परमेश्वर की सेवा बगैर उसकी मर्जी के करना -(Trying To Do God A Service Without Being The Will Of God)

(Trying To Do God A Service Without Being The Will Of God

परमेश्वर की सेवा बगैर उसकी मर्जी के करना

जैफरसनविले, इन्डियाना यू. एस. ए.

65-0718M

आइये हम एक क्षण के लिए खड़े रहें, जबकि हमारी प्रार्थना होती है। आइये हम अपने सिरों को झुकाएं।प्रभु, हम इस सुबह परमेश्वर के भवन में एक और सभा में वापस आने के लिए आनन्दित हैं। और परमेश्वर, हम प्रार्थना करते हैं, कि इस सुबह आप हमारी समस्त गलतियों-छुटियों का सुधार करें। आप हमें वह पथ दिखायें जो आपने ठहराया है, कि हमें उस पर चलना चाहिए, और हमें अपना प्रेम और अनुग्रह प्रदान कीजिए, कि हम उन पथों का और निर्देशों का अपने सम्पूर्ण ह्रदय से पालन करें, ताकि हम उस दिन मसीह में निष्कलंक पाये जा सकें, क्योंकि प्रभु, हम विश्वास करते हैं, कि उसका आगमन करीब है।हम उन सब चिन्हों को जो उसने कहे थे, कि उसके आगमन से ठीक पहले होंगे, अब पूरा होते हुए देखते हैं। और हम आनन्दपूर्वक उस क्षण की बाट जोहते हैं। जैसे पूर्वकाल के अब्राहम ने प्रतिज्ञा किये पुत्र के लिए बाट जोही थी; और तब वह परमेश्वर के उन चिन्हों को पृथ्वी पर आते हुए देखकर जान गया था, कि इसमें बहुत ज्यादा देरी नहीं होगी, कि पुत्र का आना हो जायेगा। और अब, हम इसकी फिर से पुनरावृत्ति होते हुए देखते हैं। यीशु ने हम से कहा था, कि जब हम इन बातों को होते हुए देखें, तो हम अपने सिर ऊपर उठायें, क्योंकि हमारा छुटकारा निकट है….समय की व्यग्रता है, राष्ट्रों में तनाव है, विभिन्न स्थानों पर भूकम्प आ रहे हैं; सागरों में गर्जनाएं हो रही हैं; इंसान का दिल भय से बैठा जा रहा है।और हमें इसका आभास होता है, कि हम उस समय में रह रहे हैं, जब राष्ट्र नहीं जानते हैं, कि क्या करना है। एक और महायुद्ध होने वाला है, ऐसा प्रतीत होता है। यह क्या ही भंयकर बात होगी। पृथ्वी दूर खिंची चली जा रही है; वैज्ञानिक कह रहे हैं, कि किसी भंयकर घटना का होना अति निकट है। हम बाइबिल को इसके बारे में कहते हुए देखते हैं। प्रभु, तब तो आप ही हमारी सुधार के इस भवन में खड़ा होने के लिए और अंधकार की इस घड़ी में आगे बढ़ कर उजियाला चमकाने के लिए हमारे परमेश्वर से आदेश लेने के लिए के लिए सहायता करें, क्योंकि हो सकता है, कि ऐसा करने के लिए हमारा यही अन्तिम अवसर हो। हम इस प्रार्थना को यीशु के नाम में और उसी की खातिर माँगते हैं। आमीन। कृपया, आप बैठ जायें।2इस सुबह यहाँ इस टेबरनिकल में होने को मैं यकीनन एक बहुत बड़ा सौभाग्य मानता हूँ। और माफ करना, कि हमारे पास आपको यहाँ-वहाँ बैठाने के लिए जगह भी नहीं है। और बाहर जगह खचाखच भरी हुई है, और लोग बाहर भी सभी जगह खड़े हुए हैं….अब, आप लोग जो बाहर हैं, आप इसे अपने रेडियो पर सुन सकते हैं, मैं भूल गया हूँ….(भाई नेविल भाई ब्रन्हम को बताते हैं, कि इसे किस आवृत्ति पर सुना जा सकता है-सम्पा.)…

आप इसे 55 से 57 पर सुन सकते हैं। आप लोग जो बाहर हैं, और बाहर उस जगह में हैं जहाँ मोटरगाड़ियाँ खड़ी की जाती है, और गलियारों में हैं, आप इसे रेडियो डायल पर 55 से 57 के बीच सुन सकते हैं।अतः हमने यत्न किया है…मैं वापस बाहर आ रहा था, बल्कि मैं यहाँ पर अन्तिम सात वित्तियों के कटोरों के विषय पर बोलने के लिए लगभग दस दिन सभा करने का प्रयास कर रहा हूँ, क्योंकि उन विपत्तियों के कटोरों के बीच बीच में तुरहियाँ हैं। और मैं आपको बता रहा था…जब मैं सात तुरहियों पर प्रचार करने जा रहा होऊँगा, तो मैं उन के साथ साथ विपत्तियों के कटोरों और मरियों पर अध्यापन कराऊँगा। और मैंने सोचा था, कि यह अच्छा समय रहेगा, मैं अभी हाल ही में अफ्रिका से लौटकर आया हूँ, और…और बच्चों की छुट्टियाँ नहीं हुई हैं। मेरे छोटे लड़के जोजेफ को एक प्रकार से थोड़ी सी…उसे अपनी पढ़ाई-लिखाई पर कुछ हफ्तों के अध्ययन की थोड़ी जरूरत है। वह पहले ही उत्तीर्ण हो चुका है, परन्तु वह बराबरी पर नहीं था, अतः हम ने उसे टयूसान में रखा…जबकि मैं अफ्रिका में था, और वह अपनी पढ़ाई पर चला गया, और स्कूल के कुछ दिन में ही उसने इसे पकड़ लिया। और उसके बाद हम फिर से वापस आते हैं। और मैंने सोचा था, जबकि बच्चों की अपनी छुट्टियाँ होती हैं, मैं यहाँ पर लोगों के साथ एक सभा करूँगा, और इन विषयों पर प्रचार करूंगा। परन्तु जब हम यहाँ पर पहुँचे, तो हमने पाया, कि हमें स्कूल का सभागार नहीं मिल सका है।3और मैं जानता था, कि टेबरनिकल लोगों को बैठाने के लिए और उन्हें एक तरह से आराम देने के लिए जैसा कि उन्हें आराम मिलना चाहिए, काफी नहीं है, जबकि मैं…मैं इस सन्देश को देता हूँ; इसलिए हमें एक अलग किस्म का इन्तज़ाम करना पड़ा। और बजाये इसके कि हम दस रातें लें जैसाकि…हम इस पर दस रात्रि की योजना बना रहे थे; खैर, मैने बस इस रविवार को दो सभाओं को करने का विचार बना डाला ….हम इस रविवार को, अगले रविवार को और उससे अगले रविवार को दो दो सभाएं करेंगे, अतः इससे…और हमने इसे कदापि विज्ञापित नहीं किया। और यदि किसी ने उसे किसी तरह से सुना, कि अगर परमेश्वर ने अनुमति दी, तो 28 से स्कूल के सभागार में सभाएं शुरू होने जा रही हैं, ठीक है, अगर आपके कोई मित्र हैं, और आपने मोटलों में कोई आरक्षण किया हुआ है, मैं ने इसे निरस्त कर दिया है। समझे? क्योंकि यह…कि उन्हें….कि हमें उसे पाने की सुविधा नहीं मिल सकी है; उन्हें स्कूल का सभागार नहीं मिल सका।4और अब मैं रविवार की इस सुबह प्रचार-सम्बंधी सभाओं पर बोलना चाहता हूँ। और रविवार रात्रि को ही मैं बीमारों के लिए प्रार्थना करना चाहता हूँ। और हम भरोसा कर रहे हैं, कि परमेश्वर आप लोगों से जो बीमार हैं, मुलाकात करेगा। मैं नहीं जानता हूँ, कि बिली कैसे आपका ध्यान रखने जा रहा है; मैं सोचता हूँ, कि वह प्रार्थना कार्ड बाटेगा, या वह कैसे किस तरीके से मंड़ली को काबू में रखेगा, मैं नहीं जानता हूँ। परन्तु यदि यह प्रभु की इच्छा हुई, तो इन आगामी तीन सप्ताहों में जिनमें हम ने सभाओं का इरादा किया है, हर एक व्यक्ति के लिए प्रार्थना करने के लिए वह सब करेंगे जो हम कर सकते हैं।और इसके बाद बहुत सी बार व्यक्तिगत साक्षात्कार होते हैं; कोई आप से किसी बात पर या, ऐसी ही किसी बात पर एक मिनट के लिए मुलाकात करना चाहता है। और हम करने जा रहे हैं…..यहाँ पर कितने ऐसे लोग हैं जो व्यक्तिगत साक्षात्कार करना चाहते हैं, आइये हम आपके हाथों को देखें। वाह! कौन नहीं चाहता है?अतः तब हम…..उन्हें लेना एक प्रकार से कठिन होगा; अतः आप अपना निवेदन लिख दें और उन्हें भेज दें..उन्हें बिली को दे दें, इसके बाद मैं उन्हें वहाँ से ले सकता हूँ। और अब, वह इसकी उद्घोषणा कर देगा…..के… बारे में… मैं सोचता हूँ, कि वह प्रार्थना कार्डों के बारे में, जब कभी वे बांटे जाते हैं, उद्घोषणा कर देगा।5इस प्रातः यहाँ पर हमारे सेवादार भाइयों में से कितने हैं? हमें मौका नहीं मिला है, कि ….मैं अनुमान नहीं लगाता हूँ…..क्या आपने उन में से किसी को पहचाना है? आज सुबह यहाँ पर कितने सेवक हैं? क्या आप सिर्फ अपने हाथों को ऊपर उठायेंगे, या आप ऊपर खड़े हो जायेंगे? आइये हम देखें, कि इस सुबह इस सभा में कितने सेवक हैं। ठीक है, अच्छा है! प्रभु, इन पुरूषों के लिए आपका धन्यवाद! काश हमारे पास उन में से हर एक को पहचानने का समय होता; परन्तु मैं सुनिश्चित हूँ, कि आप उन्हें और हमें देखते हैं…खुदा, उन्हें उनकी सेवकाई में जानता है; और हम प्रार्थना करते हैं, कि परमेश्वर उन्हें अपार आशीष प्रदान करे। निसन्देह उन में से कइयों ने तो यहाँ पर आने के लिए अपनी सभाएं बंद कीं….भाई जूनियर जैकसन, और मैं सोचता हूँ, भाई डॉन रूडेल यहाँ पर हैं। और यह प्रसारण उनकी कलीसिया में भी जा रहा है। और इस सुबह न्यू यॉर्क तथा देश के चारों ओर विभिन्न स्थानों पर भी इस का प्रसारण हर एक कलीसिया में निजी टेलीफोन के ज़रिये हो रहा है।6मैं भाई रिचर्ड ब्लेर को यहाँ बैठा देखकर प्रसन्न हूँ। मैंने अभी हाल ही में उस महान काम का जो परमेश्वर ने वहाँ पर लोगों के मध्य में किया था, एक पत्र पढ़ा है। जैसा कि मैं समझता हूँ, किसी दूसरे दिन..(हो सकता है, कि मैं गलत होऊँ; भाई ब्लेर अगर मैं गलत कहूँ, तो आप मुझे सही कर देना)…वह काम कर रहा था, वह बिजली के तार बिछानेवाले पुरूष की किसी काम में सहायता कर रहा था, मेरा यकीन है, कि ऐसा सा ही था…(मैंने चिट्ठी पढ़ी है)…और उन्होंने कुछ उलटा-पुलटा कर दिया था, और वहाँ पर ना जाने कैसे करन्ट पानी में चला। गया जहाँ पर एक…एक छोटा लड़का था (वह पुरूष जिसका ट्रेलर था, उसी का यह छोटा लड़का था, वह बस एक छोटा बच्चा था) और इसने छोटे लड़के को जान से मार दिया। और उसका पेट फूल गया था, और…….हम बिजली का झटका जानते हैं, यह है…जब वे मरते हैं, तो बिलकुल ठीक ऐसा ही होता है। नन्हीं आँखे मिच गई थीं, उसकी दांती भिच गई थी।इस ने भाइयों को बहुत ही चौंकना कर दिया। भाई ब्लेर ने कहा, कि उन्होंने सोचा था, कि उस समय वे इसके लिए प्रार्थना करवाने के लिए मुझे कहीं न कहीं पकड़ सकते हैं, परन्तु स्मरण किया, कि यह वह था, “जहाँ कहीं मेरे नाम से दो या तीन इकट्ठा होंगे, मैं उन के मध्य में हूँ।” और बाप अपनी अंगुलियों को छोटे से बच्चे के मुँह में डाल कर खोलने की कोशिश कर रहा था। और वे घुटनों पर गिर गये, और छोटे लड़के पर प्रार्थना करने लगे; और वह फिर से जिन्दा हो उठा।7क्या यह सच था, भाई ब्लेर? वो यहाँ पर हमारे सत्यनिष्ठ भाइयों में से एक हैं। ओह, वह छोटा लड़का यहीं पर है। अच्छा, प्रभु का धन्यवाद! यह अच्छा है! छोटे प्यारे लड़के, हम आप से चाहेंगे, कि आप खड़े हो जायें।

अब, प्रिय प्रभु, हम इसके लिए आपका धन्यवाद करते हैं। क्या वो इस छोटे लड़के के पिता हैं? क्या आप पिता हैं? यह सच है। और यहीं पर भाई रिचर्ड ब्लेयर हैं। हमारा परमेश्वर कुछ भी करने में सामर्थी है। जी हाँ, श्रीमान! उसने इसकी प्रतिज्ञा की है। हम तो महान, वैभवशाली स्वर्गीय पिता की दिव्य उपस्थिति में रह रहे हैं। और वह सब कुछ जो हम….सब कुछ सम्भव है, अगर हम बस इसका विश्वास कर सकें।आप देखते हैं, कि वह क्या करता है; इस ने लोगों के जीवन का क्या दाम चुकाया है, ताकि हम इसका विश्वास करें? इसने उसके नन्हें से बच्चे को बचाया। अब, वहाँ पर परमेश्वर के सेवक-भाई ब्लेर तथा वो थे…कि उस छोटे लड़के के लिए प्रार्थना करें, जब वह उस हालत में था। जी हाँ, जब भी कुछ होता है, तो स्मरण रखिए, आप जीवते परमेश्वर की सन्तान हैं। “जहाँ कहीं मेरे नाम से दो या अधिक जमा होंगे, मैं वहाँ हूँ।” और फिर यह भी लिखा है, “पर वह सकंट के समय में उपलब्ध सहायता है।” और अगर कभी वहाँ संकट था, कि वह छोटा लड़का वहाँ पर ज़मीन पर उस बिजली के झटके से जो उस में से होकर निकल गया था, मरा हुआ पड़ा था….अतः हम इस प्रातः अपने सम्पूर्ण ह्रदय से परमेश्वर का इन-इन कामों के लिए जो उसने हमारे लिए किये हैं, धन्यवाद कर रहे हैं।परमेश्वर इन विश्वासयोग्य पुरूषों को भी आशीष प्रदान करे। आपातकलीन स्थिति के समय में उस की ओर निहारने का समय होता है; और इससे पहले कि आपातकालीन स्थिति आन पड़े, उसी की ओर निहारें और उसके साथ मित्रता में हो लें। हम यह जानते हैं-यदि परमेश्वर की हम पर कृपादृष्टि है, तो हम उससे कुछ भी माँग सकते हैं, जैसे हम अपने किसी भी मित्र से माँग सकते हैं; और वह संकट के समयमें तुरन्त उपलब्ध सहायता है।8मैंने बस कल सड़क पर भाई जॉन मार्टिन की बहन से मुलाकात की थी। मैं था..

किसी ने मुझे सड़क पर रोका था तथा कोई मेरे पास से गुज़रा और अपने हाथ हिलाये। आप जानते हैं, घर वापस आने पर आप सभी जगह लोगों को रूकते हुए और हाथ मिलाते हुए तथा ऐसा ही और कुछ करते हुए देखते हैं। और यह महिला….मुझे स्मरण है, कि उन्होंने हाल ही में मुझे वहाँ पर बुलाया था जहाँ कार के अंदर किसी ने उन पर प्रहार किया और उनकी रीढ़ की हड्डी को तथा सब को क्षतिग्रस्त का दिया था; सब कुछ अस्त-वयस्त कर दिया था। उसे तो शेष जीवन भर के लिए अपंग हो जाना था। वह इस सुबह सभा में बैठ कर परमेश्वर की उपस्थिति का आनन्द ले रही है। मैं बस उससे कक्ष में वार्तालाप कर रहा था; मैं उसके साथ फिर से प्रार्थना करना चाहता हूँ। और वह थी…वह यहीं पर कहीं पर है। मैं सोचता हूँ, कि वह वापस नहीं जा सकी है। परन्तु वह यहीं है। निश्चय । ही, वह ठीक यहीं पर हमारे पास बैठी है। यह सच है। बहन, क्या आप एक मिनट के लिए खड़ी हो जायेंगी, जिससे लोग..यहाँ पर एक महिला है, जिसे कुछ दिन पहले चिकित्सक ने कह दिया था, कि वह कभी नहीं चल पायेगी; उसकी रीढ़ की हड्डी टूटी-फूटी थी, और सब कुछ क्षतिग्रस्त हो गया था; और वहाँ पर वह भली चंगी खड़ी है। आप जानते हैं, कि बाइबिल कहती है, और वे इसके विरूद्ध कुछ न कह सके थे, क्योंकि वह पुरूष उन के मध्य में खड़ा हुआ था।“ यह सच है। यहाँ पर एक छोटा लड़का है जो मरे हुओं में से वापस लाया गया, और यहाँ पर एक महिला है जिसकी रीढ़ की हड्डी टूटी-फूटी थी,वह हमारे मध्य में खड़ी हुई है। यह बस अभी हाल ही में किया गया है। अतः वह कल, आज, और युगानुयुग एक सा है। प्रभु का नाम मुबारक होवे! इस समय उसकी उपस्थिति में रहने और यह जानने के लिए, कि वह संकट के समय में तुरन्त उपलब्ध सहायता है।हमें कितना आनन्दित होना चाहिए। इस सुबह हम भाई वेयले, भाई मार्टिन तथा और बहुतेरों को देखकर आनन्दित हैं। और प्रभु आप भाइयों को बहुतायत में आशीष दे।अब यह एक है…9मैं जानता हूँ, कि यहाँ पर इस सारी भीड़ सहित भी बहुत ज्यादा ठंड़क नहीं है, परन्तु फिर भी जब मैंने टयूसान को छोड़ा था, तो वहाँ पर यह लगभग एक सौ चार या पाँच फेहरेनाइट था, और मध्य रात्रि को यह लगभग 93 फेहरेनाइट था, अतः यहाँ मुझे काफी अच्छा अनुभव होता है। और वे बताते हैं, कि इससे पहले कि हम शुक्रवार को पारकर को छोड़ते वहाँ पर यह एक सौ चालीस था। और आप कल्पना कर सकते हैं, कि यह कितना गर्म है, क्योंकि वह रेगिस्तान में है।और अब, इन तीन अगले रविवार…..मैं सोचता हूँ, कि आज पन्द्रह है, क्या यह सही है, या आज सोलह है? पन्द्रह, क्या यह नहीं है? (कोई उत्तर देता है, अट्ठारह-सम्पा.)अठ्ठारह! और अठ्ठाइस तथा ….पहली अगस्त को! क्या यह सही है? (कोई उत्तर देता है, और सही तारीखें बताता है-सम्पा.)पच्चीस…अट्ठारह, पच्चीस और पहली को टेबरनिकल में सभाएं होंगी। क्या आप नहीं जानते हैं, कि इससे पहले कि बाहर बहुत ज्यादा जाना पड़े….क्योंकि आप देखते हैं, हमें वह नहीं मिल सका जो अंदर है….आप जानते हैं जो इस समय यहाँ अंदर है, और यह बस बदत्तर होता चला जाता है। अगर आप वापस आ सकते हैं, तो आप बस वापस आ जायें।10और तब मैं यहाँ पर ट्रस्टियों को एक साथ जमा करने के लिए हूँ। मैं इसके बारे में सब कुछ बताऊँगा जो मुझ पर बोझ डाल रहा है, कि मैं किसी एक जगह पर सभा करूं, जब मैं इसे करने की अगुवाई महसूस कर रहा हूँ। अतः मैं सोचता हूँ, मैं उन से पूछूगा, कि क्या हमें सिर्फ अपना तम्बू नहीं मिल सकता है, तथा…तथा हम उसे खड़ा करें और बस वहीं पर रूके रहें; और आप जानते हैं, उसे यहाँ बॉल पार्क में या बाहर फार्म में गाड़े, और उसे एक जगह से दूसरी जगह पर वैसे ही ले जायें जैसे खुदा अगुवाई करेगा। और मैं अनुभव करता हूँ, कि ठीक ऐसा ही वे करने जा रहे हैं। आप जानते हैं, इसके सम्बंध में एक दर्शन है। और मैं सोचता हूँ, हो सकता है, कि इसी कारण यह हो….आप जानते हैं, बहुत सी बार हम सोचते हैं, यह बहुत ही भंयकर है, क्योंकि अमुक-अमुक घटनाएं होती हैं। लेकिन आप जानते हैं, कि हो सकता है, कि यह परमेश्वर ही हो(समझे?) जो आपको इन बातों मेंधकेल रहा हो। जब उस ने इसे कहा है, तो वह इसे करेगा।11कुछ रात्रि आप में से बहुतेरे….अफ्रिका जाने से लगभग एक महीने के अंदर….शायद आप में से बहुतेरों के पास (आप जो टेप लेते हैं)एक दुल्हन का चुना जाना, पर टेप हो। इसे कैलीफोर्निया में प्रचारा गया था। मुझे यह याद नहीं है, कि मैं उस टेप के अन्तिम कुछ क्षणों में कभी वहाँ पर था। परन्तु प्रभु का आत्मा इस प्रकार आया। जिस तरह से वे जी रहे थे और जिस तरह के वे कार्य कलाप कर रहे थे, मैं उसकी भर्त्सना कर चुका था, और सुसमाचार का प्रचार चुका था, और उनके सम्मुख उसकी बहुत ज्यादा पहचान हो चुकी थी, तो उसके बाद एकाएक पवित्र आत्मा बोला, और उसने कहा, “हे कफरनूहम, (समझे?) तू जो अपने आप को फरिश्तों का शहर कहता है(यह लॉस एन्जिल्स है) तेरी ख्याति स्वर्ग में पहुँची है, पर तू अधोलोक में गिराया जायेगा।” समझे? और जब यह खत्म हो गई थी, क्यों, मैं बाहर था। और भाई मोसले, और बिली मेरे साथे थे, और उन्होंने कहा..हम वापस गये और हमने दृष्टि डाली, और सारे फर्श पर लोग लेटे पड़े थे, सेवकगण सिसकी ले लेकर रो रहे थे।12और मैंने जाकर पवित्रशास्त्र लिया, और मैंने कहा, इसके बारे में बाइबिल में कोई बात है। और यह यीशु था जो कफरनूहम, तथा उन सारे तटीय शहरों को जहाँ वह गया था, फटकार रहा था। क्यों क्या उस ने नहीं कहा था, “हे कफरनूहम, क्या तू स्वर्ग तक ऊँचा किया जाएगा? तू तो अधोलोक तक नीचे जायेगा। उसने कहा था, क्योंकि जो सामर्थ के काम तुझ में किये गये, यदि सदोम और अमोरा में किये जाते, तो वह आज तक बना रहता।” और उस समय सदोम और अमोरा समुद्र की तलहटी में थे। और ठीक उसके बाद ही,…हो सकता है, कि सौ वर्ष के बाद या यीशु मसीह के भविष्यवाणी करने के कुछ वर्ष बाद भूकंप ने कफरनूहम को समुद्र में डुबा दिया था। कफरनूहम ही वह एक मात्र तटीय शहर था जहाँ यीशु गया था। आप जानते हैं, कि वह कैलीफोर्निया के लिए, लॉस ऐन्जिलस के लिए। एक सीधा उत्तर था।13और उसके बाद किसी दूसरे दिन जैसे ही मैं टयूसान वापस आया, तो वहाँ पर एक बड़ा भूकम्प आया। और वैज्ञानिक उसे टेलीविजन पर चित्रित कर रहे थे।

