अनुग्रह का संदेश (The Message Of Grace)

अनुग्रह का संदेश (The Message Of Grace)

अनुग्रह का संदेश

जैफरसनविले, इन्डियाना यू. एस. ए.

61-0827

1धन्यवाद, भाईनेविल! प्रभु आपको आशीष दे। मित्रों, सुप्रभात! इस सुबहयहाँ पर फिर से प्रभु की सेवा में आना सचमुच में एक बड़े ही सौभाग्य की बात है। औरहमें बस इस बात का अफसोस है, कि इस छोटे से गिरजे में हमारे पास लोगों को बैठाने के लिए कोईजगह नहीं है। इस में बहुत ज्यादा लोग नहीं आते हैं। मगर हम इस बात के लिए बहुत ही खुशहैं, कि आप यहाँ पर हैं और हमारे लिए प्रतीक्षा करने के लिए बड़ेही धैर्य के साथ इसे सहन करने के इच्छुक हैं। और हम प्रभु का वचनआपके पास लाने के लिए जो अच्छे से अच्छा कर सकते हैं करेंगे, जैसाकि हम इसे लाने के लिए अच्छे से अच्छा जानते हैं। और अब मैं बस…यह महिला जो चल कर अंदर आ रही है, उसके पास एक शिशु है जिसेइस सुबह प्रभु को समर्पित किया जाना है। और जब उसने देखा, कि उन्हेंदेरी हो रही है, तो वह बोली, कि वह बस इंतज़ार करेगी।मैंने इस महिला को पहले कभी नहीं देखा है, लेकिन मैं प्रार्थना करताहूँ, कि परमेश्वर उसे आशीष दे, और परमेश्वरउसके हृदय में अपनी आशीषों को बहुतायत में उड़ेले, क्योंकिवह इंतज़ार करने में धीरज धरे हुए है।2अब; सालका वह समय आ रहा है, जब और भी ज्यादा ठंडा होने लगता है, और जबबहुत ज्यादा गर्मी नहीं रहेगी, जबकि हम गिरजे में खचाखचभरे हुए होते हैं। और हम यह भरोसा कर रहे हैं, कि परमेश्वरआप सब को बहुतायत में आशीष देगा।अब, इससेपहले कि मैं यहाँ पर बोलूं, मैं बस कुछ बातें बताना चाहूँगा। मैं यह पहले ही बतला चुका था, कि अगरखुदा की मर्जी हुई, तो मैं इस सुबह इस विषय पर बोलूंगा-“बवंडरमें आँधियाँ परन्तु परमेश्वर ने ही इसे मेरेलिए बदल दिया है। मैं कभी नहीं जानता था, कि मैं क्याकहने जा रहा हूँ, जब तक कि मैं….शायद यहाँपर सभा में आने से कुछ देर पहले तक मैं नहीं जानता था। और इस वक्त मैंने दूसरी बारउस विषय पर कोशिश की, और मैं परमेश्वर से इस पर प्रत्युत्तरपाने में नाकाम रहा। मैं नहीं जानता हूँ, कि ऐसा क्योंहुआ है। मुझे हमेशा ही यह बात अच्छी लगती है…जैसाकि आपजो प्रचारकगण यहाँ पर हैं, आप सब यह जानतेहैं, कि उस के लिए जो आप बोलने जा रहे हैं, आपको प्रभुकी बाट जोहनी होती है।3गत रात्रि को मेरे पास सुदूर अरकासससे प्राइवेट लाइन पर एक फोन कॉल आयी थी, कि कुछ लोगहैं जो इस आगामी सप्ताह यहाँ पर आना चाहते हैं। उन्होंने कहा था, कि उन्होंनेसुना था, कि हम सात मोहरों पर एक सभा शुरूकरने जा रहे हैं। मैंने उन लोगों के लिए जो अजनबी थे, अभी हाल हीमें सात कलीसियायी कालों पर प्रचार किया था। और उस महिला का पति लुइसविले में ही एकनौकरी के सिलसिले में आ रहा है, ताकि वह कामकर सके, जबकि वे उन सात मोहरों को सुनने के लिए काफी नज़दीक रुके रहते हैं। मैंने कहा, “महिला, ऐसा करने मेंलगभग तीन महीने लग जायेंगे। हमारे पास यहाँ पर कोई जगह नहीं है, कि सभा केबारे में ज्ञापन दें, तथा ऐसे ही और काम करें; यहाँ इस शहरमें इसका ध्यान रखने के लिए, लोगों को बैठानेके लिए हमारे पास कोई जगह नहीं है।”4अगर परमेश्वरकी इच्छा रही, तो हो सकता है, कि किसी समयमैं उसे कहीं पर बड़ी सभा वाले अभियान में लेना चाहूँगा, मैं लगभग तीनमहीने के लिए। सभा शुरू करूं, और उस अभियानमें उस प्रकार से उन मोहरों पर प्रचार करना शुरू करूं। तब लोग इसका अध्ययन करते हुएरुक सकते हैं।ये यहाँ पवित्रत्रशास्त्र में प्रकाशितवाक्यके छठवें अध्याय ये लेकर उन्नीस वें अध्याय तक है। अतः आपको सात मोहरें, सात विपत्तियाँ, सात हाय, किरमिची रंगके पशु पर बैठी स्त्री, और एक लाख चवालीस हजार मिलते हैं।ओह, इससे पहले कि सात मोहरों के बारे में बताया जाये, बहुत सी बातेंहैं जो उनके साथ मेल खाती चली जाती हैं, सात विपत्तियाँआती हैं, सातवीं तुरही फूकी जाती है। और वेबहुत सी बातें हैं जो एक दूसरे से जुड़ती चली जाती हैं, और उन मेंसे हर एक अपने आप में दिन का एक बहुत बड़ा अध्याय है।5अब, आइये हम थोड़ीदेर के लिए अपने सिरों कोप्रार्थना के शब्द के लिए झुकाएं। इससे पहले कि हम प्रार्थना करें, क्यायहाँ पर कोई ऐसा है जो यह चाहेगा, कि उसेइस प्रार्थना में याद किया जाये; और आप बस अपने हाथों कोऊपर उठाकर इसे अवगत करायें। और अब आप अपने मन में परमेश्वर से उस चीज को माँगें जिसकीआपको जरूरत है। और मैं प्रार्थना करूंगा, कि परमेश्वर आपको वह प्रदानकरे।6हे सर्वशक्तिमान और अनुग्रहकारी परमेश्वर, तू जोप्रार्थानाओं का उत्तर देनेवाला परमेश्वर है, तू जोएक ऐसा पिता है जो अपने सारे बच्चों की जरूरतों को …. जानता है…इससे पहले कि हमारा जन्म भी होता तू हमें जानता था, और तूने ही हमारे कदमों को गिना हुआ है, जो हमारे सिर पर बाल हैंउन्हें भी तू ने गिना हुआ है; और हमारे सारे शब्द तेरी तराजू में तुले हुए हैं। अतः प्रभुपरमेश्वर, होने पाये, कि इस सुबह हम इन बातोंपर ध्यान दें, इस पुनीत कर्तव्य पर जो हमारा आपके सम्मुख है, ध्यानदें।इस सुबह यहाँ इस छोटी सी सहभागिता में वे बहुत से हाथ ऊपर उठेथे, शायद वे अपनी बीमार देहों के लिए, अपनेखोये हुए प्रियजनों के लिए एक प्रार्थनाविनती थी। आप उनके मनों को जानते हैं और जोकुछ भी उनके मन में है, आप ही वह जानते हैं। क्योंकि जब आप यहाँ इस पृथ्वी पर एक मनुष्यके रूप में जो कि हमारा प्रभु यीशु कहलाता था, खड़ेहुए थे, तो आपको ह्रदय के गुप्त भेद मालूम थे। जिस किसी भी बात की लोगअपने दिमागों में कल्पना करते थे, आप उन्हें बता सकते थे, कि वेकिस के बारे में सोच रहे थे; “तुम इन बातों पर अपने मनों में क्यों तर्क करते हो?”यीशु उनके विचारों को जान जाता था। और हम पवित्रशास्त्र में पढ़ते हैं, कि आपकल, आज, और युगानुयुग एक से हैं। और यह भी लिखा हुआ है, कि “जहाँकहीं दो या तीन एक साथ मिलकर इकट्ठा होंगे, उनके मध्य में मैं होऊँगा।” अतः इस सुबह आप यहाँ पर पवित्र आत्मा के रूप में हैं, और उसहर एक अभिलाषा को जानते हैं जो लोगों के हृदय में है।पिता परमेश्वर, मैं आप से यह प्रार्थना करता हूँ, कि आपलोगों से प्रत्युत्तर में बातें करेंगें, और उन से कहेंगे, “यह पूराहुआ। तुम्हारे निवेदन का उत्तर दिया जा चुका है, और मैं…मैंइस दिन में तुम्हारे पास यह आश्वासन भेज रहा हूँ, कि जोतुम ने माँगा है, वह तुम्हें दिया जा चुका है।”7परमेश्वर, हम खासतौर पर उन्हें याद करते हैं जो उद्धार पाये हुए नहीं हैं, और जिन्होंने अपनेहाथ ऊपर उठाये हैं। होने पाये, कि ये ही वे क्षण हों, जब वेमसीह को अपने उद्धारकर्ता के रूप में अपना लें।

प्रभु, होने पाये, इससे पहले कि आज सभा समाप्तहो, ऐसा कुछ घटित हो जो लोगों के पास आपकी उपस्थिति को इतने ज्यादाकरीब लेकर आये, कि वे जान जायें, कि ठीक वही यीशु जो गलीलमें चला-फिरा अपने लोगों में मध्य में खड़ा होता है, और होनेपाये, कि वे आज यहाँ से ठीक वैसे ही आश्वासन के साथ जायें, जैसाआश्वासन उन के पास था जो उस समय इम्माऊस से आये थे। जब वे अपने मार्ग पर वापस लौटकरआ रहे थे, और उससे सारे दिन बात बातें कर चुके थे, वे उससेबातें कर रहे थे, और वह उनसे बातें कर रहा था, और फिरभी उनके पास इसका बहुत थोड़ा ही आइडिया था, कि यह वही था।हे परमेश्वर, बहुतसी बार हम बिलकुल वैसे ही होते हैं। आप हम से सूर्य के अस्त होने में, चिड़ियोंके गुंजन करने में, पत्तों की कड़कड़-ध्वनि में, पुष्पोंके महकने में, कलीसिया में गाये जाने वाले गीतों में बातें करते हैं, और हमये बहुत थोड़ा ही पहचान पाते हैं, कि यह आप ही हैं। आप अस्पतालमें बीमारों के कक्ष में तथा ऐसे ही और दूसरे स्थानों में हम से बातें करते हैं, और हमेंइसका बहुत थोड़ा सा ही आभास होता है, कि ये आप ही हैं।8अब, हे प्रभु, जैसाकि इस सुबह हम अपने अपने घर वापस लौटते हैं, तो होने पाये, कि आपआज हमारे मध्य में ठीक वैसा ही कुछ करें जैसा कि आपने वहाँ पर पिछले समय में किया था, कि हमआपको पहचान जायें। वे उस काम को जानते थे जो आपने वहाँ पर उनके सम्मुख किया था। आपने ठीक ऐसा ही अपनी सलीबी मौत से पहले किया था, और वेजान गये थे, कि यह तो मरे हुओं में से जी उठा प्रभु है। वे अपने झुंड़ोंके पास आनन्द मनाते हुए और परमेश्वर का जयजयकार करते हुए वापस गये, क्योंकिवे जान गये थे, कि वह जीवता है। और उन्होंने कहा था, “जब वहहम से मार्ग में बातें करता था, तो क्या हमारे मन मेंउत्तेजना ना हुई थी?”प्रभु, आपकाउन्हें वहाँ पर दिखाई देना, और आपके द्वारा कुछ ऐसा करना जो आपने अपनी सलीबी मौत से पहलेकिया था, उसने आपके पुनरुत्थान को साबित किया था, कि आपठीक वही यीशु है, जिसने उन्हें उस सारी वार्तालाप को जो आपने उन के साथ की थी, स्मरणदिला दिया था। प्रभु, आप सारे सप्ताह भर हम से बातें करें। अब, प्रभु, आप हमारेमध्य में दिखाई दें और अपने आप को उस प्रत्येक ह्रदय पर विदित करायें जो जरूरतमंद है।हम इसे यीशु के नाम में और उसी की खातिर माँगते हैं। आमीन!9(एक बहन अन्यान्य भाषा में बोलती है। एक भाई उसका अनुवाद बताता है। टेप में रिक्तस्थान-सम्पां)अब, मंड़लीप्रार्थना करे! हे पिता हमारे तू जो स्वर्ग में है, तेरानाम पवित्र माना जाए। तेरा राज्य आवे। तेरी मर्जी जैसे स्वर्ग में पूरी होती है वैसेही पृथ्वी पर भी पूरी होवे। हमें हमारी रोज़ की रोटी दे। और हमारे अपराधों को क्षमाकर जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं। और हमें परीक्षा में ना डाल, परन्तुबुराई से बचा। क्योंकि राज्य, महिमा और पराक्रम हमेशा तक तेरी हैं। आमीन!10ऐसा है, काश मेरी कलम शिल्पकार वाला औज़ार बन जाये और मेरा कागज चकमकका पत्थर बन जाये और ये वचन जो अब मैं कहता हूँ इस पर खुद जायें, ताकियह सारे लोगों के पास पहुँच जायें।परमेश्वर के पवित्रआत्मा के अपने लोगों से बातचीत करने के बड़े ही विचित्र तरीके होते हैं। बहुत सी बारवह आश्चर्यकर्मों के द्वारा और उन वरदानों और बुलाहटों के द्वारा व्यवहार करता है जोबगैर प्रायश्चित के ही मिल जाते हैं। और जिन्हें परमेश्वर अपने लोगों को अपने अनुग्रहके द्वारा दे देता है।11अब मैं घर पर एक प्रकारसे छुट्टियों पर हूँ। मैं आमतौर से वर्ष के इस समय पर अपना समय घर पर बिताता हूँ, क्योंकिमैं यह चाहता हूँ, कि जब मैं गिलहरियों के शिकार पर जाऊँ, तो मैंतनावमुक्त रहूँ। और मैं इस सप्ताह अपने मित्रों के साथ कैन्टकी में गिलहरियों के शिकारपर गया हुआ था, यह मेरी एक पसंदीदा जगह है। मैं हताश सा था, इसलिएनहीं क्योंकि मुझे कोई गिलहरी नहीं मिली थी, परन्तु मुझे हौसलापस्तीका अनुभव हुआ था। कोई चीज थी जो मुझसे कह रही थी, कि मुझेअवश्य ही घर वापस लौट जाना चाहिए। और वापस आते हुए मोटरगाड़ी में ही मेरी आँख लग गईथी।12जैसाकि आप सब जानते हैं, और यहबात छप भी गई है, और यह गवाही में भी है, और यहटेप पर भी है, कि पिछले साल मैं यहाँ इन्डियाना में वहाँ पर बैठा हुआ था जहाँप्रभु परमेश्वर नीचे उतर आया था, और मुझ से बात की थी, और मुझे मेरी दूसरीसेवकाई (Second Ministry) के बारे में बताया था, कि वहनिकट भविष्य में होने के लिए तैयार है। और वहीं पर तीन गिलहिरयों को अस्तित्व में आनेके लिए बोला गया था। मैं सुनिश्चित हूँ, कि आप सब इस गाथा को जानतेहैं। कैसे भी हो, मैं मार्ग पर चले जा रहा था…जबकिमैंने बाकी सभी लड़को को छोड़ दिया था, और मैं शिकार करने आगेबढ़े चला जा रहा था, और मुझे ठीक इसी स्थान पर फिर से जाने की अज़ीब सी अनुभूति हुई।यह दिन का उजाला निकलने से पहले की बात है, और बारिश हो रही थी, और मैंयह जानता भी नहीं था, कि मैंशिकार करने के लिए जाऊँगा भी या नहीं; पर मुझे वहाँ पर उस मैदानमें जाना होता है। शिकार करने के लिए जाने का अर्थ होता है, कि आपखुद अपने को प्रार्थना करने के लिए अलग कर रहे होते हैं। और मैंने कार रोकी और बाहरनिकला, और सड़क के पार निकल पड़ा, और झाड़ीमें जा निकला, और इससे पहले कि दिन का उजियाला होता और हल्की हल्की रोशनी बिखरती…

13मैं रुका और मैंने एक छोटी सी प्रार्थना अर्पित की जैसा कि मैं आमतौर से करता हूँ, और मैंनेपिता से प्रार्थना की, कि वह मुझे वह प्रदान करे जिसकी मुझे आवश्यकता है। मैं इस बातमें यकीन नहीं करता हूँ, कि किसी को व्यर्थ में ही बर्बाद करूं या नाश करूं; मैंनेअपने जीवन में कभी भी किसी चिड़िया या अन्य किसी भी जीव पर निशाना साधने का अभ्यासकरने के लिए गोली नहीं चलायी है। जिस किसी का भी मैं शिकार करता हूँ, या तोमैं उसे खाता हूँ, या मैं उसे उस किसी को दे देता हूँ जो उसे खाता है। मैं किसीको बर्बाद करने में विश्वास नहीं करता हूँ। मैं वैसे काम करने में विश्वास नहीं करताहूँ, क्योंकि ऐसा करना सही नहीं है।इसकेबाद मैं मुड़ा और उस छोटे से जानेमाने पथ पर जो चरागाह के बराबर में जाता था और जोअंग्रेजी के “एल” का सा आकार बनाते हुए जंगलों में को चला जाता है, चलनेलगा; और कोई विचित्र सी घटना घटित हुई। वे सारे अनुभव जो मुझे हुएहैं, मैंने ऐसा कोई भी अनुभव कभी नहीं पाया था। जहाँ मैं खड़ा हुआथा, मैंने उससे बांयी ओर की पहाड़ी के शिखर पर नज़र डाली, और वहाँउस शिखर पर से तीन मेघधनुष ऊपर को निकलकर आ रहे थे। और वे लगभग तीस फुट ऊँचे तक जारहे थे। सबसे पहले मैंने दृष्टि डाली और मैंने ज्योति देखी, और इसकेबाद मैं बस पीछे को मुड़ा, क्योंकि मैंने सोचा था, कि ”शायदसूरज की धूप निकल रही है।”अगले ही पल मुझे यह विचार आया, कि यहतो उस तरफ नहीं थी जिधर सूरज था; यह तो दक्षिण की ओर था।और दूसरी बात यह थी, कि आकाश में पूरी तरह से बादल छाये हुए थे, बारिशहो रही थी, सब जगह बारिश हो रही थी। ऐसा पिछले शुक्रवार की सुबह अगस्त कीपच्चीस तारीख को ही हुआ था, और आप जानते हैं, कि तब कैसे बारिश हो रहीथी। और सब जगह पूरी तरह से बादल छाये हुए थे।14और मैंनेफिर से दृष्टि डाली, और यह वहाँ पर था, वे तीनों मेघधनुष वहींपर थे और बड़े और बड़े होते चले जा रहे थे। मैंने अपना टोप उतार लिया। मैंने अपनी बंदूक नीचेरख दी। और मैं अपने हाथो को ऊपर उठाए हुए उसकी ओर बढ़ने लगा। ऐसा लगता था, कि मानोकोई चीज मुझ से कह रही थी, “यह काफी नज़दीक है।” मैं तो बस नीचे बैठ करअपने उन जूतों को जो मैंने पहने हुए थे उतारने जा रहा था, ताकिमैं यह देख सकें, कि क्या मैं और ज्यादा नज़दीक जा सकता हूँ। परन्तु मैं उसकेकुछ ही गज में गया होऊँगा, और मैंने उसके रंगों को वैसे ही धूमिल होते हुए देखा जैसे कोहराउमड़कर चारों ओर उड़ रहा होता है। मैं कुछ देर तक तो निश्चल सा खड़ा रहा। वह उस पहाड़ीकी चोटी से ही ठीक ऊपर को उजागर होकर आ रहा था। और मैं देखता रहा, जैसेकि वे तीनों…(उन में से एक तो बांयी ओर था, एक दांयीऔर था, और एक मध्य में था)…एक कटोरे जैसे में एकसाथ उमड़ रहे थे…यह जो कुछ भी था, यह सजीव था। यह चल फिररहा था, और अपने चक्रण कर रहा था। और मैं बस वहीं पर खड़ा रहा जैसाकिवह धूमिल होता चला रहा था।मैं वापस मुड़ा और मैंनेफिर से दृष्टि डाली, और मैंने ज़ोर से चिल्लाकर कहा, “हे परमेश्वर, आपकेपास क्या है जो आपका दास जान ले?’ठीक इसके बाद ही प्रभु का आत्मा अंदर आया और बोला, “नये नियम का यीशु ही पुरानेनियम का यहोवा है; उसने तो सिर्फ आत्मा से मानव रूप में अपना मुखौटा बदला था।” सच में, यह मेरेउस सन्देश की जो मेरा उसके बारे में है, पुष्टि कर रहा था, और मुझेयह जानने दे रहा था, और मुझे इस बात में सुनिश्चित कर रहा था, कि येइक्कतीस साल व्यर्थ नहीं गये हैं।15जैसे जैसे मैं उसकेपास जाता रहा, वैसे वैसे ही वह दूर जाता रहा, और इसकटोरेनुमा आकृति में विलीन होता चला गया और इसके बाद वह ओझल हो गया। मैं चलकर निकटगया। मैं और ज्यादा नज़दीक जाने से डरता था, क्योंकि इससे पहले किमैं वहाँ जाता उसने मुझे रोक दिया था।मैं मुड़ा और मैंनेउस प्रकाश पर जिस प्रकार से वह मेरे लिए चमक रहा था, ध्यानदिया, यह बिलकुल उस पेड़ के साथ एक सीधी रेखा में था जहाँ मैं पिछलेसाल बैठा हुआ था, और जहाँ वे गिलहरियाँ दृष्टिगोचर हुई थीं। इसके लगभग पैंतीसया चालीस मिनट बाद मैं जंगल में से होकर और दें की तलहटी तथा ऐसी ही और दूसरी चीजोंसे होते हुए बढ़ता चला गया, जब तक कि मैं इस पेड़ के पास ना पहुँच गया जिससे चार अलग अलगदिशाओं में..(पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिणमें)…बड़ी बड़ी चार शाखाएं निकल रही थीं—उस पेड़ से चार बड़ी बड़ी टहनियाँनिकल रही थीं। और मैं इस वाली टहनी पर चढ़ गया और वहाँ पर बैठ गया जहाँ जब उसने मुझेवचन के उस लेख के बारे में बताया था, यदि तू इस पहाड़से कहे, कि हट जा।“और जैसाकि मैं थोड़ीदेर के लिए वहीं पर खड़ा हुआ था, तो मैं इस समय मेघधनुषके बारे में बिलकुल भी नहीं सोच रहा था; वह मेरे मस्तिष्क से जाचुका था। मैं वहीं पर खड़ा हुआ था। और यह साल गिलहरी के शिकार के लिए बड़ा ही बुरासाल रहा है, सब कुछ देर से रहा है, और कोईगिलहरियाँ नहीं थीं।16मैंने सोचा, “ठीकयही वह जगह है जहाँ पिछले साल परमेश्वर ने मुझे वे गिलहरियाँ दी थीं, जिन्हेंअस्तित्व में आने के लिए बोला गया था। मैंने फिर से अपनी टोपी उतार ली और मैं बोला, ”प्रभुपरमेश्वर, आप अभी भी ठीक वही यीशु हैं। आप अभी भी परमेश्वर ही हैं।“और किसी चीज ने मुझ से कहा, “इस बार तुझे कितने कीजरूरत है?”मैंने कहा, “उतने की ही जितने कि मुझेउस बार जरूरत थी-जितनी की सीमा में हैं।” और इसके बाद मैंने कहा, “मुझे यह सीमा आज दस बजे से पहले ही मिल जाये।” और यह बात बड़ी ही विचित्र लगती है, जैसा कि तब मैं उस क्षेत्रमें था जहाँ बहुत ही ज्यादा मच्छर थे, यह वह जगह थी, जिसपर मच्छरों का पूरी तरह से कब्ज़ा था, और यह एक प्रकार से नमीऔर दलदल वाला क्षेत्र था, और एक बहुत बड़ा मच्छर मेरी आँख के पास काटने के लिए आया, और मैंबोला, “इस दिन में इन में से एक भी मुझे परेशान ना करे।” मेरे पास मच्छरों को भागने वाली कोई दवा नहीं थी, या मेरेपास ऐसा ही कुछ भी नहीं था। और इससे पहले कि मैं इसे जानता, मैंबोला, “तीस मिनट के अंदर सूरज चमकने लगे।”17और मुझे ऐसा कहकर देर भी ना हुई थी, कि पिछले साल के जैसेही ठीक मेरे पीछे एक गिलहरी थी; वह बड़ी और लाल रंग कीथी, और टहनी से कूदती हुई लगभग सत्तर गज गई और गुर-गुरकरने लगी। मैं पीछे मुड़ा। उतनी दूरी पर तो मैं शक्तिशाली दूरबीन लगाकर मुश्किल सेही उसकी आँख देख सकता था। मैंने बस गोली चलाई; बस यहीकिया। और गोली उसकी आँख पर बिलकुल ठीक वहीं पर लगी जहाँ उस पिछली बार लगी थी।मैंउस जंगल में से होकर चलता गया। और बिलकुल ठीक दस बजने में तीन मिनट पर मैंने अपनी तीसरीगिलहरी को गोली मारी; जैसा यह पिछले साल था बिलकुल ठीक वैसेही यह इस बार था-दस बजने में तीन मिनट पर। परमेश्वर ही मेरा एक मात्र गवाह है, कि सारेदिन भर में एक भी मच्छर भिनभिनाया तक नहीं, जबकि मैं सोचता हूँ, कि अगरउन मच्छरों का वजन तौला जा सकता होता, वे वहाँ पर टनों थे। औरमैंने कदाचित उन में कोई भी ना तो देखा ही और ना ही मैंने किसी की भिनभिनाहट सुनी।मैं उनकी भिनभिनाहट के लिए कान लगा रहा था, कि देख सकें, कि क्यामैं किसी को देख सकता हूँ। और मैंने घुर-घुर की सी आवाज़ सुनी, मैंनेसोचा, “कहीं पर कोई एक है।” और मैंने कान लगाया, और यह एक ट्रक थाजो पिछली तरफ राज मार्ग पर जा रहा था। और उस समय से बिलकुल तीस मिनट बाद बड़ा ही तेज़और अच्छा सूरज चमक रहा था।

