William Marrion Branham Messages Books in Hindi –

William Marrion Branham Messages Books in Hindi

The Pergamean Church Age

पिरगमुन कलीसियायी काल

जैफरसनविले, इन्डियाना यू. एस. ए.

60-1207

बिलकुल ठीक है! अब जहाँ तक मेरा मामला है, बेहतर यही होगा, कि इसे बुझा दिया जाये। यह बिलकुल ठीक है। आज रात्रि हम फिर से प्रभु की सेवा में उपस्थित होने के लिए बहुत अधिक आनन्दित हैं। और गत रात्रि को मैंने सचमुच में यह अनुभव किया था कि, सहस्राब्दि आ गयी है। और इस कारण हमें कुछ प्रश्न मिलें; मेरा मानना है कि यहाँ पर कुछ प्रश्न हैं, और मैं उन्हें अपनी जेब में डाल लँगा, जिससे मैं… मैं सोचता हूँ, कि यह एक प्रार्थना-विनती है, जो इस पर की जानी है। और हम—-

और मैं इसका अच्छे से अच्छा उत्तर दूंगा जो मैं — मैं दे सकता हूँ।2कहिए, क्या आप डॉक को बता देंगे, कि क्या वे इस प्रकाश पुंज को जो ठीक यहाँ पर मेरे ऊपर जल रहा है बुझा देंगे, जिससे मैं इस प्रकाश पुंज के नीचे न रहूँ। आप जानते हैं, कि मैं इन लोक-प्रसिद्ध प्रचारकों में से नहीं हूँ। अतः अब मैं सोचता हूँ, कि इसके बिना ही उचित रहेगा। पिछली बार—- डॉक, मैने इसके लिए कहा था। मैं उसी बात को फिर से दोहरा रहा हूँ, मैं —- मैं इसे फिर से दोहरा रहा हूँ। समझे आप? ओह, ओह! रूकिये। क्या आप को वहाँ जाकर इसे उठाना है, और उस पर काम करना है? ओह, ठीक है, उसे वैसा ही छोड़ दो; जी हाँ, ठीक है, उसे वैसा ही रहने दो। ओह, नहीं; अब आप उसे गिरा न देना। अब, मुझे वह ठीक लगता है। कभी कभी —

और आप जानते हैं कि मुझे यह बात पसन्द नहीं है, कि ठीक आप के चेहरे पर प्रकाश चमके। और इसे तो इधर नीचे ऐसे चमकना चाहिए, कि आप भली-भाँति दृष्टि डाल सकें। धन्यवाद ! श्रीमान, उसे उसका मूल्य देना होगा।3आप जानते हैं, कि आप इन कलीसियायी कालों का समापन नहीं कर सकते हैं। और आज जब मैं इस वाले कलीसियायी काल का अध् ययन कर रहा था, तो मैंने अपनी पत्नी से कहा था— मैंने कहा था, “ओह, मेरे पास तो इसी एक पर ही इतने अधिक मूलपाठ हैं कि इन पर पच्चास से भी अधिक संदेशों का प्रचार कर डालूं। ”समझे? और वे बस—- ऐसा करने का कोई तरीका नहीं है; परन्तु हम मुख्य मुख्य बातों को ही लेते हैं; और हो सकता है, कि जब हम इस पर पुस्तक लिखें, तो हम इसमें और बातों को डालने का प्रयास करेंगे।4भाई, मैंने आपको यहाँ पर नहीं देखा! भाई वेस्ट, आप कैसे हैं? मैंने अभी हाल ही में एक खुश खबरी सुनी थी; कि भाई डोल्टन के घराने का अन्तिम जन — कोई दूसरी लड़की— दूसरा लड़का अन्दर आया है। वह दसवां न है; क्या ऐसा ही है? नौवां ! आप स्मरण रखिएगा,

कि यह मेरी नई सेवकाई के अन्र्तगत तब हुआ था जब प्रभु ने उसे बताया था, कि उसका घराना उद्धार पायेगा। मैं उनके लिए प्रार्थना कर रहा था, और मैं खडा हुआ, और मैं नहीं जानता था, कि क्या कहूँगा, और पवित्र आत्मा बोला, ‘मैं तुम्हें तुम्हारा घराना देता हूँ।’ देखा? और— और उनमें से हर एक के साथ ऐसा ही हुआ है। क्या आपने देखा, कि प्रभु कैसे काम करता है? देखिए, उसके वचन सिद्ध हैं, वे कदापि कदाचित विफल नहीं होते हैं।ठीक है, अब हम दिव्य चंगाई वाले भाग में नहीं जाना चाहते हैं, हम तो जितना हो सके इस भाग पर— भविष्यवाणी वाले भाग पर रूके रहने का यत्न कर रहे हैं।5अब, आज रात्रि मैं बस बातचीत करने ही जा रहा हूँ, और यदि मैं ऐसा कर सकता हूँ, तो हम इस महान कलीशियायी काल के—इस दूसरे काल के— इस तीसरे काल के ऐतिहासिक अंशों का अध्ययन करेंगे, जिसका आज रात्रि हम अध्ययन करने जा रहे हैं। क्या हम इसका आनन्द ले रहे हैं?अब मैं बस इससे भरा हुआ हूँ। मैं बस यह सोचता हूँ, कि यह कैसी अद्भुत बात है, कि प्रभु यीशु ने हमें कैसा आशीषित किया है और हमें ये बातें प्रदान की हैं, और हम इसके लिए अपने सम्पूर्ण हृदय से सराहना करते हैं; कि वह समय से पहले ही हमें उन बातों से अवगत करा रहा है जो भविष्य में घटित होनी हैं।

वह आरम्भ से लेकर अन्त तक जानता है; और हम इस बात के लिए आनन्दित हैं। अतः हम प्रभु पर भरोसा कर रहे हैं कि वह हमें आशीष देगा।6और क्या आपने पिछली रात्रि को ध्यान दिया था, कि पवित्र आत्मा ने सभा की समाप्ति पर हमें बिलकुल ठीक ठीक सन्देश और तीन प्राण दिये थे। और जब आत्मा बोल रहा था, तो अन्तिम अनुवाद पर इस बात को फिर से कहा गया था, जो आत्मा कलीसियाओं से कहता है— या ‘ जिसके कान हों, वह सुन ले, कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।’ और— बस आत्मा इसे कलीसिया के वरदानों के माध्यम से कह रहा है.ओह, अब होने पाये कलीसिया इसे भक्तिभाव से थामे रहे (समझे?) इसे भक्तिभाव से पकड़े रहे। सावधान रहें। शैतान आपके पास आयेगा, वह आपको इस इस पर बहुत ही गहरी खाई में भटका देने का यत्न करेगा। इस बात में सुनिश्चित रहें, कि यह प्रत्येक बार पवित्र आत्मा ही है जो बोलता है। और यदि यह पवित्र आत्मा ही है, तो वह प्रत्यक्ष रूप से किसी उस बात को ही बोलेगा जो घटित हो रही है। यह तो कलीसिया की उन्नति के लिए ही होता है। समझे? और यदि आप उनके प्रति श्रद्धालु बने रहते हैं, तो परमेश्वर आपको और अधिक देगा। देखिए, वह उसमें बढ़ोत्तरी और बढ़ोत्तरी किये चला जाता है। और जैसे….

7अब देखिए, कोई फोन करके पूछ रहा है- लोग आज फोन करके पूछ रहे हैं, कि चंगााई की सभा कब होगी। अब, जैसे ही अगले रविवार को ज्यों ही ये सभाएं समाप्त हो जायेंगी त्यों ही मैं अपने गले को एक प्रकार से थोडा सा आराम देने के लिए कुछ दिनों के लिए दूर चला जाऊँगा; और यदि प्रभु ने चाहा, तो आगामी रविवार को, आगामी रविवार की सुबह हम एक प्रार्थना सभा करेंगे। वह होगी—-मैं नहीं जानता हूँ, कि वह दिनाँक क्या होगा; परन्तु यह— से एक सप्ताह होगी- यह रविवार प्रातः १८ तारीख को होगी। भाई नेविल क्या यह बिलकुल ठीक रहेगा? (भाई नेविल उत्तर देते हैं, जी हाँ, श्रीमान,-सम्पा) १८ तारीख रविवार सुबह बीमारों के लिए प्रार्थना होगी- -और इसमें मुझे अपने पास्टर के विषय में बहुत कुछ कहने का मौका नहीं मिला है, परन्तु मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आप हमारे पास्टर से मुलाकात करने की कोशिश करें। वह निश्चिय ही, मसीह में एक-एक असली भाई है। हम प्रसन्न हैं कि हमारे पास एक ऐसा भाई हैं जो पवित्रता युक्त मैथोडिस्ट पृष्टभूमि में बढा हुआ। और हम सब जानते हैं, कि यहाँ आसपास का प्रत्येक जन ओरमन भाई नेविल को जानता है। कोई भी ऐसा नहीं है जो उनके जीवन पर अंगूली रख सके। मैं उन्हें यह अच्छा नहीं लगता है, कि मैं ऐसी बातें कहूँ, परन्तु अब फिर भी मैं उन्हें गुलाब की एक छोटी सी पुष्प कलिका देंगा बजाये इसके कि मैं उनके चले जाने के बाद उन्हें फूलों का एक भरा पूरा गुलदस्ता दें।

समझे? और अब इसी का ही समय है।8एक रात्रि मैं गिरजे से बाहर निकल कर जा रहा था और किसी ने मुझसे कहा, “हे भाई ब्रन्हम, मैं यकीनन उस उपदेश की सराहना करताऔर मैंने कहा, “आपका धन्यवाद !”और ऐसा उस सेवादार ने कहा जो द्वार पर खड़ा था- – ऐसा यहाँ टेबरनिकल में हुए कई वर्ष हो गये हैं- उसने कहा था, “खैर परमेश्वर आपको आशीष दे, मैं नहीं चाहता हूँ, कि कोई मुझे यह बताये; मैं तो चाहता हूँ कि सारी महिमा परमेश्वर को ही पहुँचे।”मैंने कहा, “खैर, यह उसी को ही पहुँचती है।” देखा? और मैंने कहा, “मैं सचमुच में ऐसा ही पसन्द करता हूँ।” और मैंने कहा, “मुझे तो सत्यनिष्ट बने रहना होता है।”और उसने कहा- – उसने कहा, “ठीक है, परमेश्वर आपको आशीष दे; मुझे यह अच्छा नहीं लगता है, कि लोग ऐसा मेरे विषय में कहें।”मैंने कहा, “आप में और मेरे में बस यही एक अन्तर है: मैं इसके विषय में ईमानदार हूँ और आप नहीं हैं।” कोई भी पसन्द करता है— यदि आप छोटे बच्चे को ही ले, आप उसको थोड़ी सी शाबाशी दें, और वह और भी अच्छा काम करेगा। समझे? – -देखा? और परमेश्वर हमेशा ही ऐसा करता है, परमेश्वर को अपने बच्चों को ऐसा बताना अच्छा लगता है, जबकि वे अच्छा कर रहे होते हैं। और जब वे गलत कर रहे होते हैं, तो उसे इसके बारे में भी उन्हें बताना अच्छा लगता है, तो फिर क्यों नहीं उन्हें बताया जाये जबकि वे सही काम कर रहे होते हैं। समझे?

9अतः मैं परमेश्वर का निश्चिय ही इस बात के लिए धन्यवाद करता हूँ, कि भाई नेविल यहाँ इस टेबरनिकल में इस झुण्ड के पास्टर हैं। और हम ऐसे पुरूष को देख रहे हैं जिसकी पृष्ठभूमि मैथोडिस्ट हैं जो धीमा-क्यों, ऐसा था, कि जैसे गलत स्थान से भोजन वस्तु खाना चाहता हो। अतः- -परन्तु महान पवित्र आत्मा के द्वारा खोज कर ली गयी, और अब उन वरदानों के अन्दर आ रहा है, और पवित्र आत्मा उसका बारम्बार उपयोग कर रहा है, जबकि वह स्वयं अपने मस्तिष्क का उपयोग नहीं करता है। देखिएगा, कि अनुवाद ठीक उसी लय में, और ठीक उसी उतार-चढाव, वैसे ही संज्ञा और सर्वनामों तथा और दूसरी बातों में आता है; और इसका ठीक वैसा ही प्रत्युत्तर आ रहा है।और इस भाई को देखिएगा, मैं नहीं सोचता हूँ, कि वह- – वह जूनियर जैकसन है, ठीक है, मै उसे अभी भी जूनी ही कहता हूँ। मैं परमेश्वर का जूनी जैकसन के लिए धन्यवाद करता हूँ। इस भाई के पास निश्चय ही प्रभु की ओर से एक बहुत बडा वरदान है।10और आप बस हमेशा ही नम्र बने रहें। अब, देखिए, कलीसिया में हर एक के पास करने के लिए कोई न कोई काम है; लेकिन आप कभी भी उसे किसी और दूसरे काम के लिए दर किनारे न करें। यह हो, कि वह शेष कलीसिया के साथ तालमेल में रहे, क्योंकि यह- ये सारे काम परमेश्वर के लिए ही होते हैं। देखा, समझे? हर कोई अन्यान्य भाषा में बोलना नहीं चाहता है, और ना ही हर कोई अनुवाद ही करना चाहता है। आप बस कुछ न कुछ भला करने की ही कोशिश ही करते रहें, और बस भले ही रहें। कोई द्वेष भाव न रखें, कोई मनमुटाव न रखें, और कोई भी कडवाहट न रखें।

इससे कोई मतलब नहीं है कि कोई व्यक्ति कितना बुरा है, और वह आपके विषय में कितनी बुरी बुरी बातें करता है; आप उसके विरूद्ध अपने हृदय में कभी कोई बुराई न सोचें; क्योंकि ठीक तभी शैतान आपके अन्दर आकर- ठीक वहीं पर किसी बात पर काम करने लगता है। आप तो बस उसे ईश्वरीय प्रेम में; अंगीकार से सब तरफ से ढक लें, और सुधार करते रहें, उनके साथ भला करें जो आपके साथ बुरा करते हैं। यीशु ने कहा था, यदि तुम उनके साथ ही भला करते हो जो तुम्हारे साथ भला करते हैं, तो क्या ऐसा सब लोग नहीं करते हैं?’ देखिए, पापी लोग?कोई भी लोग उनके प्रति भले हो सकते हैं, जो उनके प्रति भले हैं। परन्तु आप उनके प्रति भले रहे जो आपके प्रति भले नहीं हैं, उनके लिए कुछ करें जो आपके लिए कुछ नहीं करेंगे हैं। उस व्यक्ति के प्रति भली बात कहें, जो आपके विरूद्ध बुरा ही कहेगा; और आप इस प्रकार से सारी कडवाहट को अपने ह्रदय से बाहर निकालकर रख सकते हैं; और इसके बाद ही आप हर एक के प्रति सदैव ही प्रेम में बने रहते हैं। जब तक आप प्रेम में बने रहते हैं…

11अब, आप कहते हैं, ठीक है, उन्होंने किया था…हम न्यायी नहीं हैं, परमेश्वर ही न्यायी है। और आप यह नहीं चाहेंगे, कि उस बेचारे इन्सान को दूर फेंक दिया जाये, क्या आप ऐसा चाहेंगे? निश्चय ही नहीं, चाहे वे कोई भी क्यों न हों, आप वैसा नहीं चाहेंगे, अतः आप उनके प्रति भले रहने की चेष्टा करें। और प्रेम बहुत से पापों को ढ़ांक लेता है। जी हाँ, श्रीमान! प्रेम, वह जो अच्छा, मसीही प्रेम है जो ईश्वरीय प्रेम है….यदि कोई इन्सान आपके पास आता है, और आपको पवित्र पांखडी तथा सभी प्रकार के नामों से पुकारता है,- -अब देखिए, अब आप वैसा ही व्यवहार न करें। समझे? यदि आप ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते हैं, तो आप वहाँ से चल दें। परन्तु आप अपने हृदय में ऐसा कहने की स्थिति में होने चाहिए, कि ठीक है, अब शायद भाई, यदि आप समझते हैं, कि मैं ऐसा किस तरह से करता हूँ, तो आप भी इसके विषय में वैसा ही अनुभव करेंगे जैसा कि मैं करता हूँ।’ समझे? और आप उसके प्रति मधुर ही बने रहें; लेकिन इस प्रकार से आगे बढ़ते रहें। और हो सकता है, कि हम एक दूसरे से इतने अलग अलग हो जितना कि पूरब से पश्चिम है; लेकिन तब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।12जैसा कि मैंने किसी दूसरी रात्रि को कहा था, मेरा एक भाई है, जोकि एक- – वह एक ऐसा व्यक्ति है जो पुरूष वाले डीलडौल का है। वह मैल्विन है;वह लम्बा है, उसके बाल घने हैं। अब, देखिए, हम दोनों बिलकुल भी एक जैसे नहीं लगते हैं, ऐसा लगता है कि मानो हमारा आपस में बिलकुल भी कोई सम्बन्ध नहीं है। और हमारे स्वाद अलग अलग हैं, और हमारी अभिलाषाएँ अलग अलग हैं; लेकिन फिर भी उसकी माँ मेरी माँ है; उसका पिता मेरा पिता है; वह मेरा भाई है। समझे? क्योंकि हमने एक ही परिवार में ही जन्म लिया था।अब देखिए, हम अलग अलग हैं। मैल्विन एक मसीही नहीं है, और उसे बेसबॉल, घुड़दौड, और इसी प्रकार के और दूसरे कार्य कलाप पसन्द हैं। और मैं – -मैं सोचता हूँ, उसे चॉकलेट पाई पसन्द है,

अतः मैं सुनिश्चित हूँ, कि हम इस मामले में अलग अलग हैं। वैसे मुझे- मुझे घुड़दौड या बेसबॉल पसन्द नहीं है। मुझे तो मछली पकडना और शिकार खेलना ही पसन्द है। देखा? और वह इसके लिए अपने हाथ नहीं फेरेगा, और ना ही मैं उन दूसरे कामों के लिए अपने हाथ फेरूंगा। समझे? अतः फिर -परंतु उसे चॉकलेट पाई पसंद है, और मुझे चैरी पाई पसंद है। अतः फिर भी….13अब, मैं इसका इशारा नहीं दे रहा हूँ। समझे? परंतु….मैंने एक बार कहीं सभा में यह कह दिया था, कि मुझे चॉकलेट पाई पसंद है, और अगली ही रात को मुझे लगभग पाँच चॉकलेट पाई- – या चैरी पाई मिल गयी थी; और मुझे चार या पाँच चैरी पाई मिल गयी थी जिन्हें बहन मेरे लिए पकाकर लेकर आयी थी। हमने अपने कक्ष में बड़ा आनन्द मनाया था। जी हाँ, लेकिन मेरा- मेरा उस प्रकार से तात्पर्य नहीं है। मेरा तात्पर्य तो बस आपको अन्तर दिखाना है। समझे आप?परन्तु इससे कोई मतलब नहीं है कि वह क्या है, मैं उससे प्रेम करता हूँ, वह मेरा भाई है। और वह एक मसीही नहीं है, क्योंकि वह काम-काजों को किसी दूसरे उजियाले में देखता है। मैं कार्य कलापों को मसीह के उजियाले में देखता हूँ, परंतु मैं फिर भी यह नहीं कह सकता हूँ, कि वह मेरा भाई नहीं है; क्योंकि हमने एक ही परिवार में जन्म लिया है।14अब पिछली रात्रि को मैंने एक वक्तव्य दिया था। और अब स्मरण रखिए, कि, पहला संदेश कलीसिया के पास उनके बाद आता है जिनके विषय में आप जानते हैं-जो उसके अलावा थे जो वहाँ नीचे कन्टैकी में मिला था; यह ये था, कि इस सभा में वे भेदभरी बातें होंगी जो बहुतेरों को स्तबध कर डालेंगी। क्या आपको वह स्मरण है? अब यह टेप में है। समझे? पिछली रात को उनमें से एक का खुलासा हुआ था। अत: यह एक प्रकार से मात्र एक सेकंड के लिए ही ठहरा था; मैं सुनिश्चित हूँ, कि आपने इसे भाप लिया था,

क्योंकि यह पवित्रा आत्मा ही था जो इसे लेकर आया था; और यह ऐसा ही होना है : अनन्तकालीन नरक; बाइबिल में ऐसी कोई चीज नहीं है। कोई अनन्तकालीन नरक नहीं है।यदि आपके पास अनन्त… है यदि आप नरक में अनन्त काल के लिए जलते रहते हैं, तो फिर उसमें रहने के लिए आपके पास अनन्त जीवन भी होगा; यदि आप जीवते हैं। और अनन्त जीवन का तो एक ही रुप है, और वह परमेश्वर है। समझे? अतः फिर तो बाइबिल इस बात की शिक्षा नहीं देती है, कि अनन्त नरक है; वह तो यही सिखाती है, कि युगानुयुगी नरक है। हो सकता है, यह समय करोड़ों वर्षों का हो; मैं नहीं जानता हूँ, लेकिन उसे तो मर-मिटना ही है।क्योकि मुझे ही इसे अंदर लेकर आना था, अतः मैंने इसे कलीसियाओं तथा संस्थाओं से तब तक दूर रखा…इसे कहने का दायित्व मेरे ऊपर है। इसके बाद बहुतेरी बातें हैं जिन्हें अंदर कहना मेरे ऊपर है, अतः तब तो हम हर रात्रि उन्हें मालूम करेंगे।15परन्तु अब देखिए, आप इसी रात्रि से ही अपनी आत्मिक समझ धारण करना आरम्भ कर दें; समझे? और यह होने पाये कि पवित्र आत्मा ही आपके अन्दर इसे आत्मसाध कर दे। और उसके बाद यदि आप इसे सुनते हैं, और आप इससे असहमत होते हैं, और बस बाहर चले जाते हैं और कहते हैं, “बेचारा, भाई ब्रन्हम, वह-वह निश्चित रुप से इसे नहीं जानता है। मैं तो उसके लिए प्रार्थना करने जा रहा हूँ।” और जब आप। आप ऐसा करते हैं, तो इसके बाद- – परमेश्वर मुझ पर यह अवगत कर देगा, कि क्या सत्य है, परन्तु आप बस मुझसे सहनुभूति रखें, और मुझे आप ना करना….आप मुझे दर किनारे न करना !

अतः तब हो सकता है, कि वह मेरी बात भी सच ही हो। परन्तु ओह, इस प्रकार से इसे सोचते हुए मेरा एक बहुत अच्छा समय चल रहा है। इसी प्रकार से यह हर एक सिरे को आपस में मिलाता जा रहा है। और मैं- – ओह-मैं-मैं हो सकता है, कि शायद मैं गलत होऊ; परन्तु हो सकता है, कि वहाँ पर कहीं पर कोई कड़ी टूटी हुई रह गयी हो जिसके विषय में मुझे कुछ भी मालूम न हो; लेकिन हो सकता है, कि शायद आपको मालूम हो; और आप प्रार्थना करें, कि प्रभु उसे मुझे दिखाये।और अब आप इन सब बातों से बढकर एक दूसरे के लिए प्रार्थना करें; और आप शैतान को कभी कोई कड़वाहट न दिखाने दें। समझे? आप इस घडी में अपना प्राण शुद्ध रखें हम इस संसार के इतिहास की। समाप्ति की घडियों में रह रहे हैं। समझे? मित्रों, यह बात किसी भी संदेह की छाया से परे है कि हम अन्त के कगार पर हैं।16जैसे जैसे हम इन कलीसियायी कालों का अध्यापन करते चले जायेंगे, हम शीघ्र ही इस बात को देख लेंगे- और हो सकता है, कि इसका सार हमें आज रात ही मालूम हो जाये।हम उसकी कुछ ना कुछ वह रुपरेखा और पृष्ठभूमि ले रहे हैं जहाँ पर हमें इसका समापन करना है; और आज रात्रि हम कुछ असली आत्मिक बातों का खुलासा करते हैं। अब स्मरण रखिए, मैं कह चुका हूँ, कि आपको अपनी आत्मिक समझ को खोले रहना होगा। लेकिन आप पवित्र वचनों के लेखों पर दृष्टि लगाये रखें। और यह पवित्र वचनों में होना चाहिए, और इसका पवित्र वचनों के द्वारा ही खुलासा होना चाहिए। समझे?अब याद रखिए, वचन का ज्ञान रखना तो यही कह रहा होता है, “अच्छा, मैं तो हाई स्कूल गया हूँ। मैं तो बाइबिल स्कूल गया हूँ। मैं तो कॉलिज गया हूँ।” इससे तो कोई अक्षर तक प्रकट नहीं होता है। सभी फरीसियों और सिदूकियों ने ठीक ऐसा ही किया था; और वे यीशु को जानने में लाखों मील चूक गये थे। समझे?17पवित्र वचन- पवित्र वचनों का प्रकाशन ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रहा है, और उन बालकों पर प्रकट किया गया है जो सीखेंगे। अतरु होने पाये मैं और आप बालकों के जैसे ही बने रहें, और अपने दिलों को खाली कर दें, और कहें, “प्रभु, आप- – हमें बतायें, और हम -हम सुन रहे हैं।”

और फिर आप आत्मिक बातों को, आत्मिक युक्तियोजनाओं को समझते हैं। अब आप स्मरण रखें, कि जो वचन आज रात्रि कहे जाते हैं, आप उनकी युक्ति योजनाओं को समझें, क्योंकि हम एक बडे भेदभरे कलीसियसयी काल का अध्ययन करने जा रहे हैं।18अब मैं सोचता हूँ, कि इसके विषय में यही सारी बात है।अब, आप काल रात को स्मरण रखें; हम हर एक रात्रि को एक दूसरे कलीसियायी काल का अध्ययन करते जायेंगे। और मैं सुनिश्चित हूँ, कि काल हमारे पास इतना समय होगा, कि हम सारे दिन भर इसका अर्ध ययन कर सकते हैं; और उसके बाद हम इसका कल रात को भी अ ययन कर सकते हैं। परन्तु देखिए, उनमें से बहुतेरे तो काम कर रहे होंगे; और मैं इस संदेश की मुख्य मुख्य बातों को लेने का प्रयास करुंगा। मैं केवल उन्हीं बातों को बताऊँगा जो यहाँ कही गयी हैं, जिससे कि आप उनमें से किसी एक को ले सकते हैं, और आप उसका तब तक मनन और ध्यान करें जब तक कि और बताने के लिए कोई बात न रहे। समझे आप? और इसके बाद आप इसका अपने घर पर अध्ययन करें और मैं आपके लिए प्रार्थना कर रहा होऊँगा, और आप मेरे लिए प्रार्थना कर रहे होंगे; और परमेश्वर हमें अपने विश्वासी बच्चों की तरह एक साथ आशीषित कर रहा होगा।अब इससे पहले कि मैं इसका आरम्भ करूं, मैं पूछना चाहूँगा, कि क्या यह बहुत अधिक कठिन होगा, कि हम खड़े हो सकें।19और क्या आप जानते हैं, कि क्यों मुझे खड़े होकर प्रार्थना करना अच्छा लगता है? यीशु ने कहा था, “जब तुम प्रार्थना करने के लिए खडे होते हो, तो इस प्रकार प्रार्थना करना, हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है- तुम जो एक दूसरे के अपराधों को क्षमा करते हो।” समझे आप?और तब जब गिदोन ने एक बार अपनी सेना चुनी थी तो उसने उन्हें चुना था। जो घुटने हो गये थे और झुक गये थे और चपड चपड करके पानी पीया था, अथवा जिन्होंने खड़े होकर पानी पीया था। समझे आप? अतः वे जो गिर गये थे वे मूरतों के आगे दण्डवत् कर रहे थे; और वह जानता था, कि वे युद्ध में जाने के योग्य पात्र नहीं हैं। केवल वे ही योग्य थे जो खडे हुए अपनी आँखों को ऊपर उठाये हुए सभी समय दृष्टि कर रहे थे। और ठीक उसी प्रकार से ही हम करते हैं; हम खड़े होते हैं और प्रार्थना करते हैं।अब देखिए, मैं घुटने होकर प्रार्थना करने में भी विश्वास करता हूँ। परन्तु मैं सोचता हूँ, कि खड़े होने और प्रार्थना करने में कैसे भी हो हमारे लिए कुछ न कुछ मायने रखता है। आइये अब हम अपने सिरों को झुकायें, अब हम में से प्रत्येक अपने हृदयों को भी झुकाये।20अनुग्रहकारी स्वर्गीय पिता,

जबकि हम सत्यभाव से आपके न्याय के सिंहासन की ओर आ रहे हैं- – और हम आप से आपका न्याय माँगने नहीं आ रहे हैं, क्योंकि ऐसा करके तो हम भस्म ही हो जायेंगे; परन्तु हम तो आपसे आपके अनुग्रह के लिए ही अनुनय-विनय करने के लिए आ रहे हैं। आप आज रात्रि हम पर अपना पवित्र आत्मा उंडेले, इसलिए नहीं कि हम योग्य हैं, वरन इसी लिए क्योंकि हम अयोग्य हैं, और हमें इसका आभास है; और हम अपने निज नाम से नहीं आ रहे हैं, क्यों यह काफी नहीं है। हमारे पास कोई न्याय नहीं है, या-या हमारे पास कुछ भी नहीं है, हमारी असाधरण धार्मिकता भी आपकी दृष्टि में फटे हुए। चिथडे के ही समान ठहरेगी।अतः हम दीनतापूर्वक प्रभु यीशु के नाम में आते हैं, हम उसी को ही अपने आगे लेकर आ रहे हैं; हम उसके वाचा का लोहू अपने हृदयों पर लिये हुए यह कहते हुए आ रहे हैं “परमेश्वर, हम पापियों पर दया कीजिए, जो कि हम इस व्यग्रता की घडी में अनुग्रह के लिए अनुनय-विनय कर रहे हैं।” ऐसा है कि किसी एक दिन अन्तिम उपदेश प्रचारा जायेगा, हम नहीं जानते हैं कि ऐसा कब होगा, लेकिन उस अन्तिम समय हवा में पुकार का एक जोर का शब्द होगा; बाइबिल प्रचार मंच पर बन्द पड़ी हुई होगी,बांहें ज़रज़रा जायेंगी, और टेप बजते रहेंगे, सूर्य अस्त हो रहा होगा। हे परमेश्वर, हे युगानुयुगी चट्टान तब उस घड़ी में मुझे छिपा लेना।21और अब हम देखते हैं, कि कहीं कोई बचाव नहीं है, और कुछ नहीं वरन आप में से ही होकर ही बचाव है।हम देखते हैं कि राष्ट्र टूट रहे हैं। हम बाइबिल को पूरा होते हुए देखते हैं। हम इस्राएल को जागृत होते हुए देखते हैं; हम कलीसिया के लिए सन्देश को देखते हैं। और जैसे ही समय लगभग समाप्त होने को होगा, वैसे ही बड़ी बड़ी बातें प्रकट होंगी, और सात मोहरें खुलेंगी। परमेश्वर, परमेश्वर, हे परमेश्वर, हम पर दया कीजिए, हम आपकी दया के लिए अनुरोध करते हैं।और आपका सेवक होने के नाते मैं आज रात्रिा इस दिव्य उपस्थिति में प्रत्येक जन के लिए अनुग्रह के लिए विनती करता हूँ। परमेश्वर होने पाये, कि हमारे मध्य में कोई भी ऐसा न हो,