यह अखबारों में था, कि उस दूसरे दिन अल्यूटिन टापूओं से ज़मीन फट गई थी…अथवा अलास्का से अल्यूटिन टापूओं के आसपास समुद्र में लगभग दो सौ मील तक ज़मीन फट गई, भूकम्प वापस सैन डीगो में आया, लॉस एन्ज़िल्स के चारों ओर गया, और सन डीगो पर बाहर आया। और इसने ज़मीन को कई इन्च खोखला कर दिया। घर लुढ़क कर गिर गये- मोटल अंदर धस गये। और इस पैनल पर जो वैज्ञानिक थे, उन से पूछा गया, “अच्छा, क्या वह किसी भी दिन अंदर धस सकता है?उसने कहा, “ हो सकता है? यह अवश्य ही धसेगा। और उसने वैज्ञानिक शब्दों का उपयोग करते हुए बताया, कि लावा कैसे….यही है वह जिसने सैन डीगो के चारों ओर तथा वहाँ नीचे इन भूकम्पों को पैदा किया; वो जगह खोखली हो। गई है। और अब इसकी सारी की सारी ज़मीन वैसे ही झरझर होने लगी है जैसे रेत के अंदर गिर रही हो। और अब यह सिर्फ पपड़ी सी ही है, और यह कई इन्च खोखली हो चुकी है। वे रडार तथा ऐसे ही और दूसरे यंत्र ले सकते हैं, और उस दरार को देख सकते हैं, और अंकित कर सकते हैं, वे देख सकते हैं, कि वह कहाँ पर है। और यह और भी कई इन्च खोखली हो चुकी है; और हो सकता है, कि उस भविष्यवाणी के बाद यह और भी दो या तीन इन्च खोखली हो गयी हो।और वह व्यक्ति जो उस वैज्ञानिक से साक्षात्कार ले रहा था, बोला, अच्छा, शायद ऐसा हमारे युग में नहीं होगा।“वह बोला, “ऐसा पाँच मिनट के अंदर अंदर या पाँच साल के अंदर-अंदर हो सकता है, परन्तु यह अवश्य ही डूबेगा।”14श्रीमती को बैठे हुए देखता है। भविष्यवाणी को पास करके कहा था, श्रीमती सिम्पसन—मैं नहीं सोचता हूँ, कि वे आज हमारे साथ हैं, या….मैं यहाँ पर भाई फ्रेंड को बैठे हुए देखता हूँ; परन्तु मैं नहीं जानता हूँ, कि श्रीमती सिम्पसन कहाँ पर हैं। वे गई और उन्होंने उस भविष्यवाणी को पाया जो मैंने लगभग सन् 1935 में या कुछ ऐसे ही समय की थी, और भविष्यवाणी करके कहा था, “एक समय आएगा (यह पुस्तक में कहीं पर लिखी हुई है), कि समुंद्र अपने बहने का मार्ग रेगिस्तान बना लेगा।” देखिए, क्या घटित होगा। यदि वह हजारों वर्ग मील पृथ्वी के लावा में गिर जायेगी, और अंदर धस जायेगी, तो लाखों लाख लोग एक ही समय में मर जायेंगे। और वह ऐसी ज्वार भाटा वाली तरंगे उत्पन्न करेगा….स्मरण रखिए, कि लवणीय समुंद्र (Salton Sea) में लवणता समुंद्र तल से सौ या दो सौ फीट नीचे है। वह जल सम्भवतः ज्वरीय तरंगों के साथ उसे पार करता हुआ टयूसान में आ जायेगा, और समुद्र अपने बहने का मार्ग रेगिस्तान बना लेगा।राष्ट्र विघटित हो रहे हैं।इस्राएल जाग रहा है।जो चिन्ह हमारे नबियों ने पहले से बताये पूरे हो रहे हैं।अन्यजातियों के दिन गिने गयेभय से भारी किये गये हे बिखरे हुओं,अपने निज देश लौट आओ।हम अंत समय में हैं। अब, प्रभु आपको बहुतायत में आशीष दे। मैंने उससे शुरू किया था और मैं समय के बारे में भूल गया हूँ। कुछ भी हो हम बहुत ही जल्द अनन्तता में विलीन होने जा रहे हैं।15और अब, हम इस मूलपाठ के लिए एक विषय लेने के लिए, जो अभी हाल ही में हमने पहले राजा के 13वें अध्याय में पढ़ा है, संत मरकुस के 7वें अध्याय का 7वाँ पद निकालें। मैं इसके लिए एक मूल पाठ बनाने के लिए मरकुस 7:7 लेना चाहता हूँ।…और वे व्यर्थ ही मेरी उपसाना करते हैं, क्योंकि मनुष्यों की आज्ञाओं को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।अब, मैं और कुछ नहीं, वरन सिर्फ उसी सन्देश को जानता हूँ, जो प्रभु ने मुझे दिया है; और यही है वो जिस पर मैं बोल सकता हूँ। और अब, इस सुबह मैं एक विषय पर बोलने जा रहा हूँ, जो मैंने सोचा था, कि यह अच्छा रहेगा। और यदि प्रभु ने चाहा, तो मैं आज रात्रि सही समय पर भोजन…“आत्मिक भोजन सही समय पर, और इसे कैसे प्राप्त किया जाये”, पर बोलना चाहता हूँ। और अब इस सुबह मेरा विषय है-“परमेश्वर की सेवा बगैर परमेश्वर की इच्छा के करने का प्रयास करना।परमेश्वर ही सर्वश्रेष्ठ है। और हम यहाँ पर पढ़कर वह देखते हैं, जो दाऊद ने पहले राजा के 13 वें अध्याय के पवित्रवचनों में किया है। और वह था—उसके इरादे नेक थे। परन्तु परमेश्वर हमें हमारे नेक इरादों पर वरियताएं नहीं देता है। परमेश्वर की सेवा करने का केवल एक तरीका है, जो उसकी मर्जी को उसकी आज्ञा के मुताबिक करना है। और चूंकि परमेश्वर सर्वश्रेष्ठ है, अतः कोई ऐसा नहीं है जो उसे बताये, कि क्या करना है, या इसे कैसे करना है; वह तो इसे अपने ही तरीके से करता है…वह इसे करने का सही तरीका जानता है। और इसी से ही मुझे अच्छा महसूस होता है। और इससे हम सभों को अच्छा ही महसूस होना चाहिए; और मैं सुनिश्चित हैं, कि यह ऐसा ही करता है। क्योंकि किसी एक का आगमन तो इस मार्ग से होता है, और किसी एक का निष्कासन उस मार्ग से होता है; और कोई एक किसी दूसरे मार्ग से ही….16परन्तु फिर भी परमेश्वर के विषय में एक बहुत बड़ी बात है, कि उसने हमें नहीं छोड़ा है। अब, बिना यह जाने के सत्य क्या है और इसे कैसे करना है; वह बस हमें किसी उस काम को करने के लिए दंड़ित नहीं करेगा जो हम जानते ही नहीं हैं, कि उसे कैसे किया जाना है; और फिर वह हमें किसी बात में ठोकर खा जाने दे। वह इस तरह का परमेश्वर नहीं है। वह तो ऐसा परमेश्वर है जो वचन बोलता है और अपने बच्चों से यह उम्मीद करता है, कि वे उस पर विश्वास करें। और यही कारण है, कि वह जानता है, कि क्या सबसे अच्छा है, और उसे कब करना है, और उसे कैसे करना है। हमारे तो उसके बारे में सिर्फ विचार होते हैं, लेकिन वह जानता है।और तब, यदि वही उसकी एक कार्य पद्धति ठहराता है, जो वह करने जा रहा होता है; और उसने हमें नहीं बताया, कि क्या होने जा रहा है, और वह कैसे होने जा रहा है, तब तो हम उस पर ठोकर खा जायेंगे…हम अपने ठोकर खाने में या किसी काम को करने की चेष्टा करने में न्यायसंगत होंगे, हर कोई न्यायसंगत होगा। परन्तु केवल एक ही तरीका है, और वह उसका वचन है!17और हम यहाँ पर देखते हैं, कि दाऊद के मन में एक और बात थी, कि वह कुछ ऐसा काम करना चाहता था जो भला था। उसका कोई गलत ध्येय या कोई गलत उद्देश्य नहीं था; परन्तु भवन-अथवा यहोवा का सन्दूक लोगों से दूर था, और वह परमेश्वर के सन्दूक को अपनी जगह पर लेकर आना चाहता था, ताकि लोग उन बातों के बारे में, जो वे चाहते हैं, परमेश्वर से सम्मति ले सकें।बजाये इसके कि…..इसे बस जाने दें; हम…क्या होता, अगर भाई ब्लेर तथा इस छोटे लड़के के पिता ने यह कह दिया होता, “अच्छा, यह तो बहुत बुरा हुआ; बच्चे को सिर्फ चोट लगी, और बच्चा जान से मर गया। मैं सोचता हूँ, सिर्फ यही सब कुछ ही हुआ था? परन्तु वे तुरन्त ही परमेश्वर के पास गये।क्या होता, अगर कुछ रात्रि या कुछ दिनों पहले वह युवा महिला तथा सुसमाचार का सेवक उसका पति कहता, जब उस युवा महिला का, जो कि अभी हाल ही में ऊपर खड़ी हुई थी, जिसकी रीढ़ की हड्डी टूट-फूट गई थी….डॉक्टर ने तो कह दिया था,

वह अपनी सारी जिन्दगी भर के लिए अपंग हो जायेगी। क्या होता, अगर उसके पति ने…अगर उसने कहा होता, “ठीक है, प्रिय, हम इस पर खुद अपने आप को ढाढस बन्धायेंगे। परन्तु उन्होंने तुरन्त ही इसके बारे में कुछ किया; वे परमेश्वर के पास गये। बाइबिल में से हम कितनी ही बातों का हवाला दे सकते हैं; कि कैसे जब लोग संकट में पड़े, तो वे परमेश्वर के पास गये।18खैर, तब उन दिनों में उन के पास भेंट करने का केवल एक ही स्थान था जहाँ वे परमेश्वर से भेंट कर सकते थे; और वह था लोहू के तले सन्दूक पर! अभी भी वही भेंट करने का एक मात्र स्थान है-लोह के तले। प्रायश्चित के ढक्कन (अनुग्रह के स्थल) पर लोहू छिड़का जाता है, कि उपासक को या माँगने वाले को जब वह सन्दूक के पास परमेश्वर से विनती करने के लिए आये, तो उसे अनुग्रह प्रदान किया जाये। और परमेश्वर की एक खास लीक है, उसका एक खास मार्ग है जिस पर आपको….उसके विषय में किया जाना होता है, और वह अन्य कुछ भी ग्रहण नहीं करेगा। वह और कोई प्रबंध ग्रहण नहीं करेगा, वह तो उसी कार्य-पद्धित को ग्रहण करेगा जो उसने ठहराया हुआ है।अभी हाल ही में मैं ने एक सन्देश पर प्रचार किया था (आप में से कई लोग इसके बारे में जानते हैं) जो कि एक मात्र प्रदान किया गया स्थान है जहाँ परमेश्वर अपने उपासक से भेंट करता है, उसी स्थान के लिए उस ने कहा था, “मैं वहाँ पर अपना नाम रखेंगा।” यदि आप एक ऐसी कलीसिया ढूंढ लेते हैं जहाँ उसने अपना नाम रखा है, तो फिर हमें वह स्थान मिल गया है। उसने कहा था, मैं तुम्हें सभी फाटकों में आशीष नहीं दूंगा; मैं तो तुम्हें उसी फाटक में ही आशीष दूंगा जहाँ मैंने अपना नाम रखा है। मैं इसे एक स्थान में रबँगा, और मैं तुम से वहीं भेंट करूंगा; और वही एक एक मात्र ऐसा स्थान है जहाँ मैं तुम से भेंट करूंगा।”और हमने उस पर अध्ययन करने के द्वारा यह मालूम किया था, कि उसने अपना नाम कहाँ रखा। और वही एक मात्र स्थान है जहाँ वह अपने उपासक से भेट करता है; और उसका नाम यीशु मसीह है। परमेश्वर का नाम यीशु मसीह है।19यीशु ने कहा था, “मैं अपने पिता के नाम से आया हूँ।” हर एक पुत्र अपने पिता के नाम से ही आता है। और वह पिता के नाम से आया। “और स्वर्ग के नीचे लोगों के बीच में कोई और नाम नहीं दिया गया है, चाहे यह मैथोडिस्ट, प्रेसबीटेरियन, बैपटिस्ट, चर्च ऑफ क्राइस्ट कहलाते हों; चाहे ये जो कुछ करते हो; केवल एक ही भेंट करने का स्थान है जहाँ परमेश्वर मनुष्य से भेंट करता है; और ऐसा तभी होता है जब वह यीशु मसीह में होता है; केवल यही एक स्थान है। और पुराने नियम के अन्र्तगत इन सारी पुरानी बातों ने जो पिछले समय में थीं, इसी का प्रतिचित्रण किया था। मैं चाहता हूँ, कि आप इसे स्पष्ट रूप से समझ जायें। अब, यह सन्डे स्कूल का एक पाठ है। और मैंने यहाँ नीचे वचन के कुछ लेख तथा टिप्पणियाँ लिख कर रखी हुई है। और मैंने सोचा था, कि यह आपको समझाने में मददगार होगा, जैसे सभी पुरानी बातें हमारे लिए उदाहरण ठहरने के लिए हुईं।20अब, हम देखते हैं, कि परमेश्वर का काम करने का एक तरीका है; परन्तु दाऊद को देखिए; वह तो परमेश्वर से आशीष पाकर राजा बन गया था; उसने बस सोचा था, कि कैसे न कैसे वह तो बस परमेश्वर के लिए कुछ करेगा। और वह इसके विषय में कभी भी सही मार्ग पर नहीं चला था।हम ध्यान देते हैं, परमेश्वर अपना वचन अपने पहले से ठहराये हुए समय में…पहले से ठहरायी हुई ऋतु में ही प्रकट करता है। अब, कैसे मार्टिन लूथर आज के सन्देश के बारे में जान सकता होता? प्रेसबीटेरियन कैसे…कैसे मार्टिन या कैथोलिक कलीसिया लूथर का सन्देश जान सकती होती? कैसे जॉन वैसली लूथर का सन्देश जान सकता होता? कैसे वैसली पिन्तेकोस्तलों का सन्देश जान सकता होता? या कैसे पिन्तेकोस्तल इस सन्देश को जान सकते होते? समझे? वह तो इसे अपनी ही ऋतु में प्रकट करता है, क्योंकि यह तो एक बीज है, और जैसे जैसे वह बढ़ता है और परिपक्व होता जाता है, वह खुद अपने को ही प्रकट करता है।21जैसे सूर्य की ऊष्मा बीज को खोलने के लिए होती है। जब यह अर्थात् बीज मृदुल और युवा होता है, तो यह उसे भूमि से बाहर निकाल कर लाती है; इसके बाद सूर्य की दूसरी अवस्था में उसे उसकी पत्तियाँ….देती है। यदि वह पकता बीज है, या यह पकने का समय है, तो तप्त सूरज उसे मार डालेगा। अतः वह सूर्य को ऐसा सुव्यवस्थित करता है और प्रकृति को ऐसा सुव्यवस्थित करता है, कि उसके वचन से आमना-सामना करे। वह कलीसिया को, पहले से चुने हओं को, दुल्हन को नियमानुसार ढ़ालता है, कि उस ऋतु के…उस समय के अनुकूल बन सके, जिसमें वे रह रहे होते हैं।यहाँ तक कि खुद प्रकृति भी हमें आज ऐसा ही बताती है, जैसा कि हम राष्ट्रों को विघटित होते हुए देखते हैं, पृथ्वी धसती चली जा रही है, दीवार पर हस्तलेख है। हम कलीसिया को और उस हालत को जिस में वह है, देखते हैं। हम दुल्हन को और उस अवस्था को जिस में वह है, देखते हैं। और हम प्रकृति के द्वारा यह जानते हैं, कि कलीसिया जाने को तैयार हो रही है। क्या ही महिमामय समय है! यह वह समय है, यह वह घड़ी है जिसे देखने की सारे भविष्यद्वक्ताओं ने लालसा की थी।22इब, वह अपना वचन अपनी ही ऋतु या समय में प्रकट करता है। मार्टिन लूथर ने ठीक वही बाइबिल पढ़ी थी जो हम पढ़ते हैं। वैसली ने ठीक वही बाइबिल पढ़ी थी जो बाइबिल लूथर ने पढ़ी थी।पिन्तेकोस्तल ठीक वही बाइबिल पढ़ते हैं। जो हम पढ़ते हैं। यीशु ने ठीक वही बाइबिल पढ़ी थी जो फरीसियों ने पढ़ी; परन्तु उनका था…..उन्होंने गेहूँ के दाने को उसकी आरम्भिक अवस्था में ही रखने का प्रयास किया, जबकि वह पक रहा था, वे अपने समय को देखने में चूक गये थे।अब दाऊद ने यहाँ पर ठीक यही काम किया था। परमेश्वर अपने वचन को अपने समय में और उसी पर प्रकट करता है जिसपर वह इसे प्रकट करने के लिए चुनता है। परमेश्वर उसे चुनता है जिस पर वह इसे प्रकट करता है। वह तो उसे जगत की उत्पत्ति से भी पहले चुन लेता है। उसके सारे काम उसके द्वारा पहले से ही जाने गये, जो कि इंसान से छिपे हुए हैं; वह उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार ही प्रकट करता है। यह तो उसका चुना हुआ समय होता है; उसका चुना हुआ इंसान होता है जिस पर वह इसे प्रकट करता है। और उसने कभी किसी समूह को या पंत को नहीं चुना; यह तो चुना हुआ एक अकेला व्यक्ति होता है जिस पर वह इसे प्रकट करता है। वह इसे ऐसे ही करता है।23वह कौन है जो उसे सही करने का दुस्साहस करे, और कहे, “अब, प्रभु आप ने इस मनुष्य को सेवकाई में रखने की गलती की है। यह मनुष्य वैसा विश्वास नहीं करता है जैसा हम विश्वास करते हैं।” कौन है जो परमेश्वर को बतायेगा, कि वह इस में गलत है? ऐसा तो कोई वही कर सकता है, जो उससे थोड़ा सा ज्यादा अपराधी है जितना कि मैं हूँ, कि वह उसे ऐसा बताये। परमेश्वर जानता है, कि वह क्या कर रहा है। वह जानता है, कि किसे चुनना है, और किसे नहीं चुनना है; क्या करना है और इसे कब करना है। इससे कोई मतलब नहीं है, कि हम कितना ज्यादा सोचते हैं, अमुक-अमुक व्यक्ति अमुक काम को करने के लायक है; परमेश्वर जानता है, कि कौन समय और ऋतु के लिए योग्य है; या वह समय जानता है, और इसे करने का सही समय जानता है।और असली, सच्चा मसीही; परमेश्वर में असली, सच्चा विश्वासी इन बातों के लिए प्रभु की बाट जोहता है।

आप अपनी सेवकाई पर इन्तज़ार तो करे। यदि आप बुलाहट महसूस करते हैं, तो आप सुनिश्चित तो हो, कि वह परमेश्वर की ओर से ही आ रही है। आप सुनिश्चित हो, कि यह सही है। आप सुनिश्चित हो, कि जो बात आप कह रहे हैं, वह समय के मुताबिक हो। बाइबिल कहती है, “वे जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे अपना नया बल प्राप्त करते जायेंगे। वे पंख लगाये हुए उकाब की नाई उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे, और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।”24दाऊद पर ध्यान दें, वह इस्राएल का राजा था, जिसका अभी हाल-फिलहाल में ही अभिषेक हुआ था। शमूएल ने उसके ऊपर तेल उंडेला था, और वह इस्राएल का राजा होने के लिए परमेश्वर का चुना हुआ था। और दाऊद को खुदा का अहद का सन्दूक दाऊद के नगर में लाने का यह प्रकाश्न मिला था। अब देखिए, इसमें कुछ गलत नहीं है, परन्तु आप देखिए, दाऊद ने इस पर गलती की थी।अब, यह दिखाई पड़ता है, यदि किसी ऐसे पुरूष को कोई प्रकाशन मिलता है, जो कि एक महान व्यक्ति है जैसे कि परमेश्वर का चुना हुआ राजा…(मैं सोचता हूँ मसीह के अलावा जो सबसे महान राजा कभी पृथ्वी पर रहा वह दाऊद ही था, क्योंकि मसीह दाऊद का पुत्र था)……अब देखिए, इस महानतम पुरूष हालफिलहाल में अभिषेक हुआ था, वह परमेश्वर की ठीक उपस्थिति से आ रहा था, उसे परमेश्वर के लिए कुछ करने का प्रकाशन मिला और वह इसे परमेश्वर के लिए ही करना चाहता था; परन्तु वह प्रकाशन गलत था। अब, यही एक बड़ी बात है। इसका हमारे इस विषय से सरोकार होगा- “परमेश्वर की सेवा करने का यत्न…उसे करने के लिए बिना बुलाये हुए ही किया जा रहा है।”25ध्यान दीजिए, दाऊद को प्रकाश्न मिला था। और गौर कीजिए, यह नबी नातान नहीं था जिसे प्रकाशन मिला था; यह तो राजा दाऊद था जिसे प्रकाशन मिला था। ना ही नातान से उसके बारे में सम्मति ली गई थी। उसने नातान से कभी नहीं पूछा था। परन्तु क्या आपने यहाँ पर पहले राजा में देखा, उसने सहस्त्रपतियों और शहपतियों से सम्मति ली ? उसने लोगों से सम्मति ली, और उसने उस दिन के याजकों और धर्मशास्त्र के ज्ञान के ज्ञाताओं और शास्त्रियों और थियोलोजिनों से सम्मति ली। जब दाऊद ने पहली बार सलाह-मशवरा किया, तो उसने कहा था, यदि ऐसा है…यदि यह परमेश्वर की ओर से है, तो आओ हम नीचे चलें, और अपने परमेश्वर का वाचा का सन्दूक नगर में ले आयें; और इससे पहले कि हम काम करें, आओ हम परमेश्वर से सम्मति लें।26उन्होंने कहा था, “उन्होंने शमूएल के दिनों में सन्दूक के द्वारा— ऊमिम….ऊमिम-थूमिम के द्वारा परमेश्वर से सम्मति लेनी छोड़ दी थी; उन्होंने ऐसा करना छोड़ दिया था।” और दाऊद ने कहा,“अब, आओ हम वापस परमेश्वर के पास चलें, हम सब के सब सही चीज के पास चलें। आओ हम नीचे जायें, और अहद का सन्दूक उठायें और उसे यहाँ पर लायें (दूसरे शब्दों में परमेश्वर की उपस्थिति को नगर में लेकर आयें) आओ हम बेदारी करें। आओ हम लोगों को वापस ले कर आयें।” परन्तु उसे एक प्रकाशन मिला था जो अच्छा तो प्रतीत होता था, लेकिन वह परमेश्वर की मर्जी नहीं थी।बजाये उस साधन से पूछने के जिससे उसे पूछना चाहिए था,

उसने प्रधानों से सम्मित ली, क्योंकि वह हाल-फिलहाल में ही राजा बना था, और उसने सोचा की, कि वह उसी लीक का अनुसरण करे जो उसके मुख्य प्रधानों और उसके बड़े बड़े लोगों ने….की।इसके बाद वह तथाकथित कलीसिया में गया, और पूछा, क्या वे बेदारी कर सकते हैं….उसने याजकों, शास्त्रियों, प्रधानों, सहस्त्रपतियों और शतपतियों से और उन से सम्मति ली, क्या यह प्रभु की मर्जी है? और उन्होंने कहा, यह है। परन्तु आप देखते हैं, वह उस खास माध्यम से पूछने में चूक गया जिसके जरिये परमेश्वर हमेशा बातचीत करता है(समझे?)वह इसे करने में चूक गया था।27अब उसके इरादे नेक थे। उसकी मंशा अच्छी थी, उसका उद्देश्य अच्छा था; और…उसका उद्देश्य नगर में बेदारी लाना था; लोगों को वापस परमेश्वर के पास लाना था। परन्तु उस साधन से कदापि सलाह नहीं ली थी जिससे परमेश्वर ने उसे पूछने के लिए बताया था। समझे?यहाँ तक कि सारे लोग और याजक सहमत थे….

