, मैं उससे पहाड़ पर चढ़ना शुरू करता था, तो यह काफी अच्छी होती थी; मैं यह कहता हुआ, कि “मैं सोचता हूँ मैं कर सकता हूँ; मैं सोचता हूँ, मैं कर सकता हूँ; मैं सोचता हूँ, मैं कर सकता हँ”, बड़े ही धीरे धीरे उसे धकेलता हुआ सा जाता था; और इसके बाद दूसरी तरफ फिर से यह कहता हुआ जाता था, “मैं ने सोचा था, मैं कर सकता था; मैंने सोचा था, मैं कर सकता था।” समझे? इस प्रकार हम “तरक्की करते जाते हुए यात्री” के जैसे पहाड़ को पार करते। अतः हम…17मेरे पास एक छोटी कविता थी जो इसी प्रकार की किसी चीज के ऊपर लिखी गयी थी। और उस में कहा गया था….अब, आप ज़रा सोचिए, कि तब मैं केवल लगभग बारह वर्ष का ही था। और किसी दिन मैं वहाँ ऊपर खड़ा हुआ उस केनयन पर दृष्टि डाल रहा था, और सोच रहा था, कि शेर इस डेन रूम में बैठा हुआ खिड़की में से शीशे की खिड़की में से देख रहा होगा—मैं बस एक छोटी सी कविता सोच रहा था। मैं वापस गया, और इसे उठाया, और मैंने ऐसी ही किसी चीज को उठाया।ज़रा सोचिए, कि कैसे परमेश्वर…क्या आप सोचते हैं, कि परमेश्वर इन सारी प्रेरणाओं में है? (सभा कहती है, “आमीन-सम्पा.) परमेश्वर को एक गीत लिखना होता है। क्या आप विश्वास करते हैं, कि परमेश्वर गीतों में है?(”आमीन“) यीशु ने ऐसा ही कहा था। उसने वापस दाऊद का हवाला देकर कहा था, ”क्या तुम नहीं जानते, कि दाऊद ने अपने भजनों में क्या कहा था? क्या तुम नहीं जानते हो, कि…क्या नहीं है…“.आप ठीक उस सलीबी मौत पर दृष्टि डालें। दाऊद ने इसे 22वें भजन में गाया था। “हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया है? वे मेरी सारी हड्डियों को घूरते हैं। उन्होंने मेरे हाथ और पाँव बेध डाले हैं। और आप जानते हैं, कि वह एक भजन या गीत था। भजन एक गीत ही तो है।18और आप इस कविता पर ध्यान दें, कि यह कैसे साकार होती है। माँगे हुए कागज के टुकड़े पर एक छोटा सा लड़का इस कविता को इस प्रकार से लिखता है। मैंने कहा:अकेला हूँ मैं, ओह, अकेला हूँ मैंहूँ मैं उस सुदूर दक्षिण-पश्चिम से जो है बहुत दूर गिरती हैंजहाँ गहरी परछाइयाँ पहाड़ोंके दरों पर देख सकता हूँ,घात लगाये बैठे भेड़िये को बैंगनी धुंधमें लगाये बैठा है घात जो सुन सकता हूँ ।उस चीत्कार को करता है जो ऊँची-ऊँची घासों में लोबोऔर कहीं दर्रे पर सुन सकता हूँमैं सिंह की रुद्र दहाड़,गूंजती है जो ऐरीजोना मेंकैटीलिना पहाड़ पर।19उसके चालीस वर्ष के बाद मैं वहाँ पर उसी खाई में बैठा हुआ था और वह सिंह मेरे सम्मुख खड़ा हुआ मुझे देख रहा था। ओह, मेरे खुदा! ओह, मित्रों, नदी के पार कहीं न कहीं कोई देश है। उसे तो बस वहाँ पर होना ही है। समझे? इसके बारे में कहने के लिए बहुत सी बातें हैं। ये सब बातें कोई मन-गढ़त बातें नहीं हैं, ये बातें तो हकीकत हैं। वे तो वास्तविक हैं। मैं खुश हूँ, कि आज रात्रि मैं यहाँ पर उन लोगों के साथ हैं, जिनके साथ मैं वहाँ पर हमेशा हमेशा के लिए जीने की आशा कर रहा हूँ, जहाँ ना तो कोई बीमारी, ना मृत्यु, ना पृथक्करण होगा। और तब हमारे लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना कुछ भी नहीं होगा।20अब, मैं सोचता हूँ, कि बिना वचन के पढ़े, कोई भी सभा पूरी नहीं होती है, और अब मेरे पास एक छोटा सा …है…भाई नेविल, मैं तो बस यहाँ आया ही हूँ। बिली ने मुझ से कहा था, कि आप मुझसे यह चाहते हैं, कि मैं बोलू। भाई नेविल, कया यह सही है? (भाई नेविल कहते हैं, “आमीन! जी हाँ, निश्चय ही”- सम्पा.) जी हाँ! हो सकता है, मैं इस प्रदान किये गये समय से थोड़ा अधिक ले लूं, लेकिन मुझे..मुझे तो इसके विषय में बहुत अच्छा लगा है।(ठीक है, आमीन! आप यकीनन, ऐसा ही करें) अब, अतः जिनके पास गीत तथा दूसरी बातें हैं, देखिए— भाई नेविल, आप देखिए, कि जब आप गीत गाने जा रहे होते हैं, तो आप उसे यहाँ पर गाते हैं, और तब आप गीतों पर सभा का आरम्भिक आधा घन्टा व्यय करते हैं, लेकिन अब आइये हम सीधे ही इन अति गूढ़ सन्देशों में चलें और देखें, कि क्या हम वह देख सकते हैं जो प्रभु करेगा। और मैं सिर्फ भरोसा कर रहा हूँ।21मैं..मैं विश्वास करता हूँ, कि हमारे पास सत्य है। मैं उससे सन्तुष्ट हूँ। मैं विश्वास करता हूँ, कि छिलका गेहूँ से पूरी तौर से अलग होता चला जा रहा है। क्या आप इसे जानते हैं? और देखिएगा, हो सकता है, कि कल रात मैं इस पर कुछ आरम्भिक बातें बताऊँ, कि किस प्रकार से छिलका गेहूँ से अलग हो रहा है। परन्तु गेहूँ को पकने(परिपक्व हो जाने) के लिए पुत्र (Son) की उपस्थिति में पड़े रहना होता है। और मित्रों, इसीलिए ही हम यहाँ पर हैं, कि आप पुत्र की उपस्थिति में तब तक बने रहें जब तक कि यहाँ पर हमारे लोगों का छोटा सा झुंड़ मसीह के लिए इतना अधिक ना पक जाये, कि वह उसकी मेज़ की रोटी बन जाये, और यही है वह जो मैं चाहता हूँ, कि यह करे।अब कविता कहने और दूसरी बातों को कहने के उपरांत इससे पहले कि हम वचन की ओर चलें; आइये हम फिर से प्रार्थना करें, और इसके बाद हम एक मूल पाठ लेंगे।

22प्रिय यीशु, जबकि हम आपकी बाट जोहते हैं, आप आज रात्रि हमारी इन थोड़ी सी बातों में सहायता करें। और प्रभु, हम प्रार्थना करते हैं, कि आप का अनुग्रह व करूणा हमारे साथ हो; और आप हमारे हृदयों को मुलायम करें। प्रभु, आप हमारे से सारा भूसा, काँटे और ऊँटकटारे हटाकर दूर कर दें, और प्रभु होने पाये, कि परमेश्वर के मुबारक सूर्य का उजाला वचन के ऊपर पड़े। और होने पाये, कि हमारी एक इतनी जबरदस्त सभा हो, कि हमारे मध्य में एक भी व्यक्ति ऐसा न रहे जो उद्धार पाया हुआ ना हो। परन्तु सभी बच्चे परमेश्वर के राज्य के अंदर हों। पिता, जो बिना पवित्र आत्मा के बपतिस्मे के हैं, होने पाये, कि वे इसे पायें । प्रभु, होने पाये, कि वे सारे महान भेद जो हमें इस काल में जानने हैं, हमारे ऊपर खोले जायें, और हम परमेश्वर की स्पष्टता देखें, ताकि हम जान जाएं, कि हमें कैसा आचरण-व्यवहार और कार्यकलाप करना है। और हम स्वयं अपने को सुधारें, और हम अपनी देह के अंगों को वचन की आज्ञाकारिता में लेकर आयें; ताकि हम जान सकें, कि हमें इस वर्तमान दिन में—प्रभु यीशु के आगमन की नज़दीकी के समय में कैसे जीवन व्यतीत करना है।प्रभु, जैसाकि मैं आपका वचन पढ़ता हूँ, हो सकता है, कि मैं अपनी अपर्याप्त शिक्षा के द्वारा कुछ शब्दों को तो ठीक से पढ़ सकें; और हो सकता है, कि कुछ का सही ढंग से उच्चारण न कर सकें। परन्तु प्रभु परमेश्वर, आप ही एक ऐसे हैं, जो इस में से एक मूल पाठ बाहर निकाल सकते हैं। केवल आप ही एक ऐसे हैं। जो ऐसा कर सकते हैं। मनुष्य के पास तो कभी भी ऐसा करने का कोई तरीका नहीं रहा है; प्रभु, ऐसा करना तो सिर्फ आप के ही हाथों में है। अतः प्रभु, आप ही हमें हर एक रात्रि को वे बातें प्रदान करें जो आपके वचन में छिपी हुई हैं, ताकि हम और भी ज्यादा बेहतर मसीही बन सकें, और उस समय के अनुसार जीवन व्यतीत कर सकें, जिसमें हम रह रहे हैं..और हम मसीहियत की मिसाल के रूप में जीवन जी सकें। हम इसे प्रभु यीशु के नाम में माँगते हैं। आमीन!23अब, मैं आप में से बहुतेरों में से यह चाहता हूँ, कि आप अपनी अपनी बाइबिलों में से योना की पुस्तक निकाल लें। ऐसा है कि…हम सदैव ही योना के बारे में बहुत ज्यादा बातें करते हैं, कि वह विश्वास में पिछड़ गया था, और हम उसके लिए ऐसी ही और दूसरी बातें करते हैं। मैंने हमेशा ही योना का पक्ष लिया है। मैं यह विश्वास नहीं करता हूँ, कि योना विश्वास में पिछड़ गया था। मैं..मैं इसका विश्वास नहीं करता हूँ। मैं विश्वास करता हूँ, कि यह तो बस वो है जिसका हम कभी कभार उपयोग करते हैं; और कहते हैं, “वो एक योना था।” परन्तु यदि हम..मैं इस पर पहले ही किसी दूसरे दृष्टिकोण से बोल चुका हूँ, जिसमें मैंने बताया था; कि कैसे मैंने सोचा था, कि योना के साथ क्या क्या हुआ था।यहोवा का यह वचन अमित्रै के पुत्र योना के पास पहुँचा।उठकर, उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरूद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है।परन्तु योना यहोवा के सम्मुख(उपस्थिति से तर्शीश को भाग जाने के लिए उठा, और योपा नगर को जाकर तर्शीश जाने वाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया, कि उन के साथ होकर यहोवा के सम्मुख(उपस्थिति) से तश को चला जाये।क्या यह एक दुखद अंत नहीं है? “मनुष्य परमेश्वर के सम्मुख (उपस्थिति) से भाग रहा है; और यही मेरा विषय है।24अब, सबसे पहले हम इस पर विचार-मनन करना चाहते हैं। योना था…मैं सोचता हूँ, कि वह कारण…वह मुख्य कारण जिसकी वज़ह से उसने यहाँ ऐसा बड़ा काम किया था, वह यह था-क्योंकि वह एक यहूदी था, और उसे अन्यजाति के नगर में जाकर उसके विरूद्ध ऊँचे स्वर से बोलने के लिए कहा गया था। और वह सोच रहा था, कि वह नगर उसे ग्रहण नहीं करेगा; क्योंकि अन्यजातियों के लोग सोचेंगे, “इस यहूदी का हम से क्या काम?” परन्तु आप देखिए, कि यहाँ पर एक और महान बात है जो हमें देखने को मिलती है, कि परमेश्वर ना केवल यहूदियों का ही परमेश्वर है, बल्कि वह तो अन्यजातियों का भी परमेश्वर है। वह तो सब लोगों का परमेश्वर है।25उस ने तो बस यहूदियों को चुना। यहूदी परमेश्वर के चुने हुए लोग कहलाये गये। वे किसी एक विशेष कारण के लिए चुने गए थे। और वह कारण यह था, कि उन्हें व्यवस्था दी जाये। और वे उसका पालन नहीं कर सके थे। और परमेश्वर ने उन लोगों के द्वारा यह दिखाया, कि व्यवस्था का पालन नहीं किया जा सकता। और ऐसा है, कि वह धार्मिकता का परमेश्वर है….व्यवस्था की माँग तो धर्मिकता थी, मगर मनुष्य को बाहर निकालने के लिए व्यवस्था में कोई अनुग्रह नहीं था; व्यवस्था के द्वारा दंड़ का भुगतान नहीं हुआ था। परन्तु उस दंड़ का भुगतान करने के लिए अनुग्रह की आवश्यकता थी; जबकि व्यवस्था तो हम पर दंड़ लेकर ही आती थी।26और यहाँ पर योना को बुलाया गया-बाइबिल के छोटे नबियों में से इस एक नबी को इस नगर में जाने के लिए बुलाया गया। और यहाँ पर हम सब को अपना नमूना देखने को मिलता है; हम में से हर को यहाँ पर अपना उदाहरण देखने को मिलता है। हम सदैव ही किसी न किसी काम से दूर भाग रहे होते हैं। हम मुसीबतों से दूर भागते हैं, हम अपने दात्यिवों-जिम्मेदारियों से दूर भागते हैं। हम सभी ऐसा ही करने के इच्छुक रहते हैं। हम खड़े होकर उसका सामना करने की बजाये, उससे दूर भागने के कहीं ज्यादा इच्छुक रहते हैं। समझे? हम तो खुद अपने को भागता हुआ पाते हैं। कभी कभी हम यह देखते हैं, कि हम काम से दूर भागने की इच्छा रखते हैं। हम नहीं करना चाहते हैं..हम काम नहीं करना चाहते हैं। कुछ लोग तो ऐसा सोचते हैं, कि वे बिना काम किये ही अपना जीवन-यापन कर सकते हैं। परन्तु मैं सुलैमान के विषय में सोचता हूँ; वो एक ऐसा था जिसने इस के बारे में कहा था, कि हमें यहाँ पर इसका उत्तर चीटी पर दृष्टि डालने के द्वारा मिल सकता है। 47. आप एक छोटी चीटी के बारे में जानते हैं; लोगों ने मुझे बताया है, कि अगर वह…अगर कोई एक चीटी काम नहीं करती है और अंदर ही लेटी रहती है, तो वह जाड़े के मौसम में खाने भी नहीं पाती है। अतः हर एक को काम करना होता चः उनको भोजन अपने बच्चों को पढा हाथ के नन्हें व27हमारे पास बहुत से काम हैं जो हमें करने होते हैं; हमारे ऊपर बहुत सी जिम्मेदारियाँ होती हैं जिनका हमें सामना करना होता है। हर एक इंसान को किसी ना किसी दायित्व का सामना करना होता है। 49. जब आप अपने लिए एक पत्नी चुनते हैं, कि आप विवाह कर लें, या जबआप अपने पति को चुनती हैं, तो आपको —आपको एक जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। और इसके बाद आप को स्मरण रखना चाहिए…हो सकता है, कि आप एक घर बनाते हों; और यह घर एक बड़ा ही सुन्दर घर हो। और फिर आप यह स्मरण रखें, कि एक शादी-शुदा नारी के बतौर आपको बच्चों के पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी के बारे में सोचना होता है। और आपको सोचना होता है, कि उन चिकनी सुन्दर दीवारों पर सभी जगह हाथ के नन्हें व गन्दे धब्बे होंगे। इसके बाद आप पर अपने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने का दायित्व होता है। आप पर उनको भोजन खिलाने-पिलाने का और उन्हें कपड़े पहनाने का दायित्व होता है। यह सब कुछ दायित्व ही होता है। और यह कितना सहज होता है, कि जब जिम्मदारी हमारे सम्मुख आयें, तो हम उनसे अपनी जान बचा कर भाग जायें।और हम देखते हैं, कि हर एक नज़रिये से शादी-ब्याह एक जिम्मेदारी ही होती है।यहाँ तक कि बहुत सी बार हम देखते हैं….वैसे तो यह कहना कठिन है, लेकिन यह सच्चाई है, कि बहुत सी बार प्रचारक परमेश्वर के सत्य वचन के लिए खड़े होने के दायित्व से जान बचाकर भागते है, जबकि उन्हें इसका सामना करना चाहिए। वे उस जिम्मेदारी से जी चुराते हैं। जब परमेश्वर के वचन की सच्चाई को हम लोगों के आमने-सामने लाया जाता है, तो हम उससे अपने आखिरी प्रयास तक जी चुराने के इच्छुक रहते हैं।28मैंने अपने भांजे से काफी बातचीत की है। वह एक कैथोलिक है। और मैंने उस लड़के को ठीक यहीं पर कुछ साल पहले यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा दिया था। और उसका मेल किसी लड़की से हो गया, और वह फिर से कैथोलिक बन गया। और जब उसकी माँ मर रही थी, तो मैंने उसकी माँ का हाथ पकड़ा था, और उसकी माँ ने मुझसे अन्तिम ये शब्द कहे थे, “आप मेल्विन का ध्यान रखना।”