18इसके बाद मैं उस जगह परआया। और मैं सोच रहा था, कि जब मैंने सीमा“ कहा था, तो इसका मतलब पाँच गिलहरियाँ था, जैसाकि इन्डियाना में यही सीमा है। परन्तु मुझे याद आया, कि पिछलेसाल जब उसने मुझ से पूछा था, कि मुझे मेरे भोजन के लिए कितने की जरूरत है, तो मैंनेकहा था, तीन।”और मुझे तीन गिलहरियाँ मिल गई थीं। अतः कल ही मैं वापस गया था, और मैंठीक उसी जगह से होकर फिर से जा रहा था, और किसी चीज ने मुझ सेकहा, “मत जा। सड़क पार कर।” और बिलकुलठीक दस बजे, जैसा कि मेरी घड़ी में ठीक दस बजे हुए थे; मैंनेइन्डियाना वाली सीमा पर गोली मारी, मैंने पाँचवीं गिलहरीपर गोली मारी। मैं चाहता हूँ, कि आप इस बात पर ध्यान दें, कि वहाँपर तीन मेघधनुष थे, और तीन ही बातें थीं जिन्हें कहा गया था; तीनगिलहरियाँ मिली थीं। वहाँ तीन बातें हुई थीं-दस बजनेतक तीन गिलहिरयाँ मिलीं, कोई मच्छर ना मिले, तीस मिनट में सूरज चमकरहा था। और इस बात की गवाही देने के लिए वहाँ पर तीन लोग थे- भाईबैंकस वुड, मेरा बेटा बिली पॉल और उसका पुत्र डेविड इसकी गवाही देने केलिए वहाँ पर थे।19जब मैंने उन मेघधनुषोंको देखा जो उतने फैले हुए थे जैसे वह घेरा है, जो प्रभुके दूत वाला है; परन्तु ये तो तीन मेघधनुष थे जो एक में ही विलीन हो रहे थे; और ओह, इसनेमेरे हृदय की कैसी सहायता की, कि मैं परमेश्वर को जान जाऊँ; कि मैंयह जान जाऊँ, कि यीशु कोई मनुष्य नहीं है जैसा कि लोग सोचते हैं कि वह मनुष्यहै; कि वह तो बस एक भविष्यद्वक्ता था, जैसाकि आज का यह आधुनिक विचार है जो यह सोचता है, कि यीशुतो सिर्फ एक भविष्यद्वक्ता ही था। वह तो पुरानेनियम का यहोवा ही है जो देहधारी हुआ और उसने हमारे मध्य में डेरा किया। और वहाँ इससेनिश्चय ही मुझे सुकून मिला। इसके बाद इस विषय पर सोचना, कि परमेश्वरने….. बहुतेरे लोगों को ढूँढ़ा है…20अब, लोगोंका एक ऐसा समूह है जो अपने आप को वननैस, या ओनली जीज़स कहते हैं।मैं उनकी शिक्षा पर उन से सहमत नहीं हूँ। ना ही मैं उस से सहमत हूँ जो त्रिएकता वालासमूह है, जो कहता है कि तीन परमेश्वर हैं, जो कित्रिएकतावाद की ही हद है। परन्तु मैं विश्वास करता हूँ, कि येतीनों पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा एक ही हैं—ये एकही परमेश्वर की तीन कार्यस्थितियाँ हैं। वही आग के खम्भे में पितृत्व के रूप में रहा; वहीयीशु मसीह में पुत्र के रूप में रहा; और अब वही पवित्र आत्माके रूप में अपनी कलीसिया में वास करता है। वह ठीक वही प्रभु यीशु है जो देहधारी हुआऔर हमारे मध्य में डेरा किया, वही इस दिन में हमारे साथ है, वहीइस दिन में पवित्र आत्मा के रूप में हमारे मध्य में है।जब मैंपहली बार मुड़ा और मैंने इस पर दृष्टि डाली, तो जितने मुझे अनुभव हुएहैं, उन सब के द्वारा मैं पहले तो यही सोच रहा था, कि यहसूरज ही हो सकता है जो कहीं पर बादलों में से झाँक रहा है; परन्तुयह तो सूर्य का उजियाला होने के समय से भी पहले था। इसके बाद जब मैं फिर से वापस मुड़ाऔर इस पर दृष्टि डाली, तो मैंने देखा, कि यह एक प्रकाश नहींथा, ये तो मेघधनुष थे; और तब जब मैंने दृष्टिडाली और उसे देखा, तो मैं पूरी तरह से सुन सा पड़ गया था।ठीकतभी किसी ने मुझ से कहा, “क्या तुम्हें ऐसा महसूस नहीं हुआ, कि तुमज़ोर ज़ोर से चिल्लाओ?”जी नहीं, मुझेऐसा महसूस नहीं हुआ था, कि मैं चीखू-चिल्लाऊँ। उन अनुभवोंसे आपको ऐसा नहीं होता है, कि आप ऐसा सा महसूस करें, कि आपचीखे-चिल्लायें; उन से तो आपको ऐसा हीमहसूस होता है, कि मानो आपका वहाँ पर लंगर पड़ गया हो, जहाँआप यह जानते हैं, कि कोई ऐसी चीज है जो आपको ऐसा बताती है। यह तो बस तसल्ली देनेवाली अनुभूति होती है।21अब, वे बातें सत्य हैं। मैं जानता हूँ, कि हमें ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं जो ऐसा कहती हैं—बहुतसी बार कुछ लोग कहते हैं, “ओह, मैं तो उस जैसी बेकार बात पर विश्वास नहीं करता हूँ।” मैंऐसी किसी भी बात के लिए प्रमाणपत्र नहीं दे सकता हूँ, जिसेमैं जानता ही नहीं हूँ। मैं तो केवल उसी बात के लिए ही प्रमाण-पत्रदे सकता हूँ जिसे मैं सच जानता हूँ। और वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर जिसने यह बाइबिललिखी और जिसका मैं दास-सेवक हूँ, वही जानता है, कि वहसत्य है।आप ज़रा उस दिन के बारे में सोचिए, जब हमप्रभु के आगमन से ठीक पहले के उस समय में रह रहे हैं, जिसकेलिए यीशु ने कहा था, “आकाश और पृथ्वी पर चिन्ह दिखाई देंगे; बड़ीबड़ी बातें दिखाई देंगी, उड़न-तश्तरियाँ, प्रक्षेपात्र दिखाई देंगी; समयकी व्यग्रता होगी; राष्ट्रों के बीच तनाव होगा; और पृथ्वीपर खौफनाक नज़ारे होंगे।” और हम उन्हीं बातों को देखने के लिए उसी दिन में रह रहे हैं।22अब, इस सुबहके सन्देश के लिए मैंने जकर्याह का चौथा अध्याय चुना है। मैं चाहता हूँ, कि आपमेरे साथ पवित्रशास्त्र में जकर्याह का चौथा अध्याय निकाल लें। यह मेरी…यह मेरी इच्छा थी, कि मैं आपको ये बातें बताऊँ। बहुत सी बार बहुत सी घटना घटितहोती हैं जिनके बारे में मैं—मैं नहीं बोलता हूँ; जिन्हें मैं नहीं बताताहूँ। मगर मेरे लिए यह बड़ी ही असाधारण बात थी, कि मैंइसे कलीसिया को ना बताऊँ। इसे तो अवश्य ही बताया जाना ही चाहिए। और परमेश्वर जिसकेसम्मुख मैं खड़ा होता हैं, जानता हैं, कि यह सत्य है। मैं जानताहूँ, कि परमेश्वर है; और मैं जानता हूँ, कि यीशुमसीह परमेश्वर का पुत्र है, वह इम्मनुएल है, जो आज अपने लोगों के मध्यमें पवित्र आत्मा के रूप में वास कर रहा है। और मैं जानता हूँ, कि प्रभुका आगमन अति निकट है, जबकि ये चिन्ह और आश्चर्यकर्म दिखाई दे रहे हैं।23हमनेअभी हाल में ही सात कलीसियायी कालों का अध्ययन किया है, और हमने यह सीखाहै, कि हम अन्तिम और लौदीकियायी कलीसियायी काल में रह रहे हैं, जब कलीसियाउदासीन होगी, वह ठंड़ी पड़ जायेगी, संस्थागत हो जायेगी औरसंस्था में ढल जायेगी-संस्थाएं उस पर अपना अधिपत्य जमा लेंगी और उसे खा डालेंगी। परन्तुएक वायदा है, कि बहुत थोड़े से बचे हुए लोग होंगे। एक ऐसी सच्ची कलीसिया होगीजो दूर-दराज में सभी जगह बिखरी हुई होगी; परन्तुपरमेश्वर ही उसे एक साथ इकट्ठा करेगा, और वह स्वर्ग पर ऊपर उठायेजाने के अंतर्गत महिमा में चली जायेगी-एक ऐसा छोटा झुड़ जिसकापवित्रीकरण हो चुका है, वह कहीं पर प्रभु की बाट जोह रहा है।24किसी दूसरे दिन जब मैं दानिय्येल के सत्तर सप्ताह पर पहुँचा, तो जबमैं ठीक यही पर प्रचार मंच पर खड़ा हुआ था, तो कोई बात मुझे छू गईथी; मैं उस घड़ी को देखने के लिए जिसमें हम रह रहे हैं, कभीभी उस बात से कभी भी अलग ना हट सका था। मैं कहीं पर जाना चाहता हूँ तथा कुछ और करनाचाहता हूँ, मैं इसे अपने दिमाग से दूर करना चाहता हूँ। मेरे पास ऐसे बहुतसे प्रिय जन हैं जिनका उद्धार नहीं हुआ है। मैं यह जानता हूँ, पर मैंउन्हें बचाने के लिए क्या कर सकता हूँ? ऐसा है क्या जो मैं करसकता हूँ? मैंने सुसमाचार का प्रचार किया है। परमेश्वर उन बड़े बड़े चिन्होंऔर आश्चर्यकर्मों को करके दिखा चुका है, जो उसने तब से कदापि नहींकिये जब से जगत रहा है, प्रभु यीशु के दिनों में भी ऐसा नहीं हुआ था, समयके सम्पूर्ण इतिहास में भी उसने ऐसा पहले कभी नहीं किया था। और इसकी चर्चा सारे विश्वभर में फैल गई है। और अभी भी जगत की हालत निरन्तर और भी बदतर होतीचली जा रही है। परन्तु तब मुझे यह याद रखना है, कि हमउस लौदीकियायी कलीसियायी काल में रह रहे हैं, जहाँवे बदतर हो जायेंगी; और वचन कह चुका है, कि वे ऐसी ही हो जायेंगी।25जैसाकि उस सन्देश ने बहुत ज्यादा प्रहार किया था, एक और बात है, कि मैंबहुत ज्यादा अनुग्रह पर प्रचार किये चला जा रहा हूँ, और इसकेबाद मैंने इस सुबह इसे ही चुना है। जैसा कि मैं जकर्याह के चौथे अध्याय को पढ़ना चाहताहूँ, जैसाकि मैं इसके एक भाग को ही पढ़ना चाहता हूँ, मैंइस सुबह उसी पर बोलना चाहता हूँ।फिर जो दूत मुझसे बातें करता था, उसनेआकर मुझे ऐसा जगाया जैसा कोई नींद से जगाया जाए।और उसने मुझसे पूछा, तुझेक्या देख पड़ता है? मैंने कहा, एक दीवट है, जो सम्पूर्णसोने की है, और उसका कटोरा उसकी चोटी पर है, और उसपर उसके सात दीपक हैं; जिन के ऊपर बत्ती के लिए सात सात नालियाँ हैं।और दीवट के पासजलपाई के दो वृक्ष हैं, एक उस कटोरे के दाहिनी ओर, तथादूसरा उसकी बांयी ओर।तब मैंने उस दूत से जो मुझ से बातें करता था, पूछा, हे मेरेप्रभु, ये क्या हैं?जो दूत मुझ से बातेंकरता था, उसने मुझ को उत्तर दिया, क्यातू नहीं जानता है, कि ये क्या हैं? मैंने कहा, हे मेरे प्रभु, मैं नहीं जानता हूँ।तब उसने मुझे उत्तरदेकर कहा, जरुब्बाबेल के लिए यहोवा का यह वचन है। न तो बल से, और नशक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा; मुझसेनाओं के यहोवा का यही वचन है।क्या आप देखते हैं? सन्देशकिसी बड़ी सामर्थ या शक्ति के द्वारा नहीं आएगा, वरनवह तो परमेश्वर के आत्मा के द्वारा ही आएगा। आखिरी पद, अर्थात्सातवाँ पद देखें…हे बड़े पहाड़, तू क्या है? जरुब्बाबेल के सामने तू मैदान हो जाएगा; और वहचोटी का पत्थर यह पुकारते हुए आएगा, उस पर अनुग्रह हो, अनुग्रह!…(अनुग्रह, उस परअनुग्रह हो!)26हम जो बाइबिल को पढ़ते हैं, हम सभीवचन के इस लेख से भली-भाँति परिचित हैं। हम जानते हैं, कि यहउस समय के दौरान की बात है, जब मन्दिर को बहाल किये जाने की तैयारी की जा रही थी। और जरुब्बाबेललोगों के बीच एक महान राजकुमार था, जिसने इस इमारत की नींवरखी थी। अब, मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आपइस सुबह अपनी आत्मिक समझ ओढ़ लें, अभिषेक का अपना अंगरखापहन लें, जबकि हम इस पर विचार-मनन करते हैं। और इस महानराजकुमार ने यहोवा के भवन का फिर से निर्माण कराने का निश्चय किया था। और जब उसने ऐसा किया, तो उसने नींव का पत्थर रखा।जैसे जैसे हम आगे पढ़ते चले जाते हैं, हमें यह मालूम होता है, कि परमेश्वरने कहा था, “जरुब्बाबेल ने अपने हाथों से नींव रखी है, वहीचोटी का पत्थर भी आगे लेकर आएगा(वही उसको तैयार भी करेगा)।” मैंचाहता हूँ, कि आप ध्यान दें, उसने यह कभी नहीं कहाथा, कि वह कोने का पत्थर आगे लेकर आएगा। वह तो चोटी का पत्थर हीआगे लेकर आएगा।27और हम जानते हैं, कि पवित्रशास्त्र कहताहै, कि यीशु ही कोने का मुख्य पत्थर है, और वहीचोटी का पत्थर भी है। अब, अगर हम चंद मिनटों के लिए विचार करें, कि सातवींकलीसिया का दूत, बालकों के विश्वास को पितरों की ओर वापस फेरने के लिए ही था; दूसरेशब्दों में यह है, कि वह कलीसिया का आत्मा की सामर्थमें फिर से निर्माण करने के लिए था। ना तो बल से, ना शक्तिसे, पर मेरे आत्मा के द्वारा, यहोवाकी यही वाणी है। संस्थाओं के द्वारा नहीं, नामधारी कलीसियाओं केद्वारा नहीं, परन्तु परमेश्वर के पवित्र आत्मा के द्वारा ही अंत के दिनोंमें कलीसिया तैयार की जाएगी।28जरुब्बाबेल जो यहोशू केसंग राजकुमार था, वही एक ऐसा था जो इस चोटी के पत्थर को तैयार करके लाया था। उसनेही नींव रखी थी। वही लोगों को प्रतिचित्रिण में नींव के पास लेकर आया था।हम सबजानते हैं, कि ये दीवट या चिरागदान तथा ऐसी ही और दूसरी चीजें यहूदी औरकलीसिया दोनों को ही दर्शाती हैं। बाइबिल यहाँ पर कहती है, कि वेजलपाई(जैतून) की डालियाँ थे। और जलपाई की डाली में…हम अर्थात्हम अन्यजाति जो जंगली डाली हैं, हमें जलपाई की जड़ मेंसाटा गया। और इन्हीं दो डालियों से तेल वाली नालियाँ आती हैं, जो सातचिरागदानों में जाती हैं, ताकि सात कलीसियायी कालों को उजियाला दें।29अब, आप हमारी उस शिक्षा को जो हमने उन अध्यायों पर दी है, जिनका हमने अभी हाल मेंअध्ययन किया था, याद करें, हमने उस महान पिरामिडको लिया था, जिसका अवश्य ही हनोक ने निर्माण करवाया था, और उसकाकुछ देर तक अध्ययन किया था। और उस पिरामिड पर चोटी का पत्थर कदापि नहीं रखा गया था।मैं वहाँ पर जा चुका हैं। इस दिन तक भी उसके निर्माण की कारीगरी को कदाचित बदला नहींजा सका। हमारे पास ऐसी कोई मशीनें नहीं हैं जो एक पिरामिड बना सकें, हमारेपास कोई ऐसी शक्ति (जब तक कि यह परमाणु-शक्ति ना हो)..नहींहै जो एक पिरामिड बना सके, क्योंकि वे इतने ज्यादा विशालकाय हैं। वे पत्थर जिनका वजन टनोंहै वे हवा में ही टिके हुए हैं, उन्हें आपस में एक केऊपर एक ऐसा रखा गया है, कि एक बहुत ही महीन ब्लेड तक उनमें घुस नहीं सकता है….और उनमेंकोई सीमेंट या मासाला भरा हुआ नहीं है; वे तो बस ऐसे कटे हुएहैं, कि वे एक दूसरे के साथ फिट होते चले जाते हैं।30ठीकइसी प्रकार से यीशु मसीह की देह को होना चाहिए; हम परमेश्वरके महान औज़ार और यंत्र के द्वारा पवित्र आत्मा के द्वारा ऐसे कटे हुए हों, कि हमएक ही मनुष्य के रूप में आपस में जुड़े हुए हों। हमें अलग-थलगनहीं होना चाहिए। हमें अवश्य ही एक ही व्यक्ति होना चाहिए। और ये यही दिखाता है, कि कोईभी मशीनरी वैसा नहीं कर सकती है। वैसा तो परमेश्वर ही करता है। किसी संस्था की कोई कारीगरी, किसीसराये की कोई कारीगरी, या इन में से कोई भी कदापि ऐसा नहीं कर सकती है, वे तोवैसी ही हैं जैसी उनकी मंशाएं हैं। वे कभी भी ऐसा नहीं कर सकती हैं, क्योंकिऐसा तो सिर्फ परमेश्वर ही, पवित्र आत्मा ही कर सकता है।31मैं नहीं सोचता हूँ, कि मेरे जेब में एक डॉलर है। लेकिन उस पर है…जी हाँ, मेरेपास है; मेरे पास एक डॉलर है। मुझे माफ करना! आप इसडॉलर के पिछली तरफ बांयी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका की मोहर देखेंगे। मेरे लिए यह बांयीओर है; आपके लिए यह दांयी ओर है। यह एक उकाब है, और वहाँपर हाथों का घेरा तथा ऐसी ही और दूसरी चीजें हैं। परन्तु यहाँ पर इस ओर जो मेरे लिएदायी ओर है, आप एक पिरामिड देखते हैं। और आप ध्यान देंगे, कि उसपिरामिड से ऊपर की ओर एक चोटी का पत्थर है, और वहीं पर उसके नीचेलिखा हुआ है, एक महान मोहर“! यहाँ तक कि यह हमारीमुद्रा पर है, ताकि हम इसे पहचान लें…कोईनास्तिक भी मसीहियत से अछूता नहीं रह सकता है। हर एक अक्षर जिससे आप तारीख लिखते हैं, वह हमारेप्रभु के जन्म की तारीख के बारे में ही बताता है। हर एक कलेंडर तथा सभी वस्तुएं उसीके बारे में बतलाती हैं। यहाँ तक कि हमारी मुद्रा भी जिस पर वह चोटी का पत्थर है जोकि मसीह है…क्यों उन्होंने पिरामिड पर चोटी का पत्थर नहीं रखा था? क्योंकिजब वह चोटी का पत्थर आया, तो उसे ठुकरा दिया गया था।

32परन्तु अब देखिए, उस भविष्यवाणी के अनुसार, वह चोटीका पत्थर आएगा। और मैं आपसे यह चाहता हूँ, कि आप यह ध्यान दें, कि जब चोटी का पत्थर आताहै, तो जो राजकुमार शोर मचाकर यह सन्देश दे रहा होगा, वह ऊँचेशब्द से कहेगा, “अनुग्रह, अनुग्रह!” क्योंकि यह अनुग्रह ही है जिसके द्वारा हमारा उद्धार हुआ है; हमाराउद्धार कामों से नहीं हुआ है, कि कहीं कोई इंसान फूल ना जाये। और अनुग्रह के सन्देश को हीमनुष्य के पैरों के तले ऐसा रौंद दिया गया है, कि यहएक लज्जा की बात बन गया है। उन में से कुछ तो अनन्त सुरक्षा पर ही बवाल मचा डालते हैं, ओह, कुछतो बवाल मचा डालते हैं, तथा सब कुछ ऐसा ही कर डालते हैं। परन्तु अनुग्रह का सच्चा सन्देशतो हमेशा ही एक सा रहता है; और यही है जहाँ पर शैतान इस पर प्रहार करके इसे कलीसिया मेंसे ही निकाल बाहर करने की चेष्टा करता है। परन्तु यह परमेश्वर का ही अनुग्रह है जिसके द्वारा हम सब का उद्धार हुआ है।33अतः यीशु मसीह के परमेश्वरत्व में ऐसा है, अगर प्रभु परमेश्वर ही आ सके और उसकी पुष्टि कर सके, कि वहसच है, तो केवल यही काफी नहीं है, परन्तु वह तो अपने वचन केद्वारा पुष्टि करता है, कि यह सच है, और वह चिन्हों और आश्चर्यकर्मोंके द्वारा पुष्टि करता है, कि यह सच है। फिर यह भी बात है, अनुग्रहसच्चाई है। फिर क्यों कोई आलोचना कर सकता है और कह सकता है, कि अनुग्रहगलत है, और हमारा उद्धार तो कामों के द्वारा हुआ है? हमाराकामों के द्वारा नहीं, वरन विश्वास करने से अनुग्रह के द्वारा ही उद्धार हुआ है। कामतो यही दिखाते हैं, कि आपका उद्धार हो गया है। परन्तु जो आपका उद्धार करता है, वह परमेश्वरका अनुग्रह ही है। यह अनुग्रह ही है, जिससे आपका उद्धार हुआहै। यह अनुग्रह ही है जो परमेश्वर आपके लिए करता है। जो काम आप परमेश्वर के लिए करतेहैं, ये तो उसकी सराहना ही दिखाते हैं जो परमेश्वर ने आपके लिए कियाथा। परन्तु अनुग्रह के द्वारा ही आपका उद्धार हुआ है।34कुछ लोग सोचते हैं, क्योंकि मैं कलीसिया में शामिल हुआ हूँ, मैंनेअपना नाम रजिस्टर में लिखवाया है, और यही सब कुछ है जो मुझेकरना है।“ कुछ लोग सोचते हैं, ”क्योंकि मैंने ज़ोर ज़ोरसे जयजयकार किया है, अतः यही सब कुछ है जो मुझे करना है।“ वहीं दूसरे लोग सोचते हैं, ”क्योंकि मैं अन्य अन्यभाषाएं बोलता हूँ; अतः यही है वह सब कुछ जो मुझे करना है। कुछ लोग सोचते हैं, क्योंकि मेरे पासबीमारों को चंगा करने की सामर्थ है, अतः यही सब कुछ है। जोमुझे करना है।“ यह नहीं है। यह तो परमेश्वर का अनुग्रह ही है, यह तोपरमेश्वर का करूणामय अनुग्रह ही है जिससे आपका उद्धार हुआ है। मैं किसी भी काबलियतपर भरोसा नहीं कर सकता हूँ। कुछ लोगों का कहना होता है, ”ओह, वह तोएक महान इंसान है। वह इंसान, मैंने सुना है, कि वह ऊपर खड़ा होता हैऔर इसे करता है। मैंने सुना है, कि वह ऊपर खड़ा होता हैऔर उसे करता है।“पौलुस ने पहले कुरिन्थियोंके

13 वें अध्याय में कहा था, “चाहेमैं मनुष्यों और स्वर्गदूतों कीबोलियाँ बोलू; चाहे मैं आत्माओं को परख लें, चाहेमेरे पास वरदान हों, चाहे मैं अपना सारा माल कंगालों को खिला दें, चाहेमेरे पास इतना विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हिला दें, चाहेमेरे पास इतना ज्ञान हो, कि मैं सारी बातें समझ लें, लेकिनमैं कुछ नहीं हैं, जब तक कि मेरे अंदर प्रेम जो कि अनुग्रह है नहीं आ जाता है।परमेश्वर को ही ऐसा करना होता है। आप इन सब कामों को कर सकते हैं और फिर भी आप नाशहो सकते हैं। यह तो परमेश्वर का अनुग्रह ही है जो आपको बचाता है, यह तोमानव जाति के लिए परमेश्वर का अनुग्रह ही है जो उद्धार करता है।35उसके बारे में सोचिए…शुक्रवार की सुबह दिनके निकलते वक्त ठीक उसके तुरन्त बाद जब वह दृष्टिगोचर हुआ था, तो मैंवहाँ उस मैंदान में जब एक लड़े पर बैठा हुआ था और आँसू मेरी आँखों में से बह रहे थे, तो मैंउस अनुग्रह के बारे में सोच रहा था। मैंने सोचा, “हे परमेश्वर, मेराउद्धार करने के लिए आपका अनुग्रह रुक गया है। क्यों कभी आपकी ऐसी दया मुझ जैसे कंगालअनपढ़-कूबढ़ पर हुई? कैसे कभी आप हमारे दीन-हीन, छोटेसे टेबरनिकल में जहाँ मेल है, और जहाँ लोग जीवनकी चाल में तुच्छ, गरीब हैं, और उनके पास इस दुनियाका कुछ भी नहीं है, नीचे उतर आते हैं, और अभी भी आपका अनुग्रहपवित्र आत्मा के द्वारा हमारे हृदयों में ऐसा जबरदस्त फैल जाता है, कि आपहमारे बीमारों को चंगा करते हैं, और हमारे पापों को क्षमाकरते हैं, बल्कि आप हमारा हमारे पापों से उद्धार करते हैं, और हमेंअपना जन बनाते हैं और हम से व्यवहार करते हैं?”36इसके बाद मैंने दाऊद के बारे में सोचा, कि ऐसाकैसे हुआ होगा, जब उसने यहोवा के लिए भवन बनाने के लिए एक विचार किया था, और उसनेकहा था, “मेरे लिए यह उचित नहीं है, कि मैंदेवदार के बने भवन में रहूँ, और मेरे परमेश्वर का वाचा का सन्दूक भेड़ों की खालों के तलेमन्दिर में रहे।परमेश्वर ने नबी को बताया, “जाकर, मेरेदास दाऊद को बता, कि मैंने उसे भेड़ों की चाराई से लिया, मैंनेतुझे वहाँ से लिया जहाँ तू अपने पिता की भेड़ों को चरा रहा था, और मैंनेतेरा नाम पृथ्वी के बड़े बड़े लोगों के जैसे ही बड़ा किया।37मैंने परमेश्वर के अनुग्रह के बारे में सोचा, कि वह ऐसा कैसे कर सकताथा-कि वह सबसे ज्यादा तुच्छ का उद्धार करे। और उसके बाद मुझ जैसेनिर्धन कंगाल को ले, और मुझे सुसमाचार का प्रचार करने का और यह देखने का अवसर दे, कि दूसरेलोगों का उद्धार हो गया है, मैं देखता हूँ, कि वे चंगे हो गये हैं, देखताहूँ, कि जो घर-परिवार टूट गये थे, वे फिरसे सम्भल गये हैं, और देखता हूँ कि वे जीवन जो बर्बाद हो गये थे उनका फिर से सुधारकिया गया है। और जो अनुग्रह मुझे दिया गया है, मैंनेउसके बारे में सोचा, “ओह, यह तो करूणा से भरा अनुग्रह है। इसके बाद मैं जो एक तुच्छ किस्मका हूँ, गिलहरियों का शिकार करने वाला एक निम्न शिकारी हूँ, वह खुदमेरे पास मेघधनुष के रूप में आ गया, और मेघधनुष का अर्थ एकवाचा है, कि वह सन्देश जो उसने मुझे प्रचार करने के लिए दिया है उसनेवहाँ पर इसे बनाकर इसमें एक वाचा बाँधी है, कि वही इसके समर्थन में है। वही इसके समर्थनमें होगा, क्योंकि यह सन्देश यीशु मसीह और उसकी महिमा के बारे में है।”38कैसे उसने मुझे सारे संसार भर में जाने दिया है, मुझेविश्व भर में देशों देश में लाखों लाख लोगों के पास जाने दिया है, और यहदेखने दिया है, कि लाखों लाख लोग प्रभु के पास आ रहे हैं और उसे अपने निजी उद्धारकर्ताके रूप में अपना रहे हैं, और मुझे यह देखने दिया है, कि वेउसकी भलाइयों से भर गये और उनका उसकी सामर्थ से पवित्रीकरण हो गया, मुझेयह देखने दिया, कि वे उसकी महान सर्वसामर्थ के द्वारा चंगे हो गये। इसके बादमैं नबी के जैसे ही पुकार कर कह सकता हूँ और बोल सकता हूँ, “यह नातो शक्ति से और ना ही सामर्थ से है, यह तो परमेश्वर के आत्माके द्वारा ही है। ऐसा ना तो शिक्षा से होता है, ऐसाना तो धर्मशास्त्र के ज्ञान से होता है, यह तो परमेश्वर का हीआत्मा है जिसके द्वारा वह लोगों का उद्धार करता है। यह तो परमेश्वर का ही आत्मा है, जिसकेद्वारा वह लोगों को चंगा करता है। यह परमेश्वर का ही आत्मा है जो लोगों को सन्देश देताहै। यह तो परमेश्वर का ही आत्मा है जो वचन की पुष्टि करता है।39आज हमारे पास धर्मशास्त्र का ज्ञान रखने वाले ज्ञाता हैं; हमारेपास डॉक्टर ऑफ डीवनिटी हैं; हमारे पास सारे संसार भर में ऐसे बड़े बड़े लोग हैं जो तेज़तर्रार, ज्ञानवान-बुद्धिमान, और शिक्षाप्राप्त हैं। परन्तु परमेश्वर पर जो विश्वास किया जाता है, उसकेलिए सादगी की ही आवश्यकता पड़ती है, कि परमेश्वर के वचन कोयह दिखाने के लिए बोला जाए, कि यीशु मसीह कल, आज, और युगानुयुगएक सा है। यह तो परमेश्वर को समर्पित किया हुआ नम्र-दीनहृदय ही होता है, जो यीशु मसीह को वर्तमान काल में लेकर आता है। आमीन! अगरऐसा करने के लिए किसी थियोलॉजी की ही जरूरत पड़ती, तो प्रेसबीटेरियन, मैथोडिस्ट, बैपटिस्ट, कैथोलिकतथा ऐसे ही और दूसरे क्या होते, और फिर तो हम जैसे निर्धनअनपढ़ लोगों को बिलकुल भी मौका नहीं मिलता। लेकिन इसके लिए ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है। “ना तो बल से और ना शक्ति से, परन्तुमेरे आत्मा के द्वारा, परमेश्वर यूँ कहता है, मैंइस भेद को खोलूंगा।” और दूत पुकार कर यह कहेगा, पुकारतेहुए और चिल्लाते हुएकहा जायेगा, ”अनुग्रह, अनुग्रह!” यहीहै वह जो आज हुआ है; यह परमेश्वर का करूणामय अनुग्रह है जो उसके लोगों पर हुआ है।कैसे वह अनपढ़, कूबढ़ को लेता है, और दिखाता है, कि यीशु एक सा है।40जब वह आया, तो वह कभी भी धर्मशास्त्रके बड़े बड़े ज्ञाताओं के पास नहीं गया था। ना ही वह महायाजक कैफा के पास गया था; उनकेद्वारा तो केवल तिरस्कार ही किया गया था….परन्तु उसने तो मछली पकड़नेवालोंको, उन पुरूषों को जो निर्धन-गरीबथे और आम जीवन की चाल चल रहे थे, लिया, कि वहखुद अपने को उन पर प्रकट करे, और उसने कहा था, “मेरे पीछे हो ले, और मैंतुझे मनुष्यों को पकड़ने वाला मछुआरा बनाऊँगा।” ये यहीदिखाता है, कि उसका अनुग्रह अभी भी यहूदियों से अन्यजातियों के पास पहुँचाहै, कि वह इन अंत के दिनों में अपने नाम के निमित्त एक लोग बुलाए, जैसाकि हम इसका अभी हाल ही में अध्ययन कर चुके हैं। करूणा से भर हुआ अनुग्रह, लगताहै कितना मधुर!