कि राजा सही है। वे नगर में अहद का सन्दूक वापस लाना चाहते थे।अब, वे परमेश्वर की मौजूदगी चाहते थे। वे बेदारी चाहते थे। परन्तु परमेश्वर ने अपने वचन को उसकी ऋतु में लोगों पर प्रकट करने की कदाचित प्रतिज्ञा नहीं की थी। उसने इस बात की कदापि प्रतिज्ञा नहीं की थी, कि वह उसे उसके मौसम में राजा पर ज़ाहिर करेगा। और परमेश्वर लेशमात्र भी नहीं बदलता है। उसने ऐसा करने की प्रतिज्ञा नहीं की थी।28इससे कोई मतलब नहीं है, कि आप कितने सत्यनिष्ठ है, और आपके कितने अच्छे इरादे, और आप के कितने अच्छे उद्देश्य हैं, और उन बातों को लोग कितना ज्यादा चाहते हैं, और उसकी कितनी ज्यादा आवश्यकता दिखाई पड़ती है; इन सब कार्यकलापों में तो परमेश्वर की मर्जी होती है जिसका पालन किया जाना होता है। यही है वह जो मैं आपके अंदर गहराई में आत्मसाध कर देना चाहता हूँ। मैं इसे ऐसा बनाना चाहता हूं, ताकि आपको इस पर निगाह डालनी पड़े, यदि…यदि परमेश्वर का आत्मा आपके अंदर वास करता है। और यही कारण है, कि मैं इसी पर बहुत देर से टिका हुआ हूँ। जो लोग टेलीफोन पर हैं तथा जिन्होंने तार लटकाये हुए हैं; मैं आपका समय नहीं ले रहा हूँ; परन्तु मैं…मैं चाहता हूँ, कि आप इसे देखें। यदि आपका समय खत्म हो जाता है, तो आप टेप ले लें। वहाँ वह…इससे कोई मलतब नहीं है, कि इसकी कितनी ज्यादा जरूरत थी; हर कोई इस बात पर कितना ज्यादा सहमत हुआ, कि इसकी आवश्यकता थी।

कितनी अधिक ऐसा था, कि वह सत्य था; तौभी एक ही बात है जो मालूम करनी है क्या वह परमेश्वर की मर्जी है?अब, परमेश्वर ने कभी इसकी प्रतिज्ञा नहीं की थी, कि वह अपने भेदों को अपने राजाओं पर प्रकट करेगा; वह अपने गुप्त भेदों को अपने लोगों पर प्रकट करेगा।29कुछ ऐसा ही इम्ला के पुत्र मीकायाह के समय में हुआ था। जैसाकि हमने अपना मूल पाठ नहीं छोड़ा है; परन्तु इसे समझाने के लिए और इसे आप पर सत्य बनाने के लिए, इसे आप पर असली बनाने के लिए, ताकि आप इससे न चूकें, एक और समय ले लिया है।मीकायाह के दिनों में ऐसा था….वह एक निर्धन व्यक्ति था; और वह निर्धन परिवार से भी आता है। परन्तु अहाब जो इस्राएल का राजा था; जैसाकि एक राष्ट्र परमेश्वर की अधीनता में था; उसने अलग से एक शिक्षण संस्थान स्थापित किया था, और उसने चुनिन्दा, खुद के पकड़े हुए नबियों का एक रख रखाव किया था, और उस शिक्षण-संस्थान में उनमें से चार सौ थे। और वे श्रेष्ठ पुरूष थे। वे बस झूठे भविष्यद्वक्ता नहीं थे; वे सच्चे पुरूष थे। और लोग इन पुरूषों के द्वारा यहोवा से सम्मति लेते थे। और उन्होंने नबूवत की थी। परन्तु आप देखिए, जब वास्तविक प्रकटीकरण आया, तो उन में से हर एक परमेश्वर की मर्जी और वचन से बाहर था।30क्योंकि यहोशापात यरूशलेम से..भेंट करने के लिए….राजा अहाब से भेंट करने के लिए आया; और उन्होंने अपने अपने वस्त्र पहने, और वे बाहर फाटकों में बैठ गये, और उन नबियों को उन के समक्ष लाया गया। पहले अहाब ने कहा, यहाँ ऊपर रमोद-गिलाद में हमारे पास एक भूमि है जो सचमुच में हमारी है। अब, यह यहोवा यूं कहता है, वाली बात है; यहोशू ने इसका लोगों के लिए बटवारा किया था, और इसे उन्हें दिया था; परन्तु पलिश्तियों ने उस पर अपना कब्जा कर लिया था। और बोला, “यहाँ हमारी सन्तानों को रोटी की आवश्यकता है, और हमारे पास अन्न उपजाने के लिए पर्याप्त भूमि नहीं है; और हमारे शत्रु पलिश्ती, वे मूर्तिपूजक ठीक उसी भूमि से अपनी सन्तानों का भरण-पोषण कर रहे हैं जो यहोवा परमेश्वर ने हमें दी थी।” यह बड़ी ही सीधी-सीधी बात थी। और बोला, यहाँ हम परमेश्वर के लोग अपनी सन्तानों के साथ जरूरतमंद बैठे हुए हैं, और हमारा शत्रु अपनी सन्तानों का उसी भूमि पर भरण-पोषण कर रहा है, जिसे देने के लिए परमेश्वर ने हमें मिस्र से बुलाया था।“ वह धर्मशास्त्र के ज्ञाता को उठा खड़ा करेगा, क्या ऐसा नहीं करेगा? और वह बोला, ”क्या हम ऊपर जाये और उस भूमि को ले लें जो परमेश्वर ने हमें दी थी?“ यहोशापात ने कहा, ”हाँ, मैं तेरी सहायता करूंगा। हम भाई-बंधु हैं। तू यहूदा में है, और मैं हूँ…मैं हूँ…मैं हूँ येरूशलेम में हूँ।“ (या—या इसका उल्टा था? मेरा मानना है….नहीं, यह सही है। मैं सोचता हूँ, कि यहोशापात….) यद्यपि यहोशापात एक भला मनुष्य था; एक राजा था, एक धर्मी जन था जो प्रभु से प्रेम करता था। अहाब नीमगर्म विश्वासी था। सो वे उन्हें नीचे लेकर आये, और यहोशापात ने कहा, ”सुनो, आओ हम पहले प्रभु से सम्मति लें। हमें इसके विषय में मालूम करना चाहिए।“ (देखिए, क्या दाऊद को वह नहीं करना चाहिए था जो यहोशापात ने किया था…) उसने कहा, ”क्या हमें यह नहीं करना चाहिए?“और चूँकि अहाब एक इस्राएल था; अतः वह तुरन्त ही बोला, “निश्चय ही! मेरे पास चार सौ हैं; जैसे हम इब्रानी हैं, वैसे ही मेरे पास चार सौ इब्रानी भविष्यद्वक्ता हैं जो मेरी ही अपनी संस्था के हैं। और हम उन से सम्मति लेंगे। वे भविष्यद्वक्ता हैं।”अब, आप इसे देखें….31आप कहते हैं, “भाई ब्रन्हम, मुझे इससे ठोकर लगती है। क्या वो भविष्यद्वक्ता?” ओ, हाँ! यिर्मयाह के समय में एक ऐसा था जिसने कहा था, कि वे वहाँ नीचे केवल दो साल के लिए ही रहेंगे। प्रभु ने जबकि यिर्मयाह को सत्तर वर्ष बताये थे। उस हनान्याह भविष्यक्ता ने अपनी गर्दन पर जुआ रखा और उसे तोड़ा। परन्तु आप जानते हैं, कि उसके साथ क्या हुआ था। ओह, हाँ! आपको तो वचन के साथ ही बने रहना होता है।अतः ये नबी ऊपर आये और उन्होंने नबूवत करके कहा, “जाकर चढ़ाई करो, खुदा तुम्हारे साथ है।” और उन में से एक तो ऐसा था, मैं यह यकीन करता हूँ…अब, मैं उसका नाम भूल गया हूँ; मैं सोचता हूँ, कि वह प्रधान सिद्धकिय्याह था, जो बोला….उसने लोहे के दो सींग रखे और बोला, “यहोवा यूं कहता है, इसके द्वारा (अब, वह पुरूष सत्यनिष्ठ था) तुम अपने शत्रु को उनकी जगह वापस खदेड़ दोगे और उस जगह को ले लोगे जो परमेश्वर की है, वह तुम्हें दी जाती है।” मैं यह नहीं मानता हूँ, कि वह एक पाखंड़ी था। मेरा मानना है, कि वह एक भला सज्जन था। मैं विश्वास करता हूँ, कि वे सारे के सारे भविष्यद्वक्ता थे।32आप कहते हैं, क्या भविष्यद्वक्ता? जी हाँ! याद रखिए, ठीक जिस व्यक्ति ने यीशु मसीह को मारने की मज़दूरी दी थी, उसने नबूवत की थी, क्योंकि यह उसकी कार्य स्थिति थी। वह उस वर्ष का महायाजक था, और महायजक होने के नाते वो उसकी कार्य-स्थिति थी, और वह उस कार्य स्थिति पर तैनात था; परमेश्वर का आत्मा उस पर आया था। और इसका अर्थ यह नहीं था, कि उसका उद्धार हो गया था, या उसके बारे में ऐसी कोई बात थी। और उस(कैफा) ने भविष्यवाणी की थी; क्योंकि यह उसकी कार्य स्थिति थी जिसने यह किया था।और ये भविष्यद्वक्ता…चूंकि ये भविष्यद्वक्ता वाले कार्यालय के भविष्यद्वक्ता थे,

अतः उन्होंने नबूवत की, और परमेश्वर का आत्मा उन पर आया; ये वो पुरूष थे जिनके पास आत्मा के वरदान थे।33मुझे यकीन है, कि मैं ९९% पिन्तेकोस्तलों से बोल रहा हूँ; परन्तु मनुष्य….बहुत सी बार कोई मनुष्य….परमेश्वर उन के साथ व्यवहार कर सकता है, उन्हें वरदान दे सकता है। और लोग उन लोगों पर दबाव डालेंगे; यदि वे सिद्ध तौर पर परमेश्वर के बुलाये हुए और भेजे हुए नहीं हैं, तो वह पुरूष या स्त्री से कुछ ऐसी बात कहलवायेगा जो उसकी मर्जी नहीं है; क्योंकि लोग उन्हें ऐसा करने के लिए विवश करते हैं।कैसे मुझे यहाँ पर अपने निज पास्टर से मुलाकात करनी थी। एक सुबह भोर के लगभग तीन बजे यहाँ बाहर जंगल में कहा था, “जाकर भाई नेविल को बताओ।” मैं आपके पास आता हूँ; भाई नेविल क्या मैं नहीं आया था?हर कोई कहता है, “भाई नेविल, मुझ पर नबूवत कीजिए, मुझे यह, या वह बताइये।” देखा? तब तो आप उन से वे बातें कहलवाने जा रहे हैं तो घटित नहीं होंगी। “वे जो बाट जोहते हैं”, कि मालूम करें, कि प्रभु करने के लिए क्या कहता है। देखा?34अतः इन पुरूषों ने स्वाभाविक चेतना में दृष्टि डाली, “यह हमारी है।” परन्तु आप देखते हैं, कि उन्होंने परमेश्वर का वचन और परमेश्वर की मर्जी मालूम नहीं की थी।तब मीकायाह नीचे आता है, और उसने एक दर्शन देखा था। और उसने पहले उसे जाँच-परख लिया था। क्या आप ने ध्यान दिया? उसने कहा था, “रूको! मुझे आज रात का समय दो। मुझे मालूम करने दो, और मैं तुम्हें कल उत्तरदे सकेंगा।” वह जल्दबाज़ी में नहीं था, कि यहोवा यूं कहता है, कहकर उन दूसरे नबियों के संग सहमत हो जाये; वह बोला, “मैं तो केवल वही कहूँगा जो परमेश्वर कहता है।” और हमें ज्ञात होता है, कि परमेश्वर ने उसे बताया था, कि अगले दिन क्या घटित होगा। वह सारा का सारा स्कू उससे अलग था। और यह दूसरों से पूर्ण रूपेण अलग था। और यहाँ तक कि उन में से एक तो चलकर उसके पास गया और इसके लिए उसके मुँह पर थप्पड़ मारा। परन्तु देखिए, उसने प्रतीक्षा की थी। तब जब उसने वह किया, उसने अपनी भविष्यवाणी की। उसने अपने दर्शन की तुलना लिखित वचन से की; और यह वचन से बिलकुल ठीक ठीक मेल खाता था।35जब कोई कहता है, कि उसे लोगों को पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा देने का प्रकाशन मिला है, तो वह वचन के विपरीत है। उन बाकियों में से किसी ने भी कभी ऐसा नहीं किया था। जब वे कहते हैं, “ओह, हम खड़े होने जा रहे हैं….”और यह, वह या अन्य कुछ तथा इसी प्रकार की और दूसरी बातें कहते हैं, तो ये वचन के विपरीत हैं। जब वे कहते हैं, कि वे सर्पवंश पर विश्वास नहीं करते। हैं, तो ये वचन के विपरीत है। ये दूसरी सारी बातें वचन के विपरीत हैं। इसे तो वचन के साथ मेल खाना चाहिए, और अपनी ही ऋतु पर ही होना चाहिए।36अब, काश दाऊद ने केवल वही कर लिया होता। सन्दूक आ रहा था, परन्तु यह वह समय नहीं था। उसके लिए कोई जगह नहीं थी।अब ध्यान दीजिए, जब वे सन्दूक को लेने के लिए वहाँ नीचे पहुँचे, तो सारे उच्च पदासीन लोगों ने कहा, “दाऊद, करने के लिए तो यही काम है। परमेश्वर की महिमा होवे! हमें एक बेदारी की आवश्यकता है।” और वह आज असली पिन्तेकोस्तल था…बैपटिस्टों, प्रेसबीटेरियनों! “दाऊद, तू हमारा राजा है। तुम सब…अमुक-अमुक कप्तान, और अमुक-अमुक मेजर, अमुक-अमुक जरनल तेरी सभा में होंगे। क्यों, दाऊद वे कहते हैं, कि करने के लिए सिर्फ यही काम है। तेरे साथ सारा देश है।” आज ठीक यही मामला तो है। मैं देश नहीं चाहता हूँ। मैं तो परमेश्वर ही चाहता हूँ; चाहे कोई और दूसरा खड़ा ना हो।दाऊद के पास सारे कप्तान थे। उसके पास सैनिक बलों का सहयोग था। उसे सारी नामधारी कलीसियाओं से, धर्मशास्त्र के ज्ञान के सारे ज्ञाताओं से, सब लोगों से सहयोग मिला था….सब लोग उससे सहमत हो रहे थे। वैसे ही अहाब को सहयोग मिला था; तथा पवित्रशास्त्र में और दूसरों को मिला था; परन्तु उसके पास परमेश्वर नहीं था, क्योंकि वह परमेश्वर की मर्जी से बाहर था। मैं आशा करता हूँ, कि हम इसे समझ गये हैं।37ध्यान दीजिए! उन्होंने उन हर एक धार्मिक कार्य-कलापों को किया जो वे कर सकते थे। उन्होंने अवश्य ही….सम्भवतः उन्होंने विज्ञापन लगाये हों तथा सब कुछ किया हो। “महान बेदारी! सन्दूक वापस लाया जा रहा है। हमारी एक बेदारी होने जा रही है। हम यह करने जा रहे हैं।ध्यान दीजिए, उसने गवैयों को भेजा। उसने लोगों को वीणा के साथ, तुरहियों के साथ भेजा; और उन्होंने उन हर एक धार्मिक काय-कलापों को किया जो वेजानते थे, कि कैसे करना है; और अभी भी इसमें परमेश्वर नहीं था। कुछ देखिए, इसकी फिर से पुनरावृत्ति हो रही है; क्या हम नहीं देखते हैं?उन्होंने सारे गवैयों को लिया। उन्होंने वीणा बजाने वालों को लिया, उन्होंने तुरही फेंकने वालों को लिया; स्त्रियों को, पुरूषों को; जो कोई भी इसे गा सकता था, उन्हें लिया; वे उन सब को वहाँ नीचे लेकर गये, और उन्होंने हर एक धार्मिक कार्य-कलाप किया। मैं इसे कहना तो नहीं चाहता हूँ, परन्तु मुझे इसे कहना ही है….आज ऐसी ही ये नामधारी कलीसियाएं हैं; पिन्तेकोस्तल तथा सारी नामधारी कलीसियाएं गाने और ज़ोर ज़ोर से जयजयकार करने-चीखने चिल्लाने की प्रत्येक धार्मिक गतिविधि से गुजर रही हैं।ध्यान दीजिए, दाऊद ने अपनी पूरी सामर्थ से चिल्लाकर जयजयकार किया; और उसने हो-हल्ला किया; वह उछला-कूदा, और वह उन हर एक धार्मिक गतिविधि से होकर गुजरा जो वहाँ हो सकती थी; और अभी भी परमेश्वर इस में नहीं था। और उसका ध्येय और उसका उद्देश्य और सब कुछ बिलकुल ठीक था। परन्तु वह इस पर गलत तरीके से चला था। समझे? उसने सभी धार्मिक गतिविधियाँ की थीं-वह चीखा-चिल्लाया; गीते गाये; उसके पास खास गवैये, खास चीखनेचिल्लाने वाले तथा और सभी कुछ था। वे आत्मा में नाचे थे। उन्होंने वह सब कुछ किया था जो धार्मिक था।38यह कुछ कुछ हमारे समय के बड़े बड़े धर्मयुद्ध (crusades) के जैसा ही है। उन्होंने मसीह के लिए जगत को जीतना चाहा। ऐसी कोई बात नहीं है। जगहों को हिला देने वाली बड़ी बड़ी बेदारियाँ, बड़े बड़े कार्यकलाप हो रहे हैं; काश उन्हें बस इसका आभास हो सके, कि वह दिन गुजर चुका है। वह नाश हो चुकी है। परन्तु वे तो धर्मयुद्ध,संस्थाएं तथा सब कुछ स्थापित कर रहे हैं; परन्तु इसका परिणाम ठीक वैसा ही जैसा दाऊद के समय में था; इससे काम नहीं चला था।आप जाते हैं, और बेदारी करते हैं। हमारे महान..आज हमारे महान प्रचारकों में से कुछ का कहना है, कि उन्होंने छः सप्ताह के समय में तीस हजार को मसीह की ओर फेरा; और उससे एक साल बाद जब वे वहाँ पर जाते हैं, तो उन्हें तीस भी नहीं मिल सकते हैं। कहीं कुछ न कुछ गड़बड़ है। यह क्या है, यह बिलकुल ठीक वही है जो दाऊद ने किया था। बड़े बड़े पदाधिकारी, श्रेष्ठ पुरूष, श्रेष्ठ प्रचारक, बड़े बड़े शिक्षण संस्थान, बड़े बड़े अधिकारी अभी भी परमेश्वर के वचन के मुखमंड़ल को देखने और कब समय है, देखने की बजाये, किसी पुरानी नामधारी कलीसिया से ही सम्मति ले रहे हैं। आप किसी निश्चित भोजनवस्तु को वर्ष के किसी निश्चित समय में ही उपजा सकते हैं।39अब आइये हम देखें, कि क्या हुआ था। यद्यपि उनकी—उनकी धार्मिक भावनाएं और कार्यकलाप श्रेष्ठ थे, उनकी मंशा अव्वल दर्जे की थी; उनके धार्मिक अनुष्ठान श्रेष्ठ थे, उनका जोर जोर से जयजयकार करना बढ़िया था, उनका गायन बढ़िया था, उनका नाँचना बढ़िया था; उनका संगीत बढ़िया था; और उनके पास अहद का सन्दूक था। परमेश्वर के बिना वह सन्दूक क्या अच्छा था? ऐसे तो वह सिर्फ लकड़ी का बक्सा मात्र ही था; पत्थरों की कुछ मेजे थीं। यह तो बपतिस्मा लेकर प्रभु भोज लेना जैसा है। अगर आप पहले प्रायश्चित नहीं करते हैं, तो फिर बपतिस्मा लेना क्या भला करता है? यह क्या भला करता है….प्रभु भोज लें, और ढोंगी बन जायें; अगर आप सच्चा जीवन व्यतीत नहीं करते हैं, और परमेश्वर के बाकी सारे वचन पर विश्वास नहीं करते हैं? आप इसका कोई भाग तो ग्रहण करते हैं और इसका शेष भाग ग्रहण नहीं करते हैं, तो ये यही दिखाता है, कि कुछ न कुछ गड़बड़ है।40अब, जब यह सब होता है….अब आइये हम देखें, जब परमेश्वर,