और वह लड़का तो बस सपने देख रहा है। वह बस…नहीं कर सकता है…गत सप्ताह तो वह हर दिन ही सपने देख रहा था; उस ने कहा था, “अंकल, बिली, मैं आपकी कलीसिया में चलकर आया हूँ, और आप खड़े हुए प्रचार कर रहे थे, और मैं अपने गुनाहों का अंगीकार करने के लिए ऊपर आता हूँ; मैं जाग चुका हूँ।” उसने कहा, “मैं गलत रहा हूँ।”मैंने कहा, “मेल्विन, तुम्हें इसके लिए किसी अनुवाद की कोई आवश्यकता नहीं है। तुम्हारा स्थान तो वहाँ नीचे है, जहाँ के तुम हो।” और यह सच है। समझे?29कभी कभी ऐसा होता है, कि दायित्व निभाने के लिए हमें खुद अपने को अपनी खुदी से ही अलग करना पड़ता है। जैसे एक पिता को अपने बच्चे को चाबुक मारने के दायित्व का सामना करना होता है। आप उन नन्हें नन्हें बच्चों के साथ ऐसा नहीं करना चाहते हैं। परन्तु एक माँ या पिता होने के नाते आपको उस बच्चे का सही पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी का सामना करना होता है; क्योंकि बाइबिल ऐसा कहती है, “अगर तू छड़ी ना उठाये, तो तू अपने पुत्र को बिगाड़ देगा।” और यह बात उस हर मनोवैज्ञानिक की दृष्टि में सही है जो जगत में है। यह अभी भी परमेश्वर की सच्चाई है। अगर हम ने इसे और भी ज्यादा व्यवहार में लिया होता, तो आज इतनी विमुखता, और किशोरावस्था वाले अपराध व व्यर्थ के कार्यलाप और सड़ाहट न होती जितनी कि वह संसार में आज है। परन्तु घर के स्वर्णिम कायदे-कानून तो बहुत समय पहले ही तोड़े जा चुके हैं; और आज माँ-बाप बच्चों को जो कुछ भी वे करना चाहें, वह उन्हें करने देते हैं।30परन्तु जैसाकि मैंने कहा था, यहाँ तक कि प्रचारक भी जब सत्य के आमने सामने होते हैं, तो वे बस उससे दूर भागते हैं। देखिए, वे…वे तो बस ऐसे हैं…ऐसा प्रतीत होता है, कि मानो कुछ ऐसा है, जिसका वे सामना नहीं करना चाहते हैं।बहुत सी बार ऐसा होता है, कि बहुतेरे लोग मेरे पास आकर यह कहते हैं, भाई ब्रन्हम, मैं जानता हूँ, कि यह सही है, परन्तु यदि मैंने ऐसा किया, तो वे मुझे लात मार कर कलीसिया से ही बाहर निकाल देंगे। इसके विषय में क्या है? यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो वे आपको वहाँ से बाहर निकाल देंगे। अतः देखिए,आपको कहीं न कहीं से तो बाहर निकलना ही होगा। अच्छा तो यही है, कि आप इसका सामना करें, बजाये इसके कि आप इससे दूर भागें, और यह कहें, “ठीक है, मैं यहाँ जाऊँगा। मैं वापस नहीं लौटूगा।” आप निश्चय ही वापस जायें, और इस के बारे में कुछ और ज्यादा सुनें। आप पवित्र वचनों में खोजबीन करें। यीशु ने कहा था, “तुम पवित्र शास्त्रों में ढूढों, क्योंकि तुम सोचते हो, कि उनमें तुम्हें अनन्त जीवन मिलता है, और ये वही हैं, जो मेरी गवाही देते हैं।” परन्तु हम देखते हैं, कि लोग इसका सामना नहीं करेंगे।जब लोगों को परमेश्वर की उपस्थिति में लाया जाता है, और जब वे देखते हैं, कि परमेश्वर ने कोई प्रतिज्ञा की है…और परमेश्वर उस प्रतिज्ञा के प्रति वचनबद्ध है…और जब वह उस प्रतिज्ञा को पूरा करता है, तो लोग उस समय के सन्देश का अनुकरण करने की जिम्मेदारी का सामना करने से डरते हैं। हमने ऐसा सभी जगह पाया है।31तुम लूथरनों के बारे में यह कैसी बात है? कितने ही लूथरन डरते थे…जब लूथर धर्मी ठहरने वाले सन्देश के साथ बाहर निकलकर आया, ता लोग लूथर के सत्य का सामना करने से डरते थे। देखिए, इसके कारण आपको क्या कीमत चुकानी पड़ती…हो सकता है, कि आपको बाहर निकलकर यीशु मसीह का अंगीकार करने और..और एक..एक लूथरन बनने के लिए अपने जीवन की आहूति देनी पड़ती।तुम मैथोडिस्टों, अपने आप पर नज़र डालो, ऐसा कैसे हुआ करता था, कि तुम सभों को पवित्र पाखंड़ी (Holy-Roller) कहा जाता था। मेरा अन्दाज़ा है, कि तुम यह जानते हो और वे आत्मा के तले आये और ऊपर नीचे उछले-कूदे, और उन्होंने कहा, “हम ऊपर नीचे उछले-कूदे, हमें झटके लगे।” नहीं, जी नहीं, वे पिन्तेकोस्तल नहीं थे, वे तो मैथोडिस्ट ही थे जिन्होने काफी समय पहले ऐसा किया था। और वे ऊपर-नीचे उछलते-कूदते थे, और स्तब्ध होते थे, और परमेश्वर की सामर्थ के अन्र्तगत लुढ़क कर गिर पड़ते थे। और लोगों को उनके मुखमंड़ल पर पानी फेंकना होता था, और पंखो से उनकी हवा करनी होती थी, और सोच लिया जाता था, कि वे मर गये हैं। और अब देखिए, तब तुम्हें पवित्र पाखंड़ियों का झंड़ समझा जाता था। परन्तु आपको…आपके माँ-बापों को या तो उसे ग्रहण करना था…उस सच्चाई का और वास्तविकताओं का सामना करना था, या उन्हें उसे ठुकरा देना था।32तुम पिन्तेकोस्तलों के बारे में क्या है, जिन्होंने पवित्र आत्मा के वरदानों की पुनःवापसी ग्रहण की थी? जब पवित्र आत्मा का बपतिस्मा अन्यान्य भाषाओं में बोलने और आत्मा के वरदानों के साथ आया, और आत्मा के वरदान कलीसिया में आ रहे थे, तो मैथोडिस्ट क्यों तुम्हें बाहर निकालना चाहते थे, और उन्होंने ऐसा ही किया था। परन्तु तुम्हें तो इसका सामना करना ही था।यह कोई ऐसा काम था जो तुम्हें करना ही था। परन्तु इस मामले में क्या है…जब यीशु मसीह के बपतिस्मे की बात आयी, और तुम ने देखा, कि यह सत्य है? तुम्हें या तो इसका सामना करना है, या तुम्हें इसके बारे में कुछ करना है। तुम्हारे पास एक जिम्मेदारी है, हर किसी के पास एक जिम्मेदारी है; और तुम्हें अवश्य ही इन बातों का सामना करना चाहिए। यह बिलकुल सच है।33और इसके बाद अब जब तुम इस दिन में देखते हो, कि परमेश्वर के वचन ने ही इन बातों की प्रतिज्ञाएं की हैं, जिन्हें हम अब घटित होते हुए देख रहे हैं, तो अब तुम्हारा यह दायित्व है, कि या तो तुम इसका सामना करो, या तुम इससे दूर भाग जाओ। तुम्हें तो..तुम उदासीन बने नहीं रह सकते हो; तुम्हें इसके बारे में कुछ ना कुछ तो करना ही है। तुम्हें कोई ना कोई काम तो करना ही है। आप ऐसा नहीं कर सकते हैं, कि उस कलीसिया के द्वार के अंदर आए, और वैसे ही इंसान बन कर बाहर निकल कर जायें जैसे आप अंदर गये थे। हर बार जब भी आप अंदर जाते हैं। और बाहर निकलते हैं, तो या आप परमेश्वर से और भी दूर चले जाते हैं, और या आप परमेश्वर की और भी ज्यादा समीपता में आ जाते हैं।ओह, लोगों के लिए इन बातों से पिंड़ छुड़ाना कितना सहज होता है। और जब हम कल रात्रि से उन कार्यकारिणी सभाओं को शुरू करते हैं, तो मैं चाहता हूँ, कि आप इन बातों पर विचार करें। मैं आप से यह चाहता हूँ, कि जब कोई बात आपके समक्ष रखी जाती है, और अगर उसके विषय में कोई प्रश्न है….अगर इसके बारे में प्रश्न है, तो उसका उत्तर भी होना होता है।34उदाहरण के लिए यह कहा जाये, कि कहूँ, “मैं पश्चिम की ओर जा रहा हूँ”, और आप मेरा दिशा-निर्देशन इस मार्ग की ओर करते हैं; खैर पहली बात आप यह जानते हैं, कि तब तो मैं अपने लक्ष्य से ही अलग हट जाऊँगा, और जबकि मैं उत्तर पश्चिम में हूँ। खैर, क्या हो, अगर कोई मेरा दिशा-निर्देशन इस ओर करे, तथा मैं उस ओर चला जाऊँ; मैं तो फिर से अपने लक्ष्य से चूक जाता हूँ। और मैं दक्षिण-पश्चिम की ओर निकल जाता हूँ। खैर, जब तक यह प्रश्न रहता है, कि पश्चिम किधर है, तो कहीं ना कहीं इसका एक सीधा-स्पष्ट जवाब भी होना ही चाहिए। और जब ये प्रश्न हमारा बाइबिल की सच्चाइयों के विषय में सामना कराते हैं, तो इनका कहीं ना कहीं सही व सटीक उत्तर भी होना होता है। यह सही बात है, इनका उत्तर तो होना ही चाहिए।और जब हम किसी बात को अपने सम्मुख प्रस्तुत होते हुए देखते हैं, तो मैं सोचता हूँ, उससे सिर्फ दूर भागने की बजाये लोग यह कहते हैं, “ओह, क्या ही व्यर्थ की बात है, मैं उस जैसी किसी भी बात का विश्वास नहीं कर सकता हूँ; मैं उस का विश्वास नहीं कर सकता हूँ।” ठीक है, तो फिर क्यों नहीं आप बाइबिल उठाते, और बैठकर इसका सामना नहीं करते? इसका अध्ययन करें। आप इस समय यहाँ पर इस सभा में हैं, तो आप बस इस पर ध्यानपूर्वक दृष्टि लगायें। आप खुद अपने आप ही इसे वचन से जाँचें; आप वचन को वचन से जाँचें। केवल यही एक तरीका है जिसके जरिये यह सच्चाई बयान करता है। और इसे तो अवश्य ही उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक सत्य ही बताना चाहिए।मसीह ही सम्पूर्ण बाइबिल का प्रकाशन है। उसमें अर्थात् मसीह में सारी परिपूर्णता पायी जाती है—-बाइबिल की सारी भविष्यवाणियाँ बिना किसी रोकटोक के बेशर्ते यीशु मसीह में ही पूरी होती हैं; क्योंकि वह परमेश्वर था, जो देह में प्रकट हुआ था।35अब यद्यपि जब हम इन बातों को देखते हैं, जब ये बातें हमारे सामने होती हैं, और हम सभा में आते हैं, और परमेश्वर की सामर्थ को चलते फिरते और कामों को करते हुए, परम-आलौकिक कामों को करते हुए देखते हैं; और हम इन्हें होते हुए देखते हैं, तो हम बाइबिल पर दृष्टि डालते हैं, और देखते हैं, कि इन बातों की इस समय के लिए प्रतिज्ञा की गई है; इसके बाद जब हम उन बातों को होते हुए देखते हैं, तो हमारा यह दायित्व बन जाता है, कि हम उसका सामना करें, कि हम उसको ग्रहण करें; इसका मेरा खुद अपने से भी अभिप्राय है…अब, बहुत से लोग सहानुभूति जताते हें; बहुत से लोग कहते हैं, कि यह ठीक है। परन्तु इससे वह तो नहीं हो जाता है, जिसके लिए आप जिम्मेदार होते हैं।36जैसाकि मैं कह चुका हूँ, क्या हो, अगर…क्या हो, अगर मैं एक युवा लड़का होता और एक पत्नी तलाश कर रहा होता जिससे कि मैं विवाह कर लूं, और यहाँ पर कोई लड़की खड़ी होती, जिसमें वे सारी खूबियाँ पायी जातीं, जिसके बारे में मैं सोचता हूँ, कि वे किसी भी स्त्री को एक शिष्ट नारी बनाती हैं-नैतिक तौर पर वह एक रानी हो, और बहुत प्यारी हो, और..और उसका व्यक्तित्व बहुत अच्छा हो, वह एक सच्ची मसीही हो, उस में वह सब कुछ हो जो मैं सोचता हूँ, कि वे उसे मेरी एक अच्छी पत्नी बना सकते हैं-इससे कोई मतलब नहीं है, कि मैं कितना यह कहता हूँ, कि वह सिद्ध है, वह बिलकुल ठीक है; लेकिन वह तब तक मेरी नहीं होती है, जब तक कि मैं उसे और उन दायित्वों को जो मेरी पत्नी के प्रति होते हैं, स्वीकार नहीं कर लेता हूँ।बिलकुल ठीक यही बात सन्देश के मामले में है। हो सकता है, कि आप कहें, यह ठीक है, यह, यह, यह, या अन्य कुछ है। और आप कहते हों, “मैं इससे सहानुभूति रखता हूँ; मैं विश्वास करता हूँ, कि यह सत्य है।”