जिसके प्राण पर उनके पाप हों, परन्तु यह होने पाये, कि ठीक इसी समय प्रभु यीशु के लोहू के द्वारा वे पाक साफ हो जायें; ताकि हम सब उस आशीषित स्थान में जो आकाशमंडल के पार है एक साथ मिल सके।हे पिता, और जबकि आज रात्रि मैं इस पवित्र वचन की ओर बढ़ता हूँ, मैं अपने को अयोग्य पाता हूँ। परमेश्वर, हम में से कोई भी योग्य नहीं है। हे पिता, हम यह स्वीकार करते हैं, कि हम कुछ नहीं जानते हैं; परन्तु हम तो पवित्रा आत्मा पर ही पूरी तरह से आश्रित हो रहे हैं, कि वही हम पर इसका खुलासा करे। और जैसा कि हम अपनी – – अपनी मानसिक समझ के द्वारा जो हमें दी गयी है, इतिहास का खुलासा करते हैं, तो होने पाये, पवित्रा आत्मा ही हमारे हृदयों में आत्मिक बातों को प्रकट करे। पिता, हमें यह प्रदान कीजिए, क्योंकि हम अपके पुत्रा यीशु मसीह के नाम में आपकी बाट जोहते हैं। आमीन! कृपया, आप बैठ जायें।22प्रकाशितवाकय की पुस्तक के दूसरे अध्याय में और दूसरा कलीसियायी- – तीसरा कलीसियायी काल निकालकर शुरू करें—(एक बहन अन्यान्य भाषा में बोलती है- सम्पा.) मुझे क्षमा करना! हे पिता हमारे, तू जो स्वर्ग में है, तेरा नाम पवित्र माना जाये; तेरा राज्य आवें, जैसे तेरी इच्छा स्वर्ग में पूरी होती है वैसे ही पृथ्वी पर भी पूरी होवे। पिता, हम प्रार्थना करते हैं, कि आप हमारे साथ हों, और हमें आशीष दें, और इस घड़ी में जबकि लोगों के मध्य में बहुत अधिक व्यग्रता है, आप हमारी एक समझदार गुरु बनने में- -समझदार निर्माणकर्ता बननने में सहायता करे। जब गड़बड़ी और इसी प्रकार का सब कुछ चल रहा है, पिता, आप हमारी सहायता कीजिए, कि हम आपके अच्छे से अच्छे सेवक बनने पायें। हम यह मसीह के नाम में होकर मांगते हैं। आमीन!अब, मैंने यह पहले ही कह दिया था जिससे आप इसे जान सकें। क्या आपने ध्यान दिया, कि अनुवाद वचन के अनुसार नहीं आया है? इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारी बहन पवित्र आत्मा से अभिषिक्त थी,

परन्तु उसने संदेश तब दिया जब वचन आ चुका था। समझे आप? वह इस काम के कम से थोडा सा हटी हुई थी। अब देखिए, प्यारी बहन, आप जो कोई है, यह बिलकुल ठीक था। पवित्र आत्मा आपके ऊपर था, ओह; उसे उस प्रकार से अपने काबू में रखना कठिन होता है- मैं जानता हूँ। यह तो बस ऐसा है मानो- – या जब आप कोई और बात कह रहे होते हैं- – देखिए, पर वह बिलकुल ठीक तो था, लेकिन शायद आपने इसे उससे भी पहले अनुभव किया हो इससे पहले कि हम वचन पढ़ना शुरू करते। समझे आप? और वह कारण जो यह फिर से होता है, यह है : आत्मा काम कर रहा था। समझे? भविष्यवाणी की आत्मा । भविष्यद्वक्ता के वश में होती है। देखा आपने? और वह आप थीं।23अब हो सकता है, कि पवित्र आत्मा आपको फिर से अभिषेक दे; मैं आशा करता हूँ, कि जैसे ही सभा समाप्त हो वह ऐसा करे। अब आप तब ध्यान दे जब इसका अनुवाद आता है, (समझे?) क्योंकि तब इसे बिलकुल ठीक ठीक प्रबंध में होना चाहिए। समझे आप? परन्तु यहाँ पर अब बस हम वचन की ओर बढ़ रहे हैं। समझे आप?अतः यह सचमुच में परमेश्वर की ओर से ही था; मैं ऐसा अपने सम्पूर्ण हृदय से विश्वास और अनुभव करता हूँ; क्योंकि मैंने इसके फिर से होने को अनुभव किया है। समझे आप? परन्तु पवित्र आत्मा – – यह उस बात का समय नहीं था। उसने कलीसिया के लिए बहन को संदेश दिया, परन्तु वह अब यहाँ पर अपने मुख्य संदेश पर कार्य कर रहा है। आप देखते हैं, कि वह स्वयं अपने को ही असमंजस में नहीं डालेगा; वह तो सब बातों को एक सुनिश्चित कम में ही रखता है। मैं सुनिश्चित हूँ, सब लोग इसे समझते हैं, कि यह बात बिलकुल ठीक है। समझे आप?24अब आइये प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में से दूसरा अध्याय निकालें; और आइये हम- – आज रात्रिा पिरगमुन काल से- –

12वें अध् याय से पढ़ना आरम्भ करें। अब देखिए, गत रात्रि को हमने 11वें पद पर समापन किया था।जिसके कान हों वह सुन ले, कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है: जो जय पाये उसे दूसरी मृत्यु से हानि नहीं पहुंचेगी।अब हम देखते हैं, कि पहले कलीसियायी काल में ही नीकुलाइयों के काम शुरु होकर अन्दर आ गये थे। परमेश्वर ने स्वयं अपने आपको -रूप में प्रकट किया था- -यीशु ने स्वयं अपने आपको सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में प्रकट किया था। वह कोई दूसरा नहीं था, वह परमेश्वर का कोई टुकड़ा, कोई अंश नहीं, वरन वही अकेला ही परमेश्वर था।25अब देखिए, अन्तिम रात वाले कलीसियायी काल में हमने देखा है, कि वह द्वार पर खड़ा हुआ है, और वह कलीसिया को ये बातें लिखता है, और वह उन्हें उनकी दरिद्रता के विषय में बताता है। परन्तु वह उनसे कहता है, कि उनके यहाँ ऐसे हैं- -यह नीकुलाइयों के काम हैं तथा ऐसी ही ओर दूसरी बातें हैं जिन से उसने घृणा की है।गत रात्रि हमने देखा था, कि उन्होंने पहना था- – उन्होंने शहीदों वाला मुकुट पहना था। उसने उन्हें बताया था, कि वे मृत्यु से भी भयभीत न हों; क्योंकि वह होगा- -वह उनके साथ होगा। और फिर वह उसके अंत में कहता है, वह जो जय पाये, वह जो जय पाये उसको दूसरी मृत्यु से कोई हानि नहीं होगी।’26अब देखिए, यदि वहाँ एक मृत्यु थी, और हम उसके विषय में जानते हैं, तब तो कहीं और एक और मृत्यु होनी चाहिए, क्योंकि एक मृत्यु में तो हम यहाँ पर शरीर में मरते हैं; और दूसरी मृत्यु वह है, जिसमें हम आत्मा में प्राण में मरते हैं। यह ऐसा है, वह प्राण जो पाप करता है, निश्चय ही मरेगा।मरने का अर्थ सब चीजों से बिलकुल पूरी तरह से अलग हो जाना होता है। समझे? आप- – आप -मृत्यु का अर्थ उठा लिया जाना होता है; यह दूर हो जाना, छिप जाना होता है। फिर तो जब हमारे प्रिय जन मरते हैं, तो यहाँ तक हम जानते हैं, उनका अस्तित्व भी नहीं रहता है; और इसी को ही मृत्यु कहते हैं। परन्तु एक मसीही मरता नहीं है। ऐसा कोई वचन का लेख नहीं है जो यह बताता हो, कि एक मसीही मरता है; वह नहीं मरता हैं, क्योंकि उसके पास तो अनन्त जीवन होता है। लेकिन जब एक पापी मरता है, तो वह खत्म ही हो जाता है, और उसका प्राण भी अन्त में मर ही जायेगा। परन्तु जब एक मसीही मरता है, तो वह बस यीशु के साथ फिर से लौटने की बाट जोह रहा होता है।ओह, मैं आशा करता हूँ, कि आज रात्रि मेरे पास इस दर्शन के अन्त पर आने का समय होगा, और आप देखेंगे कि यह दूसरी मृत्यु का ठीक इसी प्रकार से ही उल्लेख करता है। आज । रात्रि हम जिस अध्याय पर हैं, यह ठीक वही वाला अध्याय है जो ठीक ऐसी ही बातों को प्रकट करता है; और यहाँ पर इसका बहुत ही सुन्दर चित्रण किया गया है।

27अब, आज रात्रि हम इस पत्र को बहुत ही जल्दी पढ़ने जा रहे हैं; क्योंकि मेरे पास कुछ ऐतिहासिक जानकारियाँ हैं जिन्हें मैं सबसे पहले लेना चाहता हूँ, और मैं आपको यहाँ पर बहुत अधिक देर तक रोक कर रखने की कोशिश नहीं करूंगा। अब देखिए, इस पर किसी भी समय जब भी मैं इसे बहुत अधिक तेजी से पढ़ता हूँ, और यदि आप इसके अनुप्रयोग या इसकी बातों को समझना चाहते हैं, तो जब ये सभाएं समाप्त हो जायेंगी, तो आप यहाँ पर भाई मरसियर से मिल सकते हैं। उनके पास यहाँ पर यह सब कुछ है; क्योंकि वे ही इस पर पुस्तक लिख रहे हैं; जो कुछ आप- आप- – आप में से जो कोई भी इस पर जो कुछ जानना चाहता है, वे आपको बता सकते हैं। भाई मरसियर, यह बिलकुल ठीक रहेगा।2812वाँ पद :और पिरगमुन की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि जिसके पास दोधारी और चोखी तलवार है, वह यह कहता है,कि में यह जानता हूँ कि तू वहाँ रहता है जहाँ शैतान का सिंहासन है, और मेरे नाम पर स्थिर रहता है; और मुझ पर विश्वास करने से उन दिनों में भी पीछे नहीं हटा जिन में मेरा विश्वासयोग्य साक्षी अन्तिपास, तुम में उस स्थान पर घात किया गया जहाँ शैतान रहता है।पर मुझे तेरे विरूद्ध कुछ बातें कहनी हैं, क्योंकि तेरे यहाँ तो कितने ऐसे हैं, जो बालाम की शिक्षा को मानते हैं,

जिसने बालाक को इस्राएलियों के आगे ठोकर का कारण रखना सिखाया, कि वे मूरतों के बलिदान खाएं, और व्यभिचार करें।वैसे ही तेरे यहाँ कितने तो ऐसे हैं, जो नीकुलाइयों, (ये इफिसुस के काम थे; परंतु अब यह एक शिक्षा बन जाती है) – नीकुलाइयों की शिक्षा- -(क्या आपको स्मरण है, कि दूसरी रात्रि को मैं आपको यह बता रहा था, कि यह कैसे होता चला गया था? ये इफिसुस के काम थे, और अब यह एक शिक्षा है)— की शिक्षा को मानते हैं, जिनसे में घृणा करता हूँ। जी हाँ ।सो मन फिरा, नहीं तो मैं तेरे— (यह सच्ची कलीसिया नहीं है)- पास शीघ्र ही आकर, अपने मुख की तलवार से उनके साथ लडूंगा।जिसके कान हो वह सुन ले, कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है, जो जय पाये, उसको मैं गुप्त मन्ना में से दूंगा; और उसे एक श्वेत पत्थर भी दूंगा, और उस पत्थर पर एक नाम लिखा हुआ होगा, जिसे उसे पाने वाले के सिवाय और कोई नहीं जानेगा।अब परमेश्वर इस पर अपनी आशीष प्रदान करे, और अब हमारी सहायता करे जबकि हम कोशिश करते हैं……29अब हम इस कलीसिया की पृष्ठभूमि पर हैं। यह तीसरा कलीसियायी काल है, जो कि पिरगमुन कहलाता है। और इस कलीसिया की समयावधि ३१२ ए डी ६०६ ए डी तक रही है।यह काल इसका थाः झूठी शिक्षा; शैतान पागान शासन की नेव रख रहा था; और सरकार और कलीसिया का वैवाहिक गठबंधन होता है।इस काल का प्रतिफल, पुरस्कार गुप्त मन्ना, और श्वेत पत्थर था।और उस सब के द्वारा जो पवित्र आत्मा ने मुझे करने दिया, मैंने इस कलीसियायी काल का सितारा, इस कलीसियायी काल का दूत सन्त मार्टिन लिया है।

यह एक प्रकाशन ही था जो मुझे इस पर दिया गया था; क्योंकि उस समय के और दूसरे सन्तों के विषय में पढ़ते हुए मैंने सन्त मार्टिन को इस लिए लिया, क्योंकि वह एक भक्त जन था; और मेरी राय में तो वह सन्त पैट्रिक से भी दस गुना प्रेरित था।अब देखिए, सन्त पैट्रिक सन्त मार्टिन का भांजा था, सन्त मार्टिन की बहन सन्त पैट्रिक की माँ थी। और सन्त मार्टिन था- -वास्तव में वह संत पैट्रिक का मामा था।30अब देखिए, उसका जीवन काल ३१५ ए डी से ३९९ ए डी तक था।वह कारण जो मैंने उसे उस दिन के दूसरे संतों पर वरियता दी उसकी वजह वह तौर तरीका है जिसके द्वारा उसने स्वयं अपने को कायम रखा था। और परमेश्वर की प्रेरणा के अन्र्तगत मेरा यह मानना नहीं है- – अब देखिए, रोमन कैथोलिक कलीसिया ने उसे संत भी घोषित नहीं किया था; उन्होंने उसे पहचाना भी नहीं था; और उसे लेने का मेरा यही कारण है। हूँ! हूँ ! हूँ। और इन सब को जिन्हें हम देख रहे हैं- जिनके पास आत्मिक सेवकाई थी उनका प्रथम कलीसिया के द्वारा तिरस्कार किया गया था।और इन बातों के कारण नीकुलाइयों वाली कलीसिया ने तो उन्हें ठुकरा ही दिया था, क्योंकि ये लोग- – आत्मिक थे। और जैसा कि मैंने इसका यहाँ पर चित्रण किया है; सच्ची कलीसिया को तो जबरन बाहर निकाल दिया गया था; और नीकुलाइयों की शिक्षा को मानने वाले बहुमत में थे, और सच्ची कलीसिया वैसे ही अल्पमत में थी जैसा कि वह हमेशा ही अल्पमत में रही है।और जैसा कि मैं आरम्भ से ही कहता रहा हूँ; यह यीशु ही था जिसने यह कहा था, “हे छोटे झुण्ड, मत डर ; यह तेरे पिता की भली मनसा है, कि तुझे राज्य दे।”

यही कारण है, कि मैं उस राज्य को आत्मिक राज्य पर लागू करता हूँ। और हमारे पास है- – हमारे पास एक आत्मिक राज्य है, और हम इसके लिए अति आनन्दित हैं। और इस राज्य में एक राजा है। स्मरण रखिए, वह सन्त लोगों का, पवित्र लोगों का, पवित्र किये हुए लोगों का राजा है; और वही उनका महाराजा है जो कि उनकी अगुवाई करता है।31सन्त मार्टिन का जीवन ऐसा था- – उसका जीवन कलीसियायी कालों में से किसी भी उन जीवनों में से एक था जो बड़े बड़े आश्चर्यकर्मों से भरे हुए थे। संत पौलुस से लेकर हुए बड़े बड़े आत्मिक जनों में से वह एक था। वह एक ऐसा था- – उसके आश्चर्यकर्मों में से सबसे पहला यह वाला था- – मेरा मानना है, वह पहले पहल एक सैनिक था। और तब जबकि एक दिन वह चला जा रहा था, तो वहाँ कोई था- – एक व्यक्ति ठंड में लेटा हुआ ठिठुर रहा था; और वे सब लोग जो उसकी सहायता करने के इच्छुक थे, या नहीं थे; परन्तु उस व्यक्ति की सहायता करने में सामर्थी थे, वे सब उसके पास से वैसे ही गुजर कर चले गये जैसे याजक और लेवी उस भले सामरी के पास से गुजर गये थे।लेकिन जब संत मार्टिन उसके पास पहुँचा, तो उसे एक मसीही विश्वासी के रुप में अपने कर्तव्य का एहसास हुआ, उसके पास एक अंगरखा था, उसने अपने कंधे पर एक लम्बा लबादा डाला हुआ था, उसने अपनी तलवार से उसके दो टुकड़े कर दिये, और आधा टुकड़ा उस भिखारी को दे दिया, और अपने पास दूसरा टुकड़ा रख लिया। और उसी रात से ही उसकी सेवकाई आरम्भ हुई; क्योंकि उसे यीशु उसी कटे हुए टुकड़े को लपेटे हुए एक दर्शन में दिखायी दिया। उसने इस वचन के लेख को पूरा किया था,

जो कुछ भी तुमने इनके साथ किया है, तुमने वह मेरे साथ किया है।’32अतः, आप इससे एक नसीयत लें। जो कुछ भी आप किसी के लिए करते हैं, आप वह मसीह के लिए करते हैं। आप बस इसे स्मरण रखें। अब आप- – आइये हम इसे एक साथ मिलकर कहें,- (भाई ब्रन्हम और मंडली एक साथ मिलकर इसे कहती है) ‘ जो कुछ भी तुम दूसरों के लिए करते हो, वह तुम मसीह के लिए करते हो।’ अतः इससे कोई मतलब नहीं है, कि वह आपके विषय में क्या सोचता है, जो आप उसके विषय में सोचते हैं वही आशीष लेकर आता है। समझे? ।33यही उसका पहला आश्चर्य कर्म था; और यही उसकी सेवकाई की शुरुआत थी। इसके विषय में बहुत सी बातें हैं- – मेरे पास- – मेरे पास समय नहीं होगा; क्योंकि मैं चाहता हूँ, आप कल तथा प्रत्येक रात्रि को वापस आयें, अतः मैं आपको बहुत अधिक देर तक रोक कर रखना नहीं चाहूँता हूँ। यह बिलकुल ठीक बात है।वह अगला आश्चर्यकर्म जो मैंने बोलने के लिए चुना है; वह यह है: वह मूर्तिपूजा का पूरी तौर से सर्वनाश कर रहा था, और वह रोम की कलीसिया का एक कट्टर विरोधी था। वह प्रथम कलीसिया के, रोम की कलीसिया के सारे बिशपों से पूरी तौर असहमत था, वह – –

वे दुनियावी होते चले जा रहे थे, तथा इसी प्रकार के होते चले जा रहे थे; और उसने उनका विरोध किया था। वह यकीनन उनके विरूद्ध था। यह एक आश्चर्यकर्म ही था, कि वह उस प्रकार के समयों में जीवित रहा था। अब,34परन्तु एक दिन वह पागान के मंड़प- – को तहस नहस कर रहा था, और पागान वेदियों को चकनाचूर कर रहा था, और वही पागान वेदी पर एक पवित्रा पेड़ लगा हुआ था। और वह इस पेड़ को काट कर गिरा रहा था, और वे बहुतेरे लोग जो वही पास में खड़े हुए थे, उसे फिर से खडा किये चले जा रहे थे।उसने कहा, ‘यदि मैं परमेश्वर का जन हूँ, तो मुझे पेड़ से उस ओर बांध दो जिस ओर पेड़ झुक रहा है, और पेड़ मेरे ऊपर गिर जाये। यदि मैं परमेश्वर का एक जन हूँ- – यदि मैं परमेश्वर का जन नहीं हैं, तो यह मुझे जान से मार डाले। यदि मैं परमेश्वर का जन हूँ, तो मेरा परमेश्वर इस पेड़ को कहीं ओर घुमा सकता है।” यह एक बड़ी चुनौती थी!अतः वे उस पेड़ को काटने लगे, और जब पेड़ गिरने लगा, तो वहउल्टा ही घूम गया, और उसने पास खड़े देखने वाले लोंगो के एक दल को जान से मार डाला। परमेश्वर ने उसे पहाड़ से पीछे की ओर ही घुमा दिया था। यह एक आश्चर्य कर्म ही था। ओह, उसकी सभाओं में सभी समय आश्चर्य कर्म ही होते रहते थे।35एक और आश्चर्य कर्म है जिसके विषय में मैंने बोलने के लिए सोचा था, वह यह है: एक मरा हुआ बच्चा था, जिस पर उसने अपनी देह उस पर पसार दी थी। वह फिर से जीवित हो उठा था, जबकि उसने इस बच्चे के लिए बस थोड़ी देर ही प्राथना की थी।एक और आश्चर्य कर्म है जो मुझे असाधारण लगाः एक सम्राट था;

और वह परमेश्वर के पवित्र आत्मा से भरे हुए कुछ लोगों को जान से मारने जा रहा था। और वास्तव में वह उस समय की रोम की पहली कलीसिया के बिशप का दाहिना हाथ था; और वह सचमुच में एक पोप ही था इससे पहले कि वह यह कहलाता। उसका नाम दा-मा-सू-र था, और वह उन सब मसीहियों को मौत के घाट उतार रहा थ जिन्हें वह पकड़ कर मौत के घाट उतार सकता था।और इस सम्राट की पत्नी पागान- मूर्तिपूजक थी, और उसकी पत्नी के अपने हृदय पर अंधकार छाया हुआ था- – और जब यह पवित्रताई से भरा हुआ संत मार्टिन इस मामले में मध्यस्थता करने के लिए बातचीत करने के लिए आया। सम्राट की पत्नी ने उससे पहले ही सम्राट के पास यह कहलवा भेजा, कि वह इन मसीहियों वह इन मसीहियों के लिए बातचीत करने की चेष्टा करेगा, कि उन्हें न मारा जाये; और जब वह उसके पास पहुँचा, तो वास्तव में उसने कोई भला नहीं किया; क्योंकि वह इस पोप का दाहिना हाथ था; अतः उसने पवित्रा आत्मा से भरे हुए उन मसीहियों को किसी भी तरह से मौत के घाट उतार दिया।36परन्तु संत मार्टिन उसके साथ एक साक्षात्कार करना चाहता था; और सुरक्षाकर्मियों ने उसे फाटक पर ही रोक दिया। खैर, संत मार्टिन अपने मुँह के बल गिर पड़ा, और वहीं पर पसर गया; और उसने परमेश्वर से तब तक प्रार्थना की जब तक कि उसे अंदर जाने के विषय में दिखा नहीं दिया गया था। जब वह वहाँ से उपर उठा, तो वह उन ताला बंद फाटकों में से होकर बढ़ता चला गया, और वे अपने आप खुलते चले गये, और वह आगे बढ़ता चला गया।अब देखिए, यह एक इतिहास है; यह उसके विषय में किसी की लिखा हुआ लेख मात्रा नहीं है; और यह बस ठीक वैसी ही एक छोटी सी बात है,- – यदि यह कोई ऐसी बात होती, तो इसने प्रतिकूल प्रभाव डाला होता; यदि कोई कलीसिया इसे कह रही होती, या मैं कहूँगा यदि कम से कम इसे विशेष करके कोई पोप सम्बंधी कलीसिया कह रही होती, तो उसने इन बातों का वर्णन ही नहीं किया होता। परन्तु देखिएगा, इतिहास सत्य का वर्णन करता है। समझे?37और यह पुरूष, अर्थात् संत मार्टिन हर एक सुरक्षाकर्मियों, तथा और अन्य लोगों के ठीक पास से गुजरता हुआ सम्राट के ठीक सामने आकर को नीचे से झुलसमें करने का एक अत्यंन करने पहुँचा और वह सम्राट परमेश्वर के जन को सम्मान नहीं देना चाहता था। आप जानते हैं कि – – कि ऐसा करना- मान मर्यादा वाली बात नहीं है। सो उसने अपना सिर घुमा लिया, और यहाँ तक कि उसने उसे सम्मान तक नहीं दिया।आप जानते हैं, कि परमेश्वर ने क्या किया था? उसने उससे बात करने की चेष्टा की थी, लेकिन वह तो बस अपना मुंह फेरे रहा, और परमेश्वर इस मूर्तिपूजक से अपने सेवक को सम्मान दिलाने जा रहा था। अतः परमेश्वर ने उस जगह को आग से दहका दिया; और उसे उसके सिंहासन पर ही पूरा का पूरा झुलसा दिया, और उसे खड़ा कर डाला। अब देखिए, वह “नीसियन कॉसिल” बाइबिल का इतिहास है। उसे परमेश्वर के दास का सम्मान करना चाहिए था; परमेश्वर ने ही उसे खडा कर दिया था। उसने उस सिंहासन को जिस पर वह बैठा हुआ था झुलसा दिया था, और आग उसके शरीर के पास से होकर निकली, और उसने उसके बैठने के स्थान को नीचे से झुलसा दिया, और उसे वहाँ से कूदना पडा।आप जानते हैं कि परमेश्वर का काम करने का एक तरीका होता है। जी हाँ, “परमेश्वर इन पत्थरों से अब्राहम के लिए संतान उत्पंन करने में सामर्थी है।”

और आप स्मरण रखें, कि ठीक वही परमेश्वर आज रात्रि हमारे मध्य में वास करता है। यह ठीक वही परमेश्वर है। यह बिलकुल ठीक बात है।38और इसके बाद एक और बात है जो मैं बताना चाहता हूँ, और इसके बाद मैं रूक जाऊँगा। मेरे पास यहाँ पर कुछ हैं, परन्तु मैं बस- अब देखिए, यह वाली घटना मुझे बहुत पसन्द है। यह वही है जबकि वह एक दिन अपने अध्ययन कक्ष में प्रार्थना अपने लोगों के लिए बाट जोह रहा था- – और वह- – वह एक महान पुरूष था; और वह पवित्र आत्मा से भरी कलीसिया को दौरों पर लेकर गया था। वे सारे- – ओह वह था-उसके पास सारे के सारे लोग- उसकी सारी की सारी मंडली आत्मा से भरी हुई थी। और इन मसीहियों ने सारे देश भर में आश्चर्य कर्म र अद्भुत काम किये और चिन्ह दिखायें।देखिएगा, परमेश्वर अपने सुसमाचारदूत से बातें करता है; और सुसमाचारदूत जनसाधारण से बातें करता है। और यही है वह जो तब घटित होता है। समझे आप? वह- वह जन साधारण को और उसे परमेश्वर में एक सा बनाकर रखता है। समझे आप? और पवित्र आत्मा उस समूह में से होकर प्रवाहित हो रहा होता है।39बहुत सी बार ऐसा हुआ, जब उन्हें शहीद किया गया, तो उन लोगों ने प्रचारकगण को बाहर मसीही लोगों के ठीक बीच में खड़ा किया, और उन सभों को ठीक एक ही समय में जान से मार डाला था।और उन्होंने उन मसीही लोगों के साथ क्या बुरे काम किये थेः उन्होंने उन्हे जला डाला था, उन्होंने पुरूषों को बड़े बडे लठ्ठों पर कीलों से जड़ दिया था, और उनके ऊपर जंगली कुत्तों को छोड़ दिया था, और उन्हें उस व्यक्ति की पीठ से मांस खाने दिया जाता था, वे उस व्यक्ति की पीठ से होकर अंतड़ियों को बाहर खींचकर निकाल देते थे, इससे पहले कि वह व्यक्ति कभी मरे। वे स्त्रियों की दांयी छाती काट कर अलग कर दिया करते थे और उन्हें वहीं खडा रहने देते थे जबकि उनका हृदय धड़कता रहता था, और वे इस प्रकार से मर जाया करती थीं। दूध पिलाती माँओं से, गर्भवती माँओं से उनके बच्चे छीन लिये जाते थे, और उन्हें जंगली सूअरों को- -तथा ऐसे ही और दूसरे जानवरों को खिला दिया जाता था, और उनकी माँओं को खडे होकर यह सब देखने के लिए विवश किया जाता था। और इसी प्रकार की ही सब कुछ- -40अब, आप यह नहीं सोचेंगे, कि जिन लोगों ने मसीही होने का दावा किया था उन्होंने ही ऐसा किया था। परन्तु सुनिएँ, बाइबिल कहती है, कि यीशु ने कहा था,

“ ऐसा समय आयेगा, कि वे तुम्हें जान से मारेंगे,और सोचेंगे कि वे ऐसा करके परमेश्वर की सेवा कर रहे हैं।” आप स्मरण रखिए, कि ठीक उसी यीशु ने ठीक उसी आत्मा के द्वारा भविष्यवाणी की थी, कि ठीक ऐसा ही फिर से अंत के समय में होगा। ऐसा तो होना ही है। यदि ये दूसरी बातें वचन से बिलकुल ठीक ठीक मेल खाती हैं, तो आप दृष्टि डालिएं, और देखिएगा, कि क्या यह वचन से और इतिहास से बिलकुल ठीक ठीक मेल नहीं खाती है।परमेश्वर ने कहा था, कि ऐसा घटित होगा, और यहाँ पर ठीक ऐसा ही घटित हुआ था- (समझे?)- बिलकुल ठीक वैसा ही घटित हुआ है। तो फिर हम तब क्या करने जा रहे हैं जब हम इस लौदीकिया कलीसियायी काल पर आते हैं- (समझे?)- जिसमें कि हम ठीक इस समय रह रहे हैं जिसमें इसके विरूद्ध फिर से विपत्तियों का तथा ऐसी ही दूसरी बातों की भविष्यवाणी की गई है?41अतः अब देखिए, तब यह हुआ था, वह वहाँ पर प्रार्थना कर रहा था, जबकि उसकी मंडली उसकी प्रतीक्षा कर रही थी। और वहाँ उसके द्वार पर एक भिखारी आया, और उसने उसका द्वार खटखटाया, और उसने द्वार खोला, और जबकि वह व्यस्त था, और- और उसने उसे बताया, कि उसे एक अंगरखा चाहिए। वह नंगा था, और उसने कुछ नहीं ओढ़ा हुआ था; और सर्दी थी, और उसने कहा- – उसने उसे प्रधान डीकन से मिलने के लिए वापस भेज दिया। और प्रधान डीकन उस पर बहुत क्रोधित हुआ, और उसने उसे बाहर खदेड़ डाला। और जब उसने ऐसा किया, तो वह वापस मुड़ा, और उसने फिर से संत मार्टिन के पास आकर सब कह सुनाया, कि डीकन ने उसे बाहर खदेड़ दिया।और अतः तभी लगभग उसी समय ऐसा हुआ, कि यह प्रधान डीकन अन्दर आया, और उसने एक प्रकार से तीखे स्वर में उससे यह कहा,“ तुम्हारी मंड़ली तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है। तुम उनसे प्रतीक्षा कराये चले जा रहे हो।” परन्तु वह तो प्रार्थना में लगा हुआ था। उसके लिए। तो यही उचित था, कि वह तब तक प्रार्थना में रूका रहे जब तक कि उसे परमेश्वर की ओर से बाहर जाने की अगाही महसूस नहीं होती थी।42और यह भिखारी द्वार पर फिर से वापस आया। और उसे संत मार्टिन ने अपना बढ़िया वाला अंगरखा उतारा और उस भिखारी को दे दिया; और उस प्रधान डीकन को जाकर किसी भी तरह से उसके लिए एक दूसरा अंगरखा लाना पडा। अत: उसे किसी भी तरह से एक अंगरखा जाकर लाना पड़ा,