और उसके युग-काल, उसके समय पर विचार मनन नहीं किया जाता है, और सिर्फ लोगों के विचार पर ही विचार-मनन किया जाता है, तो क्या होता है?बहुत से लोगों ने मुझ से कहा है, “क्यों नहीं तुम यहाँ पर आते हो और एक सभा करते हो? अच्छा, हम तुम्हें बुलाते हैं। इस पर, उस पर, या किसी और पर हस्ताक्षर कर दो।” ठहरिये! हो सकता है, कि आप इसे चाहते हो; परन्तु परमेश्वर इसके बारे में क्या कहता है? बहुत से लोगों ने मुझ से कहा…मुझे आमन्त्रण मिला, मैंने साक्षात्कार किये—व्यक्तिगत साक्षात्कार किये तथा वार्तालाप कीं— वर्ष तक इन्तज़ार किया। मैं ठहरा रहा! मैं कैसे यह जानूंगा, कि मुझे क्या कहना है, जब तक कि परमेश्वर ही मुझे न बताये, कि मुझे क्या कहना है। समझे? मुझे प्रतीक्षा करनी होती है। यही कारण था, कि मैंने कहा था, उसे लिख दीजिए; और मैं देखता हूँ, कि वह क्या कहता है। समझे? बाट जोहें! वे जो यहोवा की बाट जोहते हैं, नया बल प्राप्त करते चले जायेंगे। क्या यह सही है?41ध्यान दीजिए, उन्होंने उस दिन के केवल याजक-पुरोहितों, धर्मशास्त्र के ज्ञाताओं, नामधारी संस्थाओं से ही सम्मति ली। और ध्यान दीजिए; ऐसा करने के द्वारा…याजक-पुरोतिों से सम्मति लेने के द्वारा और मंड़ली से सम्मति लेने के द्वारा, लोगों से सम्मति लेने के द्वारा उन्होंने इसे गलत किया।ध्यान दीजिए! अहद का सन्दूक वचन था। हम जानते हैं, कि यह सही बात है, क्योंकि अहद का सन्दूक मसीह है, और मसीह वचन है। समझे? सबसे पहले तो संदूक या वचन को उसकी ठहराई हुई, नियुक्त की गई मूल अवस्था में नहीं रखा गया था। हे कलीसिया, इसे समझने में चूकना मत! सब कुछ बिलकुल सिद्ध था; और सब कुछ बिलकुल अच्छा दिखाई पड़ता था; ऐसा लगता था, कि मानो एक बड़ी बेदारी आ रही थी; परन्तु चूंकि वे इसके बारे में सही व्यक्ति से सम्मति लेने से चूक गये थे…उन्होंने याजक-पुरोहितों से सम्मति ली, उच्च पदासीन लोगों से सम्मति ली, धर्मशास्त्र के ज्ञान के ज्ञाताओं से सम्मति ली, गवैयों से सम्मति ली; और सब कुछ एक लय में था, और फौज़ की एक बड़ी संस्था और देश के बल (Forces) भी समन्वय में थे; एक महान सभा के लिए सब कुछ लय में था। परन्तु वे परमेश्वर से मशवरा लेने से चूक गये थे। ऐसे ही अहाब विफल हुआ था; ऐसे ही और दूसरे भी विफल हुए थे। क्या ही क्षण है!42अब, इससे ना चूकिए! वे इसे पाने में विफल हुए, क्योंकि उन्होंने सम्मति नहीं ली थी। देखिएगा, और ऐसा करने के द्वारा, याजक-पुरोहितों के पास जाने के द्वारा, धर्मशास्त्र के ज्ञान के ज्ञाताओं के पास जाने के द्वारा, और सैन्य बलों के पास जाने के द्वारा, और यहाँ तक कि उस समय के लिए परमेश्वर के द्वारा भेजे हुए सन्देशवाहक नातान से सम्मति न लेने के द्वारा उन्होंने इसे गलत किया। उन्होंने जाकर सन्दूक उठाया, और उसे एक नई बैलगाड़ी पर रख दिया। उन्होंने उसे एक नई बैलगाड़ी पर रख दिया (या एक नई नामधारी कलीसिया आरम्भ होने जा रही है) और उन्होंने उसे परमेश्वर द्वारा प्रदान किये गये, निधार्रित तरीके से नहीं उठाया था। उसे तो लेवियों के ही कंधों पर उठाया जाना चाहिए था। परन्तु आप देखिए, जब आप गलत करना शुरू करते हैं, तो आप गलती पे गलती करते चले जाते हैं।43यदि किसी लक्ष्य पर गोली दागी जानी है, और आप बंदूक की नली को हजारवें अंश पर इधर-उधर दागे, तो सबसे पहले आप सौ गज पर चार या पाँच इन्च इधर-उधर हो जायेंगे। आप ने शुरूवात ही गलत की हुई होती है। हे परमेश्वर, हमारी यह जानने के लिए सहायता कर, कि इस समय ये बड़े बड़े धार्मिक कार्यकलाप जैसाकि ये कहलाते हैं, गलत हैं।परमेश्वर से इसके बारे में सम्मति नहीं ली गई है। याजक-पुरोहितों और धार्मिक पुरूषों से सम्मति ली गई है, संस्थाओं से सम्मति ली गई है। अच्छा, क्या आपके पास अमुक-अमुक होगा? मैं विश्वास करता हूँ, अगर हम सब लोगों को एक साथ इकट्ठा कर लेते हैं…सब को एक साथ जमा ना करें। बस इसके के बारे में परमेश्वर का वचन ही मालूम करे।।44इसके बाद हम देखते हैं, कि जब वे वैसा करते हैं, तो वे क्या करते हैं? वे अपने उसी पुराने धार्मिक कार्य कलाप पर जो परमेश्वर के वचन और परमेश्वर की इच्छा से बाहर है, निरतंर चलते रहते हैं। वह चीज तो…वर्षों पहले की वे सूखी चीजें तो वर्षों पहले ही मर खप चुकी हैं।यह तो प्रभु यीशु के दिनों में ही सूख गई थी। उन्होंने इसे नहीं जाना था। उसने कहा था, “यदि तुम ने मूसा को जाना होता, तो तुम ने मुझे भी जाना होता, क्योंकि मूसा ने कहा था, कि मैं आ रहा हूँ।”बोले, “हमारे बापदादों ने तो जंगल में मन्ना खाया था।”यीशु ने कहा, “वे सब के सब मरे हुए हैं। अन्धों!”उसने उन्हें, उन फरीसियों को, धर्म के अगुवाओं को अंधा कहा था। “जब तक तुम यह विश्वास न करो, कि मैं वही हूँ, तुम अपने पापों में मरोगे।” परन्तु उन्होंने यही नहीं किया था। वे तो अपने ही तौर-तरीकों में बुरी तरह से फंसे हुए थे। उन्हें तो इसे अपने ही तौरतरीके से ग्रहण करना था।45ठीक इसी प्रकार दाऊद ने इसे किया था। उसे तो इसे अपने ही तरीके से करना था; अतः बस उसने कहा, तुम जानते हो, मैं क्या करूंगा? हम आगे बढ़ रहे हैं। उसके पास एक प्रकाशन था। अब हम आगे बढ़ रहे हैं; अतः हम इसे एक नये ढंग से करेंगे। आश्चर्यकर्मों के दिन बीत चुके हैं; अतः हम बस अपनी एक और संस्था बनायेंगे। हम एक नई बैलगाड़ी बनायेंगे, और उन्हें उस नई चीज को दिखायेंगे जो शुरू हो चुकी है। क्या ही झूठी भविष्यवाणी है! आपको तो उसी । पुराने तरीके पर ही वापस आना होगा जैसा परमेश्वर ने इसे करने के लिए कहा था।उन्होंने इसे लेवियों के कंधों पर रखा और वह हृदय के ऊपर होता है। सन्दूक को, वचन को, किसी भी नामधारी संस्था के ऊपर, किसी भी मनुष्य के मतसिद्धांतों के ऊपर नहीं उठाया जाना है; इसे तो हृदय में ही उठाया जाना है। परमेश्वर का वचन नामधारी कलीसिया के द्वारा संचालित नहीं होता है। इसे तो मनुष्य के हृदय के द्वारा ही संचालित होना होता है, जहाँ परमेश्वर अंदर आ सकता है और खुद अपने आप को प्रकट कर सकता है। और यदि वह इसे वचन के अनुसार प्रकट करता है, तो यह परमेश्वर का है। यदि ऐसा नहीं है, तो यह नहीं है। और तब वह इस समय का वचन होता है।निश्चय ही, एक फरीसी कह सकता था, “कौन हमें बता सकता है, कि हम यह और वह नहीं कर सकते हैं? मूसा ने ही हमें इन आज्ञाओं को दिया था।” परन्तु मूसा ने ही यह भी कहा था….शैतान ने कहा था, “क्यों यह लिखा है, वह हमें देगा अपना…”.यीशु ने कहा था, “और यह भी लिखा है।”विशेष ऋतु, विशेष समय! “यदि तुम ने मूसा को जाना होता! तुम्हारे पास एक बहाना है, मूसा! यदि तुम ने मूसा को जाना होता, तो तुम ने मुझे भी जाना होता; क्योंकि मूसा ने मेरे ही विषय में लिखा था; कि प्रभु तुम्हारा परमेश्वर तुम्हारे भाइयों में से एक नबी उठा खड़ा करेगा; तुम उसकी सुनना।” यदि उन्होंने मूसा को जाना होता, तो उन्होंने उसे भी जाना होता।46अब ध्यानपूर्वक सुनिए! अब आप इससे न चूकें! देखिए, पहली बात यह है, कि जब उन्होंने पुरोहितों से सम्मति ली थी, उच्च पदासीन लोगों से सम्मति ली थी, फौज़ से सम्मति ली थी, सारी की सारी मंड़ली से सम्मति ली थी, पड़ोसियों को इस महान सभा में एक साथ जमा होकर आने के लिए कहा था, तो वे इसे सही करने में विफल हुए थे। उन्होंने परमेश्वर से सलाह-मशवरा नहीं लिया था,और ऐसा करने के द्वारा, और वापस पीछे ना जाने के द्वारा और यह न देखने के द्वारा, कि यह समय क्या था…..

94. हे भाइयों, सुनिए! हम किस समय में रह रहे हैं? कौन सा काल है? वह कौन सी घड़ी है जिसमें हम रह रहे हैं? यह समय इन बातों के लिए नहीं है जिनके बारे में हम बोल रहे हैं। वह तो बीत चुका है। अब तो न्याय अति निकट है। आप इसका आभास होते हुए देख सकते हैं। क्या आप को पहाड़ के ऊपर चट्टान याद है? न्याय का समय! क्या आपको प्रकाशन या दुल्हन वाला दर्शन याद है? उसे बस सही पद चिन्ह पर रखिए! उसे पद चिन्ह से बाहर ना निकलने दें।ध्यान दीजिए, वाचा का सन्दूक याजकों-पुरोहितों के कंधों पर रखा जाये।47और दाऊद तथा सारे याजक-पुराहित को वास्तव में यह बेहतर जानना चाहिए था, परन्तु यह क्या था? पुरोहितों को बेहतर मालूम होना चाहिए था। सिदूकियों को, धर्मशास्त्र के ज्ञान के ज्ञाताओं को बेहतर मालूम होना चाहिए था; क्योंकि वचन ऐसा करने के लिए नहीं कहता था।और आज जब वे यह कहना चाहते हैं, “ओह, यीशु मसीह तो कल, आज, और युगानुयुग एक सा नहीं है; वह तो मस्तिष्क के विचारों को पढ़नेवाली कला ही है, वह तो यह, वह, या कुछ और ही है; तो वे प्रतिज्ञा किये वचन को देखने में नाकामयाब होते हैं। वे कहते हैं, ”यह तो बीते दिन में हुआ था।दाऊद ने कहा था, “ओह, अब एक मिनट रूको। उसे याजको-पुरोहितों के कंधों पर रखा जाना उस पिछले समय में था, जब मूसा बाहर आता है। निश्चय ही, हम ….आज हम इसे एक नई बैलगाड़ी पर रखेंगे। मेरे पास इसका एक प्रकाशनयााजक ने कहा, “आमीन, दाऊद! देखा?“हमें अपनी नई एक्यूमीनिकल कॉन्सिल में उनके संग एक साथ मिल जाना चाहिए, और इसे इस प्रकार और उस प्रकार करना चाहिए”; और वे इसके द्वारा प्रभावित होने के कारण….यह पुरोहितों के लिए ठोकर का करण ठहरा। उन्होंने सही व्यक्ति से कभी भी सलाह नहीं ली थी। उन्होंने इसे सुचारू रूप से नहीं किया था, इसलिए वे मुसीबत में पड़े। जी हाँ!48आज मैं बहुत सी बातों में भयभीत हैं…जब एक महान शिक्षक, पिन्तेकोस्तलों का एक सबसे बड़ा शिक्षक किसी और रात्रि को शिकागो में एक धार्मिक समूह के सम्मुख खड़ा हुआ था….मेरी वह सभाबिजनेसमैन के साथ होनी थी; परन्तु मैंने सोचा था, कि मैं उस समय अफ्रीका में होगा; परन्तु मैं उसके आरम्भ होने से एक दिन पहले ही वापस आ गया था। और उन्होंने पिन्तेकोस्तल के एक महान बुद्धिजीवी को चुना था; और वह खड़ा हुआ, और उसने उन्हें बताया, कि यह एक्युमेनिकल बहाव परमेश्वर का ही काम है। और बोला, “वे सभी वापस लौट रहे हैं; यहाँ तक कि कैथोलिक कलीसिया अपनी मूल अवस्था में वापस आने जा रही है; इस बात के प्रमाण के लिए तथा और दूसरी बातों के लिए सब के सब अन्यान्य भाषाओं में बोल रहे हैं। और यह नहीं जान रहे हैं, कि यह शैतान का ही एक फंदा है।और एक पुरूष जिसे मैं नहीं जानता था….कभी कभी आप बीज बोते हैं। आप नहीं जानते हैं, कि क्या होने जा रहा है। परन्तु ज्यों ही वह महान वक्ता नीचे बैठा, त्यों ही फुल गोस्पल बिजनेसमैन का अध्यक्ष बोला, “मैं अपने वक्ताओं के खिलाफ कोई भी बात कहने का इच्छुक नहीं हैं, परन्तु भाई ब्रन्हम ने नहीं बताया है, कि यह इस तरह से घटित होगा। परन्तु उन्होंने तो कहा था, कि यह पशु की छानप की ओर अग्रसर होगा।वह बोला, “परन्तु भाई ब्रन्हम नहीं जानते हैं, कि वे क्या कह रहे हैं।बोला, “हम हैं….हम विश्वास करते हैं, कि वे ऐसा करते हैं।”49और शिकागों में उन्होंने कहा, कि यहाँ पर कितने ऐसे हैं जो यह चाहेंगे, कि मैं ऊपर आऊँ और अपना स्पष्टीकरण दें? वे चीखने-चिल्लाने लगे। देखा, आप बीज बो रहे हैं। आप नहीं जानते हैं, कि क्या होने जा रहा है। आप तो बस बीज रखते चले जा रहे हैं। जब वह समय आता है, तो उन में से कुछ…जैसे थोमा था; वह प्रभु को देखने वाला अन्तिम जन था; परन्तु उसेउस पर विश्वास करने के लिए उसे देखना था। समझे? जब उन्होंने देखा, कि यह घटित हुआ था; और ओह, थोमा अंदर आता है, परन्तु वह थोड़ी देर से आया था।अब, जब वह उन बातों को जिनकी भावी बतायी गई हैं और जो “यहोवा यूँ फरमाता है, करके कहीं गई हैं, घटित होते हुए देखते हैं, तो वे कहते हैं, हमें अपने तेल में से कुछ दे दो। समझे?50परन्तु अब, आप प्रभाव पर ध्यान दें। कभी कभी बड़े बड़े लोग एक साथ इकड़े होते हैं। आप उन्हें कहते हुए सुनते हैं, “महान अमुक-अमुक, और महान अमुक अमुक,हमारा महान….” ऐसा कभी ना करें। हमारे बीच में कोई भी महान नहीं है। केवल एक ही महान है, और वह परमेश्वर है। हम तो भाई बहन हैं। मैं इसकी परवाह नहीं करता हूँ, अगर आप किसी ऐसी कलीसिया के पादरी हैं जिसमें पाँच ही लोग हैं, यह आपको छोटा नहीं बना देता है; यह तो आपको एक भाई बनाता है(समझे?) यदि आप परमेश्वर के वचन के प्रति सच्चे हैं। मैं इसकी परवाह नहीं करता हूँ, कि आप क्या हैं, कैसे हैं, आप इससे छोटे नहीं हो जाते हैं। परमेश्वर के छोटे बच्चे और बड़े बच्चे नहीं हैं। उसके पास तो सिर्फ बच्चे हैं, और वे सारे के सारे एक समान है।ध्यान दीजिए, खुद परमेश्वर भी हम में से एक बनने के लिए महिमा के हाथी दांत के गढ़े महलों से आया। अब कौन बड़ा है? लिया…वह एक याजक का रूप लेने के लिए यहाँ नीचे नहीं आता है; परन्तु वह तो दास बनने के लिए और ठीक उसी पात्र को जिसकी उसने सृष्टि की थी, धोने के लिए नीचे आया; उसने अपने चेलों के तथा दूसरों के पाँवों को….अब कौन महान हैं?51परन्तु प्रभावी…ये लोग प्रभावशाली लोग थे।वे समझ नहीं पाये थे। उन्होंने सोचा था, कि कुछ नया घटित होने जा रहा है(जी नहीं!) कुछ ऐसा घटित होने जा रहा था जो परमेश्वर ने बोला ही नहीं था। वे इस पर गलत राह पर निकल पड़े थे। यही है वह जब सारा उत्साह-ज़ोश….पूर्वकाल में एक लम्बे अरसे पहले शुरू हुआ था, तो हर एक नामधारी कलीसिया के पास एक दिव्य चंगाई करनेवाला होना था; हर एक नामधारी कलीसिया के पास यह, वह या कुछ और होना था। हर एक नामधारी कलीसिया के पास एक छोटा दाऊद होना था। हर एक के पास यह, वह या कुछ और होना था। देखिए, क्या घटित हुआ था? इसने ठीक वही किया जैसा उसने किया था। बिलकुल ठीक वही काम किया! प्रभाव…उस मौसम, उस समय के लिए जिसमें वे रह रहे थे जो वचन था, अनदेखा कर दिया गया था।ध्यान दीजिए, लेवियों के कंधे ही इन कामों को करने के लिए परमेश्वर द्वारा ठहराया हुआ मूल तरीका था। उस सन्दूक को लेवियों के कंधे पर उठाया जाये। उसके बाहर जो कुछ भी था, वह विरोधात्मक था। जो उसने कहा है, उसका वही मायने रहता है। परमेश्वर बदल नहीं सकता है। उसके वचन के साथ बने रहने का यही कारण है।मुझे पहला इतिहास 15:15 मिल गया है, अगर आप इसे लिखना चाहें, तो लिखें।52ध्यान दीजिए, अब ध्यान दीजिए, परमेश्वर का कहा मानने में…अब, मैं इसे एक प्रकार से आप के अंदर आत्मसाध कर देना चाहता हूँ। परमेश्वर की आज्ञाओं को पूरा करने के लिए, परमेश्वर के लिए कुछ भी उचित करने के लिए…सेवकाई को सुचारू रूप से करने के लिए, परमेश्वर की सेवकाई को सही से करने के लिए पाँच अनिवार्यताएं हैं।अब, दाऊद परमेश्वर के लिए एक सेवा करने जा रहा था। परमेश्वर को अलग छोड़ कर वह वो सब कुछ कर रहा था जो वह करना जानता था। समझे? वह कोई ऐसा काम कर रहा था जो सही था, वह कोई ऐसा काम कर रहा था जो लोगों के लिए, कलीसिया के लिए अच्छा था।परन्तु पाँच अनिवार्यताएं हैं; मैं चाहता हूँ, कि आप इन्हें स्मरण रखें। इससे कोई मतलब नहीं है, कि कोई इंसान इसे करने में कितना सत्यनिष्ठ है..परमेश्वर के काम के लिए तो ये पाँच अनिवार्यताएं होनी होती हैं।पहली, इसे करने का उसका समय होना चाहिए।क्या होता, यदि —यदि मूसा आता और कहता, “हम एक नाव बनायेंगे,और उसे नील नदी में वैसे ही तैरायेंगे जैसे नूह ने इसे तैराया था?“ नूह का समय नाव के लिए बिलकुल ठीक था, परन्तु उसका समय नहीं था।क्या होता, यदि यीशु आकर कहता, “अब, मैं तुम्हें बताऊँगा, कि हम क्या करेंगे। हम वैसे ही पहाड़ पर ऊपर जायेंगे जैसे मूसा गया था, और व्यवस्था के लिए एक नई उद्घोषणा पायेंगे?” समझे? हूँ—हूँ! वो ही तो वह व्यवस्था था। समझे? आपको उसके समय में होना चाहिए। इसे उसके मौसम में होना चाहिए। अब आप इसे समझे?इसे उसके समय में होना चाहिए। इसे उसके मौसम, समय, और ऋतु में होना चाहिए,53और इसे उसके उस वचन के अनुसार होना चाहिए जो बोला जा चुका है। इसे होना चाहिए….मैं इसकी परवाह नहीं करता हूँ, कि आप कितनी भली प्रकार से कह सकते हैं, कि यह होना चाहिए, और या वह होना चाहिए, या यह होना चाहिए; यह तो उसके वचन के अनुसार ही होना चाहिए; उसके समय और मौसम के अनुसार होना चाहिए; और यह उस मनुष्य के मुताबिक दिया जाना चाहिए जिसके द्वारा इसे करने के लिए चुना हुआ है।मैं इसकी परवाह नहीं करता हूँ, कि कितने उच्च पदासीन लोग हैं। वहाँ पर दाऊद राजा उन में से किसी के भी जैसा बड़ा था। वह देश पर राजा था। परन्तु परमेश्वर का इसे करने का एक तरीका था, और उसने उन्हें बताया था, कि वह इसे कैसे करेगा। परन्तु वे इसे करने में विफल हुए थे।इसे तो उसके वचन के अनुसार, उसके समय के अनुसार—उसकी योजना (कार्यक्रम) के अनुसार होना चाहिए;54और यह उस मनुष्य के अनुसार होना चाहिए। जिसे उसने इसे देने के लिए और इसे करने के लिए चुना है।मूसा ने इससे भागने की कोशिश की थी। उसने कहा था, “तू किसी दूसरे को ले ले।” परन्तु परमेश्वर ने तो मूसा को ही इसे कराने के लिए चुना था। उन में से बहुतेरे…पौलुस ने इससे बाहर जाने की चेष्टा की थी, और दूसरे बहुतेरों ने ऐसा ही किया था। परन्तु इसे तो उस एक के द्वारा होना होता है जिसे वह इसे करने के लिए चुनता है। इसे तो पहले उसके भविष्यद्वक्ताओं के पास आना चाहिए।परमेश्वर का वचन उसके भविष्यद्वक्ताओं के पास आना चाहिए; आमोस 3:7! “यहोवा परमेश्वर तब तक कुछ नहीं करेगा, जब तक कि वह अपने मर्म को पहले अपने दास-भविष्यद्वक्ताओं पर प्रकट नहीं कर दे।” यही चौथी अनिवार्यता है।और भविष्यद्वक्ता को अवश्य ही परमेश्वर के वचन के द्वारा ही प्रमाणित हुआ होना चाहिए।ये ही आपकी पाँच अनिवार्यताएं हैं। इसे इस प्रकार होना चाहिए…उसका समय; उसका मौसम(जब उसने कहा यह होगा) और वह मनुष्य जिसे उसने चुना है; और इसे भविष्यद्वक्ता के पास आना चाहिए; और भविष्यद्वक्ता एक प्रमाणित किया हुआ भविष्यद्वक्ता होना चाहिए। हम बाइबिल में से उन में से बहुतेरों को देखते हैं जो भविष्यद्वक्ता थे, और प्रमाणित किये हुए नहीं थे। हमारा भविष्यद्वक्ता तो यीशु मसीह है।55अतः अब ध्यान दें। देखिएगा, परमेश्वर ने वह बात उन पर इसे करने के अपने प्रदान किये हुए तरीके के द्वारा प्रकट नहीं की थी। उन लोगों ने तो दाऊद के ही तरीके को स्वीकार कर लिया था। उन्होंने तो याजक-पादरी के तरीके को अपना लिया था। उन्होंने तो सिदूकियों के तरीके को; धर्मशास्त्र के ज्ञान के ज्ञाताओं के तरीके को अपना लिया था, मगर उन्होंने परमेश्वर के ही तरीके को नहीं अपनाया था। नातान था….