लेकिन आपको तो इसे ग्रहण करना होता है; और इसे आपका एक भाग बनना होता है। और आपको उसका भाग बनना होता है…तभी यह आपका होता है।जब आप किसी उस स्त्री से जिसे आप ने चुना है, विवाह कर लेते हैं, तो फिर आप एक होते हैं। और ठीक ऐसा ही आप मसीह के साथ होते हैं। जब आप उसे प्रकट होते हुए देखते हैं, और वह आप पर सजीव बन जाता है, तो फिर आप उसके भाग होते हैं और वह आपका भाग होता है; और आप दोनों मिलकर सन्देश का भाग होते हैं।37ओह, हम इस दिन के योनाओं के लिए कितने ही नामधारी कलीसियायी जहाज़ों को तर्शीश को जाते हुए देखते हैं;वे लगभग नौ सौ नामधारी कलीसियायी जहाज़ हैं…ये वे जहाज़ हैं जो आसान रास्ता तय करते हैं। वे इसका सामना नहीं करना चाहते हैं। योना उसका सामना नहीं करना चाहता था…जो बात अन्यजातियों के लिए होने जा रही थी। वह उस निर्मम सन्देश को वहाँ लेकर नहीं जाना चाहता था, कि “अगर तुम प्रायश्चित नहीं करोगे, तो तुम चालीस दिन के अंदर नाश हो जाओगे।” उसने ऐसा करने से घृणा की थी; और उसने सोचा था, वे अन्यजातियाँ! यह कहना कठिन है, कि वे मेरे साथ क्या करेंगे।“ परन्तु उसे तो इसका सामना करना ही था। समझे? परन्तु उसने एक आसान सा जहाज़ अपनाया और तर्शीश चलता बना। और वह जहाज़ के अंदर चला गया और निन्द्रा में खो गया। उसने एक आसान रास्ता अपनाया।38यही एक आसान तरीका है। यही तो लोगों में सर्वाधिक लोकप्रिय मार्ग है। उस राह को अपनाना सहज होता है जहाँ हर कोई आपकी पीठ थपथपाये और कहे, “तुम एक भले सज्जन हो, और यह अमुक-अमुक है, और यह कोई विशेष व्यक्ति है।” और संसार आप पर दृष्टि डालेगा। लोकप्रिय राह को ग्रहण करना सहज होता है। परन्तु जब आपको कुछ अलग किस्म का करना होता है; जब आपको अपने उस विश्वास पर जिसके बारे में आप जानते हैं, कि वह सत्य है, खड़े रहना होता है, तो यह एक कठिन का काम होता है; यही है वह ठीक जहाँ पर अवरोध आते हैं।ओह, जैसा कि हम उस पुराने गीत को बहुत सी बार गाते थेजब चला रहे हैं इस सागर में जहाज तो होता है यह कितना सहज होता हैयह कितना निश्चल करना विश्वास, कि हम हैं। यहोवा की बलशाली बांहों में….परन्तु ओह, लहरों को चलने दें;प्रचंड़ आँधी चलने दें और ऊँची-ऊँची लहरें उठने दें,तो फिर आप क्या करते हैं?जैसा कि मुझे एक बार एक स्त्री के द्वारा बताया गया था, उसने यह बात घोड़े और बग्गी के दिनों के बारे में कहीं थी, उस ने बताया था, कि जब वह चर्च से जा रही थी, घोड़ा उसके साथ दूर भाग रहा था। पूछा गया, “आप ने क्या किया?”बोली, “मैंने प्रभु पर तब तक भरोसा रखा जब तक कि रस्सियाँ टूट नहीं गईं।” खैर, यही वह समय है, जब प्रभु पर रस्सियाँ टूट जाने के बाद भी विश्वास करने की जरूरत होती है। आप तो रस्सियों पर तब तक विश्वास कर रहे हैं, जब तक कि वे टूट नहीं जाती है। जी हाँ।39और इस प्रकार हमें मालूम होता है, कि हमारे पास जाने के वास्ते बहुतेरी आसान राहें हैं…हमारे पास बहुत से जहाज़ हैं जो तर्शीश को जा रहे हैं, क्योंकि ऐसा करना बड़ा ही आसान होता है…परन्तु ऐसा करना तो जिम्मेदारियों को ना निभाना है। जब आप आसान राह पकड़ लेते हैं, तो सब कुछ सुगमता से चल रहा होता है, सब कुछ आप के पास आ रहा होता है; हर कोई आपको पसंद करता है; और हर कोई आप से….होता है…कोई भी आप से असहमत नहीं होता है; और आप किसी से असहमत नहीं होते हैं।……यह सही बात है। ……आप चाहे कोई भी क्यों न हो, मैं इसकी परवाह नहीं करता हूँ, और चाहे आप जिस किसी भी बात के लिए खड़े हों…सच तो यह है, कि उचित विचारशील लोग आप के बारे में ज्यादा सोचेंगे, अगर आप अपने उस विश्वास के अंगीकार के लिए खड़े रहते हैं, जो सही है। यह सच है। परवाह ना करें….40आप किसी ऐसी स्त्री को लें; हो सकता है, कि वह ऐसी हो, कि वह कभी भी बहुत ज्यादा आकर्षक न रही हो; और वह जो कोई भी हो; परन्तु आप उस स्त्री को स्त्रित्व के सिद्धांतों पर खड़ा होने दें; और उसे एक शिष्ट नारी के जैसे खड़ा रहने दें, और यदि किसी पुरूष में थोड़ा सा भी पुरूषत्व है, तो वह उसकी इज्ज़त करेगा। हम निश्चय ही उसकी सराहना करते हैं..जिसके बारे में लोग विश्वास करते हैं, कि वह सत्य है, और वे उसके लिए खड़े होंगे जिसके बारे में वे सोचते हैं, कि वह सही है।आज बहुत से मसीही इतने ढुल-मुल और अन्य सभी कुछ हैं, कि वे सोचते हैं, कि जो कुछ भी करना है, वो यही है, कि- नामधारी कलीसिया में शामिल हुआ जाये; कहीं पर जाया जाये; अपना नाम रजिस्टर में लिखवाया जाये, या कोई छोटा-मोटा ऐसा ही कार्यकलाप किया जाये, ऊपर नीचे उछला-कूदा जाये, ज़ोर-ज़ोर से जयजयकार किया जाये, या इसी तरह का कुछ किया जाये; और वे इसी को मसीहियत कहते हैं। मसीहियत तो प्रतिदिन का मुश्किलों भरा कठिन जीवन होता है, जो इस वर्तमान जगत में परमेश्वर के लिए जीया जाता है। यह तो आपके हृदय में लगातार नियत रूप से आग का ज्वलंत होते रहना है, और आपके हृदय में परमेश्वर के लिए प्रेम का होना है, जो आप को ज्वलंत किये रहता है, और आपको बाहर लोगों के साथ कायम रखता है, और लोगों को मसीह की ओर फेर लाता है।

41दायित्व! परन्तु जिस राह पर दुनिया चलती है उस राह पर चलना आसान होता है। किसी जलधारा के साथ नाव खेना सहज होता है। आप ऐसे में बाहर जायें और नदी में अपनी नाव में बैठ जाये। आप के पास आपकी पतवार है, और आप उन्हें जल-धाराओं के विपरीत खेना शुरू करें, और आपको बहुत ज्यादा समय नहीं लगता है, कि वह ज़ोर से बहती चली जाती है; परन्तु आप बस एक बार अपनी पतवार छोड़ दें और आप देखेंगे, कि आप कितनी तेज़ी से पेड़ों के पार निकलते चले जाते हैं। परन्तु आप देखें, कि आप कहाँ जा रहे हैं। स्मरण रखें, जब नाव सुगमता से दौड़े चले जा रही है, तो आप किसी विशाल जल-प्रपात की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं; आप किन्हीं झरनों की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं; और इसमें बहुत ज्यादा देरी नहीं लगेगी, कि आप उन झरनों में जा गिरें। आप बस संसार के साथ बहते चले जा रहे हैं, जिस पथ पर संसार चल रहा है, उस पथ पर चलना आसान होता है। लेकिन आप वैसा नहीं करना चाहते हैं। जी नहीं, श्रीमान! परन्तु आप को तो अवश्य ही अपना दायित्व ग्रहण करना चाहिए।अब, आप इस पर विश्वास करते हैं, और आप सोचते हैं, कि यह सत्य है..42और इस दिन में परमेश्वर ने हमें यह दायित्व दिया है, कि हम इस सन्देश को लायें….और जैसे जैसे मैं बूढ़ा होता चला जाता हूँ, मैं जानता हूँ, कि मेरे दिन कम होते चले जा रहे हैं, और मैं यह महसूस करता हूँ, कि मुझ पर इसकी उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदारी है जितनी कि मैंने कभी महसूस की थी। मुझ पर इसका बोझ और भी ज्यादा बढ़ता चला जा रहा है। हमें इसे करना चाहिए। हमें अवश्य ही इसे उन हर एक स्थान पर बता देना चाहिए जहाँ कहीं हम जाते हैं..हमें सभी जगह जाकर सन्देश बता देना चाहिए, और…और लोगों को बता देना चाहिए, कि यीशु मसीह आ रहा है, और वही परमेश्वर है; और वो शीघ्र आ रहा है। संसार में कोई आशा बाकी नहीं रही है, वरन केवल प्रभु के आगमन की ही आशा बाकी रही है।43मैं वहाँ पीछे अपने उन कुछ मित्रों को देख रहा हूँ जो उस समय मेरे साथ वहाँ ऊपर थे, जब प्रभु का दूत….वे लड़के यहाँ पर बैठे हुए हैं; मेरा विश्वास है, कि उन्होंने वह जगह पा ली है, जहाँ यह घटित हुआ था। और आप बस वह स्मरण करें जो उस दिन प्रभु ने भाई वुड से कहा था, जब हम पहाड़ के ऊपर चढ़ रहे थे। और..और वे एक किस्म से रो रहे थे, क्योंकि उन की पत्नी बीमार थी। और प्रभु ने कहा था, “उस पत्थर को उठा और उसे हवा में ऊपर फेंक, और ”यहोवा यूँ फरमाता है’, वाला वचन बोल।“ और मैंने वैसा ही किया। और भाई वुड यहाँ पर इस बात के एक गवाह के रूप में बैठे हुए है।और मैंने कहा था, “भाई वुड, इसमें बहुत ज्यादा देरी नहीं होगी, कि आप कुछ घटित होता हुआ देखेंगे।” और अगले दिन जब हम सब मिलकर वहाँ पर खड़े हुए थे…और आज रात उन पुरूषों का एक झंड़ यहाँ पर खड़ा हुआ है।44वहाँ पर एक युवा प्रचारक था, और वो एक ऐसा था जो…मैंने ध्यान दिया था…मैंने उससे सिर्फ एक रात पहले ही मुलाकात की थी। वह हमारे खेमे में था। वह हमारे साथ रहने के लिए आया था। और उस ने मुझ से कहा था, “भाई ब्रन्हम, क्या आप कभी इस तरह से बाहर होते हुए भी दर्शन देखते हैं?”मैंने कहा, “जी हाँ, श्रीमान! लेकिन मैं यहाँ बाहर इससे अलग होने के लिए और थोड़ा सा विश्राम करने के लिए आया हूँ।” उसने कहा…मैंने कहा, ठीक है, मैं…मैं निसन्देह, वो मुझे यहाँ बाहर भी दर्शन दिखाता है।“ और मैंने कहा, ”यहीं ऊपर वह पहाड़ है जहाँ पर सात स्वर्गदूत दृष्टिगोचर हुए थे।वह बोला, “जी हाँ, मैं समझता हूँ।” बोला, “मैं आपकी कैलीफोर्निया में हुई सभाओं के प्रयोजकों में से एक था।”मैंने कहा, “अच्छा, मुझे यह जानकर सचमुच में बड़ी खुशी हुई।”और जबकि मैं वहाँ पर खड़ा हुआ था, ठीक तभी मैंने चारों ओर दृष्टि डाली, और मैंने एक मोटे से डॉक्टर को उसकी आँखों की जाँच करते हुए देखा, और उसे उससे यह कहते हुए सुना, “तुम अपनी उस आँख को खो दोगे; क्योंकि उसमें एलर्जी हो गई है। और मैंने इसका दो सालों तक इलाज किया है; और तुम अपनी उस आँख को खोने जा रहे हो।” मैंने कहा, “जिस कारण से तुम ने यह पूछा था, उसकी यही वज़ह है, क्योंकि उस दिन तुम्हारे डॉक्टर ने तुम्हें बताया था, कि तुम अपनी उस आँख को खो दोगे।”और वह बोला, “यह सच है।”और उस ने ऐसेचारों ओर नज़र दौड़ायी। और मैं उसकी माँ को अपना एक लम्बा सा मोज़ा उतारते हुए देखता हूँ, और उस ने अपना पैर बाहर को निकाल कर पकड़ा, और उसके पाँव की ऊंगलियों के बीच…उसके पाँव पर ऊपर नीचे को एक छोटा सा टयूमर लटक रहा था, और उसने कहा था, “अगर तुम्हारी भाई ब्रन्हम से मुलाकात हो जाती है, तो तुम उन से इसके लिए दुआ करने के लिए कहना।” और मैंने कहा, “तुम्हारी माँ के हाथ में…तुम्हारी माँ ने अपना पांव इस तरह से बाहर निकाला था, और उसकी ऊंगलियों पर सभी जगह ये छोटे छोटे टयूमर हैं, और वह बोली थी, ‘भाई ब्रन्हम से इनके लिए दुआ करवा लेना।”वह बोला, “भाई ब्रन्हम, यह सच है।”और मैंने पीछे दृष्टि डाली, और जब मैंने ऐसा किया, तो मैंने देखा, कि वो वहाँ पर खड़ा हुआ उन उज्जवल आँखों से मुझे इस प्रकारदेख रहा था। मैंने उससे इस प्रपात पर मुलाकात की थी, और उसकी आँखें खेमे में किसी भी व्यक्ति की आँखों से अच्छी थीं। परमेश्वर ने उसे चंगा कर दिया था, और उसे अच्छाभला कर दिया था।45जबकि मैं वहाँ पर खड़ा हुआ था, प्रभु ने मुझे वह दिखाया जो घटित होने जा रहा था। उस ने कहा था, “पश्चिमी तट पर न्याय पड़ने को है।” और उसने कहा था, “वहाँ ऊपर उस जगह के बराबर में चले जाओ जहाँ तापने के लिए आग जलाई जाती है।”और मेरे हाथ में एक बेलचा था, और मैं चलकर वहाँ गया…भाई रॉय रोबरसन….यहाँ पर हम सब उन्हें जानते हैं, जैसा कि मैं जानता हूँ, कि वो आज रात्रि यहाँ पर नहीं हैं; वो बाहर ऐरीजोना में हैं। वे यहाँ पर ट्रस्टियों के चेयरमैन हैं। और मैं उन्हें एक पुराने अनुभवी यौद्धा के रूप में जानता था। और कुछ घटित होने जा रहा था। कोई बहुत ही वास्तविक घटना घटित होने जा रही थी; अभी सुबह के लगभग दस ही बजे होंगे, और हम दस या बारह पुरूष वहाँ पर चारों ओर घेरे में को थे,

और हम तम्बू नीचे को कर रहे थे, और सुअर तथा दूसरे जानवरों की खाल उतार रहे थे। अतः हम…मैं इधर-उधर चला, और बोला, “रॉय, जल्दी से छिप जाओ। कुछ घटित होने वाला है। मैं उन्हें इससे ज्यादा और कुछ ना बता सका था। और ठीक जिस समय मैं वहाँ पहुँचा…और आकाश से परमेश्वर का चक्रवात नीचे आ रहा था, और इस तरह से ताली का सा शब्द हुआ, और उसने पहाड़ हिला डाले, और वह उस पहाड़ के अंदर तक गया; और मेरे सिर से ऊपर लगभग पाँच फुट ऊँची एक पतली लम्बी परत को काट डाला; और जैसे ही चट्टानें बाहर निकल कर गईं, उसने उन पेड़ों को ऊपर से काट डाला, और वह ऊपर हवा में ऊपर गया और इसके बाद एक बड़े बपतिस्मे के साथ वापस आया, और पहाड़ से टकराया और चट्टानों को इस प्रकार से उखाड़ कर फेंक डाला। उसने ऐसा तीन बार किया, और इसके बाद वह हवा में चला गया। और भाई बैंकस मेरे पास आकर बोले, ”क्या यह वही है जो तुम ने कल कहा था?“मैंने कहा, “जी हाँ, श्रीमान!यह बिलकुल ठीक वही है।” समझे? और फिर इसके दो दिन बाद ही वहाँ पर अलास्का लगभग डूब गया था। और पश्चिमी तट पर ऊपर नीचे गर्जनाएं हुईं, और धकेला जाना, और अन्य सभी कुछ हुआ। और इन दिनों में से किसी एक दिन वह महासागर के नीचे डूब रहा होगा। यह सच है। यह क्या है? हम प्रभु के आगमन के समय में रह रहे हैं।46और जब हम वादो-पन्थों (isms) तथा इसी प्रकार की बातों को तथा अन्य विभिन्न बातों को उदित होते हुए देखते हैं, तो हम जानते हैं, कि इसका कहीं ना कहीं एक सच्चा जवाब होगा। इस समय यहाँ बाहर लोग देश में सुदूर गुफाओं में तथा ऐसी ही और दूसरी जगहों में जा रहे हैं। किसी ने कहा था, “16 मार्च को प्रभु आ रहा है।” (आप ने इसे समाचार पत्र में पढ़ा था) आप जानते हैं, कि ऐसा नहीं है। यीशु ने कहा था, “कोई भी मनुष्य उस क्षण या उस घड़ी को नहीं जानता है।जब हम इन बातों को देखते हैं, और जिस प्रकार से ये बातें हो रही हैं, तो अवश्य ही कहीं ना कहीं एक सच्चा जवाब होना ही चाहिए। कहीं ना कहीं तो एक सच्चाई होनी ही है। एक पूरब है और एक पश्चिम है; परन्तु एक दक्षिण-पश्चिम और एक उत्तर-पश्चिम है या कुछ ऐसा ही है; लेकिन समस्या का कहीं ना कहीं तो सच्चा उत्तर होना ही चाहिए।(टेप में खाली जगह-सम्पा.)47क्या हम इससे जी चुराते हैं? हमें अवश्य ही लोगों को बताना चाहिए, कि हम परमेश्वर के पुत्र के आगमन के समय में रह रहे हैं। अगर हम चाहते हैं…अगर हम देखना चाहते हैं… परमेश्वर तो काम कर रहा होता है….वह सभी समय काम कर रहा होता, वह सभी समय लोगों को सही उत्तर देने के लिए तत्पर रहता है।