41अनुग्रह पुराना है। अनुग्रह उतना ही पुराना है जितना कि जगत! सबसेपहले मानव जाति पर तब अनुग्रह दिखाया गया था जब हम मानव जाति की उत्पत्ति हुई थी। जबपहली बार मानव जाति को अदन की वाटिका में सृजा जा चुका था, तो उसकेबाद उस अंधेरी सुबह जब उस छोटी स्त्री ने पृथक करनेवाली रेखा को पार करके बाहर कदमरख दिया और परमेश्वर की आज्ञाओं के विरूद्ध चली गई और उसने अपने पति को भी ठीक वैसाही करने के लिए उकसाया, तो नियम तोड़ दिया गया था। व्यवस्था में अवश्य ही दंड़ होनाही चाहिए, अन्यथा वह कोई व्यवस्था नहीं है। व्यवस्था या नियम यह था, “जिसदिन तुम उसका फल खाओगे, तुम निश्चय ही उसी दिन मर जाओगे।”याद रखिए, न्याय का पहला स्थल पृथ्वी पर ही था, और वहअदन की वाटिका में था। और न्याय का अन्तिम स्थल, अर्थात्न्याय का श्वेत सिंहासन अंतिम समय पर पृथ्वी पर ही होगा।42परन्तु जब यहोवा नीचे उतर कर आया, तो मैं इसकी कल्पना कर सकता हूँ, वहाँएक भी ऐसा तारा नहीं था जो चमकता, उस छोटी सी वाटिका मेंउस प्रकाश में जो कभी को एक बार हुआ करता था, इतनाअंधकार था, क्योंकि पाप ने उसे अवशोषित करके बाहर कर दिया था, और उनकेबीच से उजियाले को छीन लिया था।बिलकुल ठीक यही मामलाआज कलीसियाओं के साथ है। बिलकुल ठीक यही मामला आज लोगों के साथ है। पाप ने जीवते परमेश्वरके उस उजियाले को जो यह दिखाये, कि यीशु मसीह अभी भी कल, आज औरयुगानुयुग एक सा है, और सबसेज्यादा तुच्छ व्यक्ति का उद्धार करने के लिए और सबसे निम्न इंसान को, बीमारइंसान को चंगा करने के लिए जीवता है, बिगाड़ कर धूमिल कर दियाहै।43ओह, वह सुबह कैसी भंयकर रही होगी, अंधकारअदन की वाटिका में छाया हुआ था। मैं कल्पना करूंगा, कि उसपर धुंध की काली टाट ढकी हुई थी। मैं कल्पना करूंगा, कि एकभी पत्ता कदाचित हिला-डुला नहीं था;कोई हवा का झोंका नहींचल रहा था। वहाँ तो बस अंधकार था और स्थिति भंयकर थी, क्योंकिपाप ने इसे धूमिल कर डाला था।वहाँ पर यहोवा गर्जनकी दहाड़ सा करता हुआ नीचे आया, वह अदन में से होकर चलताचला जा रहा था, और पुकारता चला जाता था, “हे आदम, तू कहाँहै?” यही वह था जब आदम को अहसास हुआ था, कि वहनंगा था और वह परमेश्वर के सम्मुख पाप कर चुका था। उसने अपने आप को छुपाया और खुद अपनेलिए एक धर्म बनाने का प्रयास किया, परन्तु इससे काम ना चला।परमेश्वर ने ही किसी मेमने को मारकर खाल ली, और दिखाया, कि पापको ढकने के लिए किसी को मरना था।कलीसिया में शामिलहोने से पाप कभी नहीं ढकेगा। सूखी आँखों से किया गया इकरार कभी पाप नहीं ढ़ांकेगा।इसके लिए तो दुख-अफसोस और प्रायश्चित और परमेश्वर के अनुग्रहकी ही आवश्यकता होती है, कि पाप ढक जायें; क्योंकि यीशु मसीह कालोहू, वह जिसे परमेश्वर ने कलवरी क्रूस पर मारा, उसीका लोहू ही पाप ढाँकता है।44उस सुबह अदन की वाटिकामें जब पाप इतना ज्यादा काला था, कि यहोवा अंदर आया। वहाँपर उसका जोड़ा खड़ा हुआ था, वह दंड़ाज्ञा लिये हुए खड़ा हुआ था। वहाँ फिर कोई मानव-जातिनहीं रहनी थी; उन्हें तो मर जाना था, मौतमानव-जाति पर आ चुकी थी, जगत को जंगली जानवरोंको वापस दे दिया जाता, और फिर कभी कोई मानवजाति ना रही होती। परन्तु उस सबसे अंधकार की घड़ी में उस समय में जब सारी आशाएं जाचुकी थीं, अनुग्रह उमड़कर बरसता हुआ आया, और बोला, “मैंतुम्हें एक उद्धारकर्ता, एक मसीह दूंगा।” ओह, यह क्याही शानदार बात है, कि परमेश्वर ऐसा कभी कैसे कर सकता था। अदन की वाटिका में यहपरमेश्वर का करूणा से भरा अनुग्रह ही था जिसने उन्हें उस एक ऐसे का वायदा दिया था जोस्त्री के द्वारा आएगा। कहा गया था, “स्त्री का वंश सर्प के सिर को कुचलेगा”; यहीथा जो कसूरवार था, ”और उसका सिर उसकी ऐड़ी पर घाव करेगा’; जो यहदिखाता है, कि कलीसिया के लिए दुख-मसीबतहोंगी। परन्तु उसने विजय की प्रतिज्ञा की थी। किसने एक उद्धारकर्ता प्रदान किया? अनुग्रह।45वे अनुग्रह पाने के लिए क्या काबलियत दिखा सकते थे? वे ऐसादिखाने के लिए क्या कर सकते थे? यह फौज़ में किया जानेवाला इज़हार है, इसके लिए आप मुझे क्षमा करें, मैंतो सिर्फ यहाँ पर अपने प्रचारमंच से इस बात को स्पष्ट करने के लिए इसे कहना चाहता हूँ, कहाजाता है, “एक दूसरे पर दोष मढ़ते हैं।” आदमबोला, “जो स्त्री तू ने मुझे दी उसी ने ही यह किया।” स्त्रीबोली, ”सर्प ने मुझे परगंदा किया।” वे इसेएक दूसरे पर मढ़ रहे थे। उनके लिए कोई आशा नहीं थीं।परन्तु परमेश्वर ने ही अनुग्रह प्रदान किया, और यह अनुग्रह उमड़ताचला गया था। और वह बोला, “लेकिन कैसे भी हो मैं एक राह बनाऊँगा। चाहे कुछ भी हो जाये, मैंतुम्हें बचाऊँगा। तुम ने गलत किया है, तुम ने मेरी आज्ञाओं काउल्लंखन किया है। और मेरी व्यवस्था को तो…मेरी व्यवस्था से मिलनेवाली सज़ा को तो काटा ही जाना है। इसलिए मौत तो होनी ही है, क्योंकिमैं कह चुका हूँ, कि मौत होगी।” (भाई ब्रन्हम मंच पर थपथपकरते हैं-सम्पां)46अब, मेरेमसीही मित्रों..(ये जो टेप यहाँ पर बनाये जाते हैं, विश्वभर में चारों ओर फैल जायेंगे)आइये, मैं आप से कोई बात पूछता हूँ, आप ऐसाबनाने का प्रयास करते हैं, कि परमेश्वर तीन परमेश्वर है, या आपजो उसे वैसा बनाने का प्रयास करते हो, कि वह वैसा ही है जैसाकि आपकी ऊँगलियाँ हैं। वह तो एक अकेला ही है।परमेश्वर के लिए ऐसा करना बिलकुल भी उचित नहीं होता, कि वह किसी स्वर्गदूतको मरवाता। ऐसा करके वह एक सही तरह का न्यायी नहीं हो सकता था, कि वहकिसी एक स्वर्गदूत को मानवजाति के लिए मर जाने देता। यह तो अभी भी इसका उपचार नहींकरता, क्योंकि उसकी महान व्यवस्था तो मौत की माँग करती है, और किसीना किसी को तो मरना ही था; और स्वर्गदूत नहीं मर सकता है। और ना ही परमेश्वर ऐसा कह सकताथा, “हव्वा, क्योंकि तू ने ही आदम से ऐसा करवाया है, अतःमैं ऐसा करूंगा, कि तू मर जाये और आदम जीता रहे।” क्योंकिआदम भी तो सहभागी हुआ था।47जैसाकि किसी ने कहा था, “पीलातुसन्यायसंगत था, उसने तो अपने हाथ धो लिये थे।” आप यीशुमसीह के लोहू को धोकर अपने हाथों से नहीं छुड़ा सकते हैं। इसी सुबह अगर आप अपने पापोंमें मर जायें, तो आप इस सुबह इस भवन को छोड़कर स्वर्ग कदापि नहीं जायेंगे।यह तो आपके हाथों पर है। अतः ऐसी हालत बिलकुल भी ठीक नहीं है।वहाँ सिर्फ एक ही न्यायसंगत तरीका था। केवल एक ही तरीका था जो किया जा सकता था, केवलएक ही तरीका था जो परमेश्वर की महान व्यवस्था की माँगों को पूरा कर सकता था। खुद परमेश्वरको ही इसे पूरा करना था। उसे ही इसे करना था। परमेश्वर तो आत्मा है और वह मर नहीं सकताहै। अतः परमेश्वर को मानव देह धारण करनी थी, और वह मानव देह में एकमनुष्य के रूप में जो यीशु मसीह कहलाता था, मरा; और वहीवह वायदा किया हुआ मसीह था जो अनुग्रह लेकर आया। यही है वह जहाँ आप देखते हैं, कि परमेश्वरऔर मसीह एक ही व्यक्ति है, यह परमेश्वर ही था जो मसीह में वास कर रहा था। मैं और मेरा पिताएक ही है; मेरा पिता मुझ में वास करता है; यह मैंनहीं हूँ जो वचन बोलता है, वरन यह तो मेरा पिता जो मुझ में वास करता है। निश्चित रूप सेपरमेश्वर मसीह में था…

48परन्तु अदन की वाटिकामें ही अनुग्रह का वायदा कर दिया गया था, और अनुग्रह आया, अनुग्रहआदम और हव्वा के पास आया। कहीं भी जाया नहीं जा सकता था, कोईभी ऐसी राह नहीं थी जहाँ वापस मुड़ा जाता, और फिर भी अनुग्रह नेएक राह बनायी।मेरे पापी मित्र, मैं यह बात कहे देता हूँ।हो सकता है, कि इस सुबह आप यहाँ पर एक वेश्या हों, हो सकताहै, इस सुबह आप यहाँ पर औरतों के पीछे भागनेवाले हों; हो सकताहै, कि आप यहाँ पर एक पियक्कड़-शराबीहों, या आप एक जुआरी या एक कातिल हों। हो सकता है, कि आपयहाँ पर एक नापाक पति या नापाक पत्नी हों। हो सकता है, कि आपएक सबसे ज्यादा बुरे पापी हों, और आप कहते हों, “मैंतो छुटकारे की ही अवस्था को पार कर चुका हूँ।” नहीं, आप ने ऐसा नहीं किया है, अगरऐसा हो गया होता, तो इस सुबह आप गिरजे में ना हाते। अनुग्रह ही आपके लिए इस अंधकारकी घड़ी में एक राह बनायेगा, अगर आप सिर्फ इसे ग्रहण कर लेंगे। आदम को इसे ग्रहण करने काइच्छुक रहना था, ठीक वैसे ही आपको करना है। आप इसे ग्रहण कर लें।49परमेश्वर का अनुग्रह नूह के समय में पहुँचा था। नूह को देखिए, वह एकसाधारण सा मनुष्य था, वह और उसका घराना साधारण से लोग थे; लेकिनचूंकि नूह ने परमेश्वर का भय माना था, इसलिए उसने परमेश्वर परविश्वास किया था। आप परमेश्वर पर विश्वासकिये बिना परमेश्वर का भय नहीं मान सकते हैं। आप कैसे किसी का भय मान सकते हैं, जब तककि आपको उस पर विश्वास ना हों ? आपको तो परमेश्वर का भयमानना ही होता है। सुलैमान ने कहा था, “परमेश्वर का भय माननाही बुद्धि का आरम्भ है।”अब, जैसेजैसे आप परमेश्वर का भय मानते चले जाते हैं, वैसे ही आप के पास बुद्धिहोनी शुरू हो जाती है। और परमेश्वर का भय ही…नूहने प्रभु का भय माना था, और उसने प्रभु पर विश्वास किया था। और यही है वह जिसका परमेश्वरसम्मान करता है- आप जो विश्वास उस पर करते हैं, वह उसीका सम्मान करता है। यह बिलकुल सच बात है। तब जब परमेश्वर का भय नूह पर छा गया, तो परमेश्वरने उसे अपने अनुग्रह के द्वारा बुलाया, और उसे और उसके घरानेको बचाया, क्योंकि यह अनुग्रह ही था जिसने ऐसा किया था। ऐसा इसलिए नहींहुआ था, क्योंकि नूह उन बाकी सारे लोगों में सबसे ज्यादा खूबसूरत था; ऐसाइसलिए नहीं हुआ था, क्योंकि नूह उस सबसे आलीशान गिरजे में जाता था जो उस देश मेंथा, ऐसा इसलिए नहीं हुआ था, क्योंकिनूह सबसे बढ़िया संस्था का सदस्य था, ऐसा इसलिए नहीं हुआ था, क्यों किवह बढ़ियाबढ़िया पोशाकें पहन सकता था, ऐसा इसलिए नहीं हुआ थाक्योंकि उसके पास दूसरों से ज्यादा धन-दौलत थी; ऐसाइसलिए नहीं हुआ था, क्योंकि वह कोई खास इंसान था; परन्तुऐसा तो परमेश्वर के अनुग्रह के कारण ही हुआ था, परमेश्वरने ही उसे बचाया था। अनुग्रह ने ही नूह को बचाया था और उसके घराने को भी बचाया था; वह अपनेकामों से नहीं, वरन अनुग्रह से ही बचा था।50हम एकऔर चरित्र को देखेंगे, जिस पर परमेश्वर का अनुग्रह बढ़ाया गया था; ऐसेचरित्र तो बहुत से हैं; पर हम सिर्फ कुछ के ही बारे में बोलेंगे। अब्राहम को देखिए! अब्राहमकोई विशेष-व्यक्ति नहीं था, वह तो बाबुल की मीनारसे आया था, वह शायद मूर्तिपूजकों के झुंड़ में से बाहर निकलकर आया था (शायदउसका पिता मूर्तिपूजक था)…वह शिनार देश के ऊर नगर से जहाँ वह रहा करता था, निकलकरबाहर आया था। और जबकि वह वहाँ पर था, परमेश्वर ने अनुग्रह केद्वारा उससे बात की थी; इसलिए नहीं, क्योंकि वह एक अलग किस्मका था; इसलिए नहीं क्योंकि वह एक बेहतर मनुष्य था; मगरअनुग्रह के द्वारा ही परमेश्वर ने उसे बुलाया। बाइबल इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेखकरती है। ओह, अब्राहम…कैसेअब्राहम ने परमेश्वर का धीरज परखा था। उसे बताया था, और कहाथा, “अब्राहम, तू इसी देश में ठहरे रहना, तू इससेबाहर मत जाना।” परन्तु ज्यों ही अकाल पड़ा, अब्राहमभाग खड़ा हुआ।51अब्राहम हमारे ही बारे में बतलाता है। परमेश्वर लेता है…परमेश्वरने अनुग्रह के द्वारा ही अब्राहम को लिया और उसे बचाया। और ठीक इसी रीति से वह आपकोलेता है; वह अनुग्रह के द्वारा ही आपको लेता है। और कैसे हम परमेश्वरके धीरज को परखते हैं? आज हम ऊपर होते हैं, और कल नीचे होते हैं।एक दिन तो हम विश्वास कर रहे होते हैं; और अगले दिन हम हैरान-परेशानहो रहे होते हैं। आज तो हम मैथोडिस्ट होते हैं; कल हमबैपटिस्ट होते हैं। आज तो हम दिव्य चंगाई पर विश्वास करते हैं, और कलजब हमारे पेट में दर्द हो जाता है, तो हम नहीं जानते हैं, कि हमइसका विश्वास करते हैं भी या नहीं। परन्तु इन सब बातों के बीच परमेश्वर हम से यही चाहताहै, कि हम ठहरे रहें। पर कुछ भी हो वह आपको बचाता है। अगर परमेश्वरका अनुग्रह ना हुआ होता, तो हमारा तो सर्वनाश ही हो गया होता। निश्चय ही! परमेश्वरहमें अपने अनुग्रह के द्वारा बचाता है।52होना तो यह चाहिएथा, कि अब्राहम उसी देश में ठहरा रहता, परन्तुवह तो कशदियों में चला गया था, या वह कशदियों में नहींगया था; वह पलश्तीन चला गया था; वह अकालसे बचने के लिए वहाँ पर रहने के लिए चला गया था। जैसे ही उसके देश में थोड़ी सी मुसीबतआयी, वह उनके साथ वहाँ नीचे सफर करने निकल पड़ा; और उसनेबिलकुल ठीक वही किया जो परमेश्वर ने उससे करने के लिए मना किया था। लेकिन फिर भी परमेश्वरने उस पर अपना अनुग्रह दिखाया और फिरौन को लेनेसे रोके रखा…या राजा को उसकी पत्नी को लेने से रोके रखा। परमेश्वर का अनुग्रह…जब अब्राहमने यह कहा था, “ये मेरी बहन है’; तो उसने इसके बारे मेंझूठ बोला था; लेकिन फिर भी परमेश्वर के अनुग्रह ने उसे थामे रखा, क्योंकिवह पछताया था। वह पश्चताप करने का इच्छुक था।और जोकोई भी प्रायश्चित करने का इच्छुक है, अभी भी उसके लिए परमेश्वरका अनुग्रह जाता है। परमेश्वर का अनुग्रह आपको ढूंढ़ रहा होता है। ठीक वैसे ही इस सुबहयह आपके लिए जो विश्वास में पिछड़े हुए हैं, जाता है; परमेश्वरका अनुग्रह अभी भी आपको ढूँढ़ रहा है। अगर आप केवल प्रायश्चित कर लें, परमेश्वरका अनुग्रह आपके लिए काफी रहेगा।कैसे उसने भले बुजुर्ग अब्राहम को लिया और उसे वापस लेकर आया। और याद रखिए, अब्राहमअपने कामों के द्वारा नहीं बचा था; वह तो अनुग्रह के द्वारा ही बचा था।अब्राहम का विश्वास के द्वारा ही उद्धार हुआ था; जो किअनुग्रह ही है। और परमेश्वर ने अब्राहम को उसके व्यवहार के द्वारा नहीं बचाया था; उसनेतो उसे अपने अनुग्रह के द्वारा ही बचाया था। परमेश्वर ने उसे अपने अनुग्रह की वज़हसे ही बचाया था। ओह, यह कैसा अच्छा है! उसका अनुग्रह के द्वाराही उद्धार हुआ।

53आइये हम इस्राएल को लें। मैंने यहाँ नीचे वचन के लेख लिखे हुएहैं। मैं इसे लिख लेता हूँ और मैं इसका हवाला अपने दिमाग में दे सकता हूँ। यदि आप इसे लिख लेनाचाहते हैं…अगर आप इसे याद रख लेना चाहते हैं, तो यहयाद रखने के लिए एक अच्छा वचन का लेख है; यह व्यवस्थाविवरण ७:७ है।परमेश्वर ने अब्राहम से एक प्रतिज्ञा की थी, या उसने यह प्रतिज्ञाअब्राहम से नहीं की थी, मुझे क्षमा करना, उसने यह प्रतिज्ञा इस्राएलको दी थी, और उनसे कहा था, “अगर तुम मूर्तिपूजा सेकोई सम्बंध नहीं रखोगे, अगर तुम इन कामों को नहीं करोगे; अगरतुम पागान के इन सब समारोह और अनुष्ठानों से दूर रहोगे; अगरतुम इन सब कामों को करोगे, तो मैं तुम्हें एक उत्तम देश में लेकर आऊँगा। मैं तुम्हारा ध्यानरबूंगा। मैं तुम्हें भोजन खिलाऊँगा; मैं तुम्हारी अगुवाई करूंगा।अगर तुम अमुक-अमुक काम करोगे, तो मैं इन कामों को करूंगा; अगरतुम मुझ से प्रेम करोगे, अगर तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे, अगरतुम मेरी विधियों और आज्ञाओं को मानोगे, तो मैं इन सब कामों कोकरूंगा; अगर तुम बस इन कुछ कामों को करोगे और मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे और मुझसे प्रेम करोगे।”54यह बिलकुल ठीक वैसा हीहै जैसाकि एक पति एक पत्नी ले रहा हो, और कह रहा हो, “अगरतुम एक अच्छी नारी रहोगी, अगर तुम घर-गृहस्थी का ध्यान रखोगी, अगरतुम मेरे प्रति सच्ची रहोगी, अगर तुम मेरे कपड़े धोओगी, अगरहमारी सन्तान होंगी और तुम उनकी एक माँ रहोगी, अगरतुम काम करोगी, तो मैं तुम्हारे जीवन-यापनके लिए तब तक काम करूंगा जब तक कि मेरे हाथों से खून ना बहने लगे; अगरतुम ऐसा करोगी।” परन्तु इसके बाद सोचिए, कि क्याहो, अगर वह स्त्री गलत निकल जायें,वह आलसभरी जिन्दगी बिताने लगे, और काम-काज ना करे, और वहकुछ भी काम ना करती हो? तब तो अनुग्रह की ही जरूरत होती है, जो उसपरिवार को जोड़कर रखता है।ओह परमेश्वर! इसकेलिए यहोवा के अनुग्रह की ही जरूरत थी, जो उसके परिवार को जोड़कररखता। और बिलकुल ठीक इसी रीति से ही आज हम यहोवा का परिवार हैं, क्योंकियह यीशु मसीह का ही अनुग्रह है जो हुआ; वरना हम सब नाश हो गयेहोते। परन्तु यह तो अनुग्रह है, ओह यह अनुग्रह है!55अब, उन्होंने इसे नहीं निभाया था। परन्तु उन्होंने तो…वे पूरीपूरी प्रतिज्ञा तक नहीं पहुँचे थे, वह पीढ़ी नहीं पहुँचीथी। जी नहीं, इस बात का वायदा नहीं किया गया था, कि वेनिर्जन प्रदेश में मर-खप जायेंगे। लेकिन परमेश्वर ने ही उन्हें भोजन खिलाया; परमेश्वरने ही उनका ध्यान रखा; परमेश्वर ने ही उन से प्रेम किया; वहीउनके चारों ओर विचरण करता था। क्यों? उसके अनुग्रह ने ही ऐसाकिया था; उसके अनुग्रह ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकिउसने ऐसा करने का वायदा किया था, तब उसका यही वायदा था; और यहअनुग्रह ही था जो उसके वायदा के साथ आगे आगे बढ़ा। परन्तु उन्होंने उस प्रतिज्ञा कियेदेश की पूरी पूरी कीमत कभी नहीं समझी थी।और ना ही इस कलीसियाने इसकी पूरी पूरी कीमत समझी है। यह तो परमेश्वर का ही अनुग्रह है जो हमें थामे रहताहै। परन्तु परमेश्वर तो एक ऐसी कलीसिया चाहता है जो उसका कहा माने, वह एकऐसे लोग चाहता है जो उसका वचन ग्रहण करें और कहें, कि यहीसच है, चाहे आपकी संस्था कुछ भी क्यों ना कहती हो। वह तो एक ऐसे लोगचाहता है जो ये ना कहते हों, “अच्छा, मैं तो वैसा ही अच्छा हूँ जैसा तुम हो। मैं तो प्रेसबीटेरियनहूँ; मैं तो मैथोडिस्ट हूँ; मैंतो कैथोलिक हूँ; मैं तो वैसे ही अच्छा हूँ जैसे तुम हो।” यह तोअनुग्रह नहीं है; ये तो यही दिखाता है, कि कुछ न कुछ गड़बड़ है।56परन्तुवह व्यक्ति जो चाहे कुछ भी हो जाये, परमेश्वर का वचन पढ़ेगाऔर देखेगा, कि उसे फिर से नये सिरे से जन्म लेना है और पवित्र आत्मा सेभर जाना है, वे ही उसका विश्वास करेंगे, और वहीइसे वचन पर ग्रहण करेंगे। वे ही ऐसे हैं जो वचन को बिलकुल ठीक ठीक वैसा ही ग्रहण करेंगेजैसा यह कहता है।जैसा कि बपतिस्मे और जल-छिड़कावके मामले में किया जाता है; बपतिस्मा तो ठीक है। बाइबिल में कभी कोई ऐसा नहीं हुआ जिसपरजल का छिड़काव हुआ हो; इस सम्बंध में पवित्र वचन में कोई भी बात नहीं है। और बाइबिलमें ना ही कभी किसी को पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दिया गया था। उन मेंसे हर एक का तो यीशु मसीह के नाम में ही बपतिस्मा हुआ था। अतः कोई भी ऐसी बात नहींहै; इतिहास में एक ज़रा सा लेख भी ऐसा नहीं है…अगरकोई भी इतिहास में कहीं भी यह दिखा सकता है, कि बाइबिल में कहाँ किसी का कभी वैसा बपतिस्माहुआ था..या अन्तिम चेले की मृत्यु के तीन सौ साल तक ऐसा नहीं हुआ था, ऐसातब तक नहीं हुआ था जब तक कि कैथोलिक कलीसिया ने ही ऐसा नहीं किया; अगरकोई दिखा सकता है, कि कहाँ किसी का कभी पिता, पुत्रऔर पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा या जल-छिड़काव हुआ था, जब तककि कैथोलिक कलीसिया ने ही ऐसा नहीं किया था; आप इस बात के लिए पूरीतरह से कर्तव्यबद्ध हैं, कि आप आप आकर मुझे बतायें। वहाँ ऐसा नहीं है। परन्तु हम क्याकरते हैं?