वह उस दिन का भविष्यद्वक्ता था। बाद में नातान ने ही उन्हें बताया था, कि इसे किस तरह से करना है। परन्तु देखिएगा, उन्होंने इसे नातान से सलाह-मशवरा लिये बगैर ही किया था। एक भी शब्द ऐसा नहीं बताता है, कि उन्होंने नातान से सम्मति ली थी। सारा का सारा प्रभाव….बहुत बड़ा काम होने जा रहा था….और मेरा….मैं उस गीत को सोचता हूँ।जब ह्रदय प्रज्जवलित हो प्रभु मेरी सहायता करनामुझे अपने समीप रखना मुझ अभिमानी को नम्र बनाना…कि मैं उन बाकियों के साथ जा सकें)….मुझे सिखाना ना निर्भर करू उस पर जो दूसरों ने किया,पर निर्भर करूँ प्रार्थना में तुझ से आने वाले उत्तर पर।56अब परमेश्वर ने उन पर वह बात दाऊद के द्वारा, और प्रचारकों के द्वारा, तथा उन लोगों के द्वारा और सहस्त्रपतियों और शतपतियों के द्वारा प्रकट की थी, लेकिन उस ने नातान के द्वारा प्रकट नहीं किया था, जिसके पास “यहोवा यूँ फरमाता है, वाला वचन था। और खुदा ने कहा था, वह तब तक कुछ नहीं करेगा, जब तक कि वह पहले उसे उस युग के भविष्यद्वक्ता को न दिखा दे, कि वह क्या करने जा रहा है। देखिए, उन्होंने क्या किया था? वे सीधे-सीधे ही परमेश्वर के वचन से बाहर चले गये थे; और उन्होंने सन्दूक को एक नई गाड़ी पर रख दिया था। समझे? अतः वे इसे करने के विषय में परमेश्वर के द्वारा प्रदत तरीके में परमेश्वर की आज्ञाओं से ही बाहर निकल गये थे….और मित्रों, ठीक ऐसा ही आज हुआ है। यही कारण है, कि हमारे बड़े बड़े धार्मिक कार्य-कलाप तथा इसी प्रकार के और दूसरे काम होते हैं; और उनका कोई नतीजा नहीं निकलता है। और ज्यादा नास्तिकता, और अधिक पाप, और अधिक….मैं आपको बताता हूँ, यह देश खत्म हो चुका है, ना केवल यही देश, बल्कि और दूसरे देश भी खत्म हो चुके हैं। यह देश इंग्लैंड के जैसा ही हो गया है जो दूसरे किसी काल में शेष सभों के लिए वेश्या ही रहा है।57सुदूर मोज़ाम्बिक्यू में सभ्यता से चार सौ अस्सी मील दूर जंगल में अल्हड़ छोटे छोटे बच्चे एल्विस प्रेसली को सुनते हैं, और वे अपने सिर को झटक रहे हैं। और ऊपर नीचे ढुमक रहे हैं, जैसे सारी रात भर ही रूके रहें….या, सुदूर रोडेशिया में हजारों मील पर वे छोटे छोटे सेट एल्विस प्रेसली को सुनने के लिए लगे हुए हैं। और फिर भी वे कहते हैं, “वह…वह तो बड़ा ही धार्मिक है; वह और पैट बून और वे ऐसे ही हैं। क्यों, वह तो इस समय का यहूदाह है; और वे यह जानते भी नहीं हैं। और यह बड़ी ही बुरी बात है। वे मानते हैं, कि वे हैं….वे तो ठीक हैं। क्या यीशु ने इस लौदीकियायी कलीसियायी काल से नहीं कहा था, ”तू नंगा, अभागा, तुच्छ, अंधा है, और यह जानता भी नहीं है?वह इसे नहीं जानता है।खैर, अफ्रिका तथा चारों ओर जो पिन्तेकोस्तल बच्चे हैं, वे कहते हैं, अच्छा, एल्विस प्रेसली, वह तो वो सबसे मधुरतम गीत गाता है जो कभी आप ने सुना हो। इसमें कोई सन्देह नहीं है, कि दाऊद ने भी बिलकुल ठीक ऐसा ही किया था; निसन्देह उन गवैयों ने ठीक ऐसा ही किया था। परन्तु इससे ऐसा हुआ था, कि खेमे में मौत करेगा। उन्होंने सही माध्यम से सम्मति नहीं ली थी। समझे?58लेवीय के कंधे परमेश्वर का यह मूल तरीका था, और उन्होंने इसे एक नई गाड़ी पर डाल दिया था अब। यह कभी काम नहीं करेगा। उन्होंने सही तरीके से परामर्श नहीं किया, देखें। अतः वे इसके विषय में बाहर निकल गये थे; और इसके विषय में गलत मार्ग पर निकल गये थे; और यही है, वह जो आज हुआ है।इससे कोई मतलब नहीं है, कि जब कोई व्यक्ति उस के द्वारा इसके प्रकटीकरण के लिए पथ के बाहर उसकी सेवा करने का कितनी निष्ठापूर्वक यत्न करता है; वो तो हमेशा ही इस में गड़बड़ कर देता है। परमेश्वर ने इसे अपने ही तरीके से करने के लिए ठहराया है। मनुष्य…इससे कोई मतलब नहीं है, कि उससे बाहर आप इसे कितनी निष्ठा से करने का प्रयास करते हैं; आप—आप ऐसा करके तो इस में गड़बड़ी ही कर डालेंगे।59कुछ ऐसा ही बालाम के दिनों में बालाम था। परमेश्वर ने उस भविष्यद्वक्ता बालाम को बताया था….वह एक भविष्यद्वक्ता था, बालाम एक भविष्यद्वक्ता था! वह एक भविष्यद्वक्ता था; और उसके पास बिलकुल सही-स्पष्ट वचन आया था, उससे बोला गया था, “वहाँ नीचे ना जाना। वे मेरे चुने हुए हैं, वे मेरी पसंद हैं।”और बालाम उच्च पदासीनों, सेना के लोगों, प्रचारकों, प्रभावी मनुष्य के साथ हो लिया था; और बोला था, “अच्छा, मैं-मैं तुझे बताता हूँ, राजा…” देखिए, यह बस दाऊद से मेल खाता है; यह आज से मेल खाता है। आप बस हर एक बात को उदाहरण के रूप में लें, और आप इसे देखेंगे। आप जो इसे देखतेसमझते हैं, आप “आमीन” कहें!(मंड़ली कहती है, “आमीन”-सम्पा.) देखा, समझे? ठीक वैसा ही यह इस समय है।परन्तु उन—उन—उन याजकों-पादरियों ने कहा, उन…उन…उन याजकपुरोहितों ने कहा, धर्मशास्त्र के ज्ञान के ज्ञाताओं ने कहा, “यही वह तरीका है, जिसके द्वारा यह होना चाहिए।” परन्तु यह नहीं था। और इसने साबित किया था, कि यह नहीं था।60और परमेश्वर ने बालाम को बताया था—सबसे पहली बात तो यह है, कि वह एक भविष्यद्वक्ता था—उसने उस से कहा था, “नीचे ना जाना।”परन्तु इन दूसरे पुरूषों के प्रभाव ने उससे इसे उसके विरूद्ध करवाया, जो परमेश्वर ने कहा था, और यह बेदारी की बजाये स्राप बन जाता है। ओह, यकीनन! वह वहाँ नीचे गया, और उसने लोगों को शिक्षा देकर कहा, “अब देखो;! रुको ! तुम जानते ही क्या हो? बोला, हम हैं…हम मोआबी हैं। तुम्हें याद है,कि लूत की बेटी हमारी रानी है। वह हमारी संस्था है। हम सब एक ही खुन के ही तो हैं। हम सब हैं….हम सभों की नामधारी कलीसियायाएं एक सी ही तो हैं। आप उस चीज के साथ न मिलें। वहाँ से दूर रहें। समझे? अतः वह बोला, हम सब एक ही तो हैं। क्यों, तुम्हारे लोग मेरे लोग के जैसे ही हैं। हम आपस में एक दूसरे से शादी-ब्याह कर सकते हैं; अतः हमारे पास एक असली एक्यूमनिकल कॉन्सिल हो सकती है। समझे? हम सब आपस में एक दूसरे के साथ एकीकरण कर सकते हैं और फिर से मूल वस्तु की ओर वापस आ सकते हैं।” और परमेश्वर ने उस कार्य को स्रापित किया था। इस्राएल का वह पाप कभी भी क्षमा नहीं किया गया था। यह उनके साथ उनके बाकी दिनों भर चिपका रहा था; और इसे कभी भी क्षमा नहीं किया गया था। वे इसी के साथ ही जंगल में नाश हो गये थे (यह सच है!) क्योंकि उन्होंने इसे के लिए उस तरीके को नहीं अपनाया था, जो इसके लिए लिए परमेश्वर के द्वारा प्रदान किया हुआ प्रमाणित तरीका था।ध्यान दीजिए; यह काम जो उन्होंने किया था उसके कारण इस्राएलियों को जंगल में मौत से मर जाना पड़ा था, और यीशु ने कहा था, “उन में से सभी नाशऔर खत्म हो गये थे।” देखिए, वे कौन थे जो वहाँ पीछे मूसा के साथ खड़े रहे थे-यहोशू और कालेब; और…और योजना में!61इसके बाद ध्यान दीजिए, यहाँ पर दाऊद था; उसने क्या किया था। जब उसने यह किया, तो इसने क्या किया था? इसने यह कराया, कि एक सत्यनिष्ठ पुरूष पर मौत का वार हआ। और मेरा अनुमान है, कि हम अभी भी लटके हुए हैं; और जो सूदूर स्थानों पर हैं, मैं आप से चाहता हूँ, कि आप सुनें। दाऊद ने जो यह काम नातान का सलाह-मशवरा लिये बगैर और इसके लिए जो परमेश्वर का वचन था, उसे अपनाये बगैर किया था, इसने एक सत्यनिष्ठ पुरूष पर मौत का वार कराया। जी हाँ; उसने उसके ऊपर अपने हाथ रखे जो सन्दूक की उपस्थिति में रह रहा था; वह अपने…अपने भवन से बाहर आ जाता है। और बैल लड़खड़ा गया था, और सन्दूक गिर रहा था।वे पहले ही एक गलत काम कर चुके थे,

दो गलत काम कर चुके थे। पहलाउन्होंने कभी भी नातान से सम्मति नहीं ली थी। उससे अगला काम उन्होंने यह किया; वे वहाँ परमेश्वर के वचन से जो कि…उस दिन में शमूएल वचन था; सम्मति लिये बगैर ही वहाँ नीचे पहुँच गये थे। और उन्होंने कभी भी यहोवा के वचन से सम्मति नहीं ली थी; और जब उन्होंने इसे किया, तो वे परमेश्वर के वचन के विपरीत ही चले गये थे। और यहाँ पर यह भला मनुष्य, जो कि देखभाल करनेवाला रहा था, वह एक बिशप था- उसने सोचा था, अच्छा, यहाँ, मैं नहीं चाहता हूँ, कि परमेश्वर नीचे गिर पड़े। अतः उसने अपना हाथ सन्दूक पर रख दिया; जबकि वह एक लेवी नहीं था; और वह मृत्यु को प्राप्त हुआ था….ये तीन बातें हुई।62अब आप गम्भीरतापूर्वक विचार-मनन करें,और देखें, कि आज नामधारी कलीसियाओं ने क्या किया है। समझे? वे इसे ठुकरा चुकी हैं; वे इसे झूठी शिक्षा कह चुकी हैं।समझे?देखिए, वे कहाँ पर हैं। उन्हें तो बिलकुल ठीक अपनी एक्यूमेनिक्ल कॉन्सिल मिल जायेगी। उन्होंने इसे मस्तिष्क को पढ़ने वाली कला कहा, जबकि खुद परमेश्वर ही इसके सच्चे होने की पहचान करा रहा है, और इसे सत्य प्रमाणित कर रहा है। वे कहते हैं, “ओह, वहाँ पर तो बावलों का ही एक छोटा सा झुंड़ है; और वे नहीं जानते हैं, कि क्या कह रहे हैं।” यह सच है, हम नहीं जानते हैं। परन्तु हम तो सिर्फ उसी के वचन कहते हैं, और वह जानता था, कि वह क्या कह रहा था। समझे? मैं इसे नहीं समझा सकता हूँ; कोई दूसरा इसे समझा नहीं सकता है; परन्तु वही—वही—वही इसे प्रमाणित करता है।अब ध्यान दीजिए, आज बहुतेरे सत्यनिष्ठ विश्वासी जो मसीह के पास आते हैं, वे अपने सम्पूर्ण ह्रदय से आना तो चाहते हैं, पर वे ठीक वैसे ही आत्मिक तौर पर मरे हुए हैं। बहुतेरे निष्ठावान लोग कैथोलिक गिरजे में जाते हैं और एक मसीही बनना चाहते हैं; वे मैथाडिस्ट गिरजे में जाते हैं, बैपटिस्ट, चर्च ऑफ क्राइस्ट, और यहाँ तक कि पिन्तेकोस्तल गिरजे में भी जाते हैं, और एक मसीही बनना चाहते हैं; वे अपना हाथ इस पर रखते हैं, और उनके साथ शामिल हो जाते हैं।63और जब दाऊद ने इस हादसे को होते हुए देखा, तो इसने उसे जगा डाला। भाई, आप वहाँ जागने में बहुत देरी न करें। उसने देख लिया था, कि मौत वार कर चुकी है। आप मुझे ज़रा नतीजा तो दिखाएं। इस तथाकथित बेदारी ने क्या किया है, जो लोगों को नामधारी कलीसियाओं में वापस ला रही है, इस ने देश के साथ क्या किया है, विश्वासियों की देह के साथ क्या किया था? इस ने और कुछ नहीं किया, वरन नई नई संस्थाएं और नई नई नामधारी कलीसियाएं बनायी हैं, सारे समय इन के सदस्यों की गिनती में बस बढ़ोतरी ही की है। क्या देश बेहतर बन गया है?उन्होंने कहते हैं, वे अमेरीका…को जा रहे हैं….“परमेश्वर अमेरीका को आशीष दे; यह…यह एक देश है, या यह एक मसीही देश है। यह एक मसीही देश होने से दसयों लाख मील दूर है। मैं तो इसके लिए दुआ तक भी नहीं करता हूँ। मैं कैसे इसके लिए दुआ कर सकता हूँ, और यह तो परमेश्वर की उस शक्तिशाली सामर्थ के तले जो साक्षात् प्रकट की गई है, प्रायश्चित नहीं करेगा; और वह इसे ठुकरा रहा है, और इसके लिए द्वारों को बंद कर रहा है, और इससे दूर जा रहा है? मैं तो इसे परमेश्वर को ही सौंपता हूँ।और यह और भी दूर होता चला जा रहा है, और अब यह डूबने जा रहा है। बस देखते रहिए, कि क्या घटित होता है।64बहुत से सत्यनिष्ठ लोग जाकर संस्था या झुड़ या किसी प्रकार के पंथ में शामिल होते हैं, और वे आत्मिक तौर पर ठीक वहीं पर ही मर जाते हैं। आप उन्हें कुछ भी नहीं बता सकते हैं। वे उसके अंदर सुराग करके उस व्यर्थ की बकवास को घुसा देते हैं: “क्यों, इन बिशपों ने यह कहा था, और इसने यह कहा था; इसने यह कहा था।” आप उन्हें ठीक यहाँ पर परमेश्वर के वचन में दिखाये जहाँ यह “यहोवा यूँ फरमाता है’, वाला वचन है; और वे कहेंगे, ”हमारा पास्टर तो….“ मैं इसकी परवाह नहीं करता हूँ, कि आपका पास्टर क्या कहता है; इसकी परवाह न करें, कि मैं क्या कहता हूँ, या कोई और दूसरा क्या कहता है। यदि यह परमेश्वर के प्रमाणित वचन, घड़ी, समय, सन्देश तथा इसी प्रकार की दूसरी बातों से मेल नहीं खाता है, तो उसे भूल जाइये। उससे दूर रहिए !और मुझे न्याय के दिन आप में से हर एक के सामने खड़ा होना है, और आप यह जानते हैं। और मैं थोड़ा यही कहूँगा, कि मैं जान रहा हूँ, अब मैं एक बूढ़ा इंसान हूँ। मैं…यह मैं नहीं हैं। जो कुछ जानता है, बल्कि वो ही जानता है। मैं तो सिर्फ उसी का ही अनुकरण करता हूँ जो उसने कहा है।65आप आज इन बड़े बड़े धार्मिक कार्य-कलापों (Big Crusades) पर ध्यान दीजिए, कि हम देश को पार कर चुके हैं; यह साबित हो चुका है, कि यह व्यर्थ ही ठहरा है। और क्या यीशु ने अब यहाँ लूका 7:7 में नहीं कहा था, “वे व्यर्थ ही मेरी उपासना करते हैं। (व्यर्थ ही दाऊद सन्दूक को ऊपर लेकर आया। अहाब ने व्यर्थ ही उन नबियों को प्रशिक्षित किया। बालाम ने व्यर्थ ही धन लिया।) क्योंकि मनुष्यों की शिक्षाओं को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं? ये तो परमेश्वर की दस आज्ञाएं हैं जो महत्व रखती हैं। इससे कोई मतलब नहीं है, कि कितना ज्यादा….वे लोग सचमुच में सत्यनिष्ठ हैं। आप यह बहुत ज्यादा सुनते हैं। वे बहुत सत्यनिष्ठ हैं। ठीक है, इससे कोई मतलब नहीं है। यहोवा विटनस, सैवन्थ डे एडवनटिस्ट, तथा वे सभी पंथों वाले यहाँ बाहर गलियों में जाते हैं और उन कामों को करते हैं जो हम में से कोई भी नहीं करेगा। कैथोलिक तो कोने में खड़े होते हैं और भिक्षा तथा ऐसा ही और कुछ माँगते हैं; इसके इसी तरह के उनके आदेश हैं, और उसकी कीमत करोड़ों करोड़ों गुना डॉलर है; वे अभी भी इसके लिए भीख माँगते हैं। निसन्देह वे सत्यनिष्ठ लोग हैं। वे गिरजे जाते हैं, और प्रचार तथा इसी प्रकार के और दूसरे काम करते हैं; और वे प्रचारक प्रचार मंच पर खड़े होते हैं, और अपनी कलीसिया में किसी नये सदस्य को लाने के लिए वह सब कुछ करेंगे जो वे कर सकते हैं; परन्तु यह एक नया सन्दूक है। केवल एक ही सन्दूक है जिसके पीछे पीछे चलना है——वह है, परमेश्वर का वचन। जो कुछ भी उस सन्दूक के विपरीत है, उससे दूर रहिए; वह तो नई बैलगाड़ी पर है, और परमेश्वर के कंधों पर नहीं है। यह सच है। उस चीज से दूर रहिए। उससे कुछ भी लेना-देना ना रखें।66हमारे बड़े बड़े कार्यकलापों ने लाखों-करोड़ों से पापों को इकरार कराया है। और मुझे सन्देह है, इन सब मे से मात्र एक सौ ही वहाँ हों। समझे? यह कोई मायने नहीं रखता है। फिर तो आप प्रतिज्ञा किये वचन पर ही दृष्टि लगाये रखें।आप सोचेंगे, कि वह विफल हो चुका है, और हम जानते हैं, कि वह विफल हो चुका है। आज जो देश में हमारे सबसे बड़े बेदारीवादी हैं, उन में से कुछ कहते हैं, कि यह बुरी तरह नाकामयाब हुआ है। कलीसिया जानती है, यह नाकामयाब हुआ है। हर एक जानता है, यह नाकामयसब हुआ है। ठीक है, ऐसा क्यों है? यह क्यों नाकामयाब हुआ है? यह तो एक अच्छे उद्देश्य के लिए था…ये बड़े बड़े धार्मिक कार्य-कलाप तो लोगों को परमेश्वर की उपस्थिति में लाने के लिए थे। और दसयों लाखों ने अपनी दौलत खर्च की, और उसे बड़े बड़े धार्मिक कार्यकलापों में लगाया, कलीसियाएं सब मिलकर गईं;बड़े बड़े सभागार और बड़े बड़े स्थल लिये गये, और बड़े बड़े काम हुए; यह क्यों नाकामयाब हुआ?ऐसा इसीलिए हुआ,

क्योंकि उन्होंने कभी भी उस समय को नहीं जाना जिस में वे रह रहे थे। इस में कोई आश्चर्य नहीं है, यीशु खड़ा हुआ और वह अपने मन में रोया, आँसू उसके गालों पर से बह रहे थे, और उसने कहा था, “हे यरूशलेम, हे यरूशलेम, कितनी बार मैं ने चाहा, कि जैसे मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखों तले इकट्ठा कर लेती है, वैसे ही मैं तुझे छिपा लेता; पर तू ऐसा न करेगा। तू ने तो उन सारे भविष्यद्वक्ताओं पर पत्थरवाह किया जिन्हें मैंने तेरे पास भेजा। परन्तु अब तेरा समय आ पहुँचा है।”67क्या आप यह महसूस नहीं कर सकते हैं, कि पवित्र आत्मा आप में से रो रो कर कह रहा है, “हे संयुक्त राज्य, और संसार, मैंने कितनी बार तुझे जमा करना चाहा, पर तू नहीं करेगा। अब, तेरा समय आ पहुँचा है। तुम्हारे सुख-विलास के ईश्वर, तुम्हारा गंदगी का ईश्वर, तुम्हारा सदोम और अमोरा का ईश्वर, जो तुम्हारे मध्य में आ गया है…. यहाँ तक कि हमारे छोटे छोटे बच्चे भी तरह-तरह के बाल कटवा रहे हैं, और अपने चेहरे पर लटायें लटका रहे हैं; छोटी छोटी गंदगियाँ शुरू हो रही हैं। हमारी स्त्रियाँ तो बर्बाद हो चुकी हैं। वे छुटकारे से परे हैं! हमारे पुरूष तो बहुत बड़े छुईमुई बन चुके हैं; वे छोटी छोटी नीकरें पहने हुए इधरउधर घूम रहे हैं, और लड़कियों के जैसे आचरण-व्यवहार कर रहे हैं, और उनके बाल उनकी गर्दन तक झूल रहे हैं, और….हम सदोमी हैं, और परमेश्वर की जलजलाहट की आग हमारी प्रतीक्षा करती है।आप जानते हैं, वह इसे कैसे मारेगा, वह इसका कैसे सर्वनाश करेगा? ठीक वैसे ही जैसे उसने हमेशा ही किया है। जब कोई वेश्या कुछ भी गलत करती थी, तो उसे पत्थरवाह करके मार डाला जाता था। वे उस स्त्री को जो वेश्या थी, मार डालने के लिए पत्थर उठाते थे। ठीक ऐसे ही वह तथाकथित (कलीसिया) को मारेगा। बाइबिल कहती है, कि वह आकाश से हिमखंड़ों को बरसायेगा, जिनका वजन सौ-सौ पौंड होगा; और वह उन पर पत्थरवाह करेगा। कौन उसे रोकने जा रहा है? कौन सी विज्ञान यह कहने जा रही है, कि ऐसा नहीं किया जा सकता है?वह इसे करेगा। वह इसे ठीक वैसे ही करेगा जैसे उसने एक नाव बनायी और नूह को सुरक्षित स्थान पर तैराया; वह ऐसा ही अपनी कलीसिया के लिए फिर से करेगा। और वह अपनी व्यवस्था और अपने निज तरीके से उस वेश्या पर जिसने राजाओं, और सहस्त्रपतियों और शहपतियों के साथ व्यभिचार किया है, पत्थरवाह करेगा। वह अपनी उस व्यवस्था के द्वारा जिसे उसने क्रमबद्ध किया है, उस वेश्या को पत्थरवाह करके मार डालेगा। कौन उसे बताने जा रहा है, कि वह हिमखंड़ नहीं बना सकता है?68किसी उस व्यक्ति से पूछो, जो जानता है, कि कैसे बारिश की बूंद शुरू होती है, और गोल बनती है, और वापस …के जरिये जाती है….?…तथा और अधिक और अधिक लेती चली जाती है, जब तक कि एक निश्चित वजन की नहीं हो जाती है, और इसके बाद ही वह नीचे गिरती है। वह…जिस परमेश्वर को गुरूत्वाकर्षण भी पृथ्वी पर रोक कर नहीं रख सका था, और वह स्वर्ग में ऊपर उठा लिया गया था; वह परमेश्वर जिसने गुरूत्वाकर्षण बनाया, वह ….भी बना सकता है…..एक इतना बड़ा पत्थर जो हिलौरे ले जब तक कि उसका वजन एक सौ पौंड न हो जाये। उसने कहा था, कि वह ऐसा करेगा, और वह ऐसा करेगा ही। कौन उसे बताने जा रहा है, कि वह ऐसा न करे? वह तो ऐसा करेगा ही, क्योंकि उस ने कहा था, कि वह ऐसा करेगा।69हम अंत के दिनों में रह रहे हैं। हम न्याय के कगार पर खड़े हैं। क्यों? वे…पिन्तेकोस्तल कलीसिया उसी पुराने मन्ने को खाने का यत्न कर रही है जो पिछले समय में पचास वर्ष पहले गिरा था। होलीनेस कलीसिया दो सौ वर्ष पहले का, लूथरन लगभग तीन सौ या उससे ज्यादा वर्ष पहले का, कई सैकड़ों वर्ष पहले का मन्ना खाने का यत्न कर रहे हैं। वे पुराना मन्ना ही खाने का यत्न कर रहे हैं। हे भाइयों, वह भोजन-वस्तु तो निष्क्रिय है; उस में तो कीड़े-मकोड़े पड़ चुके हैं। वह होगा….वह हो चुका है….वह हो चुका है…मैंने हमेशा ही कहा है, कि उस में कीड़े हैं, उस में मकोड़े हैं। आप उसे खायेंगे, तो वह आपको मार डालेगा।ज्ञात कीजिए, काश दाऊद ने या उन बाकियों में से किसी ने केवल उस समय की रोटी से सम्मति ली होती। काश, पुराहितों और नबियों और प्रचारकों, और धर्मशास्त्रियों और शिक्षण संस्थानों और नामधारी कलीसियाओं ने केवल समय से ही सम्मति ली होती, परन्तु अब यह उन का कुछ भी भला नहीं करेगा। यह तो बीत चुका है। यह लेशमात्र भी मदद नहीं करेगा। अब यह खत्म हो चुकी है। इसने तो प्रायश्चित, न्याय और अनुग्रह के बीच की रेखा को लगभग पाँच साल पहले ही पार कर लिया है।70ध्यान दीजिए, इसके बाद क्या है? क्या किया जा सकता है? आइये हम भविष्यद्वक्ता से, बाइबिल से, जहाँ हम उस में ना तो जोड़ सकते हैं और ना ही उस में से कुछ भी बाहर निकाल सकते हैं, सम्मति लें। यदि हम उस में जोड़ते या इसमें से कुछ निकालते हैं, तो परमेश्वर हमें जीवन की पुस्तक में से ही बाहर निकाल देता है। बाइबिल मलाकी 4 में कहती है, कि आज क्या होगा; प्रकाशितवाक्य बताता है, कि कैसे सात मोहरें खुलेंगी, और ये सारे गुप्त भेद जो इन सुधारकों के दौरान छिपे रहे, प्रकट होंगे। उसने बताया है, कि यह कैसे होगा। यह बाइबिल में है; यह यहोवा यूँ फरमाता है, वाला वचन है। परमेश्वर तो पूरी तौर से, बिलकुल सिद्ध तौर पर उसकी पहचान करा चुका है, और चिन्हों, आकाश में आश्चर्यकर्मों और अन्य दूसरी सभी चीजों के द्वारा तैंतीस वर्षों से इसे सत्य प्रमाणित कर चुका है। आप सोचते हैं, कि वे इस पर कान लगायेंगे? जी नहीं! वे तो मरे हुए हैं। वे अपने हाथों को किसी ऐसी चीज पर रख चुके हैं जिसने सम्पूर्ण चीज को ही मार डाला है। नहीं, यह नहीं….वे इसे बिलकुल भी नहीं सुनेंगे।71ऐसा हुआ, कि जब यह हादसा हो गया, तो दाऊद ने दृष्टि डालकर देखा। हे परमेश्वर, हमारे पास एक दाऊद भेजिए, जो देख सकता है, कि वह कहाँ पर खड़ा हुआ है; जो बाहर दृष्टि डाल सकता है और वह देख सकता है, जो परमेश्वर की प्रतिज्ञा है….वह आज उसे कैसे करने जा रहा है। परमेश्वर ने ठीक यहाँ पर अपने वचन में कहा है, कि वह इसे कैसे करेगा।परमेश्वर ने मीकायाह को बताया था, मीकायाह ने अपने दर्शन को चार सौ प्रतिष्ठित नबियों के सम्मुख जाँचा था। उसने अपना दर्शन यह देखने के लिए जाँचा था,