हमेशा से ही ठीक वैसा ही हुआ है। मनुष्य ने हमेशा ही जी चुराया है, और अदन की वाटिका में आदम से लेकर मानव परमेश्वर से दूर ही भागा है। जब आदम अदन की वाटिका में था, और उस पर इस बात का दायित्व आया, कि वह परमेश्वर के संग टिका रहेगा, या अपनी पत्नी के साथ जाएगा, तो उसे अपना चुनाव करना था; उसे ऐसा करना था….उस पर एक दायित्व था। या तो उसे वह ग्रहण करना था जो उसकी पत्नी ने कहा था, या उसे वह ग्रहण करना था जो परमेश्वर ने कहा था। और जब उसने अपनी पत्नी की राह पर चलना चुना….और जब उसने वैसा किया, तो उस ने अपनी मूल स्थिति गवां दी, और वह सम्पूर्ण जगत को मृत्यु की आधीनता में लेकर आ गया। जब उस पर यह दायित्व आया, कि क्या वह उस नये प्रकाश को जो उसकी पत्नी ने खोजा था, जो विपरीत था…ग्रहण करेगा, या……ओह, मेरे परमेश्वर! आप ज़रा इसके बारे में सोचिएं! परमेश्वर ने उन्हें सिर्फ लगभग आठ या दस शब्द ही पालन करने के लिए दिये थे, कि “परन्तु तुम उस वृक्ष में से ना खाना।” यही सब तो वह था जिसका उन्हें पालन करना था। और केवल( टेप में रिक्त स्थान-सम्पा.) …उतने अधिक शब्द होने पर भी उन्होंने उसका उल्लघंन कर दिया। उसके बाद आदम को इसका सामना करना था, क्या मैं…क्या मैं वैसा करूँ जैसा मेरी पत्नी ने करने के लिए कहा है, या मैं वैसा करूँ जैसा परमेश्वर ने करने के लिए कहा है। और इसके बाद वह अपनी खुली आँखों के साथ बाहर निकल आया। उसे तो जिम्मेदारी उठानी थी। उसने ही सम्पूर्ण मानव जाति को मौत में धकेल दिया था।48इसके बाद एक और आदम आया जो कि मसीह था; वही एक ऐसा है, कि उसके जैसा कभी कोई न हुआ। कुछ लोग कहते है, कि वह परमेश्वर नहीं था। उसकी अपूर्वता-अद्वितीयता ने ही यह साबित किया था, कि वह परमेश्वर था। कभी कोई ऐसा जीव नहीं हुआ, जिसने उस जैसा जीवन व्यतीत किया हो। वह संसार में खुद अपने हिसाब से जीया। वह तो प्रकृति के आयाम से बाहर जन्मा था….हाल्लिलूय्याह! वह स्वयं सृष्टिकर्ता था, जो देहधारी हुआ था। कौन कैसे कभी वहाँ खड़ा हो सकता था, जहाँ पर वह खड़ा हुआ था। उसके जैसे किसने कभी बातें कीं? कौन कभी उन बातों को कह सकता था जो उसने कहीं थीं? कौन कभी उन कामों को कर सकता था जो उसने किये? उसकी अद्वितीयता ने सिद्ध किया था, कि वह परमेश्वर था। कोई ऐसा भविष्यद्वक्ता या अन्य कोई नहीं था, जो वह कर सकता था जो उसने किया था; कौन मरे हुए को कब्र में से बाहर बुला सकता था; और कौन आकाश को रोक सकता था; उस ने जो चाहा वह किया। वह परमेश्वर था। कौन कभी उसके स्थान पर खड़ा हो सकता था? कौन? वह और कुछ नहीं, वरन सिद्ध, अविनाशी परमेश्वर ही हो सकता था जो देहधारी हुआ था, और उस ने ही हमारे बीच में डेरा किया था।49कोई भी कदाचित ऐसा नहीं है जिसकी तुलना उससे की जाये। वह जगत में खुद अपने ही ढंग से जीया। कभी भी कोई भी मनुष्य उसके जैसे नहीं बोला। जब कभी उसने अपना मुँह खोला, तो इसके विषय में कुछ ना कुछ होता था। वह बात किसी और से बिलकुल अलग होती थी। किसी ने कहा था, कि वह तो सिर्फ एक साधारण सा मनुष्य ही था। मैं इस बात का इंकार करता हूँ। वह तो परमेश्वर था; वह यही था। क्योंकि कोई भी कदाचित उसके जैसे नहीं बोला था, कोई भी मनुष्य उसके जैसे नहीं बोल सकता था; क्योंकि वह तो खुद जीवित वचन था जो देहधारी हुआ था; वह तो परमेश्वर की परिपूर्णता का प्रकटीकरण था।मैं यह स्वीकर करूंगा, कि उन नबियों के पास अपना सन्देश था। उनके पास तब वे थे; उन के पास इस समय भी वे हैं। परन्तु उस में तो परमेश्वरत्व की परिपूर्णता सदेह वास करती थी, जो प्रकट हुई थी; वह तो अद्वितीय था; और वही एक ऐसा था जिसे अपनी उस सम्पूर्ण महान सामर्थ सहित जो उसके पास थी, मामले का सामना करना था। और वह पूरी तौर से संसार का महाराजा हो सकता था; वह महाराजा होगा; और वह अभी भी अपने पवित्र लोगों के लिए महाराजा है।50वह वहाँ खड़ा था। कोई मनुष्य उससे क्या ही निर्धन होगा; उसके पास तो अपना सिर टिकाने तक की जगह ना थी; जबकि वह जानता था, कि कहाँ एक मछली ने सिक्का निगला है। वह क्या ही मनुष्य था जिसने पानी के उन बड़े बड़े मटकों को दाखरस बना डाला था; और उसके पास अपना सिर टिकाने तक की कोई जगह नहीं थी? उसे तो उन दायित्वों का सामना करना था जो उसके हाथों में सौंपे गये थे। वह क्या ही मनुष्य था जो किसी मरे हुए को जो चार दिन से कब्र में सड़ गल चुका था, जिला सकता था? क्या वह अपने आप को नहीं बचा सकता था? निश्चय ही, वह ऐसा कर सकता था; लेकिन अगर उस ने ऐसा किया होता, तो उस ने हमें ना बचाया होता। उसे तो दायित्वों का सामना करना था। और वह वचन के प्रति आज्ञाकारी था। जहाँ आदम अवज्ञाकारी था-और उसने एक छोटा मार्ग अपनाया था, ताकि तार्शिश को चला जाये; परन्तु वहीं यीशु ने अन्यजातियों की ओर जाने के लिए नीनवे का मार्ग लिया, ताकि अपने लिए एक दुल्हन प्राप्त कर ले। मैं आज रात्रि आनन्दित हूँ, कि उसने ऐसा किया था। हमें इन असलियतों का सामना करना चाहिए, कि हम उस के हैं, और हम से दुनिया ले ली जाये। आमीन!51हर एक मनुष्य को इसका सामना करना है, उन्हें उस दायित्व का सामना करना है, जो उनका परमेश्वर के समक्ष है। आइये हम उदाहरण के लिए नूह को लें; नूह के पास एक जिम्मेदारी थी…नूह, मूसा, एलिय्याह तथा उन शेष सभों को प्रत्येक काल में दायित्व का सामना करना था। और उन्हें ऐसा करना था। परन्तु यही कारण था, कि वे उस समय में भेजे गये थे…नूह पर उसके वैज्ञानिक युग में दृष्टि डालिए,कैसे उसे उस बात का सामना करना था, जो अत्याधिक अवैज्ञानिक थी। क्यों, कोई भी ऐसा कारण नहीं था, कि वह क्यों अवैज्ञानिक नहीं हो सकती थी। समझे? बल्कि..देखिए, वह बात तो अवैज्ञानिक थी।

क्यों, उन्होंने कहा था, कि आकाश से बारिश होने वाली है…उनके यहाँ…कभी भी आकाश से वर्षा की एक बूंद तक नीचे नहीं गिरी थी। खैर, अब उसे इसका सामना करना था। और परमेश्वर ने कहा था, कि वर्षा होने वाली है।52और फिर वह…फिर बिना कामों के विश्वास मुरदा है। अगर आप कहते हैं, “मैं इसका विश्वास करता हूँ”, और आप उस पर कोई काम नहीं करते हैं….ठीक ऐसा ही सन्देश के मामले में भी होता है; यदि आप कहते हैं, “मैं इसका विश्वास करता हूँ। लेकिन आप उस पर कोई काम नहीं करते हैं, तो आपका इससे क्या भला होगा? समझे? नूह अपना हथौड़ा लेकर काम करने लगा था, और उसने जहाज़ का निर्माण करके उसकी पुष्टि की, जिसके विषय में वह बोल रहा था। यही है वह जो हमें भी करना है। हमें काम करना है, और हमें अपने कामों से अपना विश्वास प्रमाणित करना है। हमारे काम ही हमारे विश्वास को प्रमाणित करते हैं।मूसा को ऐसा ही करना था, और एलिय्याह को ऐसा ही करना था। हर एक भविष्यद्वक्ता को अपने युग में खड़ा होना था और उन दायित्वों का सामना करना था। परन्तु उन में से बहुतेरों ने वैसा नहीं किया था जैसा योना ने किया था। वह तो भाग गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया था।53ध्यान दीजिए! “इसके विरूद्ध ऊँचे स्वर से चिल्लाकर कह”। ओह, मेरे परमेश्वर! ऐसा ही है; यही तो करने का विषय है। इसके विरूद्ध ऊँचे स्वर से चिल्लाकर कह। यही तो इसे रोकने का काम है। वह ऐसा करने जा रहा होता है, और उन लोगों से कहता है, “कहो, मैं तुम लोगों के साथ शामिल होने आया हूँ। आप जानते हैं-मैं विश्वास करता हूँ, मैं तुम्हें बताऊँगा, कि मैं क्या करूंगा, मेरे पास यहाँ पर बस एक छोटा सा काम है; और मेरा विश्वास है, कि मैं उसे कर सकता हूं-मैं हम सभों को एक साथ जमा करूंगा, और यह, वह, या अन्य कुछ करूंगा”; लेकिन यह तो इसके विरूद्ध चिल्लाहट थी। जब आपको किसी बात के खिलाफ ऊँचे स्वर से चिल्लाना होता है…अब देखिए, उसे तो प्रत्येक उस चीज के खिलाफ चिल्लाना था, जो वहाँ पर थी; उसे तो नगर के विरूद्ध चिल्लाना था; उसे तो उनके कार्य-कलापों के विरूद्ध ऊँचे स्वर से चिल्लाना था, उसे तो उनकी कलीसिया के विरूद्ध चिल्लाना था, उसे तो उनके नबियों के विरूद्ध ऊँचे स्वर से चिल्लाना था, उसे तो उनके प्रचारकगणों के विरूद्ध चिल्लाना था, उसे तो उनके याजक-पुरोहितों के विरूद्ध चिल्लाना था; उसे तो उनकी कलीसियाओं के विरूद्ध चिल्लाना था; उसे तो उसके विरूद्ध ऊँचे स्वर से चिल्लाना था; उसे तो सम्पूर्ण नगर के विरूद्ध ऊँचे स्वर से चिल्लाना था; उसे तो इसके विरूद्ध चिल्लाना था।नूह अपने युग के विरूद्ध ऊँचे स्वर से चिल्लाया था। निश्चय ही, उसने ऐसा ही किया था। वह अपने युग की कलीसियाओं के विरूद्ध चिल्लाया था। यकीनन, मूसा अपने युग और लोगों और पुरोहितों-याजकों तथा ऐसे ही और दूसरे लोगों के विरूद्ध ऊँचे स्वर से चिल्लाया था। वह जंगल में सभी मार्गों से होकर चिल्लाया था। और वह हर एक दो राहों पर ऊँचे शब्द से चिल्लाया था; वह बराबर लोगों पर चिल्लाता रहा। एलिय्याह अपने दिनों में बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं था; क्योंकि वह उस युग के खिलाफ ऊँचे स्वर से चिल्लाया था। निश्चय ही, ऐसा ही था।54यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला अपने युग में बिलकुल भी लोकप्रिय नहीं था। वह अपने युग के विरूद्ध ऊँचे शब्द से चिल्लाया था। उसने राजा से लेकर…देश के उच्च पदासीन लोगों से कहा था….राजा ने अपने ही भाई की पत्नी से विवाह कर लिया था। एक सुबह यूहन्ना को विवाह और तलाक पर प्रचार करना था। अतः वह उसके विरूद्ध चिल्लाया था, और उसने कहा था, “तेरे लिए यह उचित नहीं है, कि तू उसे रखे।”और उसे इसका ये दाम चुकाना पड़ा, कि उसके बाद उसे अपना सिर कटवाना पड़ा। मगर वह ऊँचे शब्द से चिल्लाया था; और वह अपने कर्तव्य पर अटल बना रहा था। उसने कभी भी तर्शीश जाने वाला जहाज नहीं लिया था, और यह नहीं कहा था, “ठीक है, हेरोदियस, मैं तुझ से सहमत हो जाऊँगा। यह सब ठीक है, जब तक तुम यह सोचते हो, कि वह एक अच्छी स्त्री है; वह एक अच्छी पत्नी बन रही है; तुम आगे बढ़ते रहो।” ओह दया होवे! समझे आप? आप देखते हैं, कि वे बर्तन को पोंछने वाले पुछाड़े ही हैं; जी हाँ..बस हर एक छोटी से छोटी बात….क्यों, यह और कुछ नहीं, वरन गंदी प्लेटों को साफ करना है।55परन्तु ध्यान दीजिए! यूहन्ना वैसा नहीं था। यूहन्ना ने तो ठीक उसका सामना किया था। उसने कहा था, “तेरे लिए यह उचित नहीं है, कि तू उसे रखे।” जी हाँ, श्रीमान! वह इसके विरूद्ध खड़ा हुआ था।वे कभी नहीं भागे थे; यूहन्ना भागा नहीं था, वे तो खड़े रहे थे, और उन्होंने सच्चाइयों का सामना किया था। मूसा ने एक बार योना के जैसे ही भागने का यत्न किया था, लेकिन परमेश्वर उसे वापस लेकर आया। उन में से बहुतेरों ने इससे दूर भागने की चेष्टा की थी; उन्होंने आरम्भ किया….परन्तु देखिए, अगर परमेश्वर ने आपको बुलाया है, तो आप सुनिश्चित होते हैं, कि परमेश्वर सन्देश में-सुसमाचार में है। तब ऐसा कुछ भी नहीं होता है जो आपको उससे दूर फेर सके। इसने योना को दूर नहीं फेरा था। जी नहीं, श्रीमान!56पूर्वकाल का आमोस ऊँचे शब्द से चिल्लाकर बोला, “सिंह गरजा, कौन ना डरेगा; परमेश्वर बोला कौन भविष्यवाणी न करेगा?” जब आप देखते हैं, कि परमेश्वर बोलता है, और कहता है,कि कोई निश्चित घटना घटित होगी, तो यह बिलकुल ठीक वैसी ही होती है; तो फिर कौन भविष्यवाणी न करेगा?सिंह गरजता है, और हर कोई डर जाता है। जी हाँ, श्रीमान! काश कभी आप जंगल में किसी सिंह के गरजने की आवाज़ सुनें। आप यहाँ पर पिंजरे में बंद उन पालतू सिहों की, जो पिंजरे में चारों ओर चलते फिरते हैं, मिमियाने की आवाज सुन सकते हैं। लेकिन आपको एक बार असली जंगली सिंह के गुर्राने की आवाज सुननी चाहिए। उसके गुर्राने से चट्टानें पहाड़ से पाँच सौ गज़ दूर अलग जा गिरेंगी। मैं नहीं देखता हूँ, कि उनके फेफड़ों में कहाँ से उतनी गुर्राहाट आती है…वह अपना सिर नीचे को करता है, और अपने घने रोमों को ऊपर को खड़ा करता है, मैंने कभी भी वैसा कुछ नहीं सुना है…जैसा जब वह अपने फेफड़ों में से उस जोरदार गरजना को बड़ी गुर्राहट के साथ छोड़ता है, तो केनयन बाहर निकल कर लुढ़कने लगते हैं। उसे सुनकर कौन भयभीत नहीं हो सकता है? लोग कहते हैं, यदि आप कभी सिंह के द्वारा जान से मारे जाते हैं, तो यह बहुत ही पीड़ा रहित होता है। इससे पहले कि वह आपको झपट मारे, आप पर मृत्यु का सा भय छा जाता है। देखिए, आप इस पर ध्यान नहीं देते हैं। वह आपको अपनी ज़ोरदार भंयकर गुर्राहट से भयभीत कर देता है; और वह एक सेकंड़ से भी कम समय में आप पर छलांग लगा देता है।