57हम कलीसियायी कालों का अध्ययन कर चुके हैं और देख चुके हैं, कि कहाँउन्हें ऐसा करना था। अतः आप देखते हैं, कि परमेश्वर तो किसी ऐसेको चाहता है जो उसका कहा माने। अगर वह बात पवित्र वचनों में नहीं है, तो वहमनुष्य की नहीं…वह तो मनुष्य की बनाई हुई शिक्षा है और वह बाइबिल की शिक्षानहीं है। समझे? अतः इससे क्या फर्क पड़ता है, कि कलीसियाक्या है, और आप कितने गलत रहे हैं? खासबात तो यह है, कि आप इस समय कितने सही हो सकते हैं। परमेश्वर का अनुग्रह इसेआप पर दिखा चुका है, तो फिर आप इस में चलें। परमेश्वर का अनुग्रह…58मूसा को भी याद कर लिया जाये, वह एक महान अगुवा था।परमेश्वर को तो उसे तभी जान से मार देना चाहिए था, जब उसनेनीचे जाकर उस चट्टान पर प्रहार करके और ऐसा कहकर, कि “क्यातुम देखते हो, कि मैं क्या कर सकता हूँ”, खुदअपने आप को महिमा पहुँचानी चाही थी। दूसरे शब्दों में उसने कहा था, “तुमबागियों, क्या हमें इस चट्टान से तुम्हारे लिए अवश्य ही जल निकाल ले आनाचाहिए?” और उसने उस पर लाठी मारी, और जलनहीं निकला; उसने उस पर फिर से लाठी मारी। उसने किया क्या था? उसनेमसीह की कमज़ोरी की गवाही दी थी, क्योंकि मसीह ही वह चट्टानथा। वही तो चोटी का पत्थर था। उस पर मारने की बजाये…या उससेबोलने की बजाये…उसे तो पहले ही एक बार मारा जा चुका था।स्मरणरखिए, परमेश्वर निर्गमन में मूसा से कह चुका था, “बाहरजा और मैं तेरे आगे…आगे चट्टान पर खड़ा होऊँगा, और तूचट्टान को मारना।”और उसने चट्टान पर लाठी मारी और चट्टान में से जल निकल कर आया।परमेश्वर ने कहा था, ”अगली बार जाकर चट्टान से बोलना और उससे उसका जल बह निकलेगा।’परन्तु मूसा तो यह दिखाना चाहता था, कि उसकेपास तो एक छोटा सा अधिकार है, उसकेपास एक छोटी सी सामर्थ है, अतः वह बोला, “मैं तुम्हारे लिए इस चट्टानसे पानी बाहर निकालूंगा।” परमेश्वर ने उसे इसके लिए जान से मार दिया होता। परमेश्वर नेउसे वहीं पर अलग कर दिया होता, उसने तो परमेश्वर की आज्ञाको ठीक वहीं पर तोड़ दिया था, क्योंकि वह मसीह की दुर्बलता का वर्णन कर रहा था; उसेदूसरी बार मारा-कूटा जाना है। मसीह तो केवल एक ही बार मारा-कूटागया था। अब, हम चट्टान से बोलते हैं और उससे उसका जल बह निकलता है।परन्तु यह क्या था? आइये हम इस बूढ़े इंसान पर दृष्टि डालकर देखें; वह एकसौ बीस साल का बूढ़ा था।59अधिक समय नहीं हुआ है, जब किसीने मुझ से कहा था, “परमेश्वर तो एक अन्यायी परमेश्वर है; क्योंकिउसने मूसा को दंड़ित किया था। जब कि वह उन इब्रानियों के साथ बाहर निर्जन प्रदेश मेंचालीस बरस तक कठिन परिश्रम करता रहा, परमेश्वर ने उसे दंडितकिया और यहाँ तक कि उसे प्रतिज्ञा किये देश में भी जाने नहीं दिया।मैंने कहा, “यह बेकार की बात है।” नहीं, उसनेमूसा का तिरस्कार नहीं किया था। वह प्रतिज्ञा किया देश गया था। लगभग सात सौ साल केबाद वह रूपान्तरण वाले पर्वत के शिखर पर वैसे ही जिन्दा देखा गया था जैसे कि वह कभीजिन्दा रहा था..वह और एलिय्याह वहाँ पर खड़े हुए यीशु से उसके कलवरी पर जानेसे पहले बातें कर रहे थे; वे बाते कर रहे थे…मूसा और एलिय्याह रूपान्तरणवाले पर्वत पर यीशु, पतरस, याकूब और यूहन्ना को दिखाई दिये थे। वह मरा हुआ नहीं था। वहतो जिन्दा था। परमेश्वर ने उसका तिरस्कार नहीं किया था। वह पलश्तीन में था।60अब देखिए, इससे पहले कि वह मरता, वह उससुबह नबोत पर्वत पर चढ़ा, जब उसे मालूम हो गया था, कि वहजा रहा था। उसने हारून के वस्त्र उतरवाये और उसने अपने वस्त्र किसी और को पहनाये, उसनेअपना अंगरखा लेकर उसे यहोशू को पहनाया, और उसे आज्ञा दी, कि वहनियमों-आज्ञाओं पर टिका रहे। और जब वह नबोत पर्वतकी चोटी पर चढ़ा, तो उसने तराई के मैदानों का नज़ारा देखा, वह जानरहा था, कि वह वहाँ ऊपर मरने जा रहा था, वह नबोतपहाड़ पर चढ़ा और पिशगा तक गया। जबकि वह वहाँ पर खड़ा हुआ था, परमेश्वरबोला, उस देश पर दृष्टिडाल। मैं चाहता हूँ, कि तू इसे देख ले। मूसा, तू वहाँचला गया होता। पर तू जानता है, कि तू ने उस दिन वहाँपर चट्टान के साथ क्या किया था? तू ने खुद अपने को हीमहिमान्वित किया था। मैं सोचता हूँ, कि आज हम में से बहुतेरेलोगों के साथ यही सबसे बड़ी दिक्कत है। “तू वहाँ चट्टान के पासतो गया, और तू ने खुद अपने को ही महिमान्वित किया। परन्तु ध्यान दीजिए, जब वहमरने के लिए तैयार था, तो वह चट्टान वहाँ पर विद्यमान थी। उसने अवश्य ही पिशगा मेंउसी चट्टान पर अपना पांव रखा होगा, और परमेश्वर ने ही उसेमिट्टी दी थी। परन्तु अवश्य ही वह कहीं पर फिर से जी उठा था, क्योंकिवह जीविता था। वह मसीह की एक प्रतिछाया था। वह सैकड़ों साल बाद भी पलश्तीन में रूपान्तरणवाले पहाड़ पर खड़ा हुआ था,देखिए, परमेश्वर के अनुग्रह ने ही चट्टान प्रदान की थी। ओह, मेरेखुदा!61जब मैं अब्राहम के बारे में सोचता हूँ, वे सारीगलतियाँ जो उसने कीं, उनके बारे में सोचता हूँ; और मूसाके बारे में सोचता हूँ और वे सारी गलतियाँ जो मूसा ने कीं, उनकेबारे में सोचता हूँ, लेकिन जब अब्राहम पर लेख लिखा गया, जब उसकेबारे में दिव्य लेख लिखा गया, जब पौलुस ने अब्राहम के बारे में लेख लिखा, तो उसनेअब्राहम के अविश्वास के बारे में एक भी बात का कदापि उल्लेख नहीं किया था; नहीं, नहीं, जी नहीं; उसकेबारे में इसका बिलकुल भी उल्लेख तक नहीं किया गया था। उसने तो कहा था, “अब्राहमना तो अविश्वास करके परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर डगमगाया; परन्तुमज़बूत होता गया, और परमेश्वर की स्तुति करता रहा।” ही कामों को हो जाएं.. हवासकरता हैं।परमेश्वर के उस अनुग्रह के सम्मुख, जो इस समय यहाँ पर है, मेरी तो यही नम्र प्रार्थना है,-मैंआशा करता हूँ, कि मेरे बारे में उसी रीति से लेख लिया जाए, कि वहमेरी गलतियों पर निगाह ना डाले। ऐसा हो, कि जब मेरा जीवन-वृतांत,मेरानिधन-उल्लेख लिखा जाता है, तो यह ना पढ़ा जाए, कि मैंनेगलतियाँ कीं, और मैंने गलत किया; मगर वह केवल उन्हीं कामोंको देखे जिनका मैंने उसके लिए करने का प्रयास किया है। होने पाये कि वे ऐसे ही हो जाएं…वह क्याहै जो ऐसा करता है? वह परमेश्वर के उस अनुग्रह को लेगा जिस पर मैं विश्वास करताहूँ। और यही है वह जिस पर मैं पूरी तरह से भरोसा कर रहा हूँ। क्योंकि मैं अपनी काबलियतोंपर तो बिलकुल भी अंदर नहीं जा सकता हूँ, मैं उन में से किसी परभी निर्भर नहीं कर रहा हूँ; मगर मैं तो परमेश्वर के अनुग्रह पर ही निर्भर कर रहा हूँ। जीहाँ, यह तो अनुग्रह ही है, जिस पर मैं निर्भर कररहा हूँ।जब मूसा मरने के लिए तैयार हो गया था, तो वहचट्टान वहाँ पर थी।

62हम दाऊद के विषय में क्या कह सकते हैं? परमेश्वर का अनुग्रह…वह वो महान योद्धा थाजिसके बारे में खुद खुदा ने ऐसा कहा था, “वह मेरे मन के अनुसारमनुष्य है।” वह महान योद्धा, दाऊद..उस जैसाकाम कैसे कर सकता था, कि उसने अपने ही सिपाही, उरियासे दूगा की, जबकि उसके पास वहाँ बाहर केवल मुट्ठी भर अन्यजाति के सिपाहीथे? आप एक क्षण के लिए इस छोटी सी गाथा को ध्यानपूर्वक सुनें। जबउनके सिपाही वहाँ बाहर थे, तो उरिया एक ऐसा था जो दाऊद के बराबर में खड़ा रहा था। उरियाएक ऐसा इंसान था जिसने अपना धर्म बदला हुआ था; वह एकहित्ती था; वह यहूदी धर्म के लिए एक ऐसा था जिसने अपना धर्म बदला हुआ था।और उन लोगों ने दाऊद से बहुत ही ज्यादा मौहब्बत की थी। हालंकि दाऊद देश-निकालाहुआ पुरूष था, तौभी उन्होंने देखा था, कि अभिषेकउस पर था। उसे उसके अपने ही देश से बाहर निकाल दिया गया था, और उसेपलश्तियों के साथ रहना पड़ा था। शाऊल उसकी घात में लगा हुआ था। लेकिन फिर भी उन पुरूषोंने उस पर अभिषेक देखा था। वे जानते थे, कि वह सिंहासन पर विरजामनहोगा। परमेश्वर की महिमा होवे!मैं आज एक भगौड़ाहोने के लिए बहुत ही खुश हूँ, क्योंकि मैं देखता हूँ, कि मसीहआ रहा है, कि वह राजा हो। आप चाहे तो सारे कनेडियों (Kennedys) को तथा उन सब को जिन्हें आप चाहते हैं, चुन सकते हैं। लेकिन मसीहतो राजा होगा ही। अभिषेक तो उसी पर है, अभिषेक तो उसके आगमन केसन्देश पर ही है। और वही राजा होगा।63उन्होंने क्या कियाथा? एक दिन वह खड़ा हुआ उस जल के लिए प्यासा था जो बेतलहम के बाहरफाटक पर होता था, जहाँ पर वह अपनी भेड़ों के गल्ले को चराया करता था। और क्याआप जानते हैं, कि क्या हुआ था? उन पुरूषों में से दोने अपनी तलवार बाहर निकाल लीं, और वे उसके लिए उस पानीकी एक बाल्टी लाने के लिए पन्द्रह मील तक लोगों को मारते-काटतेचले गये थे। क्यों, क्योंकि उसकी छोटी से छोटी इच्छा भी उनके लिए एक आज्ञा थी। इसकेबारे में सोचिए। और वे उन लोगों को मारते-काटते चले गये थे…और उसपहाड़ की चोटी की ओर बढ़ते चले गये थे जहाँ उनसे कहा गया था, कि वहवहाँ पर खड़ा हुआ होगा, और वह जगह लगभग पन्द्रह मील दूर थी। वे वहाँ से होकर आगे बढ़तेचले गये थे। और जो कोई भी ऊपर उठा, वे उससे तब तक मल्लह युद्ध करते गये जबतक कि उन्होंने उसे जान से ना मार दिया, वे बस आगे बढ़ते चले गये, और उन्होंनेइस बाल्टी को उठाया, और दुश्मन की सीमा में से होकर गये और बाल्टी भर पानी लिया।ये सिर्फ दो ही पुरूष थे जो अपने राजा, अपने भाई के लिए पानीलेने निकल पड़े थे, जबकि वहाँ ऊपर पीने के लिए पानी था, लेकिनदाऊद की तो उसी पानी को पीने की इच्छा थी।64हे परमेश्वर, यह होनेपाये, कि मैं वचन की तलवार पकड़कर हर नामधारी संस्था को चीरता चलाजाऊँ, ताकि यीशु मसीह के नाम का बपतिस्मा, और पुनरूत्थानकी सामर्थ, और पवित्र आत्मा लोगों के पास लेकर आ जाऊँ, …चाहेकुछ भी हो जाये…क्योंकि वह शीघ्र ही सामर्थ में आ रहा है। वह सामर्थ में आनेवाला है; और वही अकेला विराजमान होगा। परन्तु हर एक संस्था को, हर एकमत-सिधात को, हर एक मानव-निर्मितशिक्षा-मत को तब तक चीरते चले जाना है जब तक कि आप उस भेड़ को जो भटकगई है—किसी को उद्धारकर्ता के पास वापस लेकर नहीं आ जाते हैं; जब तककि आप बाइबिल की इन शिक्षाओं को वापस लेकर नहीं आ जाते हैं, कि यीशुमसीह कल, आज और युगानुयुग एक सा है। परमेश्वर का अनुग्रह ही…65दाऊद को देखिए। वह ऐसा कैसे कर सकता था…एक कुंए में कूदा और एकशेर को मारा। दाऊद ऐसा कैसे कर सकता था, कि ऊरिया की पत्नी को, उस खूबसूरतबेतशेबा को ले ले, जबकि उसके पास अपनी पाँच सौ थीं? परन्तुउसने उसे नहाते हुए देख लिया था, और ऐसा अनजाने में हुआथा। अब, जब वह नहा रही थी, तो वह परदा डालना भूलगई थी, और वह जानती थी, कि राजा हर रोज़ वहाँपर दीवार पर टहला करता था।यही तो बात थी। मैं नहींसोचता हूँ, कि आज स्त्रियाँ ऐसा अनजाने में या ऐसे ही करती हों; खैरवे तो आमतौर से बाहर सड़कों पर बहुत थोड़े से कपड़े पहने हुए नग्न ही निकल जाती हैं।यह एक लज्जा की बात है, और फिर भी वे ताज्जुब करती हैं, कि क्योंपुरुष उन पर फब्तियाँ काते हैं और सीटी बजाते हैं। क्यों, वे हीतो उन को सीटी मारने के लिए तथा ऐसा ही कुछ करने के लिए उकसाती हैं। वे ऐसा जानती हैं; उनकेपासयह जानने के लिए काफी समझ है। वे तो सिर्फ ऐसा इसीलिए करती हैं, क्योंकिवे ऐसा करना चाहती हैं। उनके दिलों में ऐसा ही होता है। आप उन्हें बतायें, कि वेअनैतिक हैं, तो वे इस पर बखेड़ा ही कर डालेंगी। परन्तु जब लैंगिकता की बातआती हो, तो वे अनैतिक ना हों, और वे वैसी ही पाक-साफहों जैसे कुमुदनी होती है। याद रखिए, परन्तु उन पर जो एक आत्माहै, वह शैतान का ही अभिषेक है, जो कुछपुरूषों के प्राणों को नरक भेज रही होती है। याद रखिए, बाइबिलकहती है, “जो कोई किसी स्त्री पर वासनावश कुदृष्टि डाले, वह उससेअपने हृदय में व्यभिचार कर चुका।” और यादरखिए, बहन, आपको व्यभिचार करने के लिए जवाब देना होगा, चाहेआपने अपने सारे जीवन भर असलियत में कभी भी व्यभिचार ना किया हो, परन्तुवह पापी जो आप पर उस प्रकार से दृष्टि डालता है जब आप उस प्रकार की पोशाक पहनती हैं, तो आपव्यभिचार की दोषी ठहरती हैं। आपको न्याय के दिन व्यभिचार करने के लिए जवाब देना होगा।जब उसे कहना होता है… वह यूँ कहता है; उसने अपनी पुस्तक में66लिखा हुआ है, “तुम व्यभिचार कर रहे थे।”“किसके साथ?”“श्रीमती जॉन डॉ केसाथ।”“तो श्रीमती जॉन डॉ, इसकेबारे में क्या है?”“मैं शपथ खाकर कहती हैं, कि मैंने…तुममेरा कच्चा-चिठ्ठा जानते हो; मैं अपने पति के अलावाकभी किसी और पुरूष के साथ नहीं रही हूँ।”“परन्तुखुद तुम ने ही ऐसे कपड़े पहने थे, कि तुम ने ही ऐसा करवाया, कि इसपुरुष ने व्यभिचार किया। और तुम उसके साथ व्यभिचार करने की दोषी हो। यही है वो जो इसेकर रहा था। इसका दोष तुम पर ही मढ़ा जाता है; क्योंकितुम ही एक ऐसी थीं जिसने खुद को ऐसा पेश किया था।

67बेतशिबा ने वैसे ही गलत किया था जैसे हव्वा ने गलत किया था; परन्तुआदम भी इसमें शामिल था। मैं सोचता हूँ, कि हम हमेशा ही स्त्रियोंबारे में शोरशराबा मचाते रहते हैं। पुरुषों, तुम परमेश्वर के पुत्रहो; मैं जानता हूँ, कि तुम ज्यादा मज़बूतझंड़ हो (यह सच है) तुम ज्यादा मज़बूत किस्मके हो। तुम स्त्रियों से ऊपर हो; यह सच है; अतःतुम वैसा ही आचार-व्यवहार करो। उनपर ज़ोर-जबरदस्तीमत करो; ऐसा करने की कोशिश मत करो, कि तुमकिसी छोटी लड़की को लेकर उसकी जिन्दगी ही बर्बाद कर डालो। परन्तु तुम परमेश्वर का पुत्रबने रहो; उसे बताओ, कि वह गलती पर है; और आपपरमेश्वर के पुत्र के जैसे खड़े रहें। वह तुम्हारी बहन है।जी हाँ, श्रीमान! हम अर्थात् परमेश्वर केतथाकथित बेटे आज यह करने की कोशिश करते हैं, कि वे किसी नामधारी कलीसियाओंमें शामिल हो जाते हैं, और उस हर छोटी लड़की को बाहर ले जाते हैं जिन्हें वे बाहर लेजा सकते हैं। स्मरण रखिए, कोई स्त्री अनैतिक स्त्री इसीलिए बनी, क्योंकिकिसी शादी-शुदा पुरूष ने उसे बर्बाद कर डाला था। अतः कड़ाही केतली से नहींकह सकती है, कि वह काली है; अतः स्मरण रखिए, यह तोपाप है जो ऐसा सारा का सारा कर डालता है।और हम सब मौत के आधीन हैं और अवश्य ही इसकेलिए मर जाना चाहिए।68जब दाऊद ने वह बुरा कामकिया था, तो उसके अपने न्याय को उसे अवश्य ही मार देना चाहिए था। जब वहनबी वहाँ पर आया, तो दाऊद सोचता था, कि यह छिपा हुआ है। जबवह नबी वहाँ ऊपर आया और दाऊद उसके सम्मुख खड़ा था, तो वहबोला, “दाऊद, क्या सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है?”बोला, “सब कुछबहुत बढ़िया है।”दाऊद ने अपने मंहगे वस्त्रऔर अपना ताज पहना हुआ था; और वहाँ बाहर उसका महान सेनानायक योआब था, और सारीलड़ाई चल रही थी। और वह उन सारे दुश्मनों को सरहदों से तथा ऐसी ही और दूसरी जगहों सेदूर रख रहा था; और सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था। और उसका इसी बेतशिबा से एकबालकउत्पन्न हुआ था। और उस बेचारे उरिया को वहाँ बाहर जाना पड़ा था, और योआबको उसके बराबर में तब तक खड़े रहना था, जब तक कि वह उससे कार्यभारन ले लेता। और..और..और वह लड़का सूर्य के अस्त होने पर अपने हाथ में युद्ध वालीबरछी लिये हुए, अपने ढाल पर खून लिये हुए मर गया था, जबकिवह इस्राएल के लिए खड़ा रहा था, तौभी वह उनके धर्म केलिए एक ऐसा व्यक्ति था जिसने अपना धर्म त्याग दिया था। 120. इसके बाद जब योआब वापस लौटकर आया, तो उसने उसे बताया, कि..कि दाऊदमर गया…कि..कि..उरिया मर गया, तो दाऊद ने सोचा था, कि “इस वक्तसब कुछ बिलकुल ठीक है। मुझे उसकी पत्नी मिल गई है, और सबकुछ बिलकुल कुशल-मंगल हो जाएगा। मुझे एक बालक मिल गया है। लेकिन वह बालक तो बीमारीकी गिरफ्त में आ गया। वह बालक मरने लगा। और उसने उस बालक की जिन्दगी बचाने के लिए वहसब कुछ किया जो वह कर सकता था। शायद हर एक वैद्य-चिकित्सकआये हों, पर कुछ भी भला ना हुआ। आखिरकार, वह परमेश्वर का कहाहुआ वचन बालक मर ही गया।वे दाऊद को बताने से डरते थे, कि वह बालक मर गया। और वह तो मर गयाथा। तब उसने सोचा, कि सब छिप गया था। अतः उसने बेतशिबा को तसल्ली दी। वह उसे पहलेही अपनी पत्नी के रूप में ले चुका था, जबकि उसके पास वे सारीऔर दूसरी पत्नियाँ थीं।

69यह बूढ़ा, चंदुवानबी, अर्थात् बुजुर्ग नातान जंगल से बाहर निकल कर धड़ाम से अंदर आया, और नीचेबैठ गया, और बोला, दाऊद, सब कुछकैसा चल रहा है?बोला, “बढ़िया, बहुत बढ़िया! हे परमेश्वरके भविष्यद्वक्ता, तू युगानुयुग जीये। हाल्लूिय्याह!” और उसनेतो बस…उसने सोचा था, कि सब कुछ कुशलमंगल है, उसनेसोचा था, कि वह इसे छिपा सकता था।लेकिन तुम परमेश्वर से नहीं छिपा सकतेहो। वह तो जानता है, कि तुम ठीक इस समय भी क्या सोच रहे हो। वह तो तुम्हारे विचारोंको जानता है, क्योंकि वह तो परमेश्वर है। वह पवित्र आत्मा जो इस सुबहइस भवन में है, तुम्हारे विचारों को जानता है, वह जानताहै, कि तुम कौन हो, और तुम कहाँ से आये हो, और तुमने क्या क्या किया है, क्योंकि यीशु मसीह कल, आज, और युगानुयुगएक सा है।70परमेश्वर ने इसे उस भविष्यद्वक्ता पर प्रकट कर दिया था। वह बोला, “दाऊद, मार्गके इस ओर एक धनी पुरूष रहता था; उसके पास भेड़ों का एकबहुत बड़ा गल्ला था; ओह, वह तो बहुत ही धनी था। और मार्ग के उस ओर एक गरीब था, उसकेपास सिर्फ एक ही मेमना था। वह उससे बेटी के जैसे आचारव्यवहार करता था। वह उसे उसी चम्मचसे भोजन खिलाता था जिससे वह खुद खाता था। वह उसी भेड़ के साथ सोता था। वह तो बस उसकेलिए सब कुछ…वह तो बस उसके लिए एक बेटी के जैसी थी। और एक दिन एक मिलनेवालाआया, और यह अमीर आदमीउस मिलनेवाले के लिए जेवनार करने के लिए अपनी निज भेड़ में से किसी को लेता, वह बजायेऐसा करता, उसने तो जाकर उस गरीब का मेमना ले लिया, उसनेउस मेमने को जबरदस्ती ले लिया, और उसे मारकर अपनी जेवनारकी।”71अब, वह दाऊद का जुनून था। उसके पास पाँच सौ पत्नियाँ थीं, परन्तुजब उसने उरिया की पत्नी को देख लिया, तो बजाये इसके कि वह अपनीउन पाँच सौ पत्नियों में से किसी को लेता जो उसे खुश करने के लिए थीं, या जोउसके जुनून को तृप्त करने के लिए थीं; उसने इस पराये पुरूष कीपत्नी को लिया; इसके बाद उसने उरिया कोतब मरवा डाला, जब वह माँ बन गई थी। दाऊद नहीं जानता था, कि वहक्या कर रहा था; क्यों, दाऊद तो बस न्याय करने को ही तैयार था। ठीक वैसे ही हम हैं।हम हमेशा ही दूसरों का न्याय तो कर सकते हैं, पर जबखुद अपने पर बात आ जाती है, तो ओह बात ही अलग हो जाती है।दाऊद बोला, “उस पुरुष को इसकी कीमत अपनी जान से चुकानी पड़ेगी।”उस बुजुर्ग नबी ने अपनी आँखें सिकोड़ी, और बोला, “दाऊद, तू निश्चयही ना मरेगा।” दृष्टि डालकर देखिए, कि ठीक तभी अनुग्रह कामकरने लगता है। आत्मा ने नबी को छूआ, और दाऊद की जिन्दगी बचाली। उस पर अनुग्रह हुआ, और वह बोला, ”तू निश्चय ही ना मरेगा; लेकिनतलवार तेरे घराने को तब तक ना छोड़ेगी जब तक कि यह इसे तेरे ह्रदय से पूरी तरह से पाक-साफना कर दे; क्योंकि तू ही वह अमीर आदमी है।” ओह, तब तोयह अलग ही बात थी, क्या यह नहीं थी?दाऊद को किसने बचायाथा, जबकि उसका अपना न्याय ही कहता था, “वह पुरुषमारा जाएगा। उसे उस अनर्थ की कीमत चुकानी पड़ेगी, और वहइसे अपनी ही जान देकर चुकाएगा?”और वह नबी बोला, “निश्चयही..(अनुग्रह!)…तू ना मरेगा। तूना मरेगा, दाऊद। अनुग्रह ने तुझे बचा लिया है। यह दाऊद पर अनुग्रह ही हुआथा, जिसने उसे बचा लिया था। ओह, मेरेखुद्रा!अगर अनुग्रह ही ना हुआ होता, तो हमसब कहाँ होते? क्या यह सही बात है! यकीनन!72यह सर्वोच्च अनुग्रह ही है जो उसकी ओर से होता है जो सर्वोच्च है। यह सर्वोच्चअनुग्रह ही है जो उसकी ओर से होता है जो सर्वोच्च है। यह सर्वोच्च ही है, और यहक्या कर सकता है? सर्वोच्च तो जो चाहे वह कर सकता है। अब आप इस पर कान लगायें।सर्वोच्च अनुग्रह तो उसी एक के द्वारा प्रदान किया जा सकता है जो सर्वोच्च है। और परमेश्वरही सर्वोच्च है, अतः वही सर्वोच्च अनुग्रह प्रदान कर सकता है। क्योंकि यह अनुग्रहसर्वोच्च है अतः इसे किसी से पूछना नहीं पड़ता है; इसेऐसा करना ही नहीं होता है…वह तो जो चाहे वही करता है। क्या यह शानदार बात नहीं है? उसेयह नहीं पूछना पड़ता है, “क्या मैं इसे कर सकता हूँ? या क्यामैं इसे करूं? क्या मैं कर सकता हूँ? क्यामुझे अवश्य ही करना चाहिए? क्या मैं करूँगा?” उसेऐसा करना ही नहीं होता है। वह तो खुद ही काम करता है। क्योंकि अनुग्रह सर्वोच्च है, इसलिएवह तो सबसे ज्यादा तुच्छ को भी बचा सकता है। वह तो सबसे बुरे को भी बचा सकता है। वहतो सबसे ज्यादा अशुद्ध को बचा सकता है। वह तो सबसे ज्यादा अनैतिक को बचा सकता है। वहतो सबसे ज्यादा बीमार को चंगा कर सकता है। हाल्लिलूय्याह!73वह मुझ जैसे कंगाल को बचा सकता है। और उसने ऐसा किया। यह क्या है? अनुग्रह! विलियमब्रन्हम, जो कि एक पियक्कड़ का बेटा है; इससेकोई फर्क नहीं पड़ता है, यह तो परमेश्वर का ही अनुग्रह है जिसने मुझे बचाया है।“मैं… मैं तो एक ऐसी स्त्री की बेटी हैं जिसमें कोई भलाई नहीं थी।”इससेकोई फर्क नहीं पड़ता; यह तो परमेश्वर का ही अनुग्रह है जिसने आपको बचाया है। यह तोसर्वोच्च है, इसे किसी से कुछ भी पूछने की कोई जरूरत नहीं होती है। आमीन! मैंउसके कारण बहुत ही आनन्दित हूँ। हाल्लिलूय्याह!वह तो सर्वाधिक तुच्छ पापी को ले सकता है, और उसेहिम की नाई श्वेत बना सकता है; उसे इसके बारे में किसीसे कुछ पूछने की आवश्यकता नहीं होती है। ओह, वह ऐसा कर सकता है, क्योंकिवह तो सर्वोच्च है।अब ज़रा शीघ्रतापूर्वककान लगाकर सुनें। ऐसा तो सलीब पर तब साबित हो गया था, जब वहाँपर एक वह सर्वाधिक तुच्छ चोर था; वह तो मर जाने के योग्यही था। उसके दिमाग में तो परमेश्वर के बारे में कभी कुछ आया ही नहीं था। उसने तो इसकेबारे में कभी कुछ सोचा ही नहीं था। वहाँ क्रूस पर, उन रक्तरंजितहोंठों से उन कराहटों में से एक ध्वनि निकलकर आती है, “हे प्रभु, मुझपर दया करना।”और वहाँ पर एक और ऐसा होता है जो लोहू, आंसुओं, झलाहटझेलता हुआ आता है; अनुग्रह ने दामन थाम लिया, और बोला, “तू आजही मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।’ अनुग्रह ने ही ऐसा कियाथा। वह चोर खुद अपनी सहायता कैसे कर सकता था? ना हीआदम खुद अपनी सहायता कर सकता था; ना ही हव्वा अपनी सहायताकर सकती थी; ना ही खुद आप अपनी सहायता कर सकते हैं; और नाही मैं खुद अपनी सहायता कर सकता हूँ; जबकि हम अपने जूते केपतावे की सहायता से उछल करके आकाशमंड़ल में छलांग नहीं लगा सकते हैं। हम ऐसा कर हीनहीं सकते हैं। परन्तु परमेश्वर का अनुग्रह ही इसके बारे में कुछ कर सकता है; और वहीइसे करता है। परमेश्वर का अनुग्रह ही, परमेश्वर के अनुग्रह की सर्वोच्चता हीउस मर रहे चोर के पास आती है, और उससे कहा जाता है, ”तू आज ही मेरे साथ स्वर्गलोकमें होगा।“ ओह, ज़रा इसके बारे में सोचिए! यह अद्भुतहै!74इसके बारे में सोचिए! प्रेम और अनुग्रह बहनेंहैं..ये दो जुड़वा बहनें हैं। आपके पास बिना प्रेम के हुए अनुग्रहनहीं हो सकता है। ये तो दो जुड़वा बहनें हैं। यह बिलकुल ठीक बात है। इससे पहले कि आपपर अनुग्रह हो, आप से प्रेम किया जाता है। इससे पहले कि आप किसी पर सचमुच मेंअनुग्रह की दृष्टि दिखायें, आप उससे प्रेम करते हैं; चाहेवह गलत हो या सही; कुछ भी हो आपको उन से प्रेम करना होता है; अन्यथाआप कृपादृष्टि कर ही नहीं सकते हैं। समझे? प्रेम और अनुग्रह एक हीवस्तु हैं। वे तो अर्थात् प्रेम और अनुग्रह तो बस दो जुड़वा बहने हैं। इसके बारे मेंयही सारी की सारी बात है। वे थे…हम एक दूसरे के बिना उनमें से किसी को नहीं देख सकते हैं। “परमेश्वर ने जगत से ऐसाप्रेम किया, कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।” उसने अपना अनुग्रह पवित्र आत्मा के ज़रिये हमारे हृदयों में उड़ेल दिया है। समझे? आप तबतक कुछ नहीं कर सकते हैं, जब तक कि ये एक दूसरे के साथ मिलकर काम ना करें। अनुग्रह, यह तोपरमेश्वर का ही अनुग्रह है जो हमें बचाता है।