कि वह सही है। उसने उसे देखने के लिए, जो उससे पहले भविष्यद्वक्ता ने कहा था, कि क्या होगा, पीछे दृष्टि डाली थी। उसने पीछे दृष्टि डाली, उसने देखा, कि एलिय्याह वहाँ खड़ा हुआ कह रहा था, “अहाब, कुत्ते तेरा भी लोहू चाटेंगे।” अब, उसने तब देखा, कि वह दर्शन ठीक परमेश्वर के वचन के मुताबिक था; अतःउसने उसकी घोषणा करके बताया, और वह सही था। यह सच है। इससे कोई मतलब नहीं था, कि उन बाकी दूसरों ने क्या कहा था; वह तो बस ठीक उसी वचन के साथ ही अटल बना रहा था।72अब आइये हम उस दर्शन को देखें, जो आज हमारे पास है। क्या यह गिरजों का निर्माण कर रहा है? क्या यह नई नई चीजों का निर्माण कर रहा है? क्या यह वे बड़ी बड़ी बातें हैं जो घटित होने जा रही हैं, या क्या यह न्याय है? आप पीछे दृष्टि डालें और आज की प्रतिज्ञा को देखें। देखें, कि हम किस मौसम में रह रहे हैंआप कहते हैं, “भाई, परमेश्वर मुबारक होवे। मैं तो सत्यनिष्ठ हूँ। मैं कलीसिया में शामिल हुआ हूँ। मेरे पास तो कला की स्नातक डिग्री है। मैंने यह किया है। यह सब सही है। यह बढ़िया है, कुछ भी इसके विरोध में नहीं है। ऐसे ही तो दाऊद ने किया था, ऐसा ही तो उन दिनों के याजकों ने किया था; ऐसा ही धर्मशास्त्रियों ने किया था; परन्तु यह वचन के खिलाफ था। परमेश्वर ने कहा था, कि वह आज इसे कैसे करेगा, वह कैसे सारी बातों को फिर से उनकी मूल अवस्था में वापस लेकर आयेगा; वह फिर से क्या करेगा। उसने फिर से मूल अवस्था में लाने की प्रतिज्ञा की थी। यह बिलकुल सच है। योएल 2:28 में उसने प्रतिज्ञा की थी, कि वह पुन मूल अवस्था में लायेगा; वह सारी हानि भर देगाः ”यहोवा यूँ कहता है, जो कुछ इन सारे वर्षों में टिड्डों ने खा लिया है, मैं उस सब की हानि भर दूंगा।“उन के पास है एक….देखिए, यह एक ही कीड़ा है। यह जीवन की विभिन्न प्रवस्था में है। और जब कैथोलिकवाद ने खाना शुरू किया, और उसके बाद लूथरन, मैथोडिस्टों, और उसके बाद पिन्तेकोस्तलों ने तथा उन सभों ने खाया; तो इसके लिए उसने कहा था, ”मैं कलीसिया के पास वापस फिर से सब चीजों को उनकी ठीक वैसी ही अवस्था में फेर दूंगा जैसी यह अपनी पहली अवस्था में थी।“73उस दर्शन को देखिए, जो किसी दूसरी रात्रि को देखा गया था। बिलकुल ठीक यही दुल्हन इस ओर इस ओर आयी। उन वेश्याओं के, जिन्होंने अपने वस्त्र पहने हुए थे, जिन्होंने अपनी छोटी छोटी चीजें बस इस प्रकार से पकड़ी हुई थी, चले जाने के बाद….और वह रॉक एन रॉल नाँच कर रही थी; और अपने आप को कलीसिया कह रही थी। आप कहते हैं, अच्छा, हम वो नहीं करते हैं। परमेश्वर तो आपको ऐसा ही देखता है। यह वह नहीं है, कि आप अपने आपको क्या देखते हैं; यह तो वैसा है जैसा परमेश्वर आपको देखता है।कोई भी इंसान अपने आपको गलत नहीं देखता है। जब आप परमेश्वर के वचन के दर्पण में देखते हैं, तो यह आपको बताता है, कि आप सही है या गलत। अगर दाऊद ने ऐसा ही किया होता, तो उसने देख लिया होता, कि वह गलत था। अगर अहाब ने ऐसा ही किया होता, या उन नबियों ने ऐसा किया होता, तो उन्होंने देख लिया होता, कि वे खुद गलत थे।एक प्रमाणित भविष्यद्वक्ता ने कहा था, कि अहाब मरेगा, और कुत्ते उसका खून चाटेंगे। और उसकी भविष्यवाणी ठीक इसके साथ मेल खाती थी। तब वह जानता था, कि वह सही था। यहाँ तक कि यहोशापात को यह देख लेना चाहिए। था, और इसे जान जाना चाहिए था। जब मीकायाह ने दर्शन देखा था, तो वह उन दिनों के लोगों के साथ साथ बहुत ज्यादा नहीं था। परन्तु उसके पास यहोवा की वाणी थी। वह सही था।74ध्यान दें, हम इस बात को इस समय, इस दिन में ला रहे हैं, जब हम उस महान घड़ी को, जो आ रही है, देखते हैं। ध्यान दीजिए, कि दाऊद भी क्या करने का यत्न कर रहा था। मेरे पास यहाँ पर उस पर एक छोटा सा लेख है। वह सन्दूक को अपने नगर दाऊदपुर में, अपने निज नामधारी कलीसिया में लाने की चेष्टा कर रहा था।पीछे दृष्टि डालिए, जब प्रभु सबसे पहले यहाँ नीचे नदी पर बोला था….जैसे यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले को उसके पहले आगमन पर उसके आगे आगे चलने के लिए भेजा गया था….भाई, अस्मबलिस् उसके लिए खड़ी नही हो सकती थी; ना ही यूनाइटड, और वे सारी की सारी! उन के पास तो कहीं न कहीं एक होना है। आह,उन सभों को इसे करना है। समझे? बिलकुल ठीक वैसे ही उन सभों को इसे अपने अपने निज भवन लेकर आना है।वह इसे दाऊद की नगरी में लाना चाहता था। क्यों? पर वहाँ पर उसके लिए कोई जगह तैयार नहीं थी। और यही कारण है,

कि आप सन्देश को नामधारी कलीसिया के पास नहीं ला सकते हैं। वचन; सन्दूक; मसीह जो कि कल, आज और युगानुयुग एक सा है; तथा उसकी सारी पहचानें एक सी हैं, आप इसे अपनी संस्था के पास संस्था के पास लेकर नहीं आ सकते हैं। वे इसका कदापि विश्वास नहीं करेंगी; क्योंकि वहाँ पर इसके लिए कोई जगह नहीं है। क्या बाइबिल नहीं कहती है, कि वह लौदीकियायी युग की कलीसिया के बाहर था और अंदर आने का प्रयास कर रहा था ? वहाँ दाऊद की नगरी में कोई जगह नहीं थी; इससे कोई मतलब नहीं था, कि यह कितनी निष्ठा से भरा हुआ और कितना महान था, तथा ऐसा ही और दूसरा था। इसके लिए अभी भी जगह नहीं थी; उसे तो यरूशलेम में ही जाना था। यही वह है जहाँ इसे बाद में तब लाया गया था, जब भविष्यद्वक्ता ने बताया था, कि इस के साथ क्या करना है। समझे? सो दाऊद को तो इसे अपने निज नगर में लाना था। उसके लिए कोई जगह तैयार नहीं थी।75मसीह हमारा सन्दूक है, और लोग इसे ग्रहण नहीं करेंगे। और मसीह वचन है। वे इसे ग्रहण नहीं करेंगे। वे अपना धार्मिक मत, अपनी नामधारी कलीसिया, एक नया सन्दूक या-या-या एक नया उठानेवाला चाहते हैं। वे इसे उठाने के लिए नामधारी कलीसिया चाहते हैं; एक नया सन्दूक चाहते हैं। स्मरण रखें, मसीह ही हमारा सन्दूक है। क्या आप विश्वास करते हैं, कि मसीह वचन है? (मंड़ली कहती है, “आमीन”!) तब तो वह सन्दूक है। क्या यह सही है? बिलकुल ठीक है। मसीह को उसके सही-सटीक स्थान पर किसी नामधारी कलीसियायी बैलगाड़ी द्वारा उठाकर नहीं ले जाया जा सकता है। वह तो किसी एक इंसान से बातचीत करता है। वह कभी भी झंड़ के झुंड़ से बातचीत नहीं करता है। उसने कभी भी झुड़ से बातचीत नहीं की; उसने तो एक अकेले मनुष्य से ही बात की। जब वह…?…उसने कहा था, कि वह नहीं करेगा…. यदि उसने की, तो वह अपने ही उस वचन के खिलाफ था, जो आमोस3:7 में है। और आप उसे झूठा नहीं ठहरा सकते हैं। जी नहीं, श्रीमान! यह तो….यह तो सच है।परन्तु देखिए, उन्होंने प्रयास किया…सन्दूक किसी संस्था के द्वारा उठाकर नहीं लाया जा सकता है, उस में तो बहुतेरे हाथ होते हैं। समझे? इसे ऐसे नहीं किया जा सकता है। उसने वायदा किया था, कि वह ऐसा नहीं करेगा; और वह ऐसा नहीं करेगा। उसने…उसने कहा था, जब उसने प्रतिज्ञा की…..जब उसने इसे किसी दूसरे ढंग से करने की प्रतिज्ञा की थी; यही कारण है, कि उसने प्रतिज्ञा की, वह इसे नहीं करेगा। (आप उन विचारों को ना सोचें। मैं इसे महसूस कर सकता हूँ। समझे?)76अतः उसने…उसने प्रतिज्ञा की, कि वह इसे किसी एक निश्चित तरीके से करेगा; और इसके विपरीत जो कुछ भी है, वह उसे नहीं करेगा। समझे? परन्तु वह तो इसे अपने मूल तरीके के अनुसार ही करेगा, जो उसने आमोस 3:7 में कहा था। यही वह तरीका है जिसके द्वारा वह इसे करेगा। और वह सत्य प्रमाणित और सिद्ध होना चाहिए। अब, आप जानते हैं, कि आज उसने क्या प्रतिज्ञा की थी, और वह इसे आज कर रहा है। यह तो सिर्फ वह है जो उसने करने के लिए कहा था, कि वह करेगा। वह उन सात मोहरों को खोलेगा; और वह सब करेगा; उन गुप्त बातों को जो पिछले समय में थी, प्रकट करेगा; वह प्रकट करेगा, कि कैसे ये बपतिस्मा तथा सब बातें गड़बड़ा चुकी थीं। और यहाँ तक कि यह ठीक उसकी उपस्थिति में है। विज्ञान इसे साबित करती है। आकाश ने इसकी घोषणा की। मनुष्य खड़ा होकर ठीक इस पर दृष्टि डाल रहा था, और इसे घटित होते हुए देख रहा था। और उसने एक भी ऐसी बात नहीं कही जिसे उसने सच न बताया हो। आप ऐसी ही स्थिति में हैं। ऐसा सिर्फ इसीलिए हुआ, ताकि आप देखने पायें, कि आज हम कहाँ पर हैं।77अब, कोई भी व्यक्ति जिस पर उसका आत्मा है जानता है…जिस पर परमेश्वर का आत्मा है, जानता है, कि यह सच है; क्योंकि परमेश्वर का आत्मा वचन के खिलाफ नहीं बोलेगा। नहीं, जी नहीं, वह तो वचन के साथ साथ मेल खाता है। आप कहते हैं, मुझे पवित्र आत्मा मिला। मैंने ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर जयजयकार किया; मैं गैर जुबानों में बोला। मैं आत्मा में नाँचा। परमेश्वर के लिए यह कोई मायने नहीं रखता है। समझे? दाऊद ने ठीक यही किया था…वहाँ पीछे व्यवहारिक तौर पर उसने ठीक यही किया था। उसने अपनी पूरी सामर्थ से गाया; और उसने अपनी पूरी ताकत से ज़ोर ज़ोर से चिल्लाकर जयजयकार किया; और उन बाकियों ने भी ऐसा ही किया था; और वे ठीक मौत के अंदर चले जा रहे थे। यह सच है। इसका इससे कुछ भी सरोकार नहीं है।78यह तो वचन है, प्रभु का वचन है जो मायने रखता है। वे जो यहोवा की बाट जोहते हैं। जी हाँ, श्रीमान!देखिएगा;

जिनके अंदर परमेश्वर का आत्मा होता है, वे आज के दिन की प्रतिज्ञा की ओर निहारते हैं; और देखते हैं, और तब तक बाट जोहते हैं, जब तक कि वे इसे देख नहीं लेते हैं। और इसके बाद वे कहते हैं, “यह वही है।” परमेश्वर ही इसे उन पर प्रकट करता है।जैसे नतनएल! फिलिप्पुस गया, और नतनएल को पाया, और नतनएल से बोला, “अब, एक मिनट रूक; मैं जानता हूँ, वह प्रतिज्ञा की गई, परन्तु आ, मैं इसे देखें।” और जब उसने इसे देखा, तो वह बोला, “यह वही है।उस स्त्री ने कहा था, “अब, मैं जानती हूँ, मैंने सभी तरह के धर्मशास्त्रियों को सुना है। मैंने यह और वह किया है। और मैंने खुद बाइबिल पढ़ी है, और मैं जानती हूँ, कि हम हैं—मसीह जो आने वाला है, वह इन कामों को करेगा; अतः तुझे उसका भविष्यद्वक्क्ता होना चाहिए।”वह बोला, “मैं वही हूँ।”वह बोली, “आओ, एक पुरूष को देखो, यह वही है। उसने तब तक बाट जोही, जब तक उसने मसीह को, जिसकी परमेश्वर के वचन के द्वारा पहचान हुई थी, न देख लिया था। इसके बाद वह बोली, यही है वह जिसकी हम ने चार सौ वर्ष बाट जोही। हमारे पास भविष्यद्वक्ता या ऐसा ही कुछ नहीं था। यहाँ वह है, और वह खुद कहता है, कि वही वो है। अब….(टेप में खाली जगह-सम्पा.) बाहर आओ और उस मनुष्य को देखो, जिसने मुझे वह सब बता दिया जो मैंने किया है। परन्तु याजक उसे मार डालना चाहते थे; और आखिरकार उन्होंने ऐसा कर डाला था। समझे? परन्तु वे आज उसके आत्मा को नहीं मार सकते हैं।यह सच है। जी नहीं, वे उसको जान से नहीं मार सकते हैं। वह यहाँ पर इसे हमारे पास लाने के लिए था; अतः हम धन्यवादित हैं।ध्यान दीजिए, परमेश्वर कितना महान है, उसके कार्य कितने महान हैं, कैसे कभी वह नाकामयाब नहीं हो सकता है।79अब देखिए, परमेश्वर के पास कामों के करने के लिए पहले से ठहराया हुआ व एक मूल तरीका है; और वह कभी भी उससे अलग काम नहीं करेगा।अब, उसने अंत के दिनों में प्रतिज्ञा की, कि वह क्या करेगा। और वह उन के पास…हमारे पास एक सन्देश भेजेगा, और इस सन्देश की ठीक वैसी ही पहचान होगी जैसी एलिय्याह के पास थी, जैसी एलीशा के पास थी, जैसी यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के पास थी। और यह नामधारी कलीसिया का नहीं वरन लोगों के ह्रदयों को वापस मूल, प्रेरित पिताओं की ओर, वापस वचन की ओर फेरेगा। कैसे ये सारी बातें साबित हो चुकी हैं! कैसे अन्तिम दूत के शब्द पर, प्रकाशितवाक्य 10….सातवें दूत के दिनों में ये सारे भेद जो सब के सब रहे…क्यों मैथोडिस्टों ने यह किया था, और बैपटिस्टों और चर्च ऑफ क्राइस्ट, और यहोवा विटनस तथा सभों ने यह किया था? वे गुप्त भेद अंत के दिनों में तब खुलेंगे जब सात दूत…सातवें दूत का सन्देश…जब वह….ऐसा नहीं है जब वह इसे करना शुरू करता है; वरन जब वह अपना सन्देश देना शुरू करता है। समझे? वर्षों की तैयारी में नहीं; परन्तु…जब वह सन्देश देना आरम्भ करता है, तब इन गुप्त भेदों का खुलासा होगा। और यहाँ वे हैं; लोग उन्हें नहीं जान रहे हैं, और आप लोग उसके साक्षी हैं।80और उसके बाद बड़े बड़े अनुसंधान में…ताकि संसार सन्देह में ना रहे…..वे अभी भी अचरज कर रहे हैं, कि क्या घटित हुआ था।टयूसान में उन बड़ी बड़ी अनुसंधानशालाओं ने वहाँ ऊपर इसकी तस्वीर खींची थी; वे अभी भी अचरज कर रहे हैं, कि क्या घटित हुआ था। यह क्या है? वे अभी भी अखबारों में छापते हैं, “क्या कोई इसके बारे में कुछ जानता है; ऐसा कैसे हो सकता है?” वहाँ ऊपर कोई कोहरा नहीं था, वहाँ ऊपर कोई हवा नहीं थी; वहाँ ऊपर कोई नमी नहीं थी; यह तो वायु में तीस मील ऊपर था। ओह, मेरे खुदा! “आकाश में ऊपर चिन्ह दिखाई देंगे। और जब ये बातें होती हैं, तो विभिन्न स्थानों पर भुईडौल होते हैं, तो मनुष्य के पुत्र का चिन्ह आकाश में दिखाई देगा। उस दिन (लूका के अनुसार) मनुष्य का पुत्र स्वयं को फिर से प्रकट करेगा;

और वह खुद ही प्रकट होगा। और संसार सदोम और अमोरा के जैसा दिखाई देगा।” हे मेरे भाइयों, आप आत्मिक बातों से अनभिज्ञ न रहें। समझे? वचन में खोजो, क्योंकि तुम सोचते हो, कि उसमें….तुम्हें अनन्त जीवन मिलता है; और ये वे हैं। जो वचन की गवाही देते हैं। ये वे हैं जो सच्चाई की, उन बातों की जो परमेश्वर इस घड़ी में कर रहा है, गवाही देते हैं। 168. और अब देखिए! वे जिनके पास परमेश्वर का आत्मा है, वे इन बातों की बाट जोहते हैं।81और जब वे उन बातों को देखते हैं, तो वे उन बातों का विश्वास करते हैं। यीशु ने कहा था, कोई मेरे पास नहीं आ सकता है जब तक कि पिता ही उसे मेरे पास न खींच लाये, और जितनों को पिता ने मुझे दिया, वे सब मेरे (वह वचन है) पास आयेंगे ..वे मेरे पास आयेंगे।मैं इस सुबह थोड़ा सा कठोर सा हो रहा हूँ। समझे? वे जो प्रभु की बाट जोहते हैं,वे जो प्रभु की बाट जोह रहे हैं; और जब वे बाट जोहते हैं तो वे आज उस प्रतिज्ञा को जिसकी पहचान करायी गई है, देखते हैं; इससे उनका उसके वचन में विश्वास और भी पुख्ता हो जाता है; क्योंकि उसने ऐसा करने की प्रतिज्ञा की हुई होती है, और वह इसे यहाँ पर कर रहा होता है। तब तो इस में कोई सन्देह नहीं होता है। परमेश्वर बोलता है; पहले उसका वचन बोला जाता है, और उसके बाद वह आत्मा जो उसे ला रहा होता है, उस काम को करता है, जो वचन ने कहा था, कि वह करेगा। ओह, हमारे पास बहुत सी नकले हैं। हमारे पास उन में से बहतेरी हैं ; सत्यनिष्ठ हृदय वाले मनुष्य कामों को इस प्रकार से, और उस प्रकार से करने की चेष्टा कर रहे हैं; मगर देखिए, क्या हुआ है। लोग अपने हाथ रखते हैं, और फिर..फिर से मर जाते हैं। समझे?ध्यान दीजिए;82किसी मनुष्य की नामधारी कलीसिया की योजना कभी काम नहीं करेगी। वे तो बस खुद अपनी ही बनायी हुई नामधारी कलीसियायी नाव के लिए सदस्य बनाये चले जा रहे हैं….परमेश्वर के पास कभी कोई नामधारी कलीसिया नहीं थी। उसके पास कभी कोई नामधारी कलीसिया नहीं होगी। और यह तो मनुष्य के द्वारा बनायी हुई चीज ही है।83और आज मुझे हैरत होती है, कि अंदर खींचने के हमारे सारे प्रयास और बड़े बड़े धर्मिक कार्य-कलाप और जागृतियाँ जो हैं, क्या हम उन के जरिये मैथोडिस्ट नाव को, बैपटिस्ट नाव को, प्रेसबीटेरियन नाव को नहीं भर रहे हैं? परन्तु मसीह की नाव अर्थात् वचन के बारे में क्या है।