57उसने कहा था, “सिंह गरजा, कौन न डरेगा? और परमेश्वर बोला, कौन भविष्यवाणी न करेगा?” जब आप परमेश्वर को कोई काम करते हुए देखते हैं….आप कहते हैं, “हो सकता है, कि शायद मैं एक भविष्यद्वक्ता नहीं हूँ….” योना ने कहा था…“हो सकता है, कि मैं भविष्यद्वक्ता नहीं हूँ, या मैं भविष्यद्वक्ता का पुत्र नहीं हूँ, परन्तु परमेश्वर बोला, कौन भविष्यवाणी नहीं करेगा।”हो सकता है, कि मैं एक भविष्यद्वक्ता नहीं हैं, हो सकता है, कि मैं यह, वह या अन्य कोई नहीं हूँ; लेकिन जब मैं परमेश्वर को कुछ करते हुए देखता हूँ, और मैं उसे यहाँ पर वचन में देखता हूँ, और परमेश्वर ने ही ऐसा करने की प्रतिज्ञा की हुई है, तो भला कौन शान्त और चुपचाप बैठा रह सकता है? निश्चित रूप से परमेश्वर ने ही इसे किया है।ना तो हम धार्मिक मतों के पीछे छिप सकते हैं, और ना ही हम इन सारी सहभागिताओं के साथ जो तर्शीश को जा रही हैं, जा सकते हैं; हम उन सहभागिताओं के साथ जाना नहीं चाहते हैं।58परन्तु बहुतेरे लोग वैसा करने की चेष्टा करते हैं जैसा आदम ने किया था, वे किसी तरह से विकल्प को अपनाने की चेष्टा करते हैं-वे कोई और रास्ता ढूंढ निकालने की चेष्टा करते हैं—और परमेश्वर का सामना करने के लिए कोई विकल्प बनाते हैं, जबकि वे जानते हैं, कि वे गलती पर हैं। उसने सत्य का आमना-सामना किया, और अपनी पत्नी के साथ चलता बना, और उसने ठीक वही किया जो परमेश्वर ने उससे करने के लिए मना किया था। वह बढ़ कर आगे गया, और उसने इसे किसी भी तरह से किया; और उसके बाद उसने खुद अपने को नंगा पाया; आदम और हव्वा दोनों ही अदन की वाटिका में नंगे थे। तब उनकी आँखें खुल गईं, और वे जान गये, कि क्या सही है, और क्या गलत है। और तत्पश्चात उसने एक विकल्प ढूंढने का यत्न किया, जिससे वह खुद अपने को ढांक सके। अब देखिए, ठीक इसी तरह से हम आज करते हैं, हम बहाने बनाते हैं, और कहते हैं, “ठीक है, मैं तुम्हें बताता हूँ, अगर यह यहाँ होता, अगर यह…” या कहते हैं…..यदि—यदि—यदि, यह तो बिलकुल ठीक वैसा ही करना है। देखिए, परन्तु आपको तो इसका सामना करना चाहिए। या तो यह गलत है, या यह सही है। और यदि यह सही है, तो आइये हम इसी के साथ बने रहें। यदि यह गलत है, तो हम इससे अलग हो जायें। हम बस यही करें। वह पायें जो…यह मालूम करें, कि क्या सही है। आप बहुत ज्यादा इन्तज़ार नहीं करना चाहते हैं। आइये हम यह ज्ञात करें, कि सत्य क्या है; और सही क्या है, और फिर उसी पर ही टिके रहें। हम जानते हैं, कि यह सत्य है।59अब हम आज यह देखते हैं, कि हमारे लोग ऐसे हैं, कि …..ऐसा प्रतीत होता है, कि मानो कलीसियाओं में से सारी सत्यनिष्ठा ही बाहर हो गई है। मैं….में था….मैं…हम उस अमूल्य बहन के घर में रह रहे हैं जो इसी कलीसिया में आती है; हो सकता है, कि शायद वह आज रात्रि यहीं पर बैठी हो। और वो अपने घर को लोगों को किराये पर देती हैं; वो उस जगह के मामले में हमारे प्रति बहुत भली रही हैं, उस जगह को देने के लिए वह बहुत भली रही हैं, और इसलिए मैंने उनका नाम बता दिया होता, परन्तु हो सकता है, कि वो नहीं चाहती हैं, कि मैं ऐसा करूं। और वो हमारे प्रति बहुत मधुर रही हैं। ठीक है, हम यकीनन उसका खुलासा नहीं करना चाहते हैं। परन्तु वह एक बहुत ही प्यारी स्त्री रही है। और उसी घर में एक कोने में एक टेलीविज़न था। हमने उसके डयूप्लेक्स वाले कमरे लिये थे। मेरा परिवार काफी बड़ा है, और आप जानते हैं, कि मेरे परिवार में कई युवा छोटे छोटे बच्चे हैं। और उन में पलंग हैं और उन में काफी जगह है। और सभी चीजों का ढेर ऊपर तक लगा हुआ है, और आपको बाहर और अंदर जाने के लिए इस में से होकर और उस में से होकर जाना होता है।60और तब वहाँ पर एक टेलीविज़न था। और ये बच्चे इसी टेलीविज़न पर उन गीतों को जो उस पर रविवार को आते हैं, देखने के लिए गये। और आप जानते हैं, कि यह आपको लगभग शर्मसार कर देगा, अगर कहीं पर वह असली-सच्ची मसीहियत न हो जहाँ आप अपना हाथ रख सकते हैं, और यह देखकर आप लज्जित हो जायेंगे, जिसे लोग मसीहियत कहते हैं। क्यों ऐसा लगता है, कि इस में सारी की सारी सत्यनिष्ठा ही बाहर निकल गई है। क्यों, वे ऐसे नहीं लगते हैं, वे ऐसे नहीं लगते हैं जैसे…क्यों, जिस तरह से वे वहाँ पर खड़े होते हैं, और वहाँ पर एक दूसरे पर मुक्के चलते हैं और एक दूसरे से बुरी तरह से लड़ते-झगड़ते हैं, और वे मसीही गीत गाने की कोशिश भी करते हैं और इसी प्रकार का सब कुछ करने की कोशिश करते हैं, और ऐसे ऐसे चुटकुले छोड़ते हैं जो एक नाविक भी नहीं छोड़ेगा, और वे सभी तरह की बाते बनाते हैं, और बच्चे भी ऐसा सा ही किये चले जा रहे होते हैं, यह देखना क्या ही भंयकर बात है। आप जानते हैं, ऐसा लगता है, कि मानो मसीहियत की पवित्रता अपनी जगह खो चुकी है।61अब देखिए, मैं किसी कलीसिया में जाता हूँ, और..और देखता हूँ, कि वहाँ पर पास्टर ऊपर उठता है, और इसकी उद्घोषणा करता है, कि एक…एक जल-परी बनने जा रही है। सारी स्त्रियाँ स्नान वाले इन परिधानों में आयेंगी और तैराकी होगी। उनकी एक प्रतियोगिता होगी; इन स्त्रियों की तैराकी की एक प्रतियोगिता होगी। और उनकी किसी किस्म की एक पार्टी होने जा रही है, और वे बहुत सारा चिकन तलेंगे, और बैन्को गेम खेल खेलेंगे, और इसी प्रकार के इन दूसरे कार्यकलापों को करेंगे। ऐसा देख कर मुझे तो लगता है, कि इसने मसीहियत में से असली-सच्ची संज़ीदगी बाहर निकाल दी है, और लोग किसी और दूसरी चीज के प्रभाव में चले जा रहे हैं।62जब मैं यहाँ पर आ रहा था, तो मैंने देखा था…हमें ज्ञात होता है, आप यह जानते हैं, कि हमें मालूम होता है, इस ठंडे देश में हम अपनी बहनों को गर्म देशों की अपेक्षा कहीं ज्यादा आधे-अधूरे कपड़े पहनते हुए देखते हैं। देखिए, यही हकीकत है। वहाँ जहाँ सचमुच में बहुत ज्यादा गर्मी होती है, बहुत ज्यादा स्त्रियाँ उन छोटी छोटी नीकरों को नहीं पहनती हैं। परन्तु यहाँ जहाँ पर सर्दी हैं, वे ऐसा करती हैं। देखिए, ऐसा है…उन्हें इसका एहसास नहीं है, कि यह शैतान ही है जो उन से ऐसा करा रहा है। समझे? अब, अगर उससे आराम मिल रहा होता;

अगर उससे आपकी कोई सहायता हो रही होती; तो फिर यह एक अलग बात होती। एक पुरूष होने के नाते मैं यह सोचता हूँ; पुरूष इन्हें पहने तो यह उन पर बेअसर लगता है…परन्तु..परन्तु आप पुरूष पर कोई ध्यान नहीं देंगे। परन्तु स्त्री के विषय में यह बात है, कि उनकी देह पुनीत है, और स्त्री को अवश्य ही उसे उसी तरह से रखना चाहिए। और उन पुराने…को देखना…63आप आज लोगों को देख सकते हैं। दो आत्माएँ हैं। और उन में से एक तो पवित्र आत्मा है; और दूसरी वाली ना पाक आत्मा है, और इंसान उन में से किसी एक के चलाये ही चलता है। और वे दोनों ही धार्मिक हैं। अब देखिए, जी हाँ, यह एक विचित्र बात है, कि वे दोनों ही धार्मिक हैं। और जैसे एसाव और याकूब थे, वे दोनों ही धार्मिक थे; जैसे कैन और हाबिल थे, वे दोनों ही धार्मिक थे; जैसे यहूदाह और यीशु थे, वे दोनों ही धार्मिक थे। और ठीक वैसा ही हम आज देखते हैं, हम देखते हैं, कि वे दोनों पक्ष धार्मिक हैं। देखिए, यह ठीक वही आत्मा है। लोग तो मर जाते हैं, पर आत्मा नहीं मरती है। वह तो आगे बढ़ती रहती है। वे दोनों आत्माएं धार्मिक हैं। उन में से एक तो पवित्र आत्मा के काबू में रहते हैं, और वह उस प्रकार का जीवन व्यतीत करते हैं जैसे उन्हें जीवन व्यतीत करना चाहिए, और भक्ति और ईमानदारी के साथ चलते हैं। वे आप से आपकी कोई कौड़ी तक नहीं हड़पते हैं, और वे..वे तो आप की सहायता करने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, उसे ईमानदारी के साथ करते हैं। और दूसरे तो करेंगे….वे वैसे ही अच्छे होते हैं जैसे वे अच्छे हो सकते हैं। और वहीं दूसरे वालों को हम इनके बिलकुल उल्टा ही देखते हैं। और फिर भी वे दोनों ही धार्मिक आत्माएं हैं, वे दोनों ही ऐसी ही हैं; उन दोनों में से एक तो पवित्र आत्मा है; और दूसरी वाली ना-पाक आत्मा है। और अगर आप ध्यान दें, तो आप देखेंगे, कि चाहे वे अपने आपको धार्मिक कहने का दावा कर रहे हो, लेकिन फिर भी वे आपका हंसी-ठट्टा उड़ायेंगे, और आपको “होली-रोलर कहेंगे। वे वह सब कुछ करते हैं जो वे कर सकते हैं। वे परमेश्वर के ना बदलने वाले वचन को ऐसे नज़रान्दाज कर रहे हैं, जैसे मानो वह कभी लिखा ही नहीं गया हो, देखिए।64आप कह सकते हैं, “अब, यहाँ देखिए, यदि..यदि बपतिस्मा…” “मैंने पवित्र आत्मा पाया है।” और आप वहाँ खड़े हुए अपने हाथ में सिगार लिये हुए फूक रहे होते हैं?“ जी हाँ, मेरे पास पवित्र आत्मा है। मैं नहीं सोचता हूँ, कि थोड़ी सी शराब पी लेने में कोई बुराई है। मैं नहीं सोचता हूँ, कि इस में कोई बुराई है…”देखा? और क्या आप ने ध्यान दिया है, कि वे कहते हैं, “मैं नहीं सोचता हूँ?”..परन्तु परमेश्वर इससे अलग ही सोचता है; आप देखिए, कि वह तो अपने वचन के अनुसार ही सोचता है। समझे? देखिए, वे तो..और वे तो ऐसा करके बस इस वचन पर उतना थूकते हैं जितना कि वे थूक सकते हैं। यह बिलकुल ठीक बात है।65जब दाऊद को उसके राज-सिंहासन पर से उतार कर देश निकाला दे दिया गया था, तो यह लंगड़ा-अपंग आदमी लंगड़ाता हुआ उस समय बाहर निकलकर आया। दाऊद जैतून पर्वत पर से होकर रोता हुआ बाहर जा रहा था, और उसने पर्वत पर ऊपर चढ़ते हुए वापस नीचे दृष्टि डाली। और यह छोटा लंगड़ा व्यक्ति लंगड़ाता हुआ वहाँ पर आया, और वह दाऊद पर थूक रहा था। और उस सुरक्षाकर्मी ने कहा, “क्या मैं….मैं उस कुत्ते का सिर उसके धड़ से काट कर अलग कर दूंगा, जिसने मेरे राजा पर थूका है?”दाऊद बोला, “उसे रहने दे।” देखिए, उस ने उस पर थूका था। उसके लगभग आठ सौ साल बाद उन्होंने उसके पुत्र पर, यीशु मसीह पर भी थूका था। और वे आज फिर से इस पर थूक रहे है, जैसे यह कभी….ना हुआ हो..वे इसके प्रति कोई श्रृद्धा नहीं रखते हैं, वे इस पर कोई विचार नहीं करते हैं, और वे तो बस इससे अपना मुख फेर कर इससे दूर चले जाते हैं, और वे तो आपके मुँह पर ही आपकी हंसी उड़ाते हैं। ऐसा क्यों है? क्योंकि वे तर्शीश के जहाज पर हैं। ऐसा ही है…यह ऐसा करता है,कि परमेश्वर की दुहाई दी जाए। आपको तो बुराई के खिलाफ ऊँचे शब्द से बोलना है, पाप के खिलाफ ऊँचे शब्द से बोलना है, उसके खिलाफ ऊँचे शब्द से बोलना है जो गलत है। अब, याद रखें, कि ऐसा होगा।जी हाँ, आप यह समय जानते हैं। आप जानते हैं, मैं दो घन्टे के अंतर पर हूँ। और टयूसान में सात बज कर दस मिनट हुए है, और…और मैं अब यहाँ पर एक किस्म से अपनी जगह से बाहर हो रहा हूँ। यह बिलकुल ठीक बात है।66अब, याद रखें, हमें इस के लिए उत्तर देना होगा। स्मरण रखिए, जिन्होंने मसीह पर थूका है, उन्हें इसके लिए उत्तर देना होगा। जब दाऊद अपने निष्कासन से, अपनी उस हालत से जब उसे देश निकाला दे दिया गया था, अपने देश निकाले से वापस लौटकर आया, तो याद रखें, कि यह व्यक्ति अपने मुँह के बल गिर पड़ा और दया के लिए ऊँचे शब्द से दुहाई दी। जब दाऊद बाहर जा रहा था, तो उसी ने ही दाऊद पर थूका था, और जब दाऊद वापस लौट कर आया, तो अब वही उसके चरणों को अपने ही आँसूओं से लगभग नहलाने के लिए तैयार था। और जिन्होंने यीशु को बेधा है वे किसी दिन यीशु को देखेंगे। और जो यीशु को आज बेध रहे हैं, वे भी किसी दिन यीशु को देखेंगे। किसी दिन उनके साथ ऐसा ही फिर से होगा। स्मरण रखिए, प्रकाशितवाक्य 22वाँ अध्याय बताता है, कि वह हम से यह चाहता है, कि हम उस हर एक वचन का पालन करें जो लिखा हुआ है; हर एक वचन का पालन करें।67अब हम जानते हैं, कि उसकी उपस्थिति यहाँ पर है। यह प्रमाणित हो चुकी है। हमारे पास इसका प्रमाण है। हम भरोसा कर रहे हैं, कि आने वाले सप्ताह में यह हमारे मध्य में प्रमाणित होना ज़ारी रहेगा; कि बीमार चंगे हो रहे होंगे, और बड़े बड़े काम हो रहे होंगे। हम कोई लोकप्रिय आइडिया नहीं चाहते हैं। हम तो सच्चाई चाहते हैं। और हम नहीं चाहते हैं….हम नहीं चाहते हैं….हम और किसी की ओर नहीं वरन उसी की ओर अपना मुख करना चाहते हैं जिसे परमेश्वर ने सत्य बतलाया है। परन्तु, यह बात पक्की है, कि तेरे पाप तुझे सदा ही ढूंढ निकाल लेंगे। अगर वे यहाँ पर ऐसा नहीं करते हैं, तो वे न्याय के दिन पर तुझे पकड़ लेंगे। अतः आप..आप अब, आपको कहीं न कहीं तो पकड़ ही लेंगे। जी हाँ, श्रीमान!परन्तु अगर आप एक सच्चे मसीही हैं, आप तो वैसे ही एक बुलाये हुए हैं, जैसे योना बुलाया हुआ था, और परमेश्वर ने पहले ही आप का दाम चुका दिया है। कैसे भी हो आप उस जहाज से जो तर्शीश को जा रहा है, उतर जायें । परमेश्वर ने ही आपको इस जीवन के लिए पहले से ही ठहराया है। जी हाँ, श्रीमान! यदि आप परमेश्वर के बुलाये हुए सच्चे बच्चे हैं, तो आप मसीह के पास आयेंगे। आप उसकी परिपूर्णता में आ जायें। आपका किस राह के लिए दाम चुका दिया गया है? उसे नीनवे के लिए चुका दिया गया है, ना कि ताश के लिए। आपको पहले से ही ठहरा दिया गया है। आपका जहाज…ठीक इस समय एक जहाज जाने को व तैयार है, वह अपने मार्ग पर है। अतः करने के लिए केवल एक ही काम है, कि उस में चढ़ जाया जाये। और अगर आप परमेश्वर की समानता में थे, तो आपको तब तक कदापि चैन नहीं मिलेगा जब तक कि आप…68जैसाकि कुछ समय पहले मेरा भाजा था। अब से लगभग दस साल पहले वह एक जगह से दूसरी जगह भटकता फिरा था। किसी सुबह वह इस कलीसिया में जाता, तो किसी सुबह कैथोलिक कलीसिया में जाता, और वह इस वाली शिक्षा को ग्रहण करता, क्योंकि वहाँ पर उस बात को किसी होली फादर ने कहा हुआ होता है, और वह यहाँ से किसी और शिक्षा को अपनाता, और यहाँ से किसी और शिक्षा को अपनाता। इस सब से क्या निष्कर्ष निकलता है?समझे? और वह अभी भी भूखा और प्यासा है। मैंने कहा था, “बेटे, तुम्हारी जगह तो वेदी पर है जहाँ तुम नत-मस्तक हो जाओ।” इससे बचने का कोई भी तरीका नहीं है।जब कभी परमेश्वर ही आपको बाहर निकाल लेता है, तो उसके बाद आपके लिए बेहतर होगा, कि आप वैसे बातों को ती दें और आगे बढ़ते रहें। यही सारी की सारी बात है।69स्मरण रखिए! ओह मेरे परमेश्वर! ठीक है, परमेश्वर जहाज में था। परमेश्वर तूफान में था। परमेश्वर मछली में था। जहाँ कहीं भी वह मुड़ा, परमेश्वर वहाँ पर था। देखिए, जहाँ भी आप जाते हैं, परमेश्वर वहाँ पर होता है, और वह आपको बराबर ढूंढता रहता है।