75अब, हमें उस अनुग्रह के बारे में मालूम होता है, यह अनुग्रहही था जो उस चोर पर किया गया था जो मर रहा था, और इस में कोई आश्चर्य नहीं है, कि जब कवियों ने इसे देखा, तो वेइसे देखकर बहुत ज्यादा प्रेरणा से भर गये;और एक कवि ने तो यह कह डालाउस दिन के उस सोतेको देख कर मरता हुआ वह चोर खुश हुआ।शायद मैं भी हूँ तुच्छ पापी उसकेजैसा कर मुझेमेरे पापों से पाक-साफधोकर जब से मैंने देखा है उस सोते कोविश्वास से बहताहै जो उसके घावों से।तब से बना छुटकारा दिलाने वाला लोहू मेरा मकसदऔर जब तक ना जाऊँ मैं मर रहे यहीमेरा मकसद तब करूंगा मधुर गीतों मेंगाकर उसकी बचाने वाली सामर्थकाबख़ान जब ये लड़खड़ाती जुबानहो जायेगी शान्त, और लेटा होऊँगाकब्र में शान्त तब भी पुकारूंगा,अनुग्रह, अनुग्रह..अनुकम्पा से भरा अनुग्रहएक कवि ने तो यह लिखा है।ओह परमेश्वर का प्रेम है कैसा महान और पाक है।कैसा बड़ा और अपार रहेगा जोयुगानुयुग अपार रहेगा संतोऔर दूतों का गान चाहे बना डालेसागर के जल को स्याही चाहे बना लेआकाश को लेखन-पत्र भूमि केसारे तिनको को बना ले कलम पेशे सेबन जाये कवि धरती का हर मानवऔर करने लगे परमेश्वर का प्रेम बयानसागर का जल जायेगा सूख,लेखन-पत्र भी पड़ जायेगा कमपर फिर भी पूरा ना होगा उसकी महिमा का बख़ान76यही तो वह है- अनुग्रह, परमेश्वर का अनुग्रह! परमेश्वर का अनुग्रह उमड़ाऔर उसने बहाया…परमेश्वर का जो प्रेम हमारे लिए है, वही परमेश्वर के अनुग्रह को हमारे जीवनों में लेकर आया। यहाँ पर एक और बात है जो अनुग्रह नहीं कर सकता है; अनुग्रह को खरीदा नहीं जा सकता है; अनुग्रह को बेचा नहीं जा सकता है। वह तो बस अनुग्रह ही है। यह उसके द्वारा ही किया जाता है जो सर्वोच्च-सर्वोपरि है। जी हाँ, श्रीमान! आप इसके लिए मोल-भाव नहीं कर सकते हैं। आप ऐसा नहीं कह सकते हैं, “हे परमेश्वर, अगर तू ऐसा-ऐसा करेगा, तो मैं वैसा-वैसा करूंगा।” आप ऐसा नहीं कर सकते हैं। परमेश्वर ऐसा नहीं करता है। आप परमेश्वर से कुछ भी बाहर नहीं खींच सकते हैं। परमेश्वर तो इसे आपको अपने अनुग्रह में होकर ही देता है। ओह, ओह, मेरे खुदा!”ना तो चाह करने वाले की, और ना दौड़नेवाले की, परन्तु यह तो दया करने वाले परमेश्वर की ही बात है।” यह सच77लोग अपने मुखमंड़ल पर ओंधे हो जाते हैं। और कुछ लोग तो मेरे पास आते हैं…मेरा मानना है, कि आज इस भवन में ही मैंने उन लड़कों में से एक को वहाँ पीछे देखा है। हाल-फिलहाल में ही एक मैथोडिस्ट लड़का अंदर आया था और उसने पवित्र आत्मा पाया था…और वे लड़के मेरे पास आकर बोले, “भाई ब्रन्हम, अब हमारा उद्धार हो गया है और हमने पवित्र आत्मा पा लिया है, क्या हम जाकर वरदानो को पाने की धुन मे लग जाएं?”मैंने कहा, “ऐसा ना करें। ऐसा बिलकुल भी ना करें।परमेश्वर तो अपने वरदान अपनी सर्वोच्चता में होकर देता है। वरदान और बुलाहट तो बिना प्रायश्चित के ही मिल जाते हैं। जब आप किसी वरदान को पाने की धुन में लग जाते हैं, तो आप पहली बात ये जानते हैं, कि आप कहते हैं, “हे परमेश्वर, आप मुझे बस एक प्रचारक बना दें; आप मेरे लिए यह कर दें। ”और ऐसे आप क्या बनने जा रहे होते हैं? एक बड़े अभिमानी-घुमड़ी इंसान; आप सिर्फ यही सब बन जाते हैं। आप किसी मनुष्य की थियोलॉजी में पड़ जायेंगे और किसी संस्था में चले लायेंगे, और वहाँ पर अपने को एक स्तम्भ के जैसे पक्का कर लेंगे और अपना नाश कर लेंगे। होने पाये परमेश्वर ही बुलाये। परमेश्वर ही आपको बुलायेगा; परमेश्वर ही आपका पवित्रीकरण करेगा; परमेश्वर ही आपको वह देगा जिसकी उसे आपको देने की जरूरत है। जी हाँ, श्रीमान!78आप अनुग्रह के लिए मोल-भाव नहीं कर सकते हैं। जी नहीं, श्रीमान! इसे आपको बेचा नहीं जा सकता है; इसके लिए कोई मोल-भाव नहीं किया जा सकता है; ना ही इसे मोल लिया जा सकता है; और ना ही इसकी खरीद-फरोख्त की जा सकती है। आप ऐसा नहीं कह सकते हैं, “ठीक है, प्रभु, अब मैं इस बड़ी महान बैपटिस्ट कलीसिया में, या इस बड़ी मैथोडिस्ट कलीसिया में, या इस बड़ी पिन्तेकोस्तल कलीसिया में, या इस बड़ी नाज़रीन कलीसिया में शामिल हो जाऊँगा। अगर तू परमेश्वर ऐसा कर देगा, तो मैं इसे करूंगा। इसका मोल-भाव नहीं किया जा सकता है। जी नहीं, श्रीमान!“जितनों को पिता ने मुझे दिया है, वे सब मेरे पास आयेंगे। कोई मेरे पास नहीं आ सकता है जब तक कि पिता ही उसे ना खींच लाये।”ऐसा करके तो आप सिर्फ उस बड़ी कलीसिया के एक सदस्य बन जाते हैं; आप के साथ बस यही सब होता है; लेकिन आपका उद्धार नहीं होगा। अनुग्रह से ही आपका उद्धार हुआ है।79हमारे हुनर बाकी के काम नहीं कर सकते हैं, हमारे हुनर हमारे नहीं कर सकते हैं…हमारे पास जो हुनर हैं, उन से हम हासिल नहीं कर सकते हैं; हम अपने हुनरों से अनुग्रह हासिल नहीं कर सकते हैं।अगर परमेश्वर ने मुझे एक प्रचारक बना दिया है, तो यह नहीं कहा जा सकता है, कि उसका अनुग्रह मेरे साथ रहा है। नहीं, जी नहीं! यह तो सिर्फ उसका अनुग्रह ही है, जिसने मेरा उद्धार किया है। इसलिए नहीं क्योंकि मैं सुसमाचार का प्रचार करता हूँ, मेरा उद्धारा हो गया है। इसलिए नहीं क्योंकि आप अन्यान्य भाषाओं में बोलते हैं, आप का उद्धार हो गया है। ओह, नहीं! इसलिए नहीं, क्योंकि आप…चाहे आप प्रचार ही क्यों ना करते हो, आपका उद्धार नहीं होता है…क्योंकि आप प्रचार करते हैं। आपका—आपका उद्धार इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि आप अन्यान्य भाषाओं में बोलते हैं। आपका उद्धार इसलिए नहीं हुआ है, क्योंकि आप इन कामों में से किसी काम को करते हैं। पहला कुरिन्थियों 13वाँ अध्याय यह बात साबित करता है, “चाहे मैं मनुष्यों और स्वर्गदूतों की बोलियाँ बोलूं, चाहे मैं परमेश्वर के सारे भेदों को समझता हूँ(चाहे मैं एक न्रचारक हूँ)…चाहे मैं इन सब कामों को करता हूँ और मेरे पास इतना विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा हूँ, तौभी मैं कुछ नहीं, अगर मुझे में रहम ना हो, जो कि प्रेम है।” अतः प्रेम ही अनुग्रह है। यह तो परमेश्वर का अनुग्रह ही है जो सब कुछ करता है।80कुछ लोगों के पास ऐसे हुनर हैं जैसे इन रॉक-एन रोल किंग्स में से कुछ के पास हैं। उस से तो मेरा आत्मिक पेट ही बीमार हो जाता है। मैं नहीं जानता हूँ…मैं आपको बताता हूँ, जब मैं इन रॉक एन रोल गाने वालों को जो शनिवार की रात को ऊपर खड़े होते हैं और रॉक-एन रोल गाते हैं और सारी रात भर नाँचते हैं, और उससे अगली सुबह वे श्रोताओं का सामना करने के लिए और ऐसे ही काम करने के लिए आते हैं, तो वे अपने चेहरों पर एक लम्बी पवित्रता को ओढ़ने की कोशिश कर रहे होते हैं, और वे लोगों के सामने खड़े होकर कुछ मसीही गीत गाते हैं, और सोचते हैं, कि वे स्वर्ग जा रहे हैं। मैं उन बहुतेरों का नाम बता सकता हूँ, लेकिन मुझे नहीं बताना है; क्योंकि यह टेप सभी जगह जा रहा है। मगर आप सब जानते हैं। अधिक समय नहीं हुआ है, जब यहाँ पर हॉलीवुड में एक लड़का । था, जिसने एक लड़की का चुम्बन करने से मना कर दिया था, क्योंकि यह उसके धर्म के खिलाफ था; क्या यह उसके धर्म के खिलाफ था? और वही रॉक एन रॉल के चलचित्र बनाते हैं और उन तस्वीरों को बनाते हैं, जो अशोभनीय हैं, और वे ऐसे ही काम करते हैं। तुम यहूदाह, क्या तुम सोचते हो, कि तुम चाँदी के तीस सिक्के ले सकते हो और परमेश्वर के अनुग्रह के भी काबिल हो सकते हो? ऐसे तो तुम अपने लिए और कुछ नहीं, वरन अपने लिए नरक में ही एक जगह खरीद रहे हो।81परमेश्वर का अनुग्रह मोल-भाव करके नहीं पाया जा सकता है, ना ही इसे किसी हुनर से हासिल किया जा सकता है। अनुग्रह को तो परमेश्वर अपनी सर्वोच्चता में होकर देता है। “मैं अपने हाथों में कुछ भी नहीं लेकर आता हूँ”, मैं तो बस तेरे सलीब से ही लिपटा हूँ। मैं तो निर्वस्त्र, घायल, वैसा ही आता हूँ जैसा मैं हूँ।हे परमेश्वर के मेमने,कुछ नहीं है मेरे पास जो मैं लाऊँ, तेरे पास ।पर जो लोहू तू ने बहाया मेरे लिएवही लाता है मुझे तेरे पासयही सारी की सारी बात है,कि यह अनुग्रह ही था, जिसने मुझे मोल लिया।अनुग्रह ने ही ऐसा किया।अनुग्रह ऐसा है…एक और बात है, जो मैं अनुग्रह के बारे में कहना चाहता हूँ…कभी कभी अनुग्रह…82ये बड़ी बड़ी कलीसियाएं जिनमें आप जा सकते हैं, वे सोचती हैं, “अच्छा, हम ने तो वह सबसे बड़ा गिरजा बनवाया है जो शहर में है। हमारे पास तो यहाँ पर महिलाओं की सहायता करने वाली संस्था है, जो गरीब-निर्धनों के लिए कपड़े बनाती है, और उन्हें समुद्र पार भेजती है। हम गरीबों को खाना खिलाते हैं। हम ऐसे ही सारे काम करते हैं।’पौलुस ने कहा था, “चाहे मैं ऐसा ही सब कुछ कर सकें, तौभी मैं कुछ नहीं।”वे कहते हैं, “अच्छा, हम तो एक पुरानी संस्था हैं। हमें यहाँ पर दो हजार साल हो गये हैं। हम तो पाँच सौ साल पुराने हैं। पूर्व समय में हमारे पास जॉन वैसली, ऐलिक्जेंडर कैम्पबे ल, तथा ऐसे ही वे महान संस्थापक थे, उन्होंने ने ही हमारी कलीसिया की स्थापना की थी। हाल्लिलूय्याह!”खैर, यीशु मसीह ने तो इस कलीसिया की स्थापना पवित्र आत्मा के बपतिस्मे के द्वारा की थी, और उसने उन्हें पिन्तेकुस्त के दिन तक ऊपर जाने के लिए और तब तक प्रतीक्षा करने के लिए कहा था, जब तक कि वे स्वर्ग से सामर्थ ना पा लें।83चाहे अभी भी आप पिन्तेकोस्तल कलीसिया के सदस्य हों, आप नाश हो सकते हैं। पिन्तेकोस्तल कलीसिया तो और दूसरी कलीसियाओं के जैसी ही है। यह सच बात है।इसकी खास बात तो यह है, कि केवल एक ही सच्ची कलीसिया है, और उस कलीसिया में आप पवित्र आत्मा के बपतिस्मे के द्वारा जन्म लेते हैं। पहला कुरिन्थियों १२:१३ बताता है, क्योंकि हम सब ने एक ही देह में एक ही आत्मा के द्वारा बपतिस्मा पाया है।” यह सही बात है, यह पहला..पहला कुरिन्थियों १२ है। अब, हम ने उसी कलीसिया में बपतिस्मा पाया है।84परन्तु लोग सोचते हैं, कि वे इसे अपनी योग्यता के द्वारा हासिल कर सकते हैं। वे कहते हैं, “क्यों, हम तो…मैं-मैं स्कूल गया, और मैंने इसे करना सीखा है। मैं..मैं सैमनरियों में गया और मैं ये किया…” इसका बिलकुल भी कोई मायने नहीं है। आप परमेश्वर के अनुग्रह को मोल नहीं खरीद सकते हैं।परमेश्वर का अनुग्रह तो इसके जैसा है। आइये आखिर में मैं आपको एक कहानी बताता हूँ। परमेश्वर का अनुग्रह कुछ ऐसा सा है। एक बार एक सामर्थी राजा था, और इस सामर्थी राजा का एक बेटा था, और वह उसका एकलौता बेटा था। और एक दिन एक हत्यारे ने उसी लड़के को जान से मार डाला। और उस पूरे राज्य में उस हत्यारे को ढूंढ़ निकालने के लिए सिपाही गये। और आखिरकार उन्होंने उस हत्यारे को ढूंढ़ निकाला। और जब उन्होंने उसे ढूंढ़ निकाला, तो वे उसे वापस लेकर आये और उसे बंदीगृह में डाल दिया। और जब उन्होंने ऐसा किया, तो एक अदालत ठहरायी गई, और उसे सज़ा सुनाई गई। ओह, यह क्या ही भंयकर बात थी! उसने राजा के ही बेटे को जान से मार डाला था; और वह जानता था, कि उसे इसकी क्या सज़ा भुगतनी पड़ेगी।85उन्होंने उसे सबसे भीतर की कोठरी में डाल दिया, और द्वार पर ताले लगा दिये, और उन्होंने उस पर भी तख्तियाँ लगा दी, और उसके चारों ओर पहरेदार तैनात कर दिये, क्योंकि हम जानते हैं, इस लड़के को क्या ही भंयकर सज़ा मिलने जा रही थी, क्योंकि उसने राजा के पुत्र को, शाही राजा के पुत्र को जान से मार डाला था। पहरेदार दरवाजों पर सभी जगह तैनात कर दिये गये थे। उसे जेल की सबसे भीतर वाली कोठरी में डाल दिया गया था। उसके कपड़े उतार कर टाट का चिथड़ा पहना दिया गया था। और वहाँ पर वह ऐसी हालत में था, वह वहाँ पर भूखों मर रहा था, उसे खाने के लिए कुछ भी नहीं दिया जाता था। वह उस हालत में बैठा हुआ था।इसके बाद वे उसे बाहर निकालकर अदालत में लेकर आये। वह कसूरवार पाया गया, और उसका कसूर साबित हो गया था। उसे सज़ा सुना दी गई; उसे एक भंयकर मृत्युदंड़ के तहत फांसी पर चढ़ाया जाना था; उसे तिल-तिल करके तब तक मारा जाना था जब तक कि उसका नश्वर जीवन बिलकुल खत्म नहीं हो जाता। उसे न्यायाधीश ने सज़ा सुना दी थी, और उसे तो मर जाना था। और उसने क्षमा-याचना माँगी, और वह रोया-चिल्लाया, और बोला, “हालाँकि मैं कसूरवार हैं, हालाँकि मैं कसूरवार हूँ। मुझे अफसोस है, कि मैंने वैसा किया। मैं चाहता हूँ, कि काश मैंने ऐसा कभी ना किया होता। मुझे अफसोस है, कि मैंने ऐसा किया। क्षणिक क्रोध में आकर मैंने ऐसा कर डाला था। मेरा उस तरह से ऐसा करने का कोई मतलब नहीं था।86एक दिन राजा उस लड़के से मुलाकात करने के लिए, उससे बातें करने के लिए और उसे यह बताने के लिए, कि उसने उसके निज एकलौते पुत्र को जान से मार डाला है, उस जगह पर गया जहाँ पर वह लड़का था। उसने उसके लड़के को जान से मार डाला था। वह बोला, “मैं जाकर उससे बात तो करूंगा ही।”और जब वह वहाँ नीचे पहुँचा, तो उसने उस पिंजरे पर निगाह डाली जो बिलकुल पीछे था, वह उसमें ऐसा दिखाई पड़ता था, जैसे पिजरे में कोई जानवर कैद हो। उसने उसकी उस नन्ही सिकुड़ी देह पर निगाह डाली जो एक कोने में लेटी हुई थी, वह रो रहा था, उसका चेहरा पूरी तरह अंदर को धस सा गया था, उसका जबड़ा भी अंदर को धस चुका था, उसकी आँखें अंदर को धस चुकी थीं; उसकी आँखें कीचड़ से पूरी तरह सनी हुई थीं; उसका मुँह पूरी तरह से सफेद पड़ गया था, उसे कोई पानी नहीं मिलता था, वह प्यासा था, वह अपने मुँह के बल ओंधा पड़ा हुआ, रो रहा था। राजा बोला, “खड़े हो जाओ।” राजा उसके पास तक आया, और राजा ने उस पर दृष्टि डाली। राजा बोला, ”तू ने मेरे बेटे को क्यों जान से मारा? मेरे बेटे ने तेरा क्या बिगाड़ा था? उसने तेरे साथ ऐसा क्या बुरा किया था, जो तूने उसे ऐसी मौत से मारा, कि तू ने उसे भाला भोंक कर जान से ही मार डाला?”वह बोला, “हे मेरे जहाँपनाह, उसने कुछ भी नहीं किया था। मैं खुद अपनी नासमझी के कारण—मैं बस अपने तौर-तरीकों के कारण ही ऐसा कर बैठा। मैंने उसे इसलिए जान से मार डाला था, क्योंकि मैं उससे ईर्ष्या करता था, और मैं गुस्से में पगला गया और मैंने उसे जान से मार डाला।” बोला, “महाराज, मुझे तो आपके न्याय के तहत मर जाना है, मुझे इस बात का एहसास है, और मैं इसी के योग्य हूँ। मैं तो सिर्फ एक बात के लिए ही आँसू बहा रहा हूँ, कि मुझे अफसोस है, कि मैंने उस जैसे शाही पुरुष को अकारण ही जान से मार डाला।”87राजा अपनी ऐड़ियों पर घूमा और बाहर निकल गया, वह निकलकर डेस्क पर पहुँचा और बोला, “सारे रिकॉड जला दो।..(आप जानते हैं, उन्हें हमेशा के लिए भूल जानेवाले सागर में डाल दिया गया।) सारे रिकॉड जला दो। उसे नहलाधुलाकर ऊपर लेकर आओ। मैं उसके लिए एक अंगरखा भेजूंगा।’इसके थोड़ी देर बाद ही….एक बड़ा आलीशान रथ उस द्वार पर जाकर रुका। जब ऐसा हुआ, तो एक कालीन बंदीगृह तक बिछायी गई। वह राजा उस बड़े रथ के छोर पर खड़ा था; वह बोला, “हे मेरे बेटे, आ और मेरे साथ घर चल..मेरे साथ महल में चल’; उसने उसके कंधे पर राजा वाला बागा डाला। वह बोला, अब के बाद से तू मेरा बेटा है।” क्योंकि उस पर दया की गई थी। यही तो अनुग्रह है।ये मैं था, ये आप थे जिसके साथ ऐसा हुआ। हमने तो परमेश्वर के ही बेटे को अपने पापों के द्वारा जान से मार डाला था। हम तो परदेशी थे, हम तो गंदी, सड़ी हालत में संसार के कैदखाने में पड़े हुए थे। परमेश्वर ने हमें अपने ही निज पुत्र के लोहू से नहलाया-धुलाया, और हमें साफ किया, और हमें पवित्र आत्मा का वस्त्र पहनाया।

और अब किसी दिन परमेश्वर का ही महान रथ द्वार पर खड़ा हुआ होगा, और हम उसके साथ रहने के लिए घर चले जायेंगे। सारे रिकाड तहसनहस कर दिये गये हैं; हमपर आगे को न्याय नहीं हो सकता है; उन्हें तो जला दिया गया है, उसने तो उन्हें हमेशा के लिए भूल जाने वाले समुद्र में डाल दिया है, और उनके बारे में कुछ भी स्मरण नहीं किया जाता है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है, कि हम गा सकते हैं ओह,कैसा अद्भुत अनुग्रह! लगता है जो कितना मधुर बचाया उसनेमुझ जैसे कंगाल को खो गया था,मैं एक बार को, पर पा लिया गया है अब मुझ को अंधा थामैं एक बार को पर अब दिखता है मुझ को यह अनुग्रह ही है,जिसने सिखाया खुदा से डरना मुझको अनुग्रह ने हीदूर किया मुझ से और दूसरे डर-भय कोकितना कीमती लगता है अनुग्रह मुझको करता हूँ,मैं विश्वास पहली घड़ी से ही उस पर!88हे पापी मित्र, क्या तुम नहीं चाहोगे, कि इस समय ठीक इसी घड़ी यह आप पर हो जाये, जबकि हम अपने सिरों को एक क्षण के लिए प्रार्थना में झुकाते है? होने पाये यही वह समय हो, जब आपने ठीक इसी समय पहले पहल विश्वास किया। आप अपना मन तैयार कर लें और कहें, “हे प्रभु परमेश्वर, मैं कसूरवार हूँ। मुझे इस बात का एहसास है, कि मेरे उद्धार के लिए तो अनुग्रह की ही आवश्यकता है। मैं खुद अपना उद्धार नहीं कर सकता हूँ। मैं तो बर्बाद हूँ। मैं तो नाश हुआ जाता हूँ। मैं तो कुछ भी नहीं कर सकता हूँ। संसार में मैं..मैं तो बिना परमेश्वर के, बिना अनुग्रह के, बिना मसीह के, पूरी तरह से निसहाय और आशाहीन हूँ,…और परमेश्वर से अनजान हूँ। हे प्रभु, क्या आप मुझ पर दया नहीं करेंगे, और मुझे पाप की इस कैद से जिसमें मैं आज हूँ, बाहर नहीं निकालेंगे; हे खुदा, आप मुझ पापी पर दया करें ? क्या आप अपना हाथ ऊपर उठायेंगे, और कहेंगे, ”खुदावंद, खुदा, मैं वो इंसान हूँ, जिसे आपके अनुग्रह की जरूरत है?” क्या आप अपना हाथ ऊपर उठाकर कहेंगे, “भाई ब्रन्हम, मेरे लिए दुआ करना। अब मैं विश्वास करूंगा।” मेरे भाई, आप जो वहाँ पीछे हैं, परमेश्वर आपको आशीष दे।89कोई और भी है जो कहेगा, “भाई ब्रन्हम, अब आप मुझे याद रखना; हे भाई, मेहरबानी करके, आप मुझे दुआ में याद रखना।’ महिला, परमेश्वर आपको आशीष दे। दुआ करना, कि…”भाई, परमेश्वर आपको आशीष दे। बहन, परमेश्वर आपको आशीष दे। भाई आप जो यहाँ पर खिड़की के पास हैं, परमेश्वर आपको आशीष दे। भाई, आप जो वहाँ पीछे हैं, परमेश्वर आपको आशीष दे। भाई, आप जो यहाँ पर हैं; परमेश्वर आपको आशीष दे। ”भाई ब्रन्हम, मुझे याद रखना।’ जी हाँ, मेरे भाई, आप जो वहाँ पर हैं, परमेश्वर आपको आशीष दे। एक और जो वहाँ पर है, परमेश्वर आपको आशीष दे। बहन, परमेश्वर आपको आशीष दे। भाई, आप जो यहाँ पर हैं, परमेश्वर आपको आशीष दे। वह आपको देखता है। अब, सचमुच में इसका मतलब है। युवक, परमेश्वर आपको आशीष दे। वही आपको देखता है। नहीं है, कि…भाई, परमेश्वर आपको आशीष दे। बहन, आप जो दीवार के सहारे खड़ी हैं, परमेश्वर आपको आशीष दे। भाई आप जो यहाँ नीचे हैं, परमेश्वर आपको आशीष दे। भाई, आप जो वहाँ पीछे दीवार के सहारे खड़े हैं, परमेश्वर आपको आशीष दे।मैं अपने हाथों में कुछ नहीं लेकर आता हूँ…(क्या कोईऔर भी है, जो कहेगा? परमेश्वर आपको आशीष दे।आप जो वहाँ पीछे हैं, मैं आपका हाथ देखता हूँ।)पर तेरा लोहू मेरे लिए बहाया गया…(जी हाँ, प्रभु! बहन, परमेश्वर आपको आशीष दे।)वह जो लेकर आता है मुझे तेरे पास…(बहन, परमेश्वर आपको आशीष दे।)लेकर आता है मुझे तेरे पास …(आप जो वहाँ पीछे हैं,परमेश्वर आपको आशीष दे)…तेरा अनुग्रह…तेरा अनुग्रह…(युवती, परमेश्वर आपको आशीष दे)मैं आता हूँ, तेरे पास…मैं आता हूँ, तेरे पास!जैसा भी हूँ मैं, आता हूँ तेरे पास करमेरे प्राण को सारे अंधकार से आज़ाद हे तू ही जो करता,अपने लोहू से हर दाग को साफहे मेमने…(अनुग्रह! ओह, अनुग्रह कर!)…आता हूँ, तेरे पास…90अब चारो ओर लगभग पन्द्रह या बीस हाथ हैं, जो ऊपर उठे हैं। अब, जबकि हमने अपने सिरों को झुकाया हुआ है, आप जिन्होंने अपने अपने हाथों को ऊपर उठाया था, मैं आप से यह कहूँगा, कि इस समय आप खामोशी से अपने अपने पैरों पर खड़े हो जायें, जबकि मैं आपके लिए प्रार्थना अर्पित करता हूँ। हमारे पास यहाँ ऊपर वेदी पर जगह नहीं है; बस ऐसा है, मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आप अपने पैरों पर खड़े हो जायें; अब हर एक वह जन जिसने अपने हाथ ऊपर उठाये थे, और आप चाहते हैं, कि इस समय आपके लिए प्रार्थना की जाये, आप अपने पैरों पर खड़े हो जायें। ठीक इस समय आप अपने पाँव पर खड़े हो जायें, जबकि मैं आपके लिए प्रार्थना अर्पित करता हूँ। सब जगह लोग अपने पाँव पर खड़े हो जायें।………..मेरे लिए बहाया,और ऐसा है…(यह बहुत अच्छा है, परमेश्वर आपको आशीष दे…)मैं आता हूँ, तेरे पासहे परमेश्वर के मेमने , आता हूँ मैं….याद रखिए, एक ऐसा दिन होगा जब अनुग्रह और ना रहेगा; वह आपके लिए और ज्यादा ना रहेगा; बहुत देर हो चुकी होगी। अभी बहुत ज्यादा देर नहीं हुई है।91हे परमेश्वर, हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता, तू जिसने हमारे उद्धाराकर्ता को मरे हुओं में से जिलाया, और अब वह जीवता है, वह जो महिमा में सर्वोच्च है, मसीह के पवित्र आत्मा को हमारे ऊपर भेज रहा है, ताकि पापी को कायल कर डाले। परमेश्वर, मैं उन लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ, जो अपने अपने पाँव पर खड़े हुए हैं। प्रभु, यह सत्य है। आपने कहा था, “जो मुझे मनुष्यों के सामने मान लेगा, मैं उसे अपने पिता और पवित्र स्वर्गदूतों के सामने मान लूंगा।” हम जानते हैं, कि जब उस बड़े न्याय वाली सुबह हम खड़े होंगे, तो यह क्या ही समय होगा! प्रभु, इस समय वे खड़े हुए हैं, ताकि उनके पाप उनके सामने से दूर हो जायें; कुछ लोगों के पाप तो उनका पीछा करते हैं। इस सुबह ये लोग यहाँ पर इसलिए खड़े हुए हैं, क्योंकि वे अपने अपने पापों का अंगीकार कर रहे हैं; वे जानते हैं, कि उन्होंने कुछ गलत किया है; और वे आपको अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करना चाहते हैं। आप ही उनके हृदयों का मर्म जाँचते हैं, और आप उनके बारे में सब कुछ जानते हैं।92पिता, मैं प्रार्थना करता हूँ, कि आप उनके निवेदन प्रदान करेंगे। उनका उद्धार करें। इस सुबह जो यह छोटा सा सन्देश “परमेश्वर का अनुग्रह’ प्रचार किया गया है, ये लोग उसके विजयरत्न हैं; इससे कोई मतलब नहीं है, कि हमने क्या किया है, यह तो अभी भी उमड़ता है और हमारे पास पहुँचता है। प्रभु, इसे प्रदान कीजिए। इन ह्रदयों को अनुग्रह प्रदान कीजिए। होने पाये ये सब यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण कर लें। उन्होंने काम किया है। पवित्र आत्मा ने ही उन्हें खड़ा होने के लिए कहा था, और उन्होंने ऐसा ही किया। पवित्र आत्मा ही उन से खड़े होने के लिए कह रहा था, और पवित्र आत्मा के लिए आज्ञाकारिता में वे खड़े हुएअब, प्रभु, आप अपना वचन पूरा करें। आप ने ही कहा था, “कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब जक कि पिता ही उसे मेरे पास ना खींच लाये। और जितनों को पिता ने मुझे दिया है, वे सब मेरे पास आयेंगे। वह जो मेरे पास आयेगा, मैं उसे किसी भी रीति से बाहर न निकालूंगा। वह जो मेरे वचन सुनता है, और मेरे भेजनेवाले की प्रतीति करता है, अनन्त जीवन उसका है, और वह न्याय पर नहीं आएगा; परन्तु वह तो मृत्यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका।” यही कारण है, कि प्रभु वचन के इन लेखों के आधार पर, जो खुद आपके अपने निज वचन हैं, और हम इन्हें संत यूहन्ना 5:24 में पढ़ते हैं, “वह जो मेरे वचन सुनता है, और उस पर विश्वास करता है जिसने मुझे भेजा है।” क्यों, क्या होता है? क्योंकि उसने विश्वास किया है, इसलिए उसने अनुग्रह पाया है। वह अनन्त जीवन के पास आया—उसने अनन्त जीवन पाया है, और वह न्याय पर नहीं आएगा..(वह तो न्याय से पहले ही चला जाएगा)…और वह न्याय पर नहीं आएगा, परन्तु वह तो मृत्यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका।” हे खुदा, हम इसके लिए आपके लिए कितने ज्यादा धन्यवादित हैं!93हम प्रार्थना करते हैं, कि आप उन्हें जीवन में आगे बढ़ाते चले जायेंगे। होने पाये उनमें से हर एक बपतिस्मा लेकर प्रभु का नाम ले, और अपने अपने पापों को घुलवा ले। प्रभु, यह प्रदान कीजिए।अब, मैं आपका दास-सेवक होने के नाते इन्हें आपको प्रस्तुत करता हूँ, मैं यह विश्वास कर रहा हूँ, कि परमेश्वर का वह महान फरिश्ता जो वहाँ नीचे दिखाई दिया था…और पिता, आप वह सम्पूर्ण गाथा जानते हैं, इस शुक्रवार की सुबह धुंधले से उजियाले में वही महान फरिश्ता उन तीन मेघधनुषों के रूप में दृष्टिगोचर हुआ, जो पहाड़ के ऊपर से बनते चले आ रहे थे, और उसी ने इन वचनों को बोला था…

प्रभु परमेश्वर, यह होने पाये, कि वह परमेश्वर जो मुझे उन मेघधनुषों में दिखाई दिया था, इन लोगों का ठीक इसी समय अपने अनुग्रह के द्वारा उद्धार कर डाले। और मैं इन्हें इन बड़ी आशाओं के साथ आपको अर्पित करता हूँ, कि आप अपना वचन पूरा कर रहे हैं, और आप तो अपना वचन पूरा करेंगे, और मैं उस महान दिन इन से मुलाकाल करूंगा, और इनके प्राण पर ना तो कोई झुर्रा और ना ही कोई दाग होगा। आप यह प्रदान कीजिए। मैं इन्हें यीशु के नाम में आपको अर्पित करता हूँ। आमीन!94परमेश्वर आपको आशीष दे। अब, जबकि आप बैठ जाते हैं, और जो कोई भी उनके नज़दीक बैठा हुआ मसीह है, वह उन से हाथ मिलाये। उन से बात करें और उन्हें कलीसिया में आमन्त्रित करें, और इससे ज्यादा जो कुछ भी कर सकते हैं, वह करें…ओह, क्या वह अद्भुत नहीं है?ओह, कैसा अद्भुत अनुग्रह! लगता है जो कितना मधुरबचाया उसने मुझ जैसे कंगाल को खो गया था,मैं एक बार को, पर पा लिया गया है अब मुझ को अंधा था,मैं एक बार को पर अब दिखता हैमुझ को यह अनुग्रह ही है,जिसने सिखाया खुदा से डरना मुझकोअनुग्रह ने ही दूर किया मुझ से औरदूसरे डर-भय को कितना कीमती लगता हैअनुग्रह मुझको करता हूँ,मैं विश्वास पहली घड़ी से ही उस पर!क्या आपने उस पर विश्वास किया है?अगर आपने किया है, तो आप अपना हाथ ऊपर उठायें।ओह, मैं कितना प्रेम यीशु को करता हूँ।ओह, मैं कितना प्रेम यीशु को करता हूँ।ओह, मैं कितना प्रेम यीशु को करता हूँ।ओह, मैं कितना प्रेम यीशु को करता हूँ।क्योंकि उसने मुझ से पहले प्रेम किया95क्या आप उससे प्रेम करते हैं? अब, क्या वह अद्भुत नहीं है? अब…जब…जबकि हम इसे फिर से गाते हैं, मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आप उस किसी से जो आपके नज़दीक है, हाथ मिलायें, और बड़े ही शांत स्वर से कहें, हे पथिक, परमेश्वर आपको आशीष दे।” आप बड़े ही शांत स्वर से और पुनीत भाव से कहें… जब हम…(भाई ब्रन्हम और मंड़ली के लोग आपसे में हाथ मिलाते हैं.)परमेश्वर की तारीफ होवे! क्रूस पर, क्रूस पर,जहाँ देखी मैंने ज्योति पहली बारमेरे दिल का सारा बोझ दूर हुआविश्वास से ही मैने अपनी ज्योति पायीउस दिन से ही मैंने सारे दिन भरकी खुशी पायी क्रूस पर, क्रूस पर,जहाँ देखी मैंने ज्योति पहली बारमेरे दिल का सारा बोझ दूर हुआविश्वास से ही मैने अपनी ज्योति पायीउस दिन से ही मैंने सारे दिन भरकी खुशी पायी क्या आप खुश नहीं हैं?मै बहुत खुश हूँ, क्योंकि यीशु नेकिया मुझे आज़ाद मै बहुत खुश हूँ,क्योंकि यीशु ने किया मुझे आज़ादओह, मै बहुत खुश हैं, क्योंकियीशु ने किया मुझे आज़ाद मैं गीत गा रहा हूँ,महिमा गा रहा हूँ, हाल्लिलूय्याह,यीशु ने किया मुझे आज़ाद मैं बहुत खुश हूँ,क्योंकि यीशु ने किया मुझे आज़ाद मैं बहुत खुश हैं,क्योंकि यीशु ने किया मुझे आज़ादओह, मैं बहुत खुश हूँ, क्योंकि यीशु ने किया मुझे आज़ादमैं गीत गा रहा हूँ, महिमा गा रहा हूँ, हाल्लिलूय्याह,यीशु ने किया मुझे आज़ाद ।96क्या आप उससे प्रेम नहीं करते हैं? क्या वह अद्भुत नहीं है? ओह, मैं बस सोचता हूँ, कि वह अद्भुत है। अब, आप ज़रा सोचें, कि यह बाइबिल उसी की ही सच्चाई है, और यह बाइबिल हमें यह सिखाती है, कि वह कल, आज, और युगानुयुग एक सा है। मैं आप से कुछ पूछना चाहता हूँ। अगर वह कल, आज और युगानुयुग एक सा है….परमेश्वर आप मुझे “अगर’ जैसा बेहूदा शब्द कहने के लिए क्षमा करे। मगर वह तो एक सा ही है। अगर वह एक सा है, मैं इसे इस तरह से रखें, तो वह किस तरह का व्यक्ति होगा? वह तो ठीक वैसा ही होगा जैसा वह था।97अब, अगर वह इस सुबह यहाँ पर हो, तो उसके बारे में केवल एक ही बात होगी, जो कि अलग होगी, जब वह गलील में लोगों के मध्य में था; और वह होगी उसकी अपनी निज देह, उसकी अपनी शारीरिक देह; क्योंकि उसे तो मरे हुओं में से जिला दिया गया था(क्या आप इसका विश्वास करते हैं?) और वह स्वर्ग में परम प्रधान के दाहिनी ओर जा बैठा है, और हमारे पापों के अंगीकार के लिए बिचवाई का काम कर रहा है। याद रखिए, वह हमारे लिए तब तक एक भी काम नहीं कर सकता है, जब तक कि हम पहले उसे अपना नहीं लेते हैं , और यह विश्वास नहीं कर लेते हैं, कि वह ऐसा कर चुका है, और यह नहीं कह देते हैं, कि वह है, क्योंकि वही महायाजक है जिससे…वही वो महायाजक है जो हमारे पापों के अंगीकार पर बिचवाई कर रहा है।98अब, तुम बाइबिल के बहुत से अध्ययनकर्ताओं, तुम कहते हो, कि वह कहता है,“ मान लेते हैं। और ”मान लेना“ और ”अंगीकार कर लेना”, एक से ही शब्द हैं। समझे? इब्रानियों की पुस्तक का तीसरा अध्याय कहता है, “अब वह हमारा महायाजक है, जो हमारे पापों के अंगीकार पर बिचवाई कर रहा है। फिर तो वह तब तक कुछ नहीं कर सकता है, जब तक कि हम यह अंगीकार ना कर लें, कि वह ऐसा कर चुका है। देखिए, चाहे आप यहाँ वेदी पर घुटने हो जायें और सारी रात भर दुआ करें, इससे आप का लेशमात्र भी भला ना होगा, जब तक कि आप यह विश्वास न कर लें, कि वह आपको क्षमा करता है; इसके बाद ही आप ऊपर खड़े हो सकते हैं। फिर जब जितना आपके पास विश्वास होता है, कि जहाँ आप…जहाँ एक बार को आप पाप की गंदगी में जिन्दगी बिताते थे; वहीं अब आप मसीह की ओर फिरे हुए युवक होते हैं, अब आप विश्वास कर रहे होते हैं, कि आपका उद्धार हो गया है, क्या आप नहीं करते हैं? इसके बाद आप यहाँ पर ऊपर उठते हैं; आप थोड़ा सा और ऊपर उठते हैं। यह क्या करता है? यह आपके विश्वास को ऊपर उठाता है, क्योंकि आप विश्वास कर रहे होते हैं, कि अब आप एक मसीही हैं; इस समय आप उस चीज से ऊपर जीयेंगे। समझे? अब, अगर आप थोड़ा सा और ऊपर उठना चाहते हैं, तो आप थोड़ा और विश्वास में बढ़े; क्योंकि यह तो असीमित है; बस आगे बढ़ते रहें…ओह, ठीक है, यह असम्भव को भी हकीकत बना सकता है। वे जो विश्वास करते हैं, उनके लिए सब कुछ सम्भव है। यह सच है। “यदि तू इस पहाड़ से कहे, कि हट जा और अपने मन में सन्देह ना करे, वरन प्रतीति करे, कि जो कहता हूँ। वह होगा, तो तुझे वह मिल सकता है जो तू ने माँगा है।”99अब, यीशु मसीह लोगों के मध्य में वास करता है।एक दिन मसीह आग के खम्भे में था, वही एक था जिसे तुम ने देखा, और हमने उस पर विश्वास किया कि वह यहोवा परमेश्वर है। ठीक यही बात ही तो स्वर्गदूत हमें समझाने की चेष्टा कर रहा था। अब देखिए, तब वह पितृत्व वाली अवस्था में था, वह इस्राएल का, एक कौम का पिता था।इसके बाद वह मसीह अर्थात् पुत्र के रूप में आया और उसने अपने लोगों के मध्य में वास किया। क्या यह सही है? मसीह परमेश्वर का पुत्र है।अब, वही मसीह है जो पवित्र आत्मा के रूप में है, जो कि एक अभिषेक है….मसीह का अर्थ होता है, वह जो अभिषिक्त है; और अभिषिक्त किया हुआ, अभिषेक के रूप में लोगों के ऊपर है, वह मसीह, अर्थात् पवित्र आत्मा हमारे साथ है। यह मसीह है जो हमारे साथ है, जो हमारे अंदर है। क्या आप इसका विश्वास करते हैं? एक क्षण के लिए श्रद्धा भाव के साथ बैठे रहें, खामोश रहें। अब, क्या वह एक सा है?100मेरा मानना है, कि कुछ समय पहले ही मेरे पास एक टेलीफोन कॉल आयी थी, और कहा गया था, कि लोग सीटों के मामले में इधर-उधर आ जा रहे थे, और वे ऐसा ही कुछ यहाँ नीचे कर रहे थे। हम ने इसके बारे में बाद में कलीसिया की किसी सभा में बात की थी। इसके बाद मैंने बिली को बताया था, अगर वे बीमारों के लिए प्रार्थना करवाने जा रहे हैं, यदि वहाँ पर उतने ज्यादा लोग हैं, तो उन्हें प्रार्थना कार्ड दे दो। और उसने कहा था, कि वह दे देगा। मैं सोचता हूँ, कि उसने दे दिये हैं।101पिछले दो या तीन महीनों से सेवकाई ऐसे मुकाम पर आ गई है, कि जब किसी घटना का कोई खास मौका ना हो, यह मेरे हाथों से थोड़ी सी बाहर हो गई है। लोग हृदय के गुप्त बातों का प्रकटीकरण हुए होते तथा ऐसे ही और दूसरे कामों को देखते हैं, और देखते हैं, कि यह कैसे बोलता है और लोगों को बताता है, और यह बिलकुल ठीक वैसा ही होता है जैसा हमारे प्रभु ने तब किया था, जब वह यहाँ पृथ्वी पर था। मैं सोचता हूँ, कि आप सब इसे देख चुके हैं। यहाँ पर कितने ऐसे लोग हैं जिन्होंने इसे कभी नहीं देखा है, या जिन्होंने इसे कभी भी काम करते हुए नहीं देखा है? आइये हम आपके हाथों को देखें; वे जिन्होंने इसे कभी नहीं देखा है? ओह! क्या आपने इसे कभी भी काम करते हुए नहीं देखा है? ठीक है, यहाँ पर एक ऐसा समूह जिसने इसे कभी नहीं देखा है, मेरा अनुमान है, कि वे अजनबी हैं। हम नहीं जानते हैं, कि लोग कहाँ-कहाँ से आते हैं।यह एक इंटरडीनोमिनेशनल टेबरनिकल है। हम ना तो नामधारी कलीसियाओं के खिलाफ है, और ना ही हम…हम उनके लिए हैं। हम तो बस उन्हें उनकी अपनी राह पर जाने देते हैं। हम तो लोगों को अपनाने में विश्वास रखते हैं…यदि वे अपनी नामधारी कलीसिया में वापस जाना चाहते हैं, और जब तक वे एक मसीही जीवन जीना चाहते हैं, तो यह बिलकुल ठीक है। हम तो बस यहाँ पर प्राणों को बचाने वाला एक स्थल हैं। उनके लिए मेरी यही सेवकाइयाँ हैं।102अब, मगर मेरा मानना है, कि बाइबिल इब्रानियों के 13:8 में इस बात की शिक्षा देती है, कि यीशु मसीह कल, आज, और युगानुयुग एक सा है। क्या आप इसका विश्वास करते हैं? (सभा कहती है, “आमीन’-सम्पा.) ठीक है, अगर वह एक सा है…अब, जबकि आप सब एक मिनट के लिए बिलकुल खामोशी के साथ बैठे हुए हैं, तो मैं अब आप से अपने दिल की बात बतला देना चाहता हूँ, और इसके बाद हम चंगाई सभा शुरू करेंगे। मैं आप से कुछ पूछना चाहता हूँ। अगर वह कल, आज, और युगानुयुग एक सा है, तो कैसे उसने ऐसा किया…केवल एक ही तरीका है जो हम ऐसा बता सकते हैं; अगर वह आत्मा है, तो वह बिलकुल ठीक उसी रीति से काम करेगा जिस रीति से उसने बीते हुए कल में काम किये थे। क्या यह सही है? वह बिलकुल ठीक उसी रीति से काम करेगा जिस रीति से उसने बीते हुए कल में काम किये थे।103उसने किस रीति से बीते हुए कल में काम किये थे? क्या वह और दूसरे लोगों से अलग था? वह तो बस मानव मात्र ही था; वह एक मनुष्य के जैसा ही दिखाई देता था। वह एक मनुष्य था। उसने जन्म लिया था; वह एक मनुष्य था। उसका माँस और लोहू था। उसने दुख उठाया था; वह पीड़ा में करहाया था; वह अज़माइशों में से होकर गुज़रा था। वह एक मनुष्य था। यह सच बात है; क्या यह सच नहीं है?परन्तु यह क्या था जिसने उसे परमेश्वर बनाया? वह इसीलिए परमेश्वर था, क्योंकि परमेश्वर का आत्मा उस पर था। वह अभिषेक पाया हुआ मसीह था। और वे कैसे जानते, कि वो वही था? मूसा ने कहा था,“प्रभु तुम्हारा परमेश्वर मेरे जैसा एक नबी उठा खड़ा करेगा। और ऐसा होगा, कि जो कोई उस नबी की ना सुने, वह लोगों के मध्य में से काट डाला जाये।” अब, वह एक नबी था। क्या तब इस्राएल एक नबी की बोट जोह रहा था? अगर वे मसीह की बाट जोह रहे थे, तो उन्हें एक नबी की बाट तो जोहनी ही थी। और मसीह को एक भविष्यद्वक्ता होना था।104अब, आइये हम इस बात को एक सेकंड़ के लिए, बस थोड़ी देर के लिए देख लें, और आप इसे ध्यान से सुनें। अब, बस आप अपना दिमाग परमेश्वर पर ही टिका कर रखें, क्योंकि हम नहीं जानते हैं, कि परमेश्वर क्या क्या कर सकता है, हम नहीं जानते हैं, कि वह मुझे करने के लिए क्या क्या बताएगा।मैं जानता हूँ, कि हमारे पास कलीसिया में भविष्यवाणी का वरदान है। हमारे भाई नेविल हैं, वो लोगों के बारे में नबूवत करते हैं; यह एक शानदार बात है। हम इसकी सराहना करते हैं। हम सभी समय इसके बारे में बताते चले आ रहे हैं। हमारे पास यहाँ पर कुछ ऐसे लोग हैं जो अन्यान्य भाषाओं में बोलते हैं। हम इस बात का विश्वास नहीं करते हैं, कि लोगों को पवित्र आत्मा पाने के लिए अन्यान्य भाषाओं में बोलना जरूरी है। ऐसी बात के लिए वचन का कोई भी लेख नहीं है। परन्तु हम यह विश्वास करते हैं, कि यह तो पवित्र आत्मा का दान है जो अन्यान्य भाषाओं में बोलता है; और यह वरदान हमारी कलीसिया में है। परन्तु हम बना लेते हैं…हम उन पर ही निर्भर होकर आगे नहीं बढ़ते रहे हैं। हम विश्वास करते हैं, कि यह तो परमेश्वर की ही आवाज है जो मायने रखती है। हम बोलते हैं जब पवित्र आत्मा बोलता है, और हम उसे सिर्फ तीन बार ही आने देते हैं। और ऐसा किया जा सकता है..ऐसा तब नहीं किया जा सकता है, जबकि मैं प्रचार कर रहा होता हैं, या कलीसिया की व्यवस्था में कुछ चल रहा होता है; क्योंकि भविष्यद्वक्ता की आत्मा उसके वश में होती है। समझे? इसे तो अवश्य ही बिलकुल ठीक ठीक बाइबिल के मुताबिक काम करना चाहिए। कोई भी ऐसा नहीं कह सकता है, ऐसी कोई बात नहीं है, कि अन्यान्य भाषा में बोलना पवित्र आत्मा का वरदान है। हम इसे जानते हैं। बाइबिल इसकी शिक्षा देती है, और हम इसका विश्वास करते हैं। और हम परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं, कि यह हमारे पास यहाँ कलीसिया में है। हमारे पास भविष्यवाणी के वरदान हैं; परन्तु उन्हें अवश्य ही पहले परख लिया जाना चाहिए, और देख लेना चाहिए, कि वे सही हैं, या नहीं; और तभी भविष्यवाणी का वरदान काम करे।105तब तो एक भविष्यद्वक्ता होता है। अब, आप एक कार्यस्थिति में आते हैं।वे वरदान हैं, वे हैं- अन्यान्य भाषाओं में बोला जाना, और अन्यान्य भाषाओं का अनुवाद करना, और ज्ञान और बुद्धि, और आत्मा की परख करना, तथा ऐसे ही और काम करना। वे सब वरदान हैं।परन्तु पाँच कार्यस्थितियाँ हैं। पहली वाली तो प्रेरित हैं, फिर भविष्यद्वक्ता, शिक्षक, प्रचारक, और चरवाहा(याजक) हैं। ये परमेश्वर की ही ठहराई हुई कार्यस्थितियाँ हैं। मनुष्य उन पर तैनात होते हैं। समझे? वे नहीं…नहीं कर सकते हैं…आप उनकी कामना नहीं कर सकते हैं; आप उनके लिए दुआ नहीं कर सकते हैं; उन्हें तो परमेश्वर अपनी सर्वोच्चता में होकर देता है; आप तो उनके लिए जन्मे हुए होते हैं।वह भविष्यद्वक्ता एक भविष्यद्वक्ता नहीं होता है, अगर कोई उस पर हाथ रखता है और उसे एक भविष्यद्वक्ता बना देता है। एक भविष्यद्वक्ता तो अपनी माँ के गर्भ से ही एक भविष्यद्वक्ता के रूप में जन्मा होता है। यही कारण है, कि वह सर्वदा एक भविष्यद्वक्ता ही रहता है। समझे?106परमेश्वर ने यिर्मयाह को बताया था और उससे कहा था, “इससे पहले कि तेरी माँ तुझे अपने गर्भ में धारण भी करती, मैंने तुझे जाना और तेरा पवित्रीकरण किया, और तुझे जाति-जातियों पर नबी ठहराया।” यह सच है। समझे? मूसा को दखिए, वह एक समान्य लड़का था; और इससे पहले कि वह पैदा भी होता, वह खुदा का नबी था। वे बाकी सारे जो उससे आगे आये ठीक ऐसे ही थे। मसीह अदन की वाटिका से ही परमेश्वर का पुत्र था। यह सच है। देखिए, वरदान और बुलाहट तो बिना प्रायश्चित के ही मिल जाते हैं।परन्तु वरदान देह को दिये जाते हैं। अब, हम इसे पहचानते हैं; हम इन सारे वरदानों को पहचानते हैं।107अब, आइये हम देखते हैं, कि यीशु हमारे मध्य में क्या था, देखते हैं, कि वह पूर्व समय में वहाँ पर क्या था। अब हमें मालूम होता है, कि जब उसने पहले पहल अपनी सेवकाई शुरू की थी….अब, जो अजनबी हैं, ध्यानपूर्वक सुनें । जब उसने अपनी सेवकाई पहले पहल शुरू की थी—संत यूहन्ना के पहले अध्याय में हमें यह देखने को मिलता है, कि जब वह बपतिस्मा लेकर बाहर निकल कर आया था, जब वह आया…उसने जन्म लिया और वह तैंतीस साल का हो जाता है; और उसे यूहन्ना ने बपतिस्मा दिया था। पवित्र आत्मा एक पिंडुक की नाई नीचे आया और उस पर उतरा; और एक शब्द आया और बोला, यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिस में …’ असली मूल ग्रीक कहता है, जिस में वास करने को मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ।” कहा, “जिसमें मैं प्रसन्न हूँ; जिस में मैं वास करने को अत्यंत प्रसन्न हूँ।” परन्तु देखिए, हमें यह थोड़ा सा बचकाना सा लगता है, और इसमें क्रिया क्रिया विशेषण से पहले है; परन्तु सचमुच में ये यह कहता है, जिसमें वास करने को मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ’; क्योंकि मसीह…परमेश्वर मसीह में था; और जगत का मेल-मिलाप अपने से कर रहा था। हम यह जानते हैं।108अब, इसके तुरंत बाद ही वह चालीस दिन के लिए निर्जन प्रदेश में चला गया और उसे शैतान के द्वारा आज़माया गया। इसके बाद वह अपनी सेवकाई के साथ बाहर निकल कर आया, वह बीमारों के लिए प्रार्थना करने लगा।और इसके थोड़ी देर बाद वहाँ पर शिमौन पतरस नाम का एक पुरुष, एक बूढ़ा पुरुष आया, यह अनपढ़ पुरुष आया जो अपना नाम तक भी नहीं लिख सकता था। अन्द्रियास ने उसे इस पुरुष के बारे में बताया था, जिसपर अन्द्रियास ने विश्वास किया था, कि वह मसीह है। वह बोला, “ये बेकार की बात है।’और पतरस उसके पास आया, और ज्यों ही वह यीशु की उपस्थिति में चलकर आया, यीशु ने उससे कहा, “तेरा नाम शिमौन है, और तू योना का पुत्र है।”वह जान गया था, कि कुछ घटित हुआ था। वह जानता था, कि वो परमेश्वर का पुत्र था। और यीशु को यह भाया, कि वह उसे स्वर्ग राज्य की कुंजियाँ दे, और उसे कलीसिया का अध्यक्ष बनाये।109वहीं पर फिलिप्पुस नाम का एक पुरुष बराबर में खड़ा हुआ था। फिलिप्पुस ने उसे देखा और सोचा, “यह तो अद्भुत है, मैं एक ऐसे पुरुष को जानता हूँ, जो बाइबिल का ज्ञाता है, वह पहाड़ के आसपास लगभग पन्द्रह मील दूर रहता है। मैं दौड़कर जाऊँगा और उसे बताऊँगा। उसका नाम नतनएल है।उस दिन वह चक्कर काटता हुआ सरपट दौड़ता हुआ वहाँ पर पहुँचा। हो सकता है, अगली ही सुबह वह तड़के ही वहाँ पहुँच गया हो, और वह दौड़ता हुआ गया, और दरवाजा खटखटाया। श्रीमती नतनएल बोली, “क्यों, फिलिप्पुस, वह तो बाहर बागान में गया हुआ है। वह उसका मित्र था। वह वहाँ बाहर गया, और वह वहाँ पर अपने घुटनों पर होकर दुआ कर रहा था। ज्यों ही वह अपने घुटनों पर से ऊपर उठा, त्यों ही फिलिप्पुस बोला, ”आ, देख; मैंने किसे पा लिया है; यूसुफ के पुत्र, नाज़रत के यीशु को।“अब, यह धर्मी, बड़े रुतबे वाला पुरुष बोला, “क्या नाजरत से कोई भली वस्तु निकल सकती है?” उसने उसे एक अच्छी टिप्पणी कही, उसने उसे एक अच्छी बात कही, वह बोला, ”घर पर ही मत रुका रह, और इसकी आलोचना मत कर; इसके बारे में यूँ ही बातें मत करता रह। बस आ और खुद ही देख ले। आकर देख ले। बस आकर देख ले, क्या कोई भली वस्तु नासरत से निकल सकती है।क्या तेरा अभिप्राय मसीह से है? क्यों, अगर मसीह आएगा, तो वह नीचे आएगा, और वह …से निकलकर नीचे आएगा….स्वर्ग के गलियारे नीचे उतर आयेंगे; और वह बाहर निकलकर महल में आएगा; वह हमारी सबसे बड़ी संस्था में आएगा। वे ठीक अभी भी ऐसा ही सोचते हैं (समझे आप?) कि उसे तो हमारी ही संस्था में आना चाहिए। वह बोला, “वह ठीक हमारी संस्था में आएगा; और वह वहाँ पर महल की मीनारों पर चलकर नीचे आएगा; और वह बाहरी आँगनों में चलता हुआ आएगा, और चलकर वहाँ तक आएगा जहाँ सिंहासन है, और वह पवित्र अति पवित्र स्थान तक जाएगा, और कहेगा, मैं मसीह हूँ।” मसीह कभी भी इस तरह से नहीं आता है। मसीह तो वहीं आता है जहाँ वह आना चाहता है। वह तो सर्वोच्च है; वह वही करता है जो उसे भाता है।वह बोला, अब…वह बोला, “ठीक है, आ, और देख ले। तू आकर खुद ही देख ले।”बस यहाँ-वहाँ खड़े होकर यह ना कहते फिरो,“ मैं उस जैसे हॉली-रोलर झंड़ पर विश्वास नहीं करता हूँ।” बस आकर मालूम करो, कि क्या इसके बारे में कोई बात है।110अतः जब वह मार्ग पर चला जाता था, तो मैं उन्हें बातें करते हुए सुन सकता हूँ। ठीक है, क्या आप सुनना चाहेंगे, कि वे किस बाबत बातें कर रहे थे? आइये हम सुनें और देखें, कि उन्होंने क्या कहा था। आप जानते हैं, मेरा विश्वास है, कि सड़क के किनारे पर जाते हुए फिलिप्पुस बोला, “तुम जानते हो, नतनएल, मैं जानता हूँ, कि तुम बाइबिल के एक ज्ञाता हो; इसलिए मैं तुम से कुछ पूछना चाहता हूँ। हम मसीह का इंतज़ार कर रहे हैं, क्या हम नहीं कर रहे हैं?”“ओह, हाँ, हम इस पीढ़ी के अन्तिम दिनों की ओर अग्रसर होते चले जा रहे हैं; और मेरा यकीन है,ये पीढ़ी मसीह को देखेगी।” अब, सुनिए! ”ओह, लेकिन हम यहाँ पर हैं; हम तो एक राष्ट्र भी नहीं है; हम सब तो लोगों के मध्य में बिखरे हुए हैं। हम कैसे देख सकते हैं? ये सब…”परमेश्वर तो ठीक उसी घड़ी आ जाता है जब आप सोचते भी नहीं हैं। ठीक तभी वह वहाँ पर था।वह बोला, “लेकिन ज़रा रुक; यह मसीह किस प्रकार का मनुष्य होगा?”ओह, “अच्छा, अच्छा, मूसा, हमारे शिक्षक ने हमें बताया था, कि वह एक नबी होगा।”111“मैं तुझे नासरत के इसी यीशु के बारे में बताने जा रहा हूँ। तुझे वह अनपढ़कुबढ़ मछुआरा याद है, जिससे तू ने उस बार मछली खरीदी थी…तू ने उससे खरीदी थी, और वह रसीद पर अपने दस्तख्त भी नहीं कर सकता था, वह तो इतना भी पढ़ा-लिखा नहीं था?”“हाँ, ओह, ओह, हाँ, हू- हू, वह योना का..योना का लड़का है। हाँ, मैंने तो योना से भी खरीदी थी।“ठीक है, अब तू जानता ही क्या है? पतरस वहाँ पर आया…’या बल्कि शिमौन आया था, क्योंकि तब उसका नाम शिमौन था। वह बोला, ”शिमौन उसकी सभा में आया। और ज्यों ही वह चलकर आया…और तुझे याद होगा, कि कैसे शिमौन हमें बताया करता था, कि उसका पिता उसे बताया करता था, ‘धोखे में मत आना, क्योंकि असली मसीह के आने से पहले बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता होंगे। और यह बात तो सच है। बहुत से झूठे संदेश फैलेंगे। परन्तु कहा था, जब असली सन्देश आएगा, तो तुम जान जाओगे; क्योंकि याद रखना, हम यहूदी यह विश्वास करते हैं, कि यह मसीह एक भविष्यद्वक्ता होगा। हम अपने भविष्यद्वक्ताओं पर विश्वास करते हैं।”

112. अब आप यहूदी से ही पूछ लें। ठीक इस समय जब इस्राएली वहाँ पर उस बाइबिल को उठाते हैं, और उसे पढ़ते हैं। वे ईरान में तथा और दूसरे देशों से इस्राएल आ रहे हैं। वे कहते हैं, “अगर यीशु ही मसीह है, तो आओ हम भविष्यद्वक्ता वाला चिन्ह देखें; हम उस पर विश्वास करेंगे। जी हाँ, श्रीमान! वे जानते हैं, कि वे भविष्यद्वक्ता सच्चे हैं।अतः नतनएल ने अवश्य ही कहा हो, “ओह मैं विश्वास करता हूँ, कि मसीह एक भविष्यद्वक्ता होगा; क्योंकि मूसा ने कहा था, प्रभु तुम्हारा परमेश्वर एक नबी उठा खड़ा करेगा।’“ठीक है, जब उसने उस शिमौन को देखा, जिसके बारे में तू बातें कर रहा है, तो उसने कहा था, ‘तेरा नाम शिमौन है, और तू योना का पुत्र है। वह ना केवल उसे ही जानता था, वरन वह तो उसके धर्मी बुजुर्ग फरीसी पिता को भी जानता था।”“ओह, मैं इस बात का विश्वास नहीं कर सकता हूँ। तू तो गूढ़ बात पर ही आगे बढ़ गया है।”वह बोला, “ओह, नहीं; मैं नहीं आगे बढ़ा हूँ। तू आ कर मालूम कर ले। आकर देख ले। आ जा।” और वे मार्ग पर चलते चले गये।113आखिरकार वे वहाँ पर पहुँचे जहाँ पर यीशु था। हो सकता है, कि वह कहीं पर लोगों की भीड़ में खड़ा हुआ हो। यीशु वहाँ पर खड़ा हुआ चारों ओर दृष्टि डाल रहा हो, और जब कुछ देर वह दृष्टि डाल चुका, तो उसके बाद उसने नतनएल को वहाँ पर खड़ा हुआ देखा; और वह बोला, “देखो, वह एक इस्राएली है, उसमें कोई कपट नहीं है।” अब इसने ही उसमें से सारा अभिमान निकाल बाहर कर दिया था। इस ने ही उन पालों में से हवा बाहर निकाल दी थी। ”देखो वह एक इस्राएली है; उसमें कोई कपट नहीं है।”वह बोला, “वह तो परमेश्वर है। हे रब्बी, (जिसका अर्थ होता है, गुरू) हे रब्बी, तू ने मुझे कब जाना? मैंने तो इससे पहले तुझ से कभी मुलाकात नहीं की है; मैं तो इस मंड़ली में एक अजनबी हूँ। मैं तो इससे पहले यहाँ पर कभी आया भी नहीं हूँ। तू ने मुझे कैसे कभी जाना?”यीशु ने कहा, “इससे पहले कि फिलिप्पुस बुलाता, जब तू पेड़ के तले था, तो मैंने तुझे देखा।”ऐसा बीते हुए कल का यीशु था। क्या यह सही है? अगर वह एक सा है; तो वह आज भी एक सा ही है। आइये हम किसी और कौम के लोग को लें। एक ऐसी कौम के लोग थे…114केवल तीन ही कौम के लोग थे; और वे थे हाम, शेम और जापेत के लोग। समझे? यह बिलकुल ठीक बात है। यही है वह जहाँ पिन्तेकुस्त पर सुसमाचार पहुँचा; सबसे पहले सुसमाचार यहूदियों के पास पहुँचा; इसके बाद सुसमाचार सामरियों के पास पहुँचा, और उसके बाद अन्यजातियों के पास पहुँचा। समझे? हाम, शेम और जापेत के लोग ही तीन कौम हैं। अब, दो कौमें मसीह की बाट जोह रही थीं, हम अन्यजाति उसकी बाट नहीं जोह रहे थे; हमारी पीठ पर तो जुआ रखा हुआ था; हम तो बुतपरस्त थे; हम तो मूर्तियों की पूजा कर रहे थे; परन्तु हाम और शेम नहीं।अब देखिए, अब एक और थी; एक और कौम थी जो कि सामरी थी; जो वे आधे तो यहूदी थे और आधे अन्यजाति थे; और ऐसा कोराह के विवाह के पाप के कारण ही हुआ था; और वे अलग निकल गये थे। और वे परमेश्वर पर विश्वास करते थे; और वे मसीह की प्रतीक्षा कर रहे थे। अतः यीशु ने जाकर खुद अपने आप को उनके सम्मुख प्रस्तुत किया। वह यहूदियों के पास आया; वह अपनों के पास आया; परन्तु उसे अवश्य ही सामरिया के पास से होकर जाना था। क्या कभी आपने संत यूहन्ना का चौथा अध्याय पढ़ा है? अतः उसे सामिरया से होकर जाना अवश्य था। अतः वह सिन्नार नामक नगर में आया, और उसने चेलों को कुछ भोजन-वस्तु लेने के लिए भेज दिया था। और जबकि वे चले गये थे…115अगर आप कभी वहाँ पर गये हो, तो आप जानते होंगे, कि वहाँ पर एक एक ऐसा कुंआ था जो सब लोगों के लिए था; वहाँ पर पानी के लिए वैसा ही कुआ था, जैसा कि शहर में कोई पम्प लगता होता है। आप जानते हैं, कि स्त्रियाँ वहाँ पर काँटा लगी अपनी अपनी रस्सी और बाल्टी लेकर आती थीं और उससे बाल्टी को कुंए में डालकर पानी निकालती थीं और बाल्टी को अपने सिर पर रखकर ले जाती थीं। और अब बदनाम स्त्रियों के साथ, बुरी स्त्रियों के साथ उनका कोई मेलजोल नहीं था; वे भली स्त्रियों के संग नहीं आ सकती थीं। उन दिनों में उनका आपस में कोई मेलजोल नहीं था। एक स्त्री बुरी थी; वह अपनी ही सौबत में अलग अकेली रहती थी। आज ऐसा नहीं है; आज तो वे सारी की सारी एक साथ ही रहती हैं; लेकिन वे तो बस…लेकिन…116अतः यह बदनाम स्त्री वहाँ पर लगभग साढ़े ग्यारह, या पौने बारह बजे, या दिन के लगभग इतने ही समय आयी; वह वहाँ पर चलती हुई एक बाल्टी भर पानी लेने के लिए आयी। और उसने रख दी…मैं देख सकता हूँ, कि उसने बाल्टी में पुराना कुंड़ा लगाया और रस्सी बाँधी, और उसे कुँए में गिरने दिया, और बाल्टी पानी से भर गई। और ठीक जिस समय वह उसे ऊपर खींचने लगी थी, लगभग उसी समय उसने किसी को यह कहते हुए सुना, “हे स्त्री, मुझे पानी पिला।” और उसने वहाँ पर दृष्टि डाली, और वहाँ पर एक यहूदी था। अब, उनका एक दूसरे के साथ किसी तरह का कोई व्यवहार नहीं था।वह अधेड़ उम्र का पुरुष था; वह लगभग तीस वर्ष का था। परन्तु बाइबिल कहती है, कि वह पचास साल का सा लगता था; आप यह जानते हैं। वह बोला… 224. “तू कहता है, कि तू ने अब्राहम को देखा, और तू तो एक ऐसा पुरुष है। जो पचास साल से ज्यादा का नहीं है।” वह केवल तीस साल का ही था। समझे? बोला…मेरा अन्दाज़ा है, कि उसकी सेवकाई ने ही उसे इतना ज्यादा दुर्बल और बूढ़ा सा बना दिया था। अतः उसने कहा, ”तू कहता है, कि तू ने अब्राहम को देखा, अब हम जानते हैं, कि तू दुष्टात्मा से ग्रस्त है।”| वह बोला, “इससे पहले कि अब्राहम था, मैं हूँ।” देखिए, वह अब्राहम का परमेश्वर था। यकीनन, वह था। वह बोला, ”इससे पहले कि अब्राहम था, मैं हूँ।” निश्चय ही!117और अब वह वहाँ पर कुँए पर बैठा हुआ था; वह बोला, “हे स्त्री, मुझे पानी पिला।”वह बोली, “यह तो रिवाज नहीं है। हम तो यहाँ पर अगल किये हुए लोग हैं।” यह वैसा ही था जैसे दक्षिण में काले और गोरों के बीच भेदभाव था। समझे? वह बोली, ”हम तो यहाँ पर अलग किये हुए लोग हैं। यह तेरे लिए, एक यहूदी के लिए रिवाज नहीं है, कि तू मुझ सामरी स्त्री से कुछ लाने के लिए या किसी वस्तु को देने के लिए कहे। हमारा एक दूसरे से कोई व्यवहार नहीं है।” आप जानते हैं, कि वह कुछ वेश्या-स्त्री थी, अतः वह शायद एक सुंदर युवती थी। शायद वह वहाँ पर खड़ी हुई थी, शायद उसके चेहरे पर उसकी लटें बिखरी हुई हों, और वह सारी रात भर बाहर रही हो। और—और अतः वह बोली; और वह बोली, “तुम्हारा यह रिवाज नहीं है, कि तू मुझ जैसी सामरी स्त्री से कुछ माँगें।”वह बोला, “स्त्री, अगर तू यह जानती, कि तू किस से बातें कर रही हैं…और अगर तू यह जानती, कि तू किससे बातें कर रही है, तो तू मुझ से जल माँगती।” ऐसा बीते हुए कल का मसीह था। समझे? वह बोला, “तू मुझ से जल माँगती, और मैं तुझे ऐसा जल देता, कि तू पानी खींचने के लिए यहाँ पर ना आती।

118वह बोली, “क्यों, कुँआ गहरा है; और तेरे पास तो पानी खींचने के लिए भी कुछ नहीं है, तो तू कैसे मुझे कोई जल दे सकता है?” बोली, “हमारे पूर्वज याकूब ने…”देखिए, वह एक सामरी थी, मगर वह भी याकूब को अपना पूर्वज कहती थी। हमारे पूर्वज याकूब ने, और उसके घराने ने और उसके मवेशियों ने इसी कुँए से पानी पिया था। और फिर भी तू कहता है, कि तेरे पास इससे भी बढ़कर पानी है?” बोली, ”तुम कहते हो, भजन करना चाहिए; तुम एक यहूदी होने के कारण, कहते हो, कि भजन यरूशलेम में होना चाहिए। हम कहते हैं, कि इस पहाड़ पर होना चाहिए।’वह बोला, “स्त्री, एक ऐसा समय आने वाला है, और वह अब भी है, कि जब सच्चे उपासक परमेश्वर का भजन आत्मा और सच्चाई से करेंगे; क्योंकि परमेश्वर आत्मा है। क्योंकि पिता उनकी खोज में रहता है जो ऐसा करते हैं।” समझे?वह क्या कर रहा था? वह उस स्त्री से उसकी आत्मा से सम्पर्क स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहा था। समझे? अब, याद रखिए, उसे उन सामरियों के सामने मसीह होना था।119और उसने सीधे सीधे ही उसकी परेशानी जान ली। कितने जानते हैं, कि यह परेशानी क्या थी? निश्चय ही! वह अपने छठवें पति के साथ रह रही थी। अतः आप देखिए, यह गलत है, कि जब आपका एक पति जीवता हो, ठीक इसी तरह से इस मामले में तथा और दूसरे मामले में है, और आप बस बाहर निकल जायें और आप किसी कारण से औरत को त्याग दें, और वह किसी से विवाह कर ले, और वह जाकर किसी और से विवाह कर ले; और फिर किसी और से विवाह कर ले; और उसके बाद किसी और से विवाह कर ले। आपको अवश्य ही ऐसा नहीं करना चाहिए। अतः वह बोला, कि…फिर मेरा अनुमान है, कि तब वह उन के साथ बिना विवाह किये ही रह रही थी। हो सकता है, कि उसने उनसे कभी विवाह ही ना किया हो। अतः उसने ये सारी बुरी बातें कहीं; आप जानते हैं, कि उसने ये सारे बुरे काम किये थे। अतः जबकि तब वह वहाँ पर खड़ा हुआ उस पर इस प्रकार से दृष्टि डाल रहा था, तो वह उससे बोला, “जा, मेरे पीने के लिए पानी ला।”और वह बोली..वह बोला, ”यदि तू यह जानती, कि तू किससे बातें कर रही है, तो तू मुझ से पीने के लिए जल माँगती; और मैं तुझे ऐसा जल देता जो तुझे लेने के लिए नहीं आना पड़ता…मैं तुझे देता और तुझे पीने के लिए यहाँ पर नहीं आना पड़ता।” इसके बाद वह बोला, “जा, जाकर अपने पति को यहाँ बुला ला।’वह बोली, “श्रीमान, मैं बिना पति के हूँ।”ओह, वह बोला, “तू सही कहती है। तू पाँच पति कर चुकी है, और अब जिसके साथ रह रही है, वह भी तेरा पति नहीं है। इस मामले में तू सही कहती है।”120वह…उस स्त्री पर दृष्टि डालिए। अब, जब…जब यहूदियों ने यीशु को उन कामों को करते हुए देखा था, तो उन्होंने उसे क्या कहा था? क्या उन्होंने उसे मसीह करके पहचाना था? जी नहीं! उन्होंने क्या कहा था, कि वह क्या है? उन्होंने उसे बालजबूल, भावी बतानेहारा कहा, उन्होंने कहा था, कि उसके पास तो बालजबूल की सामर्थ है। और उन्होंने परमेश्वर के आत्मा को जो मन के गुप्त विचारों का प्रकटीकरण कर रहा था, अशुद्ध वस्तु कहा था। और उसने कहा था, तुम मेरे विरूद्ध बोलते हो, मैं तुम्हें क्षमा कर दूंगा; परन्तु पवित्र आत्मा किसी दिन आकर ठीक इन्हीं कामों को करेगा, और अगर तुम एक भी बात उसके विरोध में कहो, तो तुम्हारे लिए यह कदापि क्षमा नहीं किया जाएगा।”अतः आप देखिए, कि आज हम कहाँ पर हैं, अगर आज ठीक ऐसा ही होता है। उसके खिलाफ कहीं गई एक भी बात कदापि क्षमा ना होगी; ना तो इस जगत में ही क्षमा होगी और ना ही आने वाले जगत में। अतः आप देखते हैं, कि इस पीढ़ी ने क्या किया है। अब, ज़रा इसके बारे में सोचिएं; ज़रा ज़ोर डालकर सोचिए; इन पवित्र वचनों को तोल में तोल कर देखिए।अब, यहूदी बोले, “यह पुरुष तो इन कामों को बालजबूल के द्वारा करता है। वह तो शैतान है, वह तो भावी बतानेहारा है।” हम जानते हैं, कि भावी बताने का काम शैतान का ही है। अतः यहूदी बोले, ”यह पुरुष तो भावी बतानेहारा है।”अतः वह उन्हें उसे ”भावी बतानेहारा’ कहने के लिए माफ कर देता है। परन्तु जब वह मर गया और उसके बाद पवित्र आत्मा वापस आता है, तो यह बिलकुल अलग ही बात थी। समझे? और ऐसा…ऐसा अन्यजातियों की पीढ़ी में होता है।121अब ध्यान दीजिए।अब, यहूदी इसे पहले ही देख चुके थे; और उन्होंने इसकी भसना की थी। सामरियों ने इसे ग्रहण किया था, और उस स्त्री ने कहा था, “श्रीमान, मुझे लगता है, कि तू एक भविष्यद्वक्ता है।” सामरियों, तुम इसके बारे में क्या करोगे? वह बोली, ”मुझे लगता है, कि तू एक भविष्यद्वक्ता है। हम जानते हैं, कि जब मसीह आएगा, तो वह हमें ये सारी बातें बता देगा।” देखिए, वे मसीह को जानते थे; वे जानते थे, कि वह कौन होगा। बोली, “हम जानते हैं, कि मसीह जो ख्रीस्त कहलाता है, जब वह आएगा, तो वह हमें ये सारी बातें बताएगा। पर तू कौन है? क्या तू उसका भविष्यद्वक्ता है?”वह बोला मैं वही हूँ। मैं वही हूँ।“और इस पर ही…अब, सुनिए। इस पर ही वह अपना घड़ा छोड़कर नगर की ओर भागी, और आकर सड़कों पर लोगों बताने लगी; वह नगर में से होकर दौड़ती चली जाती थी, और कहती चली जाती थी, “आओ, एक पुरुष को देखो, जिसने मुझे वह सब कुछ बता दिया है जो मैंने किया है। क्या यही तो वह मसीह नहीं है?” और बाइबिल बताती है, कि उस सारे नगर ने उस पर विश्वास किया था, क्योंकि उस स्त्री ने उन्हें वह बताया था, उसने उन लोगों को बताया था, क्योंकि वही मसीह था।अब, अगर यह बीते हुए कल के मसीह का चिन्ह था; और वह कल, आज, और युगानुयुग एक सा है; तो ठीक वही चिन्ह आज भी होगा। क्या यह सही है? कितने लोग इस पर सहमत होंगे? निश्चय ही, जी हाँ…ठीक वैसा ही होगा। यह बिलकुल ठीक बात है।अब, क्या यह कोई अलग मनुष्य होगा? जी नहीं। उसने प्रेम किया था; वह रोया था; उसने भोजन खाया था; वह सोया था; वह जंगल में गया था; उसने जाकर मछली पकड़ीं थीं; उसने किसी भी इंसान के जैसे ही काम किये थे। वह एक मनुष्य था(समझे?) परन्तु फिर भी वह अभिषेक पाया हुआ मसीह था।122अब, अब बाइबिल में से हमें यह याद दिलाया जाता है, हमसे पिछली बातों के द्वारा, उन बहुतेरे वचनों के लेखों के द्वारा जिन्हें हम ले सकते हैं और साबित कर सकते हैं, याद दिलाया जाता है, कि बाइबिल दावे के साथ कहती है, कि एक ऐसा दिन होगा जो ना तो रात ही होगी और ना ही दिन होगा; यह तो एक धुंधला सा दिन होगा; संस्थाएं और कलीसियाएं होंगी, और यह उद्धार पाने के लिए काफी होगा; परन्तु साँझ के समय उजियाला होगा। कितनों ने इसे कभी बाइबिल में पढ़ा है? निश्चय ही! समझे?अब, दूसरे शब्दों में यह है, कि सूर्य पूरब में उगता है और पश्चिम में डूबता है। जो सूर्य पूरब में उदय होता है ठीक वही सूर्य पश्चिम में अस्त होता है। ठीक है, जब परमेश्वर का पुत्र, पु-त्र (S-O-N) पूरब में पूरब में रहने वाले लोगों में उदय हुआ…सभ्यता सूर्य के साथ ही परिभ्रमण करती है; इस समय हम पश्चिमी तट पर हैं। यदि हम यहाँ से पार करके जायें, तो हम चीन में चले जाते हैं, हम फिर से पूरब में ही चले जाते हैं। अतः ठीक वैसे ही वह पुत्र..वह मसीह जो पूरब में चमका था, इस समय ठीक उसी पवित्र आत्मा के बपतिस्मे, ठीक उन्हीं चिन्हों, आश्चर्यकर्मों के द्वारा पश्चिम में चमक रहा है। क्या यह सही है? “साँझ के समय उजियाला होगा, तुम्हें महिमा का पथ अवश्य ही मिलेगा।”यह सच है।123हम साँझ के समय में हैं—हम साँझ के उजियाले के समय में हैं। सूर्य अस्त होता चला जा रहा है। मसीह हमारे मध्य में है। परमेश्वर का पुत्र पवित्र आत्मा के रूप में हमारे मध्य में हैं। क्या आप इसका विश्वास करते हैं? (सभा कहती है, “आमीन’ -सम्पा.) क्या आप मुझ पर विश्वास करते हैं, कि मैं उसका दास हूँ? क्या आप विश्वास करते हैं, कि जो मैं आपको बता रहा हूँ, वह सत्य है? क्या आप स्वर्गदूत की उस गाथा पर विश्वास करते हैं, जो मैंने आपको कल सुबह, परसो सुबह बतायी थी? क्या आप इसका विश्वास करते हैं? यह होने पाये, कि स्वर्ग का परमेश्वर, वही परमेश्वर जो मुझे मेघधनुष के रूप में दिखाई दिया था, बातें करें। और होने पाये, कि मेरी देह, मेरा प्राण, मेरी आत्मा, और मेरा दिमाग उसी की महिमा के लिए उसी को समर्पित हो।जब मैं उस आखिरी गिलहरी का इन्तज़ार कर रहा था, तो मैं यह जानता था, कि यह आखिरी वाली होगी, क्योंकि तब दस बजने में ठीक तीन मिनट थे; और मैं यह कह ही चुका था, कि वह दस बजे तक होगी। आप जानते हैं, कि उसने कहा था, ”तू चाहे जो कुछ भी कहें, वह वैसे ही हो जाएगा।” वह अभी तक कदापि असफल नहीं हुआ है। चाहे यह जो कुछ है…तू जो चाहे वह कह आठवीं बार ऐसा ही उस छोटी स्त्री पर किया गया था। मैं सोचता हूँ, कि इस समय वह वहाँ पीछे बैठी हुई है। मैं देखता हूँ, कि भाई राइट यहाँ पर बैठे हुए है। हैट्टी राइट..इस समय वह ठीक वहाँ पर बैठी हुई है…जब उसने अपने उन दो लड़कों का उद्धार माँगा था जो इसके कट्टर विरोधी थे। मैं कहा था, “मैं यीशु के नाम में तुम्हें तुम्हारे बच्चे देता हूँ।” वे ठीक उसकी गोद पर आ गिरे थे।124एड डॉल्टन, जो कि एक बैपटिस्ट है, वह कैन्टकी से आकर यहाँ पर बैठा हुआ है; वह ठीक यहाँ पर बैठा हुआ है। एड, आपके कितने बच्चे हैं? बारह बच्चे। वह ठीक इस समय यहाँ पर खड़ा हुआ है; उसने अपने बच्चे माँगे थे। मैं भवन में से बाहर निकलकर गया। यहाँ पर मेरे पास एड आता है; मैं बोला, “एड।”पवित्र आत्मा मुझ पर था; बोला, “उसे यह दो। उसे दो।’मैं बोला, “मैं तुम्हें तुम्हारे बच्चे देता हूँ।” उन में से हर एक ने बपतिस्मा लिया और उद्धार पाया। उसका किशोर बच्चा घर पर बैठा हुआ बाट जोह रहा था और परमेश्वर की दुहाई दे रहा था, और उसने तभी उद्धार पा लिया था जब वह यहाँ पर था। वह बैपटिस्ट भाई जो…ओह, ओह, यह क्या ही शानदार बात होती है जब परमेश्वर बोलता है।अब मैं उस से यह माँग रहा हूँ, कि वह अपनी ही महिमा के लिए खुद अपने आप को ज़ाहिर करे, कि वही मसीह है, और जो मैं बोल रहा हूँ, वह सत्य125अब, शायद अविश्वासी के लिए बचने की कोई गुंजाइश ना हो। मैं उन लोगों से जो यहाँ पर हैं, और बीमार और जरूरतमंद हैं, जिन्हें परमेश्वर की जरूरत है; वे जिन्हें मैं नहीं जानता हूँ; आप जो अजनबी हमारे फाटकों में हैं, वे लोग जिन्हें मैं नहीं जानता हूँ, और वे यहाँ पर जरूरत में हैं, और उन्हें परमेश्वर की जरूरत है, आप अपने हाथ ऊपर उठायें। लोग जो सभी जगह हैं, वे…बिलकुल ठीक है, मैं सोचता हूँ, कि सभी जगह समान्य ऐसा ही है। वे लोग जिन्हें मैं नहीं जानता हैं, अगर मैं किसी ऐसे को बुलाता हूँ, जिसे मैं जानता हूँ,…जिसे—जिसे मैं जानता हैं, और आप भी मुझे जानते हैं, और हम एक दूसरे से भली-भाँति परिचित हैं, तो आप बिलकुल भी कुछ ना बोलें, आप बस खामोश रहें। अगर वह परमेश्वर का पुत्र है, जो कि वह है ही, और मेरा सन्देश सच्चा है, और वह दूत…126जब दस बजने में तीन मिनट रह गये, तो मैं बोला, “हे परमेश्वर, तू जो मुझे थोड़ी देर पहले ही उस मेघधनुष में दिखाई दिया, तीन मिनट बाकी हैं। मैं कोई गिलहरी नहीं देखता हूँ। तीन मिनट बाकी रहे हैं। तू ही मेरे लिए एक लेकर आयेगा।” और परमेश्वर ही मेरा न्यायी है, मैं यह बात पुनीत रीति से अपने हाथ में बाइबिल लिये हुए कहता हूँ। मैं किसी तरह की फुरफुराहट में विश्वास नहीं करता हूँ; बाइबिल इसके बारे में नहीं कहती है। यह तो ऐसा करने के लिए नहीं कहती है। लेकिन खुदा ही मेरा न्यायी है; एक गिलहरी पेड़ से नीचे दौड़ती हुई आयी और बिलकुल ठीक ठीक वैसे ही बैठ गई। वह ऐसा करने में कदापि असफल नहीं हुआ है; वह कदापि असफल नहीं हुआ है। उन में से बहतेरे यहाँ पर उन बातों को जानने के लिए मौजूद हैं। मैं जानता हूँ, कि ठीक वही परमेश्वर यहाँ पर हैं।127प्रार्थना कार्ड बोंटें जा चुके हैं। मुझे उनकी जरूरत नहीं है। हम उनके लिए कुछ ही मिनटों में दुआ करेंगे; वे एक कतार में ऊपर आयेंगे। मुझे तो उन लोगों की ही जरूरत है जो यहाँ पर हैं, या कहीं पर भी हैं।मैं चाहता हूँ, कि अजनबी आयें। मैं उन लोगों को लेना चाहता हूँ, जो मुझे नहीं जानते हैं। मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आप अपनी समझ को धारण कर लें; मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आप विचार-ममन करते रहे और प्रार्थना करते रहें, और कहते रहे, “खुदा, वह पुरुष मुझे नहीं जानता है।”128और एक दिन भीड़ में से होकर एक कम उम्र स्त्री गुज़री थी। उसे लोहू बहने का रोग था। और वह कहती थी…।जब कि वे सब ये कह रहे थे, “यहाँ उसे देखो। उस पर दृष्टि डालो। वहाँ वो गलीली है।” और वे उसके बारे में ऐसी ही और दूसरी बात कर रहे थे। वे सारे रब्बी तथा ऐसे ही और दूसरे लोग वहाँ पर खड़े हुए कह रहे थे, ”हे रब्बी, हम तुझ से एक चिन्ह माँग रहे हैं। और वे ऐसी ही और दूसरी बातें कह रहे थे।कम उम्र वाली यह स्त्री कहती थी, “मैं उस पर विश्वास करती हूँ, कि वह परमेश्वर का पुत्र है। और मैं विश्वास करती हूँ, अगर मैं उसके वस्त्र का कोना भी छू लँगी, तो मैं चंगी हो जाऊँगी।” कितने लोग यह जानते हैं? उस स्त्री ने उसे ऐसे छुआ था, कि उसे इसके बारे में महसूस भी ना होने पाये;लेकिन वह रुका और पीछे मुड़ा, और बोला, “किसी ने मुझे छुआ है? किसी ने मुझे छुआ है?” हर कोई बिलकुल खामोश था। वह बोला, ”किसी ने मुझे छुआ है। किस ने तो मुझे छुआ है।?“ बोला, ”किस ने मुझे छुआ है?”और वह चारों ओर तब तक दृष्टि डालता रहा, जब तक कि उसने उस कम उम्र स्त्री को ढूंढ ना निकाला। वह अपने आपको छिपा ना सकी थी। ढूंढ ना सकी थी…उसने उसे ढूँढ़ ही लिया था, और वह उससे बोला, “तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है।” उसने उसे बताया, कि उसका लोहू बहने का रोग चंगा हो गया है—उसे उससे छीन लिया गया था; क्योंकि वह विश्वास करती थी, और उसके विश्वास ने ही उसके वस्त्र को छुआ था। क्या आप इसका विश्वास करते हैं? यह बिलकुल सच है।129अब, क्या वह महायाजक है, जो परमेश्वर के दाहिने बैठकर हमारे पापों के अंगीकार पर मध्यस्थता कर रहा है?क्या बाइबिल कहती है, कि वह महायाजक है, जिसे हम अपनी दुर्बलताओं की भावनाओं सहित छू सकते हैं? क्या यह सच है? यह बिलकुल सच है, अगर आप बीमार हैं, तो आप दुआ करना शुरू कर दें, और कहें, “प्रभु परमेश्वर, मैंने तो बस अभी हाल में एक सन्देश सुना है। मैं…मैं इस पुरुष को नहीं जानता हूँ। मैं…मैं तो यहाँ इस टेबरनिकल में हूँ। मैं यहाँ नहीं आता हूँ; यह मेरा अपना गिरजाघर नहीं है। मैं तो कहीं और से आया हूँ। मैं तो इस शहर से बाहर किसी शहर से आया हूँ। मैं तो यहाँ पर कहीं और से आया हूँ। मैं इस पुरुष को नहीं जानता हूँ। परन्तु उसने इसे ऐसा बनाया है, कि ऐसा लगता है, कि उसने यह बात इतनी सकारात्मक बना दी है, कि ये आप ही हैं, और वह आप कहता है, कि आप ने ही उस पर दृष्टिगोचर होकर बताया, कि उसका सन्देश सही है, और उसने बताया है, कि आप इन कामों को कैसे करते हैं। अब, मैं इस पुरुष को नहीं जानता हूँ; लेकिन मैं आपको जानता हूँ। अतः यदि इसने खुद कोआपको समर्पित किया हुआ है, और अगर आप ही उसकी देह को अपने निज वचनों को उस के माध्यम से बोलने के लिए उपयोग कर रहे हैं, तो यह हो, कि वही मुझ से बोले। प्रभु, होने पाये, कि मैं आपका वस्त्र छू लँ।” और आप देखिए, कि वह ऐसा करता है, या नहीं; देखिए, कि क्या वही परमेश्वर है।130अगर वह अभी भी ठीक वही परमेश्वर है, तो वह ठीक उन्हीं बातों को बोलने के लिए जो उसे बोलनी होगी, मेरे होंठों का इस्तेमाल कर सकता है, क्योंकि उसके पास कोई और होंठ नहीं, वरन मेरे और आपके ही होंठ हैं। उसके पास कोई आँखें नहीं हैं, वरन मेरी और आपकी ही आँखें हैं। अतः वह तो बस नीचे आ जाता है, और अपनी कलीसिया में हमारी देह के ज़रिये काम करता है..(क्या आप इसका विश्वास करते हैं?)…वह खुद ही इसी रीति से काम करता है। यही बात है जो उसने कही थी, “ये काम जो मैं करता हूँ, उन्हें तुम भी करोगे।” क्या यह सही है? ”ठीक उन्हीं कामों को तुम भी करोगे…” वे काम जो उसने किये उसने उन्हें यह साबित करने के लिए किया, कि वही मसीह था। अब, अगर वही मसीह है, जो कि वह है ही, तो फिर इसको सच्चा होना है; तो वह ठीक इस समय ठीक उन्हीं कामों को अपनी कलीसिया के द्वारा करता है जो उसने तब किये थे। यही ये साबित करता है, कि यह सच है; चाहे आपकी सारी नामधारी कलीसियाएं कुछ भी क्यों ना कहती हों। ओह, हाल्लिलूय्याह!131बुजुर्ग भाई किड और बहन किड ठीक यहीं पर बैठे हुए हैं, वे दोनों ही अस्सी साल के हैं; वे तो मेरे पैदा होने से भी पहले से प्रचार कर रहे हैं। किसी और सुबह वे लेटे हुए कैंसर से मर रहे थे; लगभग दो साल पहले उनका गढूद काट कर अलग कर दिया गया था; वे ओहियो में रहते हैं; और वे मेरे एक परम मित्रों में से एक हैं। बहन किड ने फोन करके मुझ से कहा, “बिली, बेहतर होगा, कि तुम जल्दी करो। वो मर रहे हैं, वो ठीक इस समय दम तोड़ते चले जा रहे हैं।” और मैं और बिली वहाँ पर पहुँचने के लिए अपनी उस पुरानी सेकंड़ हैंड़ कार को अति तेज़ गति से चलकर जला ही डालते।जब मैं वहाँ कमरे में पहुँचा…ज्यों ही मैं वहाँ पर पहुँचा, पवित्र आत्मा बोला, यहोवा यूँ फरमाता है।वहाँ पर वो परमेश्वर की महिमा के गवाह के रूप में खड़े हुए हैं, हालांकि डॉक्टरों ने तो उनकी पूरी तरह से चीर-फाड कर डाली थी। ऐसा है…वह परमेश्वर है। क्या मैं ऐसा कर सकता था? जी नहीं, श्रीमान! मेरी बातें तो किसी भी इंसान की बातों के जैसी ही हैं। परन्तु वह तो यहोवा यूँ फरमाता है, वाला वचन था। आमीन!132वर्षों पहले सुदूर कैन्टकी के पर्वतों में एक छोटा पुराना “चर्च ऑफ गॉड’ का गिरजाघर था, या उन में से कुछ लोग थे जो पहाड़ के छोरों पर ऊपर और नीचे सामान उठाये फिरते थे; बुजुर्ग माँ किड मक्का की फली को पीट-पीट कर मक्का निकाला करती थी, ताकि बच्चों के झुंड़ को भोजन खिलाये; और टब पर कपड़े इत्यादि धोती थीं, ताकि अपने पति को बाहर प्रचार-कार्य के क्षेत्रों में भेज सके;और यहाँ पर वे अपनी अस्सी साल वाली उम्र में हैं; और वे आज यहाँ पर बैठे हुए यीशु मसीह के सुसमाचार का आनन्द ले रहे हैं; और रविवार की सुबह यहाँ पर पहुँचने के लिए एक सौ मील या उससे भी ज्यादा मोटरगाड़ी चला कर आ रहे हैं, वे उस हर एक रविवार को जब मैं यहाँ पर प्रचार करता हूँ, आ जाते हैं; और अगर वे इसके बारे में सुन लेते हैं, तो वे आ जाते हैं। यकीनन, हम उन के पास न्यौता भेजते हैं, अगर वे आना चाहते हैं। परमेश्वर उनके बुजुर्ग दिलों को बरकत दे। यह सच बात है। यहाँ पर जो लोग हैं, मैं उन से यह चाहता हूँ, कि आप से से हर कोई इस सुबह उन से हाथ मिलाये और उन्हें आशीष दे, अगर आप ऐसा कर सकते हैं।133अब, दुआ करें। ओह, मैं यह जानकर बहुत ही खुश हूँ, कि वह परमेश्वर है। क्या ही अनुभूति है! आप कहते होंगे, ”भाई ब्रन्हम, आप किस लिए मंच तैयार कर रहे हैं?” मैं उसी का इन्तज़ार कर रहा हूँ। यह है एक…मैं प्रचार कर चुका हूँ; यह एक अलग अभिषेक है।और अगर वही आ जाएगा और इसे करेगा, तो यहाँ पर जो बीमार हैं, आप में से कितने उसे अपने चंगा करनेहारे के रूप में ग्रहण करेंगे? आप बस अपने हाथ ऊपर उठायें, वे सब जो बीमार लोग हैं; अगर वही…अगर वही इसे करेगा। वे हर कोई जो बीमार है और देख सकते हैं, कि वही मसीह है, अपने हाथ ऊपर उठायें। मसीह ही लोगों के मध्य में बोल रहा है।134दुआ करें, विश्वास करें।जो भवन के इस ओर हैं, मैं उन्हें पवित्र काम के लिए अलग करूँगा…मेरे पास बहुत सी प्रार्थना-विनती हैं, जो अभिषेक के लिए अनुनय करते हैं। देखिएगा, कितने ऐसे हैं जिन्होंने उस आग के खम्भे के बारे में सुना है जो वहाँ पर है, जिसकी विज्ञान द्वारा ली गई तस्वीर वॉशिंगटन डी. सी. में टंगी हुई है? आप इसे जानते हैं; उसकी तस्वीर ठीक यहाँ पर है; यह ठीक वही आग का खम्भा है जिसने मूसा की अगुवाई की थी। जबकि विज्ञान ने भी यह कहा था, कि यह किसी दिन दस सेंट वाले स्टोर के ताल्ल पर होगी; यही एक मात्र दिव्य आलौकिक जीव है जिसकी कभी फोटो खींची गई। ठीक वही दूत ठीक इस समय यहाँ प्रचारमंच पर है। मैं इसे कहता हूँ। मैं आपको ललकार कर कहता हूँ, कि आप इसका विश्वास करें। आप जो बाहर वाले हैं, आप विश्वास करें। अब, बस मुझे यह देखना है, कि यह कहाँ जा रहा है। हर कोई भक्तिभाव में रहें। उसकी उपस्थिति में होना, ऐसा भं…135मैं एक पुरुष को देखता हूँ…ये रहा वह; वह मेरी बांयी ओर खड़ा हुआ है; वह यहाँ पर पीछे कोने में है। वह नज़ले की तकलीफ से और पेट की तकलीफ से पीड़ित है। क्या आप अपने सम्पूर्ण ह्रदय से विश्वास करते हैं? आप मेरे लिए एक अज़नबी हैं…ऐसा है…श्रीमान वैल्स, यही आपका नाम है, श्रीमान वैल्स। आप यहाँ से नहीं हैं। आपकी जगह अरूरा इलिनोइस कहलाती है। यह सच है। क्या यह सच है? मैं आपके लिए एक अजनबी हूँ; अगर यह सच है, तो आप अपना हाथ ऊपर उठायें। आप अपने पैरों पर ऊपर खड़े हो जाएं। अब क्या आप विश्वास करते हैं? यदि तू विश्वास कर सके…“अब, वहाँ पर एक व्यक्ति है; मैंने उसे अपने जीवन में कभी नहीं देखा था। वह हमारे मध्य में पूरी तरह से अजनबी है; वह किसी और दूसरे प्रेत से आया हुआ है। और पवित्र आत्मा ने ही…अब, जो कुछ भी उससे कहा गया, मैं तब तक नहीं जानता था, जब तक कि मुझे…यह टेप हो रहा है- यह एक अभिषेक है जो मेरे ऊपर आता है; लेकिन वह इंसान जानता है। जो तुम्हें बताया गया वह सत्य है, श्रीमान, क्या यह सच है? हम अजनबी हैं…वह खुद ही इसकी गवाही दे। किसने ऐसा किया? मसीहा ने, मसीह ने!136यहाँ लोगों के मध्य में ठीक पीछे की तरफ एक महिला बैठी हुई है। क्या उसके ऊपर उस प्रकाश को देखते हैं? वह त्वचा रोग से पीड़ित है। श्रीमती पिटमैन, आप ओसबोरो से हैं। अगर आप अजनबी हैं, तो आप अपना हाथ हिलाएं। क्या वे बातें सच हैं? आप अपना हाथ हिलाएं। परमेश्वर आपको चंगा करता है। मैंने अभी तक इस महिला को कदाचित नहीं देखा है, मैंने तो उसे सिर्फ एक दर्शन में ही देखा है।जिससे आप जान जानें, ठीक आप के दांयी ओर एक महिला है, उसका नाम इलीस, श्रीमती इलीस है; वह एक युवा स्त्री है। उसे स्त्री रोग है। वह भी अजनबी ही है। यदि यह सच है, तो आप अपना हाथ हिलायें। क्या ये आपकी माँ हैं जो वहाँ पर ठीक आपके आगे बैठी हुई हैं? वहाँ पर बैठी हुई वो एक ऐसी महिला हैं जो डर-भय से पीड़ित हैं, उनके ऊपर डर-भय का साया छाया हुआ है। महिला, यदि यह सच है, तो आप अपना हाथ ऊपर उठायें। बिलकुल ठीक है। वह डर-भय जा चुका है। आप घर जा सकती है, और भली-चंगी हो सकती हैं। मैं आपको विश्वास करने के लिए ललकारता हूँ।

137बिलकुल पीछे कोने में एक पुरुष खड़ा हुआ है, वह माइनेसोटा से आया है, उसे पीठ की तकलीफ है; आप का नाम श्रीमान कारसन है। आप अपने पाँव पर खड़े हो जायें। आपकी पीठ की तकलीफ दूर हो चुकी है। यीशु मसीह आपको चंगा करता है।ठीक यहाँ पीछे एक महिला है, वह तकलीफ से परेशान है; वह इस शहर से बाहर की है। वह उस जगह से है, जो “ब्लू आइलैंड़” कहलाती है। उसे ह्रदय रोग है। वह जगह शिकागो के पास है। श्रीमती ब्रैडन? ऊपर खड़ी हो, और अपनी चंगाई ग्रहण करें। आप घर जायें और यीशु मसीह के नाम में भली चंगी हों। क्या आप विश्वास कर रहे हैं?इस भाग के लोगों के बारे में क्या है? क्या आप जानते हैं, कि वह मसीह है? कैसे कोई मनुष्य जानेगा? वे सब लोग जिन्हें बुलाया गया, जहाँ तक है वे ही जानते हैं, कि मैं आपके बारे में कुछ नहीं जानता हूँ, आप अपने हाथों को ऊपर उठायें; वे सब लोग जिन्हें चारों ओर से बुलाया गया है; आप अपने हाथ ऊपर उठाए। क्या वहाँ देखते हैं?138मेरे पीछे जो वे कमरे हैं, वहाँ उन में से एक में मेरे पीछे कोई दुआ कर रहा है; हे युवक, तुम जो सुनहरे बाल वाले हो और अपने चचेरे भाई के लिए जो कानसस में कैंसर से पीड़ित है, दुआ कर रहे हो। तुम आगे बढ़कर द्वार में आ जाओ। परमेश्वर पर विश्वास रखो। क्या तुम विश्वास करते हो?ऐल्मर, इससे तुम्हारा कुछ सम्बंध था। मैं तुम्हारे पिता को वहाँ बैठा हुआ देखता हूँ। यह सच है। उच्च रक्त चाप; यदि तुम विश्वास करो, तो परमेश्वर तुम्हें चंगा करता है। मैं नहीं जानता हूँ। यह सच है; क्या यह नहीं है? आप अपने सम्पूर्ण ह्रदय से विश्वास करें। क्या आप विश्वास करते हैं? क्या आप विश्वास करते हैं, कि यीशु मसीह ही मसीहा है? क्या आप विश्वास करते हैं, कि उसकी उपस्थिति यहाँ पर है?याद रखिए, जब एक स्त्री ने यीशु के वस्त्र को छुआ था, तो वह दुर्बल हो गया था, सामर्थ, अर्थात् शक्ति उस में से निकली थी। अब मैं लगभग क्षीण पड़ गया हूँ। क्या आप विश्वास करते हैं? तो फिर आइये हम कुछ देर के लिए अपने सिरों को झुकाएं।139हे यीशु, परमेश्वर के मसीहा, तू जो सर्वदा निकट है। लोग भली-भाँति जानते हैं, कि तू परमेश्वर का पुत्र है, और तू इस समय यहाँ पर है। तेरे महान चिन्ह और आश्चर्यकर्म साबित हो चुके हैं। पिता, आप लोगों को आशीष दें; मैं प्रार्थना करता हूँ, कि आप उन्हें आशीष दें। होने पाये, कि वे ठीक इसी समय अपने सम्पूर्ण ह्रदय से यह विश्वास कर लें, कि आप ही वो मसीह हैं, जो यहाँ पर खड़े हुए हैं। कोई भी वैसा नहीं कर सकता है; मनुष्य के लिए तो ऐसा करना असम्भव है। मसीह की सामर्थ इस जैसे दीन छोटे आराधनालय में आ जाती है, तो आश्चर्यकर्म देखने को मिलते हैं, क्योंकि, प्रभु, आपने इसका वायदा किया है। क्योंकि यहाँ पर यह आपका अनुग्रह ही है, ताकि हम पर दया करे; क्योंकि ऐसा करने का आपका वायदा है, इसीलिए आपने ही ऐसा किया है। हम देखते हैं, कि आप अपने लोगों को छोड़ते नहीं हैं। 266. अब पिता परमेश्वर, यह होने पाये, कि वे जो प्रार्थना कार्ड लिये हुए प्रार्थनापंक्ति में आ रहे हैं, उनके पास प्रतीति करने के लिए विश्वास हो। हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर, जब उनके ऊपर हाथ रखे जाते हैं, तो यह होने पाये, कि वे यहाँ से आनन्द करते हुए, परमेश्वर की ज़ोर ज़ोर से जयजयकार करते हुए जाये, कि वे चंगे हो गये हैं। प्रभु, यह प्रदान कीजिए। और यह होने पाये, कि जो बच गये हैं, कि वे यह जान लें, कि परमेश्वर के लिए कोई भी बात गुप्त नहीं है। परमेश्वर तो मन की गुप्त बातों को प्रकट करता है; वह उन हर एक विचारों को जानता है जो हमारे मस्तिष्क में हैं। पिता, यह प्रदान कीजिए। हम इसे यीशु मसीह के नाम में माँगते हैं। आमीन!140अब, आप जो सभा के लोगों में हैं, आप लोग जो टेबरनिकल में यहाँवहाँ चारों ओर हैं, आप जो यहाँ चारों ओर हैं और आपके पास प्रार्थना कार्ड हैं, क्या आप विश्वास करते हैं? आप जो यह विश्वास करते हैं, कि मनुष्य ऐसा नहीं कर सकता है, इसे तो परमेश्वर की ओर से ही होना होता है, आप अपने हाथों को ऊपर उठायें। क्या आप विश्वास करते हैं, कि यह परमेश्वर की एक प्रतिज्ञा है, और परमेश्वर ने ही कहा था,

कि वही ऐसा करेगा? बिलकुल ठीक है। तब तो आप जानते हैं, कि मनुष्यों से बढ़कर ही कोई यहाँ पर है।मैं तो पुनीत रीति से ही इस वचन को परमेश्वर के सम्मुख लेकर जाता हूँ। वे लोग जिनसे बातें की गईं, वे जो कोई भी थे, मैं उन्हें नहीं जानता हूँ, और वे भी मुझे नहीं जानते हैं। वे तो वो अजनबी हैं, जो बस यहाँ इस टेबरनिकल में कहीं से आ गए।टेबरनिकल में जो लोग हैं, मैं उन में से कुछ के बारे में दर्शन देखता हूँ; लेकिन उन्हें अकेला छोड़ दें; उन्हें बस अकेला छोड़ दें। वे जिन्हें बुलाया गया था, आप चाहे जो कोई भी थे, आप अपना हाथ ऊपर उठायें, ताकि दूसरे लोग यह देख लें, कि आप अजनबी हैं। समझे? उन में से हर कोई अजनबी है; वे सब अजनबी हैं।141कोई चीज है, जो मुझे घुमाये चले जा रही है। मैं एक अश्वेत स्त्री को सारे समय अपने सामने दृष्टिगोचर होते हुए देखता हूँ; उसे गठिया रोग और उच्च रक्तचाप है। जी हाँ, आप हमारे बीच में एक अजनबी हैं। आप मैम्फिस से आयी हैं। श्रीमती साल्स; यही आपका नाम है। आप यहाँ पर पहली बार आयी हैं। क्या आप खुदा पर अपने सम्पूर्ण ह्रदय से विश्वास करती हैं? तब तो आप घर जा सकती है, और उद्धार पा सकती है, और भली-चंगी हो सकती हैं। परमेश्वर ही इसे ले लेता है….के लिए…हर कोई अपने सम्पूर्ण ह्रदय से विश्वास करे। अब, हर कोई अपने हाथों को ऊपर उठायें; अपने सम्पूर्ण ह्रदय से विश्वास करे। एक दूसरे के ऊपर अपने हाथ रखे। यहाँ आइये; भाई नेविल, यहाँ आइये। प्रार्थना अर्पित कीजिए। जबकि हमने अपने सिरों को झुकाया हुआ है, भाई नेविल दुआ करेंगे।

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