और अगर दुल्हन को वचन होना है, तो उसे मसीह का भाग होना है; उसे दुल्हें का भाग होना है….और मसीह की दुल्हन होने के लिए उसे दुल्हे का भाग होना है, उसे वचन होना है; उसे उसके दिन का वचन नहीं, बल्कि इस दिन का वचन होना है जिसकी उसने इस समय में होने के लिए प्रतिज्ञा की थी। कहा था, कि वह अपनी दुल्हन को ढ़ालने और बनाने के लिए अपना वचन भेजता है। मैं आशा करता हूँ, कि हम इसे देखते हैं। अब आप अपने किसी भी विचार को ग्रहण न करें, और ना ही किसी दूसरे व्यक्ति के विचार को ग्रहण करें। आप तो बस प्रमाणित वचन को, बाइबिल को ही ग्रहण करें। यह कहती है…परमेश्वर ने अपने वचन में प्रतिज्ञा की है, कि वह इस अन्तिम दिन में अपनी दुल्हन कैसे चुनेगा। क्या आप यह जानते थे? उसने इसकी प्रतिज्ञा की है, कि वह इसे कैसे करेगा; और यह उसके मसीह का चुनाव करने की मूल योजना के द्वारा करेगा; जैसे वह समय को चुनने, मौसम को चुनने के लिए करता है, कि कैसे वह…वह अपनी दुल्हन के लिए इससे चूक नहीं सकता है; क्योंकि वह उसके वचन का हिस्सा है। वह उसे नामधारी कलीसिया के ज़रिये नहीं चुन सकता है, जबकि उस ने मसीह को नामधारी कलीसिया के जरिये नहीं चुना था। क्या मसीह नामधारी कलीसिया के पास आया था? क्या वह नामधारी कलीसिया से आया था? जी नहीं! उन्होंने तो उसे ठुकरा दिया था। अच्छा, ठीक यही है जो नामधारी कलीसियाओं ने तब किया था। इसके बाद जब वह एक दुल्हन चुनता है, तो क्या वह किसी और तरीके का इस्तेमाल कर सकता है? वह मसीह को यहाँ पर कैसे लेकर आया था? भविष्यद्वक्ताओं के वचन के द्वारा! क्या यह सही है? वह अपनी दुल्हन को यहाँ पर कैसे लेकर आयेगा? भविष्यद्वक्ताओं के वचन के द्वारा ही!जब वह आया, तो उसने उसकी कैसे पहचान करायी थी? उस एक मनुष्य के द्वारा जिस पर एलिय्याह की आत्मा थी, जो जंगल में से बाहर निकल कर आता था। वह अपनी दुल्हन की कैसे पहचान करायेगा? उसने मलाकी 4 में ठीक इस बात की प्रतिज्ञा की है, कि इससे पहले कि वह पृथ्वी का सर्वनाश करे, यह ठीक वैसी ही होगी जैसे यह सदोम के दिनों में थी।84याद रखिए, सदोम जलाया गया था। क्या यह सही बात है। यह सही बात है, यह जगत जलाया जाना है। यीशु ने ऐसा ही कहा था। और यह वह समय होगा जो…..जैसे लूका के 17वाँ अध्याय का 30वाँ पद कहता है; उन दिनों में वैसा ही होगा जैसा सदोम और अमोरा के दिनों में हुआ था; तब मनुष्य का पुत्र प्रकट होगा। और तब क्या होगा?मलाकी के अनुसार वह फिर से पृथ्वी को जलायेगा, और सहस्राब्दि में धर्मी जन दुष्टों की राख पर चलेंगे। क्या यह सही है? समझे? अतः हम ठीक अंत समय में हैं। इस समय हम यहाँ पर द्वार पर बैठे हुए उस के आने की राह देख रहे हैं।85ध्यान दीजिए, परमेश्वर ने अपने वचन में प्रतिज्ञा की है, कि वह अपनी दुल्हन को उसी मूल तरीके के द्वारा चुनेगा जिस तरीके से उसने उसे…दुल्हे को चुना था। उसने इसे भविष्यद्वक्ताओं के माध्यम से पहले से ही बतला दिया था, और उसने उसकी पहचान कराने के लिए एक भविष्यद्वक्ता भेजा था। भविष्यद्वक्ता ने यरदन के तट पर बैठ कर कहा था, “देखो!”उन्होंने कहा, “तू मसीह है, क्या तू नहीं है?उसने कहा, नहीं, मैं मसीह नहीं हूँ।“तुझे मसीह होना चाहिए।““परन्तु मैं वह नहीं हूँ; लेकिन वह तुम्हारे बीच में खड़ा हुआ है, और मैं उसके जूते खोलने के भी योग्य नहीं हूँ। जब वह आता है, तो वह खुद अपने आप को प्रकट करता है…..” और आज वह हमारे मध्य में पवित्र आत्मा की उपस्थिति के रूप में खड़ा हुआ है, और वह खुद अपने को ज्यादा और भी ज्यादा प्रकट कर रहा है, वह अपनी कलीसिया में आ रहा है,

वह स्वयं अपने को प्रकट कर रहा है; क्योंकि वह और दुल्हन, अर्थात् दूल्हा और दुल्हन एक ही होंगे; वह खुद अपने को प्रकट कर रहा है। और एक दिन आप उसे देखेंगे जिसे आपने अपने ह्रदय में महसूस किया और जिसकी पहचान आप ने देखी; और वही आपके सम्मुख व्यक्तिगत तौर पर असलियत में होगा। तब आप और वह एक ही होंगे। और आप वचन के द्वारा जुड़े हुए हैं, और वचन जो आरम्भ में था, वापस आरम्भ को ही, जो कि परमेश्वर है, लौट जाएगा। और उस दिन तुम जानोगे, कि मैं पिता में हूँ, पिता मुझ में है, मैं तुम में हूँ और तुम मुझ में हो।“ हाल्लिलूय्याह! हम इस स्थिति में हैं। हाल्लिलूय्याह! मैं उसे ठीक अपने सम्मुख व्यक्तिगत तौर पर वास्तविक रूप में देखने के लिए और उसे देखने के लिए जो उस के वचन में प्रतिज्ञा की है, अति आनन्दित हूँ; इससे नहीं, कि किसी की क्याा भावना है, गायन, और उछलने-कूदने और नाच के द्वारा नहीं, वरन अपने वचन के द्वारा ही (आमीन!) वह स्वयं अपने को प्रकट कर रहा है।86देखिए, जब वे लाये….और मन्दिर बनाया और उसके अंदर सन्दूक लेकर आये, तो वह आग के खम्भे के साथ वहाँ अंदर आ गया। आमीन! यह दाऊद था, जो उछल-कूद रहा था, और जोर जोर से चिल्लाकर जयजयकार कर रहा था। ये सारे गवैये और याजक-पुरोहित थे, जो वह सब किये चले जा रहे थे, जबकि वे परमेश्वर की मर्जी के बाहर थे। परन्तु जब परमेश्वर ने सन्दूक की उसके स्थान और स्थिति में पहचान करा दी, तो इससे पहले कि सन्दूक वहाँ अंदर रखा जा सकता होता; आग का खम्भा मार्ग इर्शन करने के लिए वहाँ पर आ जाता है; वह आग का खम्भा सराफों के पंखों पर होकर नीचे आता है, और पवित्र अति पवित्रतम के पीछे चला जाता है; यही उसकी, आग के खम्भे की विश्राम करने की जगह थी। और वहाँ अंदर परमेश्वर की महिमा इतनी ज्यादा थी, कि…..वे ना देख सके, कि कैसे सेवा करनी है। आमीन! जब वह अपनी दुल्हन के लिए आता है, तो वह हर एक धर्मशास्त्री की आँखें मुंद देगा। वह ऊपर उठा ली जायेगी …रात्रि के मध्य में जैसे यह उन के लिए था। वे उसे जाते हुए भी ना देख पायेंगे। ओह, प्रभु की महिमा होवे!87ध्यान दीजिए! परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है, कि वह अपनी दुल्हन को बाहर लायेगा; वह क्या करेगा…एक बीज होगा, सांझ के समय में उजियाला होगा। वह कैसे इन सब कामों को करेगा…ठीक वैसे ही और ठीक उसी रीति से जिससे उसने पुराने नियम में और नये नियम में इसे लगाया था…..और ऐसा नामधारी कलीसियाओं के जरिये नहीं किया गया। ऐसा हमारे उस तंत्र के द्वारा नहीं होगा जिसका हम आज उपयोग कर रहे हैं। हम तो सिर्फ मौत ही उपजा रहे हैं। रखे…लोग…इस के द्वारा अपने हाथ रख रखते हैं और उससे मर जाते हैं। समझे?88वचन को, साँझ के उजियाले को तो अवश्य ही साँझ के परिणामों को ही लेकर आना चाहिए। सांझ के उजियाले के सन्देश को तो साँझ के बीजों को ही बोना चाहिए; सुबह के बीज नहीं, वरन साँझ के ही बीज बोने चाहिए। क्या यह सही है? मध्य दिन का दृश्य—वहाँ पीछे जो इसका बीज बोया गया था, वह डीनोमीनेशन था। वह मर गया, नाश हो गया। परन्तु सांझ के समय का सन्देश, सांझ के समय का उजाला दिखायेगा, सांझ के समय के परिणामों को दिखायेगा। सांझ के समय का सन्देश….यीशु का समय…मध्य दिन के सन्देश ने मध्य दिन के परिणाम दिखाये थे। आरम्भ के सन्देश ने आरम्भ के परिणाम दिखाये! सृष्टि बनायी। उसने मध्य दिन में अपने पुत्र को अपने ही स्वरूप में बनाया। सांझ के समय में वह उसके लिए एक दुल्हन बनाता है। समझे? किस के द्वारा? अपने वचन के द्वारा। उसने पृथ्वी को कैसे बनाया था? उसने इसे अस्तित्व में आने के लिए कैसे बोला था? अपने वचन के द्वारा। उसका पुत्र कौन था? वचन! आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था…और वचन देहधारी हुआ और उसने डेरा किया…वह अपनी दुल्हन को कैसे लेगा? वचन के द्वारा; किसी नई बैलगाड़ी के द्वारा नहीं; धर्मशास्त्र के ज्ञान के ज्ञाता की किसी विचारधारा के द्वारा नहीं; परन्तु वह तो अपने ही वचन के अनुसार उसकी पहचान करायेगा। अब आप इस में नातो एक भी शब्द जोड़े और ना ही इस में से एक भी शब्द बाहर निकालें। इसे वैसा ही रहने दें जैसा यह है। समझे?89उसने प्रतिज्ञा की है, कि वह सांझ के समय में प्रकट करेगा…वह इन सात मोहरों का खुलासा करेगा, और वह उसे दिखायेगा जिनसे उन कलीसियाओं ने पिछले समय में चूक कर दी थी।

प्रकाशितवाक्य 10, और मलाकी 4, और लूका 17:30; उसने कहा था, कि वह इसे करेगा, अतः हम इस में कोई मिलावट न करें। हम इसे ठीक वैसा ही कायम रखें।आइये मैं अंत में….बारह बजने में लगभग पन्द्रह मिनट हैं; मैं इसे अंत में कह रहा हूँ…मित्रों, प्रभु यीशु के नाम में सुनिए, ये बाते आपके लिए इतनी साफ व स्पष्ट है, कि आप इसका विश्वास न करें; यह आप के लिए इतना स्पष्ट है, कि आप देख न सकें, यकीनन आप इसे देख सकते हैं। निश्यच ही संसार इसे देख सकता है। परन्तु बस आपका…अब आप इन नये नये विषदंत युक्त भरमानेवालों से तथा ऐसे ही और दूसरे लोगों से जो आज हमारे पास हैं, प्रभावित ना हों। मैं इसकी परवाह नहीं करता हूँ, कि वे कितने अच्छे लोग हैं, वे कितने सत्यनिष्ठ लोग हैं; यदि वे व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं के मुताबिक नहीं बोलते हैं, बाइबिल कहती है, उन में कोई जीवन नहीं है। समझे?90दाऊद ने सोचा था, कि वह सही है; वह सत्यनिष्ठ था; उन पुराहितों ने सोचा था, कि वे सही थे, वे सत्यनिष्ठ थे; परन्तु वे बस इसके बारे में खुदा से सम्मति लेने से चूक गये थे। और वे इसे कैसे कर सकते थे? हो सकता है, कि उन्होंने कहा हो, हम ने खूब प्रार्थना की। परन्तु इसे करने का परमेश्वर का यह तरीका नहीं था। उसने प्रतिज्ञा की थी, कि वह तब तक कुछ नहीं करेगा, जब तक कि वह इसे पहले अपने दास-भविष्द्वक्ताओं पर प्रकट नहीं कर देगा। और वहाँ पर ठीक उन के मध्य में नातान खड़ा हुआ था, और उन्होंने उससे कदापि बिलकुल भी कोई सलाह-मशवरा नहीं किया था।91अब आप इतिहास के कुछ अगले अध्यायों में पढ़ें, आप वहाँ पायेंगे, कि जब दाऊद अपने घर में बैठा हुआ था, और बोला था…(नातान उसके साथ बैठा हुआ था) “क्या यह उचित है, कि मेरे पास हो….मैं देवदार के महल में रहूँ, और-और परमेश्वर का सन्दूक वहाँ बाहर तम्बुओं में रहे।” और नातान ने प्रभु से पाया, कि उसे क्या बताये, कि वह इसे करे।वह गलती कर चुका था; अतः परमेश्वर ने कहा था, “मेरे दास दाऊद को बता, मैं उससे प्रेम करता हूँ। मैंने उसका नाम पृथ्वी के बड़े बड़े लोगों के जैसा बड़ा किया है, परन्तु मैं उसे इसे नहीं करने देंगा(समझे?) उसने मुझे असफल किया है। (समझे?) मैं उसे इसे नहीं करने दे सकता हूँ; मैं एक मनुष्य को लेकर आऊँगाः उसका पुत्र परमेश्वर का युगानुयुगी भवन उठा खड़ा करेगा। यह सचमुच में दाऊद ही था, जिसे सुलैमान ने प्रतिचित्रित किया था; परन्तु तब वह विफल हो गया था। हर एक इंसान को तो नाकामयाब होना ही है। हर एक मानव को नाकामयाब होना ही है। परमेश्वर ही एक मात्र ऐसा है जो विफल नहीं हो सकता है। वह विफल नहीं हो सकता है। सिर्फ यही एक ऐसा काम है जो परमेश्वर नहीं कर सकता है, कि वह विफल नहीं हो सकता है। और परमेश्वर वचन है। और वचन….इससे कोई मतलब नहीं है, कि यह कितना दिखाई देता है, कि इसे किसी दूसरी रीति से आना है; यह तो बस ठीक उसी रीति से आएगा जैसा कि वचन कहता है।92अब स्मरण रखिए, आपको समय, मौसम का अनुकरण करना होता है। समझे? और आप किस समय में, किस ऋतु में हैं, और इसे दिखाने के लिए कि यह बिलकुल सत्य है, वह प्रमाणित किया गया है।अब आप इन सारी अनिवार्यताओं को, समस्त वचन को, सारे उदाहरणों को, और बातों को लें, और देखें, कि आप कहाँ बैठे हुए हैं। आप उस घड़ी के बारे में सोचें जिसमें हम रह रहे हैं। आप ज़रा ऊपर दृष्टि डालें, पृथ्वी का लगभग दसवां भाग तो अंदर धस जाने को तैयार है। विज्ञान ऐसा ही कहती है। वे घडी पर दृष्टि लगा रहे हैं; कुछ वर्षों पहले ही उन्होंने कहा था, “मध्य रात्रि में इस समय केवल तीन मिनट ही हैं।” हो सकता है, कि एक मिनट ही हो, हो सकता है, अब आधा मिनट ही हो।उन्होंने कहा था, “यह हमारी पीढ़ी में नहीं होगा।”“यह पाँच मिनट के अंदर ही हो सकता है।” और ध्यान दीजिए, अगली बात उसने कही थी, “पाँच वर्ष।” अब यह मैंने कभी नहीं कहा था, यह तो उसी वैज्ञानिक ने ही कहा था। वे तो मक्खियों की तरह कैलीफोर्निया से भाग रहे हैं। देखा? ठीक है, ठीक जिस दिन लूत सदोम से बाहर निकल कर गया, ठीक उसी दिन पृथ्वी पर आग बरसी। परमेश्वर इन्हीं दिनों में से किसी एक दिन हमारा सन्देश लेने जा रहा है, और हम यहाँ से छोड़ कर जाने वाले हैं। जब कलीसिया, अर्थात् उसकी देह, उसकी दुल्हन चली जाती है, तो तब निश्चय ही काफी कुछ होने जा रहा है।93अब, मैं चाहता हूँ, आप वचन का एक लेख पढ़ें, और मैं चाहता हूँ, आप इसे मेरे साथ पढ़े। आखिर में मैं आप से व्यवस्थाविरण का चौथा अध्याय निकलवाना चाहता हूँ। मैं सोचता हूँ, सम्भ्वतः काफी कुछ कहा जा चुका है, कि आप समझ जायें। व्यवस्थाविवरण चार! मैं यहाँ पर दो जगहों से पढ़ने जा रहा हूँ। और इस कलीसिया से और जो टेप पर हैं उन से…उन लोगों से जो टेप पर हैं, और जो लोग देश के विभिन्न भागों में इसे टेलीविजन पर सुनते हैं, मैं आप से यह चाहता हूँ, कि आप इसे ध्यानपूर्वक सुनें और इससे न चूकें। यह वह बात है जो मैं….

व्यवस्थाविरण चौथा अध्याय! अब मैं पहले पद से ही पढ़ना शुरू करूंगा। मैं पहला पद पढ़ना चाहता हूँ, और इसके बाद मैं 25वाँ और 26वाँ पद पढूंगा। जब आप घर जाते हैं, तो आप इसे सारा का सारा पढ़ सकते हैं; लेकिन समय बचाने के लिए….जिससे हम समय पर बाहर निकल सकें, मैं सिर्फ इतना ही पढ़ेगा, क्योंकि प्रभु ने चाहा, तो मुझे आज रात्रि फिर से वापस आना है। इस भविष्यद्वक्ता के बोले जाने को ध्यानपूर्वक सुनें! वह परमेश्वर की उपस्थिति में रहा था। वह जानता था, कि वह क्या कह रहा था। सुनिएःअब, हे इस्राएल सुन, जो जो विधि और नियम मैं तुम्हें सिखाना चाहता हूँ, उन्हें सुन लो; और उन पर चलो; जिससे तुम जीवित रहो और जो देश तुम्हारे पितरों का परमेश्वर यहोवा तुम्हें देता है, उस में जाकर उसके अधिकारी हो जाओ। (यह आप के सहस्राब्दि को दर्शाता है।)जो आज्ञा मैं तुम्हें सुनाता हूँ, उस में न तो कुछ बढ़ाना और ना कुछ घटाना….(आप ना तो इस में एक भी शब्द जोड़े, और ना ही इस में से एक भी शब्द बाहर निकालें। इसे वैसा ही रहने दें; सिर्फ वही कहें जो यह कहता है)… तुम्हारे यहोवा की जो जो आज्ञा मैं तुम्हें सुनाता हूँ, उन्हें तुम मानना।तुम ने तो अपनी आँखों से देखा है, कि…बाल-पोर के कारण यहोवा ने क्या किया था, अर्थात् जितने मनुष्य बालपोर के पीछे हो लिये थे, उन सभों को तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हारे बीच में से सर्वनाश कर डाला। (अब, आप उन नामधारी कलीसियाओं में से अलग किये हुए लोग हैं। देखा, समझे?)परन्तु तुम जो अपने परमेश्वर यहोवा से लिपटे रहे, सब के सब आज तक जीवित हो। (तुम कभी अपनी नामधारी कलीसियाओं के साथ नहीं मरे, तुम अब जीवित हो और परमेश्वर की उपस्थिति में हो। ध्यानपूर्वक सुनें; इससे ना चूकें)अब पच्चीसवाँ पद! जब वे देश में जा रहे हैं, तो अब देखिए, कि क्या होता है।यदि उस देश में रहते रहते बहुत दिन बीत जाने पर, और अपने बेटेपोते उत्पन्न होने पर…तुम बिगड़ कर…(यही है वो जो हुआ था)…किसी वस्तु के रूप में मूर्ति खोद कर बनाओ….(ऐसा ही कुछ और बनाओ)…या किसी चीज की समरूपता बनाओ….और इस रीति से अपने परमेश्वर यहोवा के प्रति बुराई करके उसे अप्रसन्न कर दो…(सुनिए!) …..तो मैं आकाश और पृथ्वी को तुम्हारे विरूद्ध साक्षी करके कहता हूँ….(समझे?) कि जिस देश..(या स्थान) के अधिकारी होने के लिए तुम यरदन पार करके जाने पर हो, उस में तुम जल्दी बिलकुल नाश हो जाओगे, और बहुत दिन रहने न पाओगे, किन्तु पूरी रीति से नष्ट हो जाओगे।94यह मूसा था, जो उसके बाद इस्राएल से बातें कर रहा था, जब वह परमेश्वर के द्वारा आग के खम्भे से प्रमाणित हो चुका था, और जाना जा चुका था, कि वह परमेश्वर का दास था, जो उन की बाहर अगुवाई करने के लिए प्रमाणित हो चुका था। और इससे पहले कि वे उस देश के अंदर जाते, इससे पहले कि वे प्रवेश करते, मूसा ने कहा, “अब जो बातें मैंने तुम से बोली हैं, मैं आकाश और पृथ्वी को तुम्हारे विरूद्ध साक्षी करता हूँ; यदि तुम इस में एक भी शब्द जोड़ो, या इस में से एक भी शब्द बाहर निकालो, तो तुम उस देश में ना रहने पाओगे जो यहोवा परमेश्वर तुम्हें देता है।” ठीक वैसे ही मैं तुम से यीशु मसीह के नाम में कहता हूँ। आप एक भी शब्द ना जोड़ें, और ना ही निकालें—-इस में अपनी विचारधारा ना घुसाएं। आप सिर्फ वही कहें जो उन टेपों में कहा गया है। आप बस बिलकुल ठीक वैसा ही करें जैसा प्रभु परमेश्वर ने करने की आज्ञा दी है। इस में कुछ भी ना जोड़ें।95जैसे उसने सर्वदा अपनी प्रतिज्ञा निभायी है, वह हमारे लिए अपनी प्रतिज्ञा निभाता है। हर एक वह वायदा जो उसने किया, उसने उसे निभाया। क्या उसने आपको बताया, कि क्या होगा, और क्या वह घटित हुआ? मैं आज चुनौती में आकाश और पृथ्वी को आपके सम्मुख लेकर आता हूँ; क्या कभी परमेश्वर ने कोई बात कही, जो उस ने पूरी ना की, और उसने बिलकुल ठीक ठीक वैसा ना किया, जैसा उसने कहा था, कि वह हमारे लिए करेगा ? क्या उस ने इसे बिलकुल ठीक वैसा ही नहीं किया है जैसा उसने कहा था, कि वह इसे करेगा? यह बिलकुल ठीक है।