अतः क्यों हम और ज्यादा इंतज़ार करना चाहते हैं? हम बस ठीक इसी समय ही इस बेदारी को शुरू कर डालें। यह सही बात है। आप किस बात का इंतज़ार कर रहे हैं? हम विश्वास करते हैं, कि प्रभु का आगमन अति निकट है, और वह एक दुल्हन लेने आ रहा है, और यह तैयार है। और हम ताश के लिए कोई जहाज़ नहीं चाहते हैं। हम तो नीनवे को जा रहे हैं। हम महिमा की ओर जा रहे हैं। आमीन। यह सच है। और हम वहाँ जा रहे हैं जहाँ परमेश्वर आशीष देगा, और यही है वह जो हम करना चाहते हैं।70हम अपने ह्रदय को लिये हुए परमेश्वर की उपस्थिति में पड़े रहें..अपने हाथों को लिये हुए नहीं, पर अपने ह्रदय को परमेश्वर के सम्मुख लिये हुए तब तक पड़े रहे, जब तक कि वह अपनी महिमा की किरणों से हमें उस प्रकार से पूरी तरह से पका कर सुखा नहीं देता है; और हमें उसकी भालाई से पका नहीं डालता है, और हमें उस असलियत तक पका नहीं डालता है जहाँ हम दूसरों को दिखा सकते। हैं, कि यीशु मसीह जिन्दा रहता है। ओह, मेरे ख़ुदा! हम उसका विश्वास करना चाहते हैं।71और याद रखिए, जहाँ कहीं भी योना गया, परमेश्वर वहाँ पर गया; परमेश्वर पानी के जहाज़ में था; परमेश्वर तूफान में था; परमेश्वर मछली में था। जहाँ कहीं भी योना गया, वह उसके साथ साथ गया, जब तक कि उसकी सिद्ध मर्जी पूरी ना हो गयी। यह सच है। और अगर कभी परमेश्वर आपके पीछे है, और हो सकता है, कि आप यहाँ पर चकमा दे कर भागते हों, और वहाँ पर चकमा दे कर भागते हों, परन्तु आप तब तक अभागे ही रहेंगे, जब तक कि आप वापस नहीं आ जाते हैं और आप उसके लिए ठीक वहीं से काम करना शुरू नहीं कर देते हैं जहाँ से आप ने पहली बार उसके लिए काम करना शुरू किया था। समझे? परमेश्वर की उपस्थिति से दूर ना जाये, परमेश्वर की उपस्थिति से दूर ना भागें। इसके सम्मुख आयें। आप विश्वास करें, कि यह सत्य है, इसके बाद ही…अगर यह सत्य है तो यह जीने योग्य है, यह मरने योग्य है, यह अन्य कुछ भी करने के योग्य है। और अगर वह कभी हम पर इसे प्रमाणित कर चुका है, कि यह सत्य है, तो फिर इसके बाद हम इससे कहीं भी दूर नहीं भाग सकते हैं। जहाँ कहीं आप जायें वह ठीक वहीं वैसा ही एक सा होगा। आप ऐसा कर नहीं सकते हैं।72उसे तो इसे अपने प्रदान किये हुए नबी के द्वारा, उस एक के द्वारा जिसे उसने पहले से ही वहाँ नीचे जाने के लिए ठहराया हुआ था, करना था; और उस के द्वारा ही उस सन्देश को कहलवाना था। अब, ऐसा दिखाई पड़ता है जैसे वह किसी और नबी को भेज सकता था; परन्तु उसने तो इस काम के लिए योना को ही ठहराया हुआ था; और यहाँ तक कि एलिय्याह भी इसे नहीं कर सकता था; यिर्मयाह भी इसे नहीं कर सकता था, मूसा भी इसे नहीं कर सकता था। यह तो योना ही था जिसे नीनवे जाना था। इसके बारे में यही सारी की सारी बात है। परमेश्वर ने ही उसे यह कार्यभार सौंपा था, और उसे बताया था, कि वह जाये। और जब वह कहता है, “योना, वहाँ जा- नीनवे को जा”; तो इसे और कोई नहीं, वरन योना ही कर सकता था। और जब परमेश्वर आप से कुछ करने के लिए कहता है, तो आपको उसे करना ही होता है; उसे कोई और नहीं कर सकता है। देखिए, हमें उसका सामना करना होता है, और…और जाकर उसे करना होता है।हम विश्वास करते हैं, कि हम उस समय में रह रहे हैं जब परमेश्वर कोई काम कर रहा है। हम विश्वास करते हैं, कि इस समय हम उन्हीं के मध्य में रह रहे हैं। मैं विश्वास करता हूँ, कि आज रात्रि मैं उस मंड़ली को प्रचार कर रहा हूँ जिसने अपने को न्यौछावर किया हुआ है, और जो पक जाने की बाट जोह रही है। मैं..मैं सचमुच में इस बात का अपने सम्पूर्ण ह्रदय से विश्वास करता हूँ। मैं कहूँगा, कि इस समय यह बिलकुल ठीक वैसा ही है जैसा यह हमेशा ही रहा है।73अब, हम विश्वास करते हैं, कि वह घड़ी आ पहुँची है जब यूहन्ना 14:12 अवश्य ही पूरा हो जाना चाहिए। हम..हम विश्वास करते हैं, कि मलाकी 4 को अवश्य ही पूरा हो जाना चाहिए। हम विश्वास करते हैं, कि लूका 17:30 को अवश्य ही पूरा हो जाना चाहिए। हम विश्वास करते हैं, कि वे सारी भविष्यवाणियाँ जिनके बारे में उसने कहा था इस दिन में अवश्य ही पूरी हो जानी चाहिए। हम विश्वास करते हैं, कि उन्हें अवश्य ही पूरा हो जाना चाहिए; और हम यकीन करते हैं, कि ठीक इस समय हम उन्हें पूरा होते हुए देख रहे हैं। यह बिलकुल सच बात है।भागना बंद कर दें। उसकी उपस्थिति में से बाहर ना निकलें, बस आगे बढ़कर उसकी उपस्थिति में जा पहुँचें। यह सही बात है। और मैं जानता हूँ, कि आप इसी बात की लालसा भी कर रहे हैं। क्योंकि मैं देख चुका हूँ, कि टेक्सस तथा लुइसयाना तथा चारों ओर सभी जगह से लोग मोटरगाड़ियाँ चला-चला कर आये हैं। हम यहाँ पर इसी लिए हैं, कि हम उसकी उपस्थिति से ना भागें, वरन भागकर उसकी उपस्थिति में आ जायें। वापस लौट आओ, वैसा ना करते रहो जैसा योना करता रहा था…(टेप में रिक्त स्थान-सम्पा.)अगर आप इस बात में हैरान-परेशान हो रहे हैं, कि किस ओर जायें, या क्या करें, तो आप आज रात्रि हमारे साथ जहाज़ में आ जायें। हम ऊँचे शब्द से चिल्लाकर बोलने के लिए तर्शीश को…या ऊँचे शब्द से चिल्लाकर बोलने के लिए नीनवे को जा रहे हैं। हम तर्शीश जाने वाले जहाज़ को जाने दे रहे हैं, अगर वे जाना चाहते हैं। हमारे पास तो परमेश्वर के सम्मुख एक कर्तव्य है, जो कि वह सन्देश है जिसके लिए हम उत्तरदायी हैं।74आज रात्रि तो हम ने उस का बहुत छोटा सा आरम्भ ही किया है जो इस सप्ताह हमें करना है, ताकि आप इसे जान जायें ।भाइयों, जब मैं ऊँचे शब्द से पुकार कर कह रहा हूँ, तो मैं पूरी तरह से सन्देश के प्रति जिम्मेदार हूँ। आप जो प्रचारकगण यहाँ पर हैं, आप जान लें, कि मैं यहाँ पर आपकी भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं हूँ। और आप जो स्त्री और पुरूष हैं, मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आप आज रात्रि को इस आगामी विवाह और तलाक विषय को स्मरण रखें। मैंने ये सारी बातें इसीलिए कही हैं, जिससे आप यह समझ जायें, कि मैं सिर्फ परमेश्वर के प्रति ही उत्तरदायी हूँ। और इसके बाद यह बात भी है,

कि मैं आपको सत्य बताने के लिए उत्तरदायी हूँ। मैं आपको और कुछ नहीं वरन सत्य ही बताऊँगा, जब तक कि परमेश्वर मुझे यह जानने देता है, कि क्या सत्य है। जब तक कि मैं सच्चाई ना जान हूँ, मैं इसके बारे में कुछ नहीं कहूँगा, देखिए, मैं तब तक इसके बारे में कुछ भी नहीं कहूँगा। परन्तु मैं विश्वास करता हूँ, कि परमेश्वर ही मुझे “विवाह और तलाक पर सच्चाई दिखाता है, और मैं उसी पर यह भरोसा कर रहा हूँ, कि वही इसे मुझे बतलाने देगा।75मैं इस सप्ताह जिन सन्देशों पर बोलने के लिए लक्ष्य बना रहा हूँ, वह हैयह मल्कीसिदेक कौन है?“ ”परमेश्वर ने अपना नाम रखने के लिए कौन सी जगह चुनी?“ और इसी प्रकार की और दूसरी बात हैं जिन पर बोलने के लिए मैं मन बना रहा हूँ…और जो सन्देश निकल कर आ रहे हैं, और ”प्रसव पीड़ाए नामक सन्देश, और—और कुछ और ऐसी ही बातें हैं जो उसी क्रम हैं, और “एक मनुष्य अपनी दुल्हन का चुनाव कर रहा है,” नामक सन्देश है, और कुछ बातें हैं, और वे सन्देश हैं, जिन्हें मैं इस सप्ताह लेकर आना चाहता हूँ। लेकिन मैं मंड़ली से यह चाहता हूँ, कि…ठीक है, अब अगर यहाँ पर कोई सेवादार है, तो मेरे भाई मैं यहाँ पर इस लिए नहीं हूँ….मैं आप से यह आप के सदस्यों में से किसी से भी यह नहीं चाहता हूँ, कि आप वापस जाकर अपनी कलीसिया में यह कहें, “भाई ब्रन्हम ने अमुकअमुक बात कही है। मैं तो उस सन्देश के प्रति उत्तरदायी हूँ जो सन्देश मुझे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के द्वारा दिया गया है। जैसा कि मैं आज रात्रि यहाँ पर खड़ा हुआ हूँ, और परमेश्वर जानता है, कि यह सच है, कि ठीक वहाँ इस नदी पर…शायद इस समय यहाँ पर वे लोग बैठे हुए हों, जो तब वहाँ पर थे, जब प्रभु का दूत वहाँ पर नीचे उतर आया था, और उसने मुझे ठीक वहाँ पर सन् 1933 में बताया था…ठीक यहाँ पर स्प्रिंग स्ट्रीट पर बताया था। यदि आप यहाँ पर एक अपरिचित हैं, तो आप ठीक वहाँ नीचे अपनी मोटरगाड़ी चलाकर जायें। यह स्प्रिंग स्ट्रीट का कोना है, जहाँ आप नदी पर पहुँच जाते हैं, और यही वह जगह है जहाँ यह हुआ था। ऐसा सन् 1933 में हुआ था। शायद तब से अब तक लगभग तेइस साल हो गये हैं। ओह, ऐसा हुए तीस…बत्तीस साल…बत्तीस साल हो गये हैं। और कैसे उसने वह सब कुछ बिलकुल ठीक ठीक वैसे ही घटित किया है। और हम बाहर जा चुके हैं, हम सन्देश लेकर आ रहे हैं, और हम बीमारों को चंगा होते हुए, अंधों को और लंगड़े-लूलों और अपंग तथा सभी तरह के लोगों को चंगा होते हुए देख चुके हैं। और इसके बाद यहाँ तक कि मरे हुए भी जिन्दा हुए, हम उस मुरदे को भी जिन्दा होते हुए देख चुके हैं जिसे हम जानते थे, कि मरा हुआ प्रमाणित कर दिया गया है। लोग मरे और फिर से जिन्दा हुए, तथा ऐसे ही सारे काम हुए हैं।76अगर सन्देश आगे जाता है, तो वहाँ पर चिन्ह और चमत्कार होते हैं। क्या आप अभी भी उन्हीं विचारों वाले पुराने विद्यालय को ही देचते हैं। जिस में से आप निकलकर आये हैं? वह विचार परमेश्वर की ओर से नहीं आता है। परमेश्वर का तो उससे कोई सरोकार नहीं होता है.. परमेश्वर तो आपका ध्यान किसी चीज की ओर खींचने की कोशिश कर रहा है।और तब जब यीशु बाहर निकल कर गया, और उसने बीमारों को चंगा करना शुरू किया, और जब वह उन बड़े बड़े कामों को कर रहा था, तथा ऐसे ही कामों को कर रहा था, तो वह हमेशा ही …था…वह…यीशु ने इसे किया था। और मूसा और यीशु ने इसे किया था, और उन बाकियों ने ऐसा ही किया था। और जब वह यहाँ पर था, तो उसने इसे किया था। और वह आज भी इसे कर रहा है, वह ठीक वैसे ही काम आज भी कर रहा है। जब वह इस प्रकार की सभा…उस प्रकार की बेदारियाँ भेजता है और पृथ्वी पर सभा आरम्भ करता है; और इन बड़े बड़े चिन्हों और आश्चर्यकर्मों के साथ आगे बढ़ना शुरू होता है; और इसके बाद आप देखते हैं, कि उन्हीं शिक्षाओं के ठीक वही पुराने विद्यालय वापस आ जाते हैं, तो कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है। कोई ऐसी नई चीज है जो आगे को पनपती चली जा रही है। जब यीशु बाहर आया, तो उसके बाद जब…77जब उसके बाद यीशु बाहर निकल कर आया….लोग कहते थे, “वह एक अच्छा रब्बी है।” जब वह लोगों को चंगा कर रहा था, तो वह किसी भी प्रचार मंच पर जाकर प्रचार कर सकता था। जब…ओह, लोगों ने चाहा, कि वह वहाँ होता। परन्तु एक दिन वह नीचे बैठा, और बोला, “मैं और मेरा पिता एक हैं।” भाइयों, इसके बाद वह उतना लोकप्रिय नहीं रहा था। और जब वह बोला,जब तक तुम मेरा मांस ना खाओ, और मेरा लोहू न पीयो, तो तुम में कोई जीवन नहीं; परन्तु वह जो मेरा मांस खाता और मेरा लोहू पीता है, उस में अनन्त जीवन है, और मैं उसे अन्तिम दिन जिला उठाऊँगा“; उस के बाद से वह उतना हर दिल अज़ीज़ नहीं रहा था।उसके लिए लोगों ने कहा, “यह मनुष्य तो पिशाच है। यह मनुष्य तो बालजबूल है। उस ने तो इसी रीति से उन कामों को किया है। वह भावी बतला सकता है। उन के मनों में क्या है, वह देख सकता है, और वह उन के विचारों को जाँच सकता है। वह तो भावी बतलाने वाला है। लेकिन वह क्या था..वह तो उस समय के लिए परमेश्वर का देहधारी वचन था, जो उस समय के लिए प्रकट हुआ था। और वह कर्त्तव्यबद्ध था। उसने कहा था, ”मैं सदा वह करता हूँ, जिससे मेरा पिता प्रसन्न होता है। परमेश्वर, हमारी सहायता कीजिए, कि हम ठीक वैसा ही करें, हम वही करें जिससे हमारा स्वर्गीय पिता प्रसन्न होता है।और मैं आशा करता हूँ, कि आप सब समझ जायेंगे। यदि आप मुझसे इन सन्देशों पर और इन बातों पर असहमत होते हैं, तो आप यह याद रखें, कि कम से कम आप में इस बात के लिए सम्मान रहे, कि मुझ पर एक दायित्व है, और मैं तर्शीश को नहीं जा रहा हूँ। मैं तो नीनवे के मार्ग पर हूँ, और मुझे—मुझे ऊँचे स्वर से बोलना है। प्रभु आप सब को आशीष दे।78अब आइये, हम एक क्षण के लिए अपने सिरों को झुकाएं। लगभग साढ़े नौ बज चुके हैं और मैं आपको बहुत ज्यादा देर रोक कर नहीं रखना चाहता हूँ; परन्तु मैं यह मालूम करना चाहता हूँ, कि क्या मैं आज रात्रि ऐसा कर सकता हूँक्या कोई यहाँ पर ऐसा है जो मसीह में बिलकुल ठीक उस स्थिति में नहीं है जिस स्थिति में उसे होना चाहिए, परन्तु आप उस स्थिति में आना चाहते हैं; और आप वैसा होने के लिए इच्छुक हैं, तो क्या आप अपना हाथ ऊपर उठायेंगे, और कहेंगे, भाई ब्रन्हम, मेरे लिए प्रार्थना करना ?“