और संत मार्टिन को उसे पहनना पड़ा। और वह लोगों के सामने एक बढ़िया अंगरखे के बजाये एक घटिया अंगरखा पहनकर आया।अतः यह ये ही दिखाता है, कि जो कुछ भी आपके पास सर्वोत्त्म है आप उसे मसीह को दे दें-समझे?- आप अपना जीवन, अपना समय, अपना हर एक चीज मसीह को दे दें। और ठीक वही आत्मा जो मसीह के अन्दर वास करता था आपके अन्दर वास करता है; और- और आपका अपने पास पड़ोस में तथा उन लोगों पर जिनसे आप व्यवहार करते हैं ठीक वैसा ही प्रभाव होगा जैसा प्रभाव मसीह का था, कि यह ठीक वैसा ही काम करेगा जैसा मसीह ने काम किया था।43और आखिर में ऐसा भी हुआ…कि उन मसीही लोगों की छाया में लोग लेट जाया करते थे और चंगे हो जाया करते थे-(यह सच बात है)- उनके चारो ओर प्रेम की इतनी जबरदस्त सामर्थ थी। और लोगों ने बताया था, कि जब मार्टिन उस घटिया वस्त्र को पहने हुए प्रचार कर रहा था, तो तो सारी मंड़ली ने यह ध्यान से देखा था, कि उसके चारो ओर एक प्रकाश दीप्तमान हो रहा था-(जी हाँ, देखा, समझे?)- क्योंकि उसने सही काम किया था।परमेश्वर के प्रति आपका यही कर्तव्य है, कि आप सदैव ही सही व भले काम करें; आपका स्वयं अपने प्रति यह कर्तव्य है, कि आप सदैव ही भला सोचें, और फिर आपको भला प्रतिफल ही मिलना होता है। जी हाँ यह सही बात है, आपको ठीक ऐसा ही करना है।44अब, हम व्याख्यानों के संग्रह में से ठीक इस पर अध्ययन करना चाहते हैं, क्योंकि यह यहाँ पर बड़ी ही दृढ़ता से कार्य कर रहा है।पिरगमुन की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि जिसके पास – – दोधारी- – और चोखी – -तलवार है- -वह यह कहता है।अब, मैं चाहता हूँ, कि आप इस पर फिर से ध्यान दें; कि वह आज रात्रि स्वयं अपनी पहचान परमेश्वरत्व के रूप में परमेश्वर के रूप में कराता है। प्रत्येक कलीसियायी काल उसकी एक महिमान्वित अवस्था ही थी; “वह जिसके पास बारह तारे हैं, या- या जिसके हाथों में सात तारे हैं; वह जिसके पास दोधारी तलवार है,” (समझे?) उसके विषय में इसी प्रकार की ही और दूसरी बातें मिलती हैं- – * वह जिसके पांव पीतल के, और जिसकी आँखें आग की ज्वाला हैं।” वह अपनी पहचान फिर से परमेश्वरत्व के रूप में- परमेश्वर के रूप में करा रहा है।45अब आप कहते होगें, “वह जिसके मुख से चोखी तलवार निकलती है,” में परमेश्वरत्व वाली बात कहाँ पायी जाती है?”ठीक है, तलवार वचन है। जैसा कि जब हम आरम्भ में ही उसके परमेश्वरत्व वाले गुणों का अध्ययन कर रहे थे,

तो हमने इसी बात को इब्रानियों ४ में देखा था। वह तलवार जो इब्रानियों ४:१२ में पायी गयी थी, वह यह है, “परमेश्वर कावचन दोधारी तलवार से भी चोखा है।” क्या सह सच है?परमेश्वर का वचन था। क्या ऐसी ही बात है? अब देखिए, आपको- – इन अनुवादों को समझना होता है।अब आप उस वचन के लेख को बारीकी से देखें जो यूहन्ना १ में पाया जाता है, आदि में -(पूर्वकाल में)- वचन था, उसी ने ही आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की थी। क्या यह सही है? “और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन । ही परमेश्वरत्व-परमेश्वर- था। और परमेश्वर देहधारी हुआ, और उसने हमारे बीच में डेरा किया।” क्या यह ठीक है? ५ वचन देहधारी हुआ, और उसने हमारे बीच में डेरा किया।”और यहाँ पर ठीक वही खड़ा हुआ है जो आरम्भ में था, और यह कहता है, “पिरा- -पिरगमुन की कलीसिया के..के दूत को यह कह- – उससे यह कह, ‘मैं परमेश्वर का वचन हूँ।’ ओह, हम उसे प्रकाशितवाक्य के अध्यायों में देचखते हैं, कि वह श्वेत घोड़े पर बैठकर आता है, और उसने लोहू में छिड़का हुआ वस्त्र पहना हुआ है, और उसके सिर पर एक राजमुकुट है, और उसकी जांघ पर लिखा हुआ है, परमेश्वर का वचन।”ओह, मुझे यह अच्छा लगता है। वह वचन हैवह परमेश्वर का वचन है। अतः हम ठीक इसी परमेश्वर को देखते हैं। जो आरम्भ में था- वही अपनी पहचान फिर से कराता है, कि वह परमेश्वर का वचन है।46अब देखिए, यदि वह जीवित वचन है, तो फिर जो बाइबिल में लिखा हुआ है उसी का ही भाग है।फिर तो आप इसे ठीक ऐसे ही ग्रहण कर सकते हैं जैसे कि आप उसे ग्रहण कर रहे हों, क्योंकि यह वचन ही है; और यह वचन आपके अन्दर विश्वास के द्वारा ही आता है, जो इसे जीवन्त बनाता है; क्योंकि ऐसा होता है- – ओह, इसे समझे! यदि पवित्र आत्मा आपके पास आपके अन्दर है, और जब वचन आपके अन्दर आता है, तो ज्यों ही वचन आपके अन्दर आता है, त्यों ही यह जीवन्त हो उठता है, और हर एक प्रतिज्ञा सच्ची हो जाती है। कुछ भी ऐसा नहीं होता है, जो- -यही कारण है, कि “यदि तुम इस पहाड़ से कहो, हट जा, और अपने मन में सन्देह न करो।” ऐसा क्योंकर हो जाता है? क्योंकि यह आप परमेश्वर ही होते हैं जो ऐसा कह रहे होते हैं। क्या आप इसका विश्वास करते हैं? बाइबिल ऐसा ही कहती है, और यदि तुम सन्देह न करो, तो जो कुछ तुम कहते हो वह हो जायेगा- यदि तुम अपने अन्दर से सारा संसार बाहर निकाल सकते हो, तो यह होगा, कि पवित्र आत्मा आपको परमेश्वर का एक पूर्ण पुत्र या पुत्री बना डालता है,

-आपके अन्दर कोई संसार, कोई सन्देह, कोई निकम्मापन नहीं होना चाहिए- तब यह क्या होता है? तब ये आप खुद आप नहीं रहते हैं, यह तो परमेश्वर ही होता है जो आपके अन्दर होता है।तब आप उसका वचन लेते हैं और यह एक प्रतिज्ञा होती है; और आप कहते हैं, “पिता यह आपकी प्रतिज्ञा है।” शैतान- – तब कुछ ना कुछ घटित होना ही होता है। देखा, समझे?47अब, आप ऐसा तब तक नहीं कर सकते हैं, जब तक कि परमेश्वर ने ही इसे आप पर प्रकट ना कर दिया हो, कि वह मामला क्या होगा। समझे? और जब आप जान जाते हैं, कि मामला क्या होगा, तो फिर आप यीशु के जैसे ही बोल सकते हैं- – और वह वचन था। क्या यह सही है? और फिर भी यीशु ने- उस मनुष्य ने-उस डेरे ने यह कहा था, मैं तब तक कुछ नहीं करता, जब तक कि पिता ही मुझे वह पहले न दिखा दे। इसके बाद यह आपके लिए तब तक वचन नहीं होता है, जब तक कि यह आप पर साक्षात् प्रकट न हो जाये। क्या आप इसे समझ गये हैं?इसमें कोई आश्चर्य नहीं है, कि लोग कहते हैं, “आश्चर्य कर्मों के दिन बीत चुके हैं।” वचन उन पर साक्षात् प्रकट नहीं हुआ है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है, कि वे पवित्र आत्मा पर विश्वास नहीं कर सकते हैं, क्योंकि वचन उनपर साक्षात् प्रकट नहीं हुआ है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है, कि वे यीशु मसीह के नाम में बपतिस्मा होने के प्रकाशन को नहीं देख सकते हैं; उन पर वचन अभी तक साक्षात् प्रकट नहीं हुआ है; और फिर भी इसका समर्थन करने के लिए उनके पास वचन का एक भी लेख नहीं है। बाइबिल में कहीं कोई ऐसी जगह नहीं है, जहाँ कभी किसी को किसी और रीति से बपतिस्मा दिया गया हो।48और पवित्र आत्मा के विषय में बाइबिल कहती है, कि कोई भी मनुष्य यीशु को मसीह नहीं कह सकता है, वह ऐसा केवल पवित्र आत्मा के द्वारा ही कह सकता है। और फिर भी लोग कहते हैं, कि वे यह विश्वास नहीं कर सकते हैं, कि पवित्र आत्मा सही है। समझे? देखिए, यह उन पर प्रकट ही नहीं किया गया है।

यीशु ने कहा था, कोई मेरे पास नहीं आ सकता जब तक कि पिता ही उसे मेरे पास न खींच लायें। और जितनों को पिता मुझे दे चुका- (भूत काल)- वे सब मेरे पास आयेंगे। ओह, क्या यह सुन्दर नहीं है, जितनों को पिता मुझे दे चुका, वे सब मेरे पास आयेंगे। और मैं विनाश के पुत्रा को छोड़ कर उनमें से किसी को न खोऊँगा, और मैं- – (वह इसी उद्देश्य के लिए ही जन्मा था)- और मैं अन्तिम दिन उसे जिला उठऊँगा।”ओह, मेरे खुदा! यही है वह जहाँ जगत की उत्पत्ति से भी पहले नामों को मेमने के जीवन की पुस्तक में लिख दिया गया था। क्या यह शानदार बात नहीं है ! हम इस पर कैसे सन्देह कर सकते हैं?49हे परमेश्वर, हमारे मध्य में से संदेह को दूर कीजिए, और हमारे तुच्छ मानव हृदयों का तब तक खतना कीजिए जब तक कि हमारे मध् य में से सारा संदेह दूर नहीं हो जाता है। मेरी यही प्रार्थना है। प्रभु, बस हर एक संदेह को दूर भगा दीजिए।होने पाये, मैं पृथ्वी पर मधुरतापूर्वक, नम्रतापूर्वक जीवन व्यतीत करूं, और पृथ्वी पर परमेश्वर के एक मेमने के…के जैसे ही चलँ। होने पाये मैं वैसे ही चलें जैसे वह चला था। होने पाये मैं वैसे ही बोलू जैसे मानो उसे ही बोलना है। होने पाये, मेरे उद्देश्य उसके उद्देश्यों के जैसे ही हों। होने पाये- – होने पाये- – होने पाये दूसरे लोग मेरे अन्दर यीशु को खोजने पाये। प्रभु होने पाये, मैं बस अपनी खुदी को खो डालें, और तुझे पा लू; मैं बस मसीह के अन्दर इतना अधिक छिपा हुआ पाया जाऊँ कि जो वह कहता है उसके लिए मेरे अन्दर संदेह का कोई स्थान न हो।अब, आप यहाँ से बाहर जाकर यह न कहें, परमेश्वर की महिमा । होंवे! हाल्लिलूयाह ! परमेश्वर की महिमा होवे! क्या तुम वह देख सकते हो जो मैं कर सकता हूँ? परमेश्वर की महिमा होवे!”फिर तो आपको यह अभी भी नहीं मिला है। उसने इस प्रकार से ऐसा नहीं किया था, जी नहीं, उसने ऐसा नहीं किया था, कि उसने अपना सीना बाहर निकाल कर कहा हो, देखा, “मैं क्या कर सकता हूँ? जी हाँ, श्रीमान, मैं ही परमेश्वर का पुत्रा हूँ।” जी नहीं, उसने कभी भी किसी भी बात की महिमा अपने ऊपर नहीं ली थी। उसने तो सारी की सारी महिमा परमेश्वर को ही दी थी। वह इतनी नम्रता और मधुरतापूर्वक चला, कि उसके चारों ओर एक ऐसा वातावरण पाया जाता था, कि लोगों को उसके चौगिर्द रहना अच्छा लगता था। अब देखिए, केवल उसके बैरी- – उसने उन से इतना अधिक प्रेम किया कि उसने सभी समय निरन्तर उनके लिए प्रार्थना ही की। और वह आपका आदर्श था, वह मेरा आदर्श था, कि हम दूसरों के साथ वैसा ही करें जैसा कि उसने हमारे साथ किया है।50अब देखिए, अब हम यहाँ पर फिर से इसके दूसरे पद पर- जो कि 13वाँ पद होगा- – ध्यान देना चाहते हैं- -मैं तेरे कामों को जानता हूँ- – मैं जानता हूँ, तू वहाँ रहता है- – जहाँ शैतान का सिंहासन है- – और मेरे नाम पर स्थिर रहता है, और मुझ पर विश्वास करने से भी- – पीछे नहीं हटा- – मेरे विश्वास का इन्कार नहीं किया।देखिए, वे वहाँ रह रहे थे जहाँ शैतान का सिंहासन था, और फिर भी वे यीशु के नाम पर स्थिर थे। समझे? ” और मेरे विश्वास का इन्कार नहीं किया- मुझ पर विश्वास करने से पीछे नहीं हटा।” उसने उन्हें किस प्रकार का विश्वास दिया था?

पिन्तेकुस्त वाला विश्वास- वह वाला विश्वास जो आरम्भ में था। उन संस्थागत कलीसिया के लोगों के पास नीकुलाइयों वाला विश्वास था, वे संस्था और इसी प्रकार के दूसरे संगठनों को बना रहे थे; एक कलीसिया संस्था के तहत वजूद मेंआती चली जा रही थी; परन्तु उसने कहा था, “तू उससे दूर हट गया है, तूने उससे घृणा की है, और मैं भी उससे घृणा करता हूँ।”“….तु ने मेरे नाम का इन्कार नहीं किया है, तू उनके छोटे छोटे मतों सिद्धांतों और पंथे के पीछे नहीं हो लिया, तू तो बस मेरे नाम पर ही स्थिर बना रहा है। और तेरे पास अभी भी मेरा वैसा ही विश्वास है जैसा कि यह आरम्भ में था।” ओह, मुझे यह बात अच्छी लगती है !….और मुझ पर विश्वास करने से उन दिनों में भी पीछे नहीं हटा जिन में मेरा विश्वासयोग्य साक्षी- (मैं सोचता हूँ आप इसका अन्ति- पा-स, के रूप में उच्चारण करते हैं)- अन्तिपास, तुम में उस स्थान पर घात किया गया जहाँ शैतान रहता है।51मैं मात्र थोड़ी देर के लिए इस ”शैतान के सिंहासन” पर रूक कर चर्चा करना चाहता हूँ। हम एक प्रकार से इन बातों पर अभ्यास कार्य करना चाहते हैं। मैं चाहता हूँ, कि आप इसे ध्यानपूर्वक समझ जायें। अब आप ”शैतान का सिंहासन” समझने में सुनिश्चित रहें। अब देखिए, परमेश्वर ने उत्पत्ति में बताया था, कि कहाँ पर शैतान का सिंहासन था, और वह बाबुल में था। और यह हमेशा ही शैतान का सिंहासन रहा है; और प्रकाशितवाक्य में भी यही शैतान का सिंहासन है। परन्तु यदि आप ध्यान देंगे, तो आप पायेंगे, बाबुल ने स्वयं अपने को पागान सम्बन्धी से पोप सम्बन्धी में परिवर्तित किया।और अब इन आरिम्भक वषों में – या इसके घटित होने से कुछ वर्षों पहले ही इसे शैतान का सिंहासन एक महान- – ने बनाया- – मैं सोचता हूँ, कि आप उसे केलेडियनों का आरिम्भक पुरोहित राजा कहेंगे। जब पारसी लोगों ने उसे बाबुल छोड़ने के लिए विवश किया, तो बाबुली पादरी-समाज ने अपना स्थान बदला और बाबुल को छोड़ा। उस पुरोहित-राजा का नाम एटालस था।

एटालस बाबुल का एक बड़ा पुरोहित राजा था।जब पारसी बाबुल आये, और वे केलेडियनों को बाबुल से खदेड़ कर बाबुल को अपने अधिकार में ले रहे थे, तो उनके पुरोहित-राजा एटालस ने पिरगमुन में शरण ली थी। “तू वहाँ रहता है, जहाँ शैतान का सिंहासन है।” क्या आप इसे समझ गये हैं?52अब, यही कारण है, कि मैंने कलीसियायी इतिहास में जाकर इसकी खोजबीन की, ताकि यह मालूम करूं, कि वहाँ- -क्या क्या घटित हुआ था; जब उसने कहा था, “तू वहाँ रहता है, जहाँ शैतान का सिंहासन है।”मैंने सोचा था, ” वह, वह निश्चित स्थान, अर्थात् शैतान का सिंहासन कहाँ पर होगा?“ इसके बाद मैंने यह मालूम किया, कि जब पारसियों ने उसे अपने अधिकार में ले लिया- ‘ (यह दानिययेल के दर्शन के अनुसार ही हुआ था)- तो वह पिरगमुन के इस नगर रोम में आया था; और उसने वहीं अपना मुख्यालय बनाया था। शैतान ने अपना मुख्यालय बाबुल से पिरगमुन में बसाया, जहाँ वह – भविष्य में अपने नये बाबुल की शुरूवात करेगा। ओह, मेरे परमेश्वर!अब, आप को उसकी रूपरेखा मिल गयी, कि हम कहाँ पर हैं। यह बिलकुल ठीक बात और अब देखिए, यहीं पर ही उसने इस शानदार भाइर्द को शहीदी मौत से मारा था, यहीं पर ही अन्तिपास शहीद हुआ था।53इसके बाद वह अपनी कार्यशैली बदल रहा होता है- -सबसे पहले तो वह मसीहियों को सतानेवाला था। ओह, उसने मसीहियों से कैसी घृणा की थी। और वह स्वयं एक पुरोहित-राजा था। और वह स्वभाव से एक मूर्तिपूजक था, और वास्तव में उसने अपना रवैया बदला था, और उसने काँस्टैन्टाइन के साथ मिलकर अपनी शक्ति को दृढ किया था।काँस्टेन्टाइन को हमेशा ही कोलम्बस की सेना- “नाइट ऑफ कोलम्बस” का जन्मदाता माना जाता है, और आज यह पोप की आधीनता में है। यही एक ऐसा था जिसने खूनी शपथ दी थी। मैं यह बात पूरी श्रृद्धा और सम्मान के साथ कहता हूँ- -जिस प्रकार से मैंने इतिहास पढ़ा है, मेरे देखने के दृष्टिकोण से तो वह कभी भी एक मसीही नहीं बना था- उसने कभी भी अपना धर्म परिवर्तित नहीं किया था।54अब देखिए, एक रात्रि उसने एक स्वप्न देखा था, कि यदि वह-उसने एक क्रूस देखा था, और उससे कहा गया था, कि वह इसी के द्वारा युद्ध जीत लेगा; और इसी कारण ही उसने मसीहियों को छूटसुविधाएं देने का वायदा किया था, कि यदि मसीही लोग उसके लिए प्रार्थना करेंगे, कि वह युद्ध जीत जाये, तो वह एक मसीही बन जायेगा। और मैं उस पुल के पास खड़ा हुआ हूँ- -मैं उस जगह पर पुल के दूसरी ओर खड़ा हुआ हूँ, जहाँ वह सो रहा था और उसने स्वप्न देखा था। और जब वह जागा, तो उसने अपनी ढाल पर तथा अपने योद्धाओं की ढाल पर श्वेत रंग की क्रूस पुतवा दी थी। और यही है वह जहाँ उसने “नाइट ऑफ कोलम्बस” की स्थापना की थी जो अब रोमन कैथोलिक कलीसिया के स्वामित्व की आधीनता में है।परन्तु उसने कदापि कोई धार्मिक कार्य नहीं किया था;

वह एक मात्र काम जो उसने कभी किया था जो इतिहास में लिखा हुआ है जैसा कि मैंने देखा है; वह यह था, कि उसने संत सोफिया के गिरजे के शिखर पर एक कूस लगवा दी थी। (जी हाँ!) परन्तु वह एक राजनेता था, और जब वह उस समय रोम का सम्राट था, तो उसने और इस पुजारी-पुरोहित ने आपस में मिलकर अपनी ताकत को दृढ किया था, और नीमगर्म कलीसिया को जो उस समय नीकुलाइयों की कलीसिया कहलाती थी जो मसीहियत को पादरी पद की ओर झुकाती चली जा रही थी- को अन्दर लेकर आये और वे ठीक इसी बात को सच्ची कलीसिया के अन्दर लेकर आना चाहते थे। और हम इफिसेस की कलीसिया का और-और स्मुरना की कलीसिया का, उन नीकुलाइयों का अध्यनन कर चुके हैं- -55अब, ये ही नीकुलाइयों बन गये थे- -ये वैसे कार्य नहीं रहे थे जैसा कि ये पिछले समय में आरम्भ में थे; परन्तु यहाँ पर ये इस तीसरे कलीसियायी काल में एक शिक्षा बन जाते हैं। जहाँ ये कार्य थे, और बस इसके अन्दर घुसने का प्रयास कर रहे थे, परन्तु यहाँ इस तीसरे काल में ये एक शिक्षा बन जाते हैं; प्रधान पादरी, बड़े बड़े पदाधिकारी बन जाते हैं; हालांकि उन्हें अभी पोप नहीं कहा जाता था; परन्तु आप जानते हैं, कि वे आर्क बिशप, बड़े बड़े लोग, चर्चित लोग कहलाते थे। और उनकी जो शिक्षा थी वह भी यथानियम ही थी। वे पवित्र आत्मा की अगुवाई में चलने वाली आत्मा से भरी हुई कलीसिया से दूर होते चले गये थे। उन्होंने उन्हें अल्पमत में चले जाने दिया था, और उन्होंने उन्हें धर्म-विरोधी कहा था, क्योंकि वे उनसे इन बड़ी बड़ी नामधारी कलीसियाओं के होने के विषय में सहमत नहीं थे।परन्तु सच्ची कलीसिया न्याय व्यवस्था से, न्यायाधिकार क्षेत्र से मुक्त रहना चाहती थी, और पवित्रा आत्मा की सामर्थ की आधीनता में रहना चाहती थी जैसा कि मसीह ने उनसे प्रतिज्ञा की थी, कि वह उनके साथ होगा, और वही उनका राजा था, ओह! वही उनका राजा था।56सच्ची कलीसिया ने अपना यह आचार-विचार कभी नहीं बदला है- – वह किसी बोर्ड या संध की आधीनता में रह कर नहीं चली है- मैं नहीं जानता हूँ, कि इस समय आप उन्हें क्या कहते हैं। वे कार्डिनल, और बिशप, और पोप, और अचूक-अटल कहलाते हैं। हम विश्वास करते हैं, कि एक ही अचूक-अटल है, और वही हमारा राजा है, और वह यीशु मसीह है जो इस समय हमारे साथ पवित्र आत्मा के रूप में है: परमेश्वर हमारे अन्दर है; वह हमारे मध्य में रह रहा है, और हमारी जीवन के जलों की ओर अगुवाई और मार्गदर्शन कर रहा है; वह स्वयं अपने आप को प्रकट कर रहा है- वह स्वयं अपने आप को हम पर वैसे ही दिखा रहा है जैसे उसने स्वयं अपने को आरम्भिक संतों और शहीदों के दिनों में उनके मध्य में दिखाया था; कि वह सृष्टि का प्रभु परमेश्वर है, वह बीमारों को चंगा कर रहा है, मुरदों को जिला रहा है; दर्शन दिखा रहा है, दुष्टात्माओं को बाहर निकाल रहा है।57मैं नीकुलाइयों की कलीसिया के उन सब बिशपों के विषय में जिन्होंने रोमन के पादरी समाज की- पोप समाज की स्थापना की थी एक भी ऐसी बात नहीं बटोर पाया हूँ— हमारे पास इतिहास में एक भी ऐसा अभिलेख नहीं है, कि उन बिशपों में से किसी ने कभी कोई मुरदा जिलाया हो, या इसी प्रकार का कभी कोई काम किया हो; क्योंकि मसीह; मसीह का पुनरूत्थान उनके हृदयों के अन्दर था ही नहीं। उन्होंने अपनी शक्ति बढ़ायी और नामधारी संस्था के लिए पथ विचलित हो गये, और उन्होंने अपना जन्म सिद्ध अधिकार बेच डाला।परन्तु जीवते परमेश्वर की सच्ची कलीसिया के पास मसीह की सामर्थ थी। दूसरी कलीसिया के पास तो उसके अन्दर बड़े बड़े उच्च पदासीन लोग थे; परन्तु सच्ची कलीसिया तो आत्मा पर ही स्थिर बनी रही थी। क्या आप समझ रहे हैं? ठीक है!58अब इसे देखिए….अत: कॉन्सटैन्टाइन ने अपने सम्राज्य को उसके साथ एकीकृत करने के लिए यह कियाः उसने उन नीकुलाइयों को ग्रहण किया और वह उनके पास गया जो मसीहियत का रूप धारण किये हुए थे। क्या आप इसे साफ तौर पर समझ गये हैं? वे मसीही थे- वे ऐसे तथाकथित मसीही थे जो पवित्र आत्मा विहीन होते हुए भी मसीही होने का ढोंग कर रहे थे। ओह, मैं चाहता हूँ, कि यह बात आपके अन्दर आत्मसाध हो जाये, ताकि आप इसे अपने पास से जुदा न होने दें। समझे?ये मसीही थे, ये पवित्र आत्मा विहीन नामधारी कलीसियायी मसीही थे। वे नाम के ही मसीही थे; वे आपस में एक साथ एकत्रा होने के कारण मसीही तो थे, वे प्रभु भोज तो लेते थे, वे विधियाँ तो मानते थे; परन्तु वे पवित्र आत्मा की अगुवाई को ठुकराते थे। उनके मध्य में कोई चिन्ह और आश्चर्यकर्म नहीं होते थे; वे दावा करते थे कि ये बातें तो बस आरम्भ में ही हुआ करती थी, कि उन्हें एक राज्य- एक शासन के लिए एक कलीसिया की स्थापना करनी पडी। हम इसका थोड़ी देर में अध्ययन करेंगे, कि यह किस प्रकार का राज्य है।59अब देखिए, अतः पवित्र आत्मा वाली कलीसिया को तब स्वयं अपने आप को इस प्रकार की बातों से दूर रखना पड़ा। परन्तु पिरगुमन में- – ये सारी बातें पिरगुमन की कलीसिया के दूत से कही गयी थी, क्योंकि देखिए, अब इसे करने का उसका दायित्व था।परन्तु कॉन्सटैन्टाइन की मसीहियत में कोई रूचि नहीं थी; वह तो अपने पागान पूर्वजों को अन्दर लाना चाहता था; अपनी पागान वाली कलीसिया – – या वह लौदीकियायी जो अपनी जड़ जमा चुकी थी- – और या वह नीकुलाइयों वाली कलीसिया जो रोम में अपनी जड़ जमा चुकी थी,