अतः वह इसे करना जारी रखेगा। बस इस में कुछ न जोड़े। इस में से कुछ न निकालें। सिर्फ इसका विश्वास करें, और अपने प्रभु परमेश्वर के सम्मुख दीनतापूर्वक चलें, क्योंकि हम उस देश में जाने के बहुत नज़दीक हैं। तब आप लौटेंगे नहीं। आप इस प्रकार के जीवन में फिर से वापस नहीं लौटेंगे। आप एक अविनाशी जीव के रूप में लौटेंगे। आप तभी लौटेंगे जब पाप खत्म हो जायेगा, शैतान को बान्ध दिया जाएगा। और आप एक हजार वर्षों के लिए इस पृथ्वी पर रहेंगे, जिसे प्रभु तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें देता है। और नम्र पृथ्वी के अधिकारी होंगे। धन्य है वह, जो उसकी सारी आज्ञाओं को मानता है, ताकि उसका इस नगर में प्रवेश करने का अधिकार हो; क्योंकि टोन्हे, झूठे, वेश्यागामी, और कुत्ते वे हैं, जो उस में प्रवेश न करेंगे।“ वह तो केवल उन्हीं के लिए है, जो छुड़ाये हुए हैं। और जो उसकी आज्ञाओं पर चलते हैं।96आप कोई नई चीज न अपनायें। वे सारी जगह उड़ती फिर रही हैं, तथा और बहुत होंगी जो आयेंगी। परन्तु आप इन नई नई बातों को न अपनायें। प्रभु तुम्हारा परमेश्वर तुम पर घोषणा करके बता चुका है, कि क्या सत्य है। प्रभु तेरा परमेश्वर अपने वचन और अपने आत्मा के द्वारा प्रमाणित कर चुका है, कि क्या सत्य है। “ना तो बल से, ना शक्ति से, पर मेरी आत्मा के द्वारा।” और आत्मा….परमेश्वर उनकी खोज करता है जो उसकी आराधना आत्मा और सच्चाई से करते हैं। तेरा वचन सच्चा है। और वह पूर्ण रूपेण प्रमाणित कर चुका है, कि यीशु मसीह कल, आज और युगानुयुग एक सा है। वह सांझ के बीजों को आपको दिखा चुका है। वह आप पर इसे वचन से प्रमाणित कर चुका है। उसे इसे आप पर अपने आत्मा के द्वारा साबित किया है।97आप कभी भी कोई संस्था शुरू न करें, अथवा कभी किसी संस्था की शुरूआत करने की चेष्टा न करें। आप इस पर कुछ और निर्मित करने की चेष्टा न करें, परन्तु प्रभु अपने परमेश्वर के प्रति नम्र रहें, क्योंकि ऐसा दिखाई पड़ता है, कि शीघ्र ही फाटक प्रतिज्ञा किये देश में खुल जायेंगे। तब हम असल में गीत गाते हुए और आनन्द मनाते हुए अंदर जायेंगे, जब दुल्हा और दुल्हन सिंहासन पर अपना अपना स्थान ग्रहण करते हैं।दीनतापूर्वक जीवन व्यतीत करें; प्रेमपूर्वक जीवन व्यतीत करें। एक दूसरे से प्रेम करें। कभी भी अपने बीच में कुछ ना आने दें। अगर आप देखते हैं, कि आप के मन में किसी के खिलाफ कोई बात आ रही है, तो आप उसे तुरन्त ही निकाल बाहर करें। न करने दें…और शैतान तो आप के बीच में घुसने की पुरज़ोर कोशिश करेगा। समझे? आप ऐसा न होने दें। हो सकता है, कि चिकनी चुपड़ी बातें करने वाला कोई व्यक्ति आ जाये और आपको इससे दूर ले जाने की चेष्टा करे। आप सोचते हैं, कि वे मूसा से, जो परमेश्वर की उपस्थिति में से बाहर निकल कर आया था, बात कर सकते थे, जहाँ वह खड़ा था, और वे इसे देख सकते थे। जी नहीं, श्रीमान! जी नहीं, हम इस में से ना तो कुछ निकालते हैं, और ना ही इसमें कुछ जोड़ते हैं। इसे ठीक वैसा ही रखते हैं जैसा खुदा ने कहा था। हम कोई नामधारी कलीसिया नहीं चाहते हैं। हम कोई संस्था नहीं चाहते हैं। हम कोई द्वेष नहीं चाहते हैं; हम कोई कलह नहीं चाहते हैं। हम तो परमेश्वर चाहते हैं, और वह वचन है। अब आइये हम अपने सिरों को झुकाए।98हे परमेश्वर, मैं चारों ओर आत्मिक नेत्रों से देखता हूँ, मैं उसे देखने का यत्न करता हूँ जो घटित हो रहा है। मैं आपका वचन देखता हूँ, जिस प्रकार से इसकी पहचान हुई है, जिस प्रकार से यह प्रमाणित हुआ है, मैं उसे देखता हूँ। यहाँ पर तैंतीस वर्षों से हो रहा है जो आप ने कहा था; और यहाँ पर यह तैंतीस वर्ष बाद भी है, और आप वह कर रहे हैं जो आप ने तैंतीस वर्ष पहले यहाँ पर नदी पर कहा था। और आप ने ठीक वही किया है जो आप ने कहा था। प्रभु, हम से यह बात बहुत दूर रहे, कि हम इसे थोड़ा सा छोटा बनाने का या इसे कुछ बड़ा बनाने की चेष्टा करें। हम इसे ठीक वैसा ही रखें जैसा आप ने इसे बनाया है। हम बस दीनतापूर्वक चलें और आपका अनुकरण करें।खुदावंद, ये वे हैं, जिन्हें आप ने मुझे दिया है, कि मैं इनकी सेवा करूँ, ये उन सब के अलावा हैं जो देश भर में चारों ओर सो रहे हैं। यहाँ पर कब्रे उन बहुतेरे मुबारक संतों को थामे हुए हैं जो बाट जोह रहे हैं। परन्तु यह वैसा ही है। जैसाकि कहा गया है; कि “हम जो जीवित हैं, उन से जो सोये हुए हैं, आगे न बढ़ेंगे। तुरही फेंकी जायेगी, जो मरे हुए हैं, वे पहले जी उठेंगे; फिर हम उन के साथ ऊपर उठा लिये जायेंगे।” जब परमेश्वर की महिमा पृथ्वी पर होगी, वह कलीसिया को जगत से छिपा लेगी। जब वह जायेगी, तो यह उसे जाते हुए भी न देखेगा।99पिता परमेश्वर, इन्हें अपने हाथों में रखिए। ये आपके हैं। परमेश्वर, मैं प्रार्थना करता हूँ, कि हम सदैव ही आप के सम्मुख नम्रतापूर्वक चलें। हम नहीं जानते हैं, कब तक! हम यह जानने की अभिलाषा नहीं रखते हैं, कि कब तक; यह हमारा काम नहीं है; यह तो आप का ही काम है।

यह जानना हमारी इच्छा नहीं है, कि आप कब आयेंगे; यह तो आपकी इच्छा है, प्रभु, हमारी तो यही इच्छा है, कि हम नम्र रहें और आपके साथ चलते रहें, जब तक कि आप नहीं आ जाते हैं। हमारी यही अभिलाषा है, कि आप स्वयं अपने को हम पर हमारे मध्य में कभी कभार प्रकट करते रहें, पिता, ताकि हम देख सकें, कि हम अभी भी आपके साथ चल रहे हैं।हमारे पिछले पापों को क्षमा कीजिए। भविष्य के लिए हमारा मार्ग-दर्शन कीजिए, और हमारी शैतान के हर एक फंदे से रक्षा कीजिए। हे हमारे पिता परमेश्वर, हमारी अगुवाई और पथ-पदर्शन कीजिए। हमारे पापों को क्षमा कीजिए, और हमारी सहायता कीजिए, कि हम आपकी सन्तान रहें। हम निर्धन किस्म के लोग हैं। हमें इस जगत के समाज से, कलीसियाओं की नामधारी संस्थाओं से बाहर निकाला हुआ है। हम अंत को देखते हैं; और हम आपका आत्मिक दृष्टि के लिए, कि हम आपके वचन में अंत समय देखते हैं, धन्यवाद करते हैं। क्यों कि इन सब चीजों को तो स्वर्ग से होने वाले बड़े पत्थरवाह पर आना है। प्रभु, हमारी सहायता कीजिए, कि हम उस दिन यहाँ पर न रहें, वरन हम आपकी उपस्थिति में चले जा चुके हों; हम आपके सीने से लिपट जाने के लिए उड़ चुकें हों।100प्रभु, बीमार और अपाहिज़ों को चंगा कीजिए। प्रभु, हम प्रार्थना करते हैं, कि आप आज रात्रि हमें एक ऐसी महान सभा देंगे, कि होने पाये, कि आपकी उपस्थिति के कारण हमारे मध्य में एक भी क्षीण-दुर्बल न रहने पाये। हाने पाये कि, हमारे हृदय निरन्तर आप पर ही लगे रहें। और हम जानते हैं, प्रभु, धन-सम्पत्ति तथा दुनिया की चीजों को कोई मायने नहीं है, यह तो बस अस्थायी हैं। उन सब को अवश्य ही खत्म हो जाना है। हमारी नौकरियों को, हमारी जगहों को, हमारे दोस्तों को अवश्य ही खत्म हो जाना है; हर एक चीज को अवश्य ही खत्म हो जाना है। इससे कोई मतलब नहीं है, कि हम कितने धनवान है, हम कितने निर्धन है, हम कितने विख्यात हैं, या कितने अविख्यात हैं; इस सब को तो अवश्य ही खत्म होना है। परन्तु केवल एक ही वस्तु है जिसके चारों ओर हमारा अस्तित्व केन्द्रित है,और वह है यीशु मसीह। परमेश्वर, अतः हम उन सब चीजों को जो दूसरे अर्ज की है, एक ओर रख देते हैं और उसी से जा मिलें, और वह वचन है; वह समय का प्रमाणित वचन है। प्रभु यह प्रदान कीजिए।समय का प्रमाणित किया हुआ वचन! मूसा के दिनों का प्रमाणित वचन यीशु ही था। यशायाह, एलिय्याह, यूहन्ना, उन सभों के दिनों का प्रमाणित वचन यीशु ही था। और आज का प्रमाणित वचन यीशु ही है, जो कि कल, आज और युगानुयुग एक सा है। प्रभु, हमारी उस पर विश्वास करने, उसे देखने और उस में चलने की सहायता कीजिए। हम…हम इसे यीशु के नाम में माँगते हैं।101और जबकि हमारे सिर झुके हुए हैं, मुझे हैरत है, कि क्या कोई यहाँ पर ऐसा है जिसने सचमुच में उस महान एक को जो सम्पूर्ण प्रभावशाली है, कभी नहीं…आप इसका विश्वास करते हैं, लेकिन इस पर विश्वास करना ही काफी नहीं है। मैं विश्वास करता हूँ, कि मेरी पत्नी एक अच्छी लड़की थी। मैं उसके मातापिता को जानता था। मैं उसे वर्षों से जानता था। वह एक सीधा-साधा जीवन व्यतीत करती थी। मैं विश्वास करता था, कि वह एक भली स्त्री थी, परन्तु इससे वह मेरी पत्नी तो नहीं बन गई थी। वह मेरी तब तक न बनी जब तक कि उसने—जब तक कि मैंने उसे अपना ना लिया; जब तक उसने मुझे अपना ना लिया। अब, यीशु आपको अपनाना चाहता है। क्या आप उसे नहीं अपनायेंगे और उसके वचन का भाग नहीं बनेंगे? अगर आप ने ऐसा नहीं किया है, तो आप अपने झुके हुए सिर और झुके हुए हदय से ऐसा करें, मैं भरोसा करता हूँ….102यहाँ पर ऑल्टर कॉल के लिए कोई जगह नहीं है। कैसे भी हो मैं उन पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं करता हूँ। मैं विश्वास करता हूँ, कि परमेश्वर आप से ठीक वहीं पर मुलाकात करता है जहाँ पर आप हैं। क्या आप अपने हाथ ऊपर उठायेंगे, और कहेंगे, “भाई ब्रन्हम, मुझे दुआ में याद रखना, मैं वह करना चाहता हूँ।” परमेश्वर आपको आशीष दे। मैं…भाई, परमेश्वर आपको आशीष दे; और भाई आपको, और आप जो चारों ओर हैं, परमेश्वर आपको आशीष दे। सभी जगह हाथ ऊपर उठे हुए हैं। “मैं वैसा होना चाहता हूँ। मैं वह होना चाहता हूँ।” परमेश्वर आपको आशीष दे।“….मैं सचमुच में वो होना चाहता हूँ। मैं…मैं इसे देखता हूँ…..” अब ठीक है, मित्र, देखिए, हो सकता है, कि कोई छोटी सी चीज हो…..अगर आप वो नहीं है, तो आप उसके अलावा किसी और चीज के ही चारों ओर केन्द्रित हैं। आप इसके अति निकट है, आप इसे देख रहे हैं। आप इसे देखते हैं। आप ने इसे वर्षों चलते-फिरते हुए देखा है। अब आप इसे परिपक्व होते हुए देख रहे हैं। अगर वही हमारे लिए सब कुछ मायने रखता है, और अन्तिम (Abslute) और कुछ नहीं रहेगा, वरन वही रहेगा; तो क्यों नहीं आप अपने सिर को उस चीज से घुमा लेते हैं जिस पर आप दृष्टि डाले हुए हैं,

और आप खुद अपने को मसीह पर केन्द्रित क्यों नहीं कर लेते हैं जो कि सारे जीवन का आधार है, और सब कुछ उसी के बाद है। क्या आप ऐसा नहीं करेंगे, जबकि हम एक साथ मिलकर प्रार्थना करते हैं।103प्रिय परमेश्वर, ये पुरूषों, स्त्रियों, लड़कों के हाथ हैं, यहाँ तक कि सेवकगणों ने भी अपने हाथ ऊपर उठाये हुए हैं। वे….वे कहना चाहते हैं, कि वे प्रभु यीशु के ठीक चारों ओर केन्द्रित हो जाना चाहते हैं, और अभी भी ऐसा दिखाई पड़ता है, कि वे ऐसा नहीं कर सकते हैं, कोई ऐसी चीज है जो उन्हें इस ओर वा उस ओर खींचती है; हो सकता है, कि यह नामधारी कलीसिया हो, हो सकता है, कि यह कोई इंसान हो; हो सकता है, कि यह कोई पाप हो; हो सकता है, कि यह कोई बात हो जिसे वे अपने दिल में छिपा रहे हैं। मैं नहीं जानता हूँ; प्रभु, पर आप जानते हैं। प्रभु, ये चाहे जो कुछ भी हो, यह होने पाये, जबकि आप और दूसरों को बुला रहे हैं….आप तो उन्हें बुला चुके हैं, वे आपके हैं। और जबकि आप उन्हें बुलाते हैं, तो यह होने पाये, कि यह उन्हें छोड़ दे…उलझाने वाले पाप को छोड़ दें, जैसाकि बाइबिल कहती है, “आओ हर एक रोकने वाले और उलझानेवाले पाप को जो बड़ी आसानी से हमारे सामने रखा है, हटा दें, ताकि हम उस दौड़ को जो हमारे सामने हैं, धैर्यपूर्वक दौड़ते चले जायें। हम किस पर दृष्टि डाल रहे हैं? क्या अपनी नौकरी पर? क्या अपनी नामधारी कलीसिया पर? क्या अपने कामकाज पर? क्या अपनी कॉन्सिलों पर? मसीह पर;जो कि उस विश्वास का, जो हमारा उस पर है, रचियेता और पूरा करनेवाला है। पिता, आप आज हमारे लिए वही करें। क्योंकि हम यह उसी के नाम से और उसी की महिमा के लिए माँगते हैं।अब, प्रभु, वे आपके हैं, आप इनके साथ जैसा उचित समझें करें। आप हमारे साथ वैसा ही करें जैसा आप को उचित लगता है; हम आपके हैं। हम इसे यीशु मसीह के नाम में माँगते हैं। आमीन!मैं उससे प्रेम करता हूँमैं उससे प्रेम करता हूँक्योंकि उसने मुझ से पहले प्रेम कियाऔर खरीद लिया मेरा उद्धारकलवरी क्रूस पर।104क्या आप रात्रिभोज के बारे में भूल गये हैं? क्या आप बिलकुल भूल गये हैं, कि आपके बच्चे बाहर कार में बिलकुल ठीक है या नहीं? क्या आप पिछली सारी बातों के बारे में भूल गये हैं और आप उसका आभास कर चुके हैं जो ठीक इस समय आप अनुभव कर रहे हैं? वह तो दिन प्रति दिन आपके सम्मुख साकारात्मक रूप में प्रकट हुआ है। समझे? यह हो, कि वह चाहे किसी का भी केन्द्र क्यों न हो….यह हो कि बाकी बातें दूर हो जायें; कैसे भी हो वे बाकी बाते नष्ट हो जायें। ओह, सिर्फ उस के ही पीछे पीछे चलते रहिए। समझे? जैसे एलीशा एलिय्याह के पीछे पीछे चला, हम ठीक वैसे ही उस के पीछे पीछे चलें। क्योंकि हमें भी किसी दिन ऊपर उठा लिया जाएगा। हम उन अग्निमय रथों को जो उसे कब्र में ऊपर उठा कर ले गये थे, देख चुके हैं। हम इस समय इसे अपने मध्य में अनुभव करते हैं। किसी दिन वह घोड़ों को झाड़ियों से खोलने जा रहा है। हम ऊपर जा रहे हैं। क्या आप उससे प्रेम नहीं करते हैं?……………………..और खरीद लिया, मेरा उद्धारकलवरी क्रूर परओह, क्या आप बस लगभग….अपनी आँखें बंद कर सकते हैं, %%और उसे ऊपर दृष्टिगोचर होते हुए नहीं देख सकते हैं ?मैं उससे प्रेम करता हूँ (उसके अलावा मैं किस से प्रेम कर सकता हूँ?)मैं उससे प्रेम करता हूँ,क्योंकि उसने मुझ से पहले प्रेम कियाऔर खरीद लिया मेरा उद्धारकलवरी क्रूस पर!105हर बार जब भी मैं घर वापस आता हूँ, तो कोई गुज़र चुका होता है। मैं कुछ महीनों के लिए चला जाऊँगा, और जब वापस आता हूँ, तो कोई जा चुका होता है। जब भी मैं वापस आता हूँ, मैं हर बार उदास हो जाता हैं। जिस लड़के के साथ मैं स्कूल गया था, उस ने किसी दूसरे दिन सड़के पर नीचे आते हुए कहा था, “हैलो, बिली!”मैं उस पर दृष्टि; वह एक सुंदर छोटा लड़का हुआ करता था, जिसके चमकदार बाल पीछे को कंधी किये हुए होते थे। और अब वे हिम के सामान श्वेत हैं; वह बिलकुल सीधा हुआ करता था, और अब उसकी तोन्द इस प्रकार बाहर को निकली हुई है। मैंने कहा, “हैलो, जिम!” मैंने उस पर दृष्टि डाली, मैंने अपने दिल में महसूस किया; मैंने सोचा, “परमेश्वर, वह लड़का, और मैं; वह पुरूष और मैं एक सी ही उम्र के हैं। तब मैं जानता हूँ, मेरे दिन बहुत थोड़े हैं।” मैं जानता हूँ, यह बहुत ज्यादा समय तक नहीं रह सकता है।मैं चारों ओर देखता हूँ, मैं सोचता हूँ, “प्रभु, मैं क्या कर सकता हूँ? मेरी सहायता कीजिए। मैं आप से आगे नहीं जाना चाहता हूँ। मैं तो बस ठीक पीछे…आप के ठीक पीछे ही रहना चाहता हूँ। आप ही मेरा मार्ग दर्शन करें।” और मैं देखता हूँ, और सोचता हूँ, “छप्पन साल; ओह, ओह, मेरे खुदा; मैं बहुत ज्यादा नहीं रह सकता हूँ।”106और मैं नीचे दृष्टि डालता हूँ, मैं अपने परम मित्र भाई बिल डाउच को वहाँ बैठे हुए देखता हूँ, जो कि 72 या 73 साल के हैं।मैं चारों ओर दृष्टि डालता हूँ; मैं इन छोटे छोटे बच्चों को देखता हूँ, जो सोचते हैं, “ठीक है, मै तब तक इन्तज़ार करूंगा, जब तक कि मैं भाई ब्रन्हम के जैसा बूढ़ा नहीं हो जाता हूँ, मैं वह सोचूंगा….” प्रिय, हो सकता है, कि तुम इसे कभी न देखो; मुझे बहुत ज्यादा शक है, कि तुम इसे देखो। समझे? परन्तु ज़रा सोचिए, यदि भाई बिल डाउच इस दिन में होकर जीवित रहते हैं, तो वे एक सौ सोलह या एक सौ पन्द्रह वर्ष के लोगों के जैसे होंगे;

वे हर एक घन्टे मर…रहे हैं। अतः इससे क्या फर्क पड़ता है, कि आपकी क्या उम्र है? आप उस घड़ी के बारे में क्या कर रहे हैं जिस में आप रह रहे हैं? आप इस समय यीशु के लिए क्या कर रहे हैं? समझे? ओह, मैं तो उसे देखना चाहता हूँ। मैं तो उस घड़ी को देखना चाहता हूँ, और इन सारे बूढ़े शरीरों को रूपान्तरित होते हुए देखना चाहता हूँ; उन्हें पलक झपकते ही बदल जाते हुए देखना चाहता हूँ। यदि ऐसा नहीं है, तो हम सबसे ज्यादा मूर्ख लोग हैं; फिर तो हम खाये पीये और मौज-मस्ती करें, क्योंकि कल तो तुम्हें मर जाना ही है। समझे? फिर तो आप जानवर के जैसे ही हैं, आप मरते हैं और खाक में मिल जाते हैं, और बस यही सब होता है। परन्तु एक मरनहार-एक अमरनहार प्राण आपके अंदर रह रहा है, भाई। हमने स्वर्ग से शब्द सुना है। हमने इसे प्रमाणित होते हुए देखा है। हम जानते हैं, कि वह है, और उनको प्रतिफल देता है जो यत्न से उसकी खोज करते हैं।अब, मसीह की देह के सदस्यों, जबकि हम इसे दोबारा गाते हैं, मैं चाहता हूँ, आप अपनी अपनी सीट पर बैठ जायें। आप एक दूसरे से हाथ मिलायें, जबकि हम इसे फिर से गाते हैं।मैं उससे प्रेम करता हूँ…( आप अपने भाई, बहनका अभिवादन करें) मैं उससे प्रेम करता हूँ।क्योंकि उसने मुझ से पहले प्रेम कियाऔर खरीद लिया मेरा उद्धार,कलवरी क्रूस पर!107क्या आप उससे प्रेम करते हैं, आप कहें,“आमीन”, (मंड़ली कहती है, आमीन“-सम्पा.) क्या आप उसके वचनों से प्रेम करते हैं, कहें, आमीन! (मंड़ली उत्तर देती है, ”आमीन-सम्पा.) क्या आप उसकी देह से प्रेम करते हैं,? कहें, आमीन“ (मंड़ली उत्तर देती है, ”आमीन“-सम्पा.) तब तो एक दूसरे से प्रेम करें। आमीन! यह सच है, ”जब तुम एक दूसरे से प्रेम करोगे, तो इससे सब लोग जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।“अब, मैं इन रूमालों पर हाथ रखता हूँ। अगर आपको इन्हें रात से पहले ही लेना है…108मैं भाई रिचर्ड ब्लेर को बुलाने जा रहा हूँ; परमेश्वर ने उनकी प्रार्थना का उत्तर दिया; वो तथा भाई किसी और दिन यहाँ पर पीछे उस छोटे बच्चे का जीवन वापस लाने के लिए प्रार्थना कर रहे थे, जो आज हमारे मध्य में बैठा हुआ है; उनका जो परमेश्वर पर विश्वास था, वह उसके कारण ही जी रहा है….और अब मैं बस कुछ ही मिनटों में उन्हें बुलाने जा रहा हूँ, कि वे हमें प्रार्थना के साथ विदा करें; ताकि हम आज रात फिर से वापस आ सकें। उस घड़ी के मुताबिक १२ बज कर ५ मिनट हो चुके हैं। और मैं आप से चाहता हूँ, आज रात्रि आप वापस आयें, अगर आप आ सकते हैं, अगर आप यहीं आस-पास हैं। अगर आप घर जाते हैं, तो होने पाये, परमेश्वर आपको सड़क पर गति दे और आपकी सहायता करे, और आपकी रक्षा करे। अगर आप रुक सकते हैं और रुकना चाहते है, तो आप का रुकने के लिए स्वागत है। अब परमेश्वर आपके साथ हो।जब तक हम मिलें, जब तक हम मिलें ।जब तक…(आइये हम अपने हाथों को…)यीशु के चरणों पर मिलें जब तक हम मिलें,जब तक हम मिलें जब तक हम फिर मिलें ।परमेश्वर आपके साथ हो।(भाई ब्रन्हम ठीक इसी गीत को गुनगुनाना शुरू करते हैं) (परमेश्वर के भवन को छोड़कर जाने का यही तरीका है; प्रार्थना के साथ नम्रता के साथ; हम विश्वास कर रहे हैं; हम आज रात्रि फिर से मिलेंगे। अगर हम ना भी मिलें, परमेश्वर आपके साथ हो)जब तक हम फिर मिलें आइये हम अपने सिरों को झुकाएं। भाई ब्लेर!

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