परमेश्वर आपको आशीषित करे। आप बस हाथ देखें। ”मैं…मैं चाहता हूँ; भाई ब्रन्हम, मैं यहाँ पर इसलिए हैं, ताकि मैं परमेश्वर की और भी नज़दीकी में आ जाऊँ। मैं इसी लिए ही यहाँ पर हूँ।“ और अगर आपका सिर ऊपर उठा था, तो मेरा हाथ भी ऊपर उठा है, कि मैं भी इसी बात के लिए यहाँ पर हूँ। मैं भी आप के जैसा ही भूखा हूँ।परन्तु ओह, किसी दूसरे दिन बड़ी ही शानदार घटना घटित हुई थी; और अब मैं…मैं जानता हूँ, कि क्या करना है। मैं..मैं प्रार्थना करता हूँ, कि परमेश्वर आपको स्पष्ट समझ प्रदान करे। यह है, कि वे….यदि आपके दिमाग में कोई प्रश्न है, तो उस प्रश्न का उत्तर देने के लिए कहीं न कहीं कोई जवाब भी है। परमेश्वर से मेरी यही प्रार्थना है, कि होने पाये, कि आप इस समय के दौरान उस प्रश्न का उत्तर देखने पायें।यदि आप बीमार हैं, तो होने पाये, कि परमेश्वर आपको चंगा करे। मेरा अनुमान है, कि व्यवहारिक तौर पर हम प्रत्येक रात्रि को चंगाई सभा करेंगे; और हम बीमारों के लिए प्रार्थना करेंगे। आप की सहायता करने के लिए हम जो कुछ भी कर सकते हैं, हम वह करेंगे। और आप हमारी सहायता करने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, आप वह करें। और हम एक साथ मिलकर काम करेंगे। और हम परमेश्वर पर भरोसा रख रहे हैं, कि वही हमें एक महान सभा प्रदान करेगा।79अब, पिता परमेश्वर, ये कुछ टूटे-फूटे शब्द कहे गये हैं; लेकिन प्रभु, अब वे आप के हाथों में हैं-उन्हें तो बोला जा चुका है। मुझे इसका सामना करना होगा। ठीक जैसे …वे शब्द नहीं मर सकते हैं, वैसे ही ये शब्द जो इन टेपों पर सारे संसार भर में चारों ओर जायेंगे, नहीं मर सकते हैं। और किसी दिन मुझे फिर से इसका सामना करना होगा। प्रभु, मुझे इसका एहसास है; और मैं यह बात अपनी गहन सत्यनिष्ठा से कहता हूँ।प्रिय परमेश्वर, मैं आज रात्रि इन में से प्रत्येक आप के बच्चे के लिए दुआ करता हूँ। और हे परमेश्वर, मैं विश्वास करता हूँ, कि इससे पहले कि यह सप्ताह खत्म हो, वे उस प्रश्न को जो आज रात्रि इनके दिमाग में बड़ी बुरी तरह से अटका हुआ है, समझ जायेंगे, और यह प्रश्न सुलझ जायेगा। प्रभु, आप इस प्रार्थना को ग्रहण करें।पिता, यहाँ पर कुछ ऐसे हैं, जो अभी तक आपको उद्धारकर्ता के रूप में नहीं जानते हैं, या हो सकता है, कि वे कभी भी पवित्र आत्मा से परिपूर्ण न हुए हों। हो पाये, कि ऐसा ठीक इसी रात्रि ही हो जाये।प्रभु, मैं किसी को पवित्र आत्मा से परिपूर्ण नहीं कर सकता हूँ; ना ही मैं किसी को बचा सकता हूँ। मैं तो इन्हें केवल वही बता सकता हूँ, जो आप ने कहा हुआ है, “धन्य है, वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जायेंगे।” और मैं प्रार्थना करता हूँ, परमेश्वर, कि आप इनके हृदय में वैसी ही भूख पैदा कर दें। प्रभु, इन्हें, अर्थात् बहुतेरें को तो भूखा होना ही है, क्योंकि कैसे ये बर्फ और बारिश और इसी तरह की चीजों में से होकर सैकड़ों मील का सफ़र तय करके और रेगिस्तानों को पार करते हुए इस पुरानी छोटी सी जगह में आते हैं, जो एक कोने में बसी हुई है। इसके बाद मैं फिर से यह सोचता हूँ, कि आप ने कहा था, “जहाँ (लोथ होगी) जीवित माँस होगा, वहाँ उकाब इकट्ठे होंगे।” प्रभु, आप हमें अपने दिव्य मन्ने से पोषित करें।आप हमारे प्राणों को वह दें जिसकी हमें सचमुच में जरूरत है। पिता, हम आप के लिए प्यासे हैं। अब हम आप के हाथों में हैं।और मैं प्रार्थना करता हूँ, कि वह महान पवित्र आत्मा जो उस दिन पहाड़ पर उतर कर नीचे आया था, यहाँ पर हर एक हृदय को अपनी भलाई और करूणा और समझ से परिपूर्ण कर दे। पिता, हमें महसूस होता है, कि हमें इसकी आवश्यकता है, कि हम समझें। क्योंकि अगर हम यह नहीं जानते हैं, कि हम क्या कर रहे हैं, तो हम कैसे जानेंगे, कि हमें इसे कैसे करना है? परन्तु हमारे पास समझ तो होनी ही चाहिए। पिता, जैसे दानिय्येल ने कहा था, कि वह यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के लेखों के द्वारा समझ गया है; वैसे ही हम पवित्र आत्मा के लेखों के द्वारा जान जायें, जैसे जैसे वह इसे हम पर इस घड़ी प्रकट करेगा। प्रभु, आप हमें वह अभिलाषा प्रदान करें जो हमारी आप के लिए है। पिता, हम यह आपकी महिमा के लिए यीशु मसीह के नाम में होकर माँगते हैं।80अब जबकि हम ने अपने सिरों को झुकाया हुआ है, और हमारी बहन इस गीत पर मंद मंद धुन बजा रही है, “वह मुझे करूणा और महिमा देगा, और मेरे साथ सारे रास्ते जायेगा”; मैं आप से यह चाहता हूँ, अब आप बस शान्तिपूर्वक प्रार्थना करें, और स्वर्गीय पिता से माँगें, कि वह आपको आज रात्रि वह प्रदान करे जिसकी आपको आवश्यकता है।प्यारे भाइयों, और प्यारी बहनों, वह आपके इतने नज़दीक है जितना आप का हाथ आप के नज़दीक है। आप मुझ पर और दूसरी बातों में विश्वास करते हैं, आप मुझ पर इस बात पर भी विश्वास करें। आपको जिस किसी चीज की जरूरत है वह आपको वही देने के लिए यहाँ पर है।ओह, पिछले कुछ सप्ताह मैं आप से मिलने के लिए इतना ज्यादा भूखा व प्यासा रहा था, और मुझे आपकी..घर की इतनी ज्यादा याद सताती रही, यही कारण था, कि मैंने कहा था, “बिली, आओ हम घर चलें।”और मैडा ने कहा, बिल, तुम वहाँ क्यों वापस जाना चाहते हो; उस ठंड़े प्रान्त में तुम फिर क्यों वापस जाना चाहते हो? तुम्हारा वहाँ पर हमेशा ही गला खरखरा जाता है, और तुम्हारे साथ ऐसा ही सब कुछ हो जाता है। तुम वहाँ पर सदैव ही ऐसे बाहर आते हो, कि तुम्हारा सिर ठंड़ा हो जाता है, और तुम्हारा गला खरखरा जाता है, और तुम मुश्किल से ही बोल पाते हो ।“मैंने कहा, “खैर, मैं नहीं जानता हूँ, कि मैं क्यों वहाँ जाना चाहता हूँ।” मैंने उससे कहा….मैं अपने मित्र चार्ली कॉक्स को वहाँ पर बैठे हुए देखता हूँ। मैं बोला, “मैं बस अपने मित्र चार्ली कॉक्स को यह कहते हुए सुनने के लिए अधीर हूँ, कि वह छोटी गिलहरी वहाँ ऊपर पेड़ पर चढ़ गई थी।” मैं बस इसे सुनने के लिए बहुत ज्यादा भूखा हूँ। मैं तो बस आप के आस पास ही रहना चाहता हूँ।81मैं जानता हूँ, कि मेरा भाई बैंकस बहुत बीमार हो गया है। और अधिक समय नहीं हुआ है, कि मैंने उनके बारे में एक दर्शन देखा था। और वो अपनी पीठ के सहारे लेटे हुए थे। और मैं जानता हूँ, कि हाल-फिलहाल में ही वो शीघ्र ही ऐसी हालत में पहुँचने वाले हैं, कि वो हम से दूर चले जायें। मैं आप में से विभिन्न लोगों को देखता हूँ —-और किसी दूसरी रात्रि को मैं अन्तराष्ट्रीय क्रिश्चयन बिजनसमैनों की एक सभा में आया; और वहाँ पर बुजुर्ग पोप (Pop) शेकेरियन अर्थात् देमोस के पिता बैठे हुआ करते थे, और जब तक मैं अंदर नहीं आ जाया करता था, वो मुझ पर दृष्टि लगाये रहते थे, और इसके बाद वो हल्का सा मुस्कुराते और मेरी तरफ अपना हाथ हल्का सा हिलाते; वो मेरी ओर हाथ हिलाया करते। लेकिन इस बार वो वहाँ पर नहीं थे। वे गुज़र चुके हैं। तत्पश्चात् मुझे उसी परिवार में “यहोवा यूँ फरमाता है, वाले वचन के साथ आना था, कि उनकी बेटी फ्लोरेन्स का भी देहांत होने जा रहा है।

मैंने उसे दर्शन में देखा था; और मैंने देखा था, कि वह चल बसी है। और मैं जानता हूँ, कि वह जा रही है। और मैंने कहा था, ”प्रार्थना करो, बस प्रार्थना करो। आप जानते हैं, कि एक बार एक नबी था जिससे कहा गया था, कि वो जाकर राजा को बताये, कि वह अपने घर का हिसाब-किताब ठीक कर ले। और राजा ने प्रार्थना की, और परमेश्वर ने उसे और पन्द्रह वर्ष के लिए जीवन दान दे दिया था। मैंने कहा था, “प्रार्थना करो।”82परन्तु आप देखिए…और मैं वपास आया….किसी और दिन मैं यहाँ पर एक भोजनालय में खड़ा हुआ कुछ खा रहा था। एक पुरूष मेरे पास चलकरआया, ओर बोला, “क्या आप बिली ब्रन्हम नहीं हैं?” 157. मैंने कहा, “जी हाँ!” शायद उसने मुझे नहीं पहचाना था, क्योंकि जहाँ पर मेरा सिर गंजा था, वहाँ मैंने इसे लगाया हुआ था। मैंने उस सभा के दौरान अपने गंजे सिर पर एक छोटा सा विग पहना हुआ था, ताकि अपने गले को ठंड़ से खरखराने से बचा सकें। और वह मेरे पास चलकर आया, और बोला, “बिली, मैंने सोचा था, कि मैं तुम्हें जानता हूँ।”मैंने कहा, “जी, आप कौन हैं?”वह बोला, “मैं जॉन वरमन हूँ।”मैंने कहा, “जिप कैसा है?”वह बोला, “बिली, वह मर गया है।” ओह!83मैं कोर्टहाऊस से होकर आ रहा था, मैं वहाँ पर अपने टैक्सों का भुगतान करने के लिए गया था। और जब मैं कोर्टहाऊस से होकर आ रहा था, तो एक महिला मुझ पर ज़ोर से चिल्लाकर बोली, और उस ने कहा, “क्या तुम जानते हो, कि जॉन गुज़र चुका है?” या उसने कोई नाम लिया था। एड, वह शायद जॉन, या ऐसा ही कुछ था। और मैं बोला…मैं उस महिला को नहीं जानता था। मुझे बड़ी शर्मिन्दगी महसूस हुई। और मुझे मालूम हुआ, कि मैं नहीं जानता था, कि वह कौन थी। वह बोली, “क्या आपको वह एक अंधेरी रात याद है, जब यहाँ बाहर नदी तटों पर उफान पर थी, और चेस्टनट स्ट्रीट पर घर बह गये थे, और आप अपनी जान जोखिम में डालकर एक जगह में घुस गये थे, और आप एक महिला और कुछ नन्हें नन्हें बच्चों को बाहर निकालकर लाये थे?”मैंने कहा, “क्या तुम वही हो?”वह बोली, “मैं—मैं वही महिला हूँ।” वह अपने बच्चे के लिए ज़ार-ज़ार रोने लगी; आप मेरी कथा जानते हैं। वह बोली, “जिसे मैं अपना ‘बच्चा’ कह रही हूँ, वह शादी-शुदा था, और उसका एक परिवार था।” समझे? और वो महिला बूढ़ी थी और उसके बाल सफेद थे, और यहाँ पर मैं भी बूढ़ा हूँ और मेरे भी बाल सफेद हैं। एक एक करके हमारे कार्ड रैक में से बाहर निकलते चले जाते हैं, जैसा कि ऐसा हुआ था।और हमारी सभाएं होती हैं, और मैं इसे नहीं देखता हूँ-मैं देखता हूँ, यह वाला गायब हो गया है, मैं देखता हूँ, वह वाला गायब हो गया है। इन दिनों में से किसी एक दिन हम सब को गायब हो जाना है। परन्तु भाइयों, बहनों, वहाँ पर इकट्ठा होने की एक जगह है। अब हम इस बात में सुनिश्चित हो जायें, कि हम बिलकुल ठीक हैं। क्या आप ऐसा करेंगे? हम ऐसा ना करें, कि हमारी वह सारी समझ जो हमें परमेश्वर के बारे में हैं, तथा हमारी ऐसी ही और दूसरी बातें व्यर्थ ही चली जायें। आइये हम विश्वास करें।84पिता, वे आपके हाथों में हैं। प्रभु, मैं आपके हाथों में हूँ। अब इससे पहले कि हमारी कल से सभा शुरू हो, हम उससे पहले खुद अपने को आपको यहाँ परसमर्पित करते हैं। प्रभु, क्या आप हमारी सहायता करेंगे? होने पाये हमारी…होने पाये हमारी बातचीत बराबर आप के बारे में ही हो। होने पाये हमारे दिल और दिमाग आप पर ही टिके रहें; और आप ने कहा था, कि आप हमें एक सिद्ध शान्ति में बनायें रखेंगे। बाइबिल में यह भी लिखा है, “तू अपनी समझ का सहारा ना लेना।” हे परमेश्वर, हम अपनी समझ नहीं चाहते हैं, हम तो आप की ही समझ चाहते हैं। हे परमेश्वर, हमें अपनी समझ प्रदान कीजिए। और होने पाये, कि हमारे प्राणों के भीतर ऐसी बेदारी आ जाये, कि लोगों का यह झंड़ एक मन और एक चित हो जाये। पिता, यह प्रदान कीजिए। पिता, इन सारी बातों को प्रदान कीजिए, जबकि हम इस प्रार्थना को यीशु मसीह के नाम में होकर माँगते हैं।…………………………..जब तक मेरे उत्साहशील आत्मा पाएंगेनदी के पार विश्राम।यीशु रख सलीब के पास, यीशु रख सलीब के पास,यीशु रख सलीब के पास,मेरी महिमा कभी रहे (अपने हाथो को उठाये।) सदा,जब तक मेरे उत्साहशील आत्मा पाएंगेनदी के पार विश्राम।यीशु, मुझे क्रॉस के पास रखना,चश्मा जहाँ बहता खासमिलता मुफ्त (जी हाँ,प्रभु!) जो सभी को,कलवरी से निकलता।वह चश्मा है खास क्रूस पर खास,होगी मेरी नज़र जब तक मेरी रूह खुश हो,जावेगी आसमान परउस नदी के पार विश्राम।85(भाई ब्रन्हम गुनगुनाना शुरू करते हैं, यीशु रख सलीब के पास.) हे परमेश्वर! यदि यहाँ पर आप में से कोई ऐसा महसूस करता है, कि आप ऊपर आना और वेदी के चारों ओर घुटने हो जाना चाहेंगे, तो क्या आप बस आना और यह कहना चाहेंगे, “प्रभु, मैं वहाँ पर नहीं हूँ, जहाँ मुझे होना चाहिए। मैं..मैं फिर से खुद अपने को समर्पित करना चाहता हूँ। प्रभु, मैं ऐसा आज रात्रि ही करना चाहता हूँ।” आप का यहाँ पर स्वागत है। हम यहाँ पर आप के साथ प्रार्थना करने के लिए होंगे। (भाई ब्रन्हम क्रूस पर खास गीत गुनगुनाना ज़ारी रखते हैं)यीशु रख सलीब के पास,चश्मा जहाँ बहता खासमिलता मुफ्त जो सभी को,कलवरी से निकलता।क्रूस पर खास,होगी मेरी नज़र वह चश्माहै खास जब तक मेरी रूह खुश हो,जावेगी आसमान परयीशु रख सलीब के पास,चश्मा जहाँ बहता86आइये हम प्रार्थना करें, अब हम में से हर कोई अपने ढंग से प्रार्थना करे। बस—बस समय को भूल जायें। आइये हम अपने सिरों को उसकी उपस्थिति में झुकाएं। यह जो छोटी युवती यहाँ पर है, वह ज़ोर से चिल्लाकर कह रही है,यीशु, मैं आप से प्रेम करती हूँ।“ आप को याद है, जब आपका कई साल पहले उद्धार हुआ था, तो क्या आप को याद है, कि यह आप के लिए कितना मधुर था? यीशु आज रात्रि भी वैसा ही मधुर है। आइये हम प्रार्थना करें, अब हम में से हर कोई अपने अपने ढंग से प्रार्थना करे। आइये हम बस..बस खुद को परमेश्वर को समर्पित करें, खुद अपने आप को खुदा के हवाले करें ।87प्यारे प्रभु यीशु…(टेप में रिक्त स्थान-सम्पा.) जो है मेरे सारे सुखों का सोता जीवन से भी बढ़कर जो मेरे लिए होता कौन होगा उस से बढ़कर जग में कौन होगा उस से बढ़कर आसमान में प्यारे परमेश्वर, अब हम प्रार्थना करते हैं, कि हम में से प्रत्येक पर आपकी दया और अनुग्रह भेजी जाये, प्रभु। हम यहाँ पर वेदी के चौगिर्द हैं। बहुतेरे ऐसे हैं। जो ऊपर नहीं आ सके, होने पाये आप उन से उनकी सीटों पर ही मुलाकात करें। प्रभु, हम जो कुछ भी आपको अर्पित करते हैं, आप उसे ग्रहण करने की इच्छा रखते हैं। चाहें हम अपना समय आपको अर्पित करें, आप उसे ग्रहण करेंगे; चाहे हम अपना हुनर आपको अर्पित करें, आप उसे ग्रहण करें । परन्तु प्रभु परमेश्वर, हम आज रात्रि इससे भी बढ़कर करने जा रहे हैं, वह सब कुछ जो हम हैं, हम उसे आपको अर्पित करते हैं। वह सब कुछ जो मैं हूँ, वह सब कुछ जो मैं कभी होने की उम्मीद करता हूँ, वह सब कुछ जो मैं आप में हूँ, मैं उस सब को आपको अर्पित करता हूँ, प्रभु। हम प्रार्थना करते हैं, कि आप इसे…हमारी प्रार्थनाओं को अपने ह्रदयों में ले लें, और हमें पवित्र आत्मा की ऐसी जबरदस्त गहनता प्रदान करें, कि हमारे जीवन बदल जायें। क्योंकि हम देखते हैं, कि हम अब अंत समय के निकट हैं। अब बहुत ज्यादा देरी नहीं होगी। और जैसे कि हम दिन बा दिन अपने प्रिय जनों को चाहे वे जवान हों या चाहे वे बूढ़े हैं, गुज़रते हुए देखते हैं, अतः हम जानते हैं, कि शीघ्र ही हमारे द्वार पर खटखटाहट होगी। प्रभु, और आज रात्रि जबकि हम अपनी सही दिमागी हालत में यहाँ पर बैठे हुए हैं, या यहाँ पर हम घुटनों पर हैं, या खड़े हुए हैं, हम जिस किसी भी हालत में अंदर आते हैं, प्रभु परमेश्वर, आप हमें ग्रहण करें।हे प्रभु, आप मुझे ग्रहण करें। मैं कुछ भी नहीं हूँ, पर प्रभु, मैं जो कुछ भी हूँ, अगर आप मेरा कुछ भी उपयोग कर सकते हैं, मैं खुद अपने को आपको अर्पित करता हूँ।88प्यारे परमेश्वर, मैं इन में से हर एक के लिए प्रार्थना करता हूँ। ये वे प्रिय लोग हैं जिनके लिए मैं ऐरिजोना के पर्वतों में खड़ा होकर दुहाई दे रहा था, और वे आज रात्रि यहाँ पर वेदी के चारों ओर हमारे साथ घुटने होकर प्रार्थना कर रहे हैं, अपने जीवनों को आपको अर्पित कर रहे हैं। पिता, हम आपको अपने निज जीवनों से भी ज्यादा प्यार करते हैं। हम आपको अपने परिवारों से भी बढ़कर प्रेम करते हैं। हम आपको अपनी पत्नी, अपने बच्चों, अपने माता, पिता, भाई, बहन, पति, पत्नी से भी बढ़कर प्रेम करते हैं। प्रभु यीशु हम आप से प्रेम करते हैं। प्रभु, हमारे हृदयों में इसे अत्याधिक सजीव बना दीजिए। प्रभु, इस सप्ताह हमारे प्राणों में प्रसन्नता का तेल उंडेल। हमें वचन से नहला, हमें वचन से धुला, हमें वचन के जल से नहला-धुला, हम पर सच्चाई को बांट।प्रभु, आज रात्रि यहाँ पर बहुतेरे ऐसे होंगे, जो इन विषयों पर जो नितान्त आवश्यक हैं,

दुविधा में होंगे। हे परमेश्वर, उस सोते को परमेश्वर के भवन में खोल दीजिए, जो हमारे शुद्धीकरण के लिए है। परमेश्वर, मैं प्रार्थना करता हूँ, कि आप हमें अपने लोहू के द्वारा धोकर शुद्ध और साफ कीजिए, और हमें एक नई सृष्टि बना दीजिए। और हमें अनुग्रह और सामर्थ प्रदान कीजिए, ताकि हम सच्चाई के वचन को उसके यीशु मसीह के व्यक्तित्व वाले दिव्य प्रकाशन में लेकर आगे आ सकें। प्रभु, होने पाये कि वह हमारे सम्मुख दिखे। होने पाये वह आये, और हमारी बीमारियों को चंगा करे, हमारे पापों को क्षमा करे, और हमारे भूखे हृदयों को महान आनन्द की अच्छी लहरों से, सुसमाचार जो हमारे जीवनों में साक्षात् प्रकट हुआ है, उसके अपार आनन्द की लहरों से भर दीजिए। हर एक पास्टर को, हर एक सॉन्ग लीडर को, सड़े स्कूल के हर एक शिक्षक को आशीष दीजिए। प्रभु, हम सभों को एक साथ मिलकर आशीष दीजिए,क्योंकि हम सचमुच में आप से प्रेम करते हैं। और अब इस समर्पण में हम आपके हैं, प्रभु यीशु मसीह के नाम में होकर आप अपनी इच्छा में होकर अब आप हमारा उपयोग करें।89मेरा विश्वास निहारता हैतुझे हे कलवरी के मेमने,तू ही है दिव्य उद्धारकर्ताकरूँ जब मैं प्रार्थना,तो तू मेरी सुननामेरे सारे पापों को दूर करनाओह, इस दिन से हो जाऊँमैं सिर्फ तेरा ही पूरा।क्या आप को यह अच्छा लगता है? आइये हम इसे फिर से गायें।जीवन के घोर संकट में जब मैं होऊँघिरा दुख हो जब मेरे चारों ओर घिरा ।हे तू जो है, मेरा मार्ग दर्शक अंधकार कोदूर कर उसे दिन में बदलना पोंछ करमेरे आँसू मेरे दुखों को दूर करना ना मुझेअपने पास से कभी दूर होने देना।क्या आपको इससे अच्छा सा महसूस होता है? (सभा कहती है, आमीन“-सम्पा.) कितनों को वे पुराने गीत गाने अच्छे लगते हैं? (”आमीन“) मुझे तो वे बस बहुत अच्छे लगते हैं। क्या वे आपको अच्छे नहीं लगते हैं?बढ़ रहे हैं हम सिय्योन की ओर सुन्दर,मनोहरम सियोन की ओर बढ़ रहे हैंहम सियोन की ओर परमेश्वर केउस सुन्दर मनोहरम नगर की ओरबढ़ रहे हैं हम सियोन की ओर सुन्दर,मनोहरम सियोन की ओर बढ़ रहे हैंहम सिय्योन की ओर परमेश्वर केउस सुन्दर मनोहरम नगर की ओरअब आइये हम खड़े हो जायें,जबकि हम इसे गाते हैं।हम एक दूसरे से हाथ मिलायें।बढ़ रहे हैं हम सिय्योन की ओर सुन्दर,मनोहरम सियोन की ओरबढ़ रहे हैं हम सिय्योन की ओरपरमेश्वर के उस सुन्दर मनोहरम नगर की ओरअब, हम सब खड़े होकर हम इसे गाते हैं, एक दूसरे के साथ हाथ मिलाओआइये अब हम अपने हाथों को परमेश्वर की ओर उठायें।बढ़ रहे हैं हम सियोन की ओर सुन्दर,मनोहरम सिय्योन की ओरबढ़ रहे हैं हम सिय्योन की ओरपरमेश्वर के उस सुन्दर मनोहरम नगरआइये अब हम अपने हाथों को परमेश्वर की ओर उठायें।ओह, बढ़ रहे हैं हम सियोन की ओर सुन्दर,मनोहरम सिय्योन की ओर,बढ़ रहे हैं हम सियोन की ओर सुन्दर,मनोहरम सिय्योन की ओर,परमेश्वर के उस मनोहरम शहर।बढ़ रहे हैं हम सियोन की ओर सुन्दर,मनोहरम सिय्योन की ओर,परमेश्वर के उस मनोहरम शहर।क्या आपको इससे एक अच्छी सी अनुभूति नहीं होती है? (मंड़ली आनन्दविभोर हो उठती है-सम्पा.) ओह, मेरे खुदा! ओह, आइये हम बस अपने हाथों को ऊपर उठायें, और बस उसकी स्तुति-बड़ाई अपने ही ढंग से करें।90प्रभु यीशु, तू जो शेरोन का गुलाब, घाटी का सोसन, भोर का चमकता तारा, मेरे प्राण के लिए दसयों हजार से सुन्दर है। तू जो मेरे सारे सुखों का सोता है, तू जो मेरे लिए जीवन से भी बढ़कर है। हम तुझ से कैसा प्रेम करते हैं। (भाई ब्रन्हम और मंड़ली प्रार्थना करना और जयजयकार करना ज़ारी रखती हैसम्पा.)यीशु रख सलीब के पास,चश्मा जहाँ बहता मिलता मुफ्त जो सभी को,कलवरी से निकलता। क्रूस पर खास,होगी मेरी नज़र जब तक मेरी रूह खुश हो,जावेगी आसमान परयीशु रख सलीब के पास, चश्मा जहाँ बहताकैसे भी हो, मुझे ऐसा महसूस हो रहा है, कि हम आगे बढ़े चले जा रहे हैं..ठीक हमारे आगे कुछ रखा हुआ है। अब, बस याद रखिए, मेरा मानना है, कि मैं भविष्यवाणी कर रहा हूँ। हमारे आगे एक बड़ा आनन्द धरा हुआ है। इसका विश्वास करें। यह सच है। बहुत से दुखी-उदास दिलों को ..भर दिया जायेगा..बड़े बड़े भेदों को स्पष्ट कर दिया जायेगा, और वे लोग जो दुखी हैं उनका दुख खुशी में बदल जाएगा।यीशु रख सलीब के पास,जब तक मेरी रूह खुश हो,जावेगी आसमान परयीशु रख सलीब के पास।91जैसा कि पूर्व समय का यूहन्ना था, लोगों ने मुझे उसके बारे में बताया है, कि जब वह प्रचार करने के लिए बहुत ज्यादा बुजुर्ग हो गया था, तो वह बस बैठ जाता और अपनी पूरी ताकत से जोर से चिल्लाकर बोलता, “हे छोटे बच्चों, एक दूसरे से प्रेम करो।” एक दूसरे से प्रेम करें। देखिए, आप अपने बीच में किसी भी बात को न आने दें। ऐसी हर तरह की बातों को अपने से दूर रखें….जी हाँ, इससे कोई मलतब नहीं है, कि वह क्या है, आप उसका सामना करें। हम नीवने की राह पर हैं। समझे? आप तर्शीश के उस पुराने जहाज़ पर सफ़र में ना निकल पड़े, जो आपको संगति से ही बाहर कर डालता है। आइये हम सिर्फ परमेश्वर की आशीषों के सोते की ओर ही आग्रसर होते चले जायें। मैं विश्वास करता हूँ, कि हमें वह मिलेगा।

मैं अपने पिता पर विश्वास करता हूँ।92बहन, क्या अब आप बेहतर महसूस करती हैं? यह बहुत बढ़िया है। मैं इसी रीति से बालको को निये सिरे से जन्म लेते हुए देखना चाहता हूँ, मैं उन्हें ऐसे ही जन्म लेते हुए देखना चाहता हूँ। मैं सोच सकता हैं, कि वर्षों पहले इन्हीं मैदानों पर कितने ही हजारों ने परमेश्वर के राज्य के अंदर जन्म लिया; ठीक इसी मैदान पर! जब हम यहाँ पर अपने ज़ेब में मात्र अस्सी सेंट लिये हुए खड़े हुए थे, कि गिरजे का निर्माण करा लें, तब हम कितना कम जानते थे! ओह, उसी ने ही कहा था, “मैं ने ही इसे लगाया है, मैं ही दिन और रात इसे जल से सींचूँगा।” और उस ने ऐसा ही किया है। उसी ने ही ऐसा किया है। परमेश्वर आपको आशीष दे।93अब जब हम अपने सिरों को झुकाते हैं….. अब, आप कल रात को याद रखें, कि यहाँ पर कल से सभाएं स्कूल के सभागार में होंगी। और यदि…अब हम यहाँ पर किसी को इसी के काम के लिए। तैनात कर देंगे, कि वह लोगों को दिखायें, कि वहाँ पर कैसे पहुँचना है, क्योंकि नये लोग सभा के लिए आ रहे होंगे।अब, आप जो उससे प्रेम करते हैं, आमीन कहें, ओह, क्या वह अद्भुत नहीं है?मैं यहीं पर नदी के तट पर खड़ा हुआ, उस पुराने गीत को गा रहा थायरदन के तूफान से भरे तट पर मैं खड़ा हूँ।(ज़रा सोचिए, ऐसा हुए तीस साल-लैंतीस साल हो गये हैं, तैंतीस साल हो गये हैं।)आशा भरी दृष्टि देखता हूँउस सुदूर कनान को जो है।देश उज्जवल खुशहाल जहाँ है मेरा मुकामऔर उस शाम से लेकर अब तक मैं बहुतों को बपतिस्मा दे चुका हूँ। जब लोग वहाँ पर खड़े हुए थे, और उस भोर के तारे के जो स्वर्ग से इस प्रकार से गोल चक्कर लगाता हुआ नीचे आता है, गवाह ठहरे थे, और कहा गया था, “जैसे यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले को मसीह के पहले आगमन के आगे आगे भेजा गया था, वैसे ही तेरा सुसमाचार उसके दूसरे आगमन के आगे आगे चलेगा।” ऐसा कैसे सोचा जा सकता था? परन्तु परमेश्वर के सारे वचन सच्चे हैं, परमेश्वर के सारे वचन सच्चे हैं। हम अति महान महाराजा की उपस्थिति में रह रहे हैं। परमेश्वर आपको आशीष दे।जबकि हम अपने सिरों को झुकाते हैं, मैं अपने मूल्यवान पास्टर भाई नेविल से यही कहूँगा, कि वे यहाँ पर आ जायें और हमें प्रार्थना के साथ विदा करें। भाई नेविल, परमेश्वर आपको आशीष दे।

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