और उसने एक बहुत बड़ा दिखावा किया था और उनमें से बहुतेरे तो -तथाकथित- मसीही विश्वासी थे— नीमगर्म लोग थे—और सच्ची कलीसिया वैसे ही अल्पमत में थी जैसा कि वह सदैव रही थी और जैसे वह सदैव ही रहेगी। मैं बस एक मिनट के लिए रूकने जा रहा हूँ, ताकि यह बात आपके अन्दर गहराई से असलीयत में आत्मसाध हो जाये। समझे? स्मरण रखिए, कि सच्ची कलीसिया हमेशा ही एक ऐसा छोटा सा झुण्ड रही है जिसे और दूसरी कलीसियाओं के द्वारा बाहर धकेला गया है।सच्ची कलीसिया कभी भी संस्थागत नहीं हुई थी; क्योंकि वह कोई संस्थागत मत नहीं है; वह तो यीशु मसीह की वह आध्यामिक देह है जो पृथ्वी पर वास कर रही है; और जिसके सदस्यों में होकर पवित्र आत्मा। विचरण कर रहा है। अतः आप मसीह को संस्थागत नहीं कर सकते हैं; आप ऐसा कर ही नहीं सकते हैं। अब, मैं आप से यह कहना चाहता हूँ, कि आप इस बात को लौदीकियायी कलीसियायी काल के लिए थामे रहें। और इसे स्मरण रखें और इसे ध्यान में रखें, क्योंकि हर एक वह वचन जो मैं बोलता हूँ वह इस टेप पर है।60और अब स्मरण रखिएं, और इसे अपने मस्तिष्क में संजोय रखिएं: परमेश्वर की सच्ची कलीसिया कभी भी संस्थागत नहीं हुई थी।कैथोलिक कलीसिया ही वह सबसे पहली संस्था है जिसे कभी संसार में जाना गया; उससे पहले कभी कोई संस्था नहीं हुई, और वह संस्था कलीसिया की माँ है, संस्थागत कलीसियाओं की माँ है, जैसा कि कैथोलिक कहते हैं वह यही है। यह संस्थागत कलीसिया की माँ है, यह संस्थागत कलीसियाओं की माँ है; बाइबिल कहती है, कि वह यही है। अतः आप इस पर वादविवाद नहीं कर सकते हैं। उसका चित्राण प्रकाशितवाक्य 17 में किया गया है; और हम इसे देखने के लिए सीधे ही उसका अध्ययापन करने जा रहे हैं। यह बिलकुल सच है।61अब देखिएं, अतः कॉन्सटैन्टाइन ने इस बात को अपने मस्तिष्क में रखकर कि वह अपने सम्राज्य की शक्ति को बढाये- (जैसा कि रोम ने हमेशा ही किया है, ताकि वह संसार की बागडोर अपने हाथों में थामे रहे- वह अपने पागान विचारो को अन्दर ले कर आया, और उसने मसीही विचारों को भी लिया, और उसने उन्हें किसी प्रकार से एक साथ ऐसा आपस में मिला डाला, कि वे इसमें एक साथ आपस में एकीकृत हो जायें, और उसने स्वयं अपना एक ऐसा सम्राज्य बनाया कि उस जैसा कोई दूसरा ना हो। समझे? क्योंकि यह उसका- – था- – इसने ही उसे विश्व का महानतम् शासक कॉन्स्टैन्टाइन बनाया।और जहाँ तक उसके फिरने की बात है- वह था- – वह एक राजनीतिज्ञ था; परन्तु वह परमेश्वर का एक संत नहीं था, जैसा कि उनमें से कुछ लोग उसे बनाने की कोशिश करते हैं। वह ऐसा था ही नहीं। उसने कभी कदाचित ऐसा कोई एक काम तक नहीं किया था जो मुझे मसीही वाला काम लगता। उसने तो बस नीकुलाइयों वाले गिरजे में से एक गिरजे के ऊपर एक कूस लगवाया था। और जहाँ तक कुछ करने की बात है मैंने इसके अतिरिक्त उसका कोई ऐसा काम नहीं देखा जो मसीहियों वाला कार्य लगे, सिवाये इसके कि उस रात उसने अपनी ढालों पर उन्हें – कूस को- रंग से पुतवा लिया था; क्योंकि उसने एक स्वप्न देखा था, कि मसीही लोग उसके लिए प्रार्थना कर रहे हैं कि वह युद्ध जीत जायेगा। अब देखिए, इसके बाद इसने उसके राज्य को दृढ़ किया।और इसके बाद ऐसा करने के लिए वह नीकुलाई कलीसिया के अन्दर पागान पर्व, त्यौहारों, समारोहों को अन्दर लेकर आया। मैं इसे औपचारिक सांप्रदायिक चर्च कहता हूं जो कि गठन कर रहा था। उसने इस निकोलैटेने चर्च में मूर्तिपूजक समारोह लाए, और यही कैथोलिक वाद का जन्म था।62अब भाई, मैं तो इतिहास का ही हवाला दे रहा हूँ। मेरे हजारों कैथेलिक मित्र हैं, और वे मेरे लिए मेरे उतने ही मित्र हैं जितने कि मेरे प्रोटिसटेन्ट मित्र हैं। परन्तु प्रोटिस्टेन्ट हो हल्ला करने वाले नहीं हो सकते हैं। आप तब तक रूके रहिए जब तक कि आज की रात बीत नहीं जाती है। देखा, समझे? आप देखेंगे कि उन्होंने भी ठीक वैसा ही किया है जैसा कि उन लोगों ने किया था। कड़ाही केतली से नहीं कह सकती है, कि तू तैलीय है। समझे? क्योंकि वह तो- – वह तो ठीक उसी के जैसी ही है। उनके मध्य में तो ठीक एक सी ही आत्मा काम कर रही है। और इसके बाद आप यह देखने जा रहे हैं, कि मैं क्यों हर समय इस चीज की भर्त्सना करता रहता हूँ। क्योंकि वह गलत है। ठीक वह आत्मा जो मेरे अन्दर है- -यदि मैं कोशिश भी करूं, तौभी मेरे अन्दर कुछ पुकार उठता है; मैं तो इसके विषय में बस खामोश नहीं रह सकता हूँ। सदैव ही ऐसा होता है, क्योंकि….63बड़े बड़े लोगों ने बड़े बड़े धर्मिक अगुवाओं ने मुझे बताया है, ऐसे तो आप अपनी सेवकाई ही नाश कर डालेंगे। भाई ब्रन्हम, आप उन कामों को कर रहे हैं जो- -जो आपका काम नहीं है। आपको तो परमेश्वर ने बीमारों के लिए प्रार्थना करने के लिए ही बुलाया है।”परमेश्वर ने मुझे बीमारों के लिए प्रार्थना करने से भी बड़ा कुछ और करने के लिए बुलाया है। बीमारों के लिए प्रर्थाना करना तो बस एक ऐसी ही बात है, कि मैं लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच सकें। इसके विषय में तो बस यही एक बात है। बीमार; बीमारों के लिए प्रार्थना करना तो बस एक छोटी सी ही बात है। समझे? यह तो संदेश ही है, जिसके विषय में हम बातें कर रहे हैं।

वे काम तो इसके पीछे पीछे ही होते चले जा रहे हैं। एक बीमार; एक बीमार मनुष्य चंगा हो सकता है, और उसके बाद मर सकता है। परन्तु एक मनुष्य जो परमेश्वर के आत्मा से जन्मा होता है, उसके पास अनन्त जीवन होता है।अतः परमेश्वर यहाँ वहाँ चारों ओर बीमारों को ही चंगा नहीं करता फिरता है। यह तो स्थानीय देह के लिए कलीसिया के ठीक अन्दर एक वरदान होता है, पहले एक वरदान। होता है, फिर इसके बाद और दूसरा वाला आता है, और उसके बाद और दूसरा वाला आता है, तथा उसके बाद और दूसरा वाला आता है। समझे? ये तो बस वरदान ही हैं जो कलीसिया के द्वारा कार्य करते चले जाते हैं परन्तु यह तो उससे कहीं बढ़कर है; और मैं आशा करता हूँ, कि आप इसे पकड़ सकते हैं।64यही कैथोलिक वाद का जन्म- – ऐसा करने के लिए, मसीहियों का ध्यानाकर्षित करने के लिए, और पागानवादियों का ध्यानाकर्षित करने के लिए- – उन्हें एक साथ आपस में मिलाने के लिए और एक कलीसिया को जन्म देने के लिए -कैथोलिक वाद को जन्म दिया। ओह, काश इस समय मेरे पास कागज का वह छोटा सा टुकड़ा होता जिसे मैंने यहीं कहीं पर किसी दूसरी रात को रख दिया था। मैं उसे लेकर आने वाला था, और मगर मैं उसे लाना भूल गया; वहाँ कमरे में बहूत सारी चीजें रखी हुई हैं। और वे बिलकुल ठीक ऐसा ठीक इस समय कर रहे हैं। और आपने तो ऐसा करना तभी शरू कर दिया था जब आपने उस आखिरी जन को चुना था।यहाँ तक कि वे बाइबिल में यह ढूंढने का काम कर रहे हैं जो ना तो कैथोलिकों को, और ना ही यहूदियों को, और ना ही प्रोटिस्टेन्टों को ठेस पहुँचाये। वे एक ऐसी बाइबिल बना रहे हैं जो सब लोगों को उपयुक्त लगे। क्या आप एक और कॉन्स्टेन्टाइन। की धूर्तता नहीं देख सकते है? इतिहास अपने आप को फिर से दोहरा रहा है।अब, आप देखते हैं, मेरे पास है- किसी दूसरी रात को आपने इसे मुझे पढ़ते हुए सुना था; क्या आपने इसे नहीं सुना था? और मैंने इसे घर पर रख छोड़ा है। और वे इस पर एक बहुत लम्बे अरसे से काम कर रहे हैं।65अब वे कहते हैं, कि वे उन्नीस सौ बासठ में- -और ध्यान दीजिए, पोप जॉन बाइसवें ने स्वीकार किया है- -सभी पुत्री कलीसियाओं ने अपनी मातृ कलीसिया में घर वापस आने के लिए कहा है। चिन्ता ना कीजिए, वे ठीक ऐसा ही करेंगी। वे ऐसा ही करेंगी। वे पहले ही से फिर से वापस आ रही हैं। उन्हें वापस जाने की कोई आवश्यकता है ही नहीं। वे तो ठीक इस समय उसी के अन्दर ही हैं।जैसा कि मैं पहले ही से कहा रहा था, “इस राष्ट्र ने कहा था, कि ठीक है, यदि श्रीमान कनैडी चुन लिये जाते हैं, तो कैथोलिक अपना अधिकार कर लेंगे।” क्या उन्होंने अपना अधिकार कर लिया है? उन्होंने तो ऐसा बहुत समय पहले ही कर लिया है। और आप इसके विषय में कुछ नहीं जानते हैं। कौन अपने शिक्षकों को वेतन देता है? उन्हें किस प्रकार से ये बातें अपने शिक्षण संस्थानों में ले जाने के लिए मिलती हैं, और वे किस प्रकार से अपने शिक्षण संस्थानों में कैथोलिक वाद की शिक्षा दे रहे हैं? और करों का भुगतान करनेवालों, आपको इसके लिए कर देना पड़ता है। ओह, आपकी ठीक नाक के नीचे ही ऐसा होता है। समझे? ओह, मेरे खुदा, इसने किस प्रकार से अपना काम किया है।बाइबिल कहती है, कि “वह आपनी चिकनी चुपड़ी बातों से ऐसा करेगा”, और उसने ऐसा ही किया है। समझे? यह सच है। देखिए, हम बिना किसी बात के ही करों (taxes) का भुगतान कर रहे हैं। ओह, इसी प्रकार की और बहुत सी बातें हैं जो ठीक यहीं पर कहीं जा सकती हैं। मुझे उन तथ्यों में से बातें छांटनी होगी, और फिर अपना विषय लेने के लिए वापस जाना होगा।66जिससे यह योजना कियान्वित हो जाये, कॉन्स्टेन्टाइन ने बहुतेरे दुनियावी मनोरंजनों की स्थापना करी, ताकि वह पागान के मानने वालों का और मसीहियों का इस कलीसिया में ध्यानाकर्षित कर सके। क्या आपके पास आत्मिक समझ है? क्या आप इसपर विचार मनन कर रहे हैं? क्या यह इस घड़ी का संदेश नहीं है? तथाकथित कलीसिया के यहाँ बन्कों खेला हैं, पार्टियाँ हैं, वे दानों में कारें देते हैं, और वे यह सब कुछ उन्हें एक साथ आपस में मिलाने के लिए करते हैं, वे उस सामर्थ का एकीकरण करके उतना अधिक बढ़ा रहे हैं, कि वे जोर देने की एक स्थिति में पहुँच सकते हैं। ठीक यहीं पर ही- – अब देखिए, यह इतिहास का कथन है; और किसी को कोई अधिकार नहीं हैं, कि वह इस पर कुल्हाड़ा चलाये। वे तो केवल उसी का ही उल्लेख कर रहे है जो घटित हुआ था।परन्तु उसने ऐसा ही किया थाः उसने दुनियावी सुख विलासों के द्वारा, मनोरंजनों के द्वारा कलीसिया को एक साथ जोड़ा था, ताकि नुकीलाइयों की कलीसिया को उनके साथ आपस में एक साथ मिला सके। अब, याद रखिए, वह नये सिरे से जन्मी कलीसिया को छू भी नहीं सका था; वह उनमें से किसी भी जन को हूँ भी नहीं सका था। परन्तु नीमगर्म नीकुलायी वाली कलीसिया इसके लिए गिर गयी थी।67और हमारे पास हमारी प्रोटिस्टेन्ट कलीसियाओं में क्या होता है? सूप भोज, मनोरंजन, स्केटिंग, -ओह, मेरे परमेश्वर! कपड़ों की खरीद-फरोख्त, तथा इसी प्रकार का अन्य सभी कुछ। ठीक है, अब यदि यह—मित्रों, यदि यह परमेश्वर का वचन है, तो यह सच है। और सारी प्रोटिस्टेन्ट कलीसियाऐं इस बात की दोषी हैं।समझे?अब, परमेश्वर की यह कदाचित योजना नहीं थी, कि तहखानों में सूपों वाला भोज और नाँच-नृत्य हों; तथा वे सारे कार्यकलाप हों जो वे वहाँ पर पास्टर को वेतन तथा चीजें देने के लिए किये चले जाते हैं। यदि लोगों को अपना दसवांश देने के लिए सिखाया गया होता,

तो इसके लिए वहाँ पर बस यही किया जाता। यही परमेश्वर की योजना है। परमेश्वर की एक योजना होती है; लेकिन मनुष्य तो परमेश्वर की योजना को बिगाड़ कर अपनी ही निज योजना बनाना चाहता है। यह बिलकुल ठीक बात है।68अब देखिए, आगे चलकर उन्होंने ऐसा एकीकरण बनाने के द्वारा उन्होंने आरम्भिक….आरम्भिक कैथोलिक कलीसिया बनायी। इसके बाद पहली बड़ी नीसियन सभा- -जब मैंने इसे पढ़ा था, तो मैं बस अपने घुटनों पर ही गिर गया था। एक बहुत बड़ी नीसियन सभा सन् ३२५ ईसवीं में हुई थी, उन सभों को एक साथ लेकर आया गया था।मसीही विश्वास के पितरो और बिशपों को सन् ३२५ ईसवीं में नीसियन सभा में एक साथ बुलाया गया था। यही कारण है, कि सन् ३२५ ईसवीं में हुई यह सभा नीसियन सभा कहलाती है। लगभग पन्द्राह सौ प्रतिनिधि इस सम्मेलन में आयें, या लगभग पन्द्रह सौ प्रतिनिधि इस सभा में शामिल होने के लिए आये; और एक प्रतिनिधि मंडल में जन साधारणों के एक से पाँच बिशप थे।परन्तु फिर भी उन्होंने अर्थात् नीकुलाइयों की शिक्षा को मानने वालों ने नीमगर्म ठंड़ मसीहियों ने कॉन्स्टैन्टाइन की राजनैतिक-योजना के द्वारा सच्ची कलीसिया को मतदान करके पराजित कर दिया था; और उन्होंने जीत हासिल कर ली थी; और बिशपों ने लोगों में पवित्र व्यवस्था ठहरा दी थी; इस प्रकार से- -पवित्र आत्मा को सभा से हटाकर अलग कर दिया गया था, और सभा में बिशपों, कार्डिनलों, और पोपों और इसी प्रकार के दूसरे लोगों को ठहरा दिया गया था।69बिलकुल ठीक ऐसी ही चालबाजी से भरी योजना का इस पिछले चुनाव में डेमोक्रेटिव पार्टी ने इस्तेमाल किया।अब, यह सच है। अब देखिए हम नहीं हैं- – मैं तो- – और रिपब्लिकन भी ठीक वैसे ही गिरे हुए हैं। परन्तु मैं तो उस एक मशीन के विषय में बोल रहा हूँ, जिसे उन्होंने- एडगर होवर ने- कैलिफोनिया में तथा और दूसरी कई जगहों पर गलत साबित किया है उन्होंने उसे उन जगहों पर जहाँ आपको श्रीमान नीकसन को वोट देने थे लगा दिया था, ठीक उसी समय पर आपको कनैडी को वोट देनी थी। उसे एक भी मौका नहीं मिला था।ठीक है, अब उन्होंने प्रमाणित कर दिया है, कि यह गलत है। क्यों क्या वे इसके विषय में कोई काम करते हैं? हम ऐसे ही समय में रह रहे हैं। ऐसा ही है। हम अन्त समय में हैं। वे यह जानते हैं; उन्होंने प्रमाणित किया था कि वे धोखाधडी से भरी हुई थीं; और अब वे इसके विषय में कुछ नहीं करेंगे।70वहाँ पर धोखाधडी से भरी यह एक योजना थी; और यहाँ पर इसका फिर से जन्म होता है; ताकि एक निश्चित पुरूष को सत्ता में लाया जाये, ताकि एक निश्चित शिक्षा कोः

नीकुलाइयों की शिक्षा को जो कि एक बार को काम थे- – अन्दर लाया जाये; एक बार को जो काम थे वे ही अब शिक्षा सिद्धांत बन जाते हैं।एल स्मिथ के समय में ये काम थे; परन्तु अब यह एक शिक्षा सिद्धांत हैं। जी हाँ! अब, यह ठीक यहाँ पर है; अब इसे हम पर थोपा जाता है। “ ओह, वह एक ऐसा सराहनीय राष्ट्रपति होगा जो सारी समस्याओं का समाधान कर डालेगा,” इसके विषय में मेरे मस्तिष्क में कोई संदेह नहीं है। निश्चय ही, वह ऐसा ही करेगा, और अगले सत्र तक तो वह इन मूर्तिपूजकों को और इन ठंड़े गुनगुने मसीहियों को आपस में एक साथ मिला सकता है।वे लोग अर्थात् पोप और कार्डिनल बाइबिलों पर काम कर रहे हैं, ताकि आपस में मिलकर इसे लिखने का प्रयास करें। इंगलैंड़ में आर्कबिशप से, कैटबरी के आर्क बिशप से मैंने तब मुलाकात की थी। जब मैं इंगलैंड़ में था; मैंने उससे हाथ मिलाया था। उसने ऊपर तकअपने नितम्बों तक एक चुस्त पजामा पहपा हुआ था, और ओह, वह हंसी दिलानेवाली पोशाक पहना हुआ एक मनुष्य था। परन्तु वह पोप से मुलाकात करने के लिए गया था। उन्होंने सैकड़ों वर्षों के बाद पोप से मुलाकात की हैं। यह क्या है? हम अन्तिम घड़ी में हैं।71यही कारण है, कि मैं यहाँ बाहर कहीं और किसी प्रचार मंच पर प्रचार करने और बीमारों के लिए प्रार्थना करने के बजाये आज रात्रि यहाँ पर खड़ा हुआ हूँ । और मैं उन सभों से उन प्रचार मंचों पर भेंट नहीं कर सकता हूँ, और इन संदेशों को बार बार नहीं दे सकता हूँ; यही कारण है, कि हम इसे टेप पर उतार रहे हैं और इसे संसार भर में भेज रहे हैं, ताकि लोग चेतावनी पायें और विश्वास की ओर फिर जायें।यहाँ तक कि सच्चे मसीहियों के काल के अन्त पर—प्रकाशितवाक्य की पुस्तक के लिखे जाने से भी पहले ही यहूदा ने बता दिया था- यंत यहूदा यीशु का भाई-(घराने का भाई) था, उसने कहा था, ‘मैंने तुम्हे यत्नपूर्वक यह समझाना आवश्यक समझा, कि तुम उस विश्वास के लिए पूरा यत्न करो जो पवित्र लोगों को एक ही बार सौंपा गया था।” यीशु मसीह की मृत्यु के बाद से ही वे इससे दूर हटने लगे थे। और इस समय आज रात्रि इसे कितना अधिक दूर किया जा चुका है?72अब, इस पहली नीसियन सभा को देखिए, और यह सन् ३३० … ३२५ ईसवीं में हुई थी। लगभग पन्द्रह सौ प्रतिनिधि और बिशप इस सभा में उपस्थित हुए थे; परन्तु उन्होंने अन्धेरपूर्ण और तूफानी सभा में सच्चे मसीहियों को बाहर निकाल दिया था। और उन्होंने वोट डालकर उन्हें निकाल बाहर किया था और नीकुलाइयों के पक्ष में वोट डालकर उनका अधिकार करवा दिया था; और इसे सारी कलीसियाओं को अपने अधि कार में लेना था- -और उसकी देखरेख के लिए पोपों को—या बिशपों को या ऐसे ही किसी को ठहरा दिया था।

वे कलीसिया से अधिकार लेकर बिशपों को दे रहे थे, कि बिशपों को ही कलीसिया पर शासन करना चाहिए, और वही केवल एक ऐसा है जिसे इसके विषय में कुछ भी कहने का कोई अधिकार हैं।क्या आपने आज की कैथोलिक कलीसिया पर ध्यान दिया है? आप उस बाइबिल को वहाँ नहीं पढ़ सकते हैं; वहाँ आपको इसका कोई अधिकार नहीं है, कि आप इसके विषय में कुछ समझायें। यह अधिकार तो बिशप का ही है। क्या आप देखते हैं, कि यह कहाँ से आया है? अब, आप देख सकते हैं, कि इससे पहले कि नीकुलाइयों की शिक्षा रेंगकर चुपके से अन्दर आना शुरू होती- यह आरम्भ में सचमुच में क्या थी। इसका ठीक वहीं पर ही जन्म हुआ था। यह सच है। और इसने मसीहियत कर रूप धारण किया हुआ था और इसने अभी भी ठीक वही रूप धारण किया हुआ है।और इसके बाद प्रोटिस्टेन्ट बिलकुल ठीक उसी के चलन पर चलती हैं। बाइबिल प्रकाशितवाक्य के १७ वें अध्याय में कहती है, “माँ और उसकी बेटियाँ।” यदि प्रभु ने चाहा तो हम इसका थोड़ी देर बाद अध्ययन करेंगे।अब देखिए, आप ध्यान दीजिए, आज बिलकुल ठीक वैसा ही है। उन्होंने अपना अधिकार जमा लिया है। अब, देखिए, कॉन्सटैन्टाइन ने। बालाम की ही नीति-योजना का उपयोग किया था।73अब देखिए, मैं आप से यह चाहता हूँ कि आप इसे जितना ४ यानपूर्वक सुन सकते हैं आप इसे उतना ही ध्यानपूर्वक सुनें। अब देखिये, उसने यहाँ बाइबिल में कहा था, “मेरा विश्वास थामे रह।” अब दखिएं:पर मुझे तेरे विरूद्ध कुछ बातें कहनी हैं, क्योंकि तेरे यहाँ कितने तो ऐसे हैं – – (यह यहाँ पर नहीं है, लेकिन यह यहाँ पर है, उनके यहाँ ये हैं, पिरगमुन की कलीसिया में तेरे यहाँ कितने ऐसे हैं।” देखा?) जो बालाम की शिक्षा को मानते हैं जिसने बालाक को इस्राएलियों के आगे ठोकर का कारण रखना सिखाया, कि वे मूरतों के बलिदान खाएं, और व्यभिचार करें।अब देखिए, कॉन्स्टैन्टाइन ने ठीक उसी नीति योजना का उपयोग किया था जिसका बालाम ने उपयोग किया था। यहाँ इस सभा में सम्मिलित होने के पश्चात उन्होंने कलीसियाओं के ऊपर बिशपों तथा ऐसे ही और दूसरे लोगों को ठहरा दिया था, ताकि वे उन पर शासन करें। और उन्होंने जन साधारण के अर्थात् लैयटी के सारे अधिकार छीन लिये थे। और उनके पास खुद अपने आप पवित्र वचनों पर विचार मनन करने । का कोई अधिकार नहीं रहा था। और यह सारा अधिकार तो बस पादरियों के पास ही रह गया था; पवित्र वचनों का अनुवाद करने का अधिकार उन्हीं को चला गया था।74थोड़े समय के बाद अन्ततः उन्होंने एक प्रधान पादरी बना लिया, और उसे एक विकार (VICAR) बना दिया, जो कि एक पोप बना।परन्तु अब वे एक ऐसे मुकाम पर आ पहुँचे जहाँ उन्होंने सारे- – दे दिये- – को – -सारी समझ पादरियों को दे दी गयी; और जन मंडली के पास बाइबिल पढ़ने का कोई अधिकार नहीं रहा; उनका इससे कोई काम नहीं रहा; और स्पष्ट रूप से कहा जाये, तो बाइबिल को ही उन से दूर कर दिया गया। और अब उन्होंने- -उन्होंने (पादरियों ने) यह सारा कुछ अपने ऊपर ले लिया, और इसके पक्ष में मतदान दिये गये, क्योंकि यह देखने में भला लगता था।यह देखने में इसलिए भला दिखयी पड़ता था, क्योंकि वे लोग धनी थे। उनी तथा इसी प्रकार के ही लोग थे, और उसने दिया- इस सभा में जब उसने उन्हें एक साथ बुलाया- तो कॉन्सटैन्टाइन ने बिशपों को आलीशान इमारतें दीं। उसने कुछ धन दौलत पर और इन बड़ी बड़ी जगहों की आलीशान इमारतों पर अपना कब्जा कर लिया था, और उसने उन्हें तथाकथित कलीसिया को दे दिया था,

ताकि वे उनका उपयोग कलीसिया के भवन के रूप में करें। और ओह, उनके पास आलीशान इमारते थीं, वे सभी बढ़िया पोशाकों से सुसज्जित थे, तथा इसी प्रकार का माल उनके पास था।75इसके अतिरिक्त उसने इन बिशपों को बड़े बड़े अंगरखे पहनायें, और उनके नीचे घाघरे तथा इसी प्रकार के दूसरे वस्त्र पहनायें। और इसके अतिरिक्त उसने उन्हें- -या उसने ऊँचे ऊँचे स्थलों का निर्माण करवाया। और उसने उन्हें इन ऊँचे स्थलों पर एक मूरत के जैसे बैठवाया। और उसने उनके पैरों तले संगमरमर की वेदियाँ बनवायीं। और उसने ये सब परिवर्तन पागान विचारधारा की प्ररेणा में ही होकर किये। और मसीहियों के बिशपों को अपने अधिकार में लेने के द्वारा वह मसीहियत को इसके अन्दर लेकर आया।देखिएगा, उन्होंने मूरतों को बिशपों से ऊपर रखा (समझे?) उस के लिए एक वेदी बनवायी थी उसने बिलकुल ठीक ऐसा ही किया था, और उसे एक देवता बनाया गया था। वहाँ पर बिशप को रखा गया था, और उसी के पास ही कहने के लिए सारी बातें होती थीं-वही सब कुछ कहा करता था, और उसे इस प्रकार से वेशभूषा से सुसज्जित किया गया था, और उसे ऐसा ठहराया गया था कि मानों वह देवता हो। बजाये इसके कि वह उसे पागान देवताओं के जैसे वस्त्र पहनाता, उसने उसे यीशु के जैसा पहरावा पहनाकर बैठाया। देखा? उसने उन्हें ऐसा बना डाला था, कि मानो वहाँ पर एक मूरत बैठी हुई हो।ओह, आप कल्पना कर सकते हैं, कि पागान को मानने वाला किस प्रकार से कहता था, “मैं इस बात के लिए वहाँ जा सकता हूँ, वहाँ पर कोई है जो हम से प्रत्युत्तर में बातें कर सकता है। हम तो मूरत से ही बातें कर रहे होते हैं, लेकिन यह पुरूष हम से प्रत्युत्तर में बातें कर सकता है।76किस प्रकार से उन मसीहियों ने सोचा था, “अच्छा, यह तो बहुत ही अच्छी बात है, क्योंकि वहाँ पर तो हमारा देवता है। हम तो बस- -हम उससे बातें कर सकते हैं, और वह हमें बता सकता है, कि हमें क्या करना है। यदि हम पाप करते हैं? हम उसे इसके विषय में बतायेंगे; हम उसे थोड़ा सा कुछ दे देंगे, और थोड़ा सा- हम नोवीना करेंगे या हम ऐसा ही कुछ करेंगे; और सबसे पहली तो बात यह है कि तुम जानते हो कि हम बिलकुल ठीक है, और बाहर वापस जाते हैं, और फिर से आजाद महसूस करते हैं। हमें किसी बात की चिन्ता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।”ओह, निश्चय ही यह देखने में अच्छा तो लगता था। यह दुनियावी बुद्धि को अभी भी वैसा ही अच्छा लगता है, लेकिन आप नये सिरे से जन्मी परमेश्वर की संतान पर इसे जबरन नहीं थोप सकते हैं। वे कभी भी ऐसा नहीं कर सकते हैं- -क्योंकि वह जानता है, कि जिस पर उसने विश्वास और भरोसा किया है, और जिसको उसने अपने को सौंपा है। वह उसे उस दिन में बचाने में सामर्थी है। और बीती बातों को भुला कर मसीह में उच्च बुलाहट की ओर बढ़ते चले जाते हैं। ओह, आमीन! ओह, मैं इसके लिए कितना अधिक धन्यवादित हूँ।77उसके तले संगमरमर की वेदी होती थी; वह वहाँ ऊपर विराजमान होता था; वह बढ़िया वस्त्र पहने हुए होता था; उनका एक बढ़िया आलीशान गिरजा होता था- -ओह, मेरे परमेश्वर; यह सब कुछ बड़ा ही सुसज्जित होता था। यह बिलकुल सच है। और संगमरमर की इस वेदी पर मढ़ाई की हुई होती थी- -इस सुन्दर वेदी पर सोना मढ़ा हुआ होता था, और इस वेदी पर मोती और रत्न जड़े हुए होते थे- यह वेदी सुन्दर होती थी ( आपको उन्हें देखना चाहिए, वे अभी भी ठीक वैसी ही हैं।) ये नीकुलाइयों और पागान के मानने वालों के लिए बड़ी उपयुक्त थीं।क्या आपने देखा कि उसने क्या किया था? उसने पागान के पर्व-समारोहों, कों पागान की विचारधाराओं को लेकर मसीहियत में घु सा डाला था; और गुनगुने मसीहियों को कुछ भी भला मालूम नहीं था, उनके पास पवित्र आत्मा नहीं था, कि उनकी इससे अलग अगुवायी होती;और उसने उन्हें यहाँ पृथ्वी पर देवता बना डाला, और उसने उनके लिए एक वेदी बनवायी, और उसने इस प्रकार उनके पापों को क्षमा करने । के लिए वहाँ पर एक देवता आसीन कर डाला।क्या आप आत्मिक हैं? क्या आप समझते हैं कि मेरा क्या तात्पर्य है? क्या आप देखते हैं। कि यह क्या है? पृथ्वी पर पाप से मुक्ति – पाप क्षमा! मैं अपने मस्तिष्क से इन बातों का उल्लेख नहीं कर रहा हूँ; यह तो इतिहास ही है जिसका मैं उल्लेख कर रहा हूँ। मैं आपको पवित्र इतिहास की पृष्ठ संख्याँ भी ठीक वैसे ही बता सकता हूँ जैसे कि मैं आपको जॉर्न वॉशिंटन और अब्राहम लिंकन के विषय में, और गेटीसबर्ग के युद्ध तथा ऐसी ही और दूसरी बातों के विषय में बता सकता हूँ। निश्चय ही ये बातें इतिहास की हैं जिनका मैं हवाला दे कर बोल रहा78अब देखिए, तब यह बहुत उपयुक्त लग रहा था- -यह नये सिरे से जन्मी कलीसिया को उपयुक्त नहीं लग रहा था; जी नहीं श्री मान! ठीक है, अब जब उन्होंने वहाँ पर एक मनुष्य को ठहरा दिया, कि वह प्रधान बिशप हो, कि वह धर्म के अनुष्ठानों का जाप करे, तो इसने वास्तव में सम्पूर्ण सुसमाचार को ही बाहर निकाल दिया था। यह अभी ठीक ऐसा ही करता है। वे काल तो बस आगे बढ़ते चले जाते हैं; वे तो एक दूसरे पर अध्यारोपित होते चले जाते हैं, एक दूसरे स्वरूप पर, एक दूसरे दिन पर अध्यारोपित होते चले जाते हैं। ओह, जब उन्होंने वहाँ पर एक उच्च पदासीन पुरूष को देवता के जैसे ऊपर बैठाया, तो उसे कुछ धर्मिक अनुष्ठानों से भरे जाप करने होते थे….और आप ध्यान दीजिए, कि पागान धर्म को मानने वाले लोग अपने मरे हुए पूर्वजों से प्रार्थना किया करते थे। और अब प्रोटिस्टेन्ट कलीसिया का जन खड़ा होकर कहेगा, “मैं पवित्र रोमन कैथोलिक कलीसिया पर और संतों की सहभागिता पर विश्वास करता हूँ,-

-”तुम मैथोडिस्टों, तुम प्रसबीटेरियनों, और तुम लूथरनो, तुम अपना मुँह छिपा लो। कोई भी वह संस्था जो मरे हुओं से बिचवाई कराती है, वह प्रेतात्मावाद ही तो है।परन्तु इस समय प्रोटिस्टेन्ट कैथोलिक पर हंस सकते हैं, वे तो उनके जैसे ही काम करते हैं, वे यह अंगीकार करते हैं, कि वे सब कुछ करने में सक्षम हैं। वे ठीक उसी बात का विश्वास करते हैं, जिसका वे करते हैं; वे फिर से कैथोलिक वाले बपतिस्में के जैसे ही जल का बपतिस्मा देते हैं, और उन लोगों का तिरस्कार करते हैं और उपहास उड़ाते हैं, जो भली प्रकार से जीवन व्यतीत करने का प्रयास करते हैं; वे गिरजे जाते हैं और लोगों को परमेश्वर की सामर्थ में ज़ोर ज़ोर से जयजयकार करते हुए देखते हैं; और वे बाहर खड़े होकर इसका उपहास उड़ाते हैं। यह सब कुछ।79देखिए, आत्माएँ नहीं मरती हैं। लोग मर जाते हैं, लेकिन आत्माएँ नहीं मरती हैं। समझे?पवित्र आत्मा को देखिए, वह मर नहीं सकता है। वह यीशु पर था, और अब वह कलीसिया में है; वह हमेशा ही उसके अन्दर होगा, जब तक कि वह अपनी कलीसिया के लिए नहीं आ जाता है, क्योंकि वह उसी का ही एक भाग है। समझे?वह जो सतानेवाले हैं- – उन्होंने उन पिछले दिनों में उनका उपहास उड़ाया था; वे आज भी यहाँ पर रहते हैं। परमेश्वर अपने जन को तो उठा लेता है, लेकिन वह पृथ्वी पर से अपना आत्मा नहीं उठाता है। शैतान अपना जन तो उठा लेता है, लेकिन वह पृथ्वी पर से अपनी आत्मा कभी नहीं हटाता है।जिन याजकों-पुरोहितों ने यीशु की मृत्यु का अनुमोदन किया था, उन्होंने ही उसे भावी बतानेवाला, या शैतान कहा था, और वे उतने धार्मिक थे जितने कि वे धार्मिक हो सकते थे। यह सच है। उन्हें पवित्र शास्त्रा का शब्द दर शब्द ज्ञान था; परन्तु वे उसका सच्चा अर्थ नहीं जानते थे। उनके तो अपने ही निज विचार थे; और वे उसके अतिरिक्त और कुछ नहीं सुनते थे। और फिर जब उन्होंने उसे देखा और जाना- -वे यह देखने से कैसे चूक सकते थे कि यीशु उस हर एक बात पर खरा उतरा था, जो हर एक नबी ने उसके विषय में कही थी? परन्तु वे अंधे थे। परन्तु परमेश्वर ने कहा था, कि उसने उनकी आँखों को किसी एक निश्चित उद्देश्य के लिए ही अंधा किया था, ताकि हमें उद्धार का अवसर मिल सके।80अब देखिए, बाइबिल इसकी फिर से भविष्यवाणी करती है, कि वह ऐसा ही करेगा- -हम इस पिन्तेकोस्तल काल में रह रहे हैं, जो अंधा, कंगाल, और नंगा है, और वह यह जानता भी नहीं है। इस कलीसिया की स्थिति बिलकुल ठीक वैसी ही है जैसी कि फिलेदिलफिया काल की स्थिति थी। ओह, तुम गुनगुने बैपटिस्टों, प्रेसबीटेरियनों, और पिन्तेकोस्तलों- -देखो, तुम ठीक वैसी ही स्थिति में हों। कभी कभी मेरा आप लोगों से जो यहाँ पर बैठे हुए हैं ऐसा कहने का तात्पर्य नहीं होता है, मैं तो ये बातें टेप पर कह रहा हूँ (समझे आप?)

और मैं जानता हूँ, कि ये कहाँ पर जा रहे हैं समझे? प्रायश्चित करो; वापस बाइबिल की ओर फिर जाओ! वापस मसीह की ओर फिर जाओ!81बिलकुल ठीक।परन्तु यही है वह जो घटित हुआ था; पूर्ण सुसमाचार को धकेल कर निकाल बाहर कर दिया गया था। जब पवित्र आत्मा से भरे हुए झुण्ड को दूसरे लोगों के मध्य में से बाहर निकाल दिया गया, तो कलीसिया में से चिन्हों और आश्चर्यकर्मों को भी दूर कर दिया गया और इसके बाद उन लोगों ने इसका इन्कार कर दिया कि इस प्रकार का भी कोई दिन था। और ऐसा उस समय पर हुआ था….और आज वे बिलकुल ठीक वैसा ही काम करते हैं। यह बिलकुल ठीक बात है। क्या आप इसकी आत्मा को नहीं देख सकते हैं? जैसा कि मैंने आपसे आरम्भ में ही कह दिया था कि आप अपनी आत्मिक समझ धारण कर लें, होने पाये परमेश्वर ही आपकी आत्मिक समझ को खोले। आप पहले ही से कोई निर्णय न लें। बस बैठे रहे और लगन लगायें रखें, और कहें, हे पवित्र आत्मा, मुझ पर इसका खुलासा कर। मैं इसे देखता तो हूँ, यह उसमें पाया जाता है।”82धार्मिक अनुष्ठान देखिए, ये कहाँ पर हैं? बैपटिस्ट, प्रेसबीटेरियन, और यहाँ तक कि पिन्तेकोस्तल भी एक धार्मिक अनुष्ठान ही बन गये हैं। वे तो केवल यह काम करते हैं, कि वे पियानो बजाते हैं, कुछ करते हैं, या ऐसा ही कुछ करते हैं। थोड़ी देर ऊपर नीचे कूद फाँद मचाते हैं, और जैसे ही पियानो बजना बन्द हो जाता है, वैसे ही वे खामोश हो जाते है। हूँ, हूँ ! वे बाहर जाकर धोखाधड़ी करते हैं, चोरी करते हैं, झूठ बोलते हैं, और अन्य सभी कुछ करते हैं। परन्तु असली- -उनमें बज (buzz) शो के जैसे ही लड़ाई झगड़ा करने का काफी गुस्सा होता है, वे सब के विषय में तथा सभी बातों के विषय में बातें बनाते हैं- -समझे? आप ऐसी ही स्थिति में हैं। ना केवल मैथोडिस्ट, बैपटिस्ट, प्रीसबीटेरियन, कैथोलिक, ही, वरन, पिन्तेकोस्तल कलीसिया भी यहाँ इस लौदीकियायी काल में ठीक ऐसी ही स्थिति में है- -ओह, ओह, तुम वापस उसकी ओर क्यों नहीं लौट जाते हो, जो तुम्हारे पूर्वजों के पास था? क्यों नहीं तुम उस असली सच्चे पिन्तेकुस्त की ओर फिर जाते हो, जो हमें पवित्र करता है, और हमें पवित्र आत्मा से परिपूर्ण करता है, और हमें मसीह के पास लेकर आता है? यही है। वह जिसकी हमें आवश्यकता है। यह बिलकुल सच है।अब, ठीक आज।83अब देखिए, “पिरगमुन’ शब्द का अर्थ ‘वैवाहित’ होता है। पिरगमुन शब्द का अर्थ वैवाहित होता है। मसीहियत (यह नीकुलाइयों वाला पक्ष था, नीमगर्म पक्ष था) ने पागान के रीति-रिवाजों , धार्मिक अनुष्ठानों के द्वारा सत्ता से -सरकार- से विवाह कर लिया था। पागान धार्मिक अनुष्ठानों- – और यही उस दिन में कैथोलिक कलीसिया का जन्म था।अब कोई भी यह जानता है, कि कैथोलिक कलीसिया को नीसियन कॉसिल में अस्तित्व में लाया गया था। इससे पहले उसे परमेश्वर के द्वारा नीकुलाइयों कहा गया था, इस ”नीको” का अर्थ “ जन साधारण को जीतना, उसे अपने अधिकार में लेना, या उखाड़ फेंकना” होता है। और जब उन्होंने ऐसा किया तो वे लोगों के मध्य में पवित्र आत्मा और उन याजकों को नहीं चाहते थे जिनका अर्थ गड़रिये होता है। और जो पवित्र आत्मा को करने देते हैं….84आप कहते हैं, “क्यों क्या एक पादरी: पुरोहित एक गड़रिया नही हो सकता है?”वह आपको किस प्रकार का भोजन खिला रहा है? क्या आपको ठीक वैसे ही परिणाम प्राप्त होते हैं जैसे उन्हें पिन्तेकुस्त पर प्राप्त हुए थे? निश्चय ही, नहीं ! “प्रणाम हे मरिया” किसी ने क्या इसे कभी पिन्तेकुस्त पर देखा था? नवीने, ये सब छिड़काव, पानी का उंड़ला जाना, त्रिएकता वाला परमेश्वर (पिता,पुत्र, और पवित्र आत्मा) का उपयोग किया जाना, आपको कहाँ कभी पिन्तेकुस्त पर मिलता है।यीशु ने कहा था, “इस्राएल का सारा घराना, यह निश्चय जान ले, कि जिस यीशु को तुम ने कूस पर चढ़ाया था, उसे परमेश्वर ने प्रभु और मसीह दोनों ठहराया है।” यह सच है! हमें वे बातें कहाँ पर मिलती हैं? ये तो शुरू से ही नीकुलाइयों वाली बातें हैं, और उन्होंने कैथोलिकवाद के रूप में साकार स्वरूप धारण किया था।85अब, आप कहते हैं, “खैर, मैं तो निश्चय ही आनन्दित हूँ, कि मैं उनके मध्य में नहीं हूँ।” अब, आप इतने भी सुनिश्चित न रहें। अब, आप मसीहियत को, नीकुलाइयों वाली मसीहियत को स्मरण रखिए। अब क्या गाथा आपकी पकड़ में आ गयी है? इससे पहले कि हम और आगे बढ़े आप ध्यानपूर्वक सुनें। मैं चाहता हूँ, कि आप इसे समझ जायें, चाहे हमें यहाँ पर मध्य रात्रि तक ही क्यों न रूकना पड़े। अत:—? अतः— क्योंकि भाई , यह आपके प्राण का मामला है।आप कह सकते हैं, ” मैं— से सम्बन्धित नहीं हूँ— ”

ऐसी बात नहीं है— ऐसी बात नहीं है। भाई, यदि आपके पास पवित्र आत्मा नहीं है, तो मैं इस बात की परवाह नहीं करता हूँ, कि आप कितनी कलीसियाओं से सम्बन्धित हैं; आप तो नाश हो जायेंगे। यदि आपने पवित्र आत्मा के द्वारा परमेश्वर के आत्मा से जन्म नहीं पाया है, तो आप बर्बाद है, क्योंकि आप के पास अनन्त जीवन नहीं है। और अनन्त जीवन ही एक ऐसा है जिसे परमेश्वर फिर से जिला उठाएगा, क्योंकि केवल यही एक जीवन है जो बाकी रहना है।86यदि मक्का का दाना— जैसा कि मैने “ऐगरिकल्चर आर” (Agricultural Hour) के विषय में यहाँ बताया था— कितनों को हैनरीविले के मैथोडिस्ट प्रचारक बुजुर्ग भाई स्पेरगॉन याद हैं? वह एक शानदार प्रचीन चरित्र— एक दिन हम रेड फर्निश की आइस कीम की एक बड़ी दुकान में बैठे हुए आइसकीम खा रहे थे, और हम उस सभा के विषय में बातें कर रहे थे जो वहाँ ऊपर हुई थी; और रेडियों पर एग्रीकल्चर आर कार्यक्रम चालू था। और रेड़ में था- – इस वक्ता के पास एक छोटा रेड़ियो था जिसने उसने वहाँ पर रखा हुआ था- उसने उसे चलाया हुआ था। और कहीं पर वे कह रहे थे- -वास्तव में यह प्रसारण लूइसविले से आ रहा था।उसमें बताया गया था, कि ४-एच क्लब के पास एक ऐसी मशीन है, कि वे उसके द्वारा मक्का का एक ऐसा दाना बना सकते हैं। जिसके अन्दर वे कैल्शियम और पैट्रोलियम पदार्थ तथा अन्य सभी कुछ। डाल सकते हैं, और उसे बिलकुल ठीक ऐसा बना सकते हैं जैसे यह— से बना हुआ हो…87४-एच के पास यह है; विज्ञान ने उसे ऐसा सिद्ध बनाया है, कि वह मक्का ऐसी दिखायी पड़ती है, कि आप उसके बोरे में से मुठ्ठी भर मक्का निकाल कर लें जो खेत में उगी है, और आप उस मक्का के बोरे में से जो मशीन से बनी है, मुठ्ठी भर मक्का निकालकर लें, और इस मशीन वाली मक्का से ठीक उसी प्रकार का मक्का का दलिया और मक्का की रोटी बनती है जैसे कि खेत में उगी हुई मक्का से बनती हैं।और सचमुच में तो आप उन दानों को अलग अलग करके प्रयोगशाला में ले जाकर उनके अलग अलग काट कर छोटे छोटे टुकड़े कर सकते हैं, और आप उनमें कोई अन्तर नहीं बता सकते हैं; क्योंकि उनमें ठीक एक सी ही मात्रा में पैट्रोलियम पदार्थ, ठीक एक सी मात्रा में कैल्शियम और – – और नमी होती है; और वह सब चीजें होती हैं, जो एक मक्का के दाने में होती हैं वे इस दूसरे वाले मक्का के दाने में थी।उसने कहा था, “यह जानने का कि कौन सा दाना खेत में उगा था, और कौन सा दाना मशीन के द्वारा बना था, केवल एक ही तरीका है, किः उन दोनों के ही मुठ्ठी भर दाने भूमि में बो दिये जायें। वे दोनों ही सड़ गल जाते हैं, और वह जो मशीन से बना है वह फिर से उगेगा ही नहीं;

परन्तु वह जिसे परमेश्वर ने विकसित किया था फिर से उगकर जिन्दा हो जाता है। क्यों? क्योंकि वह अंकुरित ही नहीं हुआ।88और हो सकता है, कि आप एक मसीही के जैसे लगते हों, एक मसीही के जैसे आचार-व्यवहार करते हों, और हर एक वह भला काम। करते हों जो आप कर सकते हैं, और आप अपनी कलीसिया के प्रति वफादार बने रहते हों; परन्तु जब तक आपका अंकुरण पवित्र आत्मा के द्वारा नहीं होता है, आपके अन्दर परमेश्वर का जीवन, अनन्त जीवन नहीं आ रहा होता है; और यह अंगीकार करने के द्वारा नहीं, वरन पवित्र आत्मा के द्वारा ही आता है।आपको यह कैसे प्राप्त होता है? पिन्तेकुस्त के दिन चिकित्सक ने कहा था, उसने यह नुस्खा लिखा था, “मन फिराओ, और तुम में से हर एक यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले, तो तुम पवित्र आत्मा दान में पवित्र आत्मा का दान पाओगें।” और पवित्र आत्मा का दान अनन्त जीवन होता है। केवल यही एक मात्रा ऐसी चीज है जिसे परमेश्वर जिला उठाएगा। समझे? केवल यही एक मात्र ऐसी चीज है जो जा सकती है। मैं आशा करता हूँ, कि यह आपको स्पष्ट हो गया है। हे परमेश्वर, यह प्रदान कीजिए, कि यह स्पष्ट हो जाये।89अब देखिए, तब नीकुलाइयों की ओर गुनगुना पक्ष था; और उन्होंने पागान कलीसिया से विवाह कर लिया था। वे पागान की वेदियाँ अन्दर लेकर आये और उन्होंने उन्हें मसीहियत की वेदियाँ बना डाला था, वे कलीसिया में पागान देवताओं को लेकर आये और उन्होंने उन्हें बिशपों के रूप में बुलवाया- उनसे बातें करवायीं; उन्होंने उन बिशपों को ऐसे अंगरखे पहनाकर वहाँ पर विराजमान किया, कि वे देखने में देवता जैसे ही लगें। समझे? महत्वपूर्ण यह नहीं था, कि बाहर की ओर क्या था, महत्वपूर्ण तो वह था जो अन्दर की ओर था। वे दोनों मक्का के दाने एक से ही दिखायी पड़ते थे, महत्वपूर्ण यह नहीं था, कि बाहर की ओर क्या था, महत्वपूर्ण तो वही था जो अन्दर था-और अन्दर ही जीवन था। समझे?खैर, इसे वहाँ बनाया गया था, और वहीं पर उस आरम्भिक कैथोलिक कलीसिया का जन्म हुआ था, जो सभी नामधारी कलीसियाओं की माता है।90आप कहते हैं, “ठीक है, अब, भाई ब्रन्हम, जब तक मैं एक कैथोलिक नहीं हूँ- – अब आप जरा एक मिनट रूकिए,! ठीक है, आइये हम यहाँ पर थोड़ी देर के लिए उस प्रकार से रूक जायें। और अब आइये जरा हम….हम प्रकाशितवाक्य की पुस्तक का १७ वां अध्याय निकाल लें। आइये हम सीधे ही इसे निकाल कर इसे पर बातें करें। अब यह किसका प्रकाशन है? यह यीशु मसीह का उसकी कलीसियाओं को प्रकाशन है। जबकि मैं इसे पढ़ता हूँ। आप इसे ध्यानपूर्वक सुनें:और जिन सात स्वर्गदूतों के पास वे सात कटोरे थे, उनमें से एक ने आकर मुझ से यह कहा, कि इधर आ, मैं तुझे उस बड़ी वेश्या का दण्ड़ दिखाऊँ। जो बहुत से पानियों पर बैठी है।अब, जिससे मेरे पास एक गवाही हो सके-मैं जानना चाहता हूँ, कितने ऐसे लोग हैं जो यह जानते हैं कि बाइबिल में हर बार स्त्री एक कलीसिया को ही दर्शाती है- स्त्री का अभिप्राय कलीसिया ही होता है? यह बिलकुल ठीक बात है! कितने ऐसे लोग हैं जो यह जानते हैं, कि वह बड़ी वेश्या जो ठीक इसी अध्याय में पायी जाती है, एक नगर है। जो सात पहाड़ियों पर बसा है? यह बिलकुल ठीक बात है। और अब देखिए, कितने ऐसे हैं, जो यह जानते हैं, कि बाइबिल कहती है, कि यहाँ पर वह जिन पानियों पर बैठी हुई है, (पानी नहीं- वरन पानियों ) – – उन पानियों का अर्थ लोग है।क्यों, आप इसे ठीक यहीं पर पन्द्रहवाँ अध्याय निकालकर देख सकते हैं; यह यहीं पर पन्द्रह वें पद में पाया जाता है। देखा?फिर उसने मुझ से कहा, कि जो पानी तू ने देखें, जिन पर वेश्या बैठी है, वे लोग- – और भीड़- – और जातियाँ- –

और भाषाएँ हैं।देखा, समझे?91अब देखिए, यह स्त्री अधार्मिक- धर्म का त्याग करने वाली थी। क्या वह ऐसी नहीं थी? अब देखिए, यह एक शिक्षा है; अतः अब आपको अपने विवेक को धारण कर लेना चाहिए। समझे? ऐसा क्या है जो यह- स्त्री वेश्या है? यह एक ऐसी स्त्री है जो विवाह की अपनी शपथ के प्रति सच्ची नहीं है। अब कलीसिया कैथोलिक कलीसिया मसीह की दुल्हनऔर पत्नी होने का दावा करती है। यहाँ तक कि नन (धर्म बहनें) अपने बाल कटवाती हैं; और उनमें कोई स्नेह प्रेम नहीं होता है, उनका सारा स्नेह मसीह के लिए ही होता है। क्या यह सही है? निश्चय ही ! कोई भी… मैं कैथोलिक पृष्ठभूमि से आया हूँ। समझे? मेरे पास “ फेक्टस ऑफ अवर फेथ” तथा उनकी और दूसरी पुस्तके हैं; और तुम प्रोटिस्टेन्टों, और बैपटिस्टों, और आप जो चाहे हैं, आप चाहे जिसका विश्वास करते हों, वह मेरे अध्ययन में है- मैंने उसका अध्ययन किया है। अतः मैंने इसका अध्ययन किया है, चाहे जो चाहे बात कोई क्यों न कहता हो मैंने उसका अध्ययन किया है। हूँ, हूँ, मैं आपको आपकी अपनी बात तक के विषय में बता सकता हूँ। समझे?अतः वह समय आ गया है, कि यह बाहर जाये। अब पहली बात देखिए, परमेश्वर को तो देश को पार करके जाना ही है, वह चिन्ह, चमत्कार और आश्चर्यकर्म दिखा रहा है, जिससे कि लोग जान जायें। परमेश्वर की भेड़ उसका शब्द जानती है, वे जानती हैं, वे बिलकुल ठीक ठीक जानती हैं। सबसे पहले आपको पता लगाना होता है- -आप जब बिना जाने ही चले जाते हैं, तो इसके बाद आप बस- – आप क्या करते हैं? आप अपनी पहले से भी अधिक हानि करते हैं। होने पाये- – यह होने पाये, कि परमेश्वर ही इसकी देखरेख करे। समझे?92“मैं तुझे उस बड़ी वेश्या का दण्ड दिखऊँगा।” अब यदि वह ऐसी थी, तो वह एक ऐसी स्त्री थे जो किसी- -का होने का ढोंग कर रही थी- -वह व्यभिचार कर रही थी। क्या यह सही है? ठीक है, तब तो, यदि वह एक कलीसिया थी, तो वह परमेश्वर के विरूद्ध ही व्यभिचार कर रही थी। क्या यह ठीक है? तब तो यह आत्मिक भ्रष्टता-आत्मिक भ्रष्टता हुई; वह लोगों को किसी ऐसी बात की शिक्षा दे रही थी जो परमेश्वर का वचन नहीं था। क्या यह सही है? वह किसी ऐसी बात की ही शिक्षा दे रही थी जो सच नहीं है। और वह शिक्षा नीकुलाइयों की ही शिक्षा है। क्या आप देखते हैं, कि यह कहाँ से आ रही है?वह पोपों को आसीन कर रही है, वह पुरोहितों को आसीन कर रही है, और पवित्र आत्मा को बाहर निकाल रही है, और कह रही है, “ आश्चर्यकर्मों के दिन बीत चुके हैं।” और जबकि बाइबिल कहती है, कि ”यीशु मसीह कल, आज, और युगानुयुग एक सा है; और बाइबिल कहती है, “मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिए यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले”, और वह कहती है, ”पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से” छिड़काव, पानी का उड़ेला जाना लो।” देखा? ओह मेरे परमेश्वर!93अब देखिए, यह स्त्री क्या कर रही है:….जिसके साथ पृथ्वी के राजाओं ने व्यभिचार किया; और पृथ्वी के रहनेवाले उसके व्यभिचार को मदिरा से मतवाले हो गये थे।“मतवाले’ – भाई वह आपको जान से मार डालती है, आपको मौत के घाट उतार डालती है, या आपके साथ अन्य कुछ भी कर ड़ालती है। वे उस चीज से पूरी तरह से मतवाले हैं। वह मदिरा जो वह दे रही थी- (समझे?) वह उसके व्यभिचार की मदिरा थी।आप कहते हैं, “मैं आपको कुछ बताता हूँ, मेरी माँ एक कैथोलिक थी, और मैं- -” यह बिलकुल ठीक है। अब आप कहते हैं, ”यह तो बहुत ही भंयकर है।” प्रोटिस्टेन्टों, अब जरा एक मिनट के लिए ठहरे रहिएगा। (मैं इन से टेपों पर बातें कर रहा हूँ। समझे?)94तब वह मुझे आत्मा में ज्रगल में ले गया, और मैंने बैजनी रंग के पशु पर: एक स्त्री को बैठे हुए देखा जो….अब देखिए, बैंजनी; शब्द क्या दर्शता है। यह शाहीपन को दर्शाता है। तात्पर्य है- – मेरा तात्पर्य है कि इसका अर्थ राजसी -कट्टर राजसी है (समझे?) जैसे राजा महाराजा व इसी प्रकार के और दूसरे लोग होते हैं।….पशु पर जो निन्दा के नामों से छिपा हुआ था और जिसके सात सिर और दस सींग थे।अब देखिए, ये सात सिर सात पहाड़ हैं जिनपर यह नगर बसा हुआ है। और हम जानते ही हैं, कि यह स्त्री एक नगर है।।और यह स्त्री किरमिची और बैंगनी वस्त्र पहने हुए थीवह “स्त्री।” वह पशु बैंगनी रंग का था, परन्तु यह स्त्री किरमिची और बैंगनी वस्त्र पहने हुए थी। अब देखिए, क्या मैंने आपको तीन परदों के विषय में चेतावनी दी थी? मैं नहीं जानता हूँ, कि मैं कब तक जिन्दा रहूँगा, परन्तु आप इसे स्मरण रखें। जैसा कि मैंने आपको कई वर्षों पहले बताया था, “आप रूस को देखते रहें।” वहाँ पर तीन परदे थे। वहाँ पर एक परदा लोहे का था, वहाँ पर एक परदा बाँस का था (जो रेड चीन तथा ऐसा ही है) और वहाँ पर एक बैंजनी परदा था। आप उस परदे पर दृष्टि करें, वह धोखेबाज है। इतना अधिक….

95यह स्त्रा बैगनी और…. किरमिची, कपड़े पहने थी, और सोने और बहुमूल्य मणियों और मोतियों से सजी हुई थी- (क्या आपको स्मरण है, कि यहीं पर ही मैं पीछे बता रहा था, कि नीकुलाइयों की वह पहली वेदी क्या थी? समझे? स्त्री कलीसिया को दर्शाती है) — और उसके हाथ में एक सोने का कटोरा था—(क्या आपको स्मरण है, वेदी के ऊपर सोना जड़ा हुआ होता था; वह इसे लोगों को दे रही थी।) – – जो घृणित वस्तुओं से और उसके व्यभिचार की अशुद्ध वस्तुओं से भरा हुआ था:यही है वह जो वह लोगों को दे रही थी; वे उसे गटक रहे थे। निश्चय ही, ऐसा ही है! वे उसे पीकर मतवाले हो गये; वे तो बस उसे पीकर मतवाले हो गय थे। वे आयरलैंडवासी, फांसवासी, तथा इसी प्रकार के अन्य सभी लोग उसे पीकर ऐसे मतवाले हो गये कि यदि आप उस कलीसिया के खिलाफ एक भी बात कहते हैं, तो वे आपकी गर्दन ही कलम कर दें निश्चय ही, वे ऐसा कर डालेंगे। समझे?और उसके माथे पर यह नाम लिखा था, रहस्यबेबीलोन…अब देखिए, यह बेबीलोन कहाँ से हट गया था? यह बाबेल से हट कर पिरागमुन में चला गया था, और यह बन जाता है- – शैतान अपना सिंहासन एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा रहा था- -ओह, मैं चाहता हूँ, कि हम प्रकाशितवाक्य के सभी अध्यायों का अध्ययन कर सकें, जिससे आप देख सकें।…बड़ा बेबीलोन, वेश्याओं की माता…. पृथ्वी की वेश्याओं और घृणित वस्तुओं की माता।वह क्या थी? वेश्याओं की माता। वे उसके पुत्र नहीं थे, वे क्या थे?96(टेप में रिक्त स्थान-सम्पा)— उनकी कलीसिया- जी हाँ, श्री मान ! कहती है, “क्या बाइबिल में कलीसिया बाबुल नहीं कहलाती है?” देखिए, उनकी अपनी पुस्तक में ऐसा है। यह बिलकुल ठीक बात है।अब देखिए, यदि वह एक वेश्या थी, वह एक बड़ी वेश्या थी, और वह वेश्याओं की माता थी, तो उसकी पुत्रियाँ भी थीं। और यदि वे पुत्रियाँ थीं, तो वे लड़कियाँ भी थीं; वे कलीसियाएँ थीं। अब, प्रोटिस्टैन्ट कलीसिया कहाँ से निकलकर आयी है? क्या यह ठीक है? वेश्या और एक….एक बड़ी वेश्या में क्या अन्तर होता है? वे तो एक सी ही होती97मार्टिन लूथर सच्ची कलीसिया को जागृत करने के लिए- उसे एक अवसर दिलाने के लिए बाहर निकल कर आया, फिर वैसली आया, और पिन्तेकोस्तल तक यही सिलसिला चलता रहा; और उनमें से हर एक वापस नीकुलाइयों की संस्थागत होने की विचारधारा में ही बह चला था, कि जरनल ओवरसियर हों और इसी प्रकार के और दूसरे लोग हों, और वे वापस उसी बपतिस्मे की ओर फिर गये जिससे उनका बपतिस्मा हुआ था, वे ठीक उन्हीं कर्मकाण्डों, ठीक उन्हीं धार्मिक अनुष्ठानों की ओर लौट गये, और यहाँ तक कि उनमें से अनेकों के पास कैटेकिजम, और “प्रणाम मरिया” वगैराह वगैराह हैं। प्रणाम मरिया नहीं, वरन- -यह क्या है जो बिलकुल ठीक वैसी ही चीज है? प्रेरितों का मत।भाई आप जरा मुझे बाइबिल में प्ररितों का मत तो दिखाओ। यदि-यदि उनका कोई मत था, तो वह प्ररितों के काम २:३८ था। यही है वह जो उन्होंने सब लोगों को करने की आज्ञा दी थी । कहाँ पर आप यह बात सुनते हैं, कि एक प्रेरित ने एक ऐसा मत बनाया, कि कहा जाये,“मैं पवित्र रोमन कैथोलिक कलीसिया पर विश्वास करता हूँ, मैं संतों की सहभागिता पर विश्वास करता हूँ?”

जब कि उस पतरस ने जिसके पास कुंजियाँ थीं, यह कहा था, “परमेश्वर और मनुष्य के बीच मसीह यीशु को छोड़ और कोई बिचवाई नहीं है।”98परन्तु प्रोटिस्टेन्टों पर दृष्टि डालिए। उन्होंने क्या किया था? वे सन्तुष्ट नहीं हो सकते थे। उनमें से हर एक जो बाहर निकल कर आये थे, वे पिन्तेकुस्त वाली आशीषों के साथ ही बाहर निकल कर आये थे। यह बिलकुल सच हैं यहाँ तक कि मार्टिन लूथर ने भी अन्यान्य भाषाएँ बोली थीं। यह बिलकुल सच है। स्वयं उसने यह कहते हुए क्षमा मांगी थी, ‘हे परमेश्वर, मैं इन भंयकर शब्दों को जो मैंने बोले हैं, नहीं जानता हूँ, और मैं नहीं जानता हूँ, मैं क्या कह रहा हूँ।” समझे? निश्चय ही वह इसमें विश्वास रखता था। उसने यकीनन इस पर विश्वास किया था।अब देखिए, उस काल के अन्त तक उनके पास- उनके पास आत्मा था; परन्तु वे हमेशा ही उससे दूर चले जाते हैं, और जब उनके प्रथम संस्थापक गुजर गये तो उसके बाद उन्होंने उनके पीछे संस्थाएँ बना लीं। और यदि आप लूथरन कलीसिया को ठीक वैसे ही चलते रहने देते। और उसे संस्थागत न करते, तो वह पिन्तेकुस्त वाली जैसी ही कलीसिया ही होती। पिन्तेकुस्त वाली कलीसिया क्या होती है, मेरा तात्पर्य है, कि सच्ची पिन्तेकुस्त वाली कलीसिया क्या होती है? वह पिन्तेकोस्तल कलीसिया नहीं है, वह तो अब फिर से वैसे ही केतली और कड़ाही है। समझे? परन्तु उन्होंने ठीक वैसा ही काम किया है; उन्होंने नीकुलाइयों को उसमें ठीक वैसे ही मिला लिया ठीक जैसे कि उन्होंने आरम्भ में उन्हें मिला लिया था। कितनों को यह दिखायी देता है? वे आमीन कहें, (मंडली कहती है, “आमीन।”) यह ठीक बात है। अब जिससे कि मेरे पास आपकी बात हो…99आप वेश्याओं की माता को देखिए- -यदि वे वेश्याएं हैं, तो वे किस प्रकार से वेश्या बनी हैं? परमेश्वर के वचन के विरूद्ध व्यभिचार करके ! यदि वचन ने कहा, “मन फिराओ, और तुम में से हर एक यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले” और वहाँ पर हर एक ने ”यीशु ” के नाम से बपतिस्मा लिया था और फिर भी तुम पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा लेते हो। और यही वेश्यावृत्ति है। क्या यह ठीक है। और यदि बाइबिल जल में डुबाने के द्वारा बपतिस्मा कर रही है; बपतिस्मो एक ग्रीक शब्द है। तो फिर आपको पानी का छिड़का जाना और पानी का उंडेला जाना कहाँ से मिलता है? यह कहाँ से अन्दर आया है?यदि आप पवित्र आत्मा के विकल्प के रूप में हाथ मिलाना, या अपने होठों पर वेफर को ग्रहण करके उसे निगलना या इसी प्रकार का अन्य कुछ अपनाते हों, जबकि पवित्र आत्मा तो स्वर्ग से आँधी की सनसनाहट के साथ आया था, और उसने लोगों को भर दिया था; और वे अन्यान्य भाषाएँ बोलने लगे थे और चीखने चिल्लाने लगे थे और लोगों से ऐसा व्यवहार करवा रहा था, कि मानो मदिरा की नशे में हों। और तुम ने उसके बदले में हाथ मिलाना या अपने नाम को कलीसिया में लिखवाना, या इसी प्रकार का ही कुछ अपना लिया है; आप किस प्रकार से आत्मिक व्यभिचार करने के इन तौर तरीकों से कभी बाहर निकलने जा रहे हैं?100अब , बस यह आप अपने आप से पूछे। आप अपने मस्तिष्कों को झिझोंड़ों; अपने हृदयों को खोलों

और सत्यनिष्ठ बन जाओ, भाई। हम अन्त के कगार पर हैं। यहाँ पर ये सभाएँ बस यूँ ही व्यर्थ में नहीं हो रही हैं; ये तो परमेश्वर की ही आज्ञा थीं। मैं विश्वास करता हूँ, कि यह बात बिलकुल ठीक वैसे ही सुनिश्चित है जैसे मैं—आप विश्वास करते हैं, कि मैं उसका दास-सेवक हूं। और मैं यह बात यीशु के ही नाम पर कहता हूँ, कि परमेश्वर ने ही मेरे हृदय पर यहाँ आने के लिए रखा था। मुझे इसे करने के लिए एक भी कौडी नहीं मिलती है।मैं यहाँ पर किसी जगह पर बीमारों के लिए प्रार्थना कर रहा हो सकता था अथवा मैं इसी प्रकार का कुछ काम कर रहा हो सकता था; अथवा मैं कहीं बाहर जाकर मछली पकड़ रहा हो सकता था; और बस अपने लिए कुछ धन अर्जित कर रहा हो सकता था; मुझे कलीसिया से एक पगार मिलती है। परन्तु परमेश्वर ने ही इसे मेरे हृदय पर रखा है, मैं इससे दूर नहीं हो सकता हूँ, यह बस मेरे अन्दर गूंजता रहा है; और मैं वह सब कर रहा हूँ जो मैं कर सकता हूँ जो मैं जानता हूँ, कि कैसे करना है। होने पाये कि यह आपके पास से गुजर कर न जाने पाये।101अब, तुम प्रोटिस्टैन्टों, क्या तुम देख सकते हों, कि मेरा कैथोलिक कलीसिया और प्रोटिस्टेन्ट से क्या तात्पर्य है? बस- – वे तो बस एक दूसरे के ठीक जैसे ही हैं। यह बिलकुल सच है।अब देखिए, इसका अर्थ वैवाहित होता है,-पिरगमुन का अर्थ वैवाहित होता है। अब आइये हम इसे लें- – जो वह कहता है, “तेरे यहाँ तो कितने ऐसे हैं जो बालाम की शिक्षा को मानते हैं।”आइये हम बस इसका अध् ययन करें। क्या आप के पास समय है? मैं उतनी शीघ्रता करूंगा जितनी कि मैं कर सकता हूँ। अथवा आप ऐसा करने की बजाये बस प्रतीक्षा करेंगे, और देखेंगे, क्या हम सुबह को फिर से आयें? कितने ऐसे हैं जो ऐसा करने की बजाये यह चाहेंगे, कि हम थोड़ी देर के लिए और आगे बढ़े? आइये बिलकुल ठीक है। अब, मैं – मैं जानता हूँ, कि यहाँ पर गर्मी है। और यदि आप अभी भी बैठे हुए हैं, और आपको गर्मी लग रही है, तो आप यहाँ पर क्या सोचते हैं? समझे आप? परन्तु ओह, मेरे परमेश्वर, हम उस स्थान से हटने का प्रयास कर रहे हैं जो गर्म है। यही है – वह है, क्योंकि हम अनन्त हैं।102अब।अब देखिए, जब उन्होंने उस प्रकार की कलीसिया स्थापित । कर ली थी, तो फिर उसके बाद सचमुच में क्या हुआ था? अब हे मेरे बच्चों, बड़ी ही ध्यानपूर्वक सुनिएं, क्या घटित हुआ था? क्यों, उन्होंने तो पवित्र आत्मा को ही सचमुच में उसमें से निकाल बाहर कर दिया था। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि उनके बिशपों में से किसी ने भी कोई आश्चर्य कर्म नहीं किया था, या कभी कोई मुरदा नहीं जिलाया था। और वे ये बातें तो करते हैं, कि उनकी कलीसिया में इन पवित्रा लोगों में से कुछ रहे थे, जबकि इन्होंने तो उनका विरोध ही किया था, और फिर भी वे उनका दावा करते हैं।जॉन ऑफ आर्क को देखिए, वह एक युवा लड़की थी। मैं तुम कैथोलिकों से, तुम प्रोटिस्टैन्टों से या आप जो कोई भी हैं पूछता हूँ। उन दिनों में, जॉन ऑफ आर्क के दिनों में फ्रांस में और कुछ नहीं, वरन कैथोलिक कलीसिया ही थी; उन्होंने पवित्र लोगों को रौंद डाला था।

परन्तु परमेश्वर ने उस लड़की पर विचरण किया, और उस लड़की के पास पवित्र आत्मा था। और उसने क्या किया था? वह भविष्य में होने वाली घटनाओं को पहले ही से बता सकती थी; प्रभु उसे दर्शन दिखाता था, और वह भावी बता सकती थी। उसने बीमारों के लिए प्रार्थना की थी। उसने एक मुरदे छोटे बच्चे के लिए प्रार्थना की थी और वह फिर से जी उठा था। वह एक पिन्तेकोस्तल थी। समझे?और कैथोलिक कलीसिया ने उसके साथ क्या किया था क्योंकि उसने कैथोलिक कलीसिया का विरोध किया था? उन्होंने उस पर मुकदमा चलाया, और उसे जादू-टोना करने वाली के रूप में लठ्ठे से बाँध कर जलाकर मार डाला था।103और अब आप कहते हैं, संत जॉन ऑफ आर्क’ लगभग दो सौ वर्षों के बाद जब उस कलीसिया को यह पता चला, कि उसने उसके साथ क्या किया था, तो यकीनन उसने इसके लिए प्रायश्चित किया था। और वह एक संत थी। उसने उन पादरियों की लोथों को खोद कर बाहर निकाला जिन्हें उन्होंने मृत्यु दण्ड दिया था, और जिन्हें उन्होंने नदी में फेंक दिया था। क्या आप सोच सकते हैं, कि क्या वह कभी अपने हाथ से लोहू धो सकती है?बाइबिल कहती है, ‘हर एक शहीद का लोहू उसके ऊपर पाया जाता है। और यही है वह जो प्रभु के दूत से कहा था, उसने बाबुल में यह पाया, ‘हर एक हत्या- -शहीद- -मसीह का हर एक सन्त यहीं पर शहीद किया गया; नीकुलाइयों से लेकर आगे सभी कालों में यहीं पर शहीद किये गये।’ इसके विषय में सोचिए! ( धन्यवाद, भाई बेन) अब जरा, इसके विषय में सोचिए!104अब, आइये हम थोड़ा और आगे चलते हैं। मसीही कलीसिया ने बाबुल से विवाह कर लिया था। ‘पिरगमुन’ शब्द का अर्थ ‘विवाह करना होता है। अब आप बालाम के शिक्षा-सिद्धांत को देखिए।’ तेरे बीच बहुतेरे ऐसे हैं जो बालाम की शिक्षा को मानते हैं।’ओह, मुझे ये बातें बस प्रिय लगती हैं। ओह, आप काश इस वाली शिक्षा पर थोड़ी देर के लिए रूके रहें। परन्तु आप बस- -हम चाहते हैं, कि आप इसे देख लें, और इसके बाद किसी दूसरी बात पर आगे बढ़े, क्योंकि यह तो बस- – बस सोने के ढल्हों से भरा हुआ है।मैं तो किसी भी बात का बारीकी से अध्ययन करनेवाला हूँ। मुझे नीचे जाकर इन सोने के ढल्हों को खोद कर बाहर निकालना, और उन्हे चमकाना, और उन पर इस प्रकार से पॉलिश करना और उन पर दृष्टि डालना अच्छा लगता है। और उनमें से हर एक यीशु को ही दर्शयेगा; उन में से हर ऐसा ही करेगा। वही अल्फा और ओमिगा है, वह उन सोने के ढील्हों। का प्रत्येक कैरेट है। यह सच हैं वही उसका प्रत्येक अल्पांश मात्र है। यही कारण है, कि वही वो परमेश्वर है जो हमारे मध्य में देहधारी हुआ।105अब, जिससे हम इसे समझ जायें- – मैं- – मैं इसके लिए समय नहीं लूंगा, क्योंकि मेरे पास हैं- – मैं देखता हूँ, कि नौ बज गये हैं। और मेरे पास- –

मेरे पास एक और बात है जिसे प्रभु ने चाहा, तो मैं आज रात्रि लेना चाहता हूँ। और मैं चाहता हूँ, कि आप बस इसे लिख कर रेखांकित कर लें, और आप इसे कल पढ़ लें। आप गिनती २२ से लेकर २५ तक लिख लें। अब मैं इसे पढ़ना चाहता हूँ, और आप इसे मेरे पीछे पीछे पढ़ सकते हैं। और अब- – और अब गिनती २२ से लेकर २५ तक देखिएं।अब हम जानते हैं, कि इस्राएल- – इस्राएल परमेश्वर की चुनी हुई प्रजा थी। क्या यह सही है? वे थे- – वे पिन्तेकोस्तल थे। उनके मध् य में आत्मा था। आपको गत रात्रि का संदेश याद होगा, कि यह कैसे हुआ था, कि जब मूसा ने लाल सागर को…..मृत सागर को पार किया था, तो उसने अपने पीछे समुद्र में लोहू पाया था। वह लोहू को दर्शा रहा था)- -वे सब सताने वाले जिन्होंने उसे और इस्राएल की उन सब संतानों को मारा-पीटा था- -अपने पीछे सागर में पाया। मूसा ने अपने हाथ ऊपर उठायें और आत्मा में होकर गीत गाया।ओह, हम में से हर एक मूसा हो सकता है, जब हम पीछे मुड़कर यीशु मसीह के लाल लोहू पर दृष्टि डालते हैं और देखते हैं, कि हर एक पुराना पियक्कड़, हर एक शराब की पुरानी बोतल, हर एक पुरानी छिछौरी स्त्री, हर एक वह गन्दे-भद्दे कार्य-कलाप जो कभी हमने अपने जीवन में किये- वह सब कुछ प्रभु यीशु के लोहू में मर चुके हैं। यही हम से आत्मा में होकर गीत गवाता है। सिगरटें, तम्बाकू, और बुरी बुरी आदतें तथा अन्य सभी कुछ प्रभु यीशु के लोहू में मर खप जाता है। इसके बाद हम अपने हाथों को ऊपर उठा सकते हैं, और आत्मा में होकर गीत गा सकते हैं। देखा?106देखिएगा, मरियम, भविष्यद्वक्तनी ने क्या किया था? अब, स्मरण । रखिए, वह एक भाविष्यद्वक्तनी थी। उसने ढुफली उठायी, और वह ढुफली बजाने लगी और आत्मा में होकर नाँचने लगी; और इस्राएल की पुत्रियों उसके पीछे पीछे ऐसा ही तट पर करने लगीं; वे इन ढफलियों को बजा रही थीं और आत्मा में होकर नाँच रही थीं। यह एक असली पिन्तेकुस्त था।और उसके बाद आप उन पर तब ध्यान दें जब वे मोआब में आयें। अब देखिए, हम वापस आ रहे हैं- -अब हम पवित्र वचन पर ही हैं-हम बालाम की शिक्षा पर ही हैं। और मोआब- – मोआब इस्राएल का भाई ही था। कितने लोग यह जानते हैं, कि मोआब कहाँ से निकल कर आया था? मोआब वह है जिसे मैं दोगला ही कहूँगा; इसका कारण यही है, कि मोआब की उत्पत्ति लूत की पुत्रियों से हुई थी।लूत के अपनी ही पुत्री के द्वारा एक बालक उत्पन्न हुआ था, उसके अपनी ही पुत्रियों से दो संतानें उत्पन्न हुई थीं। और उन्हीं में से एक मोआब था, और उसी ने ही मोआब का- मोआब जाति का देश बनाया था। और लूत वास्तव में अब्राहम का ही भतीजा था, जो कि वास्तव में ठीक उसी वंशावली से था। हम यह जानते हैं।अब, मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आप इस पर ध्यान दें, कि वे मूर्तिपूजक नहीं थे, जैसाकि हमारे हाल-फिलहाल के नाट्य आपको बताना चाहेंगे- – स्मरण रखिएं, वे विश्वासी थे। अब, जब इस्राएली प्रतिज्ञा किये देश को जाते हुए अपने पथ पर यहाँ आते हैं, तो वे अपनी कर्तव्य परायणता में ठीक अपने पथ पर थे और यहाँ पर मोआब ठीक उनके मार्ग में था। उन्होंने मोआब के पास दूतों को यह कहला कर भेजा, ‘हमें अपने देश से होकर पार जाने दे। हम तेरे भाई बन्धु हैं।’107अब देखिए, मोआब नीकुलाइयों को दर्शाता था। अब, जरा आप एक मिनट के लिए दृष्टि डालिए। इस्राएल ने सच्ची कलीसिया को दर्शाया था। और बालाक उस दुनियावी मसीहियत के बिशपों में से, पोपों में से एक था। (अब आप दृष्टि डालें, और देखें।) अब, हम देखेंगे कि वह वरदान पाया हुआ एक जन था।

इसके विषय में कोई सन्देह नहीं है। उनमें से बहुतेरे शानदार वक्ता हैं, और दर्शनशास्त्र के विद्वान हैं, और- और महान पुरूष हैं। आप इस बात से इन्कार नहीं कर सकते हैं। परन्तु “वे भक्ति का भेष तो धरते हैं, परन्तु उसकी शक्ति का इन्कार करते हैं।” आप उसी मूल पिन्तेकुस्त को थामे रहें। आप उससे विचलित न हों। जब आप ऐसा करते हैं, तो आप नाश हो जाते हैं। वह तो आशीष देनेवाले की ही आशीष है।108अब, आप उस पर ध्यान दें, जबकि उन्होंने यात्रा की थी। वे इस गुनगुनी दोगली कलीसिया के पास आयें, और बोले, “हम यहाँ से एक बेदारी के लिए आगे बढ़ रहे हैं। हम प्रतिज्ञा किये देश की ओर जा रहे हैं, क्या तुम हमें यहाँ से होकर जाने की अनुमति दे दोगे? यदि हमारे गाय-बैल भी तुम्हारा कुछ घास चट कर जाते हैं, यदि वे कुछ पानी भी पी जाते हैं, तो हम उसका दाम चुकायेंगे।”फिर इसके बाद….? राजा, बालाक ने क्या किया- -वह बहुत ज्यादा । उत्तेजित हो उठा, और वह उस प्रकार की सभा अपनी कलीसिया में या अपने देश में नहीं चाहता था। अतः उसने क्या किया? उसने उस पोप- या उस बिशप के पास, उस वेतनभोगी भविष्यद्वक्ता बालाम के पास बुलावा भेजा जो परमेश्वर से कहीं ज्यादा धन-सम्पत्ति से प्रेम करता था।और राजा बालाक ने उसे बताया “यदि तू यहाँ आकर इन लोगों को स्राप देगा, तो मैं तुझे बड़ा आदमी बना दूंगा।” और परमेश्वर बालाक से बोला-और मुझे आश्चर्य है कि क्या ऐसा ही कुछ के साथ होगा- मेरा तात्पर्य है, कि परमेश्वर ने बालाम से बात की- -मुझे आश्चर्य है, कि कितने ही बालाम आज रात्रि संसार में हैं? मैथोडिस्ट प्रचारक, बैपटिस्ट प्रचारक, कैथोलिक पादरी (उन पर दया होवे) जो मानते हैं,

कि परमेश्वर- -काश काश आपने ठीक वही इतिहास और पुस्तक पढी होती, जो मैं पढ़ता हूँ। बालाम109अब, ध्यान दीजिए, इसके बाद उसने कहा, “यहाँ नीचे आ, और इन लोगों को स्राप दे।”और बालाम बोला, “ओह, मैं परमेश्वर से पूछेगा।”परमेश्वर ने कहा, “तू मत जाना”परन्तु अगली सुबह जाकर उसने उसे यह बात बतायी, और उसने यह बात उस पुरोहित को, उस राजा को जाकर बतायी। और उसने वापस आकर उससे कहा, “मैं- -मैं- मैं तुझे एक बहुत बड़ा इन्सान बना दूंगा।”अत: बालाम परमेश्वर से आग्रह करता रहा, और परमेश्वर ने कहा, “तो फिर जा, तू चला जा।”देखिएगा, यदि आप सच्चाई पर नहीं चलते हैं- – तुम नीकुलाइयों, तुम सोचते हो, क्योंकि परमेश्वर ही तुम्हारे लिए ऐसा कर रहा है जैसा कि तुम काम करते हों- -कि – -इस बात में एक मूल सच्चाई है। तुम तो परमेश्वर की केवल “बार बार आग्रह करके प्राप्त इच्छा” को ही ग्रहण कर रहे हों। तुम कहते हो, “परमेश्वर हमें पवित्र आत्मा देता है”, या तुम कहते हो, “वह हमें आशीष देता है, और हमने पिता पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम में बपतिस्मा लिया है।” तुम नीकुलाइयों; तुम बालाम की शिक्षा को मानते हो।जब वह बहुत अधिक हठी करने लगा, तो परमेश्वर ने उसे जाने के लिए कह दिया। उसने उसे बस आगे बढ़ जाने दिया, क्योंकि वह अपनी ही इच्छा पर अड़ा रहा था। आपको तो वापस सच्चाई की ओर, मूल सैद्धान्तिक सच्चाई की ओर, बाइबिल की ओर ही फिरना है। आप कहते हैं, “ओह, उसने हमें आशीष दी है। और – -” ओह, मैं यह जानता हूँ।उसने बालाम को बता दिया था, उसने बालाम से कह दिया था, “यदि तू जाना चाहता है, तो तू चला जा; यदि ऐसा ही है- – तू उस मार्ग पर जबरन ही जाना चाहता है; और तू अपना संस्था वाला मार्ग ही पकड़ना चाहता है, तो तू उसे पकड़ ले, तू चला जा।’110इसके बाद बालाम चलने लगा, वह कूद कर अपने खच्चर पर जा चढ़ा- -या नहीं वह अपने खच्चर पर नहीं, अपनी गदही पर चढ़ बैठा, और वह वहाँ से रूकसत हो लिया। और पहली बात आप जानते हैं, यहोवा का दूत उसके मार्ग में खड़ा था। और आप जानते हैं, वह भविष्यद्वक्ता, वह पोप, वह बिशप, वह कार्डिनल, या वह जो कोई भी था, वह आत्मिक बातों के लिए बहुत ज्यादा अंधा हो गया था; वह तो अपने इस विचार से ही भरा हुआ था, कि उसकी पदोन्नित होने जा रही है; क्योंकि वह इरफात की नदी के तट पर रहता था। मैं सोचता हूँ, कि उसने सोचा था, कि यह कोई ऐसी ही पैतृक सम्पत्ति है, जैसे कि यह है, कि “हे पतरस, मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊँगा;” या यह किसी उस पत्थर पर हो जो रोम में हो, या यह ऐसी ही कोई चीज हों।परन्तु जब वह उस स्थान पर पहुँचा, तो प्रभु का दूत अपने हाथ में नंगी तलवार बाहर निकाले हुए खड़ा था। और वह इतना अधिक अंधा हो गया था, कि वह इसे नहीं देख सका था। और खच्चर ने उसका पांव दीवार से जा रगड़ा, और इसके बाद भी उसने उसे हांका, और दूत उसके मार्ग में फिर से खड़ा हुआ था। परमेश्वर हर एक द्वार बन्द कर डालेगा। और यह खच्चर इस बार भी पीछे हटा। और वह उस पर से उतरा, और उसने अपनी छड़ी ली,

और वह उसे पीटने लगा, ताकि वह आगे बढ़े। यह छोटी गदही वहाँ पर लेटी हुई पड़ी थी, अपने सिर पर मार खा रही थी—111और मैं आपको बताऊँगा, कि किसने उसे उल्टा फेरा, किसने उससे ऐसा करवाया, कि वह हरकत करे, या उसे बताया कि उसने कहाँ गलती की है; परमेश्वर ने ही उस खच्चर को अन्य अन्य भाषा बोलने दी थी, वह खच्चर नहीं थी वह तो एक गदही थी। आप यह न कहें कि वह एक खच्चर था, उसे यह नहीं मिल सकता, वह तो दोगला है। देखिए, वह गदही तो एक मूल बीज हैं ।मोआब के पास बीते हुए समय के चिन्ह थे, उनके पास बीते हुए समय की बातें थीं,; और इस्राएल के साथ साथ चिन्ह चल रहे थे। परन्तु यह छोटी सी गदही पीछे मुड़ी, और बोली, ‘क्या मैं तेरी गदही नहीं रही हूँ? क्या कभी मैंने- -‘ और वह- – वह अंधा बिशप उसके ऊपर बैठा हुआ था, वह अभी भी उस खच्चर को पीट रहा थाऔर वहाँ पर वह खच्चर उस अन्यान्य भाषा को बोला जो खच्चर के लिए अनजान होती है।और उसने कहा, “हाँ, तू है- -तू मेरी ही गदही है।”“और क्या – -क्या – क्या मैं तुझे ढोकर नहीं ले गयी हूँ, या क्या मैंने तुझे नाकाम किया है?”“नहीं तू ने ऐसा नहीं किया हैं लेकिन यदि मेरे पास तलवार होती, तो मैं तुझे जान से मार डालता। मुझे इस सभा को रोकना है। मैं अपने मार्ग पर वहाँ नीचे जा रहा हूँ, कि उन पवित्र पांखंड़ियों के झुण्ड को जो इस देश में से होकर जा रहे हैं रोक दें। मैंने- मैंने इस बात का जिम्मा उठा लिया है।” समझे?112और पहली बात आप यह जानते हैं, कि उसने चारो ओर दृष्टि डाली, और उसने सोचा, “यह तो बड़ी अजीब बात है। मैं इस खच्चर को बोलते हुए सुन सकता हूँ।” ओह, बालाम!देखिएं, परमेश्वर ने हमेशा ही लोगों से अन्यान्य भाषाओं में बातें की हैं। उसने ऐसा के दिनों में किया था…. आप कहते हैं, “ऐसा तो बस पिन्तेकुस्त पर ही हुआ था।” ओह नहीं, ओह नहीं ! बेलसेस्सर की जेवनार में उसने अन्य अन्य भाषा में बात की थी, उसने अन्य अन्य भाषा में दीवार पर लेख लिखा था। वहाँ उनके पास एक पुरूष था जिसके पास अनुवाद करने का वरदान था, और उसने उनके लिए इसका अनुवाद किया था; उसने उन्हें बताया था, कि यह क्या था। और बिलकुल ठीक वैसा ही आज है।113क्योंकि वहाँ पर इसके लिए कोई अनुवादक नहीं था, इसलिए परमेश्वर ने ही ऐसा होने दिया था, जिससे उस बूढे बालाम की, उस कार्डिनल की आँखें खुल जायें और उसे इसका एहसास हो जाये, कि यह क्या है। और क्या आप जानते हैं, कि वह अंधा इंसान किसी भी तरह से आगे बढ़ निकला था? निश्चय ही; बिलकुल ठीक इसी प्रकार से ही बिलकुल ठीक ऐसा ही काम वे मोआबी, वे नीकुलाई लोग करते हैं, वे बस आगे बढ़ते रहते हैं। और वे ठीक वहाँ पर पहुँचे और वह गया….

अब दृष्टि डालिएगा, यदि परमेश्वर सिद्धांतवादी मत को मान्य ठहराता है, तो परमेश्वर इस बात के लिए कर्तव्यबद्ध है, कि वह मोआब को आशीष देता; क्योंकि ( ध्यान दीजिए!)- -बालाम ने सात वेदियाँ बनायीं थीं। यह बिलकुल ठीक अंक सात है: यह सात कलीसियायी कालों को दर्शाता था । क्या आप देखते हैं, कि ये कैसे आत्मिक बातें हैं?अब देखिए, अब आप इसे पकड़े रहें। आत्मिक बातों पर ध्यान रखें; मैं एक ही मिनट में एक कठिन बात पर आने जा रहा हूँ। समझे? आत्मिक बातें-सात वेदियाँ, सात बैल, (शुद्ध पशु) और सात मेढे, मसीह के आगमन के विषय में बताते थे।- वे सैकड़ों वर्ष पहले ही उसके आगमन के विषय में बताते थे।114परन्तु वे विश्वास करते थे। वे क्या विश्वास करते थे? वे यहोवा परमेश्वर पर ही विश्वास करते थे। इसके अतिरिक्त वे क्या विश्वास करते थे? वे विश्वास करते थे कि एक साफ-सुथरा बलिदान चढ़ाया जाना है। यह सच हैं। और उन्होंने दावा किया था, कि वे इस बात का विश्वास करते हैं, कि मसीहा आ रहा है; क्योंकि उन्होंने एक नर भेड़ (जो कि मेढ़ा था)चढ़ाया था। क्या यह सही है?अब जरा आप इन बातों की तुलना एक बार को बैपटिस्टों से करें, और यह पता लगायें, कि क्या वे बिलकुल ठीक ऐसा ही काम नहीं करते हैं। यह बिलकुल सच है। ठीक है, अब देखएगा, कि उनमें क्या अन्तर था? यहाँ नीचे पहाड़ी की तलहटी पर इस्राएल था और ठीक वैसे ही बलियाँ चढ़ा रहा था जो उन्होंने यहाँ ऊपर चढ़ायीं थीं; और वे ठीक एक ही परमेश्वर से बातें कर रहे थे। क्या आप उन नीकुलाइयों को, उन दोगलों को नहीं देख सकते हैं? या आप इसे देखते हैं? क्या आप को सच्ची आत्मिकता नहीं दिखायी। पड़ती है? उनमें क्या भिन्नता थी? उनमें से एक तो ऐसा था, कि उसके साथ साथ चिन्ह पाये जाते थे। एक के पास तो दिखावा था, जबकि दूसरे के पास चिन्ह थे।115बिलकुल ठीक ऐसा ही यहाँ पर नीसियन सभा में, नीकुलाइयों की गुनगुनी मसीहियत में हुआ था। और पवित्र आत्मा वापस आता है, और कहता है, “तुझ में कितने तो ऐसे हैं जो बालाम की शिक्षा को मानते हैं। (देखा?) और तू- – मैं उनद नीकुलाइयों के काम से, उस शिक्षा से जो तेरे यहाँ पायी जाती है, घृणा करता हूँ, क्योंकि यह बालाम की शिक्षा ही थी जिसने इस्राएल की संतानों को ठोकर खाना सिखाया।”उन्होंने ऐसा क्या किया था? इसके बाद भी जब वह उन लोगों को स्राप देने के लिए निकल चला, तो परमेश्वर ने कहा, “मैं तेरी जुबान बांध देंगा; तू और कुछ नहीं वरन वही कह सकेगा जो मैं तुझे बताऊँगा। तू उसे स्रापित नहीं कर सकता है जिसे मैंने आशीष दी है।”अतः उसने वहाँ पर नीचे दृष्टि डाली। और आप इस ढोंगी पर दृष्टि डालिए। ओह, हम इसका साथ साथ अध्ययन कर सकते हैं। समझे? इस पुराने राजा बालाक को देखिए, जो इस सब का प्रधान था। उसने यहाँ वाले इस झूठे नबी को बताया और कहा, “वहाँ नीचे जा और जाकर उनकी कमी पता लगाा।”116बिलकुल ठीक ऐसा ही बड़ी बड़ी कलीसियाएँ परमेश्वर के छोटे झुण्ड के लिए कहना पसन्द करती हैं। “तुम जानते ही क्या हो? मैं उनमें से एक को जानता हूँ। लड़के क्या तुम जानते हो कि उसने क्या किया था? उसने- -उसने यह किया था, और उसने वह किया था। वे तो। पिन्तेकोस्तल हैं। निश्चय ही ऐसा ही है।”ओह, परन्तु काश अपने उनके विषय में केवल सत्य को जाना होता! परन्तु समाचार पत्र तथा ऐसे ही दूसरे साधन इस पर खामोश रहते हैं। परन्तु आप बस जरा किसी छोटे से पिन्तेकोस्तल को किसी समय सही बात से बाहर होने दें; और देखिएगाा, कि सारा का सारा देश उनके विषय में कैसा बंवडर कर डालता है। निश्चय ही, ऐसा ही है, जी हाँ, श्रीमान!परन्तु अब आप ध्यान दीजिए, उसने कहा था, ‘ जाकर उनके पिछले भाग को- उनकी कमियों को उनके सबसे खराब पहलू को देखना।’बालाम ने कहा, “ जी हाँ मैं बस उनकी कमियों को ही देखेंगा; मैं उसे ही देबूंगा कि उन्होंने क्या बुरा किया था। मैं बस यही करूंगा, मैं बस उनके साधारण पहलू को ही देखेंगा, मैं बस उनकी-उनकी बुराई पर ही दृष्टि डालूंगा।” क्योंकि यदि वह उनकी बुराई पर ही दृष्टि कर रहा था, तो वे अच्छे नहीं थे।

यह सच है। उन्होंने कलैण्डर पर तो हर एक पाप किया हुआ था।परन्तु वह क्या देखने में चूक गया था। वह उस मारी-कूटी गयी चट्टान को, उस पीतल के सांप को, महाराजा के उस हर्षोल्लास को जो उनके मध्य में था; उन चंगाइयों, चिन्हों, आश्चर्यकर्मों और आग के खम्भे को जो उनके ऊपर था देखने में चूक गया था। वह अंधा नबी इसे नहीं देख सका था। जी नहीं श्रीमान! परन्तु वह तो उनका बुरा पक्ष ही दिखा रहा था। उसने कहा था, “मैं एक ऐसे को जानता हूँ जो किसी दूसरे की पत्नी के साथ भाग गया था। मैं- मैं इसे जानता हूँ, इसने तो कुछ पैसे ही चुरा लिये थे।”यह सच है। यह सच है। मैं यह स्वीकार करूंगा, परन्तु उनके यहाँ भी तो ठीक ऐसा ही पाया जाता था; परन्तु उन्होंने इसके विषय में एक बात तक ना बोली। समझे? उसने तो उसे बस उनका सबसे खराब पक्ष ही दिखाया।परन्तु उसने कहा, परमेश्वर ने उससे कहा, “तू बस वही कहना जो मैं कहता हूँ।” और बालाम आत्मा में आ गया; वह स्तब्धता में चला गया, और उसने इस्राएल को स्रापित करने की बजाये आशीष ही दी। आमीन! वह ऐसी ही स्थिति में था।117अब, यदि परमेश्वर पुरस्कार देता है- -या इन सिद्धांतवादियों को, हाई स्कूलों को, बड़ी बड़ी सैमनेरियों को, और कॉलिजों को और पी एच डी को और डी एल डी को और ओह, सभी प्रकार की डी डी को सम्मान देता है- – क्या होता, यदि उसने उसे सम्मान दिया होता, खैर तब तो – आप- -सकते हैं- -तो उसे उन्हें भी सम्मान देना होता। समझे? परन्तु उसने तो इन्हीं लोगों को ही आशीष से आशीषित किया और इन्हें ही सम्मान दिया, क्योंकि आत्मा; महाराजा- – वे कहते थे, “महराजा की पूँज उनकी छावनी में थी।” ओह क्या था? क्या था? “सन्तों का महाराजा !” वहाँ किस बात का हर्षोल्लास और जयनांद था? एक दूसरे राज्य का!मैं आपको साबित करके बताऊँगा, कि वे नामधारी कलीसियायी लोग नहीं थे। क्या आप मुझसे चहाते हैं, कि मैं ऐसा करूं? मैं सोचता हूँ, कि मैंने यहीं पर इसके लिए एक वचन का लेख लिख कर रखा था। जी हाँ, श्रीमान! आइये मैं आपको यह प्रमाणित करके बताता हूँ, कि इस्राएल नहीं था- -आइये हम गिनती की पुस्तक निकालें- जिससे कि आप यह देख लें वे ऐसे नहीं थे। वे- -अब देखिए, मोआब एक बहुत बड़ी नामधारी कलीसिया थे। हम गिनती २३:९ पर चर्चा करने जा रहे हैं। मैं इसके साथ ही आठवां पद लूंगा।और बालाम ने कहा, कैसे मैं जिन्हें ईश्वर ने नहीं शाप दिया उन्हें मैं क्यों शाप दू और जिन्हें यहोवा ने धमकी नहीं दी उन्हें मैं कैसे धमकी दू?जी हाँ! अब सुनिएँ उसने – उसने क्या कहा था।चट्टानों का चोटी पर से वे मुझे दिखाई पड़ते हैं;- -(यह परमेश्वर है। घाटी के नीचे से नहीं, वरन चट्टानों के ऊपर से देखता है। ओह, उसकी आँख तो गौरेय्या पर भी लगी रहती है और मैं जानता हूँ वह मुझ पर दृष्टि लगाता है।) ….चट्टानों के ऊपर से मैंने दृष्टि की…(आमीन! किसी…से…नहीं…उस घाटी से दृष्टि की जिससे आप उनकी कमियाँ देख सकते थे; परमेश्वर ने कहा, मैंने उस सम्पूर्ण जाति पर दृष्टि की)…चट्टानों पर से मैंने उन्हें देखा…पहाड़ियों पर से मैं उनको देखता हूँ, वह ऐसी जाति है जो अकेली बसी रहेगी, और अन्यजाजियों से अलग गिनी जायेगी।क्या इसी से ही मामला निपट जाता है? वे नामधारी संस्था नहीं थे, वे तो एक ‘जाति’ थे। ओह, वे तो तम्बुओं में रहने वाले घुमक्कड़ किस्म के ही लोग थे, परदेशी थे, वे तो सड़कों के किनारों पर डेरा डाल लिया करते थे। वे तो एक छोटी सी मंडली के जैसे ही थे, वे डेरे में से बाहर निकलकर उसे गिरा कर कहीं और वहाँ चल दिया करते थे जहाँ परमेश्वर उन्हें लेकर चलना चाहा रहा होता था। समझे? वे तो घुमक्कड़ किस्म के ही थे। यह सच है।118अधिक समय नहीं हुआ है, कि मैं जमैका में था, वहाँ पर एक शानदार पिन्तेकोस्तल डॉक्टर ऑफ डीविनीटी खड़ा हुआ था। और मैंने कहा था- मैंने कहा था, “ओह, परमेश्वर ने पिन्तेकुस्त वाली आरिम्भक कलीसिया को कैसा आशीषित किया था; उनके पास कुछ नहीं था। वे तो बस यहाँ वहाँ ही घुमते फिरते थे।”और उसने कहा “हूँ, क्या भाई, ब्रन्हम?”मैंने कहा, “जी हाँ भाई!” वह एक अच्छा भाई है।और वह बोला, “मैं – – मैं आपको दिखाना चाहता हूँ, कि आप कहाँ पर गलती कर रहे हैं।”मैंने कहा, “ओह, मुझे इस बात के लिए बड़ी खुशी होगी। मैं-मैं सदैव ही यह जानना चाहता हूँ कि मैं कहाँ पर गलत हूँ, क्योंकि मैं जानता हूँ, कि परमेश्वर जानता है, कि मैं- -मैं गलत नहीं होना चाहता हूँ।” मैंने कहा,

“ठीक है, यदि मैं गलत हूँ, भाई, तो मैं यकीनन यह जानता हूँ, कि यह क्या गलती है। आप का धन्यवाद हो!”वह बोला, “आप उन पिन्तेकोस्तल लोगों की तारिफ करते रहते हैं।”मैंने कहा, “जी हाँ।”वह बोला, “उन्होंने जो भंयकर गलती कभी की थी वह तब की थी जब उन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति बेच डाली थी।” बोला, “जब सताये जाने का समय आया, तो उनके पास घर नहीं थे जहाँ वे जाते। उनके पास जाने कि लिए कोई जगह नहीं थी, और वे यहाँ- वहाँ भटकते फिरे।”मैंने कहा, “उन्होंने बिलकुल ठीक वही किया था, जो परमेश्वर की इच्छा थी।”वह बोला, “क्यों?”मैंने कहा, “यदि उनके पास एक घर होता, तो वे वहाँ वापस चले गये होते। परन्तु उन्हें तो यहाँ से वहाँ सभी जगह सुसमाचार ही फैलाते हुए चले जाना था, कि पवित्र आत्मा आ चुका है।” आप मुझे यह न बतायें, कि परमेश्वर गलती करता है। वह कभी कोई गलती नहीं करता है। वह जानता है, कि इसे कैसे करना है। उन्होंने अपनी जमीन -जायदाद बेच डाली थी, और खानाबदोश बन गये थे, वे सुसमाचार को सभी जगह फैला रहे थे, और कहा जाता है, कि तब उन खानाबदोश लोगों के द्वारा जिन्होंने पवित्र आत्मा पाने के लिए अपना सब कुछ छोड़ दिया था सुसमाचार सारे ज्ञात जगत के पास तक फैलाया गया था।वे लोग किसी नामधारी कलीसिया के सदस्य नहीं थे। समझे?119अब स्मरण रखिए, कि यह नामधारी कलीसिया ही है, जिसके विषय में परमेश्वर यह कहता है, “बालाम की शिक्षा में घूसायी गई।”खैर जब वह उन्हें इस नामधारी कलीसिया के अन्दर न ला सका तो क्या आप जानते हैं, कि उसके बाद बालाम ने क्या किया था? अब, आप जरा ध्यानपूर्वक सुनें। अब हम समाप्त करने के अंत पर आ रहे हैं। अब देखिए, बालाम ने क्या किया था, उसने बिलकुल ठीक वैसा ही किया था जैसा उन्होंने यहाँ पर नीसियन सभा में किया था। यही कारण है, कि उसने कहा था, “तेरे यहाँ कितने तो ऐसे हैं जो बालाम की शिक्षा को मानते हैं, और उन नीकुलाइयों की शिक्षा को मानते हैं।” अब देखिए, नीकुलाइयों की शिक्षाओं को मानने वाले वे लोग थे जिन्होंने सच्चे मसीहियों को बाहर निकाल दिया था, तथा जो संस्थाएं और….और वगैराह वगैराह बनाना चाहते थे; जो आखिरकार….कितने लोग जानते हैं, कि यह सच है? वे संस्थाएँ थीं। यह बिलकुल पूर्णतः। परमेश्वर का सच है। और आखिरकार उन्होंने संसार में सबसे बड़ी संस्था का गठन कर डाला थाऔर उन्होंने उसे क्या बनाया था? एक कैथोलिक! और “कैथोलिक” शब्द का क्या अर्थ होता है? “विश्वव्यापी” ! एक विश्वव्यापी-सर्वव्यापी संस्था संगठित हो गयी थी; “इन सारे छोटे झुण्डों को एक ही कलीसिया के अन्दर आ जाना चाहिए।” अब, यदि आप ४ यान देंगे; ओह मैं- -आप बस ध्यान लगायें रखें।120देखिएगा, कि क्या था? किसने बेबीलोन बसाया था? निम्रोद ने। उसने क्या किया था? उसने एक बड़ी मीनार और एक बड़ा नगर बनाया था, और उसने और दूसरे सभी नगरों को उसे अपना अंशदान देने के लिए विवश किया था। यह संस्था की एक पृष्ठ भूमि थी। निश्चय ही; ठीक यही बात यहाँ पर कलीसियायी काल में चलकर आयी और फिर से संस्था का निर्माण हुआ; और यह सारी जातियों को इसके अंदर लेकर आयी। और ठीक यहाँ पर यह कहा गया है, “उस बड़ी वेश्या ने यह किया कि उसने अपने व्यभिचार की मदिरा सभी जातियों के लोगों को पिला कर मतवाला किया।” वह अपने उस व्यभिचार को जो वह कर रही थी, वह स्वयं अपने को एक मसीही कहने का दावा कर रही थी; और वह इस प्रकार व्यर्थ की चीजें लोगों को दे रही थीः कैटेकिजम, प्रार्थना पुस्तक, तथा इसी प्रकार का ही अन्य सभी कुछ- -और उससे निकलकर ही प्रोटिस्टेन्ट आये; और उन्होंने भी ठीक वैसे ही काम किये; वे तो बस उसी के ही पथ का अनुकरण कर रहे हैं। यह बिलकुल ठीक बात है।121आइये अब हम थोडा सा और आगे चलते हैं। बिलकुल ठीक है; बिलकुल ठीक है। अब देखए उसने कहा था, “ये बालाम की शिक्षाएँ हैं।” अब, बालाम ने तब क्या किया था, जब उसने यह जान लिया था, कि वह इस्राएल को- -नहीं कर सकता- -इस्राएल को स्रापित नहीं कर सकता है? इसके बाद उसने बालाक को बताया, कि यह एक अच्छी बात रहेगी, कि तुम इन लोगों को अपने देवता के पर्व पर आमन्त्रित करो। उनके यहाँ पर एक बहुत बड़ा पर्व होता था, उनके यहाँ- -उनके यहाँ एक बहुत बड़ा पर्व होने जा रहा था। और वे- -वे उस पर्व को बा-ल-पो-र- -बालपोर का पर्व कहते थे। मैं सोचता हूँ, यह प..पोर…

बालपोर था। यह पूजा करने का एक- -एक पर्व होता था।और बालाम ने कहा, “अब, बालाक, मैं तुझे बतऊँगा, मैं तुझे एक बहुत ही अच्छा उपाय बताऊँगा। यदि तू बस ऐसा कर दे- – ऐसा कर दे- -परमेश्वर उन्हें स्राप नहीं देगा; उनके विषय में यही सारी बात है। अतः मैं तुझे बताऊँगा, कि हम क्या करेंगे। हम उनसे ऐसे छुटकारा नहीं पा सकते हैं, यदि तू उन्हें यहाँ आमन्त्रित करे, तो तू सारे मामले को अपने ही हिसाब से चला सकता है।” देखिए, बिलकुल ठीक यही, बिलकुल ठीक यही कॉन्स्टेन्टाइन ने किया था। बिलकुल ठीक ऐसा ही उसने किया था। यही कारण है, कि वह बालाम की शिक्षा से- -122उन्होंने क्या किया था? इसके बाद उन्होंने बालाक की शिक्षा इस्राएल के मध्य में पहुँचा दी गयी, और उन सब इस्राएलियों को इस बड़े पर्व में, इस बड़े धूमधाम से भरे उत्सव में जो उनके यहाँ होने जा रहा था, ओह, किसी बड़ी जेवनार में, उस बड़े जश्न में जो उनका वहाँ होने जा रहा था आमन्त्रित किया गया। और जब वे वहाँ पहुँचे; जब वे इस्राएली वहाँ पर पहुँचे, तो वे मोआब की इन सुंदर मोआबी स्त्रियों को जो कामोतेजक वस्त्र पहने हुए थीं निहारने लगें। जी हाँ! ये उनकी उन साधारण स्त्रियों के जैसी नहीं थीं जो वहाँ नीचे थीं। ओह, वे तो बहुत सुंदर लगती थीं। ओह, किस प्रकार से उनसे रूप धरवाया गया था, और वे वहाँ अपना किस प्रकार से दिखावा कर सकती थीं। और वे इसके लिए गिर गये थे, और व्यभिचार करने लगे थे।और बालाम जानता था, कि यदि परमेश्वर उन्हें स्रापित नहीं कर सकता है, तो वह ऐसा करेगा, कि वह उन्हें इस नामधारी कलीसियायी पक्ष की ओर लेकर आयेगा; और परमेश्वर का कोप उनपर किसी भी तरह से भड्कवायेगा कि परमेश्वर ही उन्हें मार डाले, यदि वह बस उन्हें सत्य के मार्ग से बाहर निकाल देता है, तो परमेश्वर अपने उन लोगों को ही जान से मार डालेगा।123और ज्यों ही वे बाहर निकल कर आये, और पवित्र आत्मा को ग्रहण करने की बजाये एक नामधारी कलीसिया में शामिल हुए, त्यों ही वे मरे हुए हो गये थे। यह आपके लिए नहीं है, यह तो उनके लिए है जो यहाँ पर हैं; मैं इसे थोड़ी देर में ही आपके अंदर आत्मसाध कर दूंगा। वह यह लूथर से, सरदीस काल से कहता है, : “तेरा एक नाम तो है, पर तू है मरा हुआ।” “सरदीस” शब्द का अर्थ ही “मरा हुआ” होता है। तू नाम का तो जीवता कहलाता है- तेरा एक नाम तो है कि तू जीवता है, पर तू है मरा हुआ।“ यही है वह जो परमेश्वर ने कहा था। जी हाँ! देखा?और जब वहाँ पर उन्होंने आत्मिक व्यभिचार किया था, तो कलीसिया ने पवित्र आत्मा का बपतिस्मा दर किनारे करके नामधारी संगठन से विवाह कर लिया था; और वे मरे हुए बन जाते हैं। आप ठीक ऐसी ही स्थिति में हैं। यही है वह जो बाइबिल कहती है, यही है वह जो परमेश्वर कहता है। यही है वह जो परमेश्वर कलीसियाओं से कह रहा है।अब, मैं यहाँ पर आपके लिए कुछ पढ़ना चाहता हूँ जिससे आप—124और परमेश्वर ने – -उसने क्या किया था? और अब, जब उन्होंने यह किया, यह बुरा काम किया, और जब वे व्यभिचार में थे, तो परमेश्वर ने उनमें से बयालीस हजार को एक बार में ही जान से मार डाला थाः उसने बयालीस हजार लोगों को व्यभिचार करने के लिए जान से मार डाला था।और यहाँ पर कलीसिया के विषय में क्या कहा गया है? तुम जो मसीही होने का दावा करते हो, और अभी भी संसार के जैसे ही जीवन व्यतीत कर रहे हो, तुम आत्मिक व्यभिचार कर रहे हों। हे भाई, आप पवित्र आत्मा को ग्रहण कर लें।आप इन पुराने मतो-सिद्धांतों से, और ऐसी ही और दूसरी बातों से दूर हो जायें (प्रेरितों की शिक्षा को सुनाना, या इसी प्रकार की किसी शिक्षा का व्याख्यान करना,

और प्रार्थना पुस्तक में से लिखी हुई प्रार्थनाओं में से कुछ को बोलना या इसी प्रकार का कुछ करना।)ये मरे हुए ही हैं। यीशु ने अपने लोगों से प्रार्थना बोलने के लिए कभी नहीं कहा था; उसने तो कहा था, “प्रार्थना करो। प्रार्थना करो।” यह बिलकुल सच है।125अब देखएगा, कि कॉन्स्टैन्टाइन का पर्व बालाम के पागान वाले के जैसा ही था- -अब, बालाम के पागान पर्व के जैसे ही कॉन्स्टेन्टाइन का पर्व पागान पर्व ही था। यह बिलकुल सच है। पिरगमुन को आमन्त्रित किया गया था। और अब आप इस पर ध्यान दें। मैंने यहाँ पर कुछ बातें लिखी हुई हैं; मैं उन्हें ठीक अभी यहाँ पर छोड़कर आगे बढ़ने जा रहा हूँ। बिलकुल ठीक है। यह बिलकुल ठीक है। मैं बस इस लेख को जो मैंने किसी बात पर लिखा था लेने का यत्न कर। रहा था। पिरगुमन को आमन्त्रित किया गया था। यह बिलकुल ठीक बात है; उन्हें नीसियन सभा के बाद एक पर्व के लिए आमन्त्रित किया गया था।उन्हें मकर-सकान्ति (Winter Solstice) के लिए आमन्त्रित किया गया था जिसका अर्थ सूर्य था- सूर्य की उपासना था; जो कि एक मूर्तिपूजक देवता था- और यह २१ दिसम्बर को जो कि वर्ष का सबसे छोटा दिन होता है, पड़ता है। और वर्ष में- -और ठीक यह वाला समय २५ दिसम्बर तक नहीं बदलता है। सारे मूर्तिपूजक इसे – सूर्य देवता की इस जयंती को मनाते थे।सूर्य देवता की जयंती वर्ष के सबसे छोटे दिन २१ दिसम्बर को होती थी। और जिस किसी ने कभी कलीसियाओं का इतिहास पढ़ा है, वह जानता है, कि मूर्तिपूजक इसी दिन पूजा-अर्चना करते थे। यह एक पर्व का मनाया जाना होता था।खैर, रोमियों के पास थे…. उनके बड़े बड़े खेल कूद होते थे, रोमन सर्कस होते थे। कितने लोगों ने यहाँ पर इसे – इस ‘बैनहर’ को -या वे इसे जो कुछ भी कहते हैं, को देखा है? समझे? अब रोमियों के सर्कस पर दृष्टि डालिए, यही है वह जो रोमियों के यहाँ सूर्य के पर्व पर, सूर्य देवता की जयंती के हर्षोल्लास में किया जाता था। समझे?126और अब….और वहाँ ऊपर उन्होंने एक बहुत बड़ा पर्व मनाया, और वहाँ पर नीकुलाइयों को आने के लिए आमन्त्रित किया गया। ओह, क्या यह पूर्णतः सच नहीं है? “तुम में से बहुतेरे ऐसे हैं जो बालाम की शिक्षा को मानते हैं।” समझे? पिरगमुन को बता रहा था, कि उनके पास क्या था; उनके पास बड़ी बड़ी दौड़े थीं। वहाँ उन्होंने सोचा था, “अच्छा, अब, यह तो बहुत बढ़िया है। यह बड़ा पर्व तो सालाना ही मनाया जाता है।”“जी हाँ!”अतः इसके बाद जब उन्होंने तथाकथित आर्कबिशपों को या तब ये जो कुछ भी थे तथा और सब लोगों को आने के लिए आमन्त्रित किया गया, तो उन्होंने इसे लगातार जारी रहनेवाला पर्व बना दिया; और इस प्रकार से वे व्यभिचार को अंदर लेकर आ रहे थे, और रोमन कैथोलिक कलीसिया का निर्माण कर रहे थे, जिसकी हर एक प्रोटिस्टेन्ट कलीसिया सदस्य है-हर एक संस्था उसकी सदस्य है। परमेश्वर की कोई संस्था नहीं है। वह तो इसके नाम से भी घृणा करता है। बाइबिल ऐसा ही कहती है।और जब उन्होंने ऐसा किया था, तो क्या घटित हुआ था? उन्होंने – -उन्होंने अब कहा था- उनके पास तो एक आत्मिक अनुप्रयोग होना ही था; अतः उन्होंने परमेश्वर के पुत्र (S-O-N) प्रभु यीशु के जन्म दिवस को अप्रैल से हटाकर २५ दिसम्बर ठहरा दिया था- यह कोई भी विद्वान जानता है, और वह कोई भी जानता है जिसके पास आत्मिक प्रकाशन है, कि वह तो जीवन के समय में- जैसे जब मेम्ने तथा ऐसे ही और दूसरे सभी जन्म लेते हैं: अप्रैल में ही हुआ था। और अभी यह पूजा-अर्चना क्रिसमस को ही होती है; और अब यह सैन्टा कलोज़ है। ओह क्या ही-ओह, उन पर दया होवे! समझे? इसमें अब और भी त्यौहारों को जोड़ दिया गया है। इसके विषय में बस यही सब बातें है। आप ऐसी ही स्थिति में हैं। बालाम को आमन्त्रित किया गया था, और वह कहता है, “मेरे मध्य में बालाम की शिक्षा पायी जाती है।” ऐसा ही है। हे परमेश्वर, हे पिता, इसे हम पर बस प्रकट कर दे। समझे? यह जन्म दिवस अप्रैल से लेकर—127अब इतिहासकार कहते हैं, कि “सभी प्रमाण यही बताते हैं, कि यीशु का जन्म अप्रैल महीने में हुआ था, जब दूसरे सभी जीवन उत्पन्न होते है। परन्तु उन्होंने इसे बदलकर २५ दिसम्बर ठहरा दिया था; उन्होंने इसे पागान देवता के जन्म दिवस से पाँच दिन बाद ठहरा दिया था, जिससे कि वे अपने समारोहों-पर्वो को एक साथ मिला सकें: पागान और मसीहियत को आपस में एक साथ मिला सकें। और संसार में कैथोलिकवाद और कुछ नहीं वरन पागान के अंधविश्वासों और मसीहियत में से निकले रीति-रिवाजों को एक साथ मिलाकर बनाया गया पुलिंदा ही है। यह सच है। यही सच्चाई है। और जो प्रोटिस्टेन्ट उससे बाहर निकले थे वे वेश्या माँ की पुत्रियों के ठीक जैसे ही हैं। यह बिलकुल सत्य है।अब, परमेश्वर हमारी सहायता कीजिए, कि हम किसी भी उस चीज के असली विरोधी हों जो परमेश्वर की ओर से नहीं है। समझे? ओह!128और वे इससे कुछ आत्मिक बातें ही बना डालते हैं, और कहते हैं, कि क्या आप जानते हैं, कि बिशप ने क्या कहा था, “हमें तो ऐसा करने का अधिकार है, क्योंकि वह धार्मिकता का सूर्य है।

”ओह, जी हाँ, वे इसके लिए अपने लिए ठीक वैसे ही बचाव का मार्ग बना डालते हैं, जैसे उन्होंने मत्ती २८:१९ में पाये जाने वाले “पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा” के मामले में अपना ही बचाव का मार्ग बना डाला था। उन्होंने बिलकुल ठीक ऐसा ही किया था। निश्चय ही, उनके पास अपना बनाया हुआ बचाव का एक मार्ग है; उनके पास किसी प्रकार का धार्मिक अनुप्रयोग है। समझे आप? परन्तु यह नहीं। बाइबिल कहती है, “हर एक बात दो या तीन गवाहों के द्वारा सच्ची ठहरायी जाये।” परमेश्वर ने वहाँ पर यह कहा था, और उसने ऐसा तीन बार कहा था। यदि परमेश्वर किसी और दूसरी बात को भी सच्चा ठहराने के लिए ऐसा ही करता है- तो वह पतरस, याकूब और यूहन्ना को अपने साथ लेता है। जो कुछ भी उसने किया था, हर एक वह काम जो उसने किया था; पवित्रशास्त्र में होकर जो कुछ भी उसने किया था, उसे प्रमाणित करने के लिए उसके पास दो या तीन गवाह होते थे। यह सचपरन्तु आप देखते हैं, वे छोटी छोटी बातें जो वहाँ पर आयीं वे ऐसी आयीं कि उन्हें उस प्रकार से लिया जा सके। परमेश्वर ऐसा जगत की उत्पत्ति से भी पहले जानता था। वहाँ पर उनके पास यह था, उनके पास आत्मिक अनुप्रयोग था, कि “क्योंकि वह परमेश्वर का पुत्र” (S-O-N) है। अतः हम बस पागान के सूर्य देवता की जयंती लेंगे, और हम उसे पुत्र का जन्म दिवस बना देंगे; क्योंकि वही तो धार्मिकता का सूर्य है। जी हाँ आप जानते हैं, कि प्रोटिस्टेन्ट अभी भी उसके लिए ऐसी ही किसी बात के लिए गिरते हैं। निश्चय ही, वे इसे पवित्रशास्त्र से हटाकर कहीं और ठहरा देंगे।ओह, मेरे परमेश्वर! आइये मैं-मैं बस एक मिनट के लिए यहीं पर रूकता हूँ। बिलकुल ठीक है।129यहाँ पर एक छोटी सी बात है जिसे मैं लेना चाहूँगा। आइये हम बस इसका अन्तिम पद शीघ्रता से देखें। क्या हम ऐसा कर सकते है? जी हाँ, खैर मैं जल्दी ही करूंगा, अब बहुत ही जल्दी करूंगा। और आप बस- -हम बस इसकी मुख्य मुख्य बातें ही देखेंगे। बिलकुल ठीक हैं। अब हम कहाँ पर है?पर मुझे तेरे विरूद्ध कुछ बातें कहनी हैं…..बालाम…(यह सच है, मुझे यह लेख मिल गया है)…तेरे यहाँ कितने ऐसे हैं जो बालाम….नीकुलाइयों की शिक्षाको मानते हैं….सो मन फिरा….नहीं, तो मैं….तेरे पास आकर….अपने मुख की तलवार से उन से लडूंगा।जिसके कान हों, वह सुन ले, कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।यहाँ पर बिलकुल ठीक ऐसा ही कॉन्स्टेन्टाइन ने तब किया था-जब उन्होंने इस बड़े पर्व को ठहराया था। मैं- – मैं- – मैं- बस उससे दूर हटने लगा था, इससे पहले कि मैं इसे पढ़ता, मैं प्रतीक्षा कर रहा था; क्योंकि पवित्र आत्मा पीछे की ओर ही बढ़ता चला जा रहा है। यही कारण है, कि मैंने ऐसा तब किया था जब उसने कहा था “तू उसे पीछे ही संजोय कर मत रख।” अत: यहाँ पर यह आता है। हूँ! हूँ! यह बिलकुल ठीक बात है। यही कारण है….130जब उन्होंने इस बड़ी चीज को ठहरा दिया- -( मैं आपको वह बताना चाहता हूँ जो घटित हुआ था, जिससे आप इसे समझ जायें।) यही तो सहस्राब्दि के आने से भी पहले सहस्राब्दि का जन्म था। क्योंकि कलीसिया धनी हो गयी थी, वह उतनी धनी हो गयी थी जितनी कि वह हो सकती थी। और वह क्या हो गयी थी? शक्तिशाली ! वह सत्ता को अपने काबू में ले चुकी थी; सत्ता और कलीसिया आपस में मिल चुके थे।अब देखिए, क्या परमेश्वर सत्ता (राज्य) के साथ होता है? क्या यीशु ने नहीं कहा था…? कि इनमें से प्रत्येक राज्य उसका है, यीशु ने ऐसे कहा था…. और उसने यीशु को संसार के सारे राज्य दिखा कर कहा था, “उनमें से हर एक मेरा है। मैं उनके साथ जो चाहे वह करता हूँ।” और उसके बाद क्या परमेश्वर और शैतान को आपस में मिला लिया गया था? ओह, आप ऐसा नहीं कर सकते हैं। निश्चय ही, आप ऐसा नहीं कर सकते है। यही कारण है, कि राज्य- सत्ता संस्थागत है। परमेश्वर की ये सत्ता नहीं है। निश्चित रूप से नहीं; आप ऐसा कर ही नहीं सकते हैं।131परन्तु तब उन्होंने ऐसा क्या कर लिया था, तब उनके पास मसीहियत कहलाने वाली उनकी कलीसिया थी, और उन्होंने उसे देश के साथ, सम्पूर्ण रोमन राज्य के साथ एकीकृत कर डाला था; उन्होंने उस सारी की सारी को उसके साथ एकीकृत कर डाला था। वहाँ पर इस सब। के लिए वहाँ पर एक बिशप था, जो- – था- – जिसे कुछ समय के बाद पोप कहा गया, परन्तु वह था- – वह तब एक बिशप ही था और बोनीफेस तृतीय एक ऐसा था जो पहला पोप बना था।इसके बाद हमें यह ज्ञात होता है, कि वह यहाँ पर एक असली पोप के रूप में आसीन हुआ- -उनके पास एक देवता मानव रूप में हुआ, उनके पास एक बहुत बड़ी वेदी थी। उनके पास जबरदस्त आपार ६ नि-दौलत थी। उनके पास संगमरमर की बनी हुई बड़ी बड़ी , और भव्य वेदियाँ थी जिनपर सभी जगह मोती और रत्न जड़े हुए थे। और उनके पास बड़ी बड़ी कलीसियाएँ थीं। उन्होंने राज्य पर काबू किया हुआ था।और आप जानते हैं, कि क्या हुआ था? और तब यह एक शब्द बाहर निकलकर आया, जो कि ‘सहस्राब्दि’ शब्द था, कि वे सारी प्रतिज्ञाएँ जो बेचारे यहूदियों के लिए थीं, जिन्हें परमेश्वर ने त्याग दिया है, (जब कि उसने कहा हुआ है, कि वह ऐसा कदापि नहीं कर सकता है) उस सहस्राब्दि में जिसे वे प्रभ, यीशु के आमगन से ही पहले ठहरा देते हैं अन्दर लेकर आते हैं। लेकिन जब यीशु आता है तभी सहस्राब्दि होती हैं।132वह असली सहस्राब्दि के आने से पहले ही सहस्राब्दि का जन्म था। और यही कारण है, कि कैथोलिक इस बात की शिक्षा नहीं देते हैं, कि इस दिन में यीशु का आगमन होना है। यह सब कुछ तो उस कलीसिया में हो चुका है। यह तो उनकी ही सहस्राब्दि है।

वह कलीसिया सब चीजों पर अधिकार रखती है। यह ऐसा ही है। देखिए, यह तो यीशु के बिना ही सहस्राब्दि से भी पहले ही सहस्राब्दि है। ऐसा कॉन्स्टेन्टाइन की हत्या किये जाने तक अर्थात ३१२ से- – और – और ३१२ से ६०६ ईसवी तक कायम रहा। इसके बाद बोनीफेस तृतीय को विश्वव्यापी कलीसिया के ऊपर एक विश्वव्यापी बिशप या पोप बना दिया गया।133मैं विश्वास करता हूँ, कि हम इस पद को समाप्त कर देंगे और फिर इसके बाद हम इसे समझ जायेंगे। परमेश्वर की महिमा होवे! समझे? अतः अब, बस मैं एक मिनट के लिए ही इस पर टिका रहूँगा १७वाँ पद:जिसके कान हो वह सुन ले, कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है; जो जय पाये, उसको में गुप्त मन्ना में से खाने को दूगा, और उसे एक श्वेत पत्थर भी देंगा; और उस पत्थर पर एक नाम लिखा हुआ होगा, जिसे जय पाने वाले के सिवाये और कोई न जानेगा।क्या आप इसके लिए कल तक प्रतीक्षा करेंगे, या आप इसे अभी समझ लेना चाहेंगे? (सभा कहती है, ‘आमीन’ सम्पा)-ठीक है!134हे स्वर्गीय पिता, मैं प्रार्थना करता हूँ, कि आप ठीक इसी समय इसे लोगों को समझ लेने देंगे और जहाँ भी ये टेप जाते हैं वे भी इसे समझ जायें। जिससे वे यह जान जायें, कि मैं- -मैं इसे इसी लिए कह रहा हूँ, क्योंकि यह वह दिव्य अनुवाद है जो अपने मुझे दिया है।135“…. जो जय पाये” सबसे पहली बात तो मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आप यह स्मरण रखें, कि ये प्रत्येक संदेश कलीसिया को सम्बोधि ति नहीं किया गया, वरन यह तो कलीसिया के दूत को ही सम्बोधित किया गया। आप यहाँ पर पहले वाले पर दृष्टि डालें इफि- – यह कलीसिया के लिए- – को- – इफिसुस की कलीसिया के दूत को- – (क्या यह ठीक है?) ठीक है, आइये अगले कलीसियायी काल को, आठवें पद को देखें: – – स्मुरना की कलीसिया के दूत को- – यह बिलकुल ठीक है, और बारहवाँ पद देखिएं: और पिरगमुन की कलीसिया के दूत को- – (क्या यह ठीक है?)उस संदेश को उस कलीसिया के अगुवा को सम्बोधित किया जाता है। परमेश्वर ही उस मनुष्य की उस संदेश के द्वारा खींचने में सहायता करता है। परन्तु संदेश सुसमाचारदूत को ही दिया जाता था; और वह सुसमाचारदूत परमेश्वर के ही हाथों में उसके नियन्त्रण में होता था, और परमेश्वर उसे आगे बढ़ते रहने के लिए अपने हाथ से जबरदस्त सामर्थ प्रदान करता था।वे उसके दायें हाथ हैं; जिसका अर्थ है, कि वे सर्वोच्च सामर्थ में होते हैं जबकि वे पृथ्वी पर होते हैं, क्योंकि वे उसकी ओर से ठहराये उजियाले होते हैं, और वही उस दूत को उस कलीसियायी काल के लिए उजियाला दे रहा होता है। देखिए, कहा यह गया है, “कलीसिया के दूत को लिख-” यह उस काल के सितारे को ही सम्बोधित किया जाता है जो उस काल के लिए जिम्मेदार होता है। कलीसिया का सुसमाचारदूत ही उत्तरदायी ठहरता है, यदि वह वचन का प्रचार नहीं करता है। यह सच है। और उस सुसमाचारदूत को न्याय पर उत्तर देना होगा।136कितने लोगों को वह दर्शन स्मरण है, जो यहाँ पर मुझे देखे हुए अधिक समय नहीं हुआ है जो इसी के विषय में था- यहाँ देखिए; जब मैं था- -जब मैं पलंग पर लेटा हुआ था, और पवित्र आत्मा आया; और मैंने पीछे दृष्टि डाली, वहाँ पर मेरी पत्नी थी। और वहाँ पर मैं लेटा हुआ था, और मैं वहाँ ऊपर उपस्थिति में पहुँचा, और मैंने उन सब लोगों को देखा। और क्या आपको स्मरण है, कि मैं इसे बता रहा था? आप सभों को स्मरण है। देखा? और मैंने कहा, क्यों, “क्या वे हैं…?”उसने कहा, “ये तुम्हारे ही लोग हैं।”और मैंने कहा, “क्या ये सब बन्हम हैं?”उसने कहा, “जी नहीं!’ वहाँ पर वे दसयों लाखों थे। उसने कहा, ये तुम्हारे द्वारा मसीह की ओर फेरे हुए लोग है।”और मैंने कहा, “क्या मसीह के ओर फेरे हुए लोग?”बोला, “उस स्त्री को देखो, जिसकी तुम वहाँ पर इतनी अधिक सराहना कर रहे थे जो इतनी अधिक जवान और सुंदर हैं जब तुम ने उसकी मसीह की ओर अगुवाई की थी तो वह नब्बे वर्ष से भी अधिक आयु की थी।”और मैंने कहा, “ओह, तो फिर क्या मैं इसके लिए भयभीत था?”और वह बोला, “हम यहाँ पर प्रभु के आगमन की बाट जोह रहे हैं।”137मैंने कहा, “मैं उससे भेंट चाहता हूँ।”वह बोला, “तुम उस से अभी नहीं मिल सकते हो, वह जल्द ही आयेगा। हम उसी की बाट जोह रहे हैं। परन्तु जब वो आयेगा, तो वह सबसे पहले तुम्हारे ही पास आयेगा। और तुम्हारा उस सुसमाचार के अनुसार न्याय होगा जिसका तुमने प्रचार किया है, और हम तुम्हारे लोग होंगे।”मैंने कहा, “अच्छा, क्या तुम्हारा तात्पर्य है कि मैं इन सब के लिए उत्तरदायी ठहरूंगा?”वह बोला, “हम सभों के लिए!”मैंने कहा, “अच्छा, क्या हर एक…?”वह बोला, “तुम एक अगुवा ही पैदा हुए थे।”और मैंने कहा, “अच्छा, क्या हर एक उत्तरदायी ठहरेगा?”उसने कहा, “हर एक अगुवा उत्तरदायी ठहरेगा।”मैंने कहा, “संत पौलुस के विषय में क्या होगा?”उसने कहा, “वह अपने काल के लिए उत्तरदायी ठहरेगा।”मैंने कहा, “अच्छा, मैंने तो ठीक उसी सुसमाचार का ही प्रचार किया है जिसका उसने प्रचार किया था।”और लाखों लाख आवाजें गूंज उठीं, और बोली,

“हम उसी पर विश्राम कर रहे हैं।” समझे? “विश्राम कर रहे हैं!” आप ऐसी ही स्थिति में हैं।अतः परमेश्वर का दूत, उस कलीसिया का सुसमाचारदूत ही उत्तरदायी है, यदि वह वचन का प्रचार नहीं करता है। यह बिलकुल सच138“गुप्त मन्ना”, देखिए। आइये हम इसका वह अच्छे से अच्छा अर्थ बताये जो हम बता सकते हैं। “गुप्त मन्ना” क्या दर्शाता है? गुप्त मन्ना एक वह मन्ना था जो एक स्थान में अन्दर रखा जाता था- -या बाइबिल में यह भेंट की रोटी होता था जो केवल याजकों के लिए ही होती थी। कितने लोग इस बात को जानते हैं? समझे?अब देखिए, यह – -के लिए नही होती थीं- -उनके पास मंडली के लिए एक रोटी होती थी, लेकिन याजक के लिए एक विशेष रोटी होती थी। क्या यह सही बात है? यह गुप्त मन्ना एक विशेष रोटी है, यह एक विशेष रोटी है। यह क्या है?हमारा मन्ना कौन है? मसीह। यह बिलकुल ठीक बात है, संत यूहन्ना के छठे अध्याय के ४८ से ५० तक के पद में यीशु ने कहा, था, “जीवन की रोटी मैं ही हूँ जो परमेश्वर के पास से स्वर्ग से आयी है।” यदि आप इसे लिख रहे हैं, तो आप इसे लिख लें। वही मन्ना है।139ठीक है, यह गुप्त मन्ना क्या है? यह वह मन्ना है जो सारी मंडली को नहीं दिया जाता है।प्रकाशन, वचन का प्रकाशन तो कलीसिया के दूत पर ही उंडेला जाता है। उस काल के लिए वचन का प्रकाशन तो केवल उस काल के सुसमाचारदूत को ही दिया जाता है, क्योंकि यह सब जगह से छिपा रहता है, और – यह गुप्त मन्ना उस कलीसिया के दूत पर ही प्रकट किया जाता है। समझे? क्या आप इसे समझ गये हैं? मसीह क्या है, यह इसका थोड़ा और बड़ा प्रकाशन होता है, हो सकता है, कि यह शायद थोड़ी और उच्च बुलाहट होती हो।140मुझे आश्चर्य है, कि क्या लूथर ने उसे पहचाना था? मुझे आश्चर्य है, कि क्या वैसली ने अपने दिन में इसे पहचाना था? ओह! मुझे आश्चर्य है, कि क्या संत मार्टिन ने इसे पहचाना था? क्या इरेनियस ने इसे पहचाना था? अब, आप जानते हैं, कि कलीसिया ने तो उन पुरूषों को संत भी नहीं माना था; वे तो उनके लिए संत भी नहीं थे; परन्तु वे ही एक ऐसे थे जिनके पीछे पीछे चिन्ह प्रकट होते थे उन्होने तो अपने ही- -अपने ही बिशपों को तथा ऐसे ही दूसरे लोगों को लेकर संत ठहराया।क्यों, यहाँ पर अधिक समय नहीं हुआ, कि एक महिला “लाइफ ऑफ संत मार्टिन” पुस्तक खरीदने के लिए एक अंग्रेजी पुस्तक की दुकान पर गयी। और जब – -उसने कहा, “संत मार्टिन !” और उस व्यक्ति ने पुस्तकों के रैक को बाहर निकाला, और कहा, “उसे इतिहास में बहुत अधिक नहीं जाना जाता है; उसे तो एक संत भी नहीं ठहराया गया था।” देखा? इस दिन तक अभी भी ठीक ऐसा ही है। परन्तु परमेश्वर के पास उसका नाम है, परमेश्वर जानता है, कि वह कौन है।141देखिए, यही तो अंतर है।कोई तो अपने नाम किसी बड़ी संस्था के अंदर चहते हैं, लेकिन परमेश्वर के लोग अपने को उस प्रकार के व्यर्थ जगह से दूर हटा कर रखना चाहते हैं। वे बड़ी बड़ी चीजें नहीं चाहते हैं, और कोई बड़ी संस्था नहीं चाहते हैं, वे तो उस नम्रता को ही चाहते हैं, वे तो नम्र ही बने रहना चाहते हैं। ऊपर उठने का मार्ग नीचे की ओर ही होता हैं। वह जो अपने को नम्र बनाता है वह ऊँचा उठाया जायेगा, और जो अपने को ऊँचा उठाता है नीचा किया जायेगा।’ वह अपने को नम्र बनाता है — आप कोई बड़ा इंसान बनने की कोशिश न करें; ना ही आप कोई छोटा इंसान ही बनने की कोशिश करें। परन्तु आप वही बनें रहे जो आप हैं। समझे? परमेश्वर की दृष्टि में छोटे ही बने रहें, अपनी दृष्टि में छोटे ही बने रहें, हर एक को अपने से बड़ा ही बने रहने दें। “वह जो तुम में बड़ा बनना चाहे, वह सब का दास बनें।”यीशु से अधिक बड़ा कौन हो सकता हैं, जिसने अपनी कमर से अंगोंछा बाधा, और अपने चेलों के पांव धोयें? वह पांव धोने के लिए कितना अधिक छोटा बन जाता हैं। स्वर्ग का परमेश्वर, आकाश और पृथ्वी का सृष्टिकर्ता उन मच्छुवारों के गंदे पांव धो रहा था जिनके पांव गोबर-कीचड़, और गंदगी, और रास्ते की धूल-धक्कड़ से भरे हुए थे, जबकि उनके कपड़े मार्ग पर घिसटते चले जाते थे, और वह उन्हें धो रहा था, वह पांव धोने वाला कर्मचारी बन गया था, जबकि वह क्या था।और इसके बाद भी हम सोचते हैं, कि हम कुछ हैं। हमें तो डॉक्टर, बनना होता हैं, पी एच डी., तथा इत्यादि इत्यादि धारक बनना होता है। ओह, मेरे परमेश्वर ! मसीह तो ऐसा नहीं है। यह तो प्रेम को—प्यारे यीशु मसीह को प्रकट नहीं करता है। वह तो सब का दास बन जाता है। यह सच । है। उसने तो हमें यह नमूना सिखाया, कि हमें एक दूसरे के साथ ठीक वैसे ही करना चाहिए जैसे उसने हमारे साथ किया है। ओह, ऐसा है-ऐसा मेरा प्रभु है।वह कैसे बड़ा बनता है? क्योंकि वह अपने आप को छोटा बना सकता है। देखिए, यही है वह जो उसे बड़ा बनाता है।142मुझे यह सौभाग्य मिला है, कि मैंने अपने जीवन में कुछ बड़े बड़े लोगों से भेंट की है, और मुझे उन कुछ लोगों से भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है जो सोचते थे कि वे महान हैं। एक असली महान या बड़ा आदमी वही होता है जो यह यत्न करता है, कि आप सोचें कि आप महान हैं और वह कुछ भी नहीं है। मैंने राजाओं से तथा इसी प्रकार के और दूसरे लोगों से, और उन लोगों से जो सचमुच में महान हैं भेंट की है।उन असली कट्टर मसीहियों से जिनके कपड़ों में पैबन्द लगे हुए होते हैं और जो इसी प्रकार के वस्त्र पहने हुए होते हैं, और उनमें से कुछ तो प्रचारमंच पर ही वे रंगबिरंगे पैबन्द लगे वस्त्र पहने हुए ही आ जाते हैं, से भेंट की है। और फिर- -समझे आप? ओह, मेरे परमेश्वर, ठीक है, वे इसी प्रकार के…. यह सच है।143यह गुप्त मन्ना कोई विशेष चीज है। यह क्या विशेष है? यह किसी ऐसे के लिए नहीं है- -जो पवित्र आत्मा की आशीषं क्या हैं? ओह, नहीं, यह सारी मंडली के लिए नहीं होता है। परन्तु यह गुप्त प्रकाशन तो एक विशेष प्रकाशन होता था, क्योंकि इसकी शिक्षा तो और दूसरों को दी जानी होती थी। समझे? यह तो वचन पर थोड़ा सा और ज्ञान होता था जिसे वह और दूसरों को सिखा सकता था। उसे तो इसी प्रकार से ही होना होता था। क्या यह ठीक है?आप कभी भी अपने पास्टर से ऊँचा नहीं जी सकते हैं। आप बस यह स्मरण रखें। समझे? और अत:- -क्योंकि वह वो गड़ेरिया है जो आपको भोजन खिलाता है। यदि वह एक गड़ेरिया हैं, तो उसे यह मालूम होना चाहिए कि भेड़ों को खिलाने के लिए मन्ना कहाँ पर है। क्या यह ठीक है? अब, इस थोड़े विशेष को!एक मिनट के लिए प्रकाशन को, इस गुप्त मन्ने को देखिएँ!

144अब देखिए, उसके पास, उस दूत के पास एक श्वेत पत्थर होगा। यह एक श्वेत पत्थर है, एक चट्टान है। क्या ये यह नहीं है? और यह सच है, कि यह शुद्धता को दर्शाता है।एक बार उसने एक पुरूष से भेंट की थी, जिसका नाम शिमौन था, और उसने उसका नाम बदल कर पतरस अर्थात् “पत्थर” रख दिया। था। क्यों? उसके पास ही कुंजियाँ थीं। क्या यह सही है? उसने उसका नाम बदला और उसे पत्थर-चट्टान बना दिया। क्या यह सही है? पतरस के पास ही कुंजियाँ थीं, क्योंकि वही एक ऐसा था जिसके पास राज्य की कुंजियाँ थीं।एक नया नाम, इस पत्थर पर एक नया नाम लिखा है, जिसे उसके सिवाये और कोई नहीं जानता है। वह जानता है, कि वह कौन है, लेकिन वह यह किसी दूसरे को नहीं बता सकता है। देखा, समझे? उसे और कोई नहीं, वरन वह स्वयं ही उसे जानता है। समझे? पतरस के पास कुजियाँ थीं, परन्तु आपने नहीं सुना होगा, कि उसने इसके विषय में बड़े बोल बोले हों। समझे? ये लोग जो इस बात की शेखी बघारते हैं कि वे क्या हैं, आमतौर से ऐसा है, कि वे कुछ भी नहीं होते हैं।“…एक श्वेत पत्थर, और उसपर एक नया नाम” उसका अपना नाम नहीं, वरन किसी दूसरे का ही नाम होता है, जिसे उसके सिवाये और कोई नहीं जानता हैं (जिसके पास वह पत्थर है उसके पास वह नाम भी है) समझे? देखिए, स्मरण रखिए, यह कलीसिया को खिलाये जाने के लिए एक विशेष मन्ना होता है।145अब स्मरण रखिए, जब इस कलीसिया के साथ ऐसा घटित हुआ था, तो ठीक यही वह युग था, ठीक यही वह समय था जब यह प्रकट हुआ था, कि नीकुलाइयों ने स्वयं अपने को अपनी कलीसिया के लिए। एक प्रधान को, एक पोप को अपना प्रधान ठहरा लिया था, और उन्होंने उसे पांव तले, उसके नीचे एक श्वेत वेदी दे दी थी, संगमरमर की एक वेदी दे दी थी, (क्या यह ठीक है?) और उसे उन मोतियों से और इसी प्रकार की और दूसरी चीजों से जड़ दिया था जो उसके लिए बहुमूल्य थीं। परन्तु परमेश्वर का यह दुत यीशु मसीह के प्रकाशन के द्वारा- – के द्वारा जानता है, कि वह परमेश्वर का पुत्र (son) है।और जब नीकुलाइयों ने अपना अगुवा ठहरा लिया, और उसके पांव के तले संगमरमर के पत्थर की वेदी ठहरा कर दी, (समझे?) तो परमेश्वर ने अपने आत्मा से भरे हुए झुण्ड के लिए पवित्र आत्मा से भरे हुए अगुवे को ठहराया, और वह उसके ऊपर एक नाम की मोहर करता है, परन्तु उसे उस नाम को प्रकट नहीं करना चाहिए। उसे उसको अपने ही पास कायम रखना चाहिए। समझे? कोई और नहीं, वरन स्वयं वही उसे जानता है। “उसे गुप्त मन्ना, एक पत्थर, एक नया नाम दिया जाता है, जिसे उसके पाने वाले के सिवाये और कोई नहीं जानता हैं” और यह सम्बोधन कलीसिया के दूत के लिए ही किया गया था।मुझे आश्चर्य है, कि क्या लूथर यह जानता था? मुझे आश्चर्य है, कि क्या वैसली इसे जानता था? मुझे आश्चर्य है, कि क्या- क्या और दूसरे बड़े बड़े दूत यह जानते थे?146और मुझे आश्चर्य है, कि क्या आज- -वह महान उजियालें का दूत जो जगत में हमारे पास शीघ्र ही आने वाला है, जो हमारी बाहर अगुवायी करेगा, एक महान पवित्र आत्मा सामर्थ में आयेगा, और वह हमारी प्रभु यीशु मसीह की ओर अगुवायी करेगा। वह शायद इसे नहीं जानेगा, परन्तु वह इन्हीं दिनों में से किसी दिन यहाँ पर होगा। वह करेगा-परमेश्वर ही उसकी पहचान करायेगा। वह स्वयं अपनी पहचान नहीं करायेगा, वरन परमेश्वर ही उसकी पहचान करायेगा। परमेश्वर ही अपने उस जन को प्रमाणित करेगा। यही है वह जो उसने तब कहा था जब यीशु यहाँ पृथ्वी पर था, और उन्होंने उसे नहीं जाना था। समझे? उसने कहा था, “यदि मैं अपने पिता के कामों को नहीं करता हूँ, तो तुम मुझपर विश्वास न करो; परन्तु यदि मैं अपने पिता के कामों को करता हूँ, और तुम मुझ पर विश्वास नहीं कर सकते हो, तो तुम कामों की तो प्रतीति करो।” क्या यह ठीक है?147क्या यह अद्भुत नहीं है? प्रकाशितवाक्य की पुस्तक….अब, आप देखते हैं, कि कलीसियाएँ कहाँ पर हैं? क्या आप देखते हैं, कि उनमें किस प्रकार भीड़ की भीड़ हो गयी है? क्या आप देखते हैं, कि किस प्रकार से कलीसिया यहाँ पर बाहर निकल गयी थी? अब, यदि प्रभु तो चाहा, तो कल रात्रि को हम इसी काल पर आयेंगें। अब, मुझे खेद है, कि मैंने आपको बहुत अधिक देर तक रोक कर रखा है, परन्तु- मैं आशा करता हूँ कि आपने कुछ सीखा होगा। और मैं अपने साथ कुछ लेख ले जा रहा हूँ, कि जब- -मेरे पास यहाँ पर कुछ और हैं, मेरे पास लगभग तीन या चार पेज और भी हैं, परन्तु मेरे पास इतना समय नहीं रहा कि मैं उन्हें ले लेता। और इसका कारण यह है, कि देर हो रही है, और अब तक लगभग सत्रह मिनट हो गये है। परन्तु कैसे हम इन्हें पुस्तक में छापेंगे, और इससे हमें- हमें- हमें यह मिल जायेगा।148अब, कितने लोग उसे अपने सारे हृदय से प्रेम करते हैं? कितने लोग उस पर अपने सारे हृदय से विश्वास करते हैं? ओह, अब, क्या आप सोचते हैं, कि मैं यहाँ पर इसी लिए खड़ा होता हूँ, क्योंकि हम एक नाम धारी कलीसिया नहीं हैं, कि हम एक नामधारी कलीसिया नहीं हैं, और मैं उन बातों को कहूँगा? भाइयों, अब क्या आप समझते हैं, कि क्यों मैं – -मैं अपने सारे जीवन भर उस चीज से लड़ता रहा हूँ? देखिए, यह तो पवित्र आत्मा ही था जो ऐसा करता रहा है। मैं तो खुद इसे समझ नहीं सका था, मैं इसे कुछ दिन पहले तक नहीं जानता था। समझे? मैं नहीं जानता था, कि कौन मुझसे ऐसा करवाता है, मैं नहीं जानता था, कि क्यों मैं उन स्त्रियों के विरूद्ध चिल्लाता रहता हूँ जो सही जीवन व्यतीत नहीं करती हैं और इसी प्रकार के काम करती हैं; मैं इसे नहीं जानता था, लेकिन अब मैं जानता हूँ। समझे?149अब, परमेश्वर जानता है, कि ये बातें गलत हैं। यहाँ पर ये इतिहास से ली गयी है। और सकते हैं- -और बइबिल इन्हें बताती है- –

अब, यहाँ देखिए। बाइबिल ने इनका होने से बहुत पहले ही उल्लेख कर दिया है, कि ये बातें घटित होंगी। अब, हम यह जानते हैं, क्या हम नहीं जानते हैं? उसके बाद हम उस कलीसिया के इतिहास का अध्ययन करते हैं, और देखते हैं, कि यह बिलकुल ठीक वैसे ही हुआ है जैसा इसका बाइबिल में उल्लेख किया गया हैं। क्या यह ठीक है?खैर, इसके बाद, जब हम यहाँ पर अपने वाले कलीसियायी काल पर आते हैं, और देखते हैं, कि उसने हमारे कलीसियायी काल के लिए क्या क्या भविष्यवाणी की हैं, और ये बिलकुल ठीक वैसे ही घटित होगी जैसा परमेश्वर ने कहा है। क्या आप इसका विश्वास करते हैं? ओह,आप नहीं चाहते हैं…ओह, मैं उसे देखना चाहता हूँ, उसके मुख को निहारना चाहता हूँ,बचाने वाले अनुग्रह का युगानुयुग बखान करना चाहता हूँ;महिमा की सड़कों पर मुझे मेरी आवाज़ उठाने दो;आखिरकार, खुश होने के लिए, आखिर घर पर परवाह करता हूँ।ओह, मैं उसे देखना चाहता हूँ, उसे निहारना चाहता हूँ…(कितने लोग ऐसा करते हैं?)बचाने वाले अनुग्रह का युगानुयुग बखान करना चाहता हूँ;महिमा की सड़कों पर मुझे मेरी आवाज़ उठाने दो;आखिरकार, खुश होने के लिए, आखिर घर पर परवाह करता हूँ।150अब, जबकि आप आगे पीछे, और चारो ओर एक दूसरे से, और सभी मैथोडिस्टों, बैपटिस्टों से, प्रेसबीटेरियनों से, या वह जो कोई है, उससे हाथ मिलाते हैं, आप इसे गायेंजबकि में इस देश से होकर यात्रा करता हूँ, में गाता हुआ चलताआपने प्राण को कलव- -(किसी कलीसिया की ओर नहीं, वरन कलवरी की ही ओर)ओर लगाये रहूँ, लोहू से बहती लाल धारा की ओर लगाये रहूँ,मेरा प्रभु मेरी आगे को अगुवायी करता रहे, बस में उससे लिपटाआइये अब हम खड़े हो जायें।मैं उसे देखना चाहता हूँ, मैं उसके मुख को निहारना चाहता हूँ,अपनी आवाज उठाकर – -(आइये हम अपने हाथों को उठायें।)महिमा से भरे पथों पर अपनी आवाज उठा कर।उसके बचाने वाले अनुग्रह का बखान युगानुयुग करता रहूँ151ओह, मैं उससे प्रेम करता हूँ। मैं उससे प्रेम करता हूँ। वह अद्भुत है, वह अद्भुत है।अद्भुत है, अद्भुत है, यीशु मेरे लिए,वह अद्वैत युक्तिकरने वाला, पराकमी, शान्ति का राजकुमार, पराकमी परमेश्वर;ओह, मुझे बचाता है, मुझे सब पाप और लज्जा से दूर रखता है,मेरा छुड़ानेवाला अद्भुत है, उसके नाम की महिमा होवे!मैं एक बार खो गया था,

अब मैं पाया, निंदा से मुक्त,यीशु स्वतंत्रता और पूर्ण उद्धार देता है;मुझे बचा रहा है और मुझे सभी पाप और शर्म से बचा रहा है,आश्चर्यजनक मेरा उद्धारक है, उसकी प्रशंसा ….सब लोग, जोर से:आश्चर्यजनक। अद्भुत, यीशु मेरे लिए है,परामर्शदाता, शांति के राजकुमार, ताकतवर भगवान वह है;ओह, मुझे बचाओ, मुझे सभी पाप और शर्म से दूर रखो,आश्चर्यजनक मेरा उद्धारक है, उसका नाम प्रशंसा करता है।ओह, कितना अद्भुत!ओह, अद्भुत, अद्भुत, कि यीशु मेरे लिए है।वह काउंसलर, शांति का राजकुमार है, ताकतवर भगवान वह है;वह मुझे बचा रहा है, और मुझे सभी पापों से बचा रहा हैऔर शर्म की बात है,आश्चर्यजनक मेरा उद्धारक है, उसका नाम प्रशंसा करता है।152आइये हम एक साथ मिलकर कहें ‘उसके नाम की महिमा होवे’ उसके नाम की महिमा होवे। मेरा छुड़ानेवाला- कल रात सात बजे को स्मरण रखिए। तब तक आप जब तक आप वापस नहीं आते हैं आप ऐसा ही करें:अपने साथ यीशु का नाम लो,दुख और दुःख का बच्चा;यह आपको खुशी और आराम देगा,इसे हर जगह ले जाओ।बहुमूल्य नाम (कीमती नाम),हे कितना प्यारा है! (हे कितना मीठा!)पृथ्वी की आशा और स्वर्ग की खुशी;बहुमूल्य नाम (कीमती नाम),हे कितना प्यारा है!पृथ्वी की आशा और स्वर्ग की खुशी।जैसे ही हम आखिरी गीत, या आखिरी स्टांजा के लिए प्रार्थना में हमारे सिर झुकाते हैं:यीशु के नाम पर झुकाव,अपने पैरों पर गिरते हुए,(भगवान भगवान, इन्हें ठीक करो, भगवान) …हम उसे ताज करेंगे,जब हमारी यात्रा पूरी हो जाती